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छापेमारी के दौरान 40 टन अवैध कोयला जब्त...

 कोयले से लदी एक गाड़ी और चार मोटरसाइकिलें भी जब्त

कोरबा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कलेक्टर संजीव झा के निर्देश पर अवैध कोयला भंडारण पर जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने बुधवार देर शाम ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई की। राजस्व विभाग, खनिज विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 2 जगहों पर लगभग 40 टन कोयला जप्त किया गया। करतला में खान ढाबा के पीछे झाड़ियों के आस पास लगभग 10 टन और चांपा में  विरेंद्र सिंह के आवासीय परिसर में लगभग 30 टन अवैध कोयला भंडारण पाया गया। करतला में जांच के दौरान मौका क्षेत्र में उपस्थित मजदूर मौके से फरार हो गए। करतला में कोयला से भरा हुआ एक गाड़ी और चार मोटरसाइकिलें भी जप्त की गई। इसके अलावा मौका जांच में तौल कांटा बांट, कोयला खरीदी बिक्री, मजदूरों का भुगतान और पैसों के लेनदेन से संबंधित संबंधित रजिस्टर भी जप्त किया गया। दस्तावेजों को जांच के लिए खनिज कार्यालय भेजा गया तथा गाड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे को थाना करतला में सुरक्षार्थ  रखा गया है। इसी प्रकार तहसील करतला के ग्राम चांपा में विरेंद्र सिंह के आवासीय परिसर में अवैध रूप से कोयले खनिज का भंडारण पाया गया। मौका जांच में लगभग 30 टन कोयले का भंडारण पाया गया। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा भी पाया गया। जमीन मालिक के पास उनके परिसर में भंडारित कोयले के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं पाया गया। मौके पर पाए गए कोयले और तौल कांटे को संयुक्त टीम द्वारा जब्ती की कार्रवाई की गई।


एसडीएम कोरबा श्रीमती सीमा पात्रे ने बताया की करतला के खान ढाबा के पीछे जमीन में और ग्राम चांपा में अवैध कोयला भंडारण होने और कोयले की अवैध खरीदी बिक्री की सूचना पर छापामार कार्रवाई की गई। दोनो जगहों के निरीक्षण के दौरान कोयला भंडारण पाया गया। साथ ही कोयला खरीदी बिक्री के भी दस्तावेज पाए गए। एसडीएम ने बताया की दोनो जगहों पर कोयला के वैध  खरीदी बिक्री और भंडारण के कोई साक्ष्य नहीं पाए गए। जमीन मालिकों द्वारा खनिज से संबंधित कोई वैध प्रमाण भी नही प्रस्तुत किया गया। एसडीएम ने बताया की दोनों जगहों पर की गई छापामार कार्रवाई के दौरान पाए गए कोयले को जब्ती कर विभागीय कार्रवाई की जा रही है। साथ ही आसपास के लोगों से भी गतिविधियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। कार्यवाही में राजस्व विभाग से तहसीलदार मुकेश देवांगन, नायब तहसीलदार लखेश्वर सिदार, खनिज विभाग से खनिज निरीक्षक जीत चंद्राकर एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम शामिल थी।

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हमारे प्रधानमंत्री का अपमान देश नहीं सहेगा : भूपेश बघेल

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भानुप्रतापपुर विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियारी धमसान तेज हो गया है। कांग्रेस और भाजपा ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं आरोप-प्रत्यारोप भी जमकर चल रहा है। जहां एकतरफ कांग्रेस भाजपा प्रत्याशी को बलात्कार का आरोपी बता रही है तो दूसरी तरफ भाजपा इसे कांग्रेस का षड़यंत्र बता रही है। इस बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ ब्रम्हानंद नेताम की फोटो को ट्वीट करते हुए इसे देश के प्रधानमंत्री का अपमान बताया है।


मुख्यमंत्री बघेल ने ट्वीट कर कहा कि- बलात्कार के आरोपी की तस्वीर के साथ प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाकर भाजपा उनका अपमान कर रही है। हमारे प्रधानमंत्री का अपमान देश नहीं सहेगा। भाजपा के खिलाफ वोट कर प्रधानमंत्री पद की गरिमा को बचाएँ। साथ ही काम VS कांड का हैशटेग भी दिया है।

 

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आरोपी तो आप भी हैं दाऊजी : डॉ. रमन सिंह

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भानुप्रतापपुर विधानसभा चुनाव से पहले सियासत तेज हो गई है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। इस बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ ब्रम्हानंद नेताम की फोटो को ट्वीट करते हुए इसे देश के प्रधानमंत्री का अपमान बताया है। इस पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा, आरोपी तो आप भी हैं दाऊजी....।

दरअसल मुख्यमंत्री बघेल ने ट्वीट कर कहा कि- बलात्कार के आरोपी की तस्वीर के साथ प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाकर भाजपा उनका अपमान कर रही है। हमारे प्रधानमंत्री का अपमान देश नहीं सहेगा। भाजपा के खिलाफ वोट कर प्रधानमंत्री पद की गरिमा को बचाएँ। इस पर पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने कहा, आरोपी तो आप भी हैं दाऊजी, आपके खिलाफ अश्लील सीडी लहराने का आरोप है आपको गिरफ़्तार भी किया, गया उसके बाद भी आपकी फोटो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ क्यों छप रहे हैं। यदि आपको प्रधानमंत्री के सम्मान की चिंता है तो पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान के खिलाफ इस्तीफे की मांग करनी चाहिए। दो तरफ़ा बात नहीं होनी चाहिए।

 

 

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तेल कंपनियों की मुनाफाखोरी से जनता त्रस्त, केन्द्र सरकार मौन : जैन संवेदना ट्रस्ट

आमजनता को राहत दिलाने की मांग करते हुए ट्रस्ट से प्रधानमंत्री व पेट्रोलियम मंत्री को लिखा पत्र

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के उपरांत भी तेल कंपनियां मुनाफाखोरी के उद्देश्य से पेट्रोल डीजल की कीमतों में कमी नही कर ही है। इसका सीधा असर गरीब मध्यमवर्गीय जनता पर कमरतोड़ महंगाई से पड़ रहा है।


जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने कहा कि अप्रेल माह में कच्चे तेल का मूल्य लगभग 112 डॉलर प्रति बैरल था जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घटते घटते अभी 81 डॉलर प्रति बैरल लगभग हो गया है। बावजूद इसके तेल कंपनियों द्वारा पिछले 6 माह से पेट्रोल डीजल की कीमतों में किसी प्रकार की कमी नही की गई है। जबकि देश का लगभग हर नागरिक इससे प्रभावित है।

इसका सीधा असर जनता पर कमरतोड़ महंगाई के रूप में पड़ रहा है । गरीब व मध्यमवर्गीय जनता प्रतिदिन ठगी जा रही है । करोना त्रासदी के बाद जब मार्केट पूर्ण रूप से खुल गया है , त्योहारी सीज़न के बाद शादी व्याह का सीजन चल रहा है , ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में कमी का फायदा आमजनता को मिलना चाहिए परन्तु केन्द्र सरकार की निष्क्रियता के कारण मुनाफा तेल कंपनियां कमा रही है।

महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने कहा कि पेट्रोल डीज़ल के मूल्य निर्धारण को तेल कंपनियों को सौपने के पीछे केन्द्र सरकार की मंशा यह थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में घट बढ़ का फायदा प्रतिदिन जनता को सीधे मिले । कच्चे तेल का मूल्य बढ़ने पर पेट्रोल डीज़ल के दाम तुरन्त बढ़ा कर भार जनता पर डाला जाता रहा है लेकिन पिछले 6 माह में कच्चे तेल के मूल्यों में कमी का फायदा जनता को नही दिया जा रहा है । पेट्रोल डीजल के मूल्यों को स्थिर रखकर तेल कंपनियां सीधे मुनाफाखोरी में लगी हुई है और केन्द्र सरकार की चुप्पी साधे रहना जनता के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है।

जैन संवेदना ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पेट्रोल डीजल के दामों में कमी की मांग की है। कोचर व चोपड़ा ने कहा कि सरकार का काम मुनाफा कमाना नही है , जनता की तकलीफों को समझना और दूर करने समुचित कदम उठाया जाना चाहिए । कच्चे तेल के दामों में  28 प्रतिशत की कमी का लाभ जनता को मिलना चाहिए । पेट्रोल डीजल के दामों से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है । प्रधानमंत्री जी को तुरन्त संवेदनशील निर्णय लेने की अपेक्षा की जा रही है।

 

 

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एड्स के प्रति जागरूक करने को 1 से 15 दिसंबर तक चलेगा जागरूकता पखवाड़ा

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 1 से 15 दिसंबर तक विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य में एड्स जागरूकता पखवाड़ा मनाया जाएगा। इस दौरान लोगों को एड्स के प्रति जागरूक किया जाएगा। पखबाड़े के दौरान स्वास्थ्य विभाग एचआईवी एड्स को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। इसके साथ ही एआरटी सेंटर द्वारा भी एचआइवी पाजिटिव मरीजों का उपचार करने के साथ ही उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयास पर जोर दिया जायेगा।


महिलाओं में एचआईवी एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ी


राज्य के एनएफएचएस-5 के आंकड़ों में यह बात सामने आई है कि राज्य में पहले जहाँ 20 प्रतिशत महिलाए ही एचआईवी एड्स के बारे में जानती थी वहीं अब 23 प्रतिशत महिलाओं को एचआईवी एड्स के बारे में पर्याप्त जानकारी है। इसके अतिरिक्त पहले 57 प्रतिशत महिलाएं ही जानतीं थीं कि शारीरिक संबंध के दौरान कंडोम के प्रयोग से एचआईवी एड्स से बचा जा सकता है वहीँ अब लगभग 76 प्रतिशत महिलाओं को इस बारे में पता है।


विश्व एड्स दिवस के बारे में सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया, “रायपुर  में एचआईवी पॉजिटिव लोगों को बेहतर उपचार देने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह बीमारी और न बढ़े इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसीलिए अधिक से अधिक मरीजों का एचआईवी टेस्ट करके उनका रजिस्ट्रेशन एआरटी सेंटर में कराया जा रहा है, जिससे वह सही उपचार लेकर एक बेहतर जीवन जी सकें।“


क्या है एड्स


एचआईवी यानि एड्स एक ऐसा वायरस है जो हमारी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। इससे तरह तरह की बीमारियां लोगों को जल्द ही घेर लेती हैं। इसी अवस्था को एड्स कहते हैं।


सिरिंज से नशा भी बन रहा बड़ा कारण


इंजेक्शन से नशा करने वाले आपस में एक दूसरे पर प्रयोग की गई सिरिंज का उपयोग कर लेते हैं। जिससे उन्हें उस समय तो होश नहीं रहता, लेकिन उनकी इस लापरवाही से एचआईवी संक्रमण एक से दूसरे में जरूर पहुंच जाता है। ओएसटी (ओरल सबटीयूएड थेरेपी) सेंटर में ऐसे हजार से ज्यादा मरीजो का उपचार चल रहा है, जो बार बार संक्रमित सुई का उपयोग करते हैं। इनमें कई लोग एचआईवी संक्रमित भी हैं।


यह है एचआईवी संक्रमण के मुख्य कारण


 असुरक्षित यौन संबंध।


संक्रमित सुई का बार-बार उपयोग।

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मोदी राज में बेरोजगारी 50 साल में सबसे ज्यादा : कांग्रेस

 छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर आज भी देश में सबसे कम : सुशील

रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा नेता आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण  PLFS  की ताजा रिपोर्ट को राज्य के संदर्भ में गलत प्रस्तुत कर रहे है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इस रिपोर्ट के अनुसार भी अन्य राज्यों की अपेक्षा आज भी छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर सबसे कम है। बल्कि इस रिपोर्ट ने रोजगार के संबंध में मोदी सरकार की नाकामियों को उजागर किया है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण  ¼PLFS½ के निष्कर्षो के अनुसार ग्रामीण और शहरी भारत दोनो में 1972 के बाद बेरोजगारी दर सबसे अधिक है। इसका सीधा अर्थ है मोदी सरकार देश के लोगों को रोजगार उपलब्ध करा पाने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। ग्रामीण और शहरी दोनों समूहों में पुरुषों और महिलाओं के बीच बेरोजगारी की दर भी सबसे अधिक है। 2011-12 के बाद से बेरोजगारी दर में वृद्धि ग्रामीण पुरुषों के बीच तीन गुना से अधिक है और ग्रामीण महिलाओं में दोगुनी से अधिक है। शहरी क्षेत्रों में, पुरुषों , महिलाओं में बेरोजगारी दर दोगुनी से अधिक है और बेरोजगारी दर, 15-29 साल के युवाओं और बेहतर शिक्षा पाने वाले युवाओं के बीच तेजी से बढ़ी है। ग्रामीण बेरोजगारी दर 8.5 प्रतिशत है जबकि शहरी दर 9.6 प्रतिशत है। कुल बेरोजगारी दर 8.9 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्रों में, महिलाओं में बेरोजगारी दर पुरुषों की तुलना में अधिक है।


प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जब 2018 में भाजपा की सरकार छत्तीसगढ़ में थी तब छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर 22 फीसदी थी आज छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर आधा फीसदी से भी कम है, जो देश में सबसे कम है। किसी भी राज्य में इतनी कम बेरोजगारी दर नही है। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ में 5 लाख युवाओं को भूपेश सरकार ने रोजगार दिया। सरकारी नौकरी के द्वार खोले गये आने वाले 5 साल में 15 लाख युवाओं को रोजगार देने के लिये छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन का गठन किया गया है।

 
 
 



सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आज जो देश के बेरोजगारी की दर है 50 साल के सर्वोच्च स्थान पर है। मोदी के वायदे के अनुसार हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार मिलना था लेकिन नही मिला। अभी तक 17 करोड़ युवाओं को रोजगार मिलता तो छत्तीसगढ़ की आबादी के अनुपात में लगभग 29 लाख 76 हजार युवाओं को हमारे युवाओं को रोजगार मिलता।

 

 

 

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उद्यानिकी फसल के किसान ले सकते है ’रबी 2022’ फसल बीमा योजना का लाभ

15 दिसम्बर तक करा सकते है फसलों की बीमा

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के किसान को पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना ‘रबी 2022‘ का लाभ ले सकते है। इसके लिए 15 दिसंबर तक की समय-सीमा तय की गई है।


गौरतलब है कि उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे किसानों को विपरीत मौसम जैसे कम तापमान, अधिक तापमान, बीमारी अनुकूल मौसम, कीट व्याधियों का प्रकोप, कम या अधिक वर्षा की स्थिति निर्मित होना, ओला वृष्टि, चक्रवाती हवाएं आदि से उद्यानिकी फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा लागू की गई है।

 
 
 

उद्यानिकी विभाग से मिली जानकारी अनुसार रबी वर्ष 2022 में रायपुर जिला अन्तर्गत बीमा कराने वाले कृषकों को अधिसूचित फसल के अनुसार निर्धारित ऋणमान का 5 प्रतिशत प्रीमीयम राशि कृषक अंश के रूप में ऋणी एवं अऋणी दोनों प्रकार के कृषकों को जमा करने होंगे। साथ ही अऋणी कृषक आवेदन फार्म के साथ फसल बुआई का प्रमाण पत्र, नक्शा, खसरा, आधार कार्ड अपने बैक पासबुक की छायाप्रति जिसमें आईएफएससी कोड, शाखा, खाता क्रमांक इत्यादि का स्पष्ट उल्लेख हो, जमा कर बीमा करा सकते हैं।

 

टमाटर फसल के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि एक लाख 20 हजार रूपए और जिसमें प्रति हेक्टेयर किसान की हिस्सेदारी 6000 रूपए, बैगन फसल के लिए प्रति हेक्टयर बीमा राशि 77 हजार रूपए और जिसमें प्रति हेक्टेयर किसान की हिस्सेदारी 3850 रूपए, फूलगोभी के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि 70 हजार रूपए और जिसमें प्रति हेक्टेयर किसान की हिस्सेदारी 3500 रूपए, पत्तागोभी के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि 70 हजार रूपए और जिसमें प्रति हेक्टेयर किसान की हिस्सेदारी 3500 रूपए, प्याज के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि 80 हजार रूपए और जिसमें प्रति हेक्टेयर किसान की हिस्सेदारी 4000 रूपए तथा आलू के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि एक लाख 20 हजार रूपए और जिसमें प्रति हेक्टेयर किसान की हिस्सेदारी 6000 रूपए होगी। 

 

 

 

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भाजपा को मालूम था ब्रम्हानंद बलात्कारी है उसके बावजूद प्रत्याशी बनाया : कांग्रेस

 वरिष्ठ भाजपा नेता ने ब्रम्हानंद नेताम को बचाने रघुवर दास को फोन किया था : मोहन मरकाम

रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने रेप के आरोपी भाजपा प्रत्याशी ब्रम्हानंद नेताम के बचाव में बयानबाजी कर रहे भाजपा नेताओं के ऊपर तंज कसते हुए कहा कि इस बार अपराधी को धोकर निर्दोष बनाने वाली भाजपा नामक वाशिंग मशीन फेल हो गई। झारखंड पुलिस के खुलासे के बाद कि वह इसके पहले भी ब्रम्हानंद को इस मामले में खोजने कांकेर आई थी तथा झारखंड पुलिस ने उसे नोटिस भी दिया था। इस बात से साफ हो गया कि भाजपा ने जानबूझकर ब्रम्हानंद की गुनाह को नजरअंदाज किया तथा उसे भाजपा का उम्मीदवार बनाया। यह भाजपा के बलात्कारियों के प्रति नजरिये को दर्शाता है। भाजपा नारा देती है बेटी बचाओ का, बेटियो के अपराधी को अपना उम्मीदवार बनाती है। यह भाजपा का महिला विरोधी घृणित चेहरा है। खुद को पार्टी विद डिफरेंस का दावा करने वाली भाजपा का यही असली चेहरा है कि वह एक बलात्कारी को प्रत्याशी बनाकर उसके पक्ष में चुनाव अभियान चला रही है। भाजपा के बड़े-छोटे नेता बलात्कार के आरोपी ब्रम्हानंद नेताम के लिये वोट मांग रहे है। भाजपा नेताओं को एक बलात्कारी के बचाव में बयान देने के बजाय उस 15 वर्षीय मासूम अबोध आदिवासी बालिका के चेहरे का स्मरण करना चाहिए जिसके साथ रेप, गैंगरेप की घटना हुई जिसको जबरदस्ती देह व्यापार में धकेला गया था। वह न्याय के लिए भटक रही है और भाजपा के नेता यहां एक बलात्कारी के पक्ष में खड़े हुए हैं। भाजपा नेताओं के इस चरित्र को उनके घर की माता और बहनों और बेटियां भी देखती होगी तो वो भी शर्म से पानी-पानी हो जाते होंगे।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि ब्रम्हानंद के ऊपर जब मुकदमा दर्ज हुआ तब झारखंड में रघुवर दास की सरकार थी। भाजपा के एक प्रभावशाली नेता जो भाजपा के छत्तीसगढ़ में वरिष्ठतम नेताओं में से एक है उसने झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री को फोन करके ब्रम्हानंद के मामले को दबाने के लिये अनुरोध किया था उसके बाद ही सामूहिक दुराचार के मामले में झारखंड पुलिस की कार्यवाही ठप्प हो गयी थी। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को मालूम था कि ब्रम्हानंद दुराचारी है उसके बाद भी भाजपा ने उसे अपना प्रत्याशी बनाया। यह बताता है कि भाजपा की नजर में मासूम से दुराचार करना सामान्य बात है।

 
 
 



मोहन मरकाम ने कहा कि भानुप्रतापपुर की महिलायें और मतदाता बलात्कारी ब्रम्हानंद नेताम के उनके क्षेत्र का उम्मीदवार होने से खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। लोगों को यह लग रहा कि भाजपा बलात्कारी को उम्मीदवार बनाकर तथा उसको चुनाव अभियान चलाकर क्षेत्र की जनता का अपमान कर रही है। लोग 5 तारीख को भाजपा के खिलाफ मतदान कर अपने आक्रोश की अभिव्यक्ति करेंगे।

 

 

 

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कोंडागांव में निःशुल्क सर्वाइकल कैंसर रोग जांच व परामर्श शिविर 1 दिसंबर को

 कोंडागांव (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कोंडागांव जिला गैर-संचारी रोग इकाई के तत्वाधान में 1 दिसम्बर को जिला अस्पताल में नि:शुल्क सर्वाइकल कैंसर जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। जिसमें एम्स रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी टीम के साथ कैंसर के संभावित मरीजों की जांच करेंगे।


