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बिहार में निर्माणाधीन पुल गिरने पर नीतीश कुमार ने मानी गलती

पटना (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बिहार में खगड़िया के अगुवानी और सुल्तानगंज के बीच गंगा नदी पर बन रहे फोरलेन महासेतु के तीन पिलर और चार सुपर स्ट्रक्चर के नदी में समा जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी विभाग की गलती मानी है। उन्होंने सोमवार को साफ तौर पर कहा कि ठीक से नहीं बन रहा था तभी तो गिर जा रहा है। पटना में पत्रकारों से चर्चा के दौरान पुल गिरने से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि भागलपुर में जो हुआ है, कुछ समय पहले भी हुआ था। उसी समय हमने कहा कि ऐसा क्यों हुआ।

उन्होंने कहा कि रविवार को फिर से पुल गिरा है। उन्होंने इसे तकलीफदेह बताते हुए कहा कि पुल गिरने की खबर के बाद तुरंत हमने विभाग के सभी अधिकारियों से कहा कि जाकर देख लीजिए और तुरंत एक्शन लीजिए। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा, यह कोई तरीका नहीं है अब तक तो इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए था। अगर समय पर हो गया रहता तो क्यों ऐसी खबर आती। हमको बहुत तकलीफ हुई है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, पुल ठीक से नहीं बना रहा है तभी गिर जा रहा है। अगर ठीक से बनाया होता तो कैसे गिर जाता। अगर समय पर तैयार हो जाता तो लोगों को कितनी खुशी होती। रविवार की शाम बिहार में खगड़िया के अगुवानी और सुल्तानगंज के बीच गंगा नदी पर बन रहे फोरलेन महासेतु के तीन पिलर और चार सुपर स्ट्रक्च र टूटकर नदी में समा गए।

 

 

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पीएम मोदी पहुंचे बालासोर, ट्रेन हादसे का लिया जायजा

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रेन हादसे का जायजा लेने ओडिशा के बालासोर पहुंच गए हैं। पीएम घटना स्थल पर गए, जहां तीन ट्रेनें आपस में टकराई थी। वह मौके पर मौजूद अधिकारियों ने घटना को लेकर जानकारी ली।

इसके बाद पीएम अस्पताल जाएंगे, वहां घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जानेंगे। 

 पीएम मोदी ने हादसे को लेकर शुक्रवार को ट्वीट भी किया था। इसमें उन्होंने लिखा था- ओडिशा में ट्रेन हादसे की घटना से व्यथित हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना है।

बता दें कि ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों के आपस में टकराने से भीषण हादसा हुआ है जिसमें अभी तक 280 लोगों की मौत हो गई है जबकि 900 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।  हादसे के बाद चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया है। रेल मंत्री ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। हादसे की वजह से कई ट्रेनें आज कैंसिल हो गई हैं जबकि कई के समय में बदलाव किया गया है। 

 

 

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मनीष सिसोदिया शनिवार को अपनी बीमार पत्नी से आवास पर मिले

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शनिवार को अपनी बीमार पत्नी से उनके आवास पर मिले। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उन्हें अपनी पत्नी से मिलने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सिसोदिया अपनी पत्नी से सुबह 10 से शाम 5 बजे तक मिल सकते हैं। लेकिन इस दौरान वह मीडिया या अपने परिवार के बाहर किसी से नहीं मिल सकते।

साथ ही कोर्ट ने उन्हें सेल फोन और इंटरनेट से दूर रहने की भी हिदायत दी है। सिसोदिया ने सीबीआई और ईडी दोनों मामलों में अपने वकील के माध्यम से जमानत के लिए अपनी पत्नी की चिकित्सा स्थिति का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत याचिका दायर की थी। दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में आप नेता के खिलाफ जांच एजेंसियों ने चार्जशीट दायर की है। इससे पहले कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

 

 

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ओडिशा में तीन ट्रेन टकराईं, 238 की मौत

भुवनेश्वर (छत्तीसगढ़ दर्पण)ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार शाम ट्रेन हादसे में 238 लोगों की मौत हो गई। एक्सीडेंट में 900 से ज्यादा यात्री घायल हुए। रेलवे के मुताबिक 650 लोगों को अस्पताल में एडमिट किया गया है। हादसा बालासोर के बहानगा बाजार स्टेशन के पास शाम करीब 7 बजे हुआ।

रेलवे के मुताबिक कोलकाता-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस और यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस बहानगा स्टेशन के पास डिरेल हो गई थीं। इसके बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन पास के ट्रैक पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई।

ख़बरों के मुताबिक रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पहले यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस डिरेल हुई थी। इसके कुछ डिब्बे दूसरी पटरी पर पलटे और दूसरी तरफ से आ रही शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस से टकरा गए।

इसके बाद कोरोमंडल ट्रेन की भी कुछ बाोगियां पटरी से उतर गईं। ये बोगियां दूसरे ट्रैक पर मालगाड़ी से भिड़ गईं। कुछ बोगियां मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गईं।

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गृह मंत्री की अपील के बाद लोगों ने पुलिस को सौंपे 140 हथियार

इंफाल  (छत्तीसगढ़ दर्पण) मणिपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के चार दिनों के दौरे का असर देखने को मिला है। शाह ने मणिपुर में कई बैठकें करने के बाद शांति का मार्ग निकालने की पुरजोर कोशिश की थी। इसी के मद्देनजर उन्होंने लोगों से भी शांति बनाने की अपील की थी, जिसका परिणाम अब मिलने लगा है।

