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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सौजन्य मुलाकात

 आज विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने षष्ठम विधानसभा के मानसून सत्र में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित

 छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आज विधानसभा के समिति कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी सहित समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रकरणों की वापसी को लेकर बस्तर के युवाओं से की मुलाकात

 उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने आज बस्तर क्षेत्र से आए जनप्रतिनिधियों, नक्सल प्रकरणों में निरुद्ध लोगों के परिजनों, नक्सल पीड़ितों तथा युवाओं से आज विधानसभा में मुलाकात कर नक्सल प्रकरणों के निराकरण और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नक्सल मामलों में जेल में निरुद्ध लोगों के प्रकरणों की शीघ्र और न्यायसंगत समीक्षा और सभी की जल्द रिहाई के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा प्रत्येक पात्र मामले में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 


       उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि 10 जुलाई को मंत्रालय में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर संभाग के सभी 12 जिलों के संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर नक्सल प्रकरणों के निराकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। बैठक में सभी लंबित प्रकरणों को दो श्रेणियों में विभाजित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। एक जिनमें जनहानि हुई हैं तथा दूसरे वे प्रकरण जिनमें जनहानि नहीं हुई है।

       उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि जिन मामलों में जनहानि नहीं हुई है, उनकी समीक्षा संबंधित जिलों पुलिस अधीक्षक प्रत्येक सप्ताह अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम के साथ करेंगे, ताकि ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण कर पात्र लोगों को राहत मिल सके। इसके लिए अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम बनाई गई है। वहीं जिन मामलों में जनहानि हुई है और न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं, उनमें चालान प्रस्तुत करने, गवाही की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जिन प्रकरणों में गंभीर धाराएं लगी हैं उनमें न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया जाएगा।

      श्री शर्मा ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त के परिजन अपने प्रकरण की समीक्षा कराना चाहते हैं तो वे संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक को आवेदन दे सकते हैं। ऐसे आवेदनों का अभियोजन अधिकारियों एवं शासकीय अधिवक्ताओं की टीम द्वारा विधिसम्मत परीक्षण किया जाएगा। 

        उप मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी हिंसा ने बस्तर सहित अनेक क्षेत्रों को वर्षों तक प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब इन क्षेत्रों में सामान्य आवाजाही भी कठिन थी, लेकिन आज स्थिति तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में अत्यंत नक्सल प्रभावित रहे किसकोड़ो गांव के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि वे अब पहली बार वास्तविक आजादी का अनुभव कर रहे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि कबीरधाम क्षेत्र में भी माओवादी गतिविधियों का प्रभाव रहा है और उन्होंने स्वयं उस दौर को निकट से देखा है। इस दौरान युवाओं ने अपनी व्यथाओं को भी उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिसपर उप मुख्यमंत्री ने सभी के समाधान का आश्वासन दिया।

        श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बस्तर में शांति, विकास और विश्वास का वातावरण मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बस्तर के युवाओं से विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से बचते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आग्रह किया तथा कहा कि बस्तर के जैविक उत्पादों को एनपीओपी के तहत प्रमाणित कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर विधायक श्री धरमलाल कौशिक, श्री नीलकंठ टेकाम, श्री विक्रम उसेंडी, श्री कवासी लखमा, श्री विक्रम मंडावी सहित बस्तर क्षेत्र के अनेक युवा उपस्थित थे।
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कबीरधाम को मिली शासकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

 कबीरधाम जिले के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, कबीरधाम को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालित करने की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी है। यह मेडिकल कॉलेज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से संबद्ध होगा। इस स्वीकृति के साथ कबीरधाम जिले की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है।


       उप मुख्यमंत्री एवं कबीरधाम विधायक श्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर जिलेवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना जिले के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रही है और इसके लिए लगातार केंद्र एवं राज्य स्तर पर समन्वय कर आवश्यक प्रयास किए गए।

       श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। एनएमसी से मिली यह स्वीकृति केवल कबीरधाम ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का नया द्वार खोलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं को अपने जिले में ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा, जिससे चिकित्सा शिक्षा का सपना साकार करना और अधिक आसान होगा।

      उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने से जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा तथा स्वास्थ्य अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों की बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी और लोगों को अपने जिले में ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