मुख्य चिकित्सा एवं स्वस्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. आर.के.सिंह ने बताया, “निःशुल्क कैंसर रोग जांच एवं परामर्श शिविर के दौरान चिकित्सकों द्वारा मुख्य रूप से सर्वाइकल (गर्भाशय) कैंसर मरीजों की जांच की जाएगी। चिकित्सकों द्वारा जांच के बाद संभावित मरीजों का गहनतापूर्वक निरीक्षण करते हुए कैंसर होने के कारणों, लक्षणों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही अन्य कैंसर से ग्रस्त मरीजों को कैंसर से बचाव के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास किया जाएगा।“

 
 



इस सम्बन्ध में जिला कार्यक्रम प्रबन्धक भावना महलवार ने बताया: "ऐसी महिलाएं जिनके योनि में खुजली,जलन,सफेद पानी, रक्त स्त्राव, यौन सम्बन्ध बनाने में परेशानी, गर्भाशय ग्रीवा की समस्या हो तो, वह जिला अस्पताल में आयोजित निःशुल्क जांच शिविर के माध्यम अपनी जांच कराकर लाभ उठा सकती हैं।"

 



उन्होंने आगे बताया: "शरीर में जब कोशिकाएं असामान्य और अनियंत्रित हो कर विभाजित होने लगती हैं तो यह स्थिति कैंसर संभावित हो सकती है। कैंसर के सामान्य लक्षण के रूप में वजन की कमी, अत्यधिक थकान, फोड़ा या गांठ, अनियमित स्त्राव का होना,हड्डियों में दर्द, खांसी एवं मुंह से खून का आना, स्तन में सूजन आदि हो सकता है।समय पर इलाज कराने मात्र से कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से भी निजात पायी जा सकती हैं।"

गर्भाशय कैंसर के सामान्य लक्षण
रजोनिवृत्ति के पश्चात रक्त स्राव।
यौन संबंध के पश्चात रक्त स्राव ।
अनियमित माहवारी रक्तस्राव ।
योनि में खोजली होना, योनि से बदबू आना, योनि से रक्त मिश्रित सफेद पानी का रिसाव।
पीठ दर्द ,पेट के निचले भाग में दर्द।
असामान्य रिसाव।

 

 


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बालोद जिले के 144 गौठानों के बाड़ियों में होगा आर्गेनिक साग-सब्जियों का उत्पादन

 रासायनिक खाद, कीटनाशक दवाईयों का नहीं होगा प्रयोग

रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बालोद जिला जैविक खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। वहां की गौठानों में संचालित बाड़ियों में रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं होगा, सिर्फ जैविक खाद का ही उपयोग किया जाएगा। यहां की 144 गौठानों में जैविक खाद और दवाईयों का उपयोग कर साग-सब्जियों का उत्पादन होगा। इस संबंध में बालोद कलेक्टर कुलदीप शर्मा निर्देश दिया है कि साग-सब्जियों में प्रयोग किए जाने वाले रासायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाओं की दुष्प्रभावों से बचने के लिए जिले की गौठानों में केवल आर्गेनिक साग-सब्जियों का उत्पादन किया जाएगा। समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर ने गौठानों में निर्मित सब्जी बाड़ियों में किसी भी स्थिति में रासायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाईयों का प्रयोग नहीं करने को कहा हैं। उन्होंने इसके बदले गौठानों में निर्मित जैविक खाद एवं कीटनाशक दवाई, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत एवं ब्रम्हास्त्र आदि का शत-प्रतिशत उपयोग करने के निर्देश दिए है। उल्लेखनीय है कि बालोद जिले में 373 गौठाने है, जिसमें 144 गौठानों में बाड़ी बनाई गई है। इन गौठानों में जैविक खाद और दवाईयों का उपयोग कर आर्गेनिक साग-सब्जियों का उत्पादन किया जाएगा।


ऑनलाईन नामांतरण के प्रकरणों के समुचित निपटारा होने पर जताई प्रसन्नता
कलेक्टर ने ऑनलाईन नामांतरण के कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने गुरूर एवं गुण्डरदेही के तहसीलों में हुए ऑनलाईन नामांतरण के हुए बेहतर कार्यों की भी सराहना की। उल्लेखनीय है कि गुरूर तहसील में अब तक 95 तथा गुण्डरदेही तहसील में 93 सहित जिले में अब तक कुल 337 ऑनलाईन नामांतरण के प्रकरणों का निपटारा किया गया है। कलेक्टर शर्मा ने इन दोनों तहसीलों में ऑनलाईन नामांतरण के प्रकरणों के निपटारा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी तहसीलों में अधिक से अधिक ऑनलाईन नामांतरण के प्रकरणों का निपटारा करने को कहा।

बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम बेहतर लाने के लिए कार्ययोजना बनाएं
बैठक में कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी से स्कूलों में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के आधार पर शिक्षकों की पदस्थापना एवं बोर्ड परीक्षा हेतु बनाए जा रहे कार्ययोजना के संबंध में जानकारी ली। शर्मा ने स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के संबंध में जानकारी लेते हुए लापरवाह शिक्षकों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। जिले में बोर्ड कक्षाओं का परीक्षा परीणाम बेहतर से बेहतर हो, इसके लिए उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को शीघ्र कार्ययोजना बनाकर उसका पालन सुनिश्चित कराने को कहा। इस संबंध में उन्होंने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयकों की बैठक भी आयोजित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने के कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की। शर्मा ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र बनाने हेतु विद्यार्थियों के परिजनों के राजस्व संबंधी दस्तावेज नहीं मिलने की स्थिति में विशेष ग्राम सभा आयोजित कर शत-प्रतिशत बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व अनुविभागीय अधिकारियों एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को विशेष ग्राम सभा के आयोजन हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

कलेक्टर शर्मा ने 21 दिसम्बर तक सभी स्कूली बच्चों का जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि कक्षा पहली से पांचवी तक के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने हेतु आगामी शिक्षा सत्र में योजना बनाई जाएगी। जिससे कि कोई भी बच्चा जाति-प्रमाण पत्र से वंचित न रहे। बैठक में उन्होंने स्कूलों में समुचित साफ-सफाई की व्यवस्था, रंगरोगन आदि के कार्यों के संबंध में भी जानकारी ली। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से सभी स्कूलों में आयरन फॉलिक एसिड की उपलब्धता के संबंध में जानकारी लेते हुए बच्चों को समुचित रूप से इसका वितरण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

 

 

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कांग्रेस के षड्यंत्रों का जवाब जनता कमल खिलाकर देगी: ब्रम्हानंद नेताम

 कच्चे (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कच्चे में भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत के साथ जन जन तक कमल छाप में वोट डालने की अपील की। ब्रह्मानंद नेताम ने कच्चे के हर घर का दौरा किया।


