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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति को मंजूरी

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिये विषयगत, विभिन्न सेक्टरों, विभिन्न क्षेत्राधिकार वाले तथा व्यापक नीतिगत प्रारूप को चाक-चौबंद बनाने के उपाय किये गये हैं। यह नीति पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की पूरक है। पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का लक्ष्य समेकित अवसंरचना का विकास करना है, वहीं राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तहत लॉजिस्टक्स सेवाओं में कुशलता लाना, कौशल विकास, उच्च शिक्षा में लॉजिस्टिक्स को दुरुस्त करना तथा समुचित प्रौद्योगिकियों को अपनाना शामिल है।

इसकी परिकल्पना में तेज और समावेशी वृद्धि के लिये प्रौद्योगिकी आधारित क्षमता एकीकृत, सस्ते, हर स्थिति में उपयोगी, सतत तथा विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स इको-सिस्टम का विकास करना शामिल है।

इस नीति के तहत लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और इसमें उन लक्ष्यों को हासिल करने की विस्तृत कार्य योजना को शामिल किया है। लक्ष्य इस प्रकार हैं:


(i) वर्ष 2030 तक विश्व मानकों की तुलना मे भारत में लॉजिस्टिक्स की लागत में कटौती करना,

(ii) वर्ष 2030 तक 25 शीर्ष देशों में लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक रैंकिंग में सुधार लाना, और

 
 



(iii) प्रभावी लॉजिस्टिक्स इको-सिस्टम के लिये डाटा आधारित निर्णय समर्थन की संरचना करना।

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति को परामर्श प्रक्रिया के जरिये विकसित किया गया है। इस सम्बन्ध में विभिन्न मंत्रालयों/सरकारी विभागों, उद्योग से जुड़े हितधारकों और अकादमिक जगत के साथ परामर्श के कई दौर हुये तथा विश्व में प्रचलित उत्कृष्ट व्यवहारों पर गौर किया गया।

 
 



नीति की निगरानी करने और हितधारकों के बीच एकीकृत प्रयासों के लिये नीति मौजूदा संस्थागत प्रारूप का उपयोग करेगी, यानी पीएम गतिशक्ति एनएमपी के तहत गठित अधिकारप्राप्त सचिवों के समूह का उपयोग करेगी। प्रक्रियाओं से जुड़े मानदंडों की निगरानी तथा एनपीजी के टीओआर के दायरे में न आने वाले लॉजिस्टिक्स सेक्टर में डिजिटल सुधार के लिये अधिकारप्राप्त सचिवों का समूह “सेवा सुधार समूह” (एसआईजी) का गठन करेगा।

 
 



यह नीति देश में लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके तहत गोदामों के सम्बन्ध में उचित विकास का रास्ता खोलने पर ध्यान दिया जायेगा, जिसमें अधिकतम स्थान की योजना, मानकों को प्रोत्साहन, लॉजिस्टिक्स मूल्य श्रृंखला का डिजिटलीकरण व स्वचालन तथा बेहतर ट्रैकिंग और ट्रेसिंग प्रणाली शामिल है।

विभिन्न हितधारकों और त्वरित समस्या निदान, एक्सिम प्रक्रियाओं को दुरुस्त करना, रोजगार देने योग्य कुशल श्रमशक्ति का समूह (पूल) तैयार करने सहित निर्बाध सहयोग के लिये नीति में प्रावधान किया गया है।

इस नीति में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि विभिन्न पहलों के जमीनी स्तर पर तुरंत क्रियान्वयन के लिये कार्य-एजेंडा तैयार किया जायेगा। दरअसल, इस नीति के लाभों के लिये यह सुनिश्चित किया गया है कि इसकी ज्यादा से ज्यादा पहुंच हो, एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) सहित नीतिगत महत्वपूर्ण पहल की जायें, लॉजिस्टिक्स सेवा प्लेटफॉर्म सुगम हो, गोदामों पर ई-पुस्तिका तैयार की जाये, पीएम गतिशक्ति पर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, ई-गॉट प्लेटफॉर्म पर लॉजिस्टिक्स को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के साथ शुरू किया गया। इस तरह, जमीनी स्तर पर इसकी तैयारी के संकेत मिलते हैं।

इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूरी तरह अवगत करा दिया गया है। चौदह राज्यों ने अपनी-अपनी राज्य लॉजिस्टिक्स नीतियां बना ली हैं, जो राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के अनुरूप हैं। वहीं, 13 राज्यों में इसका मसौदा तैयार हो रहा है। केंद्र और राज्य स्तर पर पीएम गतिशक्ति के तहत संस्थागत प्रारूप पूरी तरह चलने लगा है, जो नीति के क्रियान्वयन की भी निगरानी करेगा। इससे सभी हितधारकों द्वारा नीति को जल्द और कुशलतापूर्वक अपनाना सुनिश्चित हो जायेगा।

यह नीति सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के बीच प्रतिस्पर्धा, कृषि और सम्बन्धित सेक्टरों, द्रुतगामी उपभोक्ता माल और इलेक्ट्रॉनिक्स को समर्थन देती है। इसके बारे में पूर्वानुमान लगाना बहुत आसान होगा, इसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी, आपूर्ति श्रृंखला में बर्बादी तथा बड़ी मात्रा में स्टॉक की जरूरत में कमी आयेगी।

वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ बड़े स्तर पर एकीकरण तथा वैश्विक व्यापार में अधिक साझेदारी के अलावा इस नीति से देश में आर्थिक विकास में तेजी आयेगी। यह इस नीति का एक और परिणाम होगा।

आशा की जाती है कि लॉजिस्टिक्स की कम लागत से वैश्विक मानक प्राप्त होंगे तथा लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक में देश की रैंकिंग में सुधार आयेगा तथा इसकी वैश्विक स्थिति दुरुस्त होगी। नीति में भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बदलने, लॉजिस्टिक्स कुशलता को सुधारने, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने तथा वैश्विक प्रदर्शन को सुधारने की स्पष्ट दिशा नजर आती है।

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भारत और सऊदी अरब ने रुपये-रियाल में व्यापार करने पर की चर्चा

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत और सऊदी अरब ने रुपये और रियाल में व्यापार को संस्थागत रूप देने की व्यवहार्यता पर बातचीत की। इसके साथ ही यूनिफाइंड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) और रूपे कार्ड पेश किए जाने पर चर्चा की गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

वाणिज्य मंत्रालय के बयान के मुताबिक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के 18-19 सितंबर को दो दिवसीय रियाद यात्रा के दौरान यूपीआई और रूपे कार्ड पेश करने के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। वाणिज्य मंत्री गोयल भारत-सऊदी अरब रणनीतिक भागीदारी परिषद की मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल हुए।

इस बैठक में पीयूष गोयल और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री शहजादा अब्दुलअजीज बिन सलमान अल-सऊद ने परिषद के तहत अर्थव्यवस्था और निवेश पर समिति की मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में व्यापार और वाणिज्य का दायरा बढ़ाने, व्यापार बाधाओं को दूर करने, सऊदी अरब में भारतीय औषधि उत्पादों के स्वत: पंजीकरण और विपणन मंजूरी, रुपये-रियाल व्यापार को संस्थागत बनाने की व्यवहार्यता, सऊदी अरब में यूपीआई और रूपे कार्ड की शुरुआत जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

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इतिहास पर श्रद्धा जरूरी, यही दिखाएगी विश्व को सही राह : मोहन भागवत

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि विदेशी विद्वानों ने अपने स्वार्थ में भारत के इतिहास का गलत चित्रण किया और हमने अपने इतिहास पर श्रद्धा के अभाव में इसे स्वीकार कर लिया। इसी कारण से आज हमें अपने इतिहास को सही ढंग से प्रस्तुत करने की जरूरत पड़ रही है।

