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रहस्यमय भारतीय चील-उल्लू

 भारतीय चील-उल्लू  को कुछ वर्षों पूर्व ही एक अलग प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया था और इसे युरेशियन चील-उल्लू से अलग पहचान मिली थी। भारतीय प्रजाति सचमुच एक शानदार पक्षी है। मादा नर से थोड़ी बड़ी होती है और ढाई फीट तक लंबी हो सकती है, और उसके डैनों का फैलाव छह फीट तक हो सकता है।

इनके विशिष्ट कान सिर पर सींग की तरह उभरे हुए दिखाई देते हैं। इस बनावट के पीछे एक तर्क यह दिया जाता है कि ये इन्हें डरावना रूप देने के लिए विकसित हुए हैं ताकि शिकारी दूर रहें। यदि यह सही है, तो ये सींग वास्तव में अपना काम करते हैं और डरावना आभास देते हैं।

निशाचर होने के कारण इस पक्षी के बारे में बहुत कम मालूमात हैं। इनके विस्तृत फैलाव (संपूर्ण भारतीय प्रायद्वीप) से लगता है कि इनकी आबादी काफी स्थिर है। लेकिन पक्के तौर पर कहा नहीं जा सकता क्योंकि ये बहुत आम पक्षी नहीं हैं। इनकी कुल संख्या की कभी गणना नहीं की गई है। हमारे देश में वन क्षेत्र में कमी होते जाने से आज कई पक्षी प्रजातियों की संख्या कम हो रही है। लेकिन भारतीय चील-उल्लू वनों पर निर्भर नहीं है। उनका सामान्य भोजन, जैसे चूहे, बैंडिकूट और यहां तक कि चमगादड़ और कबूतर तो झाड़-झंखाड़ और खेतों में आसानी से मिल जाते हैं। आसपास की चट्टानी जगहें इनके घोंसले बनाने के लिए आदर्श स्थान हैं।

मिथक, अंधविश्वास

मानव बस्तियों के पास ये आम के पेड़ पर रहना पसंद करते हैं। ग्रामीण भारत में, इस पक्षी और इसकी तेज़ आवाज़ को लेकर कई अंधविश्वास हैं। इनका आना या इनकी आवाज़ अपशकुन मानी जाती है। प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी सलीम अली ने लोककथाओं का दस्तावेज़ीकरण किया है जो यह कहती हैं कि चील-उल्लू को पकड़कर उसे पिंजरे में कैद कर भूखा रखा जाए तो यह मनुष्य की आवाज़ में बोलता है और लोगों का भविष्य बताता है।

उल्लू द्वारा भविष्यवाणी करने सम्बंधी ऐसे ही मिथक यूनानी से लेकर एज़्टेक तक कई संस्कृतियों में व्याप्त हैं। कहीं माना जाता है कि वे भविष्यवाणी कर सकते हैं कि युद्ध में कौन जीतेगा, तो कहीं माना जाता है कि आने वाले खतरों की चेतावनी दे सकते हैं। लेकिन हम उन्हें ज्ञान से भी जोड़ते हैं। देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लू (उलूक) ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

भारतीय चील-उल्लू से जुड़े नकारात्मक अंधविश्वास हमें इनके घोंसले वाली जगहों पर इनकी उग्र सुरक्षात्मक रणनीति पर विचार करने को मजबूर करते हैं। इनके घोंसले चट्टान पर खरोंचकर बनाए गोल कटोरेनुमा संरचना से अधिक कुछ नहीं होते, जिसमें ये चार तक अंडे देते हैं। इनके खुले घोंसले किसी नेवले या इंसान की आसान पहुंच में होते हैं। यदि कोई इनके घोंसले की ओर कूच करता है तो ये उल्लू खूब शोर मचाकर उपद्रवी व्यवहार करते हैं, और घुसपैठिये के सिर पर पीछे की ओर से अपने पंजे से झपट्टा मारकर वार करते हैं।

खेती में लाभकारी

इन उल्लुओं की मौजूदगी से किसानों को निश्चित ही लाभ होता है। एला फाउंडेशन और भारतीय प्राणि वैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि झाड़-झंखाड़ के पास घोंसले बनाने वाले भारतीय चील-उल्लुओं की तुलना में खेतों के पास घोंसले बनाने वाले भारतीय चील-उल्लू संख्या में अधिक और स्वस्थ होते हैं। ज़ाहिर है, उन्हें चूहे वगैरह कृंतक जीव बड़ी संख्या में मिलते होंगे। और उल्लुओं के होने से किसानों को भी राहत मिलती होगी।

इन उल्लुओं का भविष्य क्या है? भारत में पक्षियों के प्रति रुचि बढ़ती दिख रही है। पक्षी निरीक्षण (बर्ड वॉचिंग),  जिसे एक शौक कहा जाता है, अधिकाधिक उत्साही लोगों को लुभा रहा है। ये लोग पक्षियों की गणना, सर्वेक्षण और प्रवासन क्षेत्रों का डैटा जुटाने में योगदान दे रहे हैं। लेकिन यह काम अधिकतर दिन के उजाले में किया जाता है जिसमें उल्लुओं के दर्शन प्राय: कम होते हैं। उम्मीद है कि भारतीय चील-उल्लू जैसे निशाचर पक्षियों के भी दिन (रात) फिरेंगे। (स्रोत फीचर्स) 