महिलाओं ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश करते हुए कहा कि हमारा घर अभी तक अधूरा का अधूरा है जब से भूपेश बघेल कि सरकार बनी है तब से योजना के नाम पर हमे सिर्फ ठगा गया है। नेताम ने करीब दो दर्जन गांव में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पदयात्रा, डोर टू डोर जनसंपर्क और कार्यकर्ताओं से मिलते हुए कोड़ेखुरसे साप्ताहिक बाजार पहुंचे जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। कोड़ेखुरसे में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में विशाल जनसभा को संबोधित किया।

ब्रम्हानंद नेताम ने कोड़ेखुरसे की विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए भूपेश सरकार पर जमकर बरसे। नेताम ने कहा कांग्रेस ने अपनी हार का अंदेशा पाते ही मेरे जैसे सीधे-साधे आदिवासी, किसान के बेटे पर इतना बड़ा लांछन लगा दिया। तरह-तरह के प्रपंच और षड्यंत्र रचकर मेरे विजय रथ को रोकने का प्रयास कर रहे है लेकिन जनता इनकी सच्चाई जान चुकी है। मैं जहां भी जाता हूं कांग्रेसियों के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा देखने मिलता है। कांग्रेसियों को गांव-गांव से भगाया जा रहा है। आदिवासी समाज आक्रोशित है। यही कारण है कांग्रेस कूटनीतिक नीचता पर उतारू होकर स्तरहीन राजनीति कर रही। इसका जवाब जनता 5 दिसंबर को कमल के फूल में बटन दबाकर देगी।

भूपेश बघेल सरकार से पूछे तीखे सवाल
ब्रम्हानंद नेताम ने कहा जनता को मुद्दों से भटकाने के लिए कार्यकर्ताओं के मनोबल को कम करने के लिए ऐसा आरोप और दुष्प्रचार किया। मैं रोज़ सुबह से शाम प्रचार जनसंपर्क और हाट बाजारों का दौरा कर रहा हुं। भारी जनसमर्थन से अभिभूत हूं। कांग्रेस चाहे कितनी भी नीचता पर उतर जाए हम सकारात्मक जनमुद्दों की राजनीति करते रहेंगे। उन्होंने कहा घटिया राजनीति करे लेकिन मेरे सवालों के जवाब भी दीजिए जनता जानना चाहती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान क्यों नही बने? घर घर नल जल क्यों नही पहुंचा? बिजली के बिल दोगुने क्यों हुए? सड़क क्यों नही बने?

 

 

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विधानसभा का विशेष सत्र 1 दिसंबर से, पेश होगा आरक्षण विधेयक...

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। छत्तीसगढ़ विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है। इस दौरान आरक्षण विधेयक और अनुपूरक बजट लाया जाएगा। विशेष सत्र के पहले दिन, गुरूवार को दिवंगत विधानसभा उपाध्यक्ष मनोज मंडावी और पूर्व विधायक दीपक पटेल को श्रद्धांजलि दी जाएगी।


विधानसभा सचिवालय के अनुसार पहले दिन श्रद्धांजलि के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चालू वित्तीय वर्ष के द्वितीय अनुपूरक अनुमान और छत्तीसगढ़ लोक सेवा अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण संशोधन विधेयक 2022 और छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्था में प्रवेश में आरक्षण संशोधन विधेयक सदन में पेश करेंगे। विधेयक पेश करने के बाद दिवंगतों के सम्मान में सदन की कार्रवाई दिनभर के लिए स्थगित किए जाने की संभावना है। सत्र के दूसरे दिन इस सभी विधेयकाें को चर्चा के बाद पारित किया जाएगा।

 

 

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12 सिंचाई योजनाओं के लिए 36.41 करोड़ स्वीकृत

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश के विभिन्न बारह सिंचाई परियोजनाओं के कार्यों को कराने के लिए 36 करोड़ 41 लाख 05 हजार रूपए स्वीकृत किए है।

 
जांजगीर-चांपा जिले के विकासखण्ड- मालखरौदा अंतर्गत हसदेव बांगो परियोजना के अंतर्गत पोता से जमगहन नवीन नहर निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 45 लाख 50 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 185 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। जांजगीर-चांपा जिले में हसदेव बांगो परियोजना के खरसिया नहर से वाली कुरदा वितरक नहर तक जीर्णोद्धार कार्य के लिए तीन करोड़ 82 लाख 73 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल  सकेगी। इसी प्रकार से विकासखण्ड- अकलतरा अंतर्गत की लीलागर नदी पर अमोरा एनीकट (नवापारा बस्ती) निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 95 लाख 98 हजार रूपयें स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 80 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।

विकासखण्ड- अकलतरा में ही कंजीनाला पर परसदा एनीकट निर्माण कार्य के लिए दो करोड़ 33 लाख 51 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 97 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। हसदेव बांगो परियोजना अंतर्गत बोकरामुण्डा वितरक नहर का सी.सी लाईनिंग एवं मिट्टी भरने कार्य के लिए तीन करोड़ 92 लाख 53 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 1690 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। हसदेव बांगो परियोजना अंतर्गत परसदा वितरक नहर का सी.सी लाईनिंग एंव मिट्टी भरने कार्य के लिए तीन करोड़ 46 लाख 16 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 192 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। हसदेव बांगो परियोजना की बोकरेल वितरक नहर का सी.सी लाईनिंग एवं मिट्टी भरने कार्य के लिए तीन करोड़ 92 लाख 7 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है।

योजना के पूरा होने से 811 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ राम वन गमन पथ का पर्यटन विकास के अंतर्गत शिवरीनारायण विद्युतीकरण सजावट एवं वाटर फाउण्डेशन कार्य के लिए छः करोड़ 12 लाख 55 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। सक्ती में तिराईन नाला पर हरेठी स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए दो करोड़ 23 लाख 74 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 45 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। सक्ती में लोकल नाला पर परसापाल स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 67 लाख 24 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 60 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। इसी प्रकार से सक्ती के करवार नाला में बुढ़नपुर स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए तीन करोड़ तीन लाख 13 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 90 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। सक्ती के बरभौना नाला पर मोहगांव स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए दो करोड़ 46 लाख 36 हजार रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना के पूरा होने से 78 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।

 

 

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पत्रकारों के लिए आरक्षित भूमि को नजूल अधिकारी ने भू माफिया के साथ मिलकर किया आधा...

