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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 10 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार मात्र अधिकारों की रक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह मानवता, समानता और व्यक्ति की गरिमा के प्रति हमारी सामूहिक संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का सर्वोच्च प्रतीक है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार प्रदान करता है। हम सबका दायित्व है कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी निष्ठापूर्वक पालन करें। अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा तभी संभव है जब समाज का हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग, उत्तरदायी और प्रतिबद्ध हो।

उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस विश्वभर में समानता, शांति, न्याय, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा की स्थापना के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाज तभी मजबूत बनता है जब हर व्यक्ति सुरक्षित, सम्मानित और समान अवसरों से सशक्त हो।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएँ और एक ऐसे समाज के निर्माण में सहयोग करें जो न्यायसंगत, समतामूलक, संवेदनशील तथा सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने वाला हो।
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बस्तर की धरती अब पुनः शांति, स्थिरता और विकास की ओर मजबूती से अग्रसर - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 छत्तीसगढ़ सरकार की मानवीय, संवेदनशील और परिणाम-उन्मुख पुनर्वास नीति के तहत आज बस्तर में एक और महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की गई। “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 37 माओवादियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है। यह आत्मसमर्पण न केवल व्यक्तिगत पुनर्जीवन की दिशा में कदम है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक मजबूत संकेत है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज के आत्मसमर्पण का स्वागत करते हुए कहा कि बस्तर की धरती अब पुनः शांति, स्थिरता और विकास की ओर मजबूती से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई, प्रशासनिक समन्वय और सरकार की पुनर्वास-केंद्रित नीतियों के कारण माओवादी हिंसा के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त हो रही है।

छत्तीसगढ़ में अब तक 487 से अधिक नक्सली न्यूट्रलाइज, 1849 से ज्यादा गिरफ्तार, तथा 2250 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आंकड़े बदलते बस्तर और सरकार की नीतियों में बढ़ते विश्वास का स्पष्ट प्रमाण हैं। लगातार बढ़ते आत्मसमर्पण से बस्तर में नई सुबह की शुरुआत हुई है, जहाँ अब शांति, प्रेम, भाईचारा और स्थायी समृद्धि का वातावरण निर्मित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पुलिस, सुरक्षा बल और प्रशासन की समन्वित कोशिशों ने बस्तर में सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया है, जिससे माओवादी हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। आज का आत्मसमर्पण इस निरंतर बदलती परिस्थिति और क्षेत्र में विश्वास के वातावरण को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पुनः यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, पूना मारगेम और नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत हर आत्मसमर्पित व्यक्ति को सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास की पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं बस्तर के सामाजिक ताने-बाने को मजबूती देने और हिंसा की छाया से बाहर निकालने का सशक्त माध्यम हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर में जारी यह सकारात्मक परिवर्तन आगे भी जारी रहेगा और क्षेत्र स्थायी शांति, विकास, रोज़गार, शिक्षा एवं सामाजिक समरसता की नई पहचान बनाएगा।
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अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस समारोह में NACHA बे एरिया चैप्टर बना सहभागी

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और लोक-कला ने विदेश की भूमि पर अपनी विशेष छाप छोड़ी। इस कार्यक्रम में NACHA (North America Chhattisgarh Association) के बे एरिया चैप्टर ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ राज्य को समर्पित एक आकर्षक स्टॉल लगाया, जिसमें राज्य के विशिष्ट उत्पादों, हस्तशिल्प, लोककला और पारंपरिक आभूषणों का सुंदर प्रदर्शन किया गया। इस स्टॉल के माध्यम से छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और हस्तशिल्प की विविधता को प्रदर्शित किया गया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने अत्यंत सराहा।


कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य का मनमोहक प्रदर्शन, जिसने वहां मौजूद भारतीय प्रवासी समुदाय और अन्य देशों के प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में प्रस्तुत यह लोकनृत्य न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि उसने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की आत्मा को भी सजीव कर दिया।

NACHA के सदस्यों ने बताया कि उनका उद्देश्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और लोक परंपरा को विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़वासी अपने मूल राज्य की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इस आयोजन ने उन्हें अपनी जड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ने का एक सशक्त अवसर प्रदान किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने NACHA बे एरिया चैप्टर के सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि उनका यह प्रयास छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपराओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़वासी राज्य के “सांस्कृतिक राजदूत” हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और मूल्यों को पूरी दुनिया में  स्थापित कर रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में दिया गया विष्णु देव रूट नाम

 छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला, जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। टीम ने यह चढ़ाई बेस कैंप से केवल 12 घंटे में पूरी की — वह भी आल्पाइन शैली में, जो तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है।


यह ऐतिहासिक अभियान सितंबर 2025 में आयोजित हुआ, जिसका आयोजन जशपुर प्रशासन ने पहाड़ी बकरा एडवेंचर के सहयोग से किया। इस अभियान को हीरा ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दल के पाँचों पर्वतारोही पहली बार हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचे थे। सभी ने “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर खेलों के लिए समर्पित प्रशिक्षण क्षेत्र है। विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ा, जिनमें बिलासपुर के पर्वतारोही एवं मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार, न्यूयॉर्क (USA) के रॉक क्लाइम्बिंग कोच डेव गेट्स, और रनर्स XP के निदेशक सागर दुबे शामिल रहे। इन तीनों ने मिलकर तकनीकी, शारीरिक और मानसिक दृष्टि से युवाओं को तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाया। दो महीनों की कठोर तैयारी और बारह दिनों के अभ्यास पर्वतारोहण के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी की।

अभियान प्रमुख स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह मार्ग नए पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत कठिन और तकनीकी था। मौसम चुनौतीपूर्ण था, दृश्यता सीमित थी और ग्लेशियरों में छिपी दरारें बार-बार बाधा बन रही थीं। इसके बावजूद टीम ने बिना फिक्स रोप या सपोर्ट स्टाफ के यह चढ़ाई पूरी की — यही असली आल्पाइन शैली है। यह अभियान व्यावसायिक पर्वतारोहण से अलग था, जहाँ पहले से तय मार्ग और सहायक दल पर निर्भरता होती है; इस दल ने पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हुए नई मिसाल कायम की।

अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। स्पेन के प्रसिद्ध पर्वतारोही टोती वेल्स, जो इस अभियान की तकनीकी कोर टीम का हिस्सा थे और स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच रह चुके हैं, ने कहा कि “इन युवाओं ने, जिन्होंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। यह साबित करता है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”

“विष्णु देव रूट” के अलावा दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊँची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने ‘छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया — जो हल्दी का वैज्ञानिक नाम है और भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है।

यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें तो भारत के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। बिना किसी हिमालयी अनुभव के इन युवाओं ने आल्पाइन शैली में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने भारतीय साहसिक खेलों को नई दिशा दी है। इस पहल ने तीन बातों को सिद्ध किया — आदिवासी युवाओं में प्राकृतिक शक्ति, सहनशीलता और पर्यावरण से जुड़ी सहज समझ उन्हें एडवेंचर खेलों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है; “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र पेशेवर पर्वतारोही तैयार करने की क्षमता रखते हैं; और हिमालय की अनदेखी चोटियाँ भारत में सतत एडवेंचर पर्यटन की नई संभावनाएँ खोल सकती हैं।

अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया, उनके साथ राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-नेता रहे। जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। अभियान को प्रशासनिक सहयोग डॉ. रवि मित्तल (IAS), रोहित व्यास (IAS), शशि कुमार (IFS) और अभिषेक कुमार (IAS) से मिला। तकनीकी सहायता डेव गेट्स, अर्नेस्ट वेंटुरिनी, मार्टा पेड्रो (स्पेन), केल्सी (USA) और ओयविंड वाई. बो (नॉर्वे) ने दी। पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन और फोटोग्राफी ईशान गुप्ता की कॉफी मीडिया टीम ने किया।

प्रमुख सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में पेट्ज़ल, एलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, अडवेनम एडवेंचर्स, जय जंगल प्राइवेट लिमिटेड, आदि कैलाश होलिस्टिक सेंटर, गोल्डन बोल्डर, क्रैग डेवलपमेंट इनिशिएटिव और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल शामिल रहे।

यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है कि भारत के गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “भारत का भविष्य गाँवों से निकलकर दुनिया की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।”

इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ओसाका की एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए किया आमंत्रित

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान ओसाका स्थित एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कंपनी को छत्तीसगढ़ में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये परियोजनाएँ न केवल कृषि मूल्य शृंखलाओं को मज़बूत करेंगी बल्कि उच्च-तकनीकी विनिर्माण को भी प्रोत्साहित करेंगी और राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर नए रोजगार अवसर सृजित करेंगी।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण, सुगम प्रक्रिया और प्रत्येक स्तर पर सहयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आशा व्यक्त की कि एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड की प्रस्तावित खाद्य प्रसंस्करण इकाई से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को नई मजबूती प्राप्त होगी। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा राज्य को उच्च-तकनीकी उत्पादन का नया केंद्र बनाएगी और युवाओं को आधुनिक उद्योगों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि ये निवेश परियोजनाएँ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उद्योग और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता की समृद्धि, युवाओं का भविष्य और निवेशकों का विश्वास है, और इसी संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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ओसाका इन्वेस्टर कनेक्ट: छत्तीसगढ़ ने जीता निवेशकों का भरोसा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान ओसाका में आयोजित प्रतिष्ठित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, प्रतिभाशाली मानवबल और उद्योग-अनुकूल नीतियों का सशक्त संगम है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत और जापान विश्वास एवं साझा मूल्यों की गहरी डोर से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने जापानी साझेदारों से आह्वान किया कि वे नवाचार, अवसर और साझा समृद्धि से आगे बढ़ रही छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में भागीदार बनें।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सरताज फूड्स, ओसाका को छत्तीसगढ़ में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए 11.45 मिलियन डॉलर (₹100 करोड़) का निवेश प्रस्ताव दिया। यह परियोजना राज्य के फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र को नई ऊँचाई देगी, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करेगी और किसानों को नए अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से छत्तीसगढ़ की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।

बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (B2G) बैठकों के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री साय ने मोराबु हंशिन कंपनी के प्रेसिडेंट एवं रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर श्री नाओयुकी शिमाडा से भी भेंट की। यह कंपनी कुशल इंजीनियरों, सिस्टम डेवलपमेंट और वर्कफोर्स सॉल्यूशंस के क्षेत्र में अग्रणी है। बैठक में कौशल प्रशिक्षण और वर्कफोर्स एक्सचेंज के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए वैश्विक अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा और राज्य का कौशल तंत्र और अधिक सशक्त बनेगा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक विशेषताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रचुर खनिज संपदा, सक्रिय सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम, विश्वस्तरीय औद्योगिक ढाँचा और वैश्विक निवेशकों को सहज वातावरण उपलब्ध कराना छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत है। राज्य में किए जा रहे सुधारों और निवेशकों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं की जापानी प्रतिनिधियों ने सराहना की। विशेषकर फूड प्रोसेसिंग, प्रौद्योगिकी और उन्नत वर्कफोर्स सॉल्यूशंस के क्षेत्र में निवेश की इच्छुक कंपनियों ने छत्तीसगढ़ को उपयुक्त अवसरों का प्रदेश बताया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, “छत्तीसगढ़ निवेश-अनुकूल इकोसिस्टम प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ वैश्विक साझेदारों को अवसर और सहयोग दोनों मिलते हैं। जापान के साथ हमारी साझेदारी विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित है। ओसाका में हुई चर्चाएँ न केवल निवेश लेकर आएँगी, बल्कि हमारे किसानों को सशक्त बनाएँगी, युवाओं के लिए रोजगार उत्पन्न करेंगी और विकसित छत्तीसगढ़ की नींव को और अधिक मजबूत करेंगी।”
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ओसाका (जापान) में वर्ल्ड एक्सपो 2025 के पहले ही दिन छत्तीसगढ़ पैवेलियन में उमड़ी रौनक, 22 हजार से अधिक दर्शकों ने किया अवलोकन