डॉ. भागवत ने  द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट द्वारा कनेक्टिंग विथ द महाभारत: हिस्ट्री, जियोग्राफी, कल्चर, आर्टी पुस्तक का इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन किया। नीरा मिश्रा एवं राजेश लाल द्वारा लिखित इस पुस्तक का प्रकाशन गरुड़ प्रकाशन ने किया है।

इस दौरान डॉ. भागवत ने कहा कि यह विज्ञान का युग है और विश्व सहित भारत भी कई समस्याओं से जूझ रहा है। इसका प्रमुख कारण है कि हम अपने इतिहास, महापुरुषों और ज्ञान से विमुख हो गए हैं। यह ज्ञान हमें धर्मानुसार आचरण सिखाता है। डॉ. भागवत ने कहा कि अपने इतिहास पर श्रद्धा जरूरी है। यही विश्व को सही राह दिखा सकती है। उन्होंने कहा कि हम अगर महाभारत पढ़ते रहते तो इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ वर्तमान के समय में संतुलन, संयम और मध्यम मार्ग है।

सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि आज की आवश्यकता के चलते हम चीन, अमेरिका और रूस जैसे देशों की राह पर चल पड़े हैं, लेकिन हमें प्रकृति की ओर लौटना होगा। यह एकदम से संभव नहीं है इसके लिए हमें दीर्घकालीन लक्ष्य तय करने होंगे।

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पादप आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण मानवता की साझा जिम्मेदारी : तोमर

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि पादप आनुवंशिक उपाय प्रजनन चुनौतियों के समाधान का स्रोत हैं। प्राकृतिक वास नष्‍ट होने और जलवायु परिवर्तन के कारण पादप आनुवंशिक उपाय भी असुरक्षित हैं। इनका संरक्षण " मानवता की साझा जिम्‍मेदारी है"। हमें इन्‍हें बचाकर रखने और इनका स्‍थायी उपयोग करने के लिए सभी आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और स्थायी रूप से उपयोग करने के लिए उपयोग करना चाहिए।

श्री तोमर ने नई दिल्ली में खाद्य और कृषि के लिए पादप आनुवंशिक उपायों पर अंतर्राष्ट्रीय संधि (आईटीपीजीआरएफए) के प्रबंध समूह के नौवें सत्र का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। आईटीपीजीआरएफए संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के 31वें सत्र के दौरान नवम्‍बर, 2001 में रोम में हस्ताक्षरित कानूनी रूप से बाध्यकारी एक व्यापक समझौता है।

समझौता 29 जून 2004 को प्रभावी हुआ और वर्तमान में भारत सहित 149 अनुबंधित पक्ष हैं। यह संधि, जैविक विविधता पर समझौते के अनुरूप, खाद्य और कृषि के लिए विश्व पादप आनुवंशिक उपायों (पीजीआरएफए) के संरक्षण के माध्‍यम से, विनिमय और स्‍थायी उपयोग, इसके उपयोग से होने वाले लाभ के समान बंटवारे के साथ-साथ किसानों के अधिकारों की मान्यता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर खाद्य सुरक्षा हासिल करना चाहती है।

पीजीआरएफए खाद्य और पोषण सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के निरन्‍तर दोहन के लिए स्केल-फ्री समाधान प्रदान करता है। पीजीआरएफए के लिए देश परस्पर एक-दूसरे पर आश्रित हैं, जिससे पहुंच और लाभ साझा करने की सुविधा के लिए एक वैश्विक प्रणाली की आवश्यकता होती है। जीबी9 का आयोजन सेलिब्रेटिंग द गार्जियंस ऑफ क्रॉप डायवर्सिटी: टूवर्ड्स ऐन इनक्लूसिव पोस्ट-2020 ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क विषय के तहत किया जा रहा है।

इस विषय का उद्देश्य पीजीआरएफए के प्रभावी प्रबंधन की दिशा में दुनिया के छोटे किसानों के योगदान को उजागर करना और इस बारे में विचार करने का अवसर प्रदान करना है कि कैसे संधि और उसका समूह नई वैश्विक जैव विविधता निर्माण में योगदान दे सकता है।

