छत्तीसगढ़ - Newsportal | Chhattisgarh Darpan Media Group

छत्तीसगढ़

संरचनात्मक सुधारों से छत्तीसगढ़ में निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जमीनी क्रियान्वयन तेज़ - मंत्री लखन लाल देवांगन

 छत्तीसगढ़ अब सिर्फ निवेश आकर्षित नहीं कर रहा उन्हें तेज़ी से ज़मीन पर भी उतार रहा है। नवंबर 2024 से अब तक राज्य ने 18 क्षेत्रों में 27.83 लाख करोड़ रूपए के 219 निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं। इनमें सेमीकंडक्टर और एआई से लेकर सीमेंट, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग तक शामिल हैं। ये परियोजनाएँ राज्य के अन्य जिलों में फैली हैं, जिनसे 1.5 लाख रोजगार सृजित होंगे और यह पूरे राज्य में संतुलित विकास की ओर एक बड़ा संकेत है। नए उद्योगों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे l प्रेस वार्ता में  सी एस आई डी  सी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, सचिव उद्योग श्री रजत कुमार, संचालक  उद्योग श्री प्रभात मालिक,  सी एस आई डी सी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार मौजूद थे.


      अब निवेश केवल रायपुर तक सीमित नहीं हैं। प्रश्तवित निवेशों की विशेष बात ये है कि हर 5 में से। निवेश (21 प्रतिशत) आदिवासी बहुल बस्तर संभाग में हैं। 33 प्रतिशत रायपुर संभाग में और 46 प्रतिशत बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभागों में।

         क्षेत्रीय विविधता ने मजबूती दी है। लगभग 50 प्रतिशत निवेश प्राथमिक (थ्रस्ट) क्षेत्रों में हैं जैसे सेमीकंडक्टर और एआई डेटा सेंटर पार्क वहीं सीमेंट और बिजली जैसे पारंपरिक उद्योग भी मजबूत बने हुए हैं। कुल निवेश प्रस्तावों में 57 परियोजनाएँ 1,000 करोड़ रूपए से अधिक की है और 34 परियोजनाएँ 1,000 से ज्यादा रोजगार देने वाली हैं।

           असल कहानी है तेज़ क्रियान्वयन की। 6.063 करोड़ रूपए की 9 बड़ी परियोजनाएँ चालू हो चुकी हैं, जिनसे उत्पादन शुरू हो गया है और 5,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा 109 परियोजनाएँ यानी लगभग आधी उन्नत चरण में हैं। ये या तो निर्माणाधीन हैं या भूमि आवंटन के बाद आगे बढ़ चुकी हैं। ये 24 जिलों और 16 क्षेत्रों में फैली हैं और जल्द ही 87,132 रोजगार सृजित करेंगी। खास बात यह है कि इनमें से 58 प्रतिशत परियोजनाएँ आतिथ्य एवं स्वास्थ्य, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और फार्मा जैसे प्राथमिक क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

            प्रमुख परियोजनाएँ इस रफ्तार को साफ दिखाती हैं। पोलिमेटेक की 10,000 करोड़ रूपए से अधिक की सेमीकंडक्टर फेक्ट्री जो छत्तीसगढ़ की पहली हे को सिर्फ 45 दिनों में भूमि आवंटित हुआ और काम तेज़ी से शुरू हुआ। रेकबैंक का 1,000 करोड़ रूपए का एआई डेटा सेंटर पार्क- देश का पहला-अब लगभग पूरा होने वाला है। ड्रल्स का 625 करोड़ रूपए का पेट फूड विस्तार प्रोजेक्ट ट्रायल प्रोडक्शन में है और इससे 3,000 रोजगार मिलेंगे। वी-राइज़ का तीसरा भारत कार्यालय एक आईटी यूनिट निर्माणाधीन है। अल्ट्राटेक सीमेंट का 1,600 करोड़ रूपए का निवेश चालू हो चुका है। आदित्य बिड़ला समूह का 67.5 मेगावाट का सोलर प्लांट मई में शुरू हो गया। वहीं बस्तर में रापपुर स्टोन क्लिनिक का 350-बेड अस्पताल लगभग तैयार है, जिससे आदिवासी परिवारों को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी

           मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, ‘जो राज्य कभी मुख्य रूप से लोह और इस्पात के लिए जाना जाता था. वह अब सेमीकंडक्टर, एआई डेटा सेंटर पार्क, नवीकरणीय ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं जैसे नए क्षेत्रों का केंद्र बन रहा है। कंपनियाँ सिर्फ निवेश का निर्णय नहीं ले रहीं, बल्कि जल्द से जल्द काम शुरू करना बाहती हैं। हमारी सरकार हर उद्यमी के लिए व्यापार को आसान बनाने और हर चरण में पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।‘

        मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा, ‘सुधारों ने विवेकाधिकार की जगह पारदर्शिता लाई है. जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसका असर साफ दिखता है सरल प्रक्रियाएँ और बड़े पैमाने पर जमीन पर उतरती परियोजनाएँ। यह साबित करता है कि संवेदनशील शासन उद्योग को गति देता है।‘

        वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार ने कहा  हमारा फोकस यह सुनिश्चित करता है कि निवेश प्रस्ताव के बाद निवेशकों की गति न रुके। तेज़ भूमि आवंटन, डिजिटल स्वीकृतियों ओर बेहतर समन्वय से कंपनियों बिना देरी के इरादे से निर्माण तक पहुंच पा रही है।

