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ज्ञानभारतम् सर्वे को मिली रफ्तार : 31 मई तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश

  मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि शासकीय संस्थानों, मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, महाविद्यालयों एवं निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए सक्रिय प्रयास करें । उन्होंने कहा कि परंपरागत समुदायों और पुरातात्विक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पांडुलिपियां और ज्ञान-संपदा मिल सकती है, इसलिए इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचारों के आयोजन का सुझाव दिया गया, जिससे आम नागरिक भी इस अभियान से जुड़ सकें।


             मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ‘ज्ञानभारतम्’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वेक्षण अभियान समिति के सदस्य तथा सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण कार्य 31 मई तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि यह सर्वे केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि जिलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए है। साथ ही प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समिति का गठन, नोडल अधिकारी की नियुक्ति तथा सर्वेक्षण दलों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। 

        बैठक में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय पत्रकारों, साहित्यकारों, इतिहासकारों और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ने पर बल दिया गया। यह अभियान पूरे देश के लिए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और उसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वेक्षण कार्य के दौरान पांडुलिपियों के स्वामित्व अधिकारों का सम्मान, बिना अनुमति स्थानांतरण न करने और सभी गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया।

          बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से ज्ञानभारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत रूपरेखा, उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि शोधकर्ताओं के सहयोग से सुदूर अंचलों से भी पांडुलिपियों की महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा सकती है, जिससे इस अभियान को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. फरिहा आलम सिद्दीकी, संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हरा सोना संग्राहकों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

 छत्तीसगढ़ और अन्य वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है, जो आदिवासियों और वनवासियों की आजीविका का मुख्य साधन है। हाल के नीतिगत बदलावों और सरकारी पहलों के कारण इन संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। 


         वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा लघु वनोपज संग्राहकों, विशेषकर आदिवासी समुदाय की आय बढ़ाने के उद्देश्य से तेन्दूपत्ता संग्रहण दर में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। वर्ष 2024 से प्रति मानक बोरा की दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए कर दी गई है, जिसका सीधा लाभ लाखों ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। वर्ष 2026 में राज्य के 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के अंतर्गत 902 प्राथमिक समितियों में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य प्रस्तावित है। इस वर्ष लगभग 15 लाख से अधिक मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का अनुमान है। एक मानक बोरे में 1000 गड्डियां होती हैं और प्रत्येक गड्डी में 50 पत्ते शामिल रहते हैं। 

लगभग 11 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण होने की संभावना

          बस्तर संभाग के 10 जिला यूनियनों की 216 समितियों में करीब 4 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अन्य 21 यूनियनों की 868 समितियों में लगभग 11 लाख मानक बोरा संग्रहण होने की संभावना है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। बस्तर संभाग में वर्ष 2025 के 3.90 लाख परिवारों की तुलना में इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 4.04 लाख हो गई है। इस साल अब तक 14 हाजर 57 नए परिवार इस कार्य से जुड़े हैं।

10 नए फड़ और बेहतर तैयारी

        नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ों की स्थापना की गई है, जहां 2100 से अधिक मानक बोरा संग्रहण का अनुमान है। इसके अलावा सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी नए फड़ जोड़े गए हैं। पिछले वर्ष नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाधाओं के कारण 351 फड़ों में संग्रहण नहीं हो सका था, लेकिन इस वर्ष सभी फड़ों में कार्य शुरू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।

सुगम संचालन और पारदर्शी भुगतान

        संग्रहण कार्य को सुचारू बनाने के लिए संग्राहक कार्ड, बोरा, सुतली, गोदाम और परिवहन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही तेन्दूपत्ता के भंडारण का बीमा भी कराया जा रहा है। संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी।

920 करोड़ रुपये का संभावित भुगतान

       इस वर्ष निर्धारित दर के अनुसार संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। इससे ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। तेन्दूपत्ता संग्रहण को लेकर सरकार की यह पहल न केवल वनवासियों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
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छत्तीसगढ़ी भाखा ला संविधान के 8वीं अनुसूची में शामिल करे अउ जनगणना में उचित स्थान देवाय बर

आजादी के एतका बछर बीत जाय के बाद घलो, आज हमर 'महतारी भाखा' छत्तीसगढ़ी ला वो मान-सम्मान अउ पद नई मिल पाइस, जेकर वो असली हकदार हे। ए ह बड़े दुख अउ लज्जा के बात हे कि जनगणना विभाग के वेबसाइट में 'नेपाली' जइसन भाखा मन ला जगह मिल गे हे, फेर करोड़ों मनखे मन के बोले जाय वाला हमर सुग्घर छत्तीसगढ़ी ला आज घलो उपेक्षित रखे गे हे।