 

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भारत और सऊदी अरब के बीच सहयोग के लिए 40 से ज्यादा अवसरों की हुई पहचान

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद की मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए 18 से 19 सितंबर 2022 तक सऊदी अरब का दौरा किया। श्री गोयल, सऊदी के ऊर्जा मंत्री और महामहिम प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान अल-सऊद ने भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद की अर्थव्यवस्था और निवेश समिति की मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की।

इस यात्रा के दौरान माननीय मंत्री ने सऊदी अरब के प्रमुख कारोबारियों के साथ एक सीईओ राउंडटेबल बैठक में भी भाग लिया। इसमें भारत से बढ़ते निर्यात को प्रोत्साहित करने, भारत में आने वाले निवेश को सुविधाजनक बनाने, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा और व्यापक बनाने के नवीन तरीकों तथा साधनों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

यहां हुई वार्ता के बारे में उन्होंने ट्वीट किया, सऊदी अरब में विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों के सीईओ के साथ समृद्ध बातचीत हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के प्रति उनके उत्साह को देखकर प्रसन्नता हुई। भारत और सऊदी अरब के बीच सहयोग के लिए 40 से ज्यादा अवसरों की  पहचान की गई। 

 

 

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आईआईटी वैज्ञानिक सोच विकसित करने का उज्‍ज्‍वल भविष्य सुनिश्चित करने वाले मंदिर : धर्मेंद्र प्रधान

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी मद्रास की रणनीतिक योजना 2021-27 जारी की, जिसमें इस संस्थान के लिए एक महत्वाकांक्षी विकास चरण का प्रस्ताव किया गया है और इसके साथ ही उन्‍होंने क्वांटम विज्ञान के लिए एम्फैसिस सेंटर को राष्‍ट्र को समर्पित किया।

उन्होंने ऊर्जा खपत कम करने में एमएसएमई की मदद करने के लिए कोटक-आईआईटी (एम) ऊर्जा बचाओ मिशन का भी शुभारंभ किया जिसके लिए कोटक से सीएसआर फंडिंग सहायता प्राप्‍त हो रही है। उन्होंने क्वांटम सूचना, संचार और कम्प्यूटिंग केंद्र (सीक्यूआईसीसी) के विकास में सहयोग करने के लिए एम्फैसिस टीम का अभिनंदन किया। उन्होंने डेटा साइंस में बीएससी पाठ्यक्रम के चुनिंदा विद्यार्थि‍यों को डिप्लोमा सर्टिफिकेट भी प्रदान किए।

इस अवसर पर श्री प्रधान ने अकादमिक उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में इन पहलों के उद्घाटन और शुभारंभ पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आईआईटी सिर्फ शैक्षणिक संस्थान ही नहीं हैं, बल्कि वे वैज्ञानिक सोच विकसित करने और मानवता का उज्‍ज्‍वल भविष्य सुनिश्चित करने वाले मंदिर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे समाज को समस्‍त आईआईटी से काफी उम्मीदें हैं।

आईआईटी में शिक्षा प्राप्‍त करने वाले हमारे विद्यार्थि‍यों को प्रगति और विकास का पथ प्रदर्शक बनना होगा। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब पूरी दुनिया ब्रेन रिसर्च सेंटर से लाभान्वित होने के लिए आईआईटी मद्रास आएगी। थ्रीडी-प्रिंटिंग तकनीक जैसे नायाब आइडिया निर्माण क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं, विस्थापन के मुद्दों को हल करने में काफी मदद कर सकते हैं और गरीबों को सम्मानजनक जीवन दे सकते हैं।

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हरदीप पुरी ने स्वच्छता स्टार्टअप चुनौती के चुने हुए स्टार्टअप्स के साथ बातचीत की