       इस तेज़ उछाल के पीछे कई अग्रणी सुधार हैं-132 स्वीकृतियों के लिए वन-क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम जन विश्वास अधिनियम के तहत 279 छोटे अपराधों का अपराधमुक्तिकरण (दो जन विश्वास अधिनियम लागू करने वाला पहला राज्य), स्वचालित भूमि म्यूटेशन लागू करने वाला पहला राज्य; एफएआर और ग्राउंड कवरेज में वृद्धि और सेटबेक में कमी, डिजिटल भूमि विवरण (रजिस्ट्री. आरओआर, टैक्स बकाया, न्यायालय प्रकरण); लेआउट और भवन 
स्वीकृति के लिए एकीकृत सॉफ्टवेयर, 24ग7 संचालन और विस्तारित फायर एनओसी। इन सुधारों के चलते डीपीआईआईटी से चार श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर‘ की मान्यता मिली।

       ये सभी पहल केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि गति, जवाबदेही और ज़मीनी परिणामों पर केंद्रित प्रशासनिक संस्कृति को दर्शाती हैं। निवेश की विविधता और क्रियान्वयन की रफ्तार एक बात साफ कर देती है-छत्तीसगढ़ अब सिर्फ निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा, बल्कि वास्तविक परियोजनाएँ बना रहा है, वास्तविक रोजगार पैदा कर रहा है और वास्तविक बदलाव ला रहा है।
और भी

हिंसा से मुक्त और सुरक्षित–समृद्ध बस्तर हमारा संकल्प : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर को हिंसा से मुक्त कर शांति, विकास और विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ाना राज्य सरकार का दृढ़ संकल्प है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा  कि जिला सुकमा के गोंदीगुड़ा क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा की गई सटीक, साहसिक और सफल कार्रवाई ने माओवादी नेटवर्क को करारा झटका दिया है। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बस्तर में हिंसा के दिन अब समाप्ति की ओर हैं और बस्तर तेज़ी से विकास तथा मुख्यधारा की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के दृढ़ नेतृत्व एवं स्पष्ट नीति, सुरक्षा बलों की सतत और प्रभावी कार्रवाई, राज्य सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा स्थानीय जनता के अटूट सहयोग से बस्तर में निर्णायक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। माओवाद की संरचना लगातार कमजोर हो रही है और उनकी हिंसक साजिशें अब प्रभावहीन होती जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है—जो लोग हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास, आजीविका, सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य सरकार ऐसे सभी लोगों के साथ मानवीय दृष्टिकोण से खड़ी है। वहीं, जो अब भी हथियार और भय के रास्ते को नहीं छोड़ेंगे, उनके प्रति सरकार की कोई सहानुभूति नहीं होगी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि शांति, विकास और जनभागीदारी के संयुक्त प्रयासों से बस्तर एक सुरक्षित, समृद्ध और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से अग्रसर होगा।
और भी

राज्य में नई गाइडलाइन दरें लागू : वैज्ञानिक युक्तिकरण से बाजार मूल्य के अनुरूप निर्धारण

 केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, छत्तीसगढ़ द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के विभिन्न जिलों की नवीन गाइडलाइन दरों को अनुमोदन प्रदान किया गया है। यह गाइडलाइन व्यापक सर्वेक्षण, क्षेत्रीय अध्ययन तथा वैज्ञानिक, निष्पक्ष और तर्कसंगत आधार पर तैयार की गई है। नई दरें 20 नवंबर 2025 से प्रदेशभर में प्रभावशील हैं। शासन का उद्देश्य भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करना, वर्षों से चली आ रही विसंगतियों को समाप्त करना तथा भूमि क्रय-विक्रय और पंजीयन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाना है।


इसी कड़ी में रायगढ़ जिले की नई गाइडलाइन दरों को अनुमोदन प्रदान किया गया है। कार्यालय जिला पंजीयक रायगढ़ के अनुसार यह गाइडलाइन दरें विभाग द्वारा किए गए व्यापक सर्वेक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन एवं निष्पक्ष विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई हैं। नई दरें पारदर्शी, सरल एवं व्यवहारिक हैं, जिनमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दरों का नए सिरे से युक्तियुक्तकरण किया गया है। इससे जिले में भूमि क्रय-विक्रय, पंजीयन एवं राजस्व प्रक्रिया अधिक सुगम होगी तथा किसानों, आम नागरिकों और व्यापारियों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप संतुलन स्थापित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग आठ वर्षों से गाइडलाइन दरों में कोई व्यापक परिवर्तन नहीं हुआ था। इस अवधि में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के चलते नई सड़कें, गलियां और आवासीय क्षेत्र विकसित हुए, वहीं पुराने गाइडलाइन ढांचे में लगातार नई कंडिकाएं जुड़ती चली गईं। परिणामस्वरूप एक ही वार्ड या एक ही सड़क पर अलग-अलग दरें प्रचलित हो गई थीं। इससे जहां शासकीय गाइडलाइन दर और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच बड़ा अंतर उत्पन्न हो गया था, वहीं भूमि स्वामियों को आर्थिक हानि के साथ-साथ बैंक ऋण एवं भू-अर्जन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इन सभी विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 में वैज्ञानिक एवं पारदर्शी पद्धति से नई कलेक्टर दर गाइडलाइन तैयार की गई है।

