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राहुल गांधी 12 अगस्त को करेंगे वायनाड का दौरा

 नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी लोकसभा सचिवालय द्वारा उनकी सदस्यता बहाल किए जाने के बाद पहली बार 12 और 13 अगस्त को अपने संसदीय क्षेत्र केरल के वायनाड के दो दिवसीय दौरे पर होंगे।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने एक ट्वीट में कहा, “12-13 अगस्त को राहुल गांधीजी अपने निर्वाचन क्षेत्र वायनाड में होंगे। वायनाड के लोग इस बात से खुश हैं कि लोकतंत्र की जीत हुई है, उनकी आवाज संसद में लौट आई है। राहुल जी सिर्फ एक सांसद नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्य हैं।

उनकी टिप्पणी लोकसभा सचिवालय द्वारा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की सदस्यता बहाल किए जाने के एक दिन बाद आई है, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोदी उपनाम टिप्पणी मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने के तीन दिन बाद।

सांसद के रूप में अयोग्य ठहराए जाने के बाद उन्होंने पहली बार 11 अप्रैल को अपनी बहन और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा के साथ अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा किया था। कांग्रेस नेता ने तब एक रोड शो में भाग लिया था, जिसमें उनके निर्वाचन क्षेत्र के हजारों लोग शामिल हुए थे।

सोमवार को जब राहुल गांधी अपनी संसदीय सदस्यता बहाल होने के बाद संसद में दाखिल हुए तो कई विपक्षी सांसदों ने उनका भव्य स्वागत किया। गांधी ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना की और संसद भवन में प्रवेश किया, जहां उन्होंने द्रमुक के कार्यालय में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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यूपी में हर हाल में अधिकारियों को उठाना होगा जनप्रतिनिधियों का फोन

 लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब जनप्रतिनिधियों (संसद सदस्यों और विधानमंडल सदस्यों) के कॉल न उठाने वाले अधिकारियों को भारी पड़ सकता है। इसके लिए सरकार ने कड़ा संदेश देते हुए उन्हें संसद एवं विधानमंडल सदस्यों के प्रति शिष्टाचार और अनुमन्य प्रोटोकॉल के अनुपालन का आदेश दिया है।

शासन की ओर से जारी आदेश में सभी विभागों के अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के कॉल उठाने या किसी विशेष परिस्थिति में कॉल न उठा पाने पर मैसेज के साथ बाद में उन्हें कॉल बैक करने की हिदायत दी है। ऐसा न करने वाले अधिकारियों पर सुसंगत प्राविधानों के अंतर्गत प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। शासन की ओर से अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर अपने फोन में सेव करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि सदन में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष एक सदस्य ने इस बात को उठाया था, जिस पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने आश्वासन दिया था कि इस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसी क्रम में शासन की ओर से देर शाम सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव व सचिव को इस संबंध में समस्त अधीनस्थ अधिकारियों से आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।

आदेश में कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के प्रति प्रोटोकॉल के अनुपालन में अनेक आदेशों के बावजूद इसका पालन नहीं किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों की ओर से मिल रही शिकायतों के संदर्भ में जारी आदेश में निर्देश दिया गया है कि समस्त विभागों के मंडलीय एवं जनपदीय अधिकारियों को आदेशित किया जाए कि उनके द्वारा अपने क्षेत्र के सांसद एवं विधानमंडल के सदस्यों के सीयूजी नंबर या उनके द्वारा नोट कराए गए अन्य मोबाइल नंबर को अनिवार्य रूप से अपने मोबाइल में सेव किया जाए तथा किसी महत्वपूर्ण बैठक या न्यायालय के समक्ष होने की स्थिति में उनकी कॉल आने पर रिसीव न कर पाने की स्थिति में जानकारी होने पर मैसेज के साथ ही उन्हें कॉलबैक किया जाना सुनिश्चित किया जाए।

आदेश में ये भी कहा गया है कि इसका अनुपालन नहीं करने पर शासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें ये भी निर्देश दिया गया है कि जनप्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर सेव किए जाने की सूचना प्रत्येक अधीनस्थ अधिकारी व कर्मचारी अपने प्रभारी अधिकारी को एवं प्रभारी अधिकारी जिलाधिकारी को देंगे। जिलाधिकारी अपने जनपद की संकलित सूचना मंडलायुक्त को एवं मंडलायुक्त अपनी सूचना शासन में संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव को देंगे।

संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव,प्रमुख सचिव व सचिव प्राप्त सूचना संकलित कर उसकी एक प्रति संसदीय शिष्टाचार व पत्राचार अनुभाग को उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा, जिलाधिकारी अपने जनपद में संबंधित जनप्रतिनिधि (संसद सदस्य व विधान मंडल सदस्य) के मोबाइल नंबर कार्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित करेंगे।

 

 

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आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट में 8 को फिर सुनवाई

 नई  दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली 23 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर सुनवाई होगी। सुनवाई करने वाले पांच जजों की बैंच में में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एस के कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं।

3 अगस्त को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि आर्टिकल 370 को छेड़ा नहीं जा सकता। इसके जवाब में जस्टिस खन्ना ने कहा कि इस आर्टिकल का सेक्शन (c) ऐसा नहीं कहता। इसके बाद सिब्बल ने कहा, 'मैं आपको दिखा सकता हूं कि आर्टिकल 370 स्थायी है।'

आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट में 3 साल बाद सुनवाई हो रही है। इससे पहले, 2020 में 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। तब कोर्ट ने कहा था कि हम मामला बड़ी संवैधानिक बेंच को ट्रांसफर कर रहे हैं।

3 अगस्त को कोर्ट रूम में क्या हुआ?