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शुक्र पर जीवन की तलाश

 पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना का विचार हमेशा से सभी को आकर्षित करता रहा है। जीवन की संभावना वाले ग्रहों की सूची में मंगल के अलावा शुक्र भी शामिल हो चुका है। इसका कारण पिछले डेढ़-दो दशक में शुक्र के वातावरण में घटित हो रही रासायनिक प्रक्रियाओं को लेकर हमारी समझ में हुई वृद्धि है। हाल ही में कार्डिफ युनिवर्सिटी के जेन ग्रीव्स की टीम ने खगोल विज्ञान की एक राष्ट्रीय गोष्ठी में शुक्र पर जीवन योग्य परिस्थितियों की मौजूदगी को लेकर एक शोध पत्र प्रस्तुत किया है। इस शोध पत्र का निष्कर्ष है कि शुक्र के तपते और विषैले वायुमंडल में फॉस्फीन नामक एक गैस है जो वहां जीवन की उपस्थिति का संकेत हो सकती है।

पूर्व में कार्डिफ युनिवर्सिटी के ही शोधकर्ताओं ने शुक्र के वातावरण में फॉस्फीन के स्रोतों का पता लगाकर हलचल मचा दी थी। हालांकि तब कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शुक्र के घने कार्बन डाईऑक्साइड युक्त वातावरण, सतह के अत्यधिक तापमान व दाब और सल्फ्यूरिक अम्ल के बादलों जैसी बिलकुल प्रतिकूल परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस शोध को खारिज कर दिया था। लेकिन अब हवाई स्थित जेम्स क्लार्क मैक्सवेल टेलीस्कोप (जेसीएमटी) और चिली स्थित एटाकामा लार्ज मिलीमीटर ऐरे रेडियो टेलीस्कोप की सहायता से ग्रीव्‍स को शुक्र के वायुमंडल के निचले क्षेत्र में फॉस्फीन की मौजूदगी के सशक्त प्रमाण मिले हैं। इससे शुक्र के अम्लीय बादलों में सूक्ष्म जीवों की मौजूदगी की उम्मीदें पुनर्जीवित हो गई हैं।वैज्ञानिकों के मुताबिक शुक्र के वातावरण में 96 प्रतिशत कार्बन डाईऑक्साइड है, लेकिन फॉस्फीन का मिलना अपने आप में बेहद असाधारण बात है क्योंकि यह एक सशक्त बायो सिग्नेचर (जैव-चिन्ह) है। फॉस्फीन को एक बायो सिग्नेचर मानने का एक बड़ा कारण है पृथ्वी पर फॉस्फीन का सम्बंध जीवन से है। फॉस्फीन गैस के एक अणु में तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से घिरे फॉस्फोरस परमाणु होते हैं, जैसे अमोनिया में तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से घिरे नाइट्रोजन परमाणु होते हैं। पृथ्वी पर यह गैस औद्योगिक प्रक्रियाओं से बनती है। यह कुछ अनॉक्सी जीवाणुओं द्वारा भी निर्मित होती है जो ऑक्सीजन-विरल वातावरण में रहते हैं, जैसे सीवर, भराव क्षेत्र या दलदल में। सूक्ष्मजीव यह गैस ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में उत्सर्जित करते हैं।  

शुक्र पर फॉस्फीन की खोज के दो मायने हैं। एक, शुक्र पर जीवित सूक्ष्मजीव हो सकते हैं - शुक्र की सतह पर नहीं बल्कि उसके बादलों में, क्योंकि शुक्र की सतह किसी भी प्रकार के जीवन के अनुकूल नहीं है। उल्लेखनीय है कि फॉस्फीन या उसके स्रोत जिन बादलों में मिले हैं वहां तापमान 30 डिग्री सेल्सियस था। दूसरा, यह उन भूगर्भीय या रासायनिक प्रक्रियाओं से निर्मित हो सकती है, जो हमें पृथ्वी पर नहीं दिखती। ऐसे में इस खोज से यह दावा नहीं किया जा सकता कि हमने वहां जीवन खोज लिया है। लेकिन यह भी नहीं कह सकते कि वहां जीवन नहीं है। यह खोज अंतरिक्ष-अन्वेषण के लिए नए द्वार खोलती है। (स्रोत फीचर्स) 

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पीएम नरेंद्र मोदी का ग्रीस में हुआ सम्मान

 भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने एक दिवसीय दौरे पर ग्रीस की राजधानी एथेंस पहुंचे। 40 साल में यह पहला ऐसा मौका है जब एक भारतीय प्रधानमंत्री ग्रीस के दौरे पर गए हैं।


पीएम मोदी दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेकर सीधे एथेंस पहुंचे। एथेंस एयरपोर्ट पर ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापैट्रिटिस ने पीएम मोदी को रिसीव किया। साथ ही पीएम मोदी का राजकीय तरीके से स्वागत भी हुआ। इतना ही नहीं, पीएम मोदी को आज ग्रीस के द्वितीय सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी नवाज़ा गया।

पीएम मोदी को द ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर से गया नवाज़ा
पीएम मोदी को आज ग्रीस की राष्ट्रपति कैटरीना साकेलारोपोउलोउ  ने ग्रीस के द्वितीय सर्वोच्च नागरिक सम्मान द ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर से नवाज़ा।

पीएम मोदी ने दिया धन्यवाद
द ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर से नवाज़े जाने पर पीएम मोदी ने ग्रीस की राष्ट्रपति, सरकार और देशवासियों को धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने इस सम्मान को 140 करोड़ भारतीयों की ओर से स्वीकार किया और इसे ग्रीस के लोगों की तरफ से भारत के लिए सम्मान बताया।