ओसाका (जापान) में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 के पहले दिन ही छत्तीसगढ़ पैवेलियन आकर्षण का केंद्र बन गया। उद्घाटन दिवस पर 22 हजार से अधिक दर्शकों ने यहाँ पहुँचकर छत्तीसगढ़ की विरासत, उद्योग और पर्यटन की अनूठी झलक का अनुभव किया।


भारत सरकार के इंडियन ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) के आमंत्रण पर 24 से 30 अगस्त 2025 तक भारत पैवेलियन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। आज इस भव्य पैवेलियन का विधिवत शुभारंभ किया गया।

छत्तीसगढ़ : संस्कृति, उद्योग और अवसरों का संगम

पैवेलियन को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह आगंतुकों को एक जीवंत अनुभव प्रदान करता है। पवेलियन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, औद्योगिक शक्ति और पर्यटन की संभावनाओं को सुंदर रूप से पिरोया गया है। यह वैश्विक दर्शकों को छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराता है।

पर्यटन और विरासत की छटा

पैवेलियन में छत्तीसगढ़ की धरती की सुंदरता और धरोहर को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। नवा रायपुर, देश का पहला ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी, जिसे निवेश और औद्योगिक प्रगति के लिए तैयार किया गया है, यहाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान चित्रकोट जलप्रपात ने भी सबका ध्यान खींचा। भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात होने के कारण इसे “भारत का नियाग्रा” कहा जाता है।

इतिहास और आस्था की झलक देने वाला सीतापुर (Sirpur) पैवेलियन में प्रमुख रूप से प्रदर्शित है। यह 8वीं शताब्दी ईस्वी से जुड़ा भारत का एक विशाल बौद्ध स्थल है, जो छत्तीसगढ़ की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का परिचायक है। भारत और जापान की सांस्कृतिक विरासत के इस जुड़ाव में, छत्तीसगढ़ बुद्ध के विचारों और शिक्षाओं से प्रेरित होकर शांति, समावेश और सतत विकास के साझा मूल्यों को आगे बढ़ाता है।

औद्योगिक शक्ति और लॉजिस्टिक हब के रूप में छत्तीसगढ़

पैवेलियन में छत्तीसगढ़ की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति पर विशेष बल दिया गया। राज्य की केंद्रीय स्थिति और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क उसे देश के भीतर सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाते हैं।

विनिर्माण, वस्त्र, आईटी/आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रामोद्योग जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ की तेजी से हो रही प्रगति को भी यहाँ प्रदर्शित किया गया है। यह वैश्विक निवेशकों के लिए राज्य को निवेश-तैयार गंतव्य के रूप में स्थापित करता है।

कला और शिल्प की पहचान

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोककला और हस्तशिल्प में भी झलकती है। पैवेलियन में बस्तर की ढोकरा कला—4,000 वर्ष पुरानी जीआई टैग प्राप्त धातु शिल्प—अपने अनगढ़ सौंदर्य और मौलिकता से सबको आकर्षित कर रही है।

इसी तरह, कोसा सिल्क, जिसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा कहा जाता है, पैवेलियन का मुख्य आकर्षण बना। यह अपनी प्राकृतिक चमक, मजबूती और आकर्षण के लिए विख्यात है और राज्य के वनों में पाए जाने वाले एंथरेया मायलिट्टा रेशमकीट से तैयार किया जाता है।

कोसा से बनी कलात्मक इंस्टॉलेशन छत्तीसगढ़ की आत्मा को व्यक्त करती है—जहाँ आध्यात्मिकता, प्रकृति और विकास का संतुलन साफ़ दिखाई देता है।

वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की दमदार उपस्थिति

वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पैवेलियन की शानदार शुरुआत और रिकॉर्डतोड़ दर्शक संख्या ने आने वाले सप्ताह की दिशा तय कर दी है। यह पैवेलियन न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है, बल्कि छत्तीसगढ़ को सतत औद्योगिक प्रगति और वैश्विक निवेश अवसरों के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने टोक्यो के ‘लिटिल इंडिया’ पहुँचकर महात्मा गांधी को किया नमन

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज अपने जापान प्रवास के दौरान टोक्यो स्थित ‘लिटिल इंडिया’ पहुँचकर  महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि महात्मा गांधी जी का शांति, अहिंसा और सद्भाव का अमर संदेश भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व में मानवता के लिए प्रेरणास्त्रोत है। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘लिटिल इंडिया’ में गांधी जी की प्रतिमा भारत-जापान मैत्री और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। यह स्थान न केवल भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि जापानी नागरिकों को भी भारत की महान परंपराओं और मूल्यों से जोड़ता है।

मुख्यमंत्री श्री साय के साथ इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यगण भी उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का जापान दौरा: निवेश और नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान टोक्यो में जापान एक्सटर्नल ट्रेड आर्गनाइजेशन (JETRO) के वरिष्ठ प्रतिनिधियों श्री नाकाजो काज़ुया, श्री एंडो युजी और श्री हारा हारुनोबू से भेंट कर निवेश एवं औद्योगिक सहयोग के संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में आईटी, टेक्सटाइल्स, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया गया। मुख्यमंत्री ने जेट्रो के प्रतिनिधियों को प्रदेश की तेज़ी से प्रगति कर रही अर्थव्यवस्था में निवेश के नए अवसर तलाशने हेतु आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़, भारत के हृदय स्थल में स्थित एक उभरता हुआ औद्योगिक एवं निवेश गंतव्य है। राज्य सरकार पारदर्शी नीतियों, सुगम प्रक्रियाओं और मजबूत औद्योगिक आधारभूत संरचना के माध्यम से वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही है। जेट्रो प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चा से छत्तीसगढ़ और जापान के बीच आर्थिक सहयोग की नई संभावनाओं को बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित ‘Deep Space – To the Moon & Beyond’ प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान और नवाचारों की यह समृद्ध झलक, आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में भारत सरकार के सहयोग से विकसित किए जा रहे स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को नई दिशा और प्रेरणा देगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जापान प्रवास से छत्तीसगढ़ को निवेश, नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में ठोस परिणाम प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य प्रदेश को न केवल औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है बल्कि उसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विश्व पटल पर एक सशक्त पहचान दिलाना भी है।