सिब्बल- सब कुछ छोड़ दीजिए, आप (केंद्र सरकार) बिल पेश नहीं कर सकते।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़- अभी तक जम्मू-कश्मीर की सहमति की आवश्यकता है और अन्य राज्यों के लिए विधेयक पेश करने के लिए केवल विचारों की जरूरत है।

जस्टिस सूर्यकांत- संवैधानिक ऑर्डर्स को पास करने के लिए कौन सी प्रक्रिया होती है?

सिब्बल- सभी सहमति से पास हुए।

जस्टिस सूर्यकांत- लेकिन प्रक्रिया क्या थी? क्या ये संसद से पास हुए या राष्ट्रपति द्वारा?'

सिब्बल- यह राष्ट्रपति की अधिसूचना के माध्यम से हुआ। आपसी सहमति बनाने के बाद सलाह ली गई। इस तरह इसे लागू किया गया।

सिब्बल- इसके लिए लोगों की राय भी लेनी थी।

सिब्बल- जब सभी राज्य, संघ से आपस में जुड़े हुए हैं, उन्होंने (सरकार) ने सलाह लेने की जरूरत नहीं समझी।

सिब्बल- तो आप केंद्र और राज्य के बीच का संबंध पूरी तरह से खो देते हैं। आप (सरकार) कार्यपालिका के साथ-साथ विधायिका के रूप में राज्य की शक्तियों को अपने पास रखते हैं। और आप किसी अन्य संस्था के संदर्भ के बिना निर्णय लेते हैं।

सिब्बल- ...तो आप अपनी सहमति दे दीजिए। जिन लोगों ने खुद को यह संविधान दिया, उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया। यह मूलतः संवैधानिक ढांचे को तोड़ने जैसा है।

सिब्बल- जम्मू और कश्मीर (J&K) के संविधान के प्रावधानों के अनुसार, विधायिका के पास अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की सिफारिश करने की शक्ति नहीं थी।

सिब्बल- जम्मू-कश्मीर के संविधान के 1950 और 1954 के ऑर्डर के मुताबिक एक वादा किया गया था कि जम्मू-कश्मीर की सीमाओं को संशोधित करने का इरादा रखने वाला कोई भी कानून जम्मू-कश्मीर सरकार की सहमति के बिना पारित नहीं किया जा सकता।

जस्टिस बीआर गवई- जब तक पूरी जम्मू-कश्मीर की आबादी के विचार को ध्यान में नहीं रखा जाता, निरस्तीकरण नहीं किया जा सकता?

सिब्बल- मैं समझता हूं कि किसी न किसी स्तर पर ऐसा करना ही होगा, लेकिन फिर इसे ऐसा करने के लिए संवैधानिक तरीके का पालन करना होगा।

सीजेआई चंद्रचूड़- आप कह रहे हैं कि संविधान का एक प्रावधान है, जो संविधान की संशोधन शक्तियों से भी परे है। तो हम मूल ढांचे से अलग एक नई कैटेगरी बना रहे हैं और अनुच्छेद 370 उसी के तहत आता है?

सिब्बल- यह कोई नई कैटेगरी नहीं है। यह एक ऐसी कैटेगरी है, जो अस्तित्व में है।

जस्टिस कौल- क्या आप कह सकते हैं कि इसे (अनुच्छेद 370) बदलने की कोई व्यवस्था नहीं है, भले ही हर कोई इसे बदलना चाहता हो? आप कहना चाह रहे हैं कि पूरा कश्मीर चाहे तो भी इसे बदला नहीं जा सकता?

सिब्बल- अनुच्छेद 370 में संशोधन या बदलाव की कोई प्रक्रिया नहीं है।

2 अगस्त- कोर्ट रूम में ये हुआ

बुधवार (2 अगस्त) को सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि आर्टिकल 370 खुद ही अपने आप में अस्थायी और ट्रांजिशनल है। क्या संविधान सभा के अभाव में संसद 370 को निरस्त नहीं कर सकती?

इस पर जवाब देते हुए सिब्बल ने कहा था कि संविधान के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर से 370 को कभी हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि आर्टिकल 370 के मुताबिक, संसद सिर्फ राज्य सरकार के परामर्श से जम्मू-कश्मीर के लिए कानून बना सकती है। 370 को निरस्त करने की शक्ति हमेशा जम्मू-कश्मीर विधायिका के पास है।

सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि पहले 370 अस्थायी था, लेकिन जब 1950 में संविधान सभा भंग हुई, तो ये अपने आप स्थायी आर्टिकल बन गया। अगर इसे हटाना है तो संविधान सभा की इजाजत लेनी होगी, लेकिन वो अब है ही नहीं, ऐसे में इसको हटाया नहीं जा सकता है।

IAS शाह फैसल और शेहला राशिद ने याचिका वापस ली

याचिकाकर्ताओं का नेतृत्व कर रहे सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने आखिरी सुनवाई के दौरान कहा था कि दो याचिकाकर्ता IAS शाह फैसल और शेहला राशिद शोरा ने याचिका वापस लेने के लिए अपील की है।

इस पर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अगर कोई याचिकाकर्ता अपना नाम वापस लेना चाहता है तो उन्हें कोई कठिनाई नहीं है। इसके बाद बेंच ने नाम वापसी की अनुमति दे दी।

