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बस्तर अब बदल रहा है — शांति, विश्वास और विकास की ओर तेज़ी से बढ़ता नया बस्तर : मुख्यमंत्री श्री साय

 बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। सुकमा जिले में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 7 महिलाएँ भी शामिल हैं। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह केवल सुरक्षा मोर्चे पर उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवीय विश्वास और संवाद की जीत है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के स्पष्ट संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में लागू संतुलित सुरक्षा रणनीति और संवेदनशील पुनर्वास नीति का प्रत्यक्ष परिणाम अब दिखाई दे रहा है। “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान ने उन युवाओं के जीवन में नई आशा जगाई है, जो कभी नक्सलवाद के भ्रम जाल में भटक गए थे।
लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविर, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और सुदूर अंचलों तक शासन की सीधी पहुँच ने बस्तर की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। आज बस्तर में डर नहीं, बल्कि विश्वास की आवाज़ गूंज रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंसा का मार्ग त्यागने वालों के लिए सरकार के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि नक्सल समस्या का स्थायी समाधान सुरक्षा, विकास और विश्वास की त्रयी में निहित है। मुख्यमंत्री ने शेष माओवादी साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि वे शांति, परिवार और प्रगति का रास्ता चुनें। राज्य सरकार उनकी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर आज शांति की दिशा में निर्णायक क़दम बढ़ा चुका है और हर आत्मसमर्पण के साथ नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प और अधिक मज़बूत हो रहा है।
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सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे जन-जागरूकता कार्यक्रम

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुक्रम में मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ शासन के मार्गदर्शन में अंतर्विभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा द्वारा पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत प्रतिदिन जन-जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। 


प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप की ओर से लीड एजेंसी द्वारा जन जागरूकता संबंधी तैयार पोस्टर एवं फ्लैक्स जारी किया गया। इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा प्रदेश के समस्त सरपंचों एवं पंचगणों को पंचायत अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु आवश्यक पहल करने के लिए एक अपील जारी किया गया। सड़क सुरक्षा माह के प्रथम दिवस 01 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे, माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी की अध्यक्षता में बेमेतरा में हेलमेट रैली को हरी झण्डी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। इसी कड़ी में 03 जनवरी को दुर्ग में संभाग स्तरीय अधिकारियों, संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, सात जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, परिवहन, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, शिक्षा, आबकारी, स्वास्थ्य निर्माण एजेंसियों की बैठक तथा 05 जनवरी को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की उपस्थिति में संबंधित विभागीय सचिवों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं को रोकने कार्ययोजना के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देने के साथ ही विशेष रूप से सर्वाधिक दुर्घटनाओं वाले जिले रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग के लिए समन्वित प्रयास से कार्ययोजना बनाया जाकर वर्ष 2026 के दौरान दुर्घटनाओं में कमी लाने के निर्देश दिये गये।

प्रदेश में वर्ष 2025 में गत वर्ष की तुलना में मृत्यु दर में यद्यपि कमी आई है। गत वर्ष की तुलना में यातायात नियमों के उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही में लगभग 45 प्रतिशत अधिक (लगभग 9 लाख प्रकरणों) की जाकर लगभग 39 करोड़ रूपये परिशमन शुल्क संकलित किये गये। साथ ही जन जागरुकता के कार्यों के फलस्वरूप अर्थात् लगभग 3 प्रतिशत मृत्यु दर में कमी परिलक्षित हुई है। प्रदेश के 20 जिलों में मृत्युदर में कमी हुई है। रायपुर सहित अन्य 13 जिलों में मृत्यु दर को कम करने कार्य किए जा रहे हैं। इस वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में न्यूनतम 10 प्रतिशत की कमी सहित दुर्घटना जन्य सड़क खण्डों में यथाशीघ्र सुधारात्मक उपायों एवं आकस्मिक उपचार हेतु त्वरित प्रतिक्रिया हेतु समुचित उपाय का लक्ष्य रखा गया है।

प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह 2026 के दौरान जन-जागरुकता के लिये यातायात पुलिस द्वारा प्रतिदिन पृथक-पृथक गतिविधियों के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं। इसी अनुक्रम में वाहन चालकों एवं यात्रीगणों को बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, मोबाइल में बात करते हुए या नशे का सेवन कर तथा तेज गति से वाहन चलाने वालों को समझाईश देकर यातायात के नियमों का पालन करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही यातायात नियमों के पालन करने वालों को सम्मानित करने का कार्य भी किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन सुशासन, दक्षता और नागरिक केंद्रित प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन सुशासन, दक्षता और नागरिक केंद्रित प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है। पारदर्शिता और कार्यकुशलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नवंबर 2025 माह के लिए मंत्रालय महनदी भवन के अधिकारियों का ई-ऑफिस प्रदर्शन मूल्यांकन किया गया। डिजिटल गवर्नेंस को नई गति देने वाली इस महत्वपूर्ण पहल के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। ई-ऑफिस में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मुख्य सचिव श्री विकास शील ने चयनित अधिकारियों को सम्मानित करते हुए उन्हें शासन-प्रशासन में गति, पारदर्शिता और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को और सुदृढ़ करने के लिए प्रोत्साहित किया।


सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंत्रालय स्थित महानदी भवन, नवा रायपुर के अधिकारियों के लिए नवंबर 2025 माह का ई-ऑफिस प्रदर्शन मूल्यांकन पूर्ण कर लिया गया है। यह पहल शासन-प्रशासन में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और कार्यकुशलता को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रणाली का उद्देश्य अधिकारियों को स्व-मूल्यांकन का अवसर, रचनात्मक प्रतिस्पर्धा का परिवेश, बेहतर कार्य-प्रबंधन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के लिए प्रेरित करना है, जिससे समग्र रूप से शासन तंत्र अधिक प्रभावी और सेवा-केंद्रित बन सके। इस मूल्यांकन तंत्र का प्रमुख उद्देश्य शासन स्तर पर डिजिटल प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाना, कार्यभार प्रबंधन और समयबद्ध फाइल निस्तारण को प्रोत्साहित करना, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को औपचारिक रूप से मान्यता देना तथा विभागों के बीच सकारात्मक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से समग्र प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है। 

मूल्यांकन विभिन्न संवर्गों–संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव एवं अनुभाग अधिकारी–के लिए पृथक-पृथक किया गया। मूल्यांकन पूर्णतः ई-ऑफिस प्रणाली से प्राप्त आधिकारिक डेटा पर आधारित रहा। मासिक अवधि के दौरान अधिकारियों द्वारा किए गए कार्यभार तथा फाइल निस्तारण की गति और दक्षता को प्राथमिक आधार बनाया गया।

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने  6 जनवरी 2026 को मंत्रालय, महानदी भवन के पंचम तल सभागार में समस्त अधिकारी/कर्मचारियों की उपस्थिति में ई-ऑफिस के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर माह नवंबर 2025 के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ताओं को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मानित अधिकारियों में  श्रीमती जयश्री जैन, संयुक्त सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग; श्री गजपाल सिंह सिकरवार, संयुक्त सचिव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग; श्री भुपेन्द्र सिंह राजपूत, संयुक्त सचिव, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग; श्री विजय कुमार चौधरी, उप सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग; श्री राहुल कुमार, उप सचिव, विधि और विधायी कार्य विभाग; डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, उप सचिव, जल संसाधन विभाग; श्री रनबहादुर ज्ञवाली, अवर सचिव, विधि और विधायी कार्य विभाग; श्री अरूण कुमार मिश्रा, अवर सचिव, विधि और विधायी कार्य विभाग; श्री पूरन लाल साहू, अवर सचिव, गृह विभाग; श्री मनीराम रात्रे, अनुभाग अधिकारी, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग; श्री महेश कुमार, अनुभाग अधिकारी, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग तथा श्री नागराजन, अनुभाग अधिकारी, गृह विभाग शामिल है।

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि यह  मूल्यांकन तंत्र अधिकारियों के बीच सकारात्मक प्रेरणा, कार्य संतुष्टि, जवाबदेही और अनुशासन को सुदृढ़ करेगा। विभाग द्वारा इस प्रक्रिया को नियमित रूप से आगे भी जारी रखा जाएगा। प्रत्येक माह ई-ऑफिस प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। 

उन्होंने कहा कि समयपालन और कार्यालय उपस्थिति को प्रोत्साहित करने के लिए उपस्थिति आधारित पुरस्कार प्रणाली प्रारंभ करने की तैयारी चल रही है। उत्कृष्ट अधिकारियों को प्रेरित करने हेतु “वॉल ऑफ फेम” सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट तथा मंत्रालय परिसर की डिजिटल स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाएगा। 

उल्लखेनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन सुशासन, दक्षता और नागरिक केंद्रित प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है। ई-ऑफिस जैसी डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से शासन व्यवस्था को तेज़, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
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रायपुर की IPHL देश की पहली NQAS प्रमाणित प्रयोगशाला बनी – छत्तीसगढ़ ने स्थापित किया राष्ट्रीय मानक

 केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिला अस्पताल रायपुर स्थित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (IPHL) को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल करने के लिए बधाई दी है।


छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल को लिखे  पत्र में श्री नड्डा ने उल्लेख किया कि रायपुर IPHL देश में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला बन गई है, जिसे यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की विश्वसनीय एवं क्वालिटी-अश्योर्ड डायग्नोस्टिक सेवाएँ प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और रायपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में जनविश्वास को मजबूत किया है और सेवा-प्रदाय के नए मानक स्थापित किए हैं।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने आगे कहा कि IPHL की स्थापना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन (PM-ABHIM) का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह मिशन पूरे देश में स्वास्थ्य निगरानी, प्रयोगशाला नेटवर्क और आपदा तैयारी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस मिशन का मूल उद्देश्य गुणवत्ता-सुनिश्चित, अस्पताल-विशिष्ट एवं रोग-विशिष्ट प्रयोगशाला निदान उपलब्ध कराना है। रायपुर IPHL को प्रदान किया गया यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि प्रयोगशाला ने अपने मानव संसाधन, अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत अधो संरचना का सफलतापूर्वक एकीकरण करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को प्राप्त किया है।

केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह किया कि वह रायपुर मॉडल को श्रेष्ठ अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस) के रूप में अपनाते हुए राज्य के अन्य जिलों और क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करे।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर IPHL को प्राप्त NQAS प्रमाणन छत्तीसगढ़ की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि राज्य में प्रयोगशाला सेवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक उपकरणों और मजबूत अवसंरचना के क्षेत्र में सतत एवं परिणाममूलक सुधार किए गए हैं। श्री जायसवाल ने कहा कि यह प्रमाणन केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों, लैब तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और जिला अस्पताल रायपुर की समर्पित टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य के अन्य जिलों में भी IPHL को इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार  जिलों में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला एवं डायग्नोस्टिक सेवाओं का निरंतर विस्तार करती रहेगी। उन्होंने कहा कि  यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी-सक्षम और मानक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को भी दर्शाती है। यह प्रमाणन संस्थागत परिपक्वता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता आश्वासन की सुदृढ़ होती संस्कृति का परिचायक है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने पुनः आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता संवर्धन के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवर्तन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुदृढ़ करेगा।
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रेरा का सख्त रुख: स्वीकृत ले-आउट से विचलन पर “वॉलफोर्ट एलेन्सिया” परियोजना के प्रमोटर पर 10 लाख रुपये का जुर्माना

छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने रायपुर स्थित “वॉलफोर्ट एलेन्सिया” परियोजना के प्रमोटर के विरुद्ध कड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत 10 लाख रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया है।


प्रकरण की सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि परियोजना में विकास कार्य नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग– T&CP) द्वारा स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप नहीं किया गया। स्वीकृत ले-आउट से हटकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण किया गया, जो रेरा अधिनियम की धारा 14(1) का स्पष्ट उल्लंघन है। उक्त धारा के अनुसार, किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का विकास सक्षम प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित रेखांकन, ले-आउट एवं विनिर्देशों के अनुसार ही किया जाना अनिवार्य है।

प्राधिकरण ने यह भी संज्ञान में लिया कि वर्तमान में उक्त STP का उपयोग परियोजना के आबंटितियों द्वारा किया जा रहा है। आबंटितियों के हितों और सार्वजनिक उपयोग को प्रभावित न करने के उद्देश्य से इस स्तर पर STP को ध्वस्त करने अथवा पुनर्निर्माण संबंधी कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।

हालांकि, स्वीकृत ले-आउट से किए गए इस विचलन को गंभीर उल्लंघन मानते हुए प्राधिकरण ने प्रमोटर को उत्तरदायी ठहराया है और रेरा अधिनियम की धारा 14(1) के उल्लंघन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

छत्तीसगढ़ रेरा ने पुनः स्पष्ट किया है कि स्वीकृत ले-आउट अथवा योजनाओं से बिना सक्षम प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के किया गया कोई भी परिवर्तन गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बिलासपुर को राष्ट्रीय शहरी विकास मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम

छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार ने आज यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि आने वाले दशक में बिलासपुर राज्य का अगला ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक ने बिलासपुर के समग्र विकास के लिए एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक अभियान का स्वरूप ग्रहण कर लिया है। बैठक में जिस प्रकार केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी दर्ज हुई, उसने यह साबित कर दिया कि बिलासपुर का विकास केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता का विषय बन चुका है। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, विधायक श्री अमर अग्रवाल , विधायक श्री सुशांत शुक्ला, विधायक श्री धरमलाल कौशिक, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह तथा विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारीगण सभी एक ही मंच पर  उपस्थित थे। इस संयुक्त उपस्थिति ने यह शक्तिशाली संदेश दिया कि बिलासपुर का विकास दिल्ली और रायपुर—दोनों स्तरों के बीच प्रत्यक्ष समन्वय से आगे बढ़ेगा और योजनाओं की स्वीकृति, वित्तीय प्रावधान और क्रियान्वयन में गति लाने के लिए राजनीतिक तथा प्रशासनिक इच्छा-शक्ति पूरी तरह सक्रिय है। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बैठक में स्वयं बिलासपुर के अगले 10–15 वर्षों के शहरी विकास का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने केवल वर्तमान समस्याओं पर नहीं, बल्कि भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, शहरी विस्तार, ट्रैफिक प्रबंधन, आवास, जल आपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज और समग्र नगर नियोजन पर व्यापक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “नाली से लेकर नगर नियोजन तक” कोई भी विषय चर्चा से बाहर नहीं छोड़ा गया। यही संदेश यह स्थापित करता है कि सरकार केवल घोषणाएँ नहीं कर रही, बल्कि बारीकी से जमीन पर लागू होने योग्य योजना बना रही है। इस दृष्टिकोण ने मुख्यमंत्री की छवि एक दूरदर्शी शहरी विकास नेता के रूप में और सुदृढ़ की है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने यह भी संकेत दिया कि बिलासपुर को सिर्फ एक बड़े शहर के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के नए आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य हब विकसित किया जाएगा। लॉजिस्टिक सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और निवेश के नए अवसरों के साथ बिलासपुर को मध्य भारत का प्रमुख शहरी केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।आने वाले वर्षों में बिलासपुर को मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ आधुनिक नगरीय सुविधाएँ, स्वच्छता व्यवस्था, सस्टेनेबल शहरी ढांचा और रोजगार सृजन के नए अवसर साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। इससे न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ क्षेत्र को नई आर्थिक दिशा मिलेगी।

बैठक में जनप्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी ने समावेशी राजनीति का स्पष्ट संदेश दिया। विधायक, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह स्थापित किया कि बिलासपुर का विकास शहर के भविष्य का सामूहिक संकल्प है। वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी ने कहा कि बिलासपुर विकास रोडमैप के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। 

केंद्र–राज्य समन्वय के इस मॉडल ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की शहरी विकास योजनाएँ अब सीधे राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ चुकी हैं। स्मार्ट सिटी, अमृत मिशन, हाउसिंग, नगरीय परिवहन और आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी, जिससे बिलासपुर को विशेष लाभ मिलेगा।

बैठक में बताया गया कि बिलासपुर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का अगला ग्रोथ इंजन बनेगा। औद्योगिक निवेश, शहरी रोजगार, रियल एस्टेट, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से यहाँ विकास की नई लहर उत्पन्न होने जा रही है।

बिलासपुर के विकास का यह अभियान प्रदेश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। शहरी विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना पर केंद्रित यह एजेंडा डबल इंजन सरकार की विकासोन्मुखी पहल की पहचान बनेगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिलासपुर का विकास केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकल्प है। डबल इंजन सरकार की ताकत के साथ बिलासपुर अब राष्ट्रीय शहरी विकास मानचित्र पर अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
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“रायपुर रेल मंडल में संरक्षा के प्रति सजग रेलकर्मियों को मंडल रेल प्रबंधक श्री दयानंद ने सम्मानित किया”

रेल परिचालन में संरक्षा  की सर्वोच्च प्राथमिकता है । सजगता एवं बेहतर संरक्षा कार्य में सहभागिता निभाने वाले 09 रेल संरक्षा के सजग कर्मचारियों का सम्मान मंडल रेल प्रबंधक श्री दयानंद ने किया एवं उनके संरक्षा संबंधी कार्यों पर चर्चा की ।रेलवे में संरक्षा से रेल परिचालन की अहम भूमिका हैं, प्रत्येक रेल कर्मी के निर्धारित कर्तव्यों की निपुणता एवं  सजगता रहने से यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया जाता है एवं निर्बाध रेल परिचालन होता है।


मंडल रेल प्रबंधक रायपुर, श्री  दयानंद के द्वारा संरक्षा प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर संरक्षा कोटि के 09 कर्मचारियो को उनके उत्कृष्ट एवं सराहनीय संरक्षा सबंधी कार्य निष्पादन के लिए सम्मानित किया गया । संरक्षा के लिए सम्मानित  रेलकर्मियों में  श्री दुना कृष्णा राव, टेक्नीशियन -1/ भिलाई , श्री चंद्रशेखर महिलांगे, टेक्नीशियन -1/ दुर्ग,  श्री अशोक कुमार,  ट्रैक मेंटेनर /तिल्दा,  श्री रवेन्द्र कुमार,  ट्रैक मेंटेनर/भाटापारा,  श्री बी अजय कुमार, ट्रैक मेंटेनर/भिलाई, श्री मुकेश कुमार गवालेनदर, सहायक करषण/बालोद, श्री मनीष  कुमार,  एस एस ई/सिगनल /रायपुर,  श्री पंकज वर्मा,  एस एस ई/सिग्नल /बी एम वाई, श्री कमलेश यादव,  ट्रैक मेंटेनर/सिलियारी 
                 इन  संरक्षा कोटि के कर्मचारियों को सम्मानित किए जाने के अवसर पर संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे ।
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मजबूत सड़क नेटवर्क से अंतिम छोर के गांव तक पहुंचेगी विकास की रौशनी - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने आज क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत लगभग 18 करोड़ रूपए की लागत से स्वीकृत दो महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों का विधिवत पूजा-अर्चना कर भूमिपूजन किया। भूमिपूजन कार्यक्रम के पश्चात सड़क निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि सुदृढ़ सड़क नेटवर्क किसी भी क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास की बुनियाद होता है। विष्णुदेव साय सरकार का लक्ष्य है कि अंतिम छोर पर बसे गांव तक भी मजबूत और सुरक्षित सड़क संपर्क उपलब्ध कराया जाए, जिससे ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं सहज रूप से प्राप्त हो सकें। भूमिपूजन किए गए सड़क निर्माण कार्यों में मेन रोड से लासाटोला तक 9.89 करोड़ रूपए की लागत की 15.20 किलोमीटर लंबी सड़क एवं एन.एच.-12ए से भेदली तक 8.13 करोड़ रूपए लागत की 12.91 किमी लंबी सड़क का निर्माण शामिल है।

      उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि इन सड़कों के निर्माण से लासाटोला, बदराडीह, बम्हनी, महारटोला, नवागांव, नेवासपुर सहित आसपास के अनेक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही मेन रोड से भेदली जुड़ जाने से भीमपुरी, झिरोनी, जिंदा, खैरझीटी खुर्द, कुटकी पारा, सोनपुरी एवं थूहा डीह के ग्रामीणों को भी बेहतर सड़क सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट और दृढ़ लक्ष्य है कि विकास की रोशनी अंतिम छोर पर बसे गांव तक पहुंचे। इसके लिए मजबूत, सुरक्षित और सर्वमौसम सड़क संपर्क को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जा रहा है।
       उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण हो जाने से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी, किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी तथा व्यापार एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने में सुगमता मिलेगी और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो सकेगा।     
        उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण अधोसंरचना विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सड़क, पुल, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का संकल्प है कि हर गांव को मुख्य मार्ग से जोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाए।
      उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पूर्ण किया जाए, ताकि आम जनता को लंबे समय तक इसका लाभ मिल सके। भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारीगण, पंचायत प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ होने पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा शासन के प्रति आभार जताया।
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जो जितना बड़ा घोटाला व भ्रष्टाचार करेगा, वह कांग्रेस में उतना ही आगे बढ़ेगा - देवलाल ठाकुर

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार चैतन्य बघेल की जमानत पर रिहाई के बाद निकाले गए जुलूस पर करारा कटाक्ष किया है। श्री ठाकुर ने कहा कि चैतन्य का जुलूस निकालकर प्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने यह साबित कर दिया कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के साथ खड़ी है और जो जितना बड़ा घोटाला व भ्रष्टाचार करेगा, वह कांग्रेस में उतना ही आगे बढ़ेगा।


भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री ठाकुर ने कहा कि हजारों करोड़ रुपए के शराब घोटाले में एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य (बिट्टू) की जमानत पर रिहाई हो गई जबकि दूसरी ओर इसी शराब घोटाला मामले में भूपेश सरकार में मंत्री रहे आदिवासी नेता कवासी लखमा आज भी जेल में बंद हैं। बघेल अब लखमा की खोज-खबर तक नहीं ले रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री रहते हुए बघेल ने ही लखमा के पढ़े-लिखे नहीं होने का फायदा उठाते हुए सारे कागजों पर उनके ही दस्तखत कराए और आज वही आदिवासी नेता जेल में बंद है। श्री ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की सदैव से यही रीति-नीति रही है कि आदिवासियों का शोषण कर उनकी राजनीतिक हत्या करे।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री ठाकुर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और बस्तर के ही आदिवासी नेता पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम समेत अन्य अनेक आदिवासी नेताओं के साथ जो-जो राजनीतिक छल-प्रपंच किया है, वह भी प्रदेश में किसी से छिपा हुआ नहीं है। कांग्रेस हमेशा भ्रष्टाचारियों के साथ रही है।
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विधान सभा के वर्ष 2026 के कैलेण्डर एवं डायरी (दैनंदिनी) का विमोचन.

