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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वर्गीय श्री कुशाभाऊ ठाकरे की जयंती पर उन्हें किया नमन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में स्वर्गीय श्री कुशाभाऊ ठाकरे की जयंती पर उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री ने श्री ठाकरे के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण करते हुए राष्ट्र और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री कुशाभाऊ ठाकरे का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। सादगी, अनुशासन, निष्ठा और सेवाभाव उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान थी। उन्होंने अपने आचरण और कार्यशैली से सार्वजनिक जीवन में उच्च आदर्श स्थापित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने के साथ ही समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यही कारण है कि आज भी उनका जीवन और विचार सार्वजनिक जीवन में कार्य करने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री कुशाभाऊ ठाकरे की जयंती हमें उनके आदर्शों और जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेने का अवसर देती है। राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जनकल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वर्गीय श्री कुशाभाऊ ठाकरे को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रदेशवासियों से उनके सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा के आदर्शों को आत्मसात कर विकसित एवं समृद्ध भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया।
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नक्सलवाद से मुक्त छत्तीसगढ़ अब शांति, विकास और समृद्धि की नई यात्रा पर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों और अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस माँ भारती की वंदना, हमारे गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेने और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का पावन अवसर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव अंबेडकर और वीर सावरकर सहित स्वतंत्रता संग्राम के असंख्य सेनानियों के त्याग और बलिदान का स्मरण किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वतंत्रता और स्वाभिमान की अलख जगाने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुंडाधुर, गेंद सिंह, धुरवा राव, यादव राव, वेंकट राव, डेबरी धुर और आयतु माहरा सहित जननायकों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी का संदेश - ‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं’, संत कबीर की वाणी और बाबा गुरु घासीदास जी का ‘मनखे-मनखे एक समान’ का उद्घोष हमें स्वतंत्रता, समानता और मानवीय गरिमा के मूल्यों की निरंतर प्रेरणा देता है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उनके राष्ट्रीय एकता के संकल्प का स्मरण किया।

बस्तर में शांति के साथ विकास का नया सूर्याेदय

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साहसिक नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद के विरुद्ध ऐतिहासिक सफलता मिली है। माओवाद से मुक्त बस्तर में आज तिरंगा यात्राओं के माध्यम से स्वतंत्रता का उत्सव मनाया जा रहा है। जो क्षेत्र कभी हिंसा और भय से प्रभावित थे, वहां आज शांति, विश्वास और विकास की नई सुबह हुई है। उन्होंने कहा कि बस्तर की सर्वांगीण प्रगति डबल इंजन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है। जगदलपुर में राष्ट्रीय स्तर की मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक का आयोजन बदलते बस्तर की नई पहचान का प्रतीक है। अब बस्तर के नवनिर्माण का स्वर्णिम समय है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ के माध्यम से 31 योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं का शत-प्रतिशत सेचुरेशन सुनिश्चित करते हुए बस्तर संभाग के 39 लाख से अधिक लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। नक्सल हिंसा के कारण बंद पड़े स्कूलों को पुनः प्रारंभ करने के साथ 36 नए स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है।

‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ में 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच कर हेल्थ प्रोफाइल तैयार की गई है। लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपए की ‘आजीविका उन्नयन योजना’ तैयार की गई है। सुरक्षा कैंप अब सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं तथा वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार से शुरू ‘सेवा डेरा’ के माध्यम से नागरिक सुविधाओं, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में सड़क, बिजली, परिवहन और संचार की मजबूत बुनियाद तैयार की जा रही है। सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत 461 गांवों को ग्रिड आधारित बिजली प्रणाली से जोड़ने तथा 234 अंदरूनी बसाहटों को मुख्य सड़कों से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है। ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा’ से बस्तर और सरगुजा संभाग के 814 गांवों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिल रही है।

अन्नदाता की समृद्धि हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अन्नदाता हमारे भाग्य विधाता हैं और उनका सुख, सम्मान तथा समृद्धि सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जा रहा है। ‘कृषक उन्नति योजना’ की राशि का एकमुश्त भुगतान होली से पहले किया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रही है। धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसल लेने पर ‘कृषक उन्नति योजना’ के अंतर्गत 15 हजार रुपए की आदान सहायता देने का निर्णय लिया गया है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘सहकार से समृद्धि’ की संकल्पना के अनुरूप प्रदेश के 2,028 पैक्स का कंप्यूटरीकरण पूरा किया गया है और इनमें से 1,988 पैक्स कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं।

सिंचाई विस्तार के लिए 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की मंजूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की नदियों को जोड़ने की सोच को आगे बढ़ाते हुए ‘सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना’ के लिए 3,047 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की मंजूरी दी गई है।

अटल सिंचाई योजना के माध्यम से बंद पड़ी सिंचाई परियोजनाओं का पुनरुद्धार किया जा रहा है। इंद्रावती नदी पर लगभग 2 हजार करोड़ रुपए की लागत से मटनार और देउरगांव बैराज बनाए जाएंगे, जिनसे 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें साढ़े पांच हजार रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक दिया जा रहा है तथा ‘चरण पादुका योजना’ पुनः प्रारंभ की गई है।

हर परिवार के पक्के घर का सपना हो रहा साकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘मोदी की गारंटी’ के अनुरूप प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। कैबिनेट की पहली बैठक में 18 लाख आवासों की   स्वीकृति के बाद अब तक 24 लाख 50 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 1,600 घर बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ और ‘मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना’ के माध्यम से 73 लाख परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।

महिला सशक्तीकरण से परिवार और प्रदेश दोनों हो रहे मजबूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘महतारी वंदन योजना’ के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। योजना के अंतर्गत अब तक 19 हजार 444 करोड़ रुपए महिलाओं के खातों में अंतरित किए गए हैं। प्रदेश में 13 लाख 85 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से 56 हजार से अधिक पीवीटीजी परिवारों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंची हैं, वहीं 6,691 जनजातीय बहुल गांवों में ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ का लाभ दिया जा रहा है। वनाधिकार पत्र वितरण में छत्तीसगढ़ की अग्रणी भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वारिसों के पट्टों के नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए टास्क फोर्स गठित की गई है।

युवाओं के लिए रोजगार से नवाचार तक खुल रहे नए द्वार

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वामी विवेकानंद के युवा शक्ति पर विश्वास का स्मरण करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए रोजगार, शिक्षा, कौशल, खेल और नवाचार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल’ बनाया गया है तथा परीक्षाओं में नकल और अनुचित साधनों को रोकने के लिए सख्त कानून पारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस में 7 हजार युवाओं की भर्ती की गई है। शिक्षक एवं सहायक शिक्षकों के 3,946 पदों तथा बिजली कंपनियों में 1,235 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। नीट, जेईई, क्लैट, रेलवे, एसएससी, बैंकिंग, पीएससी और यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘सीजी असिस्टेंस फॉर कॉम्पिटिटिव एक्जाम योजना’ शुरू की जा रही है। चार वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने वाले छत्तीसगढ़ के अग्निवीरों को पुलिस आरक्षक, वनरक्षक और जेल प्रहरी की सीधी भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय भी लिया गया है।

एआई मिशन से भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार होगा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 500 करोड़ रुपए के ‘छत्तीसगढ़ राज्य एआई मिशन’ को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत 100 एआई डेटा लैब, पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी। छह लाख विद्यार्थियों तथा डेढ़ लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ‘छत्तीसगढ़ स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति’ के अंतर्गत 100 करोड़ रुपए का स्टार्टअप फंड बनाया गया है। पीएम सेतु के अंतर्गत 30 आईटीआई का उन्नयन किया जा रहा है। प्रदेश में फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी कैंपस, निफ्ट और नाइलिट जैसे संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। गीदम, कुनकुरी, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़ और कवर्धा में पांच मेडिकल कॉलेज इसी सत्र से प्रारंभ किए जा रहे हैं।

खेल प्रतिभाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का पूरा अवसर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराएं, इसके लिए खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ प्रारंभ किया जा रहा है। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव को डीएसपी के पद पर पदोन्नत करने तथा 30 लाख रुपए की सम्मान राशि देने का निर्णय लिया गया है। राज्य के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए शासकीय सेवा के द्वार खोले गए हैं। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सफल मेजबानी के बाद अगले वर्ष भी इन खेलों का आयोजन छत्तीसगढ़ में होगा।