दरअसल, शाह की अपील के बाद मणिपुर में अलग-अलग जगहों पर 140 हथियार पुलिस को सौंपे गए हैं। सरेंडर किए गए 140 हथियारों में एसएलआर 29, कार्बाइन, एके 47, इंसास राइफल, इंसास एलएमजी, प्वाइंट 303 राइफल, 9 एमएम पिस्टल, प्वाइंट 32 पिस्टल, एम16 राइफल, स्मोक गन और आंसू गैस, स्थानीय निर्मित पिस्तौल, स्टेन गन, राइफल, ग्रेनेड लांचर और जेवीपी शामिल हैं।

दरअसल गृह मंत्री ने राज्य के चार दिवसीय दौरे के अंतिम दिन इंफाल में एक संवाददाता सम्मेलन में हिंसा प्रभावित मणिपुर में सभी वर्गों से शांति बनाए रखने और सद्भाव को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मसमर्पण करने की अपील की थी। शाह ने इसके साथ चेतावनी दी थी कि पुलिस द्वारा तलाशी अभियान के दौरान अगर किसी के पास हथियार मिलते हैं तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शाह ने इसी के साथ मणिपुर के लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की भी अपील की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की ओर से गृह मंत्री ने मणिपुर हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की थी।

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जब-जब सेनाएं कमजोर हुई हैं, तब तब आक्रांताओं ने भारत को नुकसान पहुंचाया : रक्षा मंत्री

नई दिल्ली  (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत का इतिहास इस बात का उदाहरण है कि जब-जब भारत में सेनाएं कमजोर हुई हैं, तब तब आक्रांताओं ने भारत को नुकसान पहुंचाया है। सेना किसी भी राष्ट्र की सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा नहीं करती, बल्कि वह उस देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और एक प्रकार से उस देश की पूरी सभ्यता की सुरक्षा करती है। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक इकनोमिक कॉन्क्लेव के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इसलिए एक सरकार के रूप में हमने यह सुनिश्चित किया है, कि हमारी सेनाएं सशक्त हों, उनके पास अत्याधुनिक हथियार हों और उनमें यूथफुलनेस बनी रहे। हमने हर वो कदम उठाया है जिससे भारत की सैन्य ताकत बढ़े और हम वापस भारत को एक सुपर पावर बना पाएं।

रक्षा मंत्री ने स्पाइडर मैन फिल्म के एक डायलॉग का जिक्र करते हुए कहा कि 'ग्रेट पावर कम्स विद ग्रेट रिस्पांसिबिलिटी'। उन्होंने कहा कि जब हम एक सुपर पावर के रूप में दुनिया के सामने आएंगे, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लोकतंत्र, धार्मिक स्वतन्त्रता, मानव की गरिमा और वैश्विक शांति जैसे जो वैश्विक मूल्य हैं, वो पूरी दुनिया में कायम हो सके। हां, हमें यह भी ध्यान में रखना होगा, कि हम अपने विचार किसी पर न थोपें।

रक्षा मंत्री ने बताया कि हम पहली ऐसी सरकार हैं, जिसने हथियारों के आयात के लिए खुद पर ही प्रतिबंध लगाया है। हमने सेनाओं की ओर से 411 आइटम की, एवं डिफेंस पीएसयू की 4,666 आइटम की सकारात्मक स्वदेशी लिस्ट जारी की है। इसमें शामिल लाइन रिप्लेसमेंट यूनिट, हथियार, गोले बारूद, मिसाइल और अन्य रक्षा साजो सामान शामिल हैं, जिनका निर्माण अब केवल और केवल हमारे ही देश में होगा।

आज हमारा स्वदेशी रक्षा उत्पाद का आंकड़ा भी 1 लाख करोड़ रूपए पार कर चुका है। रक्षा मंत्री ने कहा, अगर मैं निर्यात की बात करू, तो आज से 7-8 साल पहले रक्षा उपकरणों का निर्यात जहां एक हजार करोड़ रुपए भी नहीं हुआ करता था, वह आज लगभग 16 हजार करोड़ रुपए हो गया है। हमने मेक इन इंडिया और डिफेंस कॉरिडोर जैसी नई शुरूआत के माध्यम यह सुनिश्चित किया, कि हम भारतीय सेनाओं के इस्तेमाल के लिए अत्याधुनिक हथियार भारत में ही निर्मित करें, और यदि संभव हो तो हम उसे निर्यात भी करें।

 

 

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कुछ ताकतें भारत के गौरव को कम कर रही हैं : भागवत

 नागपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उनका स्पष्ट संदर्भ देते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना की। भागवत ने कहा, इस तरह की असभ्य टिप्पणियों को आम लोग करीब से देख रहे हैं। राहुल गांधी अभी अमेरिका में हैं, उन्होंने कैलिफोर्निया में अपने भाषण के दौरान नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की है।

उन्होंने भारत में लोकतंत्र की हालत पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में पूरा विपक्ष संघर्ष कर रहा है। सरकार मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को केंद्रीय प्रवर्तन एजेंसियों के जरिए दबाने की कोशिश कर रही है। भागवत ने कहा कि ऐसी ताकतें भारत की छवि को खराब करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, हमें ऐसा मौका किसी को नहीं देना चाहिए।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इस तरह का काम एक व्यक्ति के अहंकार का परिणाम है। भागवत यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष के अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (ओटीसी) के समापन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने किसी दल या व्यक्ति का नाम लिए बगैर कहा कि वे आपस में लड़ने में इतने व्यस्त हैं कि वास्तव में देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