 सरगुजा प्रेस क्लब व पत्रकार गृह निर्माण समिति के सदस्यों ने जनदर्शन में की शिकायत

अम्बिकापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सरगुजा प्रेस क्लब के सदस्यों ने मंगलवार को जनदर्शन में सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में पत्रकार गृह निर्माण समिति के लिए आरक्षित भूमि में तत्कालिन नजूल अधिकारी द्वारा षडयंत्र पूर्वक हेरफेर कर एक निजी भूमाफिया को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रस्तावित 2 एकड़ 60 डिसमिल जमीन को 1 एकड़ 4 डिसमिल कर दिए जाने का विरोध जताया है। इसके साथ ही सरगुजा प्रेस क्लब ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन मे भू माफिया के पाइप फैक्ट्री जो शासकीय भूमि में संचालित है उसकी जांच की मांग की है।


सरगुजा प्रेस क्लब व पत्रकार गृह निर्माण समिति का आरोप है कि भू माफिया मिशन चौक स्थित सीमेंट पाइप फैक्ट्री का शासकीय भूमि में अवैध रूप से करोबार कर रहा है एवं कई एकड़ शासकीय भूमि को अवैध तरीके से पटवारी,आर आई व राजस्व विभाग के बड़े अधिकारियो की मिलीभगत से अपने हिस्से में कराने की फिराक में है। जिसका सरगुजा प्रेस क्लब व पत्रकार गृह निर्माण समिति ने विरोध जताते हुए तत्कालीन नजुल अधिकारी एवं भू माफिया के पाइप फैक्ट्री की भूमि की जांच की मांग की है।

गौरतलब है कि सरगुजा प्रेस क्लब अंतर्गत पत्रकार गृह निर्माण सहकारी समिति के सदस्य गत 8 वर्षों से प्रशासन एवं शासन से आवासीय भूमि की मांग किए थे।गत वर्ष  2013 एवं 15-16 में तत्कालीन कलेक्टर रितु सेन एवं  आर प्रसन्ना ने अंबिकापुर नगर के मिशन चौक स्थित पाइप फैक्ट्री के पीछे 3 एकड़ शासकीय भूमि आरक्षित कराया था।अभी कुछ महीने पहले ही सरगुजा प्रेस क्लब व पत्रकार गृह निर्माण सहकारी समिति के सदस्यों ने शहर के 4 पटवारी व तीन आराई के साथ भूमि का नाप जोख करवा कर मौके पर 2 एकड़ 60 डिसमिल जमीन निकलवाया था,जिसके बाद वह भूमि अपने नाम आवंटन के लिए नजूल अधिकारी के यहां आवेदन लगाया गया था। जिसमें पहले तो तत्कालीन नजूल अधिकारी ने दावा आपत्ति तिथि बीत जाने के बाद भी एक व्यक्ति के द्वारा आपत्ति लिया उसके बाद उसके लगातार चार पांच पेशी में उपस्थित नहीं होने के बावजूद उसकी आपत्ति को खारिज नहीं किया और उल्टे पत्रकार गृह निर्माण समिति के लिए प्रस्तावित 2 एकड़ 60 डिसमिल भूमि को 1 एकड़ 4 डिसमिल करते हुए शासन के पास भेजने की तैयारी थी। जिसकी भनक पत्रकार गृह निर्माण समिति के सदस्यों को लगी तो वह मंगलवार को जनदर्शन में पहुंचकर सरगुजा कलेक्टर के समक्ष विरोध जताया और ज्ञापन सौंपते हुए तत्कालीन नजूल अधिकारी एवं भू माफिया के जमीन की जांच की मांग की है।

 

 

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परसा कोल ब्लॉक शुरू कराने राहुल गांधी से मिलने इंदौर पहुंचे ग्रामीण...

कहा- परियोजना को भूमि दे चुके हैं, और अब नौकरी न मिलने से रोजी रोटी के साथ भविष्य अंधकार में

 अंबिकापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के इंदौर से गुजारी। राहुल गांधी की इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिले सरगुजा से 50 आदिवासियों का समूह उनसे मुलाकात करने इंदौर पहुंचा। जिले के उदयपुर विकासखंड में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) को आवंटित परसा कोयला परियोजना में आने वाले  कुल छः गांव  के ग्रामीणों ने राहुल गांधी को परियोजना शुरू कराने के लिए प्रार्थना पत्र देकर अपनी मांगों और समस्याओं से अवगत करवाया। सुरगुजा जिले का यह समूह इंदौर में भारत यात्रा में भी जुड़े और टीम राहुल गाँधी से बात कर अपने जिले के हित में राजस्थान की महत्वाकांक्षी योजना जल्दी से जल्द शुरू करवाने पर जोर दिया। वहीं कांग्रेस के नेतागणों ने भरोसा जताया की वह पार्टी के आलाकमान तक यह बात पहुंचाएंगे।

इसी महीने 3 नवंबर को इन्ही मांगों को लेकर परसा कोल परियोजना के आसपास के प्रभावित ग्रामों के 1700 से ज्यादा ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल और जिले के विधायक और स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्री टीएस सिंहदेव को भी प्रार्थना पत्र लिखा था। महत्वपूर्ण बात यह है की छत्तीसगढ़ और राजस्थान दोनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार है और परसा खदान उनके परस्पर फायदे की परियोजना है।



ग्रामीणों ने पत्र में लिखा है कि " आरआरवीयूएनएल को वर्ष 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में तीन कोयला खदान परसा ईस्ट केते बासेन, परसा और केते एक्सटेंशन का आवंटन किया गया था। जिसमें से पहली खदान का कार्य पिछले 10 वर्षों से चल रहा है। जबकि दूसरी खदान परसा कोल परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य पांच वर्ष पूर्व शुरू हुआ। जिसमें ग्राम साल्हि, जनार्दनपुर, फत्तेपुर, हरिहरपुर, तारा और घाटबर्रा के कुल 722 लोगों ने अपनी जमीन देकर मुआवजा प्राप्त कर लिया है। इसमें से 478 लोगों ने रोजगार के एवज में एकमुश्त मुआवजा ले लिया है जबकि 188 लोगों ने रोजगार का विकल्प चुना था और उनमें से अब तक 10 लोगों को नौकरी मिल चुकी है। शेष 178 लोग नौकरी पाने की प्रतीक्षा में हैं। किन्तु कुछ बाहरी गैर सरकारी संगठन द्वारा इस परियोजना के विरोध में कई तरह की भ्रांतियां फैलाने के कारण प्रभावितों इलाकों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। जिसके दबाव में आकर तत्कालिक सरकार द्वारा परसा कोल परियोजना को रद्द करने का मन बना लिया है। इस स्थिति में एक बार फिर हमारे सामने भुखमरी की स्थिति पैदा होने लगी है। इसका कारण यह है की हमारी जमीन बिकने के बाद भी अब तक नौकरी नहीं मिल पाई है जिसका मुख्य कारण परसा कोल परियोजना का ऑपरेशन अब तक शुरू न हो पाना। इस वजह से गुजर बसर करने के लिए अब ना तो कृषि कर पा रहे हैं और न ही अब तक नौकरी मिल पाई है। इस वजह से अब हमें अपने परिवार के गुजर बसर के लिए मुआवजे की राशि खर्च करनी पड़ रही है। जो की एक तरह से हमारे परिवार के लिए भविष्य निधि की तरह है।"