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। आवासन और शहरी कार्य तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, हरदीप पुरी ने स्वछता को बढ़ावा देने की दिशा में समाधान खोजने में शामिल स्टार्ट-अप को सभी सहायता और सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। उन्होंने स्वच्छता स्टार्ट-अप चुनौती के अंतर्गत चुने गए स्टार्टअप्स के साथ बातचीत करते हुए यह बात कही।

मंत्री ने कुछ प्रमुख स्वच्छता चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए मशीनीकृत समाधान, ठोस और तरल कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण आदि स्टार्टअप्स को नवाचार और उद्यम विकास के लिए बड़े अवसर प्रदान करते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू), आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय-एमओएचयूए ने एएफ़डी (एजेंसी फ़्रेंकाइसे डि डिवलमपमेंट) और उद्योग तथा आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सहयोग से 27 जनवरी, 2022 को स्वच्छता स्टार्टअप चैलेंज शुरू किया है ताकि अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में विकास स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए एक समर्थन करने वाले वातावरण को बढ़ावा दिया जा सके।

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30 स्टार्टअप्स को सम्मानित करेगा आवास और शहरी कार्य मंत्रालय

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में भारत की स्थिति को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए स्टार्टअप्स को धनराशि देने और प्रारंभिक समग्र सहयोग (इन्क्यूबेशन) देने की तैयारी कर रहा है।

एमओएचयूए 20 सितंबर, 2022 को नई दिल्ली स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित होने वाले सम्मलेन में 30 स्टार्टअप्स को सम्मानित करेगा। दिन भर चलने वाला यह सम्मलेन स्टार्टअप्स के लिए अनुभव व ज्ञान प्राप्त करने और सीखने का एक मंच भी होगा, जो उन्हें इस क्षेत्र में अपने रास्ते की तलाश करने और अपने समाधानों को सफलतापूर्वक बड़े पैमाने पर ले जाने में मदद करेगा।

विचार-विमर्श के हिस्से के रूप में, कुछ शहरी स्थानीय निकाय जमीनी स्तर की विशिष्ट चुनौतियों को उजागर करने के लिए 'रिवर्स पिच' में शामिल होंगे, ताकि चुनौतियों के अभिनव समाधान खोजने के लिए स्टार्टअप को प्रेरित किया जा सके। सरकार के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, कुछ शहरी स्थानीय निकायों ने चुनिंदा स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी करने में रुचि दिखाई है तथा शहरी स्थानीय निकाय, स्टार्टअप्स को सुविधाओं की स्थापना, बाजार खरीदारों के जुड़ाव आदि के लिए स्थान के रूप में समर्थन प्रदान करने के लिए तैयार हैं, ताकि वे अपने समाधानों को अंतिम रूप दे सकें।

दिन भर चलने वाले इस कार्यक्रम में सीखने की और नेटवर्किंग गतिविधियां, 30 स्टार्टअप द्वारा उनके समाधान को प्रदर्शित करने वाली प्रस्तुतियां, कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार्टअप को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नीतिगत पहलों पर चर्चा और यूनिकॉर्न के उद्यमियों तथा संस्थापकों द्वारा सफलता की कहानियों को साझा करना आदि शामिल होंगे।

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बाउंड्री वॉल गिरने से दबे 13 कामगार, 4 की मौत, मुख्यमंत्री ने जताया शोक...

 नोएडा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नोएडा के सेक्टर-21 स्थित जलवायु विहार में मंगलवार सुबह नाले की निर्माणाधीन दीवार गिरने से 13 कामगार दीवार के नीचे दब गए। सूचना पर पहुंची सेक्टर-20 कोतवाली पुलिस, फायर ब्रिगेड की टीम ने पांच जेसीबी मदद से मलबे को हटाकर दीवार के नीचे दबे कामगार को बाहर निकाला।

हादसे में गंभीर रूप से चार कामगारों को इलाज के लिए अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया। जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि नौ कामगारों को सुरक्षित मलबे से बाहर निकाला गया है। जिनकी हालत स्थिर है।