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वर्ल्ड एक्सपो 2025 ओसाका में भारतीय इंजीनियरिंग और नवाचार का विश्व में बजा डंका

 जापान के ओसाका में चल रहे वर्ल्ड एक्सपो 2025 के इंडिया पवेलियन - भारत में रेल सप्ताह का अंतिम दिन है, और मैं एक ऐसे स्वप्निल क्षण में खड़ा हूं – जहाँ अंतरराष्ट्रीय सराहना और सांस्कृतिक भावनाएं साझा बह रही हैं। मैं केवल भारतीय इंजीनियरिंग और नवाचार के उत्सव का हिस्सा नहीं हूं, बल्कि राष्ट्रों के बीच एक आत्मीय जुड़ाव के अनुभव को भी साझा कर रहा हूं। 


ओसाका के यूमेशिमा द्वीप की घुमावदार सड़कों पर, जहाँ यह भविष्यवादी एक्सपो आयोजित किया गया है, दुनिया दुनिया के 150 देशों से अधिक के  उत्साहित दर्शक पहुँच रहे हैं – विशेषकर जापानी जनमानस, जिन्होंने भारत पवेलियन को, और विशेष रूप से भारतीय रेलवे की प्रदर्शनी को, अपनी ज़रूरी यात्रा का हिस्सा बना लिया है।

इंडिया पवेलियन - भारत में बहती ऊर्जा को नजरअंदाज करना असंभव है। वंदे भारत एक्सप्रेस के भव्य मॉडल के सामने से गुजरते हुए – जो सफेद और नीले रंगों की चमक में सजी है – मैं देखता हूँ कि जापानी परिवार उल्लासपूर्वक सेल्फियाँ ले रहे हैं, बच्चे हाई-स्पीड ट्रेन के मॉडल को उत्सुकता से निहार रहे हैं और तकनीकी जानकार इसकी विशेषताओं को पुस्तक की तरह पढ़ रहे हैं।

ये सब कुछ शानदार है, लेकिन जो मेरी आँखें नम कर देता है। वह है – “नमस्ते” का आदान-प्रदान। जापानी आगंतुक मुस्कान के साथ हाथ जोड़कर भारतीय वालंटियर्स और अधिकारियों का स्वागत करते हैं। यह केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि आपसी सम्मान का भाव है।

ओसाका में रहने वाली विश्वविद्यालय की छात्रा अकीको तनाका ने वंदे भारत के सामने पोज देते हुए कहा कि “मुझे नहीं पता था कि भारत में इतनी तेज ट्रेनें भी चलती हैं! यह बहुत सुंदर है।” और फिर ट्रेन की सीटी जैसी आवाज निकालकर मुस्कराते हुए कहती हैं, “नमस्ते!” 

थोड़ा आगे, लोगों की भीड़ उस मिनिएचर मॉडल के चारों ओर जमा है – जो दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल, चिनाब ब्रिज है। कुछ लोग तो इसकी अलग-अलग एंगल से फोटो खींचने के लिए नीचे झुक जाते हैं। नागोया के एक सेवानिवृत्त इंजीनियर बताते हैं, “यह एक संरचनात्मक चमत्कार है और यह हिमालय में बना है – यह अविश्वसनीय है।”

लोहे में बुनी कहानियाँ: देश को एकसूत्र में पिरोती भारतीय रेल

इंडिया पवेलियन - भारत का रेलवे खंड केवल मशीनों की प्रदर्शनी नहीं है – यह एक जीवंत कथानक है। यह उस सिस्टम की कहानी है जो हर दिन 2.3 करोड़ लोगों को उनके गंतव्य तक ले जाती है – और यह कहानी दिखती है ऑगमेंटेड रियलिटी, इमर्सिव प्रोजेक्शन और वर्चुअल टूर के जरिए – जो भारत के पहाड़ों, मैदानों, जंगलों और रेगिस्तानों से होकर गुजरती है।

इस कड़ी में, हिमालय की पहाड़ियों में एक उफनती नदी के ऊपर 359 मीटर ऊँचाई पर खड़ा चिनाब ब्रिज, केवल वास्तुकला का अजूबा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है। इस प्रदर्शनी का एक और आकर्षण है – अंजी खड्ड ब्रिज – कश्मीर के कठिन भूभाग में बना यह भारत का पहला केबल-स्टेड रेल पुल है। पर्यटक शांत भाव से चुपचाप वीडियो कवरेज देखने को खड़े हैं, जिसमें कंस्ट्रक्शन वर्कर हिमपात और भूस्खलन के बीच जूझते हुए निर्माण कार्य को पूरा कर रहे हैं। 

इन इंजीनियरिंग के चमत्कारों के बीच भी, भावनात्मक कथा ही सबसे अधिक प्रभाव डालती है। प्रदर्शनी का एक हिस्सा एक भारतीय रेलवे स्टेशन जैसा सजा है – हिंदी में उद्घोषणाएं, चायवाले की आवाजें, और इंजन की घरघराहट – जिससे कई जापानी दर्शक भावुक हो उठते हैं। यह तकनीकी से ज्यादा एक सांस्कृतिक क्षण था।