निवेश और रोजगार का नया केंद्र बन रहा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से कोर सेक्टर के साथ नए और उभरते क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। देश-दुनिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट से अब तक 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 1 लाख 74 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्विफ्ट टेक्सटाइल से 4,600 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। मुंगेली में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड का प्लांट स्थापित किया जाएगा। प्रदेश में 23 नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए जा रहे हैं। राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0, नवा रायपुर में फर्नीचर क्लस्टर तथा जांजगीर-चांपा एवं राजनांदगांव में स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में देश का पहला एआई एसईजेड विकसित किया जा रहा है। रायपुर, नवा रायपुर और दुर्ग-भिलाई को शामिल करते हुए स्टेट कैपिटल रीजन का गठन किया गया है।

ऊर्जा, सड़क, रेल और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिल रही नई गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए उत्पादन, पारेषण और वितरण तीनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीति के साथ काम किया जा रहा है। एनर्जी समिट में 3 लाख 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना’ से 12 लाख से अधिक उपभोक्ताओं का 910 करोड़ रुपए का सरचार्ज माफ किया गया है।

प्रदेश के 90 हजार से अधिक उपभोक्ता ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ का लाभ ले रहे हैं। भारतमाला परियोजना, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे, रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर और रावघाट-जगदलपुर रेल नेटवर्क प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति देंगे।

‘सीजी वायु योजना’ के माध्यम से प्रमुख हवाई अड्डों से हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ढाई वर्षों में दूरस्थ क्षेत्रों में 829 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा ‘भारतनेट 3.0’ के माध्यम से 5,659 ग्राम पंचायतों को हाईस्पीड इंटरनेट से जोड़ने का लक्ष्य है।

सुशासन में तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता और नागरिक सुविधा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन के आदर्शों पर आगे बढ़ रही है। पारदर्शी ई-ऑफिस प्रणाली अपनाई गई है। ‘सीएम हेल्पलाइन 1076’ के माध्यम से 80 हजार से अधिक शिकायतों का निराकरण किया गया है और ‘सेवा सेतु पोर्टल’ के जरिए शासन की 700 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों की स्थापना, रजिस्ट्री में सुधार और ऑटो म्यूटेशन जैसी व्यवस्थाओं से नागरिक सेवाओं को सरल बनाया गया है। 7,524 ग्राम पंचायतों में ‘अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्र’ स्थापित कर ग्रामीणों को डिजिटल और बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में ‘नियद नेल्ला नार’ योजना लागू नहीं है, वहां ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान’ के माध्यम से 31 योजनाओं का लाभ सेचुरेशन मोड में पहुंचाया जा रहा है।

‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान की शुरुआत

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान प्रारंभ करने की घोषणा की। इसके तहत प्रदेश के 6,671 शासकीय विद्यालयों में बेटियों के लिए शौचालय बनाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ से प्रदेश में रोजगार एवं विकास का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। योजना के माध्यम से प्रदेश के 6,524 गांवों में मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय बनाए जाएंगे।

मजबूत कानून-व्यवस्था के साथ साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था सुशासन की पहली शर्त है। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ साइबर अपराध की चुनौती से निपटने के लिए राज्य में नौ नए साइबर पुलिस थाने बनाए गए हैं। डायल-112 सेवा पूरे प्रदेश में लागू की गई है।

पर्यटन और लोक-संस्कृति को मिलेगी वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन’ के माध्यम से बस्तर और सरगुजा में पर्यटन सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाएगा। बस्तर ओलम्पिक, सरगुजा ओलम्पिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने प्रदेश की जनजातीय संस्कृति, खेल प्रतिभा और प्राकृतिक सुंदरता को राष्ट्रीय पहचान दी है।

चित्रकोट को ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करते हुए वहां टेंट सिटी बनाई जाएगी। सिरपुर को विश्व धरोहर स्थल के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक-संस्कृति हमारी अमूल्य धरोहर है। पद्मविभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की विरासत को सहेजने के लिए ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ प्रारंभ करने तथा छत्तीसगढ़ी सिनेमा के विकास के लिए ‘चित्रोत्पला फिल्म सिटी’ के निर्माण का निर्णय लिया गया है। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश और उनके नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार देने का निर्णय भी लिया गया है। उन्होंने आरंग के रीवां में उत्खनन के दौरान 2,750 वर्ष पुरानी मानव बस्ती की खोज को छत्तीसगढ़ की प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण प्रमाण बताया।

पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अधोसंरचना और आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत प्रदेश में अब तक सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि ‘रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना’ के माध्यम से 49 हजार से अधिक तथा ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’ के माध्यम से 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कराए गए हैं।

विकसित भारत के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संदेश के समापन में कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ हम सभी का सामूहिक लक्ष्य है। उन्होंने ऋग्वेद के मंत्र - “संगच्छध्वं, सं वदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्।” का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से एकजुट होकर छत्तीसगढ़ और भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वतंत्रता के अमृत मूल्यों से प्रेरणा लेकर, अपने कर्तव्यों को सर्वाेपरि रखते हुए और ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना से हम विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार करेंगे।
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तिरंगा हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर अपने-अपने घरों पर तिरंगा फहराकर राष्ट्रभक्ति के इस महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तिरंगा हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है। तिरंगे को देखते ही प्रत्येक भारतीय का मन गर्व और राष्ट्रप्रेम से भर उठता है। यह 140 करोड़ भारतीयों को एकता के सूत्र में बांधने वाला हमारा राष्ट्रीय गौरव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से देशवासियों को राष्ट्रीय ध्वज के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ने की अभिनव पहल की है। आज यह अभियान एक व्यापक जनांदोलन का स्वरूप ले चुका है। गांव से शहर तक, घर-घर में लहराता तिरंगा देश की एकता, अखंडता और राष्ट्र के प्रति प्रत्येक नागरिक के समर्पण को अभिव्यक्त करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर हम सभी अपने घरों पर पूरे सम्मान और गौरव के साथ तिरंगा फहराएं। तिरंगे को नमन करते हुए उन  स्वतंत्रता सेनानियों और अमर शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें, जिनके संघर्ष और बलिदान से हमें स्वतंत्र भारत में सांस लेने का सौभाग्य मिला है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने अनेक वीर सपूतों को जन्म दिया, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महान जनजातीय नायक ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। प्रदेश के अनेक  स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग और संघर्ष हमारी गौरवशाली विरासत है। आज हम उन सभी वीरों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान विशेष रूप से नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है। जब बच्चे और युवा अपने घरों पर तिरंगा फहराते हैं, तो उनमें राष्ट्र के प्रति गौरव, जिम्मेदारी और कर्तव्य का भाव और अधिक मजबूत होता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वतंत्रता हमें हमारे पूर्वजों के असंख्य बलिदानों से प्राप्त हुई है। अब इस स्वतंत्रता को सशक्त और सार्थक बनाना हम सभी का दायित्व है। देश आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि के लिए प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तिरंगे की छांव में हम सभी भारतीय हैं और राष्ट्रहित हम सभी के लिए सर्वोपरि है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान इसी राष्ट्रीय चेतना को और प्रगाढ़ करने का अभियान है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर घर-घर तिरंगा फहराएं और एकजुट होकर विकसित, सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लें।
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स्वतंत्रता दिवस पर राज्यपाल श्री डेका ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका ने प्रदेशवासियों एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा देश की सीमाओं की रक्षा में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।


           राज्यपाल ने कहा कि 15 अगस्त 2026 को भारत गौरवशाली 80 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। यह दिन हमें उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान की याद दिलाता है, जिनके अथक प्रयासों से देश को पराधीनता से मुक्ति मिली। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद सहित अनेक ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का योगदान देश सदैव स्मरण रखेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा में हमारे वीर सैनिकों और सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। राष्ट्र उनके त्याग और समर्पण के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा।