4 साल से मामला सुप्रीम कोर्ट में

केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया था। अक्टूबर 2020 से संविधान पीठ ही इस मामले की सुनवाई कर रही है।

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लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा 8 को

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का 8 अगस्त 14वां दिन है। मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर दोपहर 12 बजे से लोकसभा में चर्चा होगी।

विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी चर्चा की शुरुआत करेंगे। राहुल की सोमवार को सांसदी बहाल कर दी गई थी। वहीं सरकार की ओर से सांसद निशिकांत दुबे सबसे पहले जवाब देंगे।

यह चर्चा तीन दिन चलेगी। चर्चा के आखिरी दिन 10 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना जवाब दे सकते हैं। PM मणिपुर हिंसा के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी अपनी बात रख सकते हैं।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने दिया था अविश्वास प्रस्ताव नोटिस

विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने 26 जुलाई को मोदी सरकार के खिलाफ इस प्रस्ताव का नोटिस दिया था, जिसे लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने स्वीकार कर लिया था। 2014 से ये दूसरी बार है जब मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।

अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है?

लोकसभा देश के लोगों की नुमाइंदगी करती है। यहां जनता के चुने हुए प्रतिनिधि बैठते हैं, इसलिए सरकार के पास इस सदन का विश्वास होना जरूरी है। इस सदन में बहुमत होने पर ही किसी सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार है। इसे पास कराने के लिए लोकसभा में मौजूद और वोट करने वाले कुल सांसदों में से 50% से ज्यादा सांसदों के वोट की जरूरत होती है।

2019 के बाद PM ने लोकसभा में कुल 7 बार डिबेट में हिस्सा लिया

संसद के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2019 के बाद PM मोदी ने लोकसभा के कार्यकाल के दौरान कुल 7 बार डिबेट में हिस्सा लिया है। इनमें से पांच मौकों पर उन्होंने राष्ट्रपति के भाषण के बाद जवाब दिया। जबकि एक बार उन्होंने श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाए जाने को लेकर और दूसरी बार लोकसभा स्पीकर के तौर पर ओम बिड़ला के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अपनी बात रखी थी।करेंगे

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कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के लिए पर्यवेक्षकों की घोषणा की

 नवेश कुमार

वरिष्ठ पत्रकार

कांग्रेस पार्टी ने रविवार को तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की।  एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तेलंगाना में मीनाक्षी नटराजन और छत्तीसगढ़ में सिरिवेला प्रसाद को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

 मीनाक्षी नटराजन और प्रसाद की जिम्मेदारी बदल दी गई है ।  पिछले हफ्ते, नटराजन को छत्तीसगढ़ के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था जबकि प्रसाद को तेलंगाना के लिए नियुक्त किया गया था।

 सिरिवेला प्रसाद आंध्र प्रदेश के कांग्रेस नेता हैं।  इससे पहले सिरिवेला प्रसाद एआईसीसी के अनुसूचित जाति विभाग के संयोजक भी रह चुके हैं ।वह दलित मानवाधिकार के कार्यकर्ता भी रहे हैं।  सिरिवेला प्रसाद साल 2019 में आंध्र प्रदेश की ओंगोल लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं, हालांकि इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

 इसके अलावा छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की भी घोषणा कर दी गई , जिन राज्यों में चुनाव होने हैं वहां स्क्रीनिंग कमेटियों की घोषणा कर दी गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन को छत्तीसगढ़ स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है।
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राहुल गांधी की सांसदी बहाल, लोकसभा सचिवालय ने जारी की अधिसूचना

 नई  दिल्ली: लोकसभा सचिवालय ने सोमवार को अधिसूचना जारी कर राहुल गांधी की सांसदी दोबारा से बहाल कर दी है। वायनाड से सांसद राहुल की लोकसभा सदस्यता मार्च 2023 में खत्म कर दी गई थी। उन्हें मोदी सरनेम मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद दो साल की सजा होने की वजह से संसद से उनकी सदस्यता निलंबित कर दी गई। हालांकि, चार अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने का फैसला दिया। 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को 'मोदी सरनेम' टिप्पणी पर आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से फौरी राहत मिल गई है। कोर्ट ने शुक्रवार को एक अंतरिम आदेश में कांग्रेस नेता की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी थी। इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने 'मोदी उपनाम' टिप्पणी पर मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। ऐसे में बड़ी बात यह भी यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद राहुल लोकसभा सदस्यता बहाल हो सकती है।

तो क्या राहुल के 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने का भी रास्ता भी साफ हो गया?

सुप्रीम कोर्ट की ओर से राहुल को मिली राहत फौरी है। कोर्ट ने मामले को खारिज नहीं किया गया, बल्कि सजा पर रोक लगाई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट भी राहुल को इस मामले में दो साल की सजा सुनाता है तो राहुल चुनाव लड़ने से अयोग्य हो जाएंगे। वहीं, कोर्ट से बरी होने या दो साल से कम सजा मिलने पर राहुल चुनाव लड़ सकेंगे। हालांकि, ये फैसला कब तक आएगा ये देखना होगा। ऐसा भी हो सकता है कि कोर्ट का फैसला 2024 के चुनाव के बाद आए। ऐसे में राहुल 2024 का चुनाव लड़ सकते हैं।

 

 

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी नेे 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यों का किया वर्चुअल शिलान्यास