गर्व और खोज की साझी अनुभूति

वर्ल्ड एक्सपो में, जो मैं देख रहा हूँ, वह केवल अवसंरचना की प्रदर्शनी नहीं है; यह आपसी गर्व और खोज की एक साझी अनुभूति का क्षण है। जापानी परिवार, जिन्हें आमतौर पर शांत और संयमित माना जाता है, यहाँ खुल कर भाग ले रहे हैं। वे मॉडल्स के साथ पोज़ कर रहे हैं, भारतीय प्रतिनिधियों से बात कर रहे हैं, और ‘वंदे भारत’ व ‘चिनाब’ जैसे शब्दों को बोलने की कोशिश कर रहे हैं – चेहरे पर उत्साह साफ़ झलकता है। कुछ तो भारतीय वालंटियर्स के साथ तस्वीरें खिंचवाने की गुज़ारिश करते हैं और उपहार या ओरिगामी क्रेन भी देते हैं। एक मार्मिक पल तब आता है, जब स्कूली बच्चे झुक कर एकसाथ कहते हैं – “नमस्ते इंडिया!” और भारतीय रेल नेटवर्क के डिजिटल मानचित्र के सामने ग्रुप सेल्फी लेते हैं। एक स्थानीय निवासी कहते हैं – “यह केवल रेल नहीं, बल्कि भारत के दिल की बात है। यह सपनों की बात है – जो कहीं न कहीं जा रहे हैं।”

विश्व के साथ कदमताल

वर्ल्ड एक्सपो 2025 की थीम है – “हमारे जीवन के लिए भविष्य के समाज का निर्माण”, जिसमें ‘जीवन को बचाना’, ‘जीवन को सशक्त बनाना’, और ‘जीवन को जोड़ना’ जैसे उप-विषय हैं। यह थीम भारत की प्रस्तुति में स्पष्ट झलकती है। भारतीय रेलवे – जो स्मार्ट इंजीनियरिंग, हरित तकनीक और मानव-केन्द्रित गतिशीलता का उदाहरण है – यह बताता है कि कैसे बुनियादी ढांचे को लोगों के लिए बनाया जाना चाहिए न कि केवल बाजार के लिए।

सौर ऊर्जा से संचालित स्टेशन, एआई-आधारित ट्रैफिक कंट्रोल, जल-संरक्षण उपाय और 2030 तक पूर्ण विद्युतीकरण का लक्ष्य – यह सब इंटरेक्टिव टचस्क्रीन और डिजिटल टाइमलाइन में प्रदर्शित है – जिसे बच्चे से लेकर बुज़ुर्ग तक सहजता से समझ सकते हैं।
जब दुनिया भर में टिकाऊ विकास की चर्चा हो रही है, तब भारत की रेल प्रणाली यह दिखाती है कि यह कैसे किया जा सकता है – निश्चयपूर्वक और सबको साथ लेकर।

अंतिम छाप: तकनीक, स्टील और मुस्कान

जैसे-जैसे सूर्यास्त होने लगता है, रेलवे सप्ताह के अंतिम दिन भी इंडिया पवेलियन-भारत में भीड़ बनी रहती है। लोग प्रदर्शनियां देख रहे हैं, तस्वीरें ले रहे हैं, बातें कर रहे हैं और रेल थीम आधारित संग्रहालय का दौरा कर रहे हैं। पास की दुकान से मसाला चाय की ख़ुशबू और दूर कहीं से आती ट्रेन की सीटी की ध्वनि संगीत के साथ घुलती जा रही है।

मैं वंदे भारत के मॉडल के सामने ठिठकता हूं और एक फोटो लेता हूँ – लेकिन इस बार मेरे साथ एक जापानी बच्चा है, जिसका हाथ ऊपर हवा में उठाए ट्रेन कंडक्टर की तरह हंसते हुए। उसके माता-पिता भारतीय वालंटियर्स के सामने झुककर कहते हैं – “धन्यवाद, आपने हमें भारत का यह रूप दिखाया।” 

इसी क्षण तकनीक, परंपरा, स्टील और मुस्कान के इस संगम में – मुझे कुछ शाश्वत मिलता है। मैं समझता हूँ कि भारतीय रेल, जिसे अब तक केवल लॉजिस्टिक चमत्कार के रूप में देखा गया था – आज एक सांस्कृतिक पुल बन गया है – जो भारत को दुनिया से जोड़ता है।
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करीना कपूर खान ने बॉलीवुड में अपने कैरियर के 25 साल पूरे किये

अभिनेत्री करीना कपूर के आज बॉलीवुड में 25 साल पूरे हो गए हैं। करीना ने साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से बॉलीवुड में एंट्री की थी। आज 25 साल बाद करीना इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस में शामिल हैं। वो अपने वक्त में इंडस्ट्री के हाइएस्ट पेड एक्ट्रेस में से एक रही हैं। आज बॉलीवुड में अपने 25 साल पूरे होने पर अब करीना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है।


करीना ने शेयर की पहली फिल्म से जुड़ी तस्वीरें
बॉलीवुड में करीना कपूर का सफर अब 25 साल का हो चुका है। इस मौके पर करीना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्पेशल पोस्ट किया है। इस पोस्ट में करीना ने अपनी डेब्यू फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से जुड़ी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इन तस्वीरों में करीना अपने डेब्यू को-एक्टर अभिषेक बच्चन के साथ नजर आ रही हैं। जबकि कुछ फोटोज में वो अकेले नजर आ रही हैं।

करीना ने लिखा- ‘25 साल…’
इन तस्वीरों को शेयर करते हुए करीना ने कैप्शन में ज्यादा कुछ नहीं लिखा है। करीना ने कैप्शन में सिर्फ लिखा, ‘25 साल और हमेशा के लिए…’ इसके साथ ही करीना ने कुछ एक इमोजी का इस्तेमाल किया है। जिनमें रेड हार्ट और इनफिनिटी का साइन शामिल है।

नहीं हुई थी दमदार शुरुआत
हालांकि, करीना कपूर का डेब्यू वैसा नहीं रहा था, जैसी उन्हें उम्मीद थी। क्योंकि 30 जून 2000 को रिलीज हुई उनकी डेब्यू फिल्म ‘रिफ्यूजी’ बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी। हालांकि, करीना की उनके अभिनय के लिए तारीफ हुई थी। वहीं फिल्म के गाने काफी हिट रहे थे। जो आज भी लोगों की प्ले लिस्ट में शामिल हैं।