         राज्यपाल ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार को देश की प्रगति के लिए समर्पित करें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से भारत को और अधिक सशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर एवं गौरवशाली राष्ट्र बनाया जा सकता है।
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राज्यपाल श्री डेका ने 12 वर्षीय छात्र मास्टर दिव्यांश की पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड‘ का किया विमोचन

 राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज रायपुर के 12 वर्षीय छात्र मास्टर दिव्यांश सुल्तानिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड’ का विमोचन किया। उन्होंने दिव्यांश के रचनात्मक प्रयास की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।


              दिव्यांश ने अपने दादा की प्रेरणा से इस पुस्तक की रचना की है। पुस्तक में एक युवा छात्र के दृष्टिकोण से ईश्वर और आध्यात्मिकता से जुड़े विचारों, सवालों और उसकी अपनी समझ को सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है। कम उम्र में गंभीर और विचारपरक विषय पर पुस्तक लिखने के दिव्यांश के प्रयास को राज्यपाल ने सराहनीय बताया।

             इस अवसर पर राज्यपाल ने मास्टर दिव्यांश की दूसरी पुस्तक ‘फ्रॉम पॉकेट मनी टू पोर्टफोलियो’ के कवर को भी लॉन्च किया। यह पुस्तक बच्चों और युवाओं में कम उम्र से ही पैसे की बचत, निवेश और वित्तीय जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से छात्र द्वारा लिखी जा रही है। इसमें गुल्लक के माध्यम से बचत की आदत विकसित करने और बचाई गई राशि के उचित निवेश के विचार को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।

            राज्यपाल ने कहा कि बच्चों में पढ़ने, लिखने और नए विषयों पर विचार करने की आदत विकसित करना उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने दिव्यांश को अपनी जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की ललक को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर दिव्यांश के पिता श्री सुधीर सुल्तानिया, माता श्रीमती सरिता सुल्तानिया सहित अन्य परिजन उपस्थित थे।
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राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति श्री दिलीप सिंह जूदेव जी का समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धेय स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव जी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया और राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनके योगदान का स्मरण किया।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि श्रद्धेय दिलीप सिंह जूदेव जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पित रहा। जनजातीय समाज के हितों की रक्षा, उनके स्वाभिमान और सामाजिक जागरण के लिए उन्होंने आजीवन कार्य किया। समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें जन-जन के हृदय में विशिष्ट स्थान दिलाया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री जूदेव जी का छत्तीसगढ़ की माटी और यहां के लोगों से गहरा आत्मीय जुड़ाव था। विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में उन्होंने समाज को संगठित करने, लोगों में आत्मविश्वास जगाने और उनकी आवाज को मजबूती देने का महत्वपूर्ण कार्य किया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री जूदेव जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक सरोकार और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति अटूट निष्ठा का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।

इस अवसर पर श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती प्रियंवदा सिंह जूदेव, प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा उपस्थित थे।
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तिरंगा हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक’-राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा

 स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रायपुर जिले के तिल्दा में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की महिमा और देश के गौरवशाली इतिहास का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हमारे तिरंगे का हरा रंग देश की शांति, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है, जबकि इसके मध्य में स्थित अशोक चक्र हमें बिना रुके निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है। यह ध्वज हमारी एकता और अखंडता का वह अनुपम प्रतीक है, जिसके मान-सम्मान की रक्षा के लिए देश के लाखों वीर सपूतों ने हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दी है। 


स्वाभिमान से फहराएं तिरंगा, बनाए रखें ध्वज की गरिमा

         राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने उपस्थित जनसमूह और प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिक 15 अगस्त के पावन अवसर पर अपने-अपने घरों में पूरे स्वाभिमान के साथ तिरंगा जरूर फहराएं। इसके साथ ही उन्होंने ध्वज की गरिमा बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए कहारूष्उत्सव के बाद राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए। सड़क, गली या किसी भी अनुचित स्थान पर तिरंगा गिरा हुआ न दिखाई दे, इस बात का ध्यान रखना हम सभी का परम नैतिक कर्तव्य है।

2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प
 
       देश के स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा रखते हुए श्री वर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री द्वारा भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने और वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समर्थ व विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का जो दूरदर्शी विजन रखा गया है, उसे हम सब मिलकर साकार करेंगे।

      इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती चंद्रकला वर्मा, उपाध्यक्ष श्री पलक सुखमणि, पूर्व अध्यक्ष श्री महेश अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, युवा और विद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे। देशभक्ति के नारों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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स्वतंत्रता दिवस 2026- रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे ध्वजारोहण

 स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के अवसर पर छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय समारोहों के लिए मुख्य अतिथियों की सूची जारी कर दी गई है। राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री प्रदेशवासियों को संबोधित करेंगे तथा राज्य की विकास यात्रा और भावी योजनाओं को साझा करेंगे।


         सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी सूची के अनुसार प्रमुख जिला मुख्यालयों में मुख्य अतिथि के रूप में राजनांदगांव जिला मुख्यालय में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे और जनता को संबोधित करेंगे। बिलासपुर जिला मुख्यालय में केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, दुर्ग जिला मुख्यालय में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, बस्तर जिला मुख्यालय में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे और जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।

        सरगुजा जिला मुख्यालय में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, महासमुंद जिला मुख्यालय में खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कबीरधाम जिला मुख्यालय में उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, 
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के जिला मुख्यालय में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे और जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। इसी प्रकार रायगढ़ जिला मुख्यालय में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, कांकेर जिला मुख्यालय में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सूरजपुर जिला मुख्यालय में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, जांजगीर-चांपा जिला के जिला मुख्यालय में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, जशपुर जिला मुख्यालय मेंपर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, बालोद जिला मुख्यालय में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे और जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।

        बलौदाबाजार-भाटापारा जिला के जिला मुख्यालय में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा जिला मुख्यालय में सांसद श्री विजय बघेल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला के जिला मुख्यालय में सांसद श्री संतोष पांडेय, कोंडागांव जिला मुख्यालय में सांसद श्री भोजराज नाग, बलरामपुर जिला मुख्यालय में सांसद श्री चिंतामणि महाराज, सारंगढ़-बिलाईगढ़  जिला के जिला मुख्यालय में  सांसद श्री राधेश्याम राठिया स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे और जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। गरियाबंद जिला मुख्यालय में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सक्ती जिला मुख्यालय में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, बीजापुर जिला मुख्यालय में सांसद श्री महेश कश्यप, सुकमा जिला मुख्यालय में राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, मोहला-मानपुर- अम्बागढ़ चौकी जिला के जिला मुख्यालय में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे और जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।

      कोरबा जिला मुख्यालय में विधायक श्री अमर अग्रवाल, धमतरीजिला मुख्यालय में विधायक श्री अजय चंद्राकर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला के जिला मुख्यालय में विधायक श्री धरमजीत सिंह, मुंगेली जिला मुख्यालय में विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले, कोरिया जिला मुख्यालय में विधायक श्री भैया लाल राजवाड़े, नारायणपुर जिला मुख्यालय में विधायक सुश्री लता उसेंडी, स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में ध्वजारोहण के बाद जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे।
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विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखना हम सभी का दायित्व : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि वर्तमान को दिशा देने और भविष्य को सुरक्षित बनाने की सीख भी है। इसलिए विभाजन की विभीषिका और उससे मिले सबक को पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्मरण रखना आवश्यक है। विभाजन की पीड़ा हमें देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को हर परिस्थिति में अक्षुण्ण रखने का संदेश देती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के संचालनालय पुरातत्व स्थित मुक्ताकाशी मंच में आयोजित ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। समारोह में विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया तथा विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष, साहस और धैर्य को नमन किया गया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 1947 में देश का विभाजन केवल भू-भाग और सीमाओं का बंटवारा नहीं था। इस त्रासदी ने लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि, घर-बार और अपनों से बिछड़ने के लिए विवश कर दिया। बंगाली, सिख और सिंधी समाज सहित अनेक समुदायों के लाखों परिवारों ने विस्थापन की असहनीय पीड़ा झेली। जिन्होंने अपनी आंखों से उस दौर की भयावहता देखी, उनमें से अधिकांश आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके परिवारों और आने वाली पीढ़ियों की स्मृतियों में वह पीड़ा आज भी जीवित है।

उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण विस्थापित हुए लोगों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अपना सब कुछ पीछे छोड़कर उन्होंने नए स्थानों पर लगभग शून्य से जीवन की शुरुआत की। अपने अथक परिश्रम, पुरुषार्थ और जीवटता से उन्होंने स्वयं को पुनः स्थापित किया और देश तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष और साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों के बलिदान और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को उचित सम्मान देने तथा नई पीढ़ी को इतिहास के इस अध्याय से परिचित कराने के उद्देश्य से 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यह दिवस केवल अतीत की पीड़ा को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि उस त्रासदी से सीख लेकर राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करने का भी अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह जानना आवश्यक है कि देश की स्वतंत्रता के साथ विभाजन के समय लाखों देशवासियों को कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी से गुजरना पड़ा था। इतिहास का स्मरण इसलिए भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो और समाज में एकता, सद्भाव तथा भाईचारे की भावना और मजबूत हो।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का यह संकल्प एकजुट और सशक्त समाज की नींव पर ही साकार होगा। छत्तीसगढ़ भी विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका झेलने वाले परिवारों और उनकी पीढ़ियों के साथ राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह के मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए भारतीय इतिहास, संस्कृति और साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. द्विवेदी ने प्रसिद्ध साहित्यकार अमृता प्रीतम के उपन्यास पर आधारित अपनी फिल्म ‘पिंजर’ के माध्यम से विभाजन की त्रासदी और मानवीय पीड़ा को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है।

समारोह में विभाजन का दंश झेलने वाले विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों और उनके परिवारजनों ने अपने अनुभव एवं स्मृतियां साझा कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से उस त्रासदी को झेलने वाले अनेक लोग आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी पीढ़ियां उनकी स्मृतियों और संघर्ष की विरासत को संजोए हुए हैं। इन अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना इतिहास के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।

संगठित रहेंगे तो राष्ट्र भी संगठित रहेगा : डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी

समारोह के मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि यदि समाज संगठित रहेगा तो राष्ट्र भी संगठित रहेगा। राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने आह्वान किया कि 14 अगस्त के इस अवसर पर हम सभी यह संकल्प दोहराएं कि भारत की एकता और अखंडता पर कभी आंच नहीं आने देंगे।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि विभाजन के कारण विस्थापित हुए लाखों लोगों के संघर्ष और त्याग को इतिहास में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे अधिकारी थे। उन्होंने अपने घर, संपत्ति और अपनों को खोया, फिर भी कठिन परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन खड़ा किया और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया। उनके संघर्ष और पुरुषार्थ को भी देश की स्मृतियों में उचित स्थान मिलना चाहिए।

डॉ. द्विवेदी ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारण का दायित्व सिरिल रेडक्लिफ को सौंपा गया था, जो जुलाई 1947 में भारत आए थे। उन्हें बहुत कम समय में सीमा निर्धारण का अत्यंत जटिल कार्य पूरा करना था, जबकि भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना से उनका परिचय सीमित था। उन्होंने कहा कि विभाजन से उपजी पीड़ा और उसके परिणामों को समझना आज भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि इतिहास से मिली सीख ही भविष्य के लिए हमें सचेत करती है।

उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली शक्तियों के प्रति हमें सदैव सजग रहना होगा। राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री श्री साय मौन जुलूस में हुए शामिल

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय संचालनालय पुरातत्व से अंबेडकर चौक तक आयोजित मौन जुलूस में भी शामिल हुए। मौन जुलूस के माध्यम से विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा विस्थापन और विभाजन का दंश झेलने वाले लाखों परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने मौन जुलूस में शामिल होकर विभाजन की विभीषिका का स्मरण किया।

इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा एवं श्री मोतीलाल साहू, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, संत युधिष्ठिर लाल जी, स्वामी शिवस्वरूपानंद जी, राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज कुमार झा, श्री यशवंत जैन, डॉ. नवीन मार्कण्डेय सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी उपस्थित थे।
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मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक संपन्न

 मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की 102वीं एवं 103वीं संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मार्च 2026 और जून 2026 की तिमाहियों के दौरान राज्य में बैंकिंग सेवाओं, ऋण वितरण, वित्तीय समावेशन तथा केंद्र व राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों को ग्रामीण तथा दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार और सरकारी हितग्राही योजनाओं में वित्तीय सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।



जनकल्याणकारी योजनाओं को दें प्राथमिकता

        मुख्य सचिव ने पीएम सूर्यघर योजना, पीएम स्वनिधि योजना, पीएम आवास योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत प्राप्त ऋण आवेदनों का बिना किसी बाधा के त्वरित निपटारा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बैंकर्स से कहा कि ऋण प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा की जाए।

किसानों को त्वरित केसीसी लोन

     किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से शीघ्रता से लोन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही पशुपालन और मत्स्य पालन क्षेत्रों के लिए भी केसीसी वितरण की समीक्षा की गई। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना किसानों को खेती, पशुपालन और मछली पालन के लिए बेहद कम ब्याज (मात्र 4%) पर आसान लोन देती है। बिना किसी गारंटी के मिलने वाले इस लोन की सीमा को बढ़ाकर अब 2 लाख कर दिया गया है, जबकि कुल ऋण सीमा को 5 लाख तक किया गया है। 

बस्तर और सरगुजा संभाग पर विशेष ध्यान

      राज्य के बस्तर और सरगुजा संभागों में बैंकिंग सेवाओं की सीमित पहुंच को देखते हुए, वहां नई बैंक शाखाएं खोलने और स्थानीय स्तर पर ऋण उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। वित्तीय सेवा विभाग के मानकों के अनुसार, बिना बैंकिंग सुविधा वाले गांवों में 5 किलोमीटर के दायरे के भीतर बैंकिंग सेवाएं (शाखाएं या बीसी एजेंट) उपलब्ध कराने पर बल दिया गया।

वार्षिक ऋण योजना एवं सामाजिक सुरक्षा

        वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वार्षिक ऋण योजना के तहत बैंकों के प्रदर्शन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETI) की गतिविधियों, जिला परामर्शदात्री समिति की बैठकों और वित्तीय साक्षरता सलाहकारों की नियुक्ति से जुड़े विषयों की समीक्षा की गई।

        इस बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नाबार्ड (NABARD) के प्रतिनिधियों सहित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के सदस्य बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी एवं राज्य शासन के विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।
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आजादी के बाद भी लोकतंत्र और तिरंगे के सम्मान की रक्षा के लिए देश ने बड़ी कुर्बानियां देने वालों को समर्पित यह तिरंगा यात्रा - उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

 बस्तर तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने एर्राबोर पहुंचकर नक्सल हिंसा में शहीद हुए 33 जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर पुनर्वासित महिलाओं ने उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं सांसद श्री महेश कश्यप को राखी बांधकर रक्षा सूत्र के माध्यम से अपने विश्वास और नए बस्तर की उम्मीदों से जोड़ा। सुकमा की दीदीयों द्वारा तैयार की गई राखी को तिरंगे में लगाकर उप मुख्यमंत्री एवं सांसद को भेंट किया गया। महिलाओं ने पुलिस जवानों को भी राखियां भेंट कीं।


       इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि आज कट्टम ज्योति जीत गई और नक्सली हार गए। उन्होंने कहा कि एक वर्ष की मासूम कट्टम ज्योति की नक्सलियों ने नृशंस हत्या कर दी थी। आज उसी बस्तर की धरती पर नक्सलवाद के सफाए का संकल्प साकार हो रहा है। एर्राबोर की घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने पूरी बस्ती को आग के हवाले कर निर्दोष लोगों की नृशंस हत्या की थी। वे कहते थे कि वे लोगों की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन बंदूक का डर दिखाकर और निर्दोष लोगों की हत्या करके रक्षा करने का यह ढोंग अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