जिले के सभी उपपंजीयक कार्यालय रायगढ़, खरसिया, घरघोड़ा एवं धरमजयगढ़ में पूर्व में 141 वार्डों में कुल 515 कंडिकाएं थीं, जिन्हें समायोजित कर अब 178 कंडिकाएं निर्धारित की गई हैं। नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन दरें पूर्व की असमानताओं को समाप्त करते हुए पुनर्गठित की गई हैं। रायगढ़ नगर पालिक निगम क्षेत्र में पहले 48 वार्डों में 295 कंडिकाएं थीं, जिन्हें विलोपित कर अब 48 वार्डों में केवल 71 कंडिकाएं रखी गई हैं। इसका उद्देश्य दरों में एकरूपता लाना और एक ही क्षेत्र के लिए अलग-अलग दरों की विसंगति को समाप्त करना है।

उदाहरणस्वरूप नगर निगम रायगढ़ के वार्ड क्रमांक 1 में कोतरा रोड जैसे एक ही मार्ग पर पहले अलग-अलग कंडिकाओं के कारण भिन्न दरें प्रचलित थीं। कहीं मुख्य मार्ग की दर 10,790 रुपये थी तो कहीं 10,000 रुपये, जबकि अंदरूनी क्षेत्रों की दरें भी अलग-अलग थीं। नई गाइडलाइन में इन सभी कंडिकाओं को समेकित कर एक ही मार्ग पर आमने-सामने समान दरें निर्धारित की गई हैं तथा वार्ड सीमाओं के भीतर अंदरूनी क्षेत्रों की दरों को भी एकसमान किया गया है। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 12 में एक ही सड़क पर विभिन्न कंडिकाओं के कारण 40,000 रुपये से लेकर 13,300 रुपये तक की अलग-अलग मुख्य मार्ग दरें थीं, जिन्हें अब युक्तियुक्तकरण कर एक समान कर दिया गया है।

एक ही मुख्य मार्ग से लगे अलग-अलग वार्डों में भी पूर्व में दरों में भारी अंतर पाया गया था। उदाहरण के तौर पर रेलवे अंडरब्रिज से जुटमिल मार्ग या मुस्लिम कब्रिस्तान से खराखाट रपटा पुल जैसे मार्गों पर अलग-अलग वार्डों में अलग-अलग दरें थीं, जबकि बाजार मूल्य लगभग समान था। नई गाइडलाइन में ऐसे सभी मामलों में पूरे मार्ग पर समान दरें लागू की गई हैं। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 17 के मुख्य मार्ग की युक्तियुक्त दर को वार्ड क्रमांक 01, 14, 15, 16, 39 एवं 40 तक समान रूप से लागू किया गया है।

नगर निगम क्षेत्र की कॉलोनियों में भी व्यापक सुधार किया गया है। वर्तमान में नगर निगम सीमा के भीतर 267 कॉलोनियां और सीमा के बाहर 11 कॉलोनियां हैं। पूर्व में इन कॉलोनियों की दरों में काफी भिन्नता थी, जिसे समाप्त कर समान प्रकृति और समान सुविधाओं वाली कॉलोनियों के लिए एकसमान दरें निर्धारित की गई हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में गाइडलाइन का निर्धारण नक्शों और जियो-लोकेशन आधारित सर्वे के माध्यम से किया गया है। सर्वे में यह पाया गया कि मुख्य मार्ग और अन्य मार्ग पर स्थित समान प्रकार की भूमि का बाजार मूल्य लगभग समान है। इसी आधार पर मुख्य मार्ग तथा अन्य मार्ग के आमने-सामने स्थित भूमि की दरों में समानता रखी गई है। ग्रामों से होकर गुजरने वाली सड़कों के दोनों ओर स्थित गांवों की दरों को भी एकसमान किया गया है। आसपास स्थित और समान महत्व वाले ग्रामों को वर्गीकृत कर प्रत्येक वर्ग के लिए एक समान दर निर्धारित की गई है।

उदाहरण के रूप में रायगढ़–खरसिया मुख्य मार्ग पर स्थित ग्राम जोरापाली, धनागर और रामपुर छोटे; रायगढ़–घरघोड़ा मार्ग पर लाखा, गेरवानी और शिवपुरी; तथा रायगढ़ से जिंदल स्टील प्लांट होते हुए खरसिया मार्ग पर खैरपुर और बिराईपानी में समान परिस्थितियों के आधार पर दरों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। वहीं रायगढ़ से ओडिशा नेशनल हाईवे के बीच स्थित ग्राम झलमला, भाठनपाली, दूमरमुडा और मिडमिका में मुख्य मार्ग और अंदरूनी क्षेत्रों के बीच वर्षों से चली आ रही विसंगतियों को भी समायोजित किया गया है।

इसके साथ ही शासन द्वारा जनसुविधा की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण राहतें भी दी गई हैं। हकत्याग, दानपत्र एवं बंटवारा नामा जैसे दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क मात्र 500 रुपये निर्धारित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्गमीटर दर को समाप्त कर भूमि का मूल्यांकन हेक्टेयर दर पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। परिवर्तित भूमि में सिंचित भूमि की दो गुना गणना समाप्त की गई है तथा वृक्षों पर लगने वाले प्रभार भी समाप्त कर दिए गए हैं।