         मेडिकल कॉलेज की स्थापना को साकार करने में उप मुख्यमंत्री एवं कबीरधाम विधायक श्री विजय शर्मा की सक्रिय पहल और सतत प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को चरणबद्ध एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया। श्री शर्मा की पहल पर सबसे पहले कबीरधाम जिला अस्पताल का 100 बिस्तरों से बढ़ाकर 220 बिस्तरों में उन्नयन कराया गया, जिससे मेडिकल कॉलेज संचालन के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार हो सकी। कार्यों में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उनके निर्देश पर एक मॉनिटरिंग समिति का गठन किया गया, जिसकी नियमित साप्ताहिक समीक्षा स्वयं उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा प्रत्यक्ष रूप से करते रहे।

          मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी श्री शर्मा ने प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया। उनके सतत प्रयासों से लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण की स्वीकृति भी प्राप्त हुई। इतना ही नहीं, 23 जून को नई दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से विशेष रूप से मुलाकात कर कबीरधाम मेडिकल कॉलेज के लिए इसी शैक्षणिक सत्र से कॉलेज आरंभ कराने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने तत्काल सहमति प्रदान करते हुए विभाग को निर्देश जारी किए जाने का आश्वासन दिया, परिणाम स्वरूप उनके निरंतर फॉलोअप, प्रभावी समन्वय और प्रतिबद्ध प्रयासों से ही नेशनल मेडिकल कमीशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज संचालन की अनुमति प्रदान की है।

      उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, नेशनल मेडिकल कमीशन तथा सभी संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

          कबीरधाम में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही जन-आकांक्षाओं को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने से जिले के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध होगी, स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर उल्लेखनीय रूप से बेहतर होगा तथा पूरे क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। यह उपलब्धि कबीरधाम को स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के प्रमुख जिलों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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बारिश के मौसम में करंट से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने विद्युत कंपनी ने जारी की एडवाइजरी

 बारिश का मौसम शुरू होते ही विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के खंभों, एचटी लाइनों, टूटे तारों तथा विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से हर वर्ष कई हादसे होते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। इन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।


कंपनी ने कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। यदि आंधी-तूफान या बारिश के दौरान बिजली के खंभे, तार अथवा अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1912, मोर बिजली ऐप अथवा निकटतम वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में दें।

बारिश के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। जहां विद्युत तार या उपकरण मौजूद हों, वहां पानी में करंट फैलने की संभावना रहती है। ऐसे स्थानों पर पानी में चलने या तैरने से बचें। विद्युत उपकरणों का उपयोग करते समय हाथ-पैर सूखे रखें तथा रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पलों का उपयोग करें। विभाग ने बताया कि बारिश से पहले सभी फीडरों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों का निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सावधानियों का रखें-

घरों, खेतों एवं अन्य स्थानों पर केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपकरणों का उपयोग करें। खेत या बाड़ी की बाड़ तथा कंटीले तारों में बिजली प्रवाहित न करें। यह अवैध होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 

विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर स्वयं सुधार करने का प्रयास न करें। बिजली की लाइनों के नीचे अथवा उनके समीप स्थायी या अस्थायी निर्माण न करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि कोई विद्युत तार टूटकर जमीन, नदी, नाले या तालाब में गिरा हुआ मिले, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित लाइनमैन, कनिष्ठ अभियंता अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर सूचना देकर विद्युत प्रवाह बंद कराएं।

बिजली की लाइनों से हुकिंग कर अनाधिकृत रूप से बिजली का उपयोग न करें। कपड़े सुखाने के लिए बिजली के खंभों या स्टे वायर का उपयोग न करें तथा कपड़े सुखाने वाले तार को विद्युत लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखें। अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए कटे-फटे तारों का उपयोग न करें तथा बच्चों को विद्युत उपकरणों एवं लाइनों के आसपास खेलने से रोकें।

यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो यह करें-

सबसे पहले मुख्य स्विच बंद कर विद्युत प्रवाह तत्काल रोकें। यदि स्विच बंद करना संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, सूखी रस्सी या सूखे कपड़े की सहायता से पीड़ित को बिजली के स्रोत से अलग करें। सीधे हाथ लगाने का प्रयास न करें। पीड़ित को सूखी जगह पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दें, आवश्यकता होने पर कृत्रिम श्वास दें तथा तत्काल निकटतम अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अंबस्थ ने कहा कि भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था बनाए रखना बिजली कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे मौसम में फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे सुधारने के लिए कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार कार्य करना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर घबराने के बजाय 5 से 10 मिनट प्रतीक्षा करें और आवश्यकता होने पर टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, लाइन कर्मचारियों को सुधार कार्य में सहयोग दें तथा विद्युत लाइनों एवं उपकरणों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।

उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है जान है तो जहान है।
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जिले की विशिष्ट पहचान विष्णुभोग चावल से मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब का सम्मान

 कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री  श्री गुरु खुशवंत साहेब के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला आगमन पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की विशिष्ट पहचान एवं स्थानीय आजीविका के प्रतीक विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर उनका सम्मान किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत जिले के स्व-सहायता समूहों की महिलाएं विष्णुभोग चावल का उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन कर रही हैं। अपनी विशिष्ट सुगंध, उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं पारंपरिक पहचान के कारण विष्णुभोग चावल जिले की विशेष पहचान बन चुका है तथा इससे ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को भी सशक्त आधार मिला है।


कृषि की समृद्ध परंपरा और समूहों की मेहनत का उत्कृष्ट उदाहरण विष्णुभोग चावल

         विष्णुभोग चावल की विशेषताओं की जानकारी प्राप्त कर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का विष्णुभोग चावल जिले की समृद्ध कृषि परंपरा और महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने एवं बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों की आय में वृद्धि हो तथा जिले की विशिष्ट पहचान प्रदेश ही नहीं, देशभर में स्थापित हो सके।

       इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने एक समाचार पत्र के प्रधान संपादक  को भी विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया तथा जिले की इस विशिष्ट कृषि उपज एवं आजीविका गतिविधियों की जानकारी साझा की। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक श्री मनोज खलारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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स्वस्थ छत्तीसगढ़ करेगा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण- मुख्यमंत्री श्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में 103 करोड़ रुपये से अधिक लागत के स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेगा। प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यह परियोजनाएं प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई प्रदान करेंगी तथा मरीजों, विद्यार्थियों और चिकित्सकों सभी को इसका लाभ मिलेगा।

इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास, कैंसर भवन के विस्तार तथा चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के आवासीय परिसर सहित विभिन्न निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पिछली बार मेडिकल कॉलेज आने पर विद्यार्थियों ने छात्रावास निर्माण की मांग रखी थी, जिसे सरकार ने गंभीरता से लेते हुए आज उसके निर्माण की शुरुआत कर दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में जनता से किए गए अधिकांश वादों को पूरा किया है और "मोदी की गारंटी" को धरातल पर उतारा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और विकसित भारत के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए स्वस्थ छत्तीसगढ़ आवश्यक है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग लगातार उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों एवं पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार का छत्तीसगढ़ को निरंतर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि डीएम कार्डियक कोर्स की स्वीकृति से लेकर अन्य स्वास्थ्य परियोजनाओं तक केंद्र सरकार ने हर मांग पर सकारात्मक सहयोग दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में छत्तीसगढ़ को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद) की भी सौगात मिलेगी, जिससे राज्य की समृद्ध औषधीय वनस्पतियों एवं आयुर्वेद को नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब  नक्सलवाद से मुक्त होकर तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने दूरस्थ क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर लाखों लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया है। उन्होंने मेडिकल विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सरगुजा से लेकर बस्तर तक प्रदेश के हर क्षेत्र में सेवाएं देने का संकल्प लें और केवल शहरों तक सीमित रहने की मानसिकता न रखें।
उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा शिक्षा के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा विद्यार्थियों को बेहतर अधोसंरचना, छात्रावास एवं आधुनिक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि लगभग 104 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छात्रावास, कैंसर संस्थान विस्तार एवं अन्य अधोसंरचना परियोजनाएं चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग एवं निर्माण एजेंसियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा से पहले एवं उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है। राज्य में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति, नर्सिंग कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि, फिजियोथेरेपी कॉलेजों का विस्तार तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 एकड़ क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले योग एवं नेचुरोपैथी अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर का निर्माण भी प्रगति पर है।

स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व में लंबित कोरबा, कांकेर एवं महासमुंद मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य प्रारंभ कराए हैं। बिलासपुर स्थित सिम्स का भी व्यापक उन्नयन किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि डीएम कार्डियक कोर्स प्रारंभ हो चुका है तथा जगदलपुर में जल्द ही छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा हार्ट सेंटर स्थापित किया जाएगा।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रथम परियोजना के तहत 200 सीटर आधुनिक छात्र-छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधाओं के साथ चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए भी आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।

दूसरी परियोजना के तहत कैंसर भवन का द्वितीय से छठे तल तक विस्तार किया जाएगा। लगभग 11 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में बनने वाले इस भवन में आधुनिक लैब, 64-64 बिस्तरों वाले वार्ड, सिंगल रूम, आईसीयू तथा अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर विकसित किए जाएंगे, जिससे कैंसर रोगियों को उच्च स्तरीय उपचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