ये कोनो वेबसाइट के गलती नोहे, ये हमर छत्तीसगढ़िया अस्मिता अउ पहिचान ऊपर हमला आय!
हमन सरकार अउ नेता मन ले सवाल पूछत हन:
अधिकार के लड़ाई: जब हमर भाखा के अपन समृद्ध साहित्य हे, व्याकरण हे, अउ करोड़ों छत्तीसगढ़िया मन एला गर्व ले बोलथें, त फेर संविधान के 8वीं अनुसूची ले एला बाहर काबर रखे गे हे? ए सौतेला व्यवहार कतका दिन तक चलही?
नेता मन के चुप्पी: सरकार कोनो भी हो—चाहे केंद्र के हो या राज्य के—जब छत्तीसगढ़िया मन के अपमान होथे, त हमर नेता मन चुप काबर हो जाथें? भाजपा हो या कांग्रेस, सबले पहिली वो मन छत्तीसगढ़िया अंय। अगर आज वो मन संसद अउ विधानसभा में आवाज नई उठइहें, त हमर भाखा के अस्तित्व ऊपर खतरा मंडराते रही।
सिर्फ वोट बर उपयोग: का हमर भाखा अउ बोली सिर्फ चुनाव के बेरा वोट मांगे बर आय? का हमर गौरवशाली संस्कृति सिर्फ झांकी देखाए अउ तमाशा बर आय?
हमार मांग:
छत्तीसगढ़ी भाखा ला तत्काल प्रभाव ले संविधान के 8वीं अनुसूची में शामिल करे जाय।
जनगणना अउ सरकारी दस्तावेज मन में छत्तीसगढ़ी ला पृथक अउ सम्मानजनक स्थान दे जाय।
प्राथमिक शिक्षा ले लेके राजकाज के काम में छत्तीसगढ़ी के उपयोग अनिवार्य करे जाय।
संगवारी हो, ये लड़ाई कोनो एक झन के नोहे, ये हमर आने वाला पीढ़ी अउ महतारी भाखा के अस्तित्व के लड़ाई आय। अब चुप्पी तोड़े के बेरा आ गे हे।
"छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया" तब होही, जब छत्तीसगढ़ी ला सम्मान मिलही!
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नगरीय निकायों के कार्यों की मैराथन समीक्षा का दूसरा दिन, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने की नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा

 प्रदेशभर के नगरीय निकायों की समीक्षा का दौर आज दूसरे दिन भी जारी रहा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने रायपुर के सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस में आज दिनभर चली बैठक में सभी नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को बेतरतीब निर्माणों, अवैध प्लाटिंग और अतिक्रमण पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने नगर पंचायतों के कार्यों और व्यवस्थाओं में कसावट लाने को कहा। श्री साव ने कहा कि  काम में लापरवाही और कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जवाबदेही तय कर संबंधितों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

 
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सभी सीएमओ को नई सोच और नई कार्य पद्धति से शहरों तथा शहरवासियों के कल्याण के लिए काम करने को कहा। उन्होंने राज्य के उभरते शहरों को सुव्यवस्थित, सुनियोजित, स्वच्छ और सुंदर बनाने के साथ ही नागरिकों के लिए पर्याप्त जन सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पांचों संभागों के विभागीय क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को हर तिमाही में प्रत्येक नगर पालिका और नगर पंचायत का व्यक्तिगत निरीक्षण कर संचालक को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक श्री आर. एक्का और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ श्री शशांक पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सभी सीएमओ को आगामी 31 मई तक नगर पंचायतों की नई संपत्तियों पर करारोपण का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व संग्रहण बढ़ाने संपत्ति कर, जल कर, यूजर चार्ज जैसे करों की वसूली गंभीरता और कड़ाई से करने को कहा। उन्होंने एनर्जी ऑडिट के माध्यम से गैर-जरूरी विद्युत कनेक्शनों की पहचान कर इसके विच्छेदन की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकाय के सभी कार्मिकों को हर माह समय पर वेतन और बिजली बिल का भुगतान सुनिश्चित करने को भी कहा।
 