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देश के 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया। इनमें छत्तीसगढ़ के 7 रेलवे स्टेशन रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, तिल्दा-नेवरा, अकलतरा, भिलाई पावर हाउस और महासमुंद शामिल हैं।इस समारोह में रायपुर से राज्यपाल श्री विश्व भूषण हरि चंदन  शामिल हुए।

 
गौरतलब है कि इस योजना में छत्तीसगढ़ के कुल 32 रेलवे स्टेशन को शामिल किया गया है। इन स्टेशनों के पुनर्विकास में 1660 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। 
राज्यपाल श्री हरि चंदन  ने रायपुर रेलवे स्टेशन के विकास के लिए तैयार मॉडल का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम राजधानी रायपुर के रेलवे स्टेशन में आयोजित की गई थी।  
 
राज्यपाल श्री हरिचंदन ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के शिलान्यास के इस समारोह में उपस्थित होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। यात्री सुविधाओं का विकास देश के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग थी, जिसे अब पूरा कर दिया गया है। रेलवे देश की जीवन रेखा है। रेलवे के विकास का देश के विकास पर तत्काल और सीधा प्रभाव पड़ता है। आर्थिक विकास में उत्प्रेरक के रूप में रेलवे की भूमिका सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त है।
 
उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय देश भर में रेल नेटवर्क के तेजी से विकास और रेलवे द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं में सुधार के लिए सभी प्रयास कर रहा है। देश भर में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 1307 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का वर्तमान प्रयास रेलवे के साथ बेहतर सुविधाओं और यात्री अनुभव की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
 
श्री हरिचंदन ने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी हुई कि इस महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना में छत्तीसगढ़ के कुल 32 रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इन 32 स्टेशनों के पुनर्विकास में 1660 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आज छत्तीसगढ़ में 7 स्टेशनों की आधारशिला रखा। जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, तिल्दा-नेवरा, अकलतरा, भिलाई पावर हाउस और महासमुंद शामिल हैं।
बिलासपुर, दुर्ग और रायपुर के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों कों प्रत्येक स्टेशनों के लिए 500 करोड़ रूपए की लागत से एक बड़ा उन्नयन मिलेगा। 
 
गौरतलब है कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित की जाने वाले इन स्टेशनों पर वाइड कॉनकोर्स, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, वेटिंग रूम, वाणिज्यिक क्षेत्र और रिटेल काउंटर आदि जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। योजना में मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट की परिकल्पना की गई है। अन्य छोटे स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा और उन्हें चौड़े एफओबी, अग्रभाग सुधार, प्रतीक्षा क्षेत्र, लिफ्ट, एस्केलेटर आदि जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
 
 
राज्यपाल श्री हरिचंदन ने कहा कि यह जानकर संतुष्टि होती है कि भारतीय रेलवे जनता के लिए मात्रा और गुणवत्ता दोनों के संदर्भ में सेवाओं के स्तर को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। मैं पुनर्विकास योजना में हमारे राज्य के स्टेशनों का चयन करने के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों की ओर से प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं। यह निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ पारगमन उन्मुख सुविधाओं के माध्यम से विकास के नए रास्ते खोलने का काम करेगा।
 
रायपुर लोकसभा के सांसद श्री सुनील सोनी ने प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत् रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास देश सहित प्रदेशवासियों के लिए बड़ी सौगात है। रेलवे स्टेशनों का विकास एयरपोर्ट के तर्ज पर किए जाने की सोच प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट की तर्ज पर रायपुर रेलवे स्टेशन एक मॉडल स्टेशन के रूप बनकर तैयार होगा। जिस तरह बच्चे- बुजुर्गस हित लोग एयरपोर्ट को देखने जाते है। उसी तरह रेलवे स्टेशन को भी देखने आएंगे। यात्री सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होगी। एक नए स्वरूप में स्टेशन के विकास से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। कार्यक्रम के दौरान अमृत भारत महोत्सव के तहत रायपुर के स्कूलों में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को राज्यपाल श्री विश्व भूषण हरिचंदन के करकमलों से पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए। इस अवसर पर विधायक श्री बृजमोहन अग्रवाल, दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के जी.एम. श्री अ आलोक कुमार सहित जनप्रतिनिधिगण, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक उपस्थित थे।
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अंजू के पिता और भाई को पेट पालने की चिंता, छिन गया काम, ये है वजह

 ग्वालियर: फेसबुक फ्रेंड से मिलने के लिए पाकिस्तान जा पहुंची अंजू रफाइल के पिता और भाई का गांव में विरोध होने लगा है। भाई नौकरी छोड़कर ग्वालियर आ गया है। यहां पिता की देखरेख के लिए वह आ गया। उधर पिता का भी काम अब छिन गया है। उन्हें कोई काम देने को तैयार नहीं है। गांव में उनका लगातार विरोध हो रहा है।

अब अंजू के पिता और भाई पर पेट पालने तक का संकट है। यह लोग डरे हुए हैं, परेशान हैं। वहीं अंजू को लेकर जो अफवाहें सामने आ रही है, उससे लोगों में उसके प्रति और गुस्सा बढ़ता जा रहा है। पहले 4 अगस्त तक उसके भारत आने की चर्चा थी, लेकिन अब तक वह भारत नहीं लौटी है। वह भारत लौटेगी या नहीं, इसे लेकर भी तमाम सवाल उठ रहे हैं।

ग्वालियर के टेकनपुर स्थित बोना गांव की रहने वाली अंजू रफाइल भिवाड़ी से पाकिस्तान चली गई थी। अंजू रफाइल अपने पति अरविंद और दो बच्चों के साथ भिवाड़ी स्थित टेरा एलीगेंंस सोसायटी में रह रही थी।