जी20 शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता की प्रशंसा करते हुए भागवत ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रवाद पर कोई समझौता नहीं हो सकता और उन्होंने भावनात्मक अखंडता का आह्वान किया। भागवत ने कहा, जिस देश के लोगों ने संतुलन और राष्ट्रवाद की भावना खो दी है, जो कयामत से मिला है।

उन्होंने कहा कि इस्लाम भारत में उन आक्रमणकारियों द्वारा लाया गया, जिन्होंने कुछ समय के लिए शासन किया और छोड़ दिया, लेकिन जो लोग इस विश्वास का पालन करते हैं, उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि सभी भारतीयों के पूर्वज एक ही हैं।

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प्रधानमंत्री 7 अगस्त को आएंगे भिलाई, आईआईटी का करेंगे लोकार्पण

दिल्ली/भिलाई  (छत्तीसगढ़ दर्पण)। आईआईटी भिलाई का लोकार्पण करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 अगस्त को भिलाई आएंगे। पीएमओ की ओर आईआईटी को इस संबंध में सूचना दी गई है।


हालांकि पीएमओ की ओर से अभी कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। करीब एक सप्ताह बाद इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी सीधे हवाई मार्ग से कुटेलाभाठा भिलाई आईआईटी कैम्पस में पहुंचकर आईआईटी का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम करीब दो घंटे का रह सकता है।

इस दौरान वे स्टुडेंट्स भी मिल सकता हैं। हालांकि इससे पहले मई के अंतिम सप्ताह में प्रधानमंत्री के आने की योजना बनाई गई थी। लेकिन पानी और भवन निर्माण कार्य पूरा नहीं होने की वजह से लोकार्पण की तारीख बढ़ा दी गई है।

 

 

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कुटुम्ब न्यायालय का फैसला, स्वेच्छा से अलग रहने वाली महिला भरण-पोषण की हकदार नहीं

जबलपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश विजय सिंह कावछा के न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि स्वेच्छा व परस्पर सहमति से पति से लग रहने वाली महिला भरण-पोषण राशि की हकदार नहीं है।


लिहाजा, उसका आवेदन निरस्त किया जाता है। युवक की ओर से अधिवक्ता जीएस ठाकुर व अरुण कुमार भगत ने पक्ष रखा।

अधिवक्ता जीएस ठाकुर व अरुण कुमार भगत ने दलील दी कि भरण-पोषण की मांग करने वाली महिला छह जून, 2017 को निष्पादित सहमति पत्र के आधार पर अपने पति डेनियल से अलग रह रही है।

साफ है कि उसने स्वेच्छा से पृथक रहने का रास्ता अपनाया है। कमल सिंह विरुद्ध सुनीता के न्यायदृष्टांत के अनुसार पति से सहमति पत्र के आधार पर अलग रहने वाली महिला भरण-पोषण की राशि लेने की अधिकारी नहीं होती है।

लिहाजा, प्रस्तुत आवेदन निरस्त किए जाने योग्य है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि आवेदिका से तलाक का मामला अदालत में विचाराधीन है। आवेदिका पति पर संदेह करती आई है।

इस वजह से दोनों का वैवाहिक जीवन पटरी से उतर गया। दोनों साथ रहने की हालत में नहीं थे। इसीलिए अलग रहना मंजूर किया। ऐसे मामले में भरण-पोषण की मांग बेमानी है। अदालत ने तर्क से सहमत होकर आवेदन निरस्त कर दिया।

 

 

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भारत के खिलाफ नफरत का बाजार फैलाना राहुल गांधी की प्राथमिकता : रविशंकर प्रसाद

नई दिल्ली  (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर राजनीतिक निशाना साधते हुए भाजपा ने कहा है कि राहुल गांधी देश मे संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं और विदेश जाकर भारत की छवि खराब करते हैं।

भाजपा राष्ट्रीय मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी द्वारा भारत के जीडीपी अनुमान को लेकर दिए गए पिछले बयान की आलोचना करते हुए कहा कि आज भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया का ब्राइट स्पॉट बनी हुई है, दुनिया के बड़े देशों के मुकाबले भारत में मुद्रास्फीति दर भी कम है लेकिन राहुल गांधी ने भारत की अर्थव्यवस्था और जीडीपी को लेकर क्या कहा था।

प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी विदेश में घूम रहे हैं, कहते हैं कि नफरत के बाजार में मोहब्बत का पैगाम लेकर आए हैं, लेकिन वो भारत की विकास यात्रा को लेकर दुनिया में नफरत का बाजार और अविश्वास का बाजार फैला रहे हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का मोहब्बत का पैगाम एक बहाना है, नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत में हो रहे विकास के खिलाफ दुनिया में नफरत का बाजार फैलाना राहुल गांधी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जीडीपी के आंकड़ों ने राहुल के नफरत के बाजार के झूठ को रिजेक्ट कर दिया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या राहुल गांधी की बात देश के अंदर कोई नहीं सुनता है जो उन्हें विदेश में जाकर भारत की आलोचना करनी पड़ती है।

उन्होंने मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल के दौरान भारत की विकास गाथा और अर्थव्यवस्था को लेकर कई उपलब्धियों का हवाला देते हुए और यूपीए सरकार के कार्यकाल से इसकी तुलना करते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस की भी आलोचना की। उन्होंने राहुल गांधी को भारत के विकास से जुड़े रिपोटरें को भी खुले मन से पढ़ने की हिदायत दी।