नई गाइडलाइन दरों के निर्धारण में शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों, जनसामान्य के हित, पारदर्शिता और वैज्ञानिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जिले के सभी वार्डों और कॉलोनियों में वर्षों से चली आ रही असमानताओं को दूर करते हुए दरों को तर्कसंगत, संतुलित और न्यायसंगत बनाया गया है। नई व्यवस्था से जहां आम नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी, वहीं भूमि क्रय-विक्रय और पंजीयन की प्रक्रिया अधिक सरल, स्पष्ट और पारदर्शी होगी।
और भी

मुख्यमंत्री श्री साय से साहू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विगत दिवस छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन में साहू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने साहू समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारी को बधाई और शुभकामनाएं दी। 


इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, विधायक श्री ईश्वर साहू, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू सहित साहू समाज के नवनिर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष डॉ नीरेंद्र साहू,उपाध्यक्ष श्री सत्यप्रकाश साहू, श्री गिरजा साहू, श्री नारद साहू, श्री नन्द लाल साहू श्री चंद्रभूषण साहू सहित साहू समाज के नवनिर्वाचित राज्य स्तरीय तथा जिला स्तरीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
और भी

मुख्यमंत्री श्री साय से मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रतिभागियों ने की सौजन्य भेंट

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विगत दिवस छत्तीसगढ़ विधानसभा के कार्यालय कक्ष में  मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रतिभागियों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा 5 से 9 नवम्बर तक चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया।


इस प्रतियोगिता में प्रदेश के भिलाई, बिलासपुर, महासमुंद और बस्तर से आए खिलाड़ियों ने भाग लिया और विभिन्न स्पर्धाओं में जीत हासिल की। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और लगन से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित थे।
और भी

‘मनखे-मनखे एक समान’ की भावना को साकार करता मेगा हेल्थ कैम्प : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परम् पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर में मानव सेवा, सामाजिक समरसता और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में 18 से 22 दिसंबर तक आयोजित 5 दिवसीय निःशुल्क मेगा हेल्थ कैम्प 2025 का भव्य शुभारंभ किया।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए अमन, चैन और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि यह 5 दिवसीय निःशुल्क मेगा हेल्थ कैम्प हजारों लोगों के लिए स्वास्थ्य संजीवनी सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने गठन के रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इन 25 वर्षों में स्वास्थ्य सहित सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित कर रही है। वहीं राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार हेतु ₹25 लाख तक की सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि “हेल्थ इज वेल्थ” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन को बचाने और संवारने का संकल्प है। मुख्यमंत्री ने विधायक श्री राजेश मूणत एवं उनकी पूरी टीम को इस विशाल आयोजन के लिए बधाई दी और कैम्प परिसर में विभिन्न जांच स्टालों का अवलोकन भी किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन मात्र एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय करुणा की सशक्त अभिव्यक्ति है। बाबा गुरु घासीदास जी के “सत्य, अहिंसा और समानता” के संदेश से प्रेरित यह महाअभियान समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने का अनुकरणीय प्रयास है। उन्होंने बताया कि 100 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों की सहभागिता से यह कैम्प केवल प्राथमिक जांच तक सीमित नहीं, बल्कि अंतिम निदान एवं उपचार तक का समग्र समाधान प्रदान कर रहा है। डॉ. सिंह ने आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था और व्यापक प्रभाव की सराहना की।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती पर आयोजित यह स्वास्थ्य महाकुम्भ समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इस कैम्प में स्वास्थ्य लाभ लेने पहुँचे हैं। जिन रोगियों का उपचार कैम्प में संभव नहीं होगा, उन्हें आयुष्मान कार्ड के माध्यम से संबद्ध संस्थानों में निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम के आयोजक एवं विधायक श्री राजेश मूणत ने बताया कि बाबा गुरु घासीदास जी के अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” से प्रेरित होकर इस मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि एक ही छत के नीचे स्वास्थ्य की सभी प्रमुख विधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं, जहाँ एक्स-रे, ईको, सोनोग्राफी सहित विविध जांचें एवं आवश्यक दवाइयाँ पूर्णतः निःशुल्क दी जा रही हैं। महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर जांच हेतु अत्याधुनिक मशीनों की विशेष व्यवस्था की गई है। एम्स रायपुर, बालाजी, रावतपुरा, गंगा डायग्नोसिस सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थान और देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सक इस सेवा कार्य में सहभागिता निभा रहे हैं।

कार्यक्रम को विधायक श्री किरण सिंह देव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री सुनील सोनी, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, श्री अनुज शर्मा, श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष श्री रूप नारायण सिन्हा, एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. अशोक जिंदल, वरिष्ठ चिकित्सकगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
और भी

वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण हर भारतीय के लिए गर्व का विषय – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की।


उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
और भी

दो वर्ष की निरंतर सेवा, निरंतर विकास की दिशा में एक और पहल: मुख्यमंत्री श्री साय ने कॉफी टेबल बुक्स का किया विमोचन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज शाम नवीन विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में “दो साल निरंतर सेवा,निरंतर विकास” की भावना को समर्पित छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाने वाली जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित आठ कॉफी टेबल बुक्स का विमोचन किया गया। 