दोनों देशों के संबंधों में मज़बूती पर की चर्चा
पीएम मोदी ने ग्रीस की राष्ट्रपति साकेलारोपोउलोउ से दोनों देशों के संबंधों में मज़बूती के साथ ही विकास के कार्यों पर भी चर्चा की। साथ ही साकेलारोपोउलोउ ने चंद्रयान-3 की सफलता के लिए भारत को बधाई भी दी।

ग्रीस के पीएम से कई अहम विषयों पर चर्चा के साथ प्रेस मीटिंग को भी किया संबोधित
पीएम मोदी ने ग्रीस के पीएम किरियाकोस मित्सोताकिस के साथ प्रेस मीटिंग को भी संबोधित किया और कई विषयों पर बात की। साथ ही पीएम मोदी ने मित्सोताकिस के साथ भारत और ग्रीस के संबंधों में मज़बूती लाने, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को बढ़ाने, डिफेंस, सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, एग्रीकल्चर, स्किल्स, व्यापार को बढ़ाने, माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप और शैक्षणिक संस्थानों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में मज़बूती लाने की दिशा में कार्य करने जैसे विषयों पर चर्चा की।

 

 

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डोनाल्ड ट्रंप ने किया सरेंडर, 20 मिनट जेल में रहे

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जॉन ट्रंप को गिरफ्तार कर लिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप पर अवैध रूप से उस राज्य में 2020 के चुनाव को पलटने की साजिश रचने का आरोप है। ट्रंप के लिए कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आत्मसमर्पण करने के लिए गुरुवार शाम को जॉर्जिया की एक जेल में पहुंचे। जेल रिकॉर्ड के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुकिंग प्रक्रिया पूरी की और उन्हें 200,000 डॉलर के बांड और अन्य शर्तों पर रिहाई दी गई है।

कोर्ट ने ट्रंप को आत्मसमर्पण करने का विकल्प दिया था। अदालत के सुझाव के बाद ट्रंप समेत इस मामले में आरोपी बनाए गए कुल 19 अन्य लोगों ने भी गिरफ्तार किया है।

कैदी नंबर P01135809 बन 20 मिनट जेल में रहे
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने गिरफ्तारी के बाद फुल्टन काउंटी जेल से बॉन्ड पर रिहा होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया। उधर फुल्टन काउंटी शेरिफ कार्यालय ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का एक मग शॉट जारी किया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक जेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि ट्रंप को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें कैदी नंबर P01135809 के रूप में दर्ज किया गया था। हालांकि 20 मिनट में उनको जेल से रिहा कर दिया गया।

जानिए क्या है पूरा मामला
आपको बता दें कि 2020 के अमरीकी चुनाव के परिणामों को पलटने के डोनाल्ड ट्रम्प के प्रयासों की जांच की गई। इस मामले में विशेष वकील ने 45 पेज की चार्जशीट दायर की थी। इसमें ट्रंप के खिलाफ 4 आरोप लगाए गए थे।
अमरीका को धोखा देने की साजिश का अरोप
आधिकारिक कार्यवाही में बाधा डालने की साजिश का आरोप
किसी आधिकारिक कार्यवाही में बाधा डालना और बाधा डालने का प्रयास करना का आरोप
अधिकारों के खिलाफ साजिश का आरोप

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मलेरिया के विरुद्ध नई रणनीति

 मलेरिया आज भी एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है। इससे हर वर्ष पांच लाख से अधिक मौतें होती हैं जिसमें अधिकांश 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे होते हैं। मच्छरों में कीटनाशकों के खिलाफ प्रतिरोध पैदा हो जाता है और टीकाकरण आंशिक सुरक्षा ही प्रदान करता है। इनके चलते नियंत्रण के प्रयास विफल रहे हैं। अब, वैज्ञानिकों ने मलेरिया की रोकथाम के लिए एक नया तरीका खोज निकाला है। यदि मच्छरों को एक कुदरती बैक्टीरिया खिलाया जाए तो उनकी आंतों में मलेरिया परजीवी (प्लाज़्मोडियम) के विकास को रोका जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने पहले भी मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए रोगाणुओं की क्षमता पर प्रयोग किए हैं। इस दौरान वोल्बाचिया पिपिएंटिस बैक्टीरिया ने डेंगू बुखार के विरुद्ध सकारात्मक परिणाम दिए हैं। मलेरिया परजीवी प्लाज़्मोडियम को रोकने के लिए अक्सर आनुवंशिक रूप से संशोधित बैक्टीरिया पर काम हुआ है। लेकिन नियामक अनुमोदन की अड़चनें और पारिस्थितिक प्रभाव इस प्रकार के संशोधन के मार्ग में बाधा बन जाते हैं।

हाल ही में साइंस में प्रकाशित अध्ययन ने आशाजनक विकल्प प्रस्तुत किया है। शोधकर्ताओं को संयोगवश एक प्राकृतिक बैक्टीरिया डेल्फ्टिया सुरुहेटेंसिस टीसी1 का पता चला जो मच्छरों में मलेरिया परजीवी के विकास को रोकता है। गौरतलब है कि इस बैक्टीरिया का प्रभाव जेनेटिक परिवर्तन के बिना होता है। मच्छरों की आंत में उपस्थित डी. सुरुहेटेंसिस टीसी1 बैक्टीरिया प्लाज़्मोडियम का विकास रोकता है और इसके अंडों की संख्या को 75 प्रतिशत तक कम कर देता है। इसका परीक्षण करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि डी. सुरुहेटेंसिस टीसी1 बैक्टीरियम संक्रमित मच्छरों के दंश से ग्रस्त चूहों में सिर्फ तिहाई ही मलेरिया से पीड़ित हुए जबकि सामान्य मच्छरों द्वारा काटे गए सभी चूहे मलेरिया से संक्रमित हुए।