प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके प्रधानमंत्री होने की सच्चाई को राहुल गांधी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए नफरत के कारण वो इस तरह की बातें बोलते रहते हैं।

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गुणवत्तायुक्त पौष्टिक भोजन बीमारियों को दूर रखने के लिए आवश्यक: मांडविया

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने हेतु नागरिकों का स्वस्थ होना आवश्यक है और इसके लिए गुणवत्तायुक्त पौष्टिक भोजन अनिवार्य है।

श्री मांडविया ने बुधवार देर शाम उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अत्याधुनिक राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत को अमृत काल में एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नागरिकों का स्वस्थ होना आवश्यक है। स्वस्थ नागरिक स्वस्थ राष्ट्र बनाते हैं, जो समृद्ध राष्ट्र की ओर ले जाते हैं। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री (डॉ.) वीके सिंह, राज्य मंत्री भी उपस्थित थे।

श्री मांडविया ने कहा कि भारत की पारंपरिक भोजन की आदतों और जीवन शैली को 'हमारी रसोई हमारा अस्पताल' के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, अच्छी गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन बीमारियों को दूर रखने में काफी मदद कर सकता है।

देश में खाद्य पदार्थों से उत्पन्न चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई ने राज्य प्राधिकरणों के साथ टीमों का गठन किया है, जो इस तरह की घटनाओं पर नकेल कसेगी। उन्होंने कहा, देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश भर में बड़े पैमाने पर परीक्षण किए जाएंगे और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

श्री मांडविया ने एफएसएसएआई की दो पुस्तकों - मिलेट्स (श्री अन्न) रेसिपी- मेस और कैंटीन के लिए एक स्वस्थ मेनू और स्वस्थ आंत, स्वस्थ आप - संभावित प्रोबायोटिक लाभों के साथ पारंपरिक व्यंजन का भी विमोचन किया।

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पंजाब के मुख्यमंत्री ने केंद्र की जेड प्लस सुरक्षा लेने से किया इनकार

चंडीगढ़ (छत्तीसगढ़ दर्पण)पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र द्वारा उन्हें दी जा रही जेड प्लस सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें राज्य पुलिस पर भरोसा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री कार्यालय ने पंजाब और दिल्ली के लिए सुरक्षा लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि इन दोनों जगहों पर पंजाब पुलिस की विशेष टीम उनकी सुरक्षा कर रही है।

एक अधिकारी ने कहा, अगर मुख्यमंत्री को पंजाब और दिल्ली में भी एक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी द्वारा संरक्षित किया जाता है, तो इससे यह संदेश जाएगा कि उन्हें पंजाब पुलिस पर भरोसा नहीं है। मुख्यमंत्री यह संदेश नहीं देना चाहते कि उन्हें पंजाब पुलिस पर भरोसा नहीं है। जेड प्लस सुरक्षा नहीं लेने का फैसला केंद्र द्वारा मान को व्यापक सुरक्षा मुहैया कराने की योजना की घोषणा के कुछ दिन बाद आया है।

देश और विदेश में संभावित खतरों को देखते हुए मुख्यमंत्री को जेड प्लस सुरक्षा की पेशकश की गई थी। उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का वीआईपी सुरक्षा दस्ता मुहैया कराया जाना था।

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अमेरिका में बोले राहुल, भगवान को भी भ्रमित कर सकते हैं मोदी

सैन फ्रांसिस्को (छत्तीसगढ़ दर्पण) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वह भगवान को भी यह बता सकते हैं कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है। अमेरिका की छह दिन की यात्रा पर आए राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत करते हुए कहा, मुझे लगता है कि अगर आप मोदी जी को भगवान के साथ बिठाते हैं, तो वह भगवान को समझाना शुरू कर देंगे कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है। और ईश्वर भ्रमित हो जाएगा कि मैंने क्या बनाया है।

पूर्व वायनाड लोकसभा सांसद ने आगे कहा कि भारत ऐसे लोगों के समूह द्वारा चलाया जा रहा है जो अति आत्मविश्वासी हैं और उन्हें यह बीमारी है कि वे सब कुछ जानते हैं। पीएम मोदी पर तंज कसते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत में कुछ समूहों को इस भ्रम की बीमारी है कि वे सब कुछ जानते हैं।

उन्होंने कहा, भारत में हम विभिन्न भाषाओं, विभिन्न धर्मों के लोगों के साथ बड़े हुए हैं। और इसी पर हमला किया जा रहा है। (महात्मा) गांधी जी और गुरु नानक जी जैसे लोगों के भारत में परंपरा रही है कि आपको यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि हमें सब पता है। यह एक 'बीमारी' है - भारत के कुछ समूह सोचते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि लोगों के इस समूह का मानना है कि वे वैज्ञानिकों को विज्ञान, इतिहासकारों को इतिहास और सेना को युद्धनीति के बारे में समझा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके मूल में अज्ञानता है और लोगों का यह समूह वास्तव में कुछ भी नहीं समझता है।

उन्होंने अपनी 4,000 किलोमीटर की भारत जोड़ो यात्रा के बारे में भी बात की, जो पिछले साल 7 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुई और 30 जनवरी को श्रीनगर में समाप्त हुई, जहां उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