क्या है राजस्थान खदान का मामला ?
सरगुजा जिले में स्थित परसा कोल परियोजना राजस्थान राज्य की विज इकाई आरआरवीयूएनएल को तत्कालीन यूपीए सरकार में आवंटित की गयी दूसरी कोयला खदान है। जिसको लेकर पिछले कुछ महीनों से रायपुर स्थित की कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है। हालाँकि बड़ा स्थानीय तबका राजस्थान सरकार की परियोजनाओं का स्वागत कर रहे है और सालो से खदानें खुलवाने की अपनी मांग पर अड़े हुए है। अब जिन ग्रामीणों  ने अपनी जमीन अधिग्रहण में दे दी है और मुआवजा प्राप्त कर लिया है उनमें परसा कोयला परियोजना में रोजगार की आश जगने लगी थी। और जब परियोजना के काम में एक बार फिर अवरोध की सूचना जैसे ही मिली सभी जमीन प्रभावितों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने खदान के समर्थक पुनः नौकरी की मांग के लिए आंदोलन शुरू कर दिया है। वहीं बेरोजगार युवकों ने जल्द नौकरी न मिलने पर अपने आंदोलन को उग्र करने की भी चेतावनी दी।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एकमत
मार्च के अंत में, कांग्रेस शासित राज्यों के दोनों मुख्यमंत्रियों ने रायपुर में अपनी तीन खनन परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में आरआरवीयूएनएल के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की। इसके तुरंत बाद, भूपेश सरकार ने परसा ब्लॉक और पीईकेबी ब्लॉक के विस्तार के लिए मंजूरी दे दी थी। हालाँकि, आरआरवीयूएनएल संचालन का कार्य अब तक शुरू नहीं कर पाया है, जबकि स्थानीय लोग जिन्होंने अपनी जमीन और समर्थन दिया है, वे वर्षों से आजीविका के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं और नौकरी न मिलने तथा रोजगार के अभाव में लाखों रुपये का नुकसान की बात भी कह  रहे हैं। इन सभी प्रभावित ग्रामीणों ने मई में भी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा आरआरवीयूएनएल के प्रबंध निदेशक (एमडी) को एक पत्र में कुछ स्वयं घोषित कार्यकर्ता के द्वारा परसा कोयला परियोजना को बदनाम करने के लिए 'अवैध विरोध' की बात लिखकर खदान खोलने की गुहार लगाई थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तो पेशेवर आन्दोलनकारीओं को सीधा कह दिया था की अगर उन्हें खदान और विद्युत् परियोजनाओं से कोई आपत्ति है तो पहले वह अपने घर का बिजली कनेक्शन कटवा दे। सरकार के निर्णायक रव्वैये को देखकरबाहरी आन्दोलनकारीओं ने चुप्पी साध ली थी और स्थानीय लोगो प्रशासन पर भरोसा बढ़ा है।   

परसा खदान परियोजना के विरोध में माननीय उच्च न्यायालय के सामने लगी सभी पांचो याचिका भी खारिज
छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय ने मई 11, 2022 को परसा खदान परियोजना के कोल बेयरिंग एक्ट के तहत् अधिग्रहण के विरोध में दायर सभी पांच याचिकाओं को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए लगाए गए सभी अरोपों और दलीलों को खारिज कर दिया था। विदेशी फंड से लदे संगठन क़ानूनी दांवपेंच और सोशल मीडिया पर भारी खर्च कर सुरगजा के विरुद्ध षड़यंत्र करते रहते है।  

पहले भी लिख चुके हैं राहुल गाँधी को पत्र
इन्ही ग्रामीणों ने गत माह जून में राहुल गाँधी को पत्र प्रेषित कर दोनों ही कांग्रेस- शासित राज्य होने की वजह से विकास-विरोधी गतिविधि चलाने वाले बाहरी लोगों को प्रतिबंधित करने तथा नौकरी के लिए अपनी मांग रखी थी। ग्राम साल्हि के वेदराम और उनके अन्य साथियों ने पुनर्वास एवं पुनर्व्यस्थापन योजना के तहत रोजगार के विकल्प का चयन किया था ताकि जल्दी से उन्हें रोजगार प्राप्त हो सके किन्तु पिछले 5 सालों से हम इसका इंतजार कर रहे है। परसा कोल माइंस को जमीन देकर मुआवजा भी उठा लिए हैं। और अब उनकी जमा पूंजी भी गुजर बसर में खर्च होने की बात लिखी थी।

इस तरह छत्तीसगढ़ के ये सभी आदिवासी ग्रामीण खदान के न खुलने से होने वाली रोजगार और नौकरी की परेशानियों इत्यादि मांगों के पूरा न होने की वजह से कल मध्यप्रदेश के इंदौर पहुंचकर भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने पहुंचे। किन्तु पुरजोर कोशिश के बावजूद राहुल के रैली में चलने वाले हुजूम में मिलने में सफल न हो सके। हालाँकि राहुल के टीम के एक सदस्य ने ग्रामीणों के प्रतिनिधी मंडल से पत्र लेकर मामले को राहुल तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

 

 

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पेड़ पर फांसी लगाकर बुजुर्ग ने दी जान

 जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  जिले में एक बुजुर्ग ने पहाड़ पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। उसका शव वहां एक पेड़ पर लटका हुआ मिला है। बताया गया है कि वह सोमवार को ही घर से घूमने निकला था। मगर बाद में वह लौटा ही नहीं। अगले दिन उसकी मौत की खबर सामने आई है। मामला अकलतरा थाना क्षेत्र का है।

मिली जानकारी अनुसार  कटनई निवासी बोटोंग डहरिया(65) सोमवार दोपहर को खाना खाने के बाद घूमने निकला था। उसने परिजनों को भी इस बात की जानकारी दी थी। इसके बाद शाम तक उसका कुछ पता नहीं चला। उधर, जब शाम तक वह लौटा नहीं। तब उसके परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पाया। रात तक परिजन आस-पास ही उसकी खोजबीन करते रहे। मगर कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी।

सूचना मिलने पर परिजन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। जिसके बाद शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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अब पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं, मात्र सूचना देनी होगी

अपनी भूमि में वृक्षों की कटाई स्वयं करवा सकेंगे भूमिस्वामी

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य शासन द्वारा निजी भूमि पर कृषि के रूप में रोपित वृक्षों और प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई के नियमों का सरलीकरण किया गया है। जिसके अनुसार अब भूमिस्वामी अपनी भूमि में कृषि के रूप में रोपित वृक्षों की कटाई स्वयं करवा सकेंगे। पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, उन्हें मात्र अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को सूचना देनी होगी। भूमिस्वामी वन विभाग से भी वृक्ष कटवा सकेंगे।

इसी प्रकार भूमि पर प्राकृतिक रूप से उगे हुए वृक्षों की कटाई के लिए भूमिस्वामी को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन देना होगा। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निश्चित समयावधि में लिखित अनुमति देनी होगी। यदि आवेदक को समयावधि के बाद अनुमति नहीं मिलती तो वे पेड़ कटाई के लिए स्वतंत्र होंगे।