चूंकि यह बैक्टीरिया मच्छर या उसकी संतानों के जीवित रहने पर प्रभाव नहीं डालता इसलिए मच्छरों में इसके खिलाफ प्रतिरोध विकसित होने की संभावना कम है। इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया है कि यह बैक्टीरिया हारमैन नामक एक अणु भी मुक्त करता है। यह अणु पौधों में भी पाया जाता है जिसका उपयोग कहीं-कहीं परंपरागत चिकित्सा में होता है। यह अणु प्लाज़्मोडियम की विकास प्रक्रिया को रोकता है। 

मच्छरों के शरीर में हारमैन किसी सतह से भी आ सकता है। इसका एक मतलब यह भी है कि हारमैन का उपयोग मच्छरों में प्लाज़्मोडियम का विकास रोकने में किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने बुर्किना फासो में इसका परीक्षण भी किया। उन्होंने पहले तो मच्छरों को डी. सुरुहेटेंसिस टीसी1 खाने पर मजबूर किया। इन मच्छरों ने संक्रमित व्यक्तियों का खून पीया तो इनके शरीर में परजीवी का विकास प्रभावी ढंग से अवरुद्ध हो गया।

शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण बात यह बताई है कि यह बैक्टीरिया एक से दूसरे मच्छर में नहीं पहुंचता जो एक अच्छी बात है। संभवत: जल्द ही हमारे पास बैक्टीरिया के चूर्ण या हारमैन के रूप में कोई मलेरिया-रोधी उत्पाद होगा।

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मोदी ने ब्रिक्स देशों से अंतरिक्ष अन्वेषण संघ बनाने का किया आह्वान

 जोहान्सबर्ग: प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी ने बुधवार को ब्रिक्स देशों से ‘ब्रिक्स अंतरिक्ष अन्वेषण संघ’ बनाने का आह्वान किया, जो कि अंतरिक्ष अनुसंधान एवं मौसम निगरानी पर ध्यान केंद्रित करेगा। दक्षिण अफ्रीका में 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम पहले से ही ब्रिक्स उपग्रह नक्षत्र पर काम कर रहे हैं, लेकिन एक कदम आगे बढ़ने के लिए हमें ब्रिक्स अंतरिक्ष अन्वेषण संघ स्थापित करने पर सोचने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को भविष्य के लिए तैयार संगठन बनाने के लिए संबंधित समाजों को भी भविष्य के लिए तैयार करना होगा और प्रौद्योगिकी इस परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स ने पिछले दो दशकों की एक लंबी और शानदार यात्रा की है और इस यात्रा में इसने कई उपलब्धियां हासिल की है।

उन्होंने ब्रिक्स देशों से जी-20 में अफ्रीकी संघ को शामिल करने में समर्थन देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, हम दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में ब्रिक्स में वैश्विक दक्षिण देशों को विशेष महत्व देने के कदम का स्वागत करते हैं। भारत ने भी अपनी जी-20 की अध्यक्षता में इस विषय को महत्व दिया है।

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भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनें ब्रिक्स के राष्ट्र: मोदी

जोहान्सबर्ग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परस्पर विश्वास विश्वास एवं पारदर्शिता के साथ ब्रिक्स देशों के बीच लचीली और समावेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के महत्व को रेखांकित किया तथा ब्रिक्स देशों से भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया। श्री मोदी ने यहाँ ब्रिक्स बिजनेस फोरम के विचार-विमर्श के बाद उनके बारे में जानकारी ली।

प्रधानमंत्री ने सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों सहित व्यापार करने में आसानी हेतु सुधार के लिए भारत द्वारा किए जा रहे विभिन्न सुधारों पर प्रकाश डाला।

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ब्राजील में बस दुर्घटना में 7 फुटबॉल प्रशंसकों की मौत

  ब्राजील में भीषण सड़क हादसा हुआ है। इस सड़क हादसे में कई फुटबॉल प्रशंसकों की मौत हो गई है।

फुटबॉल प्रेमी देश ब्राजील में इस खेल के प्रशंसकों की मौत से ब्राजील में शोक की लहर है। जानकारी के अनुसार एक पहाड़ी सड़क पर फुटबॉल प्रशंसकों को ले जा रही बस के चालक का नियंत्रण खो गया और भयानक सड़क दुर्घटना हो गई। यह बस ब्राजीलियाई फुटबॉल टीम कोरिंथियंस के प्रशंसकों को ले जा रही थी, जो कि बेलो होरिजोंटे शहर में एक मैच के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पुलिस ने बताया कि इस हादसे में लगभग 7 लोगों की मौत हो गई और 36 अन्य घायल हो गए।