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हर विदेश यात्रा में भारत का अपमान करना राहुल गांधी की आदत : अनुराग ठाकुर

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण) केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने अमेरिका में दिए गए राहुल गांधी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हर विदेश यात्रा में भारत का अपमान करना राहुल गांधी की आदत बन चुकी है और यह प्रायोजित यात्रा भी उसी ओर बढ़ रही है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान करना चाहते हैं परंतु देश का अपमान करने से भी पीछे नहीं हटते।

राहुल पर हमला जारी रखते हुए ठाकुर ने कहा कि इनके समय में (यूपीए सरकार के दौरान) भारत दुनिया की लड़खड़ाती चरमराती अर्थव्यवस्थाओं में आता था, लेकिन आज पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। इनके समय में हिंदुस्तान की परंपराओं का गला घोंटा जाता था और यह हर बात के लिए पश्चिमी संस्कृति की ओर देखते थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय संस्कृति, सभ्यता और गौरवपूर्ण इतिहास के पुनर्जागरण का कार्य किया है। कांग्रेस की मानसिकता गुलामी की मानसिकता है और ये हमेशा से भारत और भारतीयता को बदनाम करते आए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के पहले के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर आप उनके पूर्व के बयानों को देखेंगे तो राहुल गांधी भारत को देश ही नहीं मानते बल्कि राज्यों का संघ मानते हैं। वे लगातार भारत के बढ़ते कदमों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं। राहुल गांधी बताएं कि इस प्रायोजित कार्यक्रम के द्वारा वह क्या करना चाहते हैं? क्या विदेश जाकर देश के ऊपर कीचड़ उछालना ही उनका एकमात्र काम बच गया है?

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पुंछ में एलओसी पर घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम, तीन आतंकी पकड़े गए

जम्मू  (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बुधवार को सतर्क सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। साथ ही सुरक्षा बलों ने तीन आतंकवादियों को पकड़ा है।

लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने एक बयान में कहा, जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ भारतीय सेना के एक संयुक्त अभियान में, संभावित रूप से 3-4 आतंकवादियों को 30/31 मई 2023 की रात को सीमा पार करने का प्रयास करते हुए पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर रोक दिया गया। वे सभी खराब मौसम और भारी बारिश का फायदा उठा कर भारतीय सीमा में प्रवेश करने वाले थे।

बुधवार को  लगभग 1.30 बजे भारतीय सेना पर गोलीबारी की गई और जवाबी कार्रवाई में कुछ आतंकवादी मारे गए। उन्होंने कहा, इलाके की घेराबंदी कर ली गई है और तलाशी अभियान जारी है। खून के निशान मिले हैं। एक आईईडी और नार्को सहित कुछ हथियारों के साथ तीन आतंकवादियों को पकड़ा गया है। गोलीबारी में भारतीय सेना का एक जवान घायल हो गया और उसे अस्पताल पहुंचाया गया। सेना ने कहा कि तलाशी अभियान जारी है।

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हर-हर गंगे, नमामि गंगे...मोदी ने इस तरह बदल दी जीवनदायिनी माँ गंगा की दशा

(छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय संस्कृति में गंगा को मां का दर्जा दिया गया है। एक ऐसी मां, जो अपने बच्चों का भरपूर ख्याल रखती है। लेकिन, अगर मां ही स्वस्थ नहीं होगी, तो वह अपने बच्चों का ध्यान कैसे रख पाएगी। जीवनदायिनी मां गंगा के बिगड़ते स्वास्थ्य में, सबसे ज्यादा उसकी संतानों यानि हम इंसानों का ही सबसे बड़ा हाथ रहा है। हम अपने लालच और लापरवाही के चलते लगातार उसकी उपेक्षा करते गए और उसकी हालत बिगड़ती गई।


लेकिन, 2014 में केंद्र में एक नई और सबसे मजबूत सरकार का गठन, सबको वर देने वाली मां गंगा के लिए स्वयं जैसे काशीपति भगवान शिव के वरदान की तरह रहा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से चुने जाने के तुरंत बाद, वाराणसी जाकर गंगा को प्रणाम करते हुए कहा, ‘मां गंगा की सेवा करना मेरी नियति है…’ और मां गंगा को उनका खोया गौरव एवं मूल स्वरूप वापस लौटाने का संकल्प लिया।

इसी प्रतिबद्धता को प्रधानमंत्री ने कुछ समय बाद फिर दोहराया। 2014 में, न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने उन्हें गंगा नदी के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताते हुए कहा था कि देश की 40% आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। अगर हम इसे साफ करने में सक्षम हो गए तो यह इस आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी। अतः गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा भी है।

प्रधानमंत्री जी का यह संकल्प 2014 में ही साकार होना शुरू हो गया, ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण कार्यक्रम के रूप में। गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य के साथ आरंभ होने वाले इस कार्यक्रम के लिए अगले पांच सालों के लिए निर्धारित बजट को चार गुना बढ़ाकर बीस हजार करोड़ रुपये कर दिया गया, ताकि इसमें किसी प्रकार की रुकावट न आए। सौ प्रतिशत केंद्रीय भागीदारी वाली इस कार्ययोजना को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने भी अपनी मंजूरी दे दी।

‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम
जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में अनुमोदित ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग तथा जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित है। इसका क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और इसके राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूहों द्वारा किया जाता है। एनएमसीजी माननीय प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय गंगा परिषद की कार्यान्वयन शाखा के रूप में कार्य करता है, जिसका गठन गंगा नदी के कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन के उद्देश्य से किया गया था। इसके प्रमुख लक्ष्यों में मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को पूर्व अवस्था में लाना और सीवेज के प्रवाह की जांच के लिये रिवरफ्रंट के निकास बिंदुओं पर प्रदूषण को रोकने हेतु तत्काल अल्पकालिक कदम उठाना, सतही प्रवाह और भूजल को बढ़ाना व बनाए रखना, प्राकृतिक मौसम परिवर्तन में बदलाव के बिना जल प्रवाह की निरंतरता बनाए रखना, क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पतियों को पुनर्जीवन और उनका रखरखाव, गंगा नदी बेसिन की जलीय जैव विविधता के साथ-साथ तटवर्ती जैव विविधता का संरक्षण व उन्हें पुनर्जीवित करना और इस सब को हासिल करने के लिए नदी के संरक्षण, कायाकल्प और प्रबंधन की प्रक्रिया में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल हैं। इस दिशा में गंगा की सफाई, अपशिष्ट उपचार संयंत्रों की स्थापना तथा नदी की जैविक विविधता के संरक्षण के लिये वर्ष 2014 में लिए स्वच्छ गंगा कोष का गठन किया गया था।

समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण
भौगोलिक दृष्टि से बहु-क्षेत्रीय और स्वभाव में बहु-आयामी गंगा संरक्षण की चुनौती से निपटने में बहुत से लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि कार्ययोजना की तैयारी एवं इस पर अमल में सभी की सहभागिता हो और विभिन्न मंत्रालयों के बीच और केंद्र और राज्य में अच्छा समन्वय हो, ताकि हर स्तर पर निगरानी तंत्र को बेहतर बनाया जा सके। इसके लिए देश में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये गए हैं, जिनमें मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय, नौवहन मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, युवा मामले मंत्रालय और खेल, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय व कृषि मंत्रालय आदि शामिल हैं।

परस्पर समन्वय और सामंजस्य के इसी विचार को सार्थक करते हुए भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों में पर्यटन सर्किट के विकास के लिये एक विस्तृत और दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है, तो कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय गंगा के तटवर्ती इलाकों में ऑर्गेनिक फार्मिंग और नेचुरल फार्मिंग कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में प्रयास कर रहा है और जल उपयोग दक्षता में सुधार के साथ पर्यावरण हितैषी कृषि को बढ़ावा दे रहा है। इनके अलावा आवासन एवं शहरी मामले मंत्रालय स्वच्छ भारत मिशन 2.0 और अमृत 2.0 (कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिये अटल मिशन) के अंतर्गत शहरी नालों की मैपिंग तथा गंगा शहरों में ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी प्रकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भी गंगा बेल्ट में वनीकरण गतिविधियों और 'प्रोजेक्ट डॉल्फिन' को बढ़ावा देने की एक व्यापक योजना पर काम कर रहा है।

समन्वय और सहभागिता को आगे बढ़ाते हुए इस कार्यक्रम में युवाओं और जनता को साथ लेकर गंगा नदी के संरक्षण और प्रदूषण मुक्ति की दिशा में योगदान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए परियोजना के अंतर्गत निर्धारित गतिविधियों के संपादन के लिए प्रशिक्षित और अत्यधिक प्रेरित स्थानीय युवाओं का कैडर विकसित करना, गंगा नदी के संरक्षण और इसके प्रदूषण को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों व युवाओं का सहयोग हासिल करना और इसका लाभ उठाना, परियोजना के विभिन्न स्तरों पर समर्थन, मार्गदर्शन, पारदर्शिता, निगरानी और ऑडिट के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित करना, गंगा के प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता का प्रसार करना और संबंधित व्यक्तियों को इसे कम करने के तरीकों के बारे में शिक्षित करना, स्वच्छ गंगा के लिए जनसुविधाओं की उपलब्धता, जल संचयन, संरक्षण आदि से संबंधित सरकारी कार्यक्रमों, योजनाओं और सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान करना जैसे उपायों को अपनाया जा रहा है।

चरणबद्ध क्रियान्वयन
कार्यक्रम को क्रियान्वयन की दृष्टि से तीन प्रकार की गतिविधियों में बांटा गया है। एक, ऐसी आरंभिक गतिविधियां, जिन्हें तुरंत लागू किया जा सके। दूसरी, ऐसी गतिविधियां, जिन्हें पांच सालों के भीतर लागू किया जाना है और तीसरी ऐसी गतिविधियां, जिन्हें दस साल के भीतर लागू किया जाना है।

तुरंत लागू की जा सकने वाली गतिविधियों में जहां गंगा की ऊपरी सतह की स्वच्छता, इसमें बहते हुए सॉलिड वेस्ट की समस्या को हल करना, शौचालयों का निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता, ऐसे क्षेत्रों की नालियों से बहकर लिक्विड व सॉलिड वेस्ट का प्रबंधन, शवदाह गृहों का निर्माण, आधुनिकीकरण कर अधजले शवों को गंगा में बहाये जाने से रोकना, घाटों के निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण कर मनुष्य और नदियों के बीच आत्मीय संबंधों को प्रोत्साहन देना आदि शामिल हैं।

