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सेना ने चलाया बचाव अभियान, भारी बारिश से हालात बिगड़े

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। असम में लगातार हो रही बारिश के कारण दीमा हसाओ के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। असानी चक्रवात के आने के बाद से असम में लगातार बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में जलभराव हो गया है। बारिश और जलभराव से हजारों लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक लगातार बारिश के कारण दीमा हसाओ जिले के 12 गांवों से अब तक भूस्खलन की खबर है। हाफलोंग इलाके में करीब 80 घर बुरी तरह प्रभावित है। दीमा हसाओ जिले के हाफलोंग इलाके में भूस्खलन से एक महिला सहित तीन लोगों की मौत हो गई है।

कई और इलाकों में सड़कें बहने की घटनाएं सामने आई हैं। भारतीय सेना के जवानों ने कल रात कछार जिले के बालिचरा और बरखोला के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चलाया है।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि अब तक छह जिलों- कछार, धेमाजी, होजई, कार्बी आंगलोंग पश्चिम, नगांव और कामरूप (मेट्रो) के 94 गांवों के कुल 24,681 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

ट्रेन सेवाएं प्रभावित
पिछले कुछ दिनों में लगातार बारिश के कारण जिले में भूस्खलन की कई घटनाएं हुई हैं, जिससे माईबांग और माहूर के बीच रेल मार्ग प्रभावित हुए हैं। ट्रेनें देरी से चल रही हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) के लुमडिंग-बदरपुर खंड में कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। रेलवे के मुताबिक लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) के लुमडिंग-बदरपुर खंड में कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।

ऑरेंज अलर्ट जारी
बता दें कि भारतीय मौसम विभाग ने 15 तारीख तक असम के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई थी। मौसम विभाग के मुताबिक 15 मई तक असम, मेघालय और अरुणाचल में भारी बारिश की संभावना है।

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माणिक साहा ने ली त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ

 अगरतला (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भाजपा नेता माणिक साहा (Manik Saha) ने त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। राज्यपाल एसएन आर्य ने यहां राजभवन में माणिक साहा को नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। बीजेपी नेता बिपलव कुमार देव के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद विधायक दल की बैठक में माणिक के नाम पर मुहर लगाई गई थी।अगले साल त्रिपुरा में विधानसभा का चुनाव होने वाला है। सीएम के रूप में साहा पर बीजेपी की चुनावी नैया पार लगाने की अहम जिम्मेदारी होगी।

6 साल पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में हुए थे शामिल साहा :
बता दें कि, यह कोई पहली घटना नहीं है जब बीजेपी हाईकमान ने किसी राज्य में अपने मुख्यमंत्री को बदला है। उत्तराखंड में चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री बदलने का दांव सफल रहने के मद्देनजर भाजपा के शीर्ष नेताओं ने त्रिपुरा में भी इसी तरह के बदलाव का विकल्प चुना, जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं। भाजपा ने 2019 के बाद से गुजरात और कर्नाटक सहित पांच मुख्यमंत्रियों को बदला है। साहा पूर्वोत्तर से कांग्रेस के ऐसे चौथे पूर्व नेता हैं जो भाजपा में शामिल होने के बाद क्षेत्र में मुख्यमंत्री बनाए गए हैं।

अमित शाह से मिलने के बाद बिप्लब देब ने दिया था इस्तीफा :
बता दें कि बिप्लब देब ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के एक दिन इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे का फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से लिया गया था। अपने इस्तीफे के बाद देब ने कहा था कि हमें त्रिपुरा में भाजपा को लंबे समय तक सत्ता में रखने की जरूरत है।

 

 

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त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देव को 'मुख्यमंत्री पद' से हटाया गया, विधायक दल की बैठक के बाद होगा अहम ऐलान

अगरतला (छत्तीसगढ़ दर्पण)। त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देव को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया है। शाम 5 बजे विधायक दल की बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार सीएम देव अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप चुके हैं। पिछले दिनों राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बिप्लब देव ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।

बता दें वें 7 जनवरी 2016 से त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वे 2018 में हुए त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा के जीत के सूत्रधार हैं। 9 मार्च 2018 को बिप्लब कुमार देब ने त्रिपुरा के दसवें मुख्यमन्त्री के रूप में शपथ ली थी।

इस्तीफे के बाद बिप्लब देब ने जारी की पहली प्रतिक्रिया

इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बिप्लब देब ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि पार्टी किसी भी पद से बड़ी है। उन्होंने आने वाले वर्षों में त्रिपुरा के समग्र विकास के लिए काम करना जारी रखने का भी वादा किया।

बिप्लब देब ने कहा, "पार्टी सर्वोच्च है। मैं पार्टी के फैसले का सम्मान करता हूं और मेरा मार्गदर्शन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देता हूं। मैं त्रिपुरा के समग्र विकास के लिए काम करना जारी रखूंगा।" 

अपनी पहली प्रतिक्रिया में, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने दावा किया कि देब का इस्तीफा भाजपा में 'अंदरूनी' का कारण था। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने दावा किया, "बिप्लब देब के साथ जो हुआ वह भाजपा के दो समूहों के बीच संघर्ष का परिणाम है। उनमें बहुत गुटबाजी है, यह (इस्तीफा) अंदरूनी कलह का परिणाम है।" 

 

बिप्लब देब का इस्तीफा 2023 के त्रिपुरा चुनावों की अगुवाई में आया है। 25 साल के वाम मोर्चे के शासन को समाप्त करने के बाद 2018 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था।

 

 

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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, अब नहीं होगी जनसुनवाई की जरुरत…

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। केंद्र सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय ने आदेश जारी कर माइनर यानि लघु खनिज के उत्खनन के लिए जनसुनवाई की अनिवार्यता ख़त्म कर दी है। केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी ने राजपत्र क्रमांक 27 अप्रैल 2022 को संसोधन अधिसूचना पर हस्ताक्षर कर जारी किया है।

उल्लेखनीय ही कि राज्य सरकार के इस आदेश के बाद राज्यों में संचालित होने वाले छोटे खदान जैसे रेट, पत्थर आदि पर यह अब लागू नहीं होगा। राज्यों में ऐसे छोटे माइनिंग पर जनसुनवाई लागू होने के कारण कार्य शुरू होने में बहुत देरी होती थी, जिससे सरकार को बड़े राजस्व की हानि हो रही थी, यह गाइड लाइन एनजीटी ने वर्ष 2006 में जारी किया था।

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