तीसरी परियोजना के अंतर्गत छात्राओं के लिए आधुनिक छात्रावास का विस्तार किया जाएगा, जिसमें अतिरिक्त कमरे, डॉरमेट्री, लाइब्रेरी, रिक्रिएशन हॉल तथा सभी आवश्यक आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि छात्राओं को सुरक्षित एवं बेहतर आवासीय वातावरण उपलब्ध हो सके।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर सहित जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें किया नमन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में प्रख्यात शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मां भारती के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने राष्ट्र की अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हुए संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के दिखाए पथ पर अग्रसर होते हुए हम विकसित और सशक्त भारत का निर्माण करेंगे। 

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर वन मंत्री श्री कश्यप ने अर्पित की पुष्पांजलि

 वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, शिक्षाविद एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर राजधानी के शारदा चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर श्री कश्यप ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय एकता और जनसेवा के प्रति उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन देशभक्ति, समर्पण और राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रेरणास्रोत है। उनके विचार आज भी समाज और युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में रायपुर उत्तर विधानसभा के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री रमेश सिंह ठाकुर, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
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सहकारिता बनेगी किसानों की समृद्धि का नया आधार - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

  भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक आयोजित सहकारिता सप्ताह का समापन कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम, कवर्धा में जिला स्तरीय कृषक संगोष्ठी के साथ हुआ। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा भी उपस्थित रहीं। संगोष्ठी के माध्यम से किसानों को सहकारिता आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा सहकारी संस्थाओं के माध्यम से आर्थिक समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।   


          इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि सहकारिता सप्ताह का समापन किसी अभियान का अंत नहीं, बल्कि नए संकल्प और नई शुरुआत का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज हमें सहकारिता को नई दिशा देने का संकल्प लेना होगा और इसे केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित न रखकर बहुआयामी विकास का मजबूत माध्यम बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सहकारिता का वास्तविक अर्थ है, सभी लोगों का एकजुट होकर साझा उद्देश्य के लिए कार्य करना। आज सहकारिता के माध्यम से धान उपार्जन और बैंकिंग जैसी व्यवस्थाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे कोल्ड स्टोरेज, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन, गैस एजेंसी संचालन तथा अन्य रोजगारमूलक गतिविधियों तक भी विस्तारित किया जाए। इससे किसानों और ग्रामीणों की आय बढ़ेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

          उप मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में पहले 90 सहकारी समितियां थीं, लेकिन अब 40 नई समितियों के गठन के बाद उनकी संख्या बढ़कर 138 हो गई है। उन्होंने कहा कि आज महान शिक्षाविद् और राष्ट्रचिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती भी है। इसी ऐतिहासिक तिथि पर भारत सरकार ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित करना तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

         उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में सहकारिता की भावना स्वाभाविक रूप से मौजूद है। बस्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां लोग मिल-जुलकर अनेक कार्य करते हैं, जो सहकारिता की सशक्त मिसाल है। उन्होंने कहा कि कबीरधाम का शक्कर कारखाना भी सहकारिता मॉडल की सफलता का उदाहरण है। गुजरात के बनासकांठा के अनुभव साझा करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि वहां सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन के साथ कई मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं और उसका लाभांश सभी सदस्यों में वितरित होता है। उन्होंने किसानों से सहकारिता को बहुआयामी जनआंदोलन बनाकर नए क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

         राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि सहकारिता का अर्थ है, साथ मिलकर कार्य करना और एक-दूसरे का सहयोग करना। उन्होंने कहा कि भारत के गांवों में प्राचीन काल से ही सहकारिता की भावना जीवंत रही है। गांवों में सुख-दुख, खेती-किसानी और सामाजिक कार्यों में लोग हमेशा मिलकर एक-दूसरे का साथ देते आए हैं, यही सहकारिता की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद इस क्षेत्र को नई दिशा और गति मिली है तथा आज मंत्रालय के पाँच वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। 

       पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा किसानों की मेहनत और समर्पण ने बनाया है। उन्होंने कहा कि सहकारिता की वास्तविक ताकत और महत्व को सबसे बेहतर किसान ही समझते हैं। सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद इस क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है और यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि जनभागीदारी का सशक्त आंदोलन बनकर उभरा है। 

          कार्यक्रम में 08 किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण, मछली कीट प्रदान किया। कार्यक्रम में निबंध, प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिता में 15 विजेता बालिकाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री बिसेषर पटेल, कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, पुलिस प्राधिकरण सदस्य श्री भगत पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य श्री रामकुमार भट्ट, श्रीमती दीपा पप्पु धुर्वे, डाॅ. बीरेन्द्र साहू, श्री रोशन दुबे, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री विदेशी राम धुर्वे, श्री संतोष पटेल, श्री लोकचंद साहू, श्री विजय पाटिल, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा सहित जनप्रतिनिधि, किसान उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का आयोजन 4 जुलाई से