          उप मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के लिए जिया जाए तो बहुत कुछ किया जा सकता है, लेकिन बंदूक उठाकर लोगों को मारना, भारत के संविधान को नकारना और लोगों को हथियार के बल पर डराना लोकतंत्र नहीं है। उन्होंने कहा कि बस्तर के समाज, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और युवाओं ने लोकतंत्र की असली ताकत दिखाते हुए नक्सलवाद को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब बस्तर के विकास की दिशा बस्तर के लोग स्वयं तय करेंगे।

         श्री शर्मा कहा कि बस्तर के विकास के लिए किसी बाहरी संसाधन पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। बस्तर स्वयं इतना समृद्ध है कि अपनी लघु वनोपज, प्राकृतिक सौंदर्य और प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर अपनी विकास यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। बस्तर की बहनों द्वारा बांधी गई राखी को विश्वास का रक्षा सूत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि इस विश्वास और जिम्मेदारी के नाते वे पूर्ण भरोसा दिलाते हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार बस्तर के विकास में सदैव पूरी ताकत से सहयोग करेगी।

रक्तरंजित इतिहास की धरती से तिरंगे का संदेश
         उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यात्रा जिन स्थानों से होकर गुजर रही है, वे नक्सली हिंसा के बड़े और रक्तरंजित संघर्ष के गवाह रहे हैं। श्यामगिरी में भाजपा विधायक श्री भीमा मंडावी की बम विस्फोट में हत्या की गई। दोरनापाल में 33 ग्रामीणों के घर जलाकर उनकी हत्या की गई। मनिकोंटा में 16, बुर्कापाल में 29 और ताड़मेटला में 76 जवानों की शहादत इस बात की गवाह है कि आजादी के बाद भी लोकतंत्र और तिरंगे के सम्मान की रक्षा के लिए देश ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने कहा कि यह तिरंगा यात्रा उन सभी शहादतों को सम्मान देने की यात्रा है। शहीद जवानों की कुर्बानी और आज के जवानों की भुजाओं की ताकत से ही बस्तर में लोकतंत्र फिर मुस्कुरा रहा है और तिरंगा घर-घर में लहरा रहा है।

शहीद स्थलों पर पौधारोपण, पवित्र मिट्टी का संग्रहण
        बस्तर तिरंगा यात्रा के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने भुसारास, एर्राबोर, पोलमपल्ली, ताड़मेटला, मनिकोंटा, बुर्कापाल, दोरनापाल, चिंतागुफा, श्यामगिरी और चिंतलनार में शहीदों की स्मृति में पौधारोपण किया। उन्होंने इन शहीद स्थलों की पवित्र मिट्टी को भी संग्रहित किया। यात्रा के दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों, शहीद परिवारों, पुनर्वासित लोगों और पुलिस जवानों से आत्मीय मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने एर्राबोर स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण कर, पांच वयोवृद्ध महिलाओं को मिला मोतियाबिंद मुक्त होने का प्रमाण पत्र
          उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने एर्राबोर स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने पांच वयोवृद्ध महिलाओं को मोतियाबिंद मुक्त होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया। सीएमएचओ ने बताया कि नक्सल मुक्त होने के बाद सुकमा जिले को मोतियाबिंद मुक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस सत्र में अब तक 182 मोतियाबिंद ऑपरेशन किए जा चुके हैं।

         कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा मैं इसी बस्तर की माटी में पैदा हुआ मेरा परिवार सालों से इसी माटी के विकास के लिए जिया। मैंने स्वयं नक्सलवाद का दंश झेला हूँ। मेरे भाई की हत्या नक्सलियों ने की थी। आज जब मैं एक एक शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए जा रहा हूँ, उनके नाम से वृक्षारोपण कर रहा हूँ, उनके परिजनों से मिल रहा हूँ तो ऐसा लग रहा है मैं अपने परिवार के दुख बाँट रहा हु। बस्तर में नक्सलवाद का खात्मा मेरी निजी खुशी का भी विषय है। केदार कश्यप ने कहा बस्तर के विकास के लिए कार्य करना ऐसा ही है जैसे अपने परिवार का कार्य करना। कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आज जब हम तिरंगा यात्रा में घर-घर में तिरंगा लगा रहे हैं तो बस्तर के लोग स्वयं कह रहे हैं कि अब हम पूर्ण स्वतंत्रता की सांस ले रहे है।

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ विकसित होगा बस्तर

          उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने लोगों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर घर में तिरंगा लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आने वाले समय में बस्तर में भी व्यापक बदलाव दिखाई देगा और बस्तर देश का सबसे विकसित जनजातीय संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में विकास बस्तर के लोगों की आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और सहभागिता के अनुरूप होगा। उन्होंने सभी कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से बस्तर के विकास के लिए दोगुनी गति से कार्य करने का आह्वान किया।

2100 से अधिक निर्दोष लोगों की हुई हत्या : सांसद महेश कश्यप
        सांसद श्री महेश कश्यप ने कहा कि तिरंगे का संदेश लेकर सुकमा में लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा करना अपने आप में ऐतिहासिक अवसर है। आजादी के 79 वर्ष बाद पहली बार इन क्षेत्रों में तिरंगा पूरे सम्मान और शान के साथ लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि तिरंगे का केसरिया रंग बलिदान और सफेद रंग शांति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लगभग 45 वर्ष पहले कुछ लोग बंदूक के दम पर शांत बस्तर की वादियों को रक्तरंजित करने आए। नक्सली हिंसा में 2100 से अधिक निर्दोष लोगों की जान गई। यह धरती वीर गेंद सिंह और झाड़ा सिरहा जैसे महान योद्धाओं की भूमि है, जिन्होंने अपने बलिदान से इस धरती को सींचा है।

        सांसद श्री कश्यप ने कहा कि नक्सली वर्षों तक जल, जंगल और जमीन के नाम पर लोगों को बरगलाते रहे। जो लोग स्वयं बंदूक के बल पर लोगों को डराते और उनका शोषण करते रहे, वे जनता को अधिकार देने का दावा नहीं कर सकते। शासन के संकल्प, सुरक्षा बलों की वीरता और बस्तरवासियों के सहयोग से अब नक्सलवाद का अंत हुआ है। उन्होंने भी हर घर में तिरंगा लगाने की अपील की।
   बस्तर तिरंगा यात्रा के माध्यम से शहीदों को नमन, नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक विजय और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के साथ बस्तर के उज्ज्वल, शांतिपूर्ण और विकसित भविष्य का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।
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किसानों की समृद्धि से ही समृद्ध होगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज हरेली तिहार के पावन अवसर पर नवा रायपुर में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के नवीन शासकीय आवास में आयोजित गृह प्रवेश समारोह एवं हरेली उत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने श्री वर्मा एवं उनके परिजनों को नवीन आवास में गृह प्रवेश की बधाई देते हुए उनके सुखी, समृद्ध और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को भी छत्तीसगढ़ के प्रथम लोक पर्व हरेली की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे।

 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली जैसे शुभ अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा का नवीन शासकीय आवास में गृह प्रवेश इस अवसर को और भी विशेष बनाता है। हरेली हमारी कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन से गहराई से जुड़ा पर्व है। किसान इस दिन कृषि औजारों और गौवंश की पूजा कर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं तथा अच्छी वर्षा, भरपूर फसल और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। यह पर्व छत्तीसगढ़ की उस समृद्ध परंपरा का प्रतीक है, जिसमें प्रकृति, खेती और लोकजीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

किसान छत्तीसगढ़ की प्रगति की धुरी : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का मजबूत आधार खेती-किसानी है। किसान प्रदेश की प्रगति की धुरी हैं और उनकी समृद्धि में ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि निहित है। राज्य सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के विस्तार के लिए निरंतर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश में किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान की खरीदी की जा रही है। इससे किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई की सुविधा मिले, जिससे किसान वर्षा पर निर्भरता कम कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल परंपरागत खेती तक सीमित रहने के बजाय उन्हें कृषि से जुड़ी सहायक और आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

उन्होंने कहा कि किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा तो गांव मजबूत होगा और गांव मजबूत होंगे तो विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की गति और तेज होगी। सरकार की नीतियों के केंद्र में अन्नदाता का हित है और खेती-किसानी को अधिक समृद्ध तथा लाभकारी बनाने के लिए योजनाबद्ध रूप से कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।