टक्कर से बचने की कोशिश में पलटी बस
मारे गए सातों लोग कोरिंथियंस के समर्थकों के एक क्लब गेवियोस दा फिएल के सदस्य थे। वे शनिवार शाम ब्राजीलियाई चैंपियनशिप गेम में क्रूजेरो के साथ अपनी टीम का 1-1 से ड्रा देखने के लिए पूर्वोत्तर साओ पाउलो राज्य के तौबाटे शहर से आए थे। यात्रियों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि दूसरी बस से आमने-सामने की टक्कर से बचने के प्रयास में बस का नियंत्रण खो गया और वह पलट गई। जानकारी के अनुसार पीड़ितों के परिवारों को सहायता दी जाएगी। अन्य ब्राजीलियाई क्लबों ने भी दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया।

हादसे पर राष्ट्रपति ने जताया दुख
राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने भी इस हादसे पर शोक जताया। दरअसल, राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा भी इस क्लब के प्रशंसकों में से एक हैं।

बस का कंट्रोल खोते ही चिल्लाया था ड्राइवर
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रियों ने कहा कि नियंत्रण खोने से कुछ समय पहले ड्राइवर ने चिल्लाकर कहा कि बस ब्रेक काम नहीं कर रहे हैं। साओ पाउलो के कोरिंथियंस फुटबॉल क्लब के 40 से अधिक प्रशंसक बस में सवार थे, जो एक रात पहले बेलो होरिजोंटे में एक मैच से लौट रहे थे। देश की राष्ट्रीय भूमि परिवहन एजेंसी (एएनटीटी) ने एक बयान में कहा कि बस अपंजीकृत थी और राज्यों के बीच यात्रियों को ले जाने के लिए उसके पास प्राधिकरण नहीं था। पूरे ब्राजील के क्लबों के साथ-साथ ब्राज़ीलियाई फुटबॉल परिसंघ ने पीड़ितों के परिवारों और दोस्तों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

 

 

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छत्ता निर्माण की साझा ज्यामिति

 हाल ही में मधुमक्खियों और ततैयों पर किए गए एक अध्ययन से आश्चर्यजनक परिणाम सामने आए हैं। प्लॉस बायोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार जैव विकास की राह में 18 करोड़ वर्ष पूर्व अलग-अलग रास्तों पर चल पड़ने के बावजूद मधुमक्खियों और ततैयों दोनों समूहों ने छत्ता निर्माण की जटिल ज्यामितीय समस्या से निपटने के लिए एक जैसी तरकीब अपनाई है।

गौरतलब है कि मधुमक्खियों और ततैयों के छत्ते छोटे-छोटे षट्कोणीय प्रकोष्ठों से मिलकर बने होते हैं। इस प्रकार की संरचना में निर्माण सामग्री कम लगती है, भंडारण के लिए अधिकतम स्थान मिलता है और स्थिरता भी रहती है। लेकिन रानी मक्खी जैसे कुछ सदस्यों के लिए बड़े आकार के प्रकोष्ठ बनाना होता है और उनको समायोजित करना एक चुनौती होती है। यदि कुछ प्रकोष्ठ का आकार बड़ा हो जाए तो ये छत्ते में ठीक से फिट नहीं होंगे और छत्ता कमज़ोर बनेगा।

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रूस का लूना-25 अंतरिक्ष यान चंद्रमा से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त

 रूस का लूना-25 अंतरिक्ष यान अनियंत्रित कक्षा में घूमने के बाद चंद्रमा से टकराकर रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। लगभग 50 वर्ष बाद इस देश का यह पहला चंद्र अभियान था। मानवरहित यह अंतरिक्ष यान सोमवार को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' करने वाला था।

इस अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के एक भाग का पता लगाने के लिए सोमवार को चांद की सतह पर साफ़्ट लैंडिंग करना था, जिसके बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां पर जमे हुए पानी और कीमती तत्व हो सकते हैं। रूस के सरकारी अंतरिक्ष कॉर्पोरेशन, रोस्कोस्मोस ने कहा कि समस्याग्रस्त होने के कुछ ही देर बाद उनका संपर्क लूना-25 से टूट गया।

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पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार ने यासीन मलिक की पत्‍नी को अहम पद दिया

इस्लामाबाद:  पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार और उसके मंत्रिमंडल ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाल लिया और चयनित कैबिनेट सदस्यों ने राष्ट्रपति भवन में शपथ ली। संघीय मंत्रालयों के लिए मंत्रियों के चयन ने अन्य राजनीतिक ताकतों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, लेकिन यह भी संकेत दे दिया है कि पाकिस्तान अपनी विदेश नीति, खासकर अपने कट्टर पड़ोसी भारत के प्रति किस तरह की सोच रखेगा।

कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण सदस्‍य जलील अब्बास जिलानी हैं। वह अनुभवी राजनयिक हैं और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) और यूरोपीय संघ (ईयू) में राजदूत के रूप में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

जिलानी वर्ष 1999 से 2003 के बीच भारत में उप उच्चायुक्त भी रहे और वर्ष 2007 से 2009 तक ऑस्ट्रेलिया में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे। इससे पहले, जिलानी ने मार्च 2012 से दिसंबर 2013 तक पाकिस्तान के विदेश सचिव के रूप में भी कार्य किया था। जिलानी की नियुक्ति पाकिस्तान की विदेश नीति की दिशा को दर्शाती है। उन्‍हें पश्चिम के साथ रिश्ते सुधारने हैं और भारत के प्रति नीतिगत प्रतिक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करना है। 