  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का आयोजन 4 एवं 5 जुलाई को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर में किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, नवाचार आधारित तथा परिणामोन्मुख बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न को नई गति देना है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप शासन को भी निरंतर सीखना, स्वयं का मूल्यांकन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए। इसी सोच के अनुरूप आयोजित यह चिंतन शिविर मंत्रिमंडल और विभिन्न क्षेत्रों के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच संवाद, अनुभव-साझाकरण तथा नीति-निर्माण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

शिविर में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, निवेश, पर्यटन, खेल, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकी, सुशासन, संस्थागत सुधार, नेतृत्व विकास तथा प्रभावी जनसेवा जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। इन चर्चाओं के आधार पर शासन की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और जनहितकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए भावी रणनीति तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि सुशासन केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय की मांग के अनुरूप स्वयं को निरंतर बेहतर बनाते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। चिंतन शिविर इसी सतत सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जो पारदर्शी, उत्तरदायी, संवेदनशील और परिणाम आधारित हो तथा जिसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीति, नवाचार, प्रभावी नेतृत्व और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से संभव होगा। चिंतन शिविर में होने वाला मंथन आने वाले वर्षों की विकास यात्रा को नई दिशा देगा।

राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव

चिंतन शिविर के प्रथम दिवस की शुरुआत आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर श्री गौर गोपाल दास के नेतृत्व एवं जीवन मूल्यों पर व्याख्यान से होगी। इसके बाद श्री अभय करंदीकर उभरती प्रौद्योगिकियों एवं भविष्य की शासन व्यवस्था में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। डॉ. रमेश चंद कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य की कृषि रणनीतियों पर विशेष व्याख्यान देंगे।

द्वितीय दिवस की शुरुआत योग सत्र से होगी। इसके पश्चात श्री सुमन बिल्ला पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र की संभावनाओं, श्री शशांक मणि त्रिपाठी सार्वजनिक नीति एवं विकास, ओलंपिक पदक विजेता श्री गगन नारंग उत्कृष्टता, नेतृत्व और प्रदर्शन की संस्कृति तथा डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सुशासन, नेतृत्व और जनकेंद्रित प्रशासन पर अपने विचार साझा करेंगे।

सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को मिलेगा बल

चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य शासन व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना, विभागों के बीच अभिसरण एवं समन्वय को मजबूत करना, निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना तथा परिणामोन्मुखी प्रशासनिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। साथ ही शासन में प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग, नवाचार आधारित समाधान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को लेकर भी विस्तृत चर्चा होगी।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने खरीफ-2026 एवं संभावित अल्प वर्षा की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में खरीफ सीजन-2026 के दौरान संभावित अल्प वर्षा की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग तथा विकसित भारत-बीवी-जी राम जी योजना की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मौसम की संभावित स्थिति, खाद एवं बीज की उपलब्धता, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती तथा ग्रामीण रोजगार से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन अथवा आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा से उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा तथा खरीफ सीजन की तैयारियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की फसल के लिए आवश्यक सिंचाई जल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल स्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण तथा वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, जिससे किसानों को बेहतर आय के अवसर प्राप्त हों और कृषि जोखिम कम हो।

मुख्यमंत्री श्री साय ने किसानों से अपील की कि वे कृषि संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या अथवा तकनीकी सलाह के लिए कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। उन्होंने अमानक बीज एवं उर्वरकों की बिक्री तथा कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में बताया गया कि राज्य में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा सभी जिलों में समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। बैठक में बताया गया कि अर्ली वेरायटी के धान बीज बीज निगम के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराने की संपूर्ण तैयारी पूरी कर ली गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संभावित अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। उन्होंने 'मोर गांव मोर पानी' अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, जल संरचनाओं के निर्माण तथा भूजल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की सुरक्षा के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा विकसित 'सचेत', 'दामिनी' और 'मेघदूत' मोबाइल एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि समय पर मौसम संबंधी जानकारी किसानों तक पहुंच सके। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उचित दर पर खरपतवारनाशक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे उत्पादन लागत कम हो और फसल सुरक्षित रह सके।

वीबी-जी राम जी योजना बनेगी जल सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार

बैठक में बताया गया कि 1 जुलाई 2026 से योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है। योजना के अंतर्गत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। मजदूरी दर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, जल सुरक्षा, जल संरचनाओं के निर्माण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे एक ओर ग्रामीणों को निरंतर रोजगार प्राप्त हो और दूसरी ओर प्रदेश की जल सुरक्षा मजबूत हो। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में किया गया प्रत्येक प्रयास आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीण परिवारों के हितों की रक्षा, कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा नियमित रूप से जारी किए जाने वाले बुलेटिनों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।  उन्होंने कहा कि इसके लिए एक प्रभावी जनजागरूकता अभियान तैयार किया जाए, ताकि यह जानकारी किसानों तक जमीनी स्तर पर पहुँचे। साथ ही सोशल मीडिया एवं पारंपरिक मीडिया के माध्यम से भी इनका व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कृषि संचालक श्री राहुल देव, विकसित भारत वीबी - जीरामजी योजना के आयुक्त श्री तारणप्रकाश सिन्हा, भारत मौसम विज्ञान विभाग की विशेषज्ञ श्रीमती गायत्री वानी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के निदेशक श्री विवेक कुमार त्रिपाठी सहित कृषि, मौसम एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध: राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा

 राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के बलौदाबाजार विकासखंड के ग्राम पंचायत देवरी के ग्रामीणों को बड़ी सौगात देते हुए 44 लाख रुपये की लागत वाले तीन महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ आज गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण अंचलों में खुशहाली और समृद्धि का एक नया दौर दिखाई दे रहा है।



 राजस्व मंत्री ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्राम देवरी में 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित चेक डैम  का लोकार्पण किया गया।  इसी प्रकार   महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए 16 लाख रुपये की लागत से बने भव्य 'महतारी सदन' भवन का उद्घाटन तथा सामुदायिक आयोजनों की सुविधा के लिए 8 लाख रुपये की लागत से बनने वाले शेड निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गई।

​हर गांव तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ

     ​ राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार गांवों के समग्र और चहुंमुखी विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नवनिर्मित चेक डैम से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, जिससे हमारे किसान भाईयों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं दूसरी ओर महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन, कौशल विकास और सामुदायिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।

    ​  इस विकास उत्सव के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभापति  सहित स्थानीय सरपंच, बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि तथा प्रबुद्ध ग्रामीण जन उपस्थित रहे।
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सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री श्री साय

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को साकार करने वाला है। डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

            मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि' का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम 'कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय' किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
         
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 
               
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
             
सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
                 इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन

            कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

              कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ श्री शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के श्री कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी श्री सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता श्री रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।
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वरिष्ठ पत्रकार सुखनंदन बंजारे के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार श्री सुखनंदन बंजारे के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने शोक संदेश में कहा कि वरिष्ठ पत्रकार श्री सुखनंदन बंजारे के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, आत्मीयजनों और शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय सुखनंदन बंजारे ने पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक अपनी उल्लेखनीय सेवाएं दीं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
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ग्रामीण विकास को नई दिशा देगी वीबी-जी राम जी योजना–उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

 ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका की नई गारंटी देने वाली विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण(वीबी-जी राम जी) योजना का राज्य स्तरीय शुभारंभ आज कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द से किया गया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राष्ट्रीय स्तर पर योजना का शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति से किया। इस दौरान वे वर्चुअल माध्यम से ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित राज्य स्तरीय शुभारंभ समारोह से भी जुड़े रहे। 


         केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) योजना लागू हो रही है। इस योजना का उद्देश्य है कि देश का कोई भी गरीब काम के अभाव में बेरोजगार न रहे। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना से जहां ग्रामीण मजदूरों को 125 दिनों का रोजगार मिलेगा, वहीं गांवों में विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी। श्री चौहान ने कहा कि मजदूरों के पसीने का सम्मान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। गरीबों की सेवा ही हमारे लिए भगवान की सेवा है। 

        उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि आज पूरे देश में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी-जीरामजी) योजना का शुभारंभ हो रहा है और छत्तीसगढ़ में इसका राज्य स्तरीय शुभारंभ ग्राम पंचायत गंडईखुर्द से किया गया है। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में योजना के तहत पहले कार्य के रूप में ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में शेड निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि विकसित गांव से विकसित भारत के निर्माण का अभियान है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रत्येक गांव और पंचायत का समग्र विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 3,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे और रोजगार की कोई कमी नहीं रहेगी।