इनमें बस्तर दशहरा (हिन्दी), बस्तर दशहरा (अंग्रेजी),पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ (हिन्दी),पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ (अंग्रेजी), छत्तीसगढ़ के अतुल्य जलप्रपात (हिन्दी), छत्तीसगढ़ के अतुल्य जलप्रपात (अंग्रेजी),बैगा टैटू (हिन्दी) और बैगा टैटू (अंग्रेजी) शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये कॉफी टेबल बुक्स छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, ऐतिहासिक परंपराओं, आदिवासी कला और प्राकृतिक विरासत को देश-विदेश तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इसे राज्य की पहचान को सशक्त करने वाला सार्थक प्रयास बताया।

इस अवसर पर जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव , महासमुन्द विधायक श्री योगेश्वर सिन्हा, जनसंपर्क विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, जनसंपर्क आयुक्त श्री रवि मित्तल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, पूर्व विधायक श्री खिलावन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
और भी

छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प - मुख्यमंत्री श्री साय

बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागते हुए भारतीय संविधान में आस्था जताई है और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में चल रहे सतत और ठोस प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ नीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास, हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं। यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि भय और भ्रम से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों के पुनर्वास, सुरक्षा, आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।

मुख्यमंत्री ने आज भी भटके हुए युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का मार्ग त्यागें, लोकतंत्र और विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें तथा प्रदेश और देश के निर्माण में सहभागी बनें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जारी रहेंगे।
और भी

लाला जगदलपुरी की जयंती पर मुख्यमंत्री श्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर के महान साहित्यकार लाला जगदलपुरी की जयंती (17 दिसम्बर) पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए नमन किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लाला जगदलपुरी जी ने साहित्य को माध्यम बनाकर बस्तर की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और लोकजीवन को देशभर में पहचान दिलाई। हिन्दी के साथ-साथ हल्बी, भतरी और छत्तीसगढ़ी भाषाओं में किया गया उनका सृजन बस्तर की आत्मा और संवेदनाओं का सशक्त साहित्यिक दस्तावेज है।

उन्होंने कहा कि “बस्तर : इतिहास एवं संस्कृति” और “बस्तर की लोक कथाएँ” जैसी कृतियाँ बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को समझने की दृष्टि से अमूल्य हैं और आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पं. सुन्दरलाल शर्मा आंचलिक साहित्य अलंकरण से सम्मानित लाला जगदलपुरी जी की साहित्यिक विरासत छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर है। उनका जीवन और कृतित्व सदैव समाज को संस्कृति से जोड़ने और उसे सहेजने की प्रेरणा देता रहेगा।
और भी

एनएच एमएमआई रायपुर के डॉक्टर ने 1.5 साल में 100 सफल ब्रेन और स्पाइन ट्यूमर सर्जरी कर हासिल किया महत्वपूर्ण न्यूरोसर्जिकल माइलस्ट्रोन

रायपुर,  एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर ने उन्नत न्यूरोसर्जिकल देखभाल में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वरिष्ठ कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. घनश्याम ससापरधी ने पिछले डेढ़ साल में 100 सफल ब्रेन और स्पाइन ट्यूमर सर्जरी पूरी की हैं। यह उपलब्धि मध्य भारत में अत्याधुनिक न्यूरोसर्जिकल उपचार तक बढ़ती पहुंच को दर्शाती है और मरीजों को उच्चस्तरीय उपचार के लिए मेट्रो शहरों की यात्रा करने की आवश्यकता को कम करती है।
 
इन सर्जरी में कई अत्यंत जटिल प्रक्रियाएँ शामिल थीं- जैसे स्पीच और मोटर क्षेत्रों के पास ट्यूमर के लिए अवेक क्रैनियोटॉमी, एंडोस्कोपिक ब्रेन ट्यूमर एक्सिशन, उन्नत स्कूल-बेस सर्जरी, और जटिल स्पाइन ट्यूमर रिमूवल। प्रत्येक सर्जरी में अत्यधिक सटीक योजना और महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल कार्यों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।
 
अस्पताल में मिले उत्कृष्ट परिणाम अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग से संभव हो पाए हैं, जिनमें शामिल हैं-न्यूरोनेविगेशन, इंट्रा-ऑपरेटिव अल्ट्रासाउंड, न्यूरोमॉनिटरिंग, हाई डेफिनिशन एंडोस्कोपी, ब्रेन मैपिंग, एमआरआई ट्रैक्टोग्राफी, नवीनतम एमआरआई रआई और सीटी इमेजिंग सिस्ट्म, CUSA और आधुनिक माइक्रोस्‌कोप। ये तकनीकें सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण संरचनाओं को वास्तविक समय में देखने में में मदद करती हैं, जिससे सुरक्षित सर्जिकल मार्ग बनते हैं और पोस्ट्-ऑपरेटिव जटिलताएँ कम होती हैं।
 
उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. घनश्याम ससापरधी ने कहा, "इस अवधि में 100 जटिल ट्यूमर सर्जरी सफलतापूर्वक पूरा करना सुरक्षा और सटीकता पर हमारी साझा प्रतिबद्धता के कारण संभव हो पाया है। रियल-टाइम इमेजिंग और सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी करने वाली तकनीकें बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में बहुत मदद करती हैं। हमारी न्यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी और आईसीयू टीम हर कदम पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।"
 
एनएच एमएमआई रायपुर की न्यूरोसर्जिकल टीम ट्यूमर उपचार के अलावा ब्रेन एन्यूरिज़्म, एवीएम, स्ट्रोक सर्जरी, एपिलेप्सी सर्जरी और मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी जैसी कई गंभीर स्थितियों को भी विशेषज्ञता के साथ संभालती है, जिससे अस्पताल की व्यापक न्यूरोलॉजी सेवाएँ और मजबूत होती हैं।
 