एक और महत्वपूर्ण नियुक्ति मानवाधिकार पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक (एसएपीएम) की हुई है। यह पद कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक की पत्‍नी मुशाल हुसैन मलिक को दी गई है।मुशाल हुसैन मलिक कश्मीर विवाद और अपने पति यासीन मलिक, जो भारतीय अधिकारियों की हिरासत में हैं, के बारे में मुखर रही हैं।

मुशाल की नियुक्ति कथित मानवाधिकार हनन के मद्देनजर कश्मीर के मुद्दे को उठाने, कश्मीरियों के लिए धर्म की स्वतंत्रता और बोलने की आजादी के अधिकार और इसे दुनिया के मंचों पर प्रदर्शित करने के लिए विदेश कार्यालय और मानवाधिकार मंत्रालय का उपयोग करने की पाकिस्तान की भविष्य की नीति का भी संकेत देती है।पाकिस्तान की कार्यवाहक व्यवस्था चार प्रमुख कारकों पर केंद्रित है, जैसे अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, सुरक्षा और भारत से निपटना उसका मुख्य काम है।

 

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रूस एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत करेगा रक्षा संबंध

मॉस्को: रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने कहा है कि मॉस्को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना जारी रखेगा। शोइगु ने अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर 11वें मास्को सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में पश्चिमी राज्यों की सैन्य उपस्थिति में वृद्धि के साथ-साथ अमेरिका द्वारा अपने सैन्य अड्डों में सुधार जारी रखने की ओर इशारा करते हुए कहा, हम उनके साथ सैन्य सहयोग मजबूत करना जारी रखेंगे। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देश... खासकर जिनके साथ हमने ऐतिहासिक रूप से विशेषाधिकार प्राप्त संबंध स्थापित किए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, रूसी रक्षा मंत्री ने कहा कि सुरक्षा सम्मेलन के ढांचे के भीतर एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उद्भव, रक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने के तंत्र और सुरक्षा खतरों का आकलन करने में इन एजेंसियों की भूमिका पर नियमित रूप से चर्चा की गई है। उन्होंने कहा, एकध्रुवीय दुनिया के टूटने और सैन्य रूप से मजबूत प्रतिद्वंद्वी के साथ खुले टकराव के डर से पश्चिमी देश दुनिया भर में स्थानीय संघर्षों को भड़का रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी नीतियों का उद्देश्य मौजूदा संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धियों को कमजोर करना और इस प्रक्रिया का विरोध करने की कोशिश करने वालों के बीच किसी भी तरह के एकीकरण को रोकना है।

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ब्रिटेन जा रहे प्रवासियों की नाव पलटने से छह अफगानियों की मौत, कई लापता

 ब्रिटेन जा रही एक प्रवासी नाव के इंग्लिश चैनल में डूबने से अफगानिस्तान के छह निवासियों की मौत हो गयी है जबकि कई लोग लापता हैं, जिनता तलाश की जा रही है। फ्रांस के अधिकारियों ने बताया कि यह हादसा शनिवार तड़के हुआ। फ्रांस के तटीय शहर बोलोग्ने के उप लोक अभियोजक फिलिप सबेटियर ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि मरने वाले सभी छह अफगानी पुरुष थे, जिनकी उम्र 30 के आसपास थी। उन्होंने कहा कि बाकी यात्रियों में से ज्यादातर अफगानी और कुछ सूडानी थे। इनमें अधिकतर वयस्क और कुछ नाबालिग थे।

श्री सबेटियर ने कहा कि 49 लोगों को जीवित बचाया गया है, जनमें से 36 को फ्रांसीसी तटरक्षकों द्वारा और 13 को ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बचाया गया। अभियोजक के कार्यालय के अनुसार पाँच से 10 यात्री अभी भी लापता हैं। उन्होंने बताया कि लापता यात्रियों की तलाश के लिए दो ब्रिटिश जहाजों के साथ, तीन फ्रांसीसी जहाज, एक हेलीकॉप्टर और एक विमान को उत्तरी फ्रांस में सांगाटे के पास के क्षेत्र में लगाया गया है।

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, एचएम कोस्टगार्ड वर्तमान में चैनल में एक छोटी नाव से जुड़ी घटना को लेकर राहत एवं बचाव कार्य में फ्रांसीसी अधिकारी ग्रिस नेज़ की सहायता कर रहा है। वहीं, फ्रांस की प्रधानमंत्री एलिज़ाबेथ बोर्न ने कहा कि उनकी संवेदनाएं पीड़ितों के साथ हैं। उन्होंने राहत एवं बचाव टीमों के प्रयासों की सराहना की।

 
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पाकिस्तान में 4 चीनी इंजीनियरों समेत 13 की मौत

 पाकिस्तान के बलूचिस्तान में रविवार चीनी इंजीनियरों पर आतंकी हमला हुआ। पाकिस्तान में मौजूद ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिपोर्टर ताहा सिद्दीकी के मुताबिक हमले में 4 चीनी इंजीनियर, 9 पाकिस्तानी सैनिक और दो आतंकी मारे गए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में 27 लोग घायल भी हुए हैं।

 

जियो न्यूज के मुताबिक चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के एक थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए यहां चीनी इंजीनियर मौजूद हैं। दो साल पहले भी यहां चीनी इंजीनियरों पर फिदायीन हमला हुआ था। उसमें 9 इंजीनियर मारे गए थे।

 

पाकिस्तान सरकार और फौज की तरफ से मरने वालों के बारे में ऑफिशियली कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि पहले फौज ने दो आतंकियों के मारे जाने का दावा जरूर किया था। बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बयान जारी करके आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है।