        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि योजना के तहत 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। इनमें जल संरक्षण से जुड़े 107, ग्रामीण अधोसंरचना के 90, आजीविका संवर्धन के 86 तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित 35 प्रकार के कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब जॉब कार्ड के स्थान पर जीआरजी कार्ड जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जॉब कार्ड में केवाईसी कराने में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत डबरी, चेकडैम, बोल्डर चेकडैम, रिचार्ज पिट, वर्षा जल संचयन, नहर लाइनिंग, ग्रामीण सड़क (धरसा), मुरमीकरण जैसे कार्य कर जल स्तर बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रत्येक पंचायत को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर अटल डिजिटल सेवा केंद्र, मुक्तिधाम में शेड, ग्रामीण अधोसंरचना सहित प्राथमिकता वाले कार्य शुरू करने होंगे।

         उप मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत बाउंड्री वॉल, किचन शेड, शौचालय, सामुदायिक पशु शेड, सोलर एवं स्ट्रीट लाइट, ग्रामीण चौपाल, हाईमास्ट लाइट, स्व-सहायता समूहों के लिए वर्क शेड, कोल्ड स्टोरेज, खाद एवं खाद्यान्न गोदाम, सामुदायिक आटा चक्की, कृषि प्रसंस्करण केंद्र और हैंडलूम प्रोसेसिंग केंद्र जैसे कार्य भी किए जा सकेंगे। इससे रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प तभी साकार होगा, जब गांव आत्मनिर्भर और समृद्ध बनेंगे। इसी उद्देश्य से गांवों को ए, बी और सी श्रेणी में विभाजित कर योजनाबद्ध विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों में 11 लाख आवासों का निर्माण पूरा किया गया है, जो ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से अपील की कि वे व्यापक सोच के साथ अपने गांवों की विकास कार्ययोजना तैयार करें, ताकि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

         पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के लिए ऐतिहासिक है और सभी लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हैं। इस योजना के तहत मनरेगा में अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार मिलेगा तथा अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। 

        कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेष पटेल, छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य श्री भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य श्री राम कुमार भट्ट सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

गंडईखुर्द को मिली पहली सौगात, शेड निर्माण प्रस्ताव को स्वीकृति

        उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत प्रदेश के पहले विकास कार्य के रूप में ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में शेड निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि योजना की शुरुआत विकास कार्यों के साथ हो रही है। इस स्वीकृति के साथ ही गंडईखुर्द वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत प्रदेश की पहली ग्राम पंचायत बन गई, जहां विकास कार्य का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसी प्रकार प्रत्येक पंचायत की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए योजना का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।

मानव श्रृंखला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण

         कार्यक्रम के दौरान वीबी-जी राम जी योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा, जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी, कर्मचारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएं, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाकर योजना का संदेश दिया। इस दौरान सभी ने ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन तथा विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों को योजना के उद्देश्यों, लाभों एवं इसमें जनभागीदारी के महत्व से भी अवगत कराया गया।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वृहद स्तर पर हुआ पौधरोपण

      पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत वृहद स्तर पर पौधरोपण किया गया। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बम्हनीडीह के विकास की नई यात्रा का किया शुभारंभ

 स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र की सबसे सशक्त कड़ी है और नगर पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं, बल्कि नागरिकों की आकांक्षाओं को धरातल पर उतारने का प्रभावी माध्यम हैं। नवगठित नगर पंचायत बम्हनीडीह के प्रथम जनप्रतिनिधियों के कंधों पर केवल एक नगर के विकास की नहीं, बल्कि एक नई कार्यसंस्कृति और जनविश्वास की नींव रखने की जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह में नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री रमेश कुमार डडसेना एवं सभी पार्षदों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनता ने जिस विश्वास के साथ उन्हें दायित्व सौंपा है, उसका प्रतिफल पारदर्शी प्रशासन, संवेदनशील कार्यशैली और विकास के रूप में दिखाई देना चाहिए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बम्हनीडीह के विकास को नई गति देने वाली तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए दहिदा-बम्हनीडीह के बीच हसदेव नदी पर पुल निर्माण, बिजली विभाग का सब डिवीजन कार्यालय तथा सर्वसुविधायुक्त मंगल भवन के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत संरचनाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधासंपन्न बनाना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में विकास को नई गति देते हुए हर वर्ग के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को पक्के घर, किसानों को उनकी उपज का सम्मानजनक मूल्य, महिलाओं को महतारी वंदन योजना के जरिए आर्थिक संबल तथा युवाओं के लिए रोजगार और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल बड़े शहरों के विकास से नहीं, बल्कि बम्हनीडीह जैसे उभरते नगरों को सशक्त बनाने से होगा। राज्य सरकार ऐसे सभी नगरीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, बेहतर नागरिक सेवाओं और सुनियोजित विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बम्हनीडीह नगर पंचायत जनभागीदारी, सुशासन और विकास का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगी तथा आने वाले वर्षों में क्षेत्र की नई पहचान बनेगी।