‘सिंघम अगेन’ में नजर आई थीं करीना
करीना के वर्कफ्रंट की बात करें तो 25 साल बाद भी करीना इंडस्ट्री में एक्टिव हैं और लगातार फिल्में कर रही हैं। करीना आखिरी बार पिछले साल आई फिल्म ‘सिंघम अगेन’ में नजर आई थीं। इन दिनों वो अपनी आगामी फिल्म ‘दायरा’ को लेकर चर्चाओं में बनी हुई हैं।

 

 

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शशि थरूर के नेतृत्व में सांसदों की टीम ने आतंकवाद विरोधी शांति मिशन शुरू किया

 कांग्रेस के लोकसभा सांसद शशि थरूर ने शनिवार को सांसदों की एक सर्वदलीय टीम के साथ शांति मिशन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य हमे आतंकवाद खामोश नहीं करा सकता संदेश पहुंचाना है। भारतीय दूतावास ने एक्स पर एक बयान में कहा, आतंकवाद के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता के भारत के मजबूत संदेश को दुनिया के सामने लाना! डॉ. शशि थरूर के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का न्यूयॉर्क में राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने स्वागत किया।

आठ सांसद और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू कैरेबियन सहित अमेरिका में मिशन के शुरुआती चरण में यहां पहुंचे। वे अमेरिका पर हुए सबसे भयानक आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में 9/11 स्मारक का दौरा करने वाले थे। वे वहां प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी मिलेंगे। टीम यहां से गुयाना, पनामा, कोलंबिया और ब्राजील जाएगी और फिर नेताओं, सांसदों और राय बनाने वालों से मिलने के लिए अमेरिका लौटेगी।

टीम के भारत से रवाना होने से पहले थरूर ने कहा, हम देश के लिए बोलने जा रहे हैं, इस भयावह संकट के बारे में बोलने जा रहे हैं, जिसमें हमारे देश पर आतंकवादियों ने सबसे क्रूर तरीके से हमला किया। उन्होंने कहा, हमें अपने देश के लिए, अपनी प्रतिक्रिया के लिए स्पष्टता और दृढ़ विश्वास के साथ बोलने की जरूरत है और दुनिया को यह संदेश देना है कि हम आतंकवाद से चुप नहीं रहेंगे।

आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता को प्रदर्शित करते हुए, इस टीम का नेतृत्व विपक्षी कांग्रेस पार्टी के थरूर कर रहे हैं और इसमें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की शांभवी, झारखंड मुक्ति मोर्चा के सरफराज अहमद और शिवसेना के मिलिंद मुरली देवड़ा शामिल हैं।

अन्य सदस्यों में भाजपा के शशांक मणि त्रिपाठी, भुवनेश्वर कलिता और तेजस्वी सूर्या तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी के जीएम हरीश बालयोगी शामिल हैं। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या के बाद, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी केंद्रों पर हमला किया।

पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया, जिसमें भारत में गुरुद्वारों, मंदिरों और कॉन्वेंटों सहित पूजा स्थलों और चिकित्सा सुविधाओं जैसे नागरिक ढांचों को निशाना बनाया गया, जिससे संघर्ष में वृद्धि हुई। विश्व व्यापार केंद्र स्मारक पर टीम के दौरे की शुरुआत करते हुए थरूर ने कहा हम नहीं चाहते कि दुनिया हमारी ओर से आंखें फेर ले। हम नहीं चाहते कि सच्चाई को सामने लाने को लेकर उदासीनता बरती जाए।

11 सितंबर, 2001 को विश्व व्यापार केंद्र पर हुए आतंकवादी हमले में, जिसका संबंध पाकिस्तान से था, 2,731 लोग मारे गए थे। इस हमले को अंजाम देने वाले अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान सरकार ने शरण और सरकारी सुरक्षा दी थी और उसे अमेरिकी नौसेना की एलीट सील्स यूनिट ने एबटाबाद में मार गिराया था। कोलंबिया एक ऐसा देश है जो वर्षों से आतंकवाद से त्रस्त है, जहां आतंकवाद विरोधी संदेश गूंजेगा।

थरूर ने कहा, यह एक ऐसा मिशन है जो एक दिन दुनिया को याद दिलाएगा कि भारत उन सभी मूल्यों के लिए खड़ा है जिन्हें आज दुनिया में बनाए रखने की जरूरत है, शांति, लोकतंत्र, स्वतंत्रता। न कि नफरत, हत्या और आतंकवाद।

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कलाकारों और साहित्यकारों के प्रति संवेदनशीलता का परिचायक है मासिक पेंशन बढ़ाने का निर्णय: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के उन कलाकारों और साहित्यकारों के लिए एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक निर्णय लिया गया, जो आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। अब इन्हें दी जाने वाली मासिक वित्तीय सहायता (पेंशन) राशि को 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह किया गया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे कलाकार और साहित्यकार समाज की आत्मा हैं। उनका योगदान अमूल्य है। यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके प्रति राज्य की संवेदना और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बजट सत्र में की गई घोषणा का परिपालन है, और हमारी सरकार हर वर्ग के सशक्तिकरण हेतु प्रतिबद्ध है।

यह पेंशन संस्कृति विभाग की वित्तीय सहायता योजना नियम-1986 के अंतर्गत दी जाती है। इस योजना की शुरुआत 1986 में हुई थी, जब सहायता राशि न्यूनतम 150 रुपये और अधिकतम 600 रुपये थी। बाद में 2007 में इसे 1500 रुपये और 2012 में 2000 रुपये किया गया, लेकिन 12 वर्षों से इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई थी।