सहायक विभाग भी इस देखभाल की महत्वपूर्ण नींव हैं। इनमें क्लिनिकल लीड न्यूरोलॉजी डॉ. एच. पी. सिन्हा, न्यूरोलॉजी के डॉ. प्रशांत कुमार, एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी डॉ. राकेश चंद, और क्रिटिकल केयर विभाग के एचओडी डॉ. प्रदीप शर्मा शामिल हैं। ये सभी विशेषज्ञ जटिल जरूरतों वाले मरीजों के लिए बहु-विषयक सहयोग सुनिश्चित करते हैं।
 
डॉक्टर बताते हैं कि कई मरीज लगातार सिरदर्द, अचानक दृष्टि समस्याएँ, असंतुलन, दौरे, या अंगों में सुन्नता जैसे लक्षणों के साथ आते हैं- जिन्हें अक्सर सामान्य स्वास्थ्य समस्याएँ समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उनका कहना है कि समय पर जांच कराने से उपचार विकल्प और रिकवरी दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
 
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर श्री अजीत बेल्लमकोंडा ने कहा, "बढ़ते मामलों से यह स्पष्ट है कि जनजागरूकता बहुत महत्वपूर्ण है। जब लोग शुरुआती लक्षणों को पहचानते हैं और समय पर जांच कराते हैं, तो उपचार अधिक सुरक्षित और रिकवरी बेहतर होती है। हमारा लक्ष्य है कि मध्य भारत के लोग अपने घर के पास ही विश्वसनीय और उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ प्राप्त कर सकें।"
 
यह उपलब्धि एनएच एमएमआई रायपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा को न्यूरोसर्जिकल उत्कृष्टता केंद्र के रूप में और मजबूत करती है। सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ सहयोग पर केंद्रित यह अस्पताल जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से जूझ रहे मरीजों के लिए लगातार बेहतर परिणाम प्रदान कर रहा है।
और भी

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विजय दिवस पर शहीदों को किया नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विजय दिवस (16 दिसंबर) के अवसर पर राष्ट्र के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजय दिवस भारतीय सेना के शौर्य, साहस और अदम्य पराक्रम का गौरवपूर्ण प्रतीक है, जो देशवासियों के हृदय में गर्व और कृतज्ञता का भाव जाग्रत करता है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध का स्मरण करते हुए कहा कि हमारे वीर जवानों ने असाधारण साहस, त्याग और बलिदान का परिचय देकर देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की। उनके पराक्रम से न केवल भारत की सैन्य शक्ति विश्व मंच पर स्थापित हुई, बल्कि मानवीय मूल्यों और राष्ट्रधर्म की मिसाल भी प्रस्तुत हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की अमर प्रेरणा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे देशभक्ति, अनुशासन और एकता के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलना, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना और देश सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना ही विजय दिवस पर उन्हें सच्ची और स्थायी श्रद्धांजलि है।
और भी

अब तक 17.24 लाख टोकन से 87 लाख टन धान की हो चुकी खरीदी

 मुख्यमंत्री  श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़  में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केन्द्र सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर राज्य के पंजीकृत किसानों से धान खरीदी का कार्य  अनवरत रूप से जारी है। कृषि  विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में संचालित 2739 खरीदी केन्द्रों के माध्यम से धान की खरीदी  सुगमता पूर्वक की जा रही है । धान की खरीदी के लिए 15 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी, 2026 तक की अवधि निर्धारित की गई है । 


       राज्य के किसानों से सुगमता पूर्वक धान खरीदी के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है , वहीं  अवैध धान परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

 7.5 प्रतिशत किसान एवं 19 प्रतिशत अधिक रकबा का पंजीयन 

         राज्य में किसानों से धान खरीदी हेतु समुचित व्यवस्था की गई है । खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसान पंजीयन का कार्य एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है । वर्तमान में धान की खरीदी हेतु 27.40 लाख किसानों के धान का रकबा 34.39 लाख हेक्टेयर का पंजीयन किया गया है । जबकि गत वर्ष 25.49 लाख किसानों द्वारा रकबा 28.76 लाख हेक्टेयर से समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया गया था । इस प्रकार गत वर्ष विक्रय गये किसानों की  तुलना में इस वर्ष लगभग 7.5 प्रतिशत किसान एवं 19 प्रतिशत रकबा का पंजीयन अधिक हुआ है ।

एग्रीस्टेक पंजीयन से छूट

        संस्थागत पंजीयन, भूमिहीन किसान (अधिया/रेगहा), डूबान क्षेत्र के किसान, वन अधिकार पट्टाधारी किसान, ग्राम कोटवार (शासकीय पट्टेदार) श्रेणी के किसानों को एग्रीस्टेक पंजीयन से छूट प्रदान की गई है । किसान पंजीयन का कार्य वर्तमान में जारी है ।

24 घंटे टोकन प्राप्त करने की सुविधा  "टोकन व्यवस्था का हुआ सरलीकरण

     मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों के हितों का ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने अब 24 घंटे टोकन प्राप्त करने की सुविधा "तुहर टोकन" एप्प में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदान कर दी है । वर्तमान में 17.24 लाख टोकन से 87 लाख टन धान खरीदी हेतु जारी किया जा चुका है । किसानों द्वारा आगामी 20 दिवस के टोकन प्राप्त किये जा सकते हैं ।