श्री साव ने जल संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करने के लिए निर्देशित करते हुए शत-प्रतिशत भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स का निर्माण कराने को कहा। उन्होंने 31 मई तक बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने को कहा। श्री साव ने सभी सीएमओ को मुख्यालय में ही निवास करते हुए प्रतिदिन प्रातः भ्रमण कर शहर की साफ-सफाई और विकास कार्यों की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने भ्रमण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अपने साथ रखने को कहा। उन्होंने सीएमओ द्वारा प्रातः भ्रमण में की जा रही कोताही पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए रोजाना अनिवार्यतः कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए।  

श्री साव ने शहरों में नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए बच्चों के लिए खेल के मैदानों और उद्यानों के लिए जगहों का चिन्हांकन करने को कहा। उन्होंने कुनकुरी और अंबागढ़-चौकी में निर्माणाधीन नालंदा परिसरों का निर्माण इस साल दिसम्बर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। श्री साव ने पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था पर दूरदर्शिता से काम करते हुए अगले दस वर्षों के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता में रखते हुए इसके लिए 15वें वित्त आयोग की राशि से पुख्ता व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने वर्षा ऋतु के पहले सभी नाला, नालियों, ड्रेनेज और तालाबों की सफाई करने को कहा। उन्होंने पाइपलाइन्स के लीकेज ठीक करते हुए सभी घरों तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। श्री साव ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत आवासों के निर्माण एक साल के भीतर पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि शहर के जरूरतमंदों के लिए पीएम आवास स्वीकृत करना और बनवाना सीएमओ की जिम्मेदारी है। इस पर सक्रियता और गंभीरता से काम करते हुए आवास स्वीकृति के एक सप्ताह के भीतर भवन निर्माण अनुज्ञा जारी करने को कहा। उन्होंने आवास की स्वीकृति के बाद लाभार्थियों को बुलाकर मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान सहित योजना से संबंधित सभी नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी देने को कहा।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में प्रदेशभर में आगामी 1 मई से शुरू हो रहे सुशासन तिहार के अंतर्गत शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शहरवासियों को लाभान्वित करने की तैयारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा और नगर पंचायतों के अभियंता भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।

इन कार्यों और योजनाओं की हुई समीक्षा

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने दिनभर चले मैराथन बैठक में नगर पंचायतों में राजस्व वसूली, विद्युत देयकों के भुगतान, वेतन भुगतान, अधोसंरचना विकास व 15वें वित्त आयोग के कार्यों, नालंदा परिसरों, नगरोत्थान योजना, जलप्रदाय योजनाओं, आपदा प्रबंधन, गोधाम योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, आई-गॉट (I-got) कर्मयोगी तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्यों की समीक्षा की।
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शहरों में पेयजल आपूर्ति, अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव सख्त

  उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस में दिनभर चली बैठक में शहरों में पेयजल आपूर्ति की समस्याओं, अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर नाराजगी जाहिर करते हुए इनके निराकरण के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने धमतरी में पेयजल योजना के काम में लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्यपालन अभियंता को निलंबित करने तथा ठेकेदार पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। 


नगर निगमों और नगर पालिकाओं की आज दो अलग-अलग हुई समीक्षा बैठकों में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक श्री आर. एक्का और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ श्री शशांक पाण्डेय सहित सभी नगर निगमों के आयुक्त, नगर पालिकाओं के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता एवं नगरीय प्रशासन विभाग के पांचों संभागीय क्षेत्रीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक भी बैठक में मौजूद थे। 

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने समीक्षा बैठक में नगर निगमों और नगर पालिकाओं के अधिकारियों को शहरों की जरूरत के मुताबिक कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों की व्यवस्था और छवि सुधारने सक्रियता व गंभीरता से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि नगर निगम ऐसा काम करें जिससे राज्य की नगर पालिकाएं प्रेरणा ले सकें और नगर पालिका इस तरह से काम करें जिनसे नगर पंचायतें प्रेरित हो सकें। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें नहीं आना चाहिए। सभी निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण हों, इस पर विशेष ध्यान दें।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने पेयजल आपूर्ति की लगातार आ रही शिकायतों पर नाखुशी और नाराजगी जाहिर करते हुए अगले वर्ष तक सभी नगर निगमों में इसके स्थाई समाधान के  निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरों में केवल बजट खर्च करने के उद्देश्य से काम न करें, बल्कि समस्याओं का स्थाई समाधान करें। पेयजल समस्या की शिकायतों पर जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगामी 31 मई तक सभी नगर निगमों में बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने को कहा। जून के पहले सप्ताह में राज्य स्तरीय टीम नगर निगमों में इसका भौतिक निरीक्षण करेंगी। कार्य संतोषजनक न मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर पर कार्रवाई की जाएगी। 