उल्लेखनीय है कि राज्य में वर्तमान में कुल 162 कलाकारों और साहित्यकारों को यह मासिक पेंशन दी जा रही है। अब उन्हें सालाना 24 हजार की जगह 60 हजार रुपये मिलेंगे, जिससे वे अपनी बुनियादी जरूरतें बेहतर ढंग से पूरी कर सकेंगे।

मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित इस संशोधन से राज्य पर कुल  58.32 लाख रुपये का वार्षिक अतिरिक्त व्यय भार आएगा। पहले जहां कुल वार्षिक व्यय 38.88 लाख रुपये था, वह अब बढ़कर 97.20 लाख रुपए वार्षिक हो जाएगा। लेकिन यह व्यय राज्य सरकार के लिए गौरवपूर्ण कर्तव्य है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिन लोगों ने कला, साहित्य और संस्कृति की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया, उनका आत्मसम्मान बनाए रखना हमारा दायित्व है। यह निर्णय संवेदनशील और समावेशी शासन का प्रमाण है। सरकार का यह कदम न केवल आर्थिक सहारा देगा, बल्कि कलाकारों और साहित्यकारों को आत्मबल और सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रदान करेगा।
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रेत पर नहीं, रंगों में रचा गया सपना : रायपुर के युवाओं ने WAVES 2025 में रचा इतिहास

 रायपुर के युवाओं ने अपने हुनर और रचनात्मकता से दुनिया को दिखा दिया कि सपने रेत पर नहीं, रंगों में रचे जाते हैं। ‘एंटैंगल्ड स्टूडियो’ के बैनर तले काम करने वाली इस टीम ने वर्ल्ड ऑडियो विज़ुअल एंटरटेनमेंट समिट (WAVES) 2025 में भारत के लिए ऐनिमी एनीमेशन श्रेणी में गोल्ड मेडल और वेबटून श्रेणी में सिल्वर मेडल जीतकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।


यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन पहली बार भारत में हुआ। मुंबई में आयोजित चार दिवसीय समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस आयोजन में 90 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और 10 हजार से अधिक प्रतिभागियों की मौजूदगी में भारत की युवा प्रतिभा ने अपना परचम लहराया।

टीम में शामिल ये सितारे

गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम में शुभ्रांशु सिंह, शेफाली सिंह, निहाल डुंगडुंग और प्रथम विरानी शामिल हैं। सभी की उम्र 22 से 25 वर्ष के बीच है और ये युवा इंजीनियरिंग व फैशन डिज़ाइन जैसे विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आते हैं। वे ऐनिमी की उस दुनिया में अपना नाम बनाना चाहते थे जो अपनी रंगीनता, भावनात्मक गहराई और जीवंत पात्रों के लिए जानी जाती है।

वेबटून में भी छत्तीसगढ़ के विजयी रंग

वेबटून श्रेणी में सिल्वर मेडल छत्तीसगढ़ के ही एक और प्रतिभाशाली युवा विशाल मरावी ने जीता। वे भी एंटैंगल्ड स्टूडियो से जुड़े हैं और उनकी इस रचनात्मक जीत ने स्टूडियो को दोहरी सफलता दिलाई है।

सपनों की यह उड़ान नागपुर से शुरू हुई

शुभ्रांशु सिंह ने बताया कि इस रचनात्मक यात्रा की शुरुआत अक्टूबर 2024 में नागपुर में आयोजित रीजनल प्रतियोगिता से हुई। वहां विजयी होने के बाद, टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर 11 शहरों की विजेता टीमों के साथ मुकाबला किया और फाइनल के लिए चुनी गई।  WAVES  2025 के मंच पर 20 से अधिक देशों की टीमों को पछाड़कर इन युवाओं ने भारत को स्वर्ण दिलाया।

नज़रे अब टोक्यो पर

गोल्ड मेडल के साथ टीम को 2026 में टोक्यो, जापान में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय ऐनिमी इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ है। टीम इस अवसर को लेकर बेहद उत्साहित है और मानती है कि यह भारत की ऐनिमी प्रतिभा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का सुनहरा मौका है।

युवा सपनों का भविष्य है ऐनिमी

टीम लीडर शुभ्रांशु सिंह का कहना है कि भारत में ऐनिमी एनीमेशन का भविष्य बेहद उज्ज्वल है और यह युवा वर्ग के लिए एक रचनात्मक व करियर विकल्प बन सकता है। रायपुर के इन रचनात्मक सितारों ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक, कल्पनाशीलता और मेहनत का संगम हो तो छत्तीसगढ़ जैसे राज्य से भी विश्व मंच पर छा जाना मुमकिन है।
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13 साल बाद दमिश्क में जर्मनी ने दोबारा खोला अपना दूतावास

 जर्मनी ने 13 साल बाद दमिश्क में अपना दूतावास दोबारा खोल दिया है। सीरियाई मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी। जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक की यात्रा के दौरान दूतावास खोला गया। दिसंबर 2024 में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद से सीरिया की उनकी दूसरी यात्रा में राजनयिक मिशन को फिर से खोला गया।

जर्मन मीडिया ने बेयरबॉक का हवाला देते हुए बताया कि फिर से खोले गए दूतावास में 10 से भी कम राजनयिकों को तैनात किया जाएगा। अपनी यात्रा के दौरान, बेयरबॉक ने सीरियाई नेता अहमद अल-शरा, विदेश मामलों के प्रमुख असद अल-शैबानी और सीरियाई नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।

बेयरबॉक ने दमिश्क में भारी क्षतिग्रस्त जोबार इलाके का भी दौरा किया, जो एक ऐसा जिला है जिसने देश के गृह युद्ध का खामियाजा भुगता है। जर्मनी ने 2012 में दमिश्क में अपना दूतावास बंद कर दिया था जब देश में भयंकर गृहयुद्ध शुरू हुआ था। इटली और स्पेन जैसे कई अन्य यूरोपीय देशों ने पहले ही सीरिया की राजधानी में अपने दूतावास फिर से खोल दिए हैं।