किसानों को 7 हजार 771 करोड़ रुपए की राशि का त्वरित भुगतान

       अधिकारियों  ने बताया कि 11 दिसंबर 2025 की स्थिति में किसानों  को धान खरीदी के एवज में 7 हजार 771 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान  समर्थन मूल्य  के तहत का किया जा चुका है ।

अवैध धान विक्रय/परिवहन पर नियंत्रण

       जिलों में विशेष चेकिंग दल का गठन राजस्व, खाद्य, सहकारिता, वन, मंडी आदि विभागों के अधिकारियों का गठन कर किया गया है ।
राज्य स्तर पर मार्कफेड अंतर्गत स्टेट इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (ICCC) की स्थापना की गई है । अब तक प्रदेश में अवैध धान परिवहन/भण्डारण के 2000 से अधिक प्रकरण बनाये गये हैं, जिसमें अब तक 1.93 लाख टन अवैध धान जब्त किया गया है ।
और भी

विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां विधानसभा में बैठक आयोजित की गई

 विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां विधानसभा के समिति कक्ष में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई।बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप सहित समिति के सदस्य उपस्थित थे।

और भी

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में ऐतिहासिक उपलब्धि: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कॉफी टेबल बुक का किया अनावरण

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत अपनी प्रथम मंत्रिपरिषद बैठक में 18 लाख आवास स्वीकृत किए जाने के निर्णय के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एक आकर्षक कॉफी टेबल बुक का अनावरण किया। यह पुस्तक राज्य में ग्रामीण आवास योजना के तहत प्राप्त ऐतिहासिक प्रगति, नवाचारों और उपलब्धियों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती है।


प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य को प्राप्त 26.27 लाख आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 24.37 लाख आवासों की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है, जबकि 17.14 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि वर्तमान सरकार ने अपने मात्र दो वर्षों के अल्प कार्यकाल में ही लगभग 8 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कर राज्य में ग्रामीण आवास निर्माण के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इसी अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत 10,000 आजीविका डबरी निर्माण कार्यों का भी शुभारंभ किया। इन डबरियों को मई 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मनरेगा के तहत पात्र हितग्राहियों, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थी भी शामिल हैं, की निजी भूमि पर इन डबरियों का निर्माण किया जाएगा। इससे न केवल ग्रामीण रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों एवं ग्रामीण परिवारों की आजीविका और आय में भी स्थायी वृद्धि सुनिश्चित होगी।

कार्यक्रम के दौरान कवर्धा जिले के जनमन आवास योजना के हितग्राहियों तथा नारायणपुर जिले के आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों के लिए संचालित विशेष परियोजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों को आजीविका डबरी के स्वीकृति पत्र भी प्रदान किए गए, जो सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक सिंह, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक एवं महात्मा गांधी नरेगा के आयुक्त श्री तारन प्रकाश सिन्हा तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
और भी

साय सरकार की प्रथम कैबिनेट के दो वर्ष पूर्ण: 18 लाख पीएम आवास को दी गई थी स्वीकृति

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपनी प्रथम मंत्रिपरिषद बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 18 लाख आवासों की स्वीकृति के निर्णय के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में 10,000 आजीविका डबरी निर्माण कार्यों का शुभारंभ किया गया। 

कार्यक्रम में कवर्धा जिले के जनमन आवास योजना के हितग्राहियों तथा नारायणपुर जिले के आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए संचालित विशेष परियोजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों को आजीविका डबरी के स्वीकृति पत्र भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक सिंह, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक एवं आयुक्त महात्मा गांधी नरेगा श्री तारन प्रकाश सिन्हा तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2016 से 2026 की अवधि के लिए 26.27 लाख आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 24.37 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 17.14 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में मात्र दो वर्षों में लगभग 8 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है, जो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विगत दो वर्षों के अल्प कार्यकाल में ही लगभग 8 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि राज्य में आवास निर्माण की गति को दर्शाती है। विशेष रूप से पिछले 6 महीनों में प्रतिदिन औसतन 2000 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया, जो प्रशासनिक दक्षता और सतत निगरानी का परिणाम है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का शुभारंभ अप्रैल 2016 में किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत प्रति आवास 1.20 लाख रूपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही, योजना का अन्य योजनाओं से अभिसरण किया गया है, जिसके तहत मनरेगा से 90 दिवस की मजदूरी तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से 12 हजार रूपए की सहायता शौचालय निर्माण हेतु दी जाती है, जिससे हितग्राही को संपूर्ण आवास सुविधा प्राप्त हो सके।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत प्रदेश में 10,000 आजीविका डबरी निर्माण का कार्य मोर गांव-मोर पानी महाअभियान के अंतर्गत क्रियान्वित किया जा रहा है। इन डबरियों का निर्माण पात्र हितग्राहियों की निजी भूमि पर किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राही भी सम्मिलित हैं। सभी डबरियों को मई 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

आजीविका डबरी परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन, सिंचाई सुविधा में वृद्धि, मत्स्य पालन, बत्तख पालन, वृक्षारोपण एवं सिघाड़ा उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका के अतिरिक्त अवसर प्राप्त होंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी। इस प्रकार, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और मनरेगा के अभिसरण से राज्य सरकार ग्रामीण विकास, आवास सुरक्षा, रोजगार सृजन और जल संरक्षण के लक्ष्यों को एक साथ साकार कर रही है, जो छत्तीसगढ़ के समावेशी और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
और भी