श्री साव ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अपूर्ण आवासों को सितम्बर-2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अप्रारंभ आवासों के निर्माण एक माह के भीतर हर हाल में शुरू करने के साथ ही मार्च-2026 में स्वीकृत सभी आवासों को वर्षा ऋतु के पहले प्रारंभ करने को कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत निर्धारित 18 माह की अवधि में निर्माण पूर्ण करने वाले हितग्राहियों के प्रस्ताव अविलंब विभाग को भेजने के निर्देश दिए, ताकि ऐसे हितग्राहियों को मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना की 32 हजार 850 रुपए की अतिरिक्त राशि प्रदान की जा सके।

श्री साव ने पीएम स्वनिधि योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को दिलाने बैंकों से बात कर ऋण स्वीकृत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में भूजल को रिचार्ज करने के लिए डीएमएफ, सीएसआर और जन सहयोग से अधिक से अधिक संख्या में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य कराने को कहा। श्री साव ने शहरों को सुंदर, स्वच्छ और सुविधापूर्ण बनाने के मिशन में वर्तमान समय की जरूरतों और तकनीकों के साथ नई कार्य पद्धति अपनाने के निर्देश निकायों के अधिकारियों को दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के उप सचिव श्री भागवत जायसवाल, अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।

इन कार्यों और योजनाओं की हुई समीक्षा

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज दो सत्रों में मैराथन बैठकों में नगरीय निकायों में राजस्व वसूली, विद्युत देयकों के भुगतान, वेतन भुगतान, अधोसंरचना विकास व 15वें वित्त आयोग के कार्यों, नालंदा परिसरों, नगरोत्थान योजना, जलप्रदाय योजनाओं, आपदा प्रबंधन, गोधाम योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, आई-गॉट (I-got) कर्मयोगी तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्यों की समीक्षा की। वे 21 अप्रैल को दिनभर नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा करेंगे।
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सामाजिक न्याय और समानता के महान शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर उन्हें नमन किया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर सामाजिक न्याय, समानता और मानव अधिकारों के सशक्त प्रहरी थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन को समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया और एक ऐसे भारत की नींव रखी, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।  

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार बाबा साहेब के आदर्शों और सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए समाज के हर वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं समाज के अंतिम छोर तक विकास और अवसरों की समान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सशक्त बने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़े। 

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों और मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा एक न्यायपूर्ण, समरस और सशक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः…” की भारतीय जीवनदृष्टि को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिला चिकित्सालय में ‘अटल आरोग्य लैब’ का राज्यस्तरीय शुभारंभ किया। यह पहल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई क्रांति का आधार बनेगी, जो विशेष रूप से दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों को आधुनिक एवं सुलभ जांच सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य शासन का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के हर नागरिक तक उत्कृष्ट, किफायती और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं। उन्होंने कहा कि अटल आरोग्य लैब के माध्यम से अब प्रदेश के 1046 स्वास्थ्य संस्थानों - जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक -मुफ्त जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे लाखों नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा। इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मरीजों को 133 प्रकार की जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। जांच रिपोर्ट एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से सीधे मरीजों तक पहुंचेगी, जिससे उन्हें बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं होगी और उपचार प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह व्यवस्था न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ भी बनाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  प्रदेश की डायग्नोस्टिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। इससे रक्त जांच सहित विभिन्न रोगों की पहचान शीघ्र और सटीक रूप से संभव होगी, जिससे समय पर उपचार शुरू कर मरीजों के स्वास्थ्य लाभ की दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से बस्तर जैसे दूरस्थ अंचलों में ऐसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है, ताकि यहां के नागरिकों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। अटल आरोग्य लैब इस दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।

उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय सुकमा में पहले से ही ब्लड बैंक, सोनोग्राफी, एक्स-रे, ईसीजी, आपातकालीन सेवाएं, सीजेरियन प्रसव, एनआरसी एवं डायलिसिस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब अटल आरोग्य लैब के जुड़ने से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक हो जाएंगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल, बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, महिला आयोग सदस्य सुश्री दीपिका सोरी, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुंदरराज पी.  सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई गूंज: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुकमा को दी 308 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