राष्ट्रपति अल-असद को उनके नए नियुक्त उत्तराधिकारी अहमद अल-शरा के नेतृत्व में विद्रोही बलों के गठबंधन द्वारा अपदस्थ किए जाने के बाद सीरिया में जर्मनी के राजनयिक मिशन को फिर से खोलना एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।

विद्रोहियों के इस तेज हमले के कारण असद परिवार के पांच दशक से अधिक के शासन का अंत हुआ। वहीं, तीन महीने बाद इस राजनयिक कदम के लिए मंच तैयार किया गया।

हालांकि दूतावास का खुलना ऐसे समय पर हुआ, जब हिंसा बहुत ज्यादा है, खासतौर पर सीरियाई तट पर। यह अलावी अल्पसंख्यकों का गढ़ है, जिससे असद ताल्लुक रखते हैं। नई सरकार के प्रति वफादार सुरक्षाबलों और पुरानी सरकार का समर्थन करने वालों के बीच झड़पों में काफी लोग हताहत हुए हैं। सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स जैसे निगरानी समूहों के अनुसार, सैकड़ों नागरिक, मुख्य रूप से अलावी, चल रहे संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं।

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रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी बड़ी खबर, जेलेंस्की शांति के लिए तैयार: ट्रंप

 राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर सबसे बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप का दावा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर जेलेंस्की युद्ध में शांति के लिए तैयार हो गए हैं। ट्रंप ने बुधवार को अपने संबोधन के दौरान कहा कि हमें जेलेंस्की का एक पत्र मिला है, जिसमें जेलेंस्की ने युद्ध में शांति के लिए तैयार होने की बात कही है। ट्रंप का यह दावा कुछ दिनों पहले ओवल ऑफिस में जेलेंस्की के साथ हुई तीखी बहस के बाद आया है।
बता दें कि करीब एक हफ्ते पहले ट्रंप और जेलेंस्की के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति के मुद्दे पर हो रही चर्चा के दौरान ओवल ऑफिस में जोरदार बहस हो गई थी। ट्रंप ने इस दौरान जेलेंस्की को खूब खरी-खोटी सुनाई थी। ट्रंप ने जेलेंस्की को मूर्ख राष्ट्रपति तक कह दिया था और कहा था कि अमेरिका ने यूक्रेन को युद्ध के लिए 350 बिलियन डॉलर खर्च किए। ट्रंप का कहना था कि यूक्रेन के पास अब कोई कार्ड नहीं है। वह रूस के खिलाफ युद्ध में अमेरिका के हथियार के दम पर अब तक टिका रहा है। ट्रंप ने जेलेंस्की पर हर हाल में समझौते का दबाव डाला था। मगर तब जेलेंस्की वार्ता के बाद ह्वाइट हाउस बीच में ही छोड़कर चले गए थे।
अमेरिका के दबाव में झुके जेलेंस्की

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अभी हाल में ट्रंप के साथ हुई बहस को अफसोसजनक करार दिया था। इस पूरे घटनाक्रम के लिए उन्होंने क्षमा भी मांग लिया था। इसके बाद अब ट्रंप ने उनका शांति वाला पत्र मिलने का दावा किया है। इससे पता चलता है कि जेलेंस्की अब पूरी तरह अमेरिका के दबाव में आ गए हैं। हालांकि ट्रंप से बहस के बाद यूरोप ने जेलेंस्की का साथ देने का वादा किया था। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अंत तक यूक्रेन का साथ देने का वादा किया है। इन सबके बावजूद जेलेंस्की अमेरिका से महत्वपूर्ण खनिज डील करने को भी तैयार हो गए हैं। हालांकि यह डील ट्रंप के साथ हुई तीखी बहस के दिन ही होनी थी, लेकिन तब बात बिगड़ गई थी।

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भूटान में पहली बार दौड़ेगी रेलगाड़ी

 भूटान को अब जल्द ही अपना पहला रेल लिंक मिलने वाला है। भारतीय रेलवे ने असम के कोकराझार से भूटान के गेलेफू तक रेल लाइन बिछाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूरी कर ली है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के प्रवक्ता ने शनिवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने कहा कि प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण पहले ही पूरा हो चुका है, अब डीपीआर की मंजूरी का इंतजार है। 

 

कोकराझार को भूटान के गेलेफू से जोड़ने की योजना

प्रवक्ता ने बताया कि प्रस्तावित 69.04 किलोमीटर रेलवे लाइन असम के कोकराझार स्टेशन को भूटान के गेलेफू से जोड़ेगी और इसकी अनुमानित लागत 3,500 करोड़ रुपये होगी। इस परियोजना में छह नए स्टेशन - बालाजन, गरुभासा, रुनिखाता, शांतिपुर, दादगिरि और गेलेफू का विकास शामिल है। 

 

29 बड़े पुल, 65 छोटे पुल होंगे

बुनियादी ढांचा योजना में दो अहम पुल, 29 बड़े पुल, 65 छोटे पुल, एक ‘रोड ओवर-ब्रिज’, 39 ‘रोड अंडर-ब्रिज’ और 11 मीटर लंबाई के दो पुल शामिल हैं। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ अंतिम स्थान सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है और डीपीआर को आगे की मंजूरी और आवश्यक निर्देशों के लिए प्रस्तुत कर दिया गया है।’’ 

 

व्यापार, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उन्होंने कहा, ‘‘प्रस्तावित रेलवे लाइन दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाकर भारत-भूटान संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगी। इससे संपर्क में भी सुधार होगा और भूटान को अपना पहला रेलवे लिंक मिलेगा और निर्बाध परिवहन की सुविधा मिलेगी।’’ प्रवक्ता ने कहा कि प्रस्तावित रेलवे लाइन प्रधानमंत्री की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और 'पड़ोसी पहले' दृष्टिकोण के अनुरूप है। 

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जयशंकर ने हिंद महासागर सम्मेलन में की विक्रमसिंघे से मुलाकात

 विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आठवें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ मुलाकात की। मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी दी गयी। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें हिंद महासागर क्षेत्र में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय साझेदारी को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

 

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