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल की ‘ऊर्जावान छत्तीसगढ़’ कॉफी टेबल बुक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नवीन विधानसभा परिसर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में रजत महोत्सव विशेष छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल द्वारा प्रकाशित ‘ऊर्जावान छत्तीसगढ़’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। यह काफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना तथा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल एवं उसकी उत्तरवर्ती पावर कंपनियों की 25 वर्षों की गौरवमयी यात्रा, उपलब्धियों और विकास गाथा पर आधारित है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों, अधोसंरचना विकास, नवाचारों और जनसेवा आधारित कार्यों का सजीव दस्तावेज है। कॉफी टेबल बुक में छत्तीसगढ़ राज्य ने ऊर्जा क्षेत्र में सुदृढ़ नियोजन, आधुनिक तकनीक और उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियों को शामिल किया गया है और सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की स्थापना से लेकर 32 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता, कोयला खनन के सुदृढ़ संचालन और राज्यव्यापी पारेषण- वितरण ढांचे के विस्तार तक बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार को प्रदर्शित किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल की टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण, प्रतिबद्धता और योगदान की सराहना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एवं अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी श्री सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा सचिव एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन तथा डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी श्री रोहित यादव, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह कंवर सहित वरिष्ठ अधिकारी श्री जे.एस. नेताम, श्री संजीव सिंह एवं श्री आशुतोष जायसवाल उपस्थित थे।
और भी

छत्तीसगढ़ बना भारत का ग्रोथ इंजन

 विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य अनुरूप छत्तीसगढ़ में न केवल तेजी से अधोसंरचनाएं विकसित हो रही है, बल्कि सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल के लक्ष्य को भी हासिल किया जा रहा है। विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ भारत के विकास इंजन के रूप में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति में डिफेंस, आईटी, एआई, ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों को विशेष पैकेज दिया जा रहा है। राज्य में अब तक 7.69 लाख रूपए के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। राज्य में विकास, विश्वास और सुरक्षा का नया वातावरण बना है। राज्य की प्रगति में माओवाद आतंक हमेशा से ही बाधक रही है। अब यह बाधा दूर होने जा रही है। माओवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं परिणाम आधारित बनाने के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया है। शासन व्यवस्था में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु 01 दिसम्बर 2025 से मंत्रालय महानदी भवन में अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर दी गई है, जिससे कार्य संस्कृति और जवाबदेही को नई पहचान मिल रही है।
प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण जुड़ा है नवा रायपुर अटल नगर में छत्तीसगढ़ के नए भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया। यह विधानसभा भवन नई ऊर्जा, नई सोच और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प का प्रतीक है।

पिछले 2 वर्षों में बस्तर और सरगुजा अंचल के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वहां सड़क, रेल, स्वास्थ्य और संचार सहित कई नई परियोजनाएं भी शुरू की गई। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा  दिया गया है। बस्तर में पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास किए जा रह हैं। इसके लिए नई होम स्टे पॉलिसी और इको टूरिज्म के लिए विशेष प्रावधान रखे है। बस्तर और सरगुजा अंचल में उद्योगों की स्थापना पर विशेष सुविधाएं, छूट और रियायतें दी जा रही है। इसके अलावा उद्योगों को विशेष पैकेज के अंतर्गत सस्ती जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। 

नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत माओवाद आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित 69 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से मूलभूत सुविधाओं के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। बस्तर की बदलती फिजा को सबके सामने लाने में बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे बड़े आयोजनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बस्तर के युवा अब विकास से जुड़ना चाहते है, इसकी बानगी यहां चलाए जा रहे हैं। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों में देखी जा सकती है। बस्तर की युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए पर्यटन ऑटोमोबाईल, पायलट, आईटी आदि क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

राज्य में सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल को हासिल करने के लिए सामाजिक, आर्थिक गतिशीलता के लिए शुरू की गई कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत 40 लाख घरों में पीने का स्वच्छ जल मुहैया कराया जा रहा है। इसी प्रकार 26 लाख से अधिक परिवारों के लिए पीएम आवास स्वीकृत किए गए हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने और समाज में उनकी भूमिका बढ़ाने के लिए महतारी वंदन योजना में 70 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खाते में एक-एक हजार रूपए की राशि दी जा रही है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 14 हजार करोड़ रूपए की राशि जारी की जा चुकी है। आयुष्मान भारत योजना के दायरे में राज्य की 98 प्रतिशत आबादी को लाया जा चुका है। 

छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार और समर्थन मूल्य में खरीदी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मोदी की गारंटी के अंतर्गत किसानों को देश में सर्वाधिक धान का मूल्य दिया जा रहा है। राज्य के 2300 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों में सफलतापूर्वक धान की खरीदी की जा रही है। किसानों से धान प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से तथा 3100 रूपए प्रति क्विंटल की कीमत दी जा रही है। किसान हितैषी फैसलों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में किसानों के खाते में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। किसान इस राशि का खेती किसानी में भरपूर निवेश कर रहे हैं और इससे बाजार भी गुलजार हुए हैं जिससे शहरी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर दिख रहा है। ट्रैक्टर आदि की बिक्री ने रिकार्ड आंकड़ा छू लिया है।
और भी