नक्सलवाद के प्रभाव से उबरकर नए विश्वास और विकास की राह पर अग्रसर बस्तर क्षेत्र में आज एक महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुकमा जिले को 308 करोड़ रुपए से अधिक के 228 विकास कार्यों की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने 159 कार्यों का शिलान्यास और 69 कार्यों का लोकार्पण करते हुए क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति प्रदान की।


मिनी स्टेडियम सुकमा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों से नक्सलवाद के कारण पिछड़े रहे क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बस्तर में शांति स्थापित हुई है और अब यहां विकास की गंगा बह रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिन गांवों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां आज स्कूलों की घंटियां गूंज रही हैं और लोग लोकतंत्र पर भरोसा जताते हुए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3 हजार से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं और उन्हें पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से नई जिंदगी की शुरुआत के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

स्वस्थ बस्तर की दिशा में बड़ा कदम

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया और “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को घर-घर तक सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की। इस अभियान के तहत 7 जिलों में 1100 टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करेंगी।

कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री श्री साय ने मिनी स्टेडियम में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया और आम नागरिकों एवं हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने मौके पर ही विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता सामग्री और प्रमाण पत्र वितरित कर शासन की संवेदनशीलता का परिचय दिया। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री ने 7 टीबी मुक्त पंचायतों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और जानकारी ली कि जिले में अब तक 28 पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं। उन्होंने 3 टीबी मरीजों से संवाद कर उन्हें फूड बास्केट वितरित किया।
मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए मरीजों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से चश्मा पहनाकर उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की। साथ ही दवा और आई ड्रॉप भी वितरित किए गए। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए मूर्तोंडा, पेंटा और कांकेरलंका उपस्वास्थ्य केंद्रों को एनक्वास सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। समाज कल्याण विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री श्री साय ने आईईडी ब्लास्ट में पैर गंवा चुके 5 हितग्राहियों को कृत्रिम पैर प्रदान किए। इसके अलावा 4 व्हीलचेयर और 3 ट्राइसिकल भी वितरित किए गए तथा 6 दिव्यांगजनों को पहचान पत्र देकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने की पहल की गई।
एनआरएलएम स्टॉल में स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें “लखपति दीदी से करोड़पति दीदी” बनने के लिए प्रेरित किया और सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

आवास, अधिकार और आजीविका—हर क्षेत्र में सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के स्टॉल में हितग्राहियों से बातचीत कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से 15 वनाधिकार पत्र वितरित किए गए, जिससे आदिवासी परिवारों को उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। वन विभाग के स्टॉल में तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों को सहायता प्रदान की गई। सहकारी समिति तोंगपाल को 4.27 लाख रुपए का सांकेतिक चेक दिया गया तथा एक हितग्राही को संग्रहण कार्ड वितरित किया गया।
इसके साथ ही पुनर्वासित स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 2 ई-रिक्शा प्रदान कर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया गया और एक हितग्राही को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया।

नियद नेल्लानार 2.0 और 8 बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि नियद नेल्लानार योजना के तहत अब तक 500 से अधिक गांवों में 17 विभागों की 45 योजनाओं के माध्यम से विकास कार्य किए गए हैं। इस योजना के अगले चरण ‘नियद नेल्लानार 2.0’ में अब 10 जिलों को शामिल किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए 8 महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनमें सड़क निर्माण, पुलिया निर्माण, बस स्टैंड, सामुदायिक भवन और मंदिर जीर्णोद्धार जैसे कार्य शामिल हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल, सांसद श्री महेश कश्यप, मुख्य सचिव श्री विकास शील, स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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करोड़ों की लागत से बदल रहा पुसौर का स्वरूप-वित्त मंत्री श्री चौधरी

प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी.चौधरी ने पुसौर में निर्माणाधीन लाइब्रेरी भवन, पुष्पवाटिका उद्यान, चंदन तालाब सहित अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा

निर्माण स्थल पर जाकर प्रत्यक्ष रूप से कार्यों की स्थिति देखना,  बुनियादी ढांचे का विकास कराना हम सभी की जिम्मेदारी है l उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

            वित्त मंत्री श्री चौधरी ने नगर पंचायत पुसौर के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया। उन्होंने अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों को धरातल पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि आमजन को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। 

          बैठक में उन्होंने अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि सभी के संयुक्त प्रयासों से ही क्षेत्र का समग्र एवं संतुलित विकास संभव है। साथ ही उन्होंने पार्षदों एवं जनप्रतिनिधियों से सकारात्मक सहयोग प्रदान करने तथा विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।