हरेली से शुरू होता है छत्तीसगढ़ के पर्वों का सिलसिला : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कृषि परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। हरेली के साथ ही प्रदेश में तीज-त्योहारों का उल्लासपूर्ण सिलसिला प्रारंभ हो जाता है। आज पूरा छत्तीसगढ़ हरेली के रंग में रंगा हुआ है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि इस वर्ष अच्छी बारिश से किसानों में उत्साह है और बेहतर फसल की उम्मीद जगी है। उन्होंने ईश्वर से कामना की कि प्रदेश के खेत-खलिहान अच्छी फसल से लहलहाएं, किसानों के घरों में खुशहाली आए और छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति करे। उन्होंने राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा एवं उनके परिजनों को नवीन शासकीय आवास में गृह प्रवेश के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

राम भजन की प्रस्तुति ने बनाया भक्तिमय वातावरण

हरेली तिहार और गृह प्रवेश के उल्लास के बीच राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने राम भजन की सुंदर प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने समारोह में भक्तिमय वातावरण निर्मित कर दिया। उपस्थित अतिथियों और नागरिकों ने भजन का आनंद लिया।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री मोतीलाल साहू एवं श्री इंद्रकुमार साहू, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के परिजन उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कृषि औजारों और गौवंश की पूजा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और भरपूर फसल की कामना की

 छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सोंधी महक, खेत-खलिहानों की परंपराएं, लोकगीतों की स्वर लहरियां, मांदर की थाप, गेड़ी का उल्लास और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू - प्रदेश के प्रथम लोक पर्व हरेली तिहार पर आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी में बदल गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विधि-विधान से भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, किसानों की समृद्धि और सभी परिवारों की सुख-खुशहाली की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, किसान और बड़ी संख्या में नागरिक इस उत्सव के साक्षी बने।

 
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर किसान भाई-बहनों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। यह पर्व हमें अपनी धरती, पशुधन, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी से जुड़ी है। किसान की समृद्धि ही गांव और प्रदेश की खुशहाली का मजबूत आधार है।

पारंपरिक वेशभूषा में पिंक ऑटो से पहुंचे मुख्यमंत्री

हरेली के उत्सव में मुख्यमंत्री श्री साय पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंगे नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा धारण कर वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक श्रीमती संगीता यादव के पिंक ऑटो में मुख्यमंत्री निवास परिसर से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इस अनूठे अंदाज ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उत्सव के माहौल में आत्मीयता का रंग घोल दिया।
 

कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन के साथ हुई। मुख्यमंत्री ने मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का अभिषेक किया और नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नमन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली के समय तक खेती के अनेक प्रमुख कार्य पूरे हो चुके होते हैं और किसान प्रकृति एवं अपने कृषि साधनों की पूजा कर अच्छे कृषि वर्ष की कामना करते हैं। यह परंपरा हमारे पुरखों की प्रकृति के प्रति गहरी समझ और सम्मान को दर्शाती है।

गौमाता को खिलाई पारंपरिक लोंदी, पशुधन संरक्षण का दिया संदेश
 

मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में निर्मित गौशाला पहुंचकर गौमाता की आरती और पूजा-अर्चना की। उन्होंने गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ तथा पारंपरिक ‘लोंदी’ खिलाई। हरेली पर पशुधन को लोंदी खिलाने की लोक परंपरा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से बचाव की कामना से जुड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में पशुधन परिवार और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। हमारी लोक संस्कृति हमें पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण की सीख देती है। आधुनिकता के साथ अपनी ऐसी उपयोगी और प्रकृति-सम्मत परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

किसानों की समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरू हुए किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को खेती के लिए सहज रूप से पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता खोला। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने सहकारी कृषि ऋण की ब्याज दरों को चरणबद्ध ढंग से कम करते हुए अंततः शून्य प्रतिशत तक पहुंचाया। आज किसानों को सहकारी बैंकों से शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध हो रहा है।

उन्होंने कहा कि फसल बीमा को सरल बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी निरंतर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीद रही है। इससे प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है।

पारिजात का पौधा लगाकर दिया हरियाली बढ़ाने का संदेश

हरेली के प्रकृति संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में पारिजात का पौधा लगाया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी पारिजात का पौधा रोपा। मंत्रीगण तथा विभिन्न निगम-मंडल और आयोगों के पदाधिकारियों ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली हमें प्रकृति से केवल लेने की नहीं, उसे सहेजने और लौटाने की भी सीख देती है। पौधरोपण के साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अधिक से अधिक पौधे लगाकर और उन्हें वृक्ष बनने तक सहेजकर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और सुरक्षित भविष्य तैयार किया जा सकता है।

आधुनिक कृषि तकनीक से रू-ब-रू हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में लगाए गए कृषि एवं अन्य विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया। कृषि अभियांत्रिकी विभाग के स्टॉल पर उन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रों की उपयोगिता और विशेषताओं की जानकारी ली। 

मुख्यमंत्री ने रायपुर के किसान श्री इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर पर मिलने वाली सब्सिडी के रूप में 16 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण से किसानों की लागत और श्रम कम करने के साथ उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

ड्रोन दीदी चंद्रकली की सफलता को मुख्यमंत्री ने सराहा

कृषि विभाग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदी श्रीमती चंद्रकली वर्मा से आत्मीय संवाद किया। श्रीमती वर्मा ने बताया कि वे ड्रोन के माध्यम से खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव करती हैं तथा प्रति एकड़ 300 रुपए पारिश्रमिक प्राप्त करती हैं। वे अब तक ढाई हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं और पिछले दो वर्षों में लगभग 7 लाख रुपए की आय अर्जित की है।

मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कृषि में तकनीक का उपयोग महिलाओं के लिए भी आय और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा कर रहा है। ड्रोन दीदियां आधुनिक कृषि और महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरक कड़ी बन रही हैं।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने किसानों को अरहर और उड़द दाल के मिनी किट वितरित किए। उन्होंने कृषि मित्रों द्वारा तैयार ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और मधुमक्खी के मोम से बने लिप बाम जैसे उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उद्यानिकी विभाग के स्टॉल पर किसान श्री रामविशाल निषाद ने मुख्यमंत्री को नीम का पौधा भेंट किया।

गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी ने ताजा की गांव की यादें

मुख्यमंत्री निवास को हरेली के अनुरूप नीम और आम के पत्तों, गेंदे के फूलों और पारंपरिक ग्रामीण अलंकरण से सजाया गया था। परिसर में कदम रखते ही छत्तीसगढ़ के गांवों और मेलों जैसा वातावरण महसूस हो रहा था। हरियाली और लोक सज्जा के बीच गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी जैसे पारंपरिक खेल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

गेड़ी पर चढ़े कलाकारों और प्रतिभागियों ने हरेली की पहचान को जीवंत किया, वहीं ग्रामीण खेलों ने बच्चों और युवाओं को अपनी परंपरागत खेल संस्कृति से परिचित कराया। रहचुली ने भी लोगों को खूब आकर्षित किया और पूरे आयोजन में गांव के मेले जैसा आनंद घोल दिया।

लोकधुनों पर कलाकारों के साथ झूमे मुख्यमंत्री श्री साय

मांदर, ढोलक और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीत और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। हरेली के उल्लास में मुख्यमंत्री श्री साय भी कलाकारों के बीच पहुंचे और उनके साथ पारंपरिक लोकधुनों पर झूमे। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कलाकारों का उत्साह दोगुना हो गया।

ठेठरी, खुरमी, बड़ा सहित विभिन्न छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉलों ने आयोजन में पारंपरिक खानपान का रंग भरा। मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का अवलोकन करते हुए नागरिकों और कलाकारों से संवाद किया तथा हरेली की खुशियां साझा कीं।

किसान की खुशहाली से ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा महत्वपूर्ण लोक पर्व है। कृषि औजारों, गौमाता और प्रकृति की पूजा हमारी कृतज्ञता की संस्कृति को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है। किसानों को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य मिल रहा है और महतारी वंदन योजना से माताओं-बहनों को आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है। किसान का घर खुशहाल और गांव मजबूत होगा, तभी छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग और प्रशस्त होगा।

किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश समृद्ध होंगे : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी, हरियाली और प्रकृति के प्रति आस्था का महापर्व है। हमारी संस्कृति प्रकृति के संरक्षण, पशुधन के सम्मान और अन्नदाता के श्रम के प्रति आदर का संदेश देती है। हरेली अपनी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और खेती को अधिक समृद्ध बनाने का संकल्प लेने का अवसर है। किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश दोनों समृद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक अस्मिता और हमारी जड़ों का उत्सव है। आधुनिक विकास की तेज यात्रा के बीच अपनी संस्कृति, परंपरागत ज्ञान, ग्रामीण खेल, लोककला और खानपान को सहेजकर रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बाबा भोलेनाथ, गौमाता और प्रकृति से प्रदेश पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के खेत लहलहाएं, किसानों के घर खुशहाली आए और प्रदेश निरंतर समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, कौशल विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायकगण, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 67.20 लाख माताओं और बहनों के खातों में डीबीटी के माध्यम से अंतरित किए 630.55 करोड़ रुपये

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 67 लाख 20 हजार 125 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 630 करोड़ 55 लाख 54 हजार 300 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार तथा संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव उपस्थित थीं।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की उन प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जब माताएं और बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तब परिवार मजबूत होता है, बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है और समाज विकास की नई दिशा में आगे बढ़ता है। इसलिए मातृशक्ति का सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह योजना केवल प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। प्रदेश के लाखों परिवारों में यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उपयोग हो रही है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भूमिका और अधिक सशक्त हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग करते हुए अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर रही हैं। कई माताएं अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में नियमित निवेश कर रही हैं। वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, डेयरी, किराना दुकान, सब्जी विक्रय, पशुपालन, अगरबत्ती निर्माण तथा अन्य छोटे स्वरोजगार शुरू कर अपनी आय बढ़ाई है। इससे वे न केवल परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी प्रस्तुत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। महतारी वंदन योजना इसी सोच का परिणाम है, जिसमें हर महीने बिना एक हजार रुपए की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। डीबीटी व्यवस्था ने पारदर्शिता बढ़ाई है और महिलाओं में शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वरोजगार, कौशल विकास तथा वित्तीय समावेशन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगातार कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना इन सभी प्रयासों का महत्वपूर्ण आधार बनकर महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान प्रदान कर रही है।

1 मार्च 2024 से पूरे प्रदेश में लागू है योजना : 30 किस्तों में 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। आज जारी की गई 30वीं किस्त के बाद योजना के अंतर्गत वितरित कुल राशि बढ़कर 19 हजार 444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक हो गई है।महतारी वंदन योजना का प्रभाव अब प्रदेश के लाखों परिवारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है, घरेलू निर्णयों में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है तथा बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा है। अनेक परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों तथा छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करना प्रारंभ किया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण ही समावेशी विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है। महतारी वंदन योजना इसी सोच को साकार करते हुए मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान कर रही है तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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कोसा की चमक अब वैश्विक बाजार तक : मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया छत्तीसगढ़ का प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड 'कोशल फैब'

  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के विभिन्न हितग्राहियों तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड 'कोशल फैब' का शुभारंभ करते हुए उसके लोगो एवं कैटलॉग का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर बुनकरों एवं शिल्पकारों को, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि 7 अगस्त 1905 को प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में इस दिवस को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई तथा प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उत्पाद देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को 'लोकल टू ग्लोबल' की नई पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक डिज़ाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, विपणन तथा नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि उनकी सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत किए गए अधिकांश वादों को राज्य सरकार ने पूरा किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों गरीब परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। किसानों को धान खरीदी की अंतर राशि का भुगतान, भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चरण पादुका योजना का पुनः संचालन सरकार की जनकल्याणकारी सोच का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचार-मुक्त शासन व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है। ई-ऑफिस व्यवस्था, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और घर बैठे शासकीय सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना तथा आत्मनिर्भर और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।

बुनकरों के लिए सुशासन सरकार की बड़ी पहल

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार बुनकरों एवं शिल्पकारों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 469 आवासविहीन बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में आयोजित 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई, जिससे बुनकरों को बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसे ध्यान में रखते हुए पिछले ढाई वर्षों में 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा पाँच विक्रय भंडारों तथा केंद्रीय वस्त्रागार के माध्यम से विभिन्न शासकीय विभागों को 93 करोड़ रुपये के वस्त्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की शासकीय खरीदी कर उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में देश के पाँच प्रमुख हवाई अड्डों पर छत्तीसगढ़ के हैंडलूम एवं हस्तशिल्प उत्पादों के शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। वहीं, रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल स्थानीय उत्पादों को आधुनिक विपणन मंच उपलब्ध कराएगा।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है, जिससे 4,500 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) की स्थापना से प्रदेश के युवाओं को डिजाइन एवं टेक्सटाइल क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे और छत्तीसगढ़ का हैंडलूम उद्योग नई ऊँचाइयों तक पहुँचेगा।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया बुनकरों का उत्साहवर्धन

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश में लगभग 1 लाख 20 हजार परिवार हथकरघा एवं इससे संबंधित गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत किए जाने से इस क्षेत्र को नई पहचान और नई ऊर्जा मिली है।

उन्होंने सभी नागरिकों से प्रत्येक वर्ष कम से कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने का आग्रह करते हुए कहा कि बुनकरों की मेहनत, उनकी कला और हमारी समृद्ध परंपरा को जीवित रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

ग्रामोद्योग मंत्री ने स्वदेशी आंदोलन की विरासत को किया याद

ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि 7 अगस्त 1905 को प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन ने देश में आत्मनिर्भरता की अलख जगाई थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी का देशभर में विशिष्ट स्थान है और राज्य सरकार हथकरघा, हस्तशिल्प तथा ग्रामोद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बुनकरों, शिल्पकारों और स्थानीय उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध कराने तथा उनके उत्पादों को व्यापक बाजार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।


मुख्यमंत्री ने स्वदेशी प्रदर्शनी एवं स्टॉलों का अवलोकन किया, खरीदी कोसा साड़ी

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वदेशी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ, बिलासा हैंडलूम, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, सबरी एम्पोरियम तथा माटीकला बोर्ड सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कोसा, खादी, हस्तशिल्प, मृद्शिल्प एवं अन्य पारंपरिक उत्पादों का अवलोकन करते हुए कारीगरों से संवाद किया तथा उत्पादों की गुणवत्ता, विपणन और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों को अधिकाधिक अपनाने और प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। प्रदर्शनी के दौरान उन्होंने हथकरघा स्टॉल से स्वयं तत्काल भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद ही बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम एवं कौशल का सबसे बड़ा सम्मान है। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय कदम से कार्यक्रम में उपस्थित बुनकरों और महिला कारीगरों का उत्साह दोगुना हो गया।

आत्मसमर्पित महिलाओं का रैंप वॉक बना आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का सबसे प्रेरक और भावनात्मक क्षण वह रहा, जब बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने स्वदेशी फैशन शो में आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क एवं अन्य हैंडलूम परिधानों का आकर्षक प्रदर्शन किया। यह प्रस्तुति मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ती महिलाओं के आत्मविश्वास, सम्मानजनक पुनर्वास और बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर की सशक्त अभिव्यक्ति थी। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पित महिलाओं से आत्मीय संवाद किया, उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। उल्लेखनीय है कि इनमें से लगभग सभी महिलाएँ पहली बार रायपुर पहुँची थीं। यह अनुभव उनके जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों का हिस्सा बन गया।

मुख्यमंत्री ने 'कोशल फैब' प्रीमियम ब्रांड का शुभारंभ किया

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड 'कोशल फैब' का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ब्रांड के लोगो एवं कैटलॉग का विमोचन भी किया। 'लूम टू लग्जरी' की अवधारणा पर आधारित यह प्रीमियम ब्रांड छत्तीसगढ़ के कोसा एवं पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने तथा उन्हें वैश्विक स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर एवं अन्य नवाचारों का शुभारंभ

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ द्वारा एनआईटी के सहयोग से विकसित इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का शुभारंभ किया गया। इस डिजिटल पहल से उत्पादों के भंडारण, प्रबंधन, विपणन तथा वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