 मान. विधान सभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने शंकर नगर स्थित ‘‘स्पीकर हाऊस’’ में आज छत्तीसगढ़ विधान सभा के वर्ष 2026 के कैलेण्डर एवं डायरी (दैनंदिनी) का विमोचन किया ।  इस अवसर पर मान. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, मान. संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप,मान. मंत्री श्री खुशवंत साहेब,पूर्व विधान सभा अध्यक्ष श्री प्रेम प्रकाश पांडे,एवं मान. विधायक श्री सुनील सोनी,श्री पुरंदर मिश्रा,श्री मोतीलाल साहू ,विधान सभा के सचिव श्री दिनेश शर्मा एवं मान.अध्यक्ष के सचिव श्री विक्रम सिसोदिया  विधान सभा भी उपस्थित थे। 

इस अवसर पर विधान सभा अध्यक्ष  डॉ. रमन सिंह जी के  छत्तीसगढ़ विधान सभा अध्यक्ष के रूप में दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के अवसर पर ‘‘डॉ. रमन सिंह अध्यक्ष छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्षीय कार्यकाल के दो वर्ष महत्वपूर्ण कार्य एवं उपलब्धियां’’ शीर्षक से पुस्तक का विमोचन भी किया गया । 
  विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी की संकल्पना के अनुरूप छत्तीसगढ़ विधानसभा के कैलेण्डर एवं डायरी (दैनंदिनी) को नये स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें भारतीय संविधान की चित्रगाथा, छत्तीसगढ़ विधान सभा के ‘‘रजत जयंती वर्ष’’ पर मान. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का विधान सभा आगमन एवं मान. विधायकों को संबोधन, भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नवा रायपुर (अटल नगर) स्थित नवीन विधान सभा भवन का लोकार्पण, नवीन विधान सभा परिसर में ‘‘भारत रत्न’’ एवं पूर्व प्रधान मंत्री मान. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण, मान. विधायकों एवं मान. पत्रकारों के लिए प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन तथा छत्तीसगढ़ विधान सभा के अन्य विशिष्ट अवसरों के छायाचित्रों को समावेशित किया गया है। 

       इस अवसर पर विधान सभा की 25 वर्षों की संसदीय यात्रा पर केंद्रित श्रीमती कीर्ति सिसोदिया द्वारा निर्मित एवं निर्देशित वृत्त चित्र का भी विमोचन किया गया।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को समर्पित बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का विमोचन

बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की  सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का  सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।
उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें। 

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है। 

संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक श्री चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 6 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है।

प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग के रूप में नामित किया गया है।

इस अवसर पर सांसद श्री महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक श्री चैतराम अटामी, बस्तर आईजी श्री सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर किया नमन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका महान समाज सुधारक एवं नारी सशक्तिकरण की अग्रदूत स्वर्गीय श्रीमती सावित्रीबाई फुले की जयंती (3 जनवरी) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिला शिक्षा की अलख जगाई, जब समाज में अनेक कुरीतियाँ और बंधन व्याप्त थे। उन्होंने न केवल महिलाओं को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर उन्हें शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। छुआछूत, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध उनका संघर्ष साहस, संकल्प और सामाजिक चेतना का अद्वितीय प्रतीक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्त्री अधिकारों, समानता और शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान अमूल्य तथा अविस्मरणीय है। उनके विचार और कर्म आज भी समाज को प्रगतिशील दिशा देने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सावित्रीबाई फुले के जीवन से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को छेरछेरा पर्व की दी हार्दिक बधाई

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकपर्व छेरछेरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छेरछेरा महादान, सामाजिक समरसता और दानशीलता का प्रतीक पर्व है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध, गौरवशाली और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत परंपरा को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता है। नई फसल घर आने की खुशी में यह पर्व पौष मास की पूर्णिमा को बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दिन मां शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है, जो अन्न, प्रकृति और जीवन के संरक्षण का संदेश देती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा ग्रहण की थी। इसी परंपरा के अनुरूप छेरछेरा पर्व पर धान के साथ-साथ साग-भाजी, फल एवं अन्य अन्न का दान कर लोग परस्पर सहयोग, करुणा और मानवता का परिचय देते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छेरछेरा पर्व हमें समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और साझा समृद्धि की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से इस लोकपर्व को सद्भाव, उल्लास और पारंपरिक मूल्यों के साथ मनाने का आह्वान किया।
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प्रदेश के सभी धान खरीदी केन्द्रो में जगह की कमी खरीदी प्रभावित हो रही - दीपक बैज