 

मजीद ब्रिगेड ने दिया हमले को अंजाम

बलूचिस्तान में पहले भी फौज और चीन के टेक्निकल स्टाफ पर हमले होते रहे हैं। इस बार हुए हमले की जिम्मेदारी भी बलोच लिबरेशन आर्मी यानी (BLA) ने ली है। उसने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। कहा- रविवार को हुए हमले में हमारे दो शहीद शामिल थे। इनके नाम नवीद बलोच और खुदाबख्श उर्फ असलम बलोच हैं। दोनों ही तुरबत इलाके के रहने वाले थे। दोनों ही मजीद ब्रिगेड से ताल्लुक रखते हैं।

 

चीन के नागरिक ही टारगेट पर क्यों

जापान के अखबार ‘निक्केई एशिया’ ने पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों और उनके कारोबार पर खतरे को लेकर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन की थी। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के तमाम आतंकी संगठन चीनी नागरिकों और उनके कारोबार या कंपनियों को ही निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इसकी वजह यह है कि बीते 5 साल में यहां उनकी ताकत और रसूख बहुत तेजी से बढ़ा है। कई जगहों पर तो वो स्थानीय लोगों से भी ज्यादा ताकतवर हैं।

 

आतंकी संगठनों को लगता है कि चीनी नागरिकों की वजह से उनकी कम्युनिटी या इलाकों को नुकसान हो रहा है और वो उनके कारोबार छीन रहे हैं। शुरुआती तौर पर कराची और लाहौर जैसे इलाकों में चीनी नागरिकों के कारोबार और ऑफिसों पर हमले हुए। इसके बाद उनकी कंपनियों को टारगेट किया गया।

 

चीनी नागरिकों के लिए अलग प्रोटेक्शन यूनिट

2014 में पाकिस्तान सरकार ने चीन के नागरिकों की सिक्योरिटी के लिए स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट बनाई थी। इसमें 4 हजार से ज्यादा सिक्योरिटी ऑफिशियल्स शामिल हैं। ज्यादातर सिक्योरिटी अफसर फौज से ताल्लुक रखते हैं। ये यूनिट 7567 चीनी नागरिकों को स्पेशल सिक्योरिटी मुहैया कराती है। अकेले बलूचिस्तान में चीनी नागरिकों की 70 मल्टी स्टोरीज बिल्डिंग हैं। इसके अलावा 24 टेम्परेरी कैम्प भी हैं। इन सभी में चीन के वो अफसर और वर्कर रहते हैं जो CPEC से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

 

 

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इराक में तुर्की के ड्रोन हमले में 3 की मौत

  इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में तुर्की के ड्रोन हमले में कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के एक वरिष्ठ सदस्य सहित तीन लोग मारे गए। वहां की आतंकवाद विरोधी एजेंसी ने एक बयान में ये बात कही। कुर्दिस्तान क्षेत्र के पूर्व में सुलेमानियाह प्रांत के पेनजवेन शहर के पास तुर्की के एक ड्रोन ने शुक्रवार दोपहर 3:30 बजे मुख्य सड़क पर एक वाहन पर हमला किया। इस हमले में पीकेके के एक वरिष्ठ सदस्य, एक उग्रवादी और वाहन चालक की मौत हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की सेना अक्सर उत्तरी इराक में पीकेके के खिलाफ जमीनी कार्रवाई, हवाई हमले और बमबारी करती रहती है, खासकर समूह के मुख्य आधार कंदील पर्वत में। तुर्की, अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध पीकेके तीन दशकों से अधिक समय से तुर्की सरकार के खिलाफ विद्रोह कर रहा है।

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सोमालिया में सेना ने अल-शबाब के 23 आतंकियों को मार गिराया

 सोमाली राष्ट्रीय सेना ने देश के दक्षिणी हिस्से में अल-शबाब के 23 आतंकवादियों को मार गिराया। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि तीन सैन्य अभियान खाड़ी क्षेत्र के बुला-फुले में चलाए गए, इसके दौरान सैनिकों ने अल-शबाब के तीन ठिकानों को नष्ट कर दिया। मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, इस दौरान दो कमांडरों सहित 23 आतंकवादियों को मार गिराया गया। निशाने पर एक चौकी, विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए एक गैरेज और नेताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रशासनिक कार्यालय शामिल था।

रिपोर्ट के अनुसार, नवीनतम सैन्य अभियान ऐसे समय में हुआ है, जब सोमालिया में अफ्रीकी संघ संक्रमण मिशन (एटीएमआईएस) और उसके सहयोगी एटीएमआईएस सेना की वापसी के पहले चरण पर एक संयुक्त तकनीकी मूल्यांकन करने की तैयारी कर रहे हैं, जो जून में संपन्न हुआ था। राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद द्वारा 2022 में आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध की घोषणा के बाद से सरकारी बलों ने अल-शबाब के खिलाफ हमले जारी रखे हैं। राष्ट्रपति ने अल-शबाब आतंकवादियों को उनके गढ़ों से बाहर निकालने की कसम खाई है।

 

 

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छिंगहाई-तिब्बत पठार पर दिखी लुप्तप्राय दुर्लभ मछली