नोएडा प्राधिकरण की ओर से सेक्टर-21 स्थित जलवायु विहार सोसायटी के पास नाले की पुरानी दीवार को तोड़कर नई चार दीवार बनाने का काम किया जा रहा है। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे निर्माणाधीन नाले की छह फीट की ऊंची और दस फीट लंबी में गिरने 13 कामगार मलबे के नीचे दब गए। हादसे के बाद घटना स्थल के आसपास चीख पुकार मच गई। कंट्रोल रूम पर हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने करीब एक घंटे के रेस्क्यू आपरेशन के बाद मलबे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला।

हादसे में घायल दो कामगार को सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल और दो कामगरों को सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डाक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। पुलिस मृतकों की शिनाख्त का प्रयास कराने में जुटी है। मामूली रूप से घायलों की मरहम पट्टी कराई गई है। घायलों और मृतकों के स्वजन को सूचना दे दी गई है। जिला अस्पताल और कैलाश अस्पताल में घायलों के हाल चाल लेने के लिए स्वजन पहुंच रहे हैं। हादसे की जांच के लिए टीम गठित की गई है।

हादसे की सूचना पर संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) लव कुमार, डीसीपी हरीश चंदर, सीएफओ अरुण कुमार सिंह, एसीपी नोएडा रजनीश वर्मा मौके पर मौजूद हैं। हादसे के बाद जमा को भीड़ को हटाने का काम किया जा जारी है।

मामले का जिला प्रशासन की ओर से भी संज्ञान लिया गया है। जिलाधिकारी सुहास एलवाई मौके पर पहुंचे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र कुमार सिंह को जांच के आदेश दिए हैं।

श्रम विभाग की ओर से मामले का संज्ञान लिया गया है। हादसे की जांच के लिए एक टीम को मौके पर भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद दोषी लोगों को पर कार्रवाई की जाएगी।

सीएम योगी ने जताया शोक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा में दीवार गिरने की दुर्घटना से हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर राहत व बचाव कार्य युद्ध स्तर पर संचालित करने और घायलों के उपचार की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। सीएम ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

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शहरों के विकास को लेकर लोगों को भाजपा पर भरोसा है : नरेंद्र मोदी

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में हो रहे दो दिवसीय 'राष्ट्रीय महापौर सम्मेलन' में हिस्सा लिया। पीएम मोदी इस कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से जुड़े। इस सम्मेलन में देशभर से भाजपा शासित शहरी स्थानीय निकायों के महापौर और उपमहापौर शामिल हुए हैं। पीएम मोदी ने भाजपा के मेयरों के इस कार्यक्रम को संबोधित किया। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय महापौर सम्मेलन में सभी का स्वागत करते हुए कहा कि आजादी के अमृत काल में अगले 25 साल के लिए भारत के शहरी विकास का एक रोड मैप बनाने में इस सम्मेलन की बड़ी भूमिका है। पीएम मोदी ने कहा कि शहरों के विकास को लेकर लोगों को भाजपा पर पूरा भरोसा है।

राष्ट्रीय महापौर सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा कि साथियों 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास'। ये जो वैचारिक परिपार्टी भाजपा ने अपनायी है। यही हमारा मॉडल दूसरों से अलग करता है।

कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सामान्य नागरिक का संबंध अगर सरकार नाम की किसी व्यवस्था से आता है तो पंचायत से आता है, नगर पंचायत से आता है, नगरपालिका से आता है, महानगर पालिका से आता है। इसलिए इस प्रकार के विचार-विमर्श का महत्व बढ़ जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे देश के नागरिकों ने बहुत लंबे अरसे से शहरों के विकास को लेकर भाजपा पर विश्वास रखा है। उसे निरंतर बनाए रखना, उसे बढ़ाना हम सभी का प्रमुख दायित्व है।