वहीं, दूसरे प्रकार की यानि पांच सालों के भीतर लागू की जा सकने वाली गतिविधियों में, अतिरिक्त ट्रीटमेंट कैपेसिटी का निर्माण कर, नगर निकायों और औद्योगिक क्षेत्रों से गंगा में आने वाले अपशिष्ट की समस्या को हल करना जैसे लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। नमामि गंगे मिशन के तहत उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान राज्यों में 48 सीवेज प्रबंधन परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं और 98 सीवेज परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। औद्योगिक प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए कार्यक्रम में गंगा के किनारे स्थित अधिक मात्रा में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को कहा गया है कि गंदे पानी की मात्रा कम करें या इसे पूर्ण तरीके से समाप्त करें। साथ ही सभी उद्योगों को गंदे पानी के बहाव के लिए रियल टाइम ऑनलाइन निगरानी केंद्र स्थापित करने होंगे।

दीर्षकालिक उपायों के अंतर्गत इस कार्यक्रम को बेहतर और टिकाऊ बनाने के लिए प्रमुख वित्तीय सुधार किये जा रहे हैं। परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विचार किया जा रहा है, ताकि प्रयोग किये गए पानी के लिए एक बाजार बनाया जा सके और परिसंपत्तियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

बहुउद्देश्यीय कार्यक्रम
प्रथम दृष्टया, इस कार्यक्रम को देखने पर प्रतीत होता है कि यह सिर्फ गंगा नदी को प्रदूषण और अस्वच्छता से मुक्त कराकर उसे उसका पुराना वैभव और सौंदर्य लौटाने के उद्देश्य से तैयार किया गया कार्यक्रम है। लेकिन, अगर हम इसे गहराई से देखें, तो समझ में आएगा कि यह एक ऐसा दूरदर्शितापूर्ण और सुविचारित कार्यक्रम है, जिसके प्रभाव बहुत व्यापक होने वाले हैं। और यह सिर्फ एक नदी का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का कायाकल्प करने वाला कार्यक्रम साबित होगा। इसीलिए सरकार अब स्वच्छता संबंधी प्रयासों के साथ-साथ गंगा नदी के संरक्षण, पर्यटन संबंधी सुधारों और आर्थिक विकास सुनिश्चित करने पर भी खासी तवज्जो दे रही है।

‘अर्थ गंगा’ और ‘ग्राम गंगा’ इस मिशन के ऐसे ही कुछ निहित कार्यक्रम हैं। दिसंबर, 2019 में सम्पन्न राष्ट्रीय गंगा परिषद की प्रथम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थ गंगा का विचार प्रस्तुत किया था, जिसका उद्देश्य गंगा से संबंधित आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान देना और साथ ही साथ सतत् विकास का एक मॉडल विकसित करना है। अर्थ गंगा के अंतर्गत सरकार जिन छह कार्यक्षेत्रों पर काम कर रही है, उनमें नदी के दोनों और दस किमी तक रासायनिक मुक्त खेती और गोबर-धन योजना के माध्यम से खाद के रूप में गोबर को बढ़ावा देने वाली जीरो बजट प्राकृतिक खेती, कचरा और अपशिष्ट जल को उपचारित कर स्थानीय शहरी निकायों के लिये सिंचाई, उद्योगों तथा राजस्व सृजन हेतु जल का पुन: उपयोग करना, आजीविका के अवसरों का सृजन करना, नदी से जुड़े हितधारकों के बीच तालमेल के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाना, गंगा एवं उसके आसपास की पर्यटन को बढ़ावा देना व आदर्श उपयुक्त जल प्रशासन के लिये स्थानीय प्रशासन को मजबूती प्रदानकर संस्थागत विकास को बढ़ावा देना शामिल हैं।

वहीं गंगा नदी के तट पर स्थित गांवों में सम्पूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित करने के उद्देश्य को लेकर आरंभ ग्राम गंगा परियोजना के अंतर्गत, वर्ष 2017 में पांच गंगा राज्यों, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल, के लगभग साढ़े चार हजार गांवों को ‘खुले में शौच से मुक्त गांव’ घोषित किया गया और 24 ऐसे गांवों का चयन किया गया, जिन्हें एक वर्ष के भीतर गंगा ग्राम के रूप में परिवर्तित किया जाना था। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से गंगा तट पर बसे गांवों के सम्पूर्ण विकास के लिये एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए गंगा ग्राम परियोजना में सॉलिड व लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट, तालाबों व अन्य जल स्रोतों का पुनरोद्धार, जल संरक्षण परियोजनाओं, जैविक खेती, बागवानी तथा औषधीय पौधों को प्रोत्साहन आदि शामिल हैं।

इसी के माध्यम से रोजगार सृजन पर भी काफी जोर दिया जा रहा है। इस क्रम में समयबद्ध तरीके से घाट में हाट, आयुर्वेद, जड़ी-बूटियां, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना, गंगा प्रहरी और गंगा दूत जैसे स्वयंसेवी तैयार करने की योजनाओं पर अमल जारी है। इसके अलावा गंगा किनारे की सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन, पर्यटन, एडवेंचर पर्यटन, नौका पर्यटन व योग को प्रोत्साहन देकर स्थानीय स्तर पर जीविकोपार्जन के साधन विकसित किये जाने पर भी काम चल रहा है।