फेसबुक पर उसकी करीब 3 साल से पाकिस्तान में रहने वाले नसरुल्लाह से दोस्ती थी। उसी से मिलने के लिए 21 जुलाई को वह भिवाड़ी से पाकिस्तान चली गई थी। उसने इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। पति और स्वजनों से पूरी जानकारी छिपाई। जब वह पाकिस्तान पहुंच गई तब पता लगा था।

इसके बाद उसने नसरुल्लाह से निकाह भी कर लिया और धर्म परिवर्तन भी कर लिया। वहां उसे फ्लैट सहित कई उपहार मिले। इन स्थितियों में अब उसके परिवार का विरोध हो रहा है। उसके भाई और पिता का गांव में विरोध हो रहा है।

भाई डेविड का कहना है उनका हुक्का पानी बंद करने की तैयारी है। अब उन्हें डर भी लगता है। अंजू ने जो किया, उस बारे में कुछ नहीं पता था लेकिन इसकी वजह से उन्हें हर कोई संदेह की दृष्टि से देखता है।

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ज्ञानवापी पर हाई कोर्ट ने दी एएसआई सर्वे की अनुमति

वाराणसी: ज्ञानवापी परिसर से जुड़े मामले में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है।हाईकोर्ट ने गुरुवार को ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे वाले वाराणसी जिला अदालत के फैसले को लागू कर दिया है।

मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे के खिलाफ अपील की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। अब अदालत के फैसले के बाद ज्ञानवापी में सर्वे तुरंत शुरू होगा। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अब मुस्लिम पक्ष अपनी अपील को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएगा।

कोर्ट के फैसले के बाद हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बयान दिया है कि अदालत ने सर्वे को मंजूरी दी है। एएसआई ने अपना हलफनामा दे दिया है और अदालत का आदेश आ गया है। ऐसे में अब कोई सवाल नहीं बनता है।

वकील ने बताया कि अदालत ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों को खारिज किया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रतिक्रियाएं भी आना शुरू हो गई हैं। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बयान दिया है कि सर्वे से सच्चाई बाहर आएगी, राम मंदिर जैसे ही इसका भी निर्णय होगा। अब सभी शिवभक्तों की मनोकामनाएं पूरी होंगी।

जिला जज ने दिया था सर्वे का आदेश
हिन्दू पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय के डिस्ट्रिक्ट जज अजय कृष्ण विश्वेश ने ज्ञानवापी परिसर के सांटिफिक सर्वे की अनुमति दी थी और 4 अगस्त तक एएसआई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने को कहा था। इसपर सावन के तीसरे सोमवार 24 जुलाई को एएसआई की 32 सदस्ययी टीम विश्वनाथ धाम पहुंची थी। उधर मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे का बहिष्कार किया था और सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका डाली थी, जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर ततकाल प्रभाव से रोक लगा दी थी और मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।

मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं ने कहा था, परिसर को होगा नुकसान
कोर्ट में दलील देते हुए मुस्लिम पक्ष के वकील एसएफए नकवी ने असमायिक अदालती आदेश के जरिये ज्ञानवापी के वैज्ञानिक सर्वेक्षण से ज्ञानवापी के मूल ढांचे को नुकसान पहुंचनें की आशंका जताई थी। उन्हाेनें यह भी कहा था कि अयोध्या के बाबरी मस्जिद विध्वंस का दंश देश ने झेला है। सिविल वाद में पोषणीयता का बिंदु तय किये बिना जल्दबाजी में सर्वेक्षण और खोदाई का फैसला घातक हो सकता है। हालांकि एएसआई ने मुस्लिम पक्ष की दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि सर्वेक्षण के लिए अपनाई जाने वाली तकनीक से ज्ञानवापी की मूल संरचना को खरोंच तक नहीं आयेगी।

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हरियाणा में हिंसा के बाद तनाव, 6 जिलों में धारा 144

नूंह: हरियाणा के नूंह में विश्व हिंदू परिषद की ब्रज मंडल यात्रा के दौरान हिंसा और बवाल के बाद तनाव बना हुआ है। नूंह में दो दिन के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है। हालात पर काबू पाने के लिए पूरे इलाके में पैरामिलिट्री की 13 कंपनियां तैनात की गई हैं। उधर, नूंह से सटे राजस्थान के भरतपुर में भी अलर्ट जारी किया गया है। यहां के 4 इलाकों में भी इंटरनेट बंद कर दिया गया है।

अब यह हिंसा नूंह(मेवात) के बाद गुरुग्राम तक फैल गई है। जिसे देखते हुए इन दो जिलों के अलावा एहतियातन रेवाड़ी, पलवल, फरीदाबाद और सोनीपत समेत 6 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है। नूंह में 2 अगस्त तक इंटरनेट बंद कर दिया है। नूंह, फरीदाबाद, गुरुग्राम और पलवल में मंगलवार यानी 1 अगस्त को सभी शिक्षण संस्थान और कोचिंग सेंटर बंद रहेंगे।

बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा को नूंह में रद्द कर दिया गया है। यह परीक्षाएं 1 और 2 अगस्त को होनी थीं। हिंसा के मद्देनजर सीएम मनोहर लाल खट्‌टर ने गृहमंत्री अनिल विज के अलावा चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी समेत दूसरे बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की हाई लेवल मीटिंग बुला ली है।