           उल्लेखनीय है कि नगर पंचायत पुसौर में पुष्पवाटिका उद्यान निर्माण हेतु लगभग 2 करोड़ 92 लाख 40 हजार रुपये, बोरोडीपा चौक से कॉलेज तक बी.टी. रोड एवं नाली निर्माण के लिए 4 करोड़ 8 लाख रुपये, चंदन तालाब के सौंदर्यकरण के लिए 2 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये तथा लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए लगभग 99.12 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त तेलीतार तालाब के गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य भी प्रगति पर है, जिससे क्षेत्र की सौंदर्य वृद्धि के साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। 

        इस अवसर पर नगर पंचायत पुसौर के अध्यक्ष श्री मानी मोहित सतपथी, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, अपर कलेक्टर श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो, एसडीएम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं नगर पंचायत पुसौर के जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति थे ।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद

नक्सल आतंक से लंबे समय तक प्रभावित रहे सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित लोगों से आत्मीय संवाद कर उनके अनुभव जाने और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए दृढ़संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नक्सल पुनर्वास नीति के चलते सुकमा सहित बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है, जिनमें से 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज में बराबरी का अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल और संचार माध्यमों से जुड़कर आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय  ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी राहत प्रदान करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 तथा जिला प्रशासन द्वारा 95 लोगों को शासकीय सेवा में रोजगार के अवसर दिए गए हैं। 

कार्यक्रम के दौरान ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना, नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला सहित अन्य हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल, राजमिस्त्री किट, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबियां तथा पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए।  इस अवसर पर 25 हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपकर उन्हें सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने नक्सल पुनर्वास की सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को दर्शाती ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। साथ ही, पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर श्री महेश कश्यप  सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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महिला आरक्षण से आधी आबादी को मिलेगा उनका पूरा हक, निर्णय प्रक्रिया में बढ़ेगी भागीदारी - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में नई दिल्ली के विज्ञान भवन से प्रसारित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन को सुना। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह देश की मातृशक्ति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक समावेशी एवं सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक’ नारी की भागीदारी सुनिश्चित करने का यह प्रयास नए भारत की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की सीधी भागीदारी ही विकसित भारत की सशक्त नींव है।

उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर होने वाली चर्चा इस ऐतिहासिक पहल को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। वैदिक काल से लेकर वर्तमान समय तक महिलाओं की भूमिका समाज के निर्माण और विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। हमारी डबल इंजन सरकार की विभिन्न योजनाओं ने इस परंपरा को आधुनिक संदर्भ में सशक्त रूप दिया है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिला है, जिसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। साथ ही ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहल माताओं-बहनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बना रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि जब देश में महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक चर्चा हो रही है, उसी समय छत्तीसगढ़ ‘महतारी गौरव वर्ष’ मना रहा है। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का सम्मान और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी प्रदेश की पहचान बन चुकी है।
उन्होंने प्रदेश की मातृशक्ति और महिला संगठनों से आह्वान किया कि वे हर मंच पर अपनी आवाज़ बुलंद करें और इस परिवर्तन यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती सहभागिता से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा समाज में सकारात्मक बदलाव की नई दिशा स्थापित होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अंत में कहा कि जब नारी सशक्त होती है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। यह समय देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा में निर्णायक भूमिका देने का है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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उद्योग और श्रम विभाग के आपसी समन्वय से संवर रहा है - छत्तीसगढ़

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जिस स्पष्ट नीति के साथ श्रमिकों और उद्योगों के समन्वित विकास को प्राथमिकता दी है, वह आज ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रही है। श्रम विभाग की योजनाओं में यह भावना स्पष्ट झलकती है कि श्रमिक केवल आर्थिक इकाई नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला हैं। उनके जीवन में स्थायित्व, सम्मान और सुरक्षा लाना ही सच्चे विकास का संकेत है। 12 अप्रैल का यह विशेष अवसर उद्योग तथा श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के समर्पण, कार्यक्षमता और जनसेवा की भावना को याद करने का दिन है। आपके कुशल नेतृत्व से ही छत्तीसगढ़ प्रगति, समृद्धि और समान अवसरों का आदर्श राज्य बनकर उभरा है।