 हाल ही में चीन के छिंगहाई प्रांत के युशू तिब्बती स्वायत्त स्टेट के कृषि और पशुपालन व्यापक प्रशासनिक कानून प्रवर्तन पर्यवेक्षण ब्यूरो से मिली खबर के अनुसार छिंगहाई-तिब्बत पठार की दुर्लभ मछली - पतली पूंछ वाली कैटफ़िश - चीन में तीन नदियों के स्रोत पर लंकांग नदी बेसिन में 40 से अधिक वर्ष तक गायब होने के बाद फिर से नज़र आयी।

जानकारी के अनुसार चीनी विज्ञान अकादमी के उत्तर-पश्चिम पठार जीवविज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान ने कुछ स्थानीय विभागों के साथ संयुक्त रूप से चीन के तीन नदियों के स्रोत क्षेत्र में लंकांग नदी की ऊपरी पहुंच में संबंधित मछली संसाधन जांच और जर्मप्लाज्म संग्रह किया। पहली बार, लंकांग नदी की ऊपरी पहुंच में लुप्तप्राय और दुर्लभ मछली, पतली पूंछ वाली कैटफ़िश की खोज की गई।

उत्तर-पश्चिम पठार जीवविज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के शोधकर्ता चाओ खाई ने परिचय देते हुए कहा कि पतली पूंछ वाली कैटफ़िश छिंगहाई-तिब्बत पठार पर एक अनोखी मछली है, और यह तीन नदियों के स्रोत क्षेत्र में लंकांग नदी में एकमात्र मांसाहारी तल पर रहने वाली देशी मछली भी है।

इसके आवास पर्यावरण पर सख्त आवश्यकताएं हैं और यह एक पारिस्थितिक संकेतक प्रजाति है, जो अप्रत्यक्ष रूप से जल निकायों में जलीय जीवों की रहने की स्थिति को दर्शाती है।

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डायनासौर भी मात खाते थे

 जब तक पृथ्वी पर डायनासौर का राज रहा, स्तनधारी जीव काफी छोटे साइज़ के हुआ करते थे। ऐसा माना जाता है कि जिस समय डायनासौर पृथ्वी पर राज कर रहे थे उस समय स्तनधारी जीव उनसे डरकर यहां-वहां छिप जाते थे। लेकिन चीन में मिला जीवाश्म एक स्तनधारी जीव द्वारा डायनासौर का शिकार करने का दुर्लभ साक्ष्य पेश करता है और उक्त धारणा को चुनौती देता है।

वर्ष 2012 में उत्तरी चीन के लुजियाटुन के हरे-भरे जंगल में एक किसान को एक जीवाश्म मिला था। किसान ने यह जीवाश्म हानियन वोकेशनल युनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलॉजी के जीवाश्म विज्ञानी गैग हैन के सुपुर्द कर दिया।

जीवाश्म लगगभग 12.5 करोड़ साल पुराना था। उस समय इस इलाके में ट्राइसेराटॉप्स के पूर्वज डायनासौर सिटेकोसॉरस अपने दो पैरों पर विचरते थे। ये सिटेकोसॉरस साइज़ में लगभग कुत्ते बराबर थे और शाकाहारी थे। इन्हीं के साथ उस समय का सबसे बड़ा स्तनधारी जीव रेपेनोमेमस रोबस्टस इन जंगलों में विचरता था, जो लगभग अभी के जीव बिज्जू के बराबर था। यह झबरीला था और इसके दांत पैने-नुकीले थे और वह मांसाहारी था। यह सिटेकोसॉरस के शिशुओं का शिकार करने के लिए जाना जाता था।

साइंटिफिक रिपोर्ट्स में शोधकर्ता बताते हैं कि इस जीवाश्म में इन्हीं दोनों प्राणियों की मुठभेड़ कैद है। लेकिन रेपेनोमेमस रोबस्टस के साथ मुठभेड़ में शिशु सिटेकोसॉरस नहीं बल्कि किशोरवय सिटेकोसॉरस है, जिसका आकार रेपेनोमेमस रोबस्टस स्तनधारी से लगभग तीन गुना बड़ा है। सिटेकोसॉरस लगभग 10.6 किलोग्राम का रहा होगा और स्तनधारी लगभग 3.4 किलोग्राम का। दृश्य देखकर लगता है कि स्तनधारी जीव ही डायनासौर पर हावी था। संभव है कि डायनासौर कुछ ही क्षण में स्तनधारी जीव का भोजन बन जाता लेकिन ऐसा होने के पहले ही अचानक ज्वालामुखीय मलबा बहकर आ गया जिसमें ये दोनों योद्धा मारे गए और उसी मुद्रा में कैद हो गए।

जीवाश्म में, स्तनधारी जीव डायनासौर के ऊपर बैठा था, उसके दांत डायनासौर की दो पसलियों में गड़े हुए थे, उसका पिछला पैर डायनासौर के एक पैर के नीचे दबा हुआ था, और उसका एक हाथ डायनासौर का जबड़ा जकड़े हुए था: ज़ाहिर है, इस मुठभेड़ में डायनासौर शिकस्त पाने वाला था।

कुछ शोधकर्ता इस जीवाश्म की वैधता को लेकर शंकित हैं क्योंकि पूर्व में इस क्षेत्र में जीवाश्म जालसाज़ी के कई उदाहरण देखे जा चुके हैं।

लेकिन हैन का कहना है कि उनकी टीम ने स्तनधारी जीव के निचले बाएं जबड़े की सावधानीपूर्वक जांच करके जीवाश्म की सत्यता की पुष्टि कर ली है। जीवाश्म के आसपास की तलछट भी उस तह से मेल खाती है जहां से जीवाश्म मिला था। 

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