दरअसल, नूंह में सोमवार को विश्व हिंदू परिषद की ब्रज मंडल यात्रा पर समुदाय विशेष के लोगों ने पथराव कर दिया। इससे हिंसा भड़क गई। दोनों पक्षों में पत्थरबाजी और फायरिंग हुई। इस दौरान गुड़गांव के होमगार्ड नीरज और गुरसेवक समेत अब तक 5 लोगों की मौत हो गई है। 50 से ज्यादा पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और अन्य घायल हैं।

तीन किलोमीटर में जो भी वाहन दिखा, उसमें ही आग लगा दी
उपद्रवियों ने रोड पर तीन किलोमीटर में जो भी वाहन दिखा, उसमें ही आग लगा दी। इसके बाद 500 से अधिक लोगों ने बस से टक्कर मार साइबर थाने की दीवार तोड़ी और अंदर घुस गए। डायल 112 की गाड़ियां जला दीं। अंदर तोड़फोड़ की। आग लगाने का प्रयास किया। कुछ दुकानों में लूटपाट के बाद आग लगा दी। हीरो बाइक के शोरूम से 200 बाइक लूटीं। शोरूम में तोड़फोड़ की। कर्मचारियों को पीटा।

हरियाणा हिंसा से जुड़े अपडेट्स
हिंसा के मामले में पुलिस ने करीब 20 FIR दर्ज की हैं। अकेले नूंह जिले में 11 FIR दर्ज की गई हैं।
नूंह में रेवाड़ी, गुड़गांव, पलवल से अतिरिक्त पुलिस फोर्स भेजी है। पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मामले की रिपोर्ट ली है। प्रदेश के डीजीपी पीके अग्रवाल और सीआईडी चीफ आलोक मित्तल भी नूंह के लिए रवाना हो गए।
गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि शांति बहाली के बाद पूरा आंकलन किया जाएगा। मामले की जांच कराई जाएगी। देखा जाएगा कि कहां पर क्या कमी रही। हमने जरूरत पड़ने पर एयरफोर्स की मदद के लिए संपर्क किया है।
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि नूंह की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं सभी लोगों से प्रदेश में शांति बनाए रखने की अपील करता हूं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा के नूंह में हिंसा के बाद राजस्थान के भरतपुर की 4 तहसीलों में इंटरनेट बंद।
गुरुग्राम के सोहना, पटोदी और मानेसर में भी इंटरनेट बंद कर दिया गया है। कल शाम 6 बजे यहां अंबेडकर चौक सोहना में करीब 250 प्रदर्शनकारियों ने 5 गाड़ियां, एक ऑटो, एक दुकान और 4 खोखे फूंक दिए थे। वहां पथराव भी किया गया।
गुरुग्राम में रात करीब 12.10 बजे सेक्टर 57 की अंजुमन मस्जिद पर हमला किया गया था। इसमें एक की मौत हो गई। इसे देखते हुए गुरुग्राम के सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

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मणिपुर में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है : सुप्रीम कोर्ट

 मणिपुर हिंसा पर उच्चतम न्यायालय सख्त, केंद्र पर दागे कई सवाल

नई दिल्ली: मणिपुर हिंसा मामले को लेकर मंगलवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जातीय हिंसा भड़कने के बाद राज्य सरकार ने 6,523 एफआईआर दर्ज की हैं। हालांकि, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य पुलिस ने कानून-व्यवस्था से नियंत्रण खो दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में महिलाओं के यौन उत्पीड़न और वायरल वीडियो मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने कहा है कि एक बात तो साफ है कि मामले में एफआईआर दर्ज करने में काफी देर हुई। मणिपुर में एक महिला को कार से निकालकर बेटे के सामने मार देने की घटना का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह 4 मई को हुआ था, लेकिन मामले में एफआईआर सात जुलाई को दर्ज हुई। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने मणिपुर सरकार को घेरते हुए कहा कि सिर्फ एक-दो एफआईआर के अलावा कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। जांच भी ढीली ढाली रही। एफआईआऱ दो महीने बाद दर्ज हुईं और बयान तक दर्ज नहीं किए गए।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली बेंच ने महिलाओं की ओर से पेश हुए वकील निजाम पाशा के आवेदन पर गौर किया, जिसमें कहा गया था कि महिलाओं को आज दिन में सीबीआई के सामने बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया है। हालांकि, केंद्र और मणिपुर सरकार की ओर से पेश हुए वकील एसजी तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

यहां पढ़ें सुनवाई के दौरान क्या क्या हुआ...
मणिपुर हिंसा मामले में सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में हलफनामा दायर किया गया है। एसजी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि महिलाओं के वीडियो मामले में राज्य पुलिस की 'शून्य' एफआईआर 5 मई को दर्ज की गई थी।

सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य पुलिस ने वायरल वीडियो मामले में किशोर सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

एसजी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसा लगता है कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने महिलाओं का बयान दर्ज किया।

हालांकि, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहुत स्पष्ट है कि वीडियो मामले में एफआईआर दर्ज करने में काफी देरी हुई है। मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जांच बहुत सुस्त रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था और संवैधानिक तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। कोर्ट ने आगे कहा कि यह स्पष्ट है कि पुलिस ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण खो दिया है।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या महिलाओं को भीड़ को सौंपने वाले पुलिसकर्मियों से राज्य पुलिस ने पूछताछ की थी। उन्होंने कहा कि यदि कानून एवं व्यवस्था तंत्र लोगों की रक्षा नहीं कर सकता तो नागरिकों का क्या होगा?