         2026 रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ के विकास की वर्तमान यात्रा केवल योजनाओं और घोषणाओं की कहानी भर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे नेतृत्व की कथा है जिसने श्रमिक, युवा, उद्यमी और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। इस परिवर्तनकारी दौर में उद्योग व श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनका कार्य केवल प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का जीवंत उदाहरण है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 वर्ष की अल्प आयु में उद्योग के क्षेत्र में जो एक नया इतिहास रचने का संकल्प लिया है वह किसी से छिपा नहीं है। उद्योग के क्षेत्र में आज छत्तीसगढ़ की अपनी एक अलग पहचान है। नई उद्योग नीति (2024-2030) में छत्तीसगढ़ के समावेशी विकास पर जोर दिया गया है।

        श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों में सबसे प्रेरणादायक पहल श्रमिकों के बच्चों को उत्कृष्ट विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि परिवर्तन का वह मार्ग है जिससे कि आने वाली नई पीढ़ी ज्ञान और अवसरों के माध्यम से अपना सुनहरा और सुरक्षित भविष्य स्वयं गढ़ सके। आज के संदर्भ में श्रमिक परिवारों के बच्चों का राज्य के प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करना, एक नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को लाखों रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करना सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें प्रतिभा का सम्मान सर्वाेपरि है। यह न केवल उन बच्चों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि पूरे श्रमिक समाज के लिए आत्मविश्वास का स्त्रोत भी है।

         उद्योग और श्रम विभाग से आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले दो वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये सीधे श्रमिकों के खातों में हस्तांतरित किए गए हैं, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ भी सुनिश्चित हुआ है। प्रतिदिन हजारों श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलना इस बात का प्रमाण है कि शासन की नीतियां धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं। श्रमिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए आवास सहायता, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न  योजना, दुर्घटना में त्वरित आर्थिक सहयोग जैसी पहलें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से ’श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन। ’श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, एक मानवीय और संवेदनशील शासन का परिचायक है। 

        औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी मंत्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने नई ऊंचाईयों को छुआ है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के माध्यम से राज्य में निवेशको को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। करोड़ों रुपये के निवेश प्रस्ताव, सैकड़ों नए उद्योगों की स्थापना और हजारों युवाओं को रोजगार मिलना इस नीति की सफलता को प्रमाणित करता है।

        नवा रायपुर में देश का पहला एआई डाटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में बढ़ता कदम, सेमीकंडक्टर और आईटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश, तथा स्टार्टअप नीति का क्रियान्वयन ये सभी पहलें छत्तीसगढ़ को पारंपरिक अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर आधुनिक तकनीकी युग में स्थापित कर रही हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना को भी नई दिशा देने वाला है। प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में ई-निविदा प्रणाली और सिंगल विंडो सिस्टम जैसे कदमों ने पारदर्शिता को बढ़ाया है जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है और राज्य में व्यापार करने की प्रक्रिया सरल बनी है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ आज निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है।

         सामाजिक समावेशन को छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और दूरस्थ क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की योजनाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। सामाजिक समावेश नही किसी भी राज्य की वास्तविक प्रगति का आधार होता है।

         उद्योग तथा श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने अपने गंभीर व दूर-दृष्टि सोच एवं विभागीय दायित्वों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि यदि नेतृत्व में संवेदनशीलता और स्पष्ट दृष्टि हो, तो विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है। वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सरकार के मार्गदर्शन में यह परिवर्तन और अधिक सशक्त और व्यापक रूप ले रहा है।
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AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना हमारा ध्येय है: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 छत्तीसगढ़ में शिक्षा को भविष्य की तकनीकों से जोड़ते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख श्री संजय जैन एवं गूगल इंडिया के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख श्री राकेश रंजन ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने अतिथियों का पारंपरिक सम्मान करते हुए उन्हें शॉल एवं बस्तर कला की प्रतिकृति भेंट की। ।

गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख श्री संजय जैन ने रायपुर जिला प्रशासन और गूगल के मध्य हुए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रायपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में “AI सक्षम शिक्षा अभियान” की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि “सक्षम शिक्षक अभियान” के तहत राज्य में शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स और AI आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के प्रथम चरण की शुरुआत रायपुर से की जाएगी, जिसके बाद इसे राज्य के सभी जिलों में विस्तार दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 2 लाख से अधिक शिक्षकों को AI प्रमाणन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए गूगल फॉर एजुकेशन अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को निःशुल्क उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, जिससे शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त किया जा सके।
कार्यक्रम के तहत प्रारंभिक चरण में 200 शिक्षकों की सहभागिता से विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें गूगल फॉर एजुकेशन टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, कक्षा शिक्षण में AI के प्रभावी उपयोग और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीक-सक्षम और नवाचार आधारित बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को शिक्षा से जोड़ना केवल एक पहल नहीं, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल शिक्षण पद्धतियों में गुणवत्ता आएगी, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नए युग के कौशल विकसित होंगे, जो उन्हें आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “AI सक्षम शिक्षा अभियान” जैसे कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों से सशक्त कर कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है - छत्तीसगढ़ को एक ऐसे ज्ञान-आधारित और तकनीकी रूप से सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करना, जहाँ हर विद्यार्थी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अवसरों से भरपूर शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर एक सशक्त, आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंसल, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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जल संरक्षण के कार्यों को और गति दें,अधिक से अधिक पेड़ लगाकर संरक्षित करें-राज्यपाल श्री डेका

 राज्यपाल श्री रमेन डेका ने जल संरक्षण के कार्यों की सराहना करते हुए किसानों को डबरी खनन के लिए अधिक से अधिक प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। बताया गया  कि विकासखंड में 218 डबरी स्वीकृत की गई हैं तथा बड़ी संख्या में निर्माण कार्य पूर्ण किए गए हैं,  राज्यपाल ने  और गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल श्री डेका ने आज सरायपाली प्रवास के दौरान रेस्ट हाउस में विकासखंड स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


                राज्यपाल ने वृक्षारोपण को जनआंदोलन के रूप में संचालित करने पर जोर देते हुए कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाए। कैंपा एवं मनरेगा मद से वृहत वृक्षारोपण करते हुए शासकीय भवनों, रेस्ट हाउस परिसरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जाएं। विभाग ने बताया कि क्षेत्र में लगभग 1.50 लाख पौधरोपण किया गया है तथा अमृत सरोवरों के आसपास भी हरित विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने इसमें जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए।

              राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र की समीक्षा करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने तथा धान के साथ उद्यानिकी फसलों के समावेश पर बल दिया। उन्होंने  जैविक चावल के वैल्यू एडिशन के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा के दौरान उन्होंने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को प्रभावी बनाने, हितग्राहियों से सेवा शुल्क लेने तथा सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई एवं उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

               स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने टीबी रोगियों की जानकारी ली और उनके उपचार की सतत निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने समाज के सक्षम व्यक्तियों को टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए प्रेरित करने, रेडक्रॉस से जुड़ने तथा ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर एवं मोतियाबिंद के उपचार हेतु जागरूकता अभियान एवं शिविर आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने एम्स से समन्वय स्थापित कर बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

               राज्यपाल श्री डेका ने योग को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों में प्रारंभ से ही योग की आदत विकसित की जाए तथा इसके लिए नियमित प्रशिक्षण और कक्षाएं संचालित की जाएं। उन्होंने अधिक से अधिक पुस्तकालय खोलने तथा महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर “लखपति दीदी” बनाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

              बैठक में सरायपाली विधायक श्रीमती चतुरी नंद भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने जिले में संचालित विकास कार्यों एवं प्रमुख योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री प्रभात कुमार, जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार, अपर कलेक्टर श्री सचिन भूतड़ा, एसडीएम श्रीमती अनुपमा आनंद सहित विकासखंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
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नाचा के जनक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर मुख्यमंत्री श्री साय ने किया नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
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नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ गढ़ेगा विकास का स्वर्णिम भविष्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।
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मातृत्व वन प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का सशक्त प्रतीक है - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर सर्किट हाउस परिसर में विकसित मातृत्व वन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मातृत्व वन न केवल हरित क्षेत्र के रूप में विकसित होगा, बल्कि यह प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का एक सशक्त प्रतीक भी है और आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता का केंद्र बनेगा।


उल्लेखनीय है कि जशपुर मंडल द्वारा विकसित मातृत्व वन में लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया, जिससे प्रकृति और परिवार के बीच भावनात्मक संबंध को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास कर रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र के विस्तार में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करेंगी।

मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीताअशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि भविष्य में औषधीय उपयोग एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के लिए प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगाराम भगत, श्री विजय आदित्य सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
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79 हजार से अधिक श्रमिकों को 27.15 करोड़ की सीधी सहायता: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जशपुर में श्रमिक सम्मेलन में किया डीबीटी अंतरण

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की।


कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं।
इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री

श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है।

इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर श्री गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
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