समारोह में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक श्री किरण सिंह देव ने भी जनता को संबोधित किया।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, श्री नारायण चंदेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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"सशक्त गांव से साकार होगा विकसित भारत का सपना"-मंत्री श्री अग्रवाल

 विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी के लिए जिला स्तरीय जन सम्मेलन सह शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को अंबिकापुर जिला पंचायत सभाकक्ष में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ आंध्रप्रदेश राज्य के तिरुपति जिले से केन्द्रीय  ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजना का राष्ट्रीय स्तर पर किया गया।



कार्यक्रम में मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन आंदोलन है। इसका उद्देश्य गांव को समृद्ध बनाना, श्रम को सम्मान देना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी लक्ष्य की मजबूत नींव हमारे गांव में रखी जाएगी, जब गांव सशक्त होंगे, तभी भारत विकसित होगा। पहले 100 दिन का रोजगार था, अब 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
भारत सरकार ने श्रमिकों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई 2026 से मनरेगा श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 261 से 300 रूपए कर दी है। यह केवल मजदूरी में वृद्धि नहीं, बल्कि हमारे श्रमिक भाई-बहनों के परिश्रम, समर्पण और आत्म सम्मान का सम्मान है। अब हमारा लक्ष्य केवल अस्थायी कार्य नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी एवं उपयोगी परियोजनाओं का निर्माण करना है, जो आने वाले हमारे पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी हो। व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण, खेत तालाब और सिंचाई सुविधा का विस्तार करना, ग्रामीण अधोसंरचना के निर्माण काम को प्राथमिकता देना है। इन कार्यों से रोजगार भी मिलेगा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होगा।

उन्होंने उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों, स्वयं सहायता समूहों के दीदियों, युवाओं तथा ग्रामीण नागरिकों से आग्रह करते हुए कहा कि इसे केवल योजना न समझें, बल्कि अपने गांव के विकास का जन अभियान बनाएं। जब समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करेंगे, तभी विकसित गांव और विकसित भारत का सपना साकार होगा। प्रत्येक कार्य पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ किया जाए, प्रत्येक कार्य का भौगोलिक चिन्हांकन तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। गांव सशक्त होगा तो प्रदेश सशक्त होगा और प्रदेश सशक्त होगा तो हमारा देश सशक्त होगा। आप सभी इस मिशन से जुड़ें, अधिक से अधिक लोगों को जोड़ें और अपने गांव के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरुपा सिंह ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने दिशा में वीबी जी राम जी योजना मील का पत्थर साबित होगी। योजना के तहत वे काम होंगे जिनकी उस गांव में आवश्यकता होगी। कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने कहा कि योजना के माध्यम से हम ग्रामीण विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जिले स्तर पर इसकी बेहतर मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि लोगों को योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय कुमार अग्रवाल द्वारा पीपीटी के माध्यम से योजना की विस्तृत प्रस्तुति दी गई। जिसमें योजना के संबंध में बिंदुवार जानकारी तथा कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गई।

इस अवसर पर जिले में पूर्व में क्रियान्वित किए गए कार्यों की प्रदर्शनी भी लगाई गई , जिसे अतिथियों एवं आमजनों द्वारा सराहा गया। साथ ही योजना के हितग्राहियों ने मंच से पूर्व की योजना से प्राप्त लाभ एवं जीवन में आए सकारात्मक बदलावों के बारे में अपने अनुभव साझा किए ।कार्यक्रम के अंत में नवाबांध की मुस्कान महिला समूह को नवा तरिया में मक्का की खेती हेतु बीज वितरण किया गया तथा 15 कृषकों को कृषि विभाग के सहयोग से अरहर के बीज वितरण किया गया। सम्मेलन में शामिल सभी को कटहल,मुनगा,जामुन,आम आदि के पौधें वितरित किये गये। इस दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री देवनारायण यादव, जिला पंचायत सदस्य श्री विजय अग्रवाल, श्रीमती पायल सिंह तोमर,श्रीमती राधा रवि, श्रीमती नानमणि पैकरा सहित जनपद सदस्य , सरपंच, सचिव एवं समूह की महिलाएं तथा ग्रामीणजन उपस्थित थे ।

बता दें विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम-जी, अधिनियम 2025
1 जुलाई 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हो गई है। यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार, आजीविका सुरक्षा और गांवों के सतत विकास को नई मजबूती देगा। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की वैधानिक गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य में वीबी-जी-राम-जी योजना के तहत मजदूरों को 300 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
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