कोर्ट ने आगे कहा कि राज्य पुलिस जांच करने में असमर्थ है और उन्होंने राज्य की स्थिति से अपना नियंत्रण खो दिया है। मणिपुर में कोई कानून व्यवस्था नहीं बची है।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा कि FIR में कितने आरोपियों के नाम हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए क्या कार्रवाई की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी संख्या में एफआईआर का हवाला दिया। साथ ही सीबीआई से पूछा कि उसके बुनियादी ढांचे की सीमा क्या है?

साथ ही कोर्ट ने मणिपुर के डीजीपी को सोमवार को राज्य में बड़े पैमाने पर हुई जातीय हिंसा पर सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने को भी कहा है।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में महिलाओं के वायरल वीडियो मामले की घटना की तारीख और जीरो एफआईआर दर्ज करने और नियमित एफआईआर दर्ज करने की घटना का विवरण मांगा है।

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इंडिया के सांसदों ने संसद में विपक्षी नेताओं को मणिपुर के हालात की दी जानकारी

नई दिल्ली: हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा करने वाले भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) के 21 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को संसद में विपक्षी दलों के फ्लोर नेताओं को जानकारी दी। 21 सांसदों की संसद में बैठक हुई। बैठक में राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।

सांसदों ने मणिपुर की अपनी दो दिवसीय यात्रा का अनुभव साझा किया, जहां उन्होंने राहत शिविरों में पीड़ितों और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने रविवार को पूर्वोत्तर राज्य की स्थिति पर मणिपुर की भाजपा सरकार के साथ-साथ केंद्र की भी आलोचना की और कहा कि दोनों सरकारों ने इस मामले पर अपनी आंखें बंद कर ली हैं।

विपक्षी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे चौधरी ने कहा, चाहे वह राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार, वे (मणिपुर मुद्दे पर) कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। किसी को कोई परेशानी नहीं है। दोनों सरकारों ने अपनी आंखें बंद कर ली हैं। मणिपुर का दौरा करने वाले इंडिया के सदस्यों वहां से लौटने के बाद यहां संवाददाताओं से यह बात की।

दिल्ली रवाना होने से पहले विपक्षी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने इम्फाल के राजभवन में मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात की और उन्‍हें एक ज्ञापन सौंपा। इसमें पूर्वोत्तर राज्य में शांति बहाली का आग्रह किया गया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मणिपुर में मौजूदा संकट के लिए मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और उन्हें बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं।

मणिपुर में तीन मई को जातीय संघर्ष भड़क उठा और तब से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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जम्मू में पाक घुसपैठिये को मार गिराया गया

जम्मू: बीएसएफ ने सोमवार को कहा कि जम्मू के अरनिया सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर एक पाकिस्तानी घुसपैठिये को मार गिराया गया। बीएसएफ जवानों ने 30-31 जुलाई की मध्यरात्रि में, अरनिया सीमा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार संदिग्ध गतिविधि देखी और एक घुसपैठिए को बीएसएफ बाड़ की ओर आते देखा गया। बीएसएफ ने कहा, जवानों ने घुसपैठिए को मार गिराया और घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया।

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ओम बिरला ने किया असम विधानसभा की नई बिल्डिंग का उद्घाटन

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को असम विधानसभा के नए भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान बिरला के अलावा असम विधानसभा के अध्यक्ष बिस्वजीत दायमरी, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और रामेश्वर तेली समेत अहम चेहरों ने हिस्सा लिया। मिली जानकारी के मुताबिक नया विधानसभा परिसर दस एकड़ जमीन में फैला हुआ है, जिसमें मुख्य इमारत और प्रशासनिक कामकाज के लिए अन्य इमारतें शामिल हैं।

 
अपने भाषण में श्री बिरला ने कहा कि असम विधान सभा के नए भवन का लोकार्पण उत्तर-पूर्व भारत के लिए ऐतिहासिक है, खुशी है कि मैं इस सुअवसर का साक्षी बन सका।आधुनिकता और असम की सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम यह नया भवन असम के विकास की नई गाथा लिखते हुए प्रदेश की जनता के जीवन को बेहतर बनाएगा, ऐसा मेरा विश्वास है।
 
आशा है नए रास्तों पर चल कर असम विधान सभा नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास के लक्ष्य के साथ नए संकल्पों को पूरा करेगी। विधान सभा की बैठकें चर्चा-संवाद का ऐसा केंद्र बनेंगी, जहां मंथन से निकले अमृत से आमजन का कल्याण होगा।
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हाईटेंशन तार की चपेट में आने से ताजिया में ब्लास्ट, 4 की मौत, कई गंभीर

बोकारो: मुहर्रम पर आज देश भर में मातमी जुलूस निकाला जा रहा है। इस बीच झारखंड के बोकारो से एक बड़े हादसे की खबर सामने आई है। बोकारो में मुहर्रम पर निकाले जा रहे तजिया जुलूस हाईटेंशन तार की चपेट में आकर ब्लास्ट कर गया।

इस हादसे में कई लोग बुरी तरह से झुलस गए। करंट की चपेट में आने से अभी तक 4 लोगों की मौत हो गई जबकि 9 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा बोकरो के बेरमो इलाके के खतको में शनिवार सुबह करीब 6 बजे हुआ। यहां सैकड़ों की संख्या में लोग तजिया जुलूस निकाल रहे थे। इसी दौरान तजिया 11000 वोल्ट के तार के संपर्क में आ गया। जिससे तजिया जुलूस में रखी बैट्री में जोर का ब्लास्ट हुआ और उसके आस-पास आने वाले कई लोग बुरी तरह से घायल हो गए।