इन गतिविधियों के अलावा कार्यक्रम में जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए भी कदम उठाए गए हैं और कछुए, गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, गोल्डन महासीर आदि जैसी महत्वपूर्ण जलजीव प्रजातियों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। अभी तक 4.25 अरब डॉलर निवेश वाली इस पहल में 230 संगठन शामिल हैं, जिनके साथ मिलकर करीब 30,000 हेक्टेयर जमीन का वनीकरण किया जा चुका है और 2030 तक 1,34,000 हेक्टेयर भूमि का वनीकरण करने का लक्ष्य है।

इस प्रकार बीते एक दशक में यह कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ता गया है और अपने खाते में एक के बाद एक उपलब्धियां दर्ज करता गया है। इन्हीं उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ग्लोबल वाटर इंटेलिजेंस द्वारा ग्लोबल वाटर अवार्ड्स, 2019 में “पब्लिक वाटर एजेंसी ऑफ द ईयर” पुरस्कार जीत चुका है। यह इस कार्यक्रम की बढ़ती लोकप्रियता और प्रतिष्ठा का ही नतीजा है कि ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फिनलैंड, इजराइल आदि देशों ने गंगा कायाकल्प के लिए भारत के साथ सहयोग करने में रुचि दिखाई है। इस कार्यक्रम को पिछले साल संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया की दस सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलों में शामिल किया गया है। गत वर्ष दिसंबर माह में कनाडा के मॉन्ट्रेयल में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (सीओपी15) के दौरान जारी एक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि भारत की पवित्र नदी गंगा के मैदानी हिस्सों की सेहत सुधारने के उद्देश्य वाली परियोजना दुनिया भर की उन दस ‘बड़ी महत्त्वपूर्ण’ पहलों में से एक है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने प्राकृतिक दुनिया को बहाल करने में उनकी भूमिका के लिए चिन्हित किया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गंगा नदी पुनर्जीवन परियोजना में गंगा के मैदानी हिस्सों की सेहत बहाल करने, प्रदूषण कम करने, वन्य क्षेत्र का पुन: निर्माण करने तथा इसके विशाल तलहटी वाले इलाकों के आसपास रह रहे 52 करोड़ लोगों को व्यापक फायदे पहुंचाने के लिए अहम है। अब मिशन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी परामर्श और वित्त पोषण दिया जाएगा।

नमामि गंगे 2.0
नमामि गंगे कार्यक्रम के दूसरे चरण (2021-26) में सीवेज ट्रीटमेंट, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, नदी-सतह की सफाई, जैव विविधता, वनीकरण, जन जागरण, औद्योगिक प्रवाह निगरानी व गंगा ग्राम जैसे पहले से चल रहे उपक्रमों को जारी रखते हुए समस्त परियोजनाओं के रख-रखाव पर और जोर दिया जाएगा। साथ ही इसमें छोटी नदियों और आर्द्रभूमि के पुनरुद्धार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक प्रस्तावित गंगा जिले में कम से कम 10 आर्द्रभूमि हेतु वैज्ञानिक योजनाओं और स्वास्थ्य कार्ड का प्रावधान है। इसके अलावा इसमें शहरी स्थानीय निकायों से जुड़े कार्यक्रमों एवं योजनाओं तथा यमुना, काली एवं अन्य सहायक नदियों की स्वच्छता संबंधी परियोजनाओं पर भी कार्य होगा। राज्य परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और गंगा के सहायक शहरों में परियोजनाओं के लिये विश्वसनीय विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

 

 

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एयर इंडिया की फ्लाइट में हंगामा, यात्री ने क्रू पर किया हमला...

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। एयर इंडिया की फ्लाइट में यात्रा के दौरान एक यात्री ने चालक दल के सदस्यों के साथ गाली-गलौज की और उनमें से एक सदस्य पर हमला भी किया। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 29 मई की है। एयर इंडिया की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 29 मई को फ्लाइट एआई882 में एक यात्री ने उपद्रवी व्यवहार किया।

प्रवक्ता ने कहा, उक्त यात्री ने चालक (क्रू) दल के सदस्यों के साथ गाली-गलौज की और फिर उनमें से एक पर शारीरिक हमला किया। दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने पर यात्री ने आक्रामक व्यवहार जारी रखा। प्रवक्ता ने कहा कि यात्री को सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया गया है। हमने इस घटना की सूचना नियामक को भी दे दी है।

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पिछले नौ वर्षों में साढे 3 करोड से अधिक पक्‍के मकान का निर्माण हुआ : निर्मला सीतारामन

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)केंद्रीय वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि देश में पिछले नौ वर्षों में साढे तीन करोड से अधिक पक्‍के मकान और करीब ग्‍यारह करोड 72 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया।

एनडीए सरकार के नौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुंबई में उन्‍होंने कहा कि 12 करोड घरों को स्‍वच्‍छ जल मिल रहा है जिससे जलजनित रोगों में कमी आई है और लोगों की कठिनाईयाँ कम हुई है। उज्‍जवला योजना के अंतर्गत 9 करोड 60 लाख परिवारों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्‍शन दिये गये हैं जिससे घरों को धुँएं से छुटकारा मिला है और महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार हुआ है।

वित्‍तमंत्री ने दुनिया के सबसे बडे स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल कार्यक्रम आयुष्‍मान भारत का उल्‍लेख किया जिसके अंतर्गत करीब पांच लाख लाभार्थियों को मुफ्त ईलाज उपलब्‍ध कराया गया है। उन्‍होंने कहा क‍ि कोविड महामारी के दौरान 80 करोड लोगों को मुफ्त खाद्यान वितरित किया गया जो यूरोप की जनसंख्‍या से भी अधिक है।

 

 

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