प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई की अनुमति के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन प्राप्ति के 45 कार्य दिवस के भीतर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति देनी होगी। यदि आवेदक को लिखित अनुमति प्राप्त नहीं होती है तो वे स्मरण पत्र दे सकेंगे। यदि अगले 30 कार्यदिवस के भीतर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से लिखित अनुमति प्राप्त नहीं होती है तो इसे अनुमति माना जाएगा और भूमिस्वामी वृक्षों की कटाई के लिए स्वतंत्र होगा। इस संबंध में हुए विलम्ब एवं नियमों का उल्लंघन होता है तो उसके लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व उत्तरदायी होंगे। यदि भूमि स्वामी चाहें तो वन विभाग के माध्यम से भी वृक्षों की कटाई करा सकेंगे। एक कैलेण्डर वर्ष भूमि पर प्राकृतिक रूप से उगे अधिकतम 4 वृक्ष प्रति एकड़ के मान से एवं अधिकतम कुल 10 वृक्षों की कटाई की अनुमति दी जा सकेगी।

प्राकृतिक रूप से उगे हुए वृक्षों की कटाई के लिए भूमिस्वामी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को दिए गए आवेदन के आधार पर राजस्व अधिकारी और वन अधिकारी द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा। वृक्षों के संबंध में भूमि स्वामी के हक, राजस्व अभिलेखों में पंजीयन, वृक्षों की शुष्कता/परिपक्वता, भूस्वामी के कृषि व्यवसाय की अपरिहार्यता आदि को शामिल करते हुए निरीक्षण प्रतिवेदन 30 कार्यदिवस में दिया जाएगा।

इसी प्रकार भूमि स्वामी अपनी भूमि में कृषि के रूप में रोपित वृक्षों की कटाई, राजस्व अभिलेखों में पंजीयन के आधार पर, करवा सकेंगे। कटाई से एक माह पूर्व, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी को कटाई का कारण, प्रजाति एवं संख्या स्पष्ट उल्लेखित करते हुए, सूचना निर्धारित प्रारूप में देना आवश्यक होगा। सूचना के सथ पंजीयन संबंधी राजस्व अभिलेख एवं स्वघोषणा पत्र निर्धारित प्रारूप में देना होगा। भूमिस्वामी द्वारा प्रस्तुत सूचना एवं स्वघोषणा पत्र का दस्तावेजी एवं भौतिक सत्यापन, वृक्ष कटाई के पूर्व अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, पटवारी एवं वनपाल के माध्यम से कराना सुनिश्चित करेंगे।

वृक्षों की कटाई के लिए प्रक्रिया
भूमिस्वामी द्वारा लिखित में इच्छा व्यक्त किए जाने पर, उसकी भूमि में कृषि के रूप में रोपित वृक्षों तथा प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई वन विभाग द्वारा की जा सकेगी। वन विभाग को आवेदन की प्राप्ति के 30 कार्य दिवस के भीतर, वन मण्डलाधिकारी वृक्षों की कटाई एवं डिपो तक अभिवहन सुनिश्चित करते हुए निर्धारित दर पर लकड़ी का मूल्य परिगणित करते हुए, राज्य के अनुसूचित जनजाति वर्ग के भूमिस्वामी के संदर्भ में छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियों का संरक्षण (वृक्षों में हित) अधिनियम 1999 के प्रावधानों के तहत कुल मूल्य का 95 प्रतिशत राशि भूमि स्वामी के बैंक खाते में निक्षेपित कराएगा एवं शेष 05 प्रतिशत राशि वन विभाग के निर्धारित खाते में जमा की जाएगी। जमा राशि से, प्रत्येक काटे जाने वाले वृक्ष के 05 गुना की संख्या में वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण एवं उनका अनुरक्षण किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ राज्य में जहां छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 प्रभावशील है, वहां भूमि स्वामी को कृषि के रूप में रोपित एवं प्राकृतिक रूप से उगे हुए वृक्षों की कटाई के लिए वन विभाग द्वारा आवेदन प्राप्ति के बाद 30 कार्य दिवस के भीतर तथा रोपित वृक्षों की कटाई एवं डिपो तक परिवहन सुनिश्चित करते हुए एवं निर्धारित दर पर लकड़ी का मूल्य परिगणित करते हुए कुल मूल्य की 90 प्रतिशत राशि भूमि स्वामी के बैंक खाते में जमा करायी जाएगी तथा 10 प्रतिशत राशि वन विभाग के निर्धारित खाते में जमा की जाएगी। जमा राशि से प्रत्येक काटे जाने वाले वृक्ष के 10 गुना की संख्या में वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण एवं उनका अनुरक्षण किया जाएगा। वन विभाग द्वारा दोनों ही मामलों में न्यूनतम 6 फीट के वृक्ष रोपित किए जाएंगे एवं रोपण की जानकारी प्रत्येक वर्ष अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के माध्यम से कलेक्टर को दी जाएगी।

 

 

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शिवसेना ने किया भाजपा प्रवक्ता सुधांशुत्रिवेदी का पुतला दहन

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भाजपा प्रवक्ता द्वारा  छत्रपति शिवाजी महाराज पर टिप्पणी को लेकर छत्तीसगढ़ शिवसेना ने सुधांशु त्रिवेदी पर कार्रवाई को लेकर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया और बूढ़ा तालाब स्थित धरना स्थल पर शिवसैनिकों ने सुधांशु त्रिवेदी के पुतलेे क़ी  जूते और चप्पलों से पिटाई कर  जलाया। 

वहीं शिवसेना महिला प्रदेश अध्यक्ष  ज्योति द्विवेदी शिवसेना छत्तीसगढ़ द्वारा सुधांशु त्रिवेदी के छत्रपति शिवाजी पर की गईं अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में शिवसेना प्रदेश अध्यक्ष डॉ आनंद मल्होत्रा के निर्देशानुसार उसका पुतला दहन किया। ज्ञात हो कि एक टीवी शो में सुधांशु त्रिवेदी ने यह बात कही थी कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब से 5 बार माफी मांगी, छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे विश्व के हिंदुओं के आदर्श हैं जिन्होंने हिंदुत्व की रक्षा के लिए और हिंदू शासकों की ताकत बनकर अपना पूरा जीवन निछावर कर दिया। ऐसे महान शासक और हिंदुओं के आस्था के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में की गईं टिप्पणी के विरोध में सुधांशु त्रिवेदी का पुतला दहन बूढ़ा तालाब में किया गया। 

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से महिला सेना के प्रदेश अध्यक्ष ज्योति द्विवेदी, सुनील कुकरेजा, कामगार सेना के जिला अध्यक्ष परमानंद वर्मा, मोहन डहरिया, विरेन्द्र देशलहरे, गंगा दास मनहरे, राजेंद्र कोसले सुषमा तिवारी प्रीति रितु बागवान उत्तरा बागवान ,तरुण साहू , मोनु रहण्डाले, घांश्यम साहू, करन देवांगना ,कृष्णा डहरे, गोलु यादव, टिनकु यादव , बंटी अजय , दानिश सेन , मयंक साहू, ,अजित यादव , भूपेन्द जंगेल महिला शिवसेना उपस्थित थे।

 
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