हादसे के बाद हुआ अफरातफरी का माहौल
इस हादसे से थोड़ी देर के लिए वहां अफरातफरी का माहौल हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से हादसे में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए डीवीसी बोकारो थर्मल अस्पताल ले जाया गया। हादसे में चार लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। जबकि 9 लोग बुरी तरह से घायल बताए जा रहे हैं।

हॉस्पिटल में लोगों का हंगामा


हादसे के बाद हॉस्पिटल में कुछ देर के लिए हंगामा भी हुआ। घायलों के साथ पहुंचे लोगों ने एंबुलेंस नहीं होने और बदइंतजामी के बाद लोगों ने हो-हल्ला भी किया। हालांकि बाद में गंभीर रूप से घायल लोगों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।

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भारत की आधुनिकीकरण प्रक्रिया में जापान स्वाभाविक भागीदार: जयशंकर

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि जापान भारत की आधुनिकीकरण प्रक्रिया में एक स्वाभाविक भागीदार है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-जापान फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि जापान वास्तव में भारत के लिए क्या मायने रखता है? जापान कई मायनों में अनुकरणीय (इग्ज़ेम्प्लरी) आधुनिकीकरण कर्ता है। यह प्रासंगिकता का उदाहरण है। भारत की आधुनिकीकरण प्रक्रिया में जापान एक स्वाभाविक भागीदार है।

जापान ने वास्तव में भारत में सुजुकी क्रांति ला दी है। दूसरी क्रांति मेट्रो क्रांति थी। तीसरी क्रांति बन रही है, जो हाई-स्पीड रेल है। जब हम उस परियोजना को पूरा करेंगे, तो लोग भारत में देखेंगे कि इसका कितना बड़ा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि चौथी क्रांति महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों और सेमी-कंडक्टर में है। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं, जैसे- मिसाइल परमाणु प्रसार और आतंकवाद आदि।

यह महत्वपूर्ण है कि हम मूल कारणों पर ध्यान दें और उन देशों की पहचान करें जो इसके पीछे हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि जापान और भारत समान पेज पर हों। वहीं जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी ने कहा कि दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार करने के लिए लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की जरूरत है। जापान के विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे प्रधानमंत्रियों ने आदान-प्रदान को और बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की है।

इस वर्ष 2023 को हमने जापान भारत पर्यटन वर्ष विनिमय का नाम दिया है। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक अभिन्न भागीदार है जहां हम जी4 में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं।

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अविश्वास प्रस्ताव के कारण विधायी कार्य नहीं रोके जा सकते : प्रल्हाद जोशी

नई दिल्ली: अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकृत होने के बावजूद बिल पेश करने और पारित करवाने के विपक्षी दलों के आरोपों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि उनके द्वारा अचानक अविश्वास प्रस्ताव लाने के कारण सरकारी बिजनेस ( विधायी कार्य) नहीं रोके जा सकते और जहां तक बिल की बात है अगर विपक्ष के पास बहुमत है तो बिल परास्त कर दें, गिरा दें तो अविश्वास प्रस्ताव की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, सरकार उसी दिन गिर जाएगी।

उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर समय सीमा के अंदर चर्चा होगी और सरकार की तरफ से जवाब भी दिया जाएगा। हमारे पास बहुमत है, संख्या है। विपक्षी नेताओं के मणिपुर जाने के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए जोशी ने कहा कि वहां की राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इसे देखेगा कि इन्हें कहां लेकर जाना है, कैसी व्यवस्था करनी है, यह हमारा ( केंद्र सरकार) काम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे ग्राउंड रिपोर्ट की बात कर रहे हैं जबकि अगर सदन में चर्चा होने देते तो हम सारी रिपोर्ट रखते, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता।

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राजस्थान में लाल डायरी चुनाव में कांग्रेस का डिब्बा गोल करेगी : मोदी

 सीकर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीकर में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा यहां का जनसैलाब बता है कि आने वाले चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा। अब राजस्थान की करवट भी बदलेगी और मेरी गारंटी है राजस्थान की किस्मत भी बदलेगी। आज राजस्थान में चारों तरफ एक ही गूंज है, जीतेगा कमल, खिलेगा कमल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल डायरी का जिक्र करते हुए कहा लाल डायरी चुनावों में कांग्रेस का डिब्बा गोल करेगी।

पीएम मोदी ने कहा कि राजस्थान में पेपर लीक उद्योग चल रहा है। राजस्थान के युवा काबिल है, लेकिन पेपर लीक ने उनका भविष्य बर्बाद कर दिया है। इससे बचने के लिए अब युवाओं को कांग्रेस को हटाने पड़ेगा। राजस्थान में गैंगवार, तीज त्योहारों पर खतरा मंडरा रहा है। कानून व्यवस्था बिगड़ी है। कब पत्थर चले, कर्फ्यू लग जाए किसी को नहीं मालूम।

मोदी ने कहा कि राजस्थान के लोग कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन बेटियों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकता है। दलित बेटी के साथ रेप कर उस पर एसिड डाल दिया जाता है। दलित बहन के साथ पति के सामने रेप करते हैं। वीडियो वायरल करते हैं। स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर तक सुरक्षित नहीं है। कार्रवाई करने की बजाय कांग्रेस के नेता पीड़िताओं पर ही झूठ लगाने का आरोप लगा रहे हैं।

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