इस अवसर पर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत बुनकरों की डायरेक्टरी तथा टाई-डाई एवं बाँधनी रंगाई विषयक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। साथ ही जशपुर जिले के गोरिया में स्थापित होने वाली ग्लेजिंग यूनिट का शुभारंभ भी किया गया। 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्रामोद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की। उन्होंने कक्षा 10वीं एवं 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 935 छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। साथ ही 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि देकर उनके उत्कृष्ट योगदान का सम्मान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा संचालनालय के माध्यम से 49 बुनकरों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण हेतु 1.22 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त पाँच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई तथा 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए। साइटसेवर्स इंडिया के सहयोग से नेत्र परीक्षण कराने वाले बुनकरों को चश्मों का भी वितरण किया गया। रेशम संचालनालय द्वारा सिल्क समग्र योजना के अंतर्गत 21 रेशम कृषकों को सहायता राशि प्रदान की गई। वहीं मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के हितग्राहियों को अनुदान राशि वितरित की गई।

इसी प्रकार हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा 30 शिल्पकारों को आधुनिक टूल किट तथा माटीकला बोर्ड द्वारा 70 पंजीकृत माटी शिल्पियों को विद्युत चाक प्रदान किए गए, जिससे उनके उत्पादन और आजीविका को नई गति मिलेगी।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट बुनकरों को राज्य स्तरीय स्व. बिसाहूदास महंत सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार तथा राजराजेश्वरी करुणामाता हथकरघा प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया।

'सेल्फी विद स्वदेशी' अभियान से जुड़ने की अपील

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा 'सेल्फी विद स्वदेशी' अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद न केवल बुनकरों, शिल्पकारों और कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पाद खरीदकर उसके साथ सोशल मीडिया पर सेल्फी साझा करने वाले प्रत्येक जिले के चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान में सहभागिता कर स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा बुनकर संघ के अध्यक्ष श्री भोजराम देवांगन, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश पांडेय, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, संस्कृत विद्या मंडलम के अध्यक्ष श्री राजेश राजपूत, सचिव श्री राजेश सिंह राणा, श्री चुन्नीलाल साहू सहित जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में बुनकर, शिल्पकार और कारीगर उपस्थित थे।
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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद नांदघाट-मुंगेली रोड होगा फोरलेन, राज्य शासन ने मंजूर किए 21.81 करोड़ राशि की स्वीकृति पत्र जारी

 राज्य शासन ने बेमेतरा जिले के नांदघाट से मुंगेली जिला मुख्यालय तक टू-लेन सड़क के फोरलेन में उन्नयन के लिए 21 करोड़ 81 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 36.40 किमी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।


उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है।

कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी। निर्माण कार्य की समयावधि में वृद्धि (Time Extension) नियमानुसार अर्थदंड सहित अधिरोपित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में वन अधिकार अधिनियम (FRA) एवं पेसा कानून (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक संपन्न

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज महानदी मंत्रालय भवन में वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act-FRA) एवं पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित टास्क फोर्स की शीर्ष समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के बेहतर समन्वय, जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन तथा अनुसूचित क्षेत्रों के समग्र एवं सतत विकास के लिए आवश्यक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेसा कानून का क्रियान्वयन ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी है। ऐसे में उनकी परंपराओं, अधिकारों और विकास को ध्यान में रखते हुए पेसा कानून का प्रभावी और आदर्श मॉडल विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों के हितों की रक्षा करता है। इससे स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूती, रोजगार के अवसरों के विस्तार तथा संतुलित एवं सतत विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिससे विकास और जनभागीदारी साथ-साथ आगे बढ़ें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पेसा कानून (PESA), दोनों कानूनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ही अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों कानूनों के प्रावधानों को एकीकृत दृष्टिकोण से लागू करते हुए योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पेसा कानून का उद्देश्य  ग्राम स्वशासन को मजबूत करना, स्थानीय संसाधनों पर समुदाय की सहभागिता बढ़ाना तथा समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों तक सही जानकारी पहुँचाई जाए तथा किसी भी प्रकार के भ्रम का तथ्यात्मक निराकरण किया जाए।

बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022 के तहत पेसा प्रावधानों के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत प्राप्त, निराकृत एवं लंबित व्यक्तिगत तथा सामुदायिक दावों की स्थिति, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (Community Forest Resource Rights-CFRR) की मान्यता, संरक्षण एवं प्रबंधन की प्रगति तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित किए जाने की प्रक्रिया की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति करेगी समन्वय का कार्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पेसा कानून के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा एक ही विषय पर बनाए गए अलग-अलग नियमों एवं प्रक्रियाओं के समन्वय के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति का गठन किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों के नियमों का समन्वय एवं अभिसरण सुनिश्चित करेगी। इस समिति में संबंधित विभागों के मंत्री एवं सचिव सदस्य होंगे और यह समिति समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि वर्तमान में जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को सक्रिय किया जाए, ताकि जिला स्तर पर पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं के सशक्तीकरण तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, विधायक श्री नीलकंठ नेताम तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह,  अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन श्री मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग श्री सोनमणि बोरा, सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग श्रीमती शम्मी आबदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF) श्री अरुण पाण्डेय, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती प्रियंका ऋचा महोबिया सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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कर्तव्यनिष्ठ होकर जनसेवा एवं सुशासन के लिए जमीनी स्तर पर करें बेहतर कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को उनके भावी प्रशासनिक दायित्वों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा में चयन होना उपलब्धि अवश्य है, लेकिन वास्तविक सफलता तब है जब अधिकारी अपने पद का उपयोग जनसेवा, सुशासन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए करें।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी शासन और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनके निर्णय, व्यवहार और कार्यशैली से आम नागरिक का शासन के प्रति विश्वास मजबूत होता है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को संवेदनशीलता, पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करते समय जनता की अपेक्षाओं और स्थानीय परिस्थितियों को समझना अत्यंत आवश्यक है। अधिकारी यदि लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समयबद्ध समाधान की दिशा में कार्य करें, तो प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास स्वतः बढ़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा, वन संपदा, उर्वर भूमि और मजबूत ऊर्जा क्षमता उपलब्ध है। इन संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए राज्य को विकसित बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में लंबे समय तक नक्सलवाद बड़ी बाधा रहा, लेकिन सुरक्षा बलों के साहस, केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति तथा जनविश्वास के कारण अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। जिन क्षेत्रों में कभी विकास पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि उन्हें विशेष रूप से दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। ऐसे क्षेत्रों में केवल प्रशासनिक दायित्व निभाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भाव भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को चाहिए कि वे शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें।

मुख्यमंत्री ने सुशासन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की गई है। साथ ही ई-ऑफिस प्रणाली लागू कर शासन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, दक्ष और समयबद्ध बनाया गया है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राजस्व से जुड़े विषय आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़े होते हैं। भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व मामलों में लोगों को समय पर राहत मिलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासनिक अधिकारी की छोटी-सी पहल भी किसी परिवार की बड़ी समस्या का समाधान कर सकती है। इसलिए अधिकारी संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं और प्रत्येक प्रकरण को मानवीय दृष्टि से देखें।

उन्होंने अधिकारियों को व्यवहार में विनम्रता और संयम बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि लोगों की शिकायतों को सुनना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। कई बार केवल धैर्यपूर्वक शिकायत सुन लेने से ही आधी समस्या समाप्त हो जाती है। यदि अधिकारी जनता से संवाद नहीं करेंगे, तो छोटी समस्याएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को जनता के प्रति सहज, सुलभ और उत्तरदायी रहना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण अनुभवों की जानकारी भी ली तथा उन्हें भविष्य में अपने पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास और सुशासन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक श्री टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 2025 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों का इंडक्शन प्रशिक्षण अब पूर्ण हो चुका है। इसके पश्चात सभी प्रशिक्षु अधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में पदस्थ होकर शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 बैच में कुल सात अधिकारी शामिल हैं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक श्री टी.सी. महावर, संयुक्त संचालक श्रीमती मेनका प्रधान तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।
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