 सरकार की लापरवाही के कारण सोसायटियों में धान जाम हो गया है। जगह की कमी हो गयी है तथा खरीदी प्रभावित हो रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि धान उठाव के लिये डीओ नहीं कटने के कारण 1600 से अधिक सोसायटियो में उठाव शुरू नहीं हो पाया है। खरीदी केन्द्रों में बफर स्टाक पड़ा हुआ है। सरकार को खरीदी शुरू करने के तुरंत बाद डीओ जारी करने और परिवहन का अनुबंध कर लेना था। लेकिन सरकार लापरवाह बनी रही। सरकार को पता है कि अनुंबध देरी करने और डीओ नहीं करने के कारण जाम की स्थिति बनेगी तथा खरीदी प्रभावित होगी तथा कम धान खरीदना पड़ेगा। यह सोची समझी साजिश है।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि अभी तक प्रदेश के 2739 खरीदी केन्द्रो में लगभग 51 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो गयी है, लेकिन उठाव सिर्फ 10 लाख मीट्रिक टन का ही हुआ है। लगभग 41 लाख मीट्रिक टन धान सोसायटियो में जाम पड़ा हुआ है। जिसके कारण सभी सोसायटी में जगह की कमी हो गयी हे और खरीदी बाधित हो गयी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सोसायटियों में लंबे समय तक धान पड़े रहेगा तो धान के सूखत का नुकसान भी सोसायटियो को ही उठाना पड़ेगा। इसमें सोसायटियो को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पिछले वर्षो का भी सूखत का पैसा सरकार ने सोसायटियो को जारी नहीं किया है। सरकार की लापरवाही का खामियाजा सोसायटियों को भरना होगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि अनेको सोसायटियो में अभी तक सरकार ने लिमिट नहीं बढ़ाया है। जिसके कारण किसानों का धान के पूरी खरीदी नहीं हो पा रही है। पुराना बरदाना भी जो दिया जा रहा है वह भी फटा हुआ है, जिसके कारण हर बोरे में किसानो को दो से तीन किलो का नुकसान हो रहा है। सोसायटियों में तौलाई भी प्रति तौल 1 से 2 किलो अधिक किया जा रहा है। यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है, किसानों से लूट है। सरकार धान खरीदी जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था को भी नहीं संभाल पा रही है।
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अस्पताल की दहलीज पर अब परिजनों को मिलेगा घर जैसा सुकून: छत्तीसगढ़ सरकार की एक संवेदनशील पहल

जब कोई गंभीर बीमारी घर में दस्तक देती है, तो पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है। ऐसे वक्त में दूर-दराज के गांवों से शहर आने वाले गरीब परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इलाज के साथ-साथ खुद के ठहरने की होती है। अक्सर मरीज तो वार्ड में इलाज करा रहा होता है, लेकिन उसके अपने लोग अस्पताल के गलियारों, ठंडी सीढ़ियों या खुले आसमान के नीचे रातें गुजारने को मजबूर होते हैं। इसी मानवीय पीड़ा को महसूस करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बहुत ही प्रशंसनीय कदम उठाया है। अब राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के परिजनों के लिए सर्वसुविधायुक्त ‘विश्राम गृह’ बनाए जाएंगे, ताकि किसी भी मजबूर आंख को रात बिताने के लिए सुरक्षित छत की तलाश में भटकना न पड़े।


इस नेक काम को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में मंत्रालय नवा रायपुर में मेडिकल एजुकेशन विभाग और सेवादान आरोग्य फाउंडेशन के बीच एक एमओयू संपादित हुआ है। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री खुशवंत साहेब , स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त श्री रितेश अग्रवाल सहित सेवादान फाउंडेशन के सदस्य उपस्थित थे।

इस समझौते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन आश्रय स्थलों के निर्माण, सजावट और उनके रोजमर्रा के संचालन का पूरा जिम्मा संस्था खुद उठाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार और संस्था मिलकर एक ऐसा मानवीय ढांचा तैयार कर रहे हैं जहाँ परिजनों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहद किफायती ठहराव मिलेगा। इन विश्राम गृहों में केवल सिर छुपाने की जगह ही नहीं मिलेगी, बल्कि अपनों की सेवा में लगे लोगों के लिए 24 घंटे सुरक्षा, सीसीटीवी की निगरानी, साफ-सुथरा भोजन और एक गरिमामय माहौल भी सुनिश्चित किया जाएगा।

योजना के पहले पड़ाव में रायपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ और जगदलपुर जैसे प्रमुख शहरों के मेडिकल कॉलेजों को चुना गया है, जहां दूरस्थ अंचलों से बड़ी संख्या में लोग उम्मीद लेकर पहुँचते हैं। यह पहल दिखाती है कि स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ दवा और डॉक्टर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनमें उन लोगों के लिए भी जगह होनी चाहिए जो अपने बीमार परिजनों के लिए संबल बनकर साथ खड़े रहते हैं। यह कदम न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि उन हजारों परिवारों को एक बड़ी मानसिक राहत भी पहुँचाएगा जिनके पास शहर में रहने का कोई ठिकाना नहीं होता। 

"इलाज सिर्फ दवाओं से नहीं, अपनों के साथ और सुकून से भी होता है।छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को नया विस्तार मिलने जा रहा है।  इस MoU के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के परिजनों के लिए बेहतर और सुविधाजनक 'विश्राम गृह' बनेंगे जो  'नो प्रॉफिट-नो लॉस' के आधार पर संचालित होंगे।" स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल

"राज्य सरकार का उद्देश्य केवल बेहतर इलाज उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि मरीजों के साथ आने वाले परिजनों की गरिमा और सुविधा का भी ख्याल रखना है। दूर-दराज़ से आने वाले लोग कई दिनों तक अस्पतालों के आसपास असुविधाजनक परिस्थितियों में रुकने को मजबूर होते हैं। विश्राम गृह की व्यवस्था उनके लिए सुरक्षित, स्वच्छ और किफायती ठहराव का बड़ा सहारा साबित होगी।यह पहल संवेदनशील और उत्तरदायी शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विश्राम गृहों के माध्यम से मरीज परिजनों को सम्मानजनक आवास, भोजन और बुनियादी सुविधाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मानवता और संवेदना का समन्वय और सुदृढ़ होगा।" - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
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रोजगार, कौशल और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में हेल्थ केयर में कौशल विकास हेतु सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ एमओयू

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण एवं श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।


यह एमओयू राज्य में हेल्थकेयर क्षेत्र का दायरा बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करने तथा युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने की दिशा में एक अहम कदम है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

समझौते का मुख्य उद्देश्य हेल्थकेयर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना, युवाओं का कौशल उन्नयन तथा आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करना है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से आवासीय एवं गैर-आवासीय दोनों प्रकार के निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किए जाएंगे।

एमओयू के तहत चार प्रकार के कोर्स संचालित किए जाएंगे, जिनमें मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, कार्डियोलॉजी तकनीशियन, ईसीजी तकनीशियन, कार्डियक केयर तकनीशियन तथा इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन के प्रशिक्षण शामिल हैं। ये कोर्स युवाओं को विशेषज्ञता के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर निर्माण का अवसर उपलब्ध कराएंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार कौशल विकास को विकास की रीढ़ मानती है और विशेष रूप से हेल्थकेयर सेक्टर की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशलयुक्त कार्यबल तैयार करने पर बल दे रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ युवाओं के लिए व्यापक रोजगार संभावनाएँ भी उत्पन्न करेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कौशल विकास पर केंद्रित यह साझेदारी राज्य के दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में सहायक सिद्ध होगी। प्रशिक्षित युवा अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और आपातकालीन सेवाओं में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सी. श्रीनिवास सहित ट्रस्ट के प्रतिनिधि एवं कौशल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज नवा रायपुर, सेक्टर-24 स्थित मुख्यमंत्री निवास में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सौजन्य भेंट की। मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण से संबंधित विषयों पर सौहार्दपूर्ण एवं रचनात्मक चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें राजकीय गमछा, बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित स्मृति-चिन्ह भेंट किया। 

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल उपस्थित थे।
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औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में संशोधन : छत्तीसगढ़ को और अधिक निवेश-अनुकूल एवं प्रतिस्पर्धी बनाने की बड़ी पहल

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन संशोधनों के माध्यम से नीति को अन्य राज्यों की तुलना में और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक, स्पष्ट एवं निवेश-अनुकूल बनाया गया है। इससे राज्य में औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के साथ-साथ रोजगार के नए अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावनाएँ सुदृढ़ हुई हैं।


मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों का मुख्य उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों के लिए स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार का सृजन सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा रोजगार सृजन अनुदान से संबंधित नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब 50 से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले विशेष सेक्टर के उद्यम — जैसे फार्मा, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी आदि के एमएसएमई इकाइयों को भी छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दिए जाने वाले वेतन पर अनुदान प्राप्त होगा।

सेवा क्षेत्र के दायरे का विस्तार करते हुए, मंत्रिमंडल ने कंप्यूटर-आधारित टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-कॉमर्स एवं ऐप-आधारित एग्रीगेटर, तथा NABL मान्यता प्राप्त डायग्नोस्टिक लैब को भी नीति के अंतर्गत सम्मिलित किया है। इन संस्थाओं को अब औद्योगिक विकास नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन एवं अनुदान का लाभ मिलेगा।

पर्यटन एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास को गति देने के उद्देश्य से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में पाँच सितारा होटलों तथा अन्य जिलों में तीन सितारा होटलों की स्थापना के लिए प्रोत्साहनात्मक संशोधन किए गए हैं। इसी प्रकार राज्य में बड़े निजी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता संवर्धन के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि NIRF Ranking में शीर्ष 100 में शामिल शिक्षण संस्थानों द्वारा राज्य में परिसर स्थापित किए जाने पर उन्हें नीति के अंतर्गत विशेष अनुदान प्रदान किया जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के युवाओं को विश्व-स्तरीय शिक्षा एवं बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत ये संशोधन छत्तीसगढ़ को उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन निर्णयों से राज्य में निवेश बढ़ने, व्यापक रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की गति को और अधिक तेज एवं संतुलित बनाने में सहायता मिलेगी।
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