वहीं, इस कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी ने नड्डा ने कहा कि हम राजनीति में आए हैं तो सिर्फ गद्दी पर बैठने नहीं आए हैं, सत्ता में बैठने नहीं आए हैं। सत्ता हमारे लिए माध्यम है, लक्ष्य सेवा है। सुशासन के जरिए किस प्रकार हम जनता की सेवा कर सकते हैं, इसके लिए हम काम करते हैं।

उप मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी कार्यक्रम में हैं शामिल
इस कार्यक्रम की अधिक जानकारी देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि देशभर के 121 महापौर और उपमहापौर इस दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। यह महापौर सम्मेलन पार्टी के सुशासन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित किया जा रहा है। पीएम मोदी शहरी विकास के मुद्दे पर महापौर और उपमहापौर का मार्गदर्शन कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए हैं। दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य लोगों में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल हैं।

इस पूरे सम्मेलन में इन मुद्दों पर होनी है चर्चा
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिन्हा ने बताया कि फडणवीस शहरी विकास के लिए अपने दृष्टिकोण को साझा करेंगे और पुरी देशभर के मेयरों को शहरी स्थानीय निकायों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे। कुल मिलाकर 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के महापौर, उप महापौर और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधि इस सम्मेलन में भाग लेंगे और अपने विचार साझा करेंगे। इस दौरान अपशिष्ट प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, जल-भराव एवं शहरों में होने वाली समस्यायों पर चर्चा की जाएगी।

सिन्हा ने कहा कि सूरत, इंदौर, कानपुर और पणजी के मेयर कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई और राजस्व बढ़ाने के लिए अपने द्वारा किए गए कार्यों के बारे में दर्शकों को जानकारी देंगे।

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह दो दिन की मिस्र यात्रा के बीच दुबई पहुंचे

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह दो दिन की मिस्र यात्रा के बीच आज दुबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे। श्री सिंह मिस्र के रक्षा और रक्षा उत्पादन मंत्री जनरल मोहम्मद जाकी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों मंत्री इस दौरान परस्‍पर सैन्य संबंधों को बढ़ाने की संभावना तलाशेंगे और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग की समीक्षा करेंगे।

इस दौरान भारत और मिस्र के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर होंगे। श्री सिंह मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी से मुलाकात भी करेंगे।

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मीडिया न्यायपालिका की रिपोर्टिंग में बरते सावधानी: धनखड़

 जबलपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मीडिया से न्यायपालिका के बारे में रिपोर्टिंग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि हमें न्यायाधीशों की गरिमा और न्यायपालिका के लिए सम्मान को बनाये रखना चाहिए, क्योंकि ये कानून के शासन और संवैधानिकता के मूल सिद्धांत हैं।

श्री धनखड़ ने यहां आयोजित न्यायमूर्ति जे एस वर्मा स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में कहा कि एक मजबूत, निष्पक्ष और स्वतंत्र न्याय प्रणाली, लोकतांत्रिक मूल्यों के फलने-फूलने और प्रभावी होने की सबसे सुरक्षित गारंटी है। उन्होंने कहा, निर्विवाद रूप से लोकतंत्र का सबसे अच्छा विकास तब होता है, जब सभी संवैधानिक संस्थानों का आपस में पूर्ण समन्वय होता है और वे अपने क्षेत्र विशेष तक ही सीमित होते हैं।

पहले न्यायमूर्ति जे एस वर्मा स्मृति व्याख्यान में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने मुख्य व्याख्यान दिया। राजस्थान उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति श्री वर्मा के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में अपनी कई बातचीत को याद करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि उनके कार्यकाल को न्यायिक इकोसिस्टम को बेहतर बनाने एवं पारदर्शिता और जवाबदेही को विस्तार देने के रूप में याद किया जा सकता है।

समाज पर दूरगामी प्रभाव वाले कई फैसले देने के लिए न्यायमूर्ति श्री वर्मा की प्रशंसा करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि विशाखा मामले में उनके ऐतिहासिक फैसले ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं की विशिष्ट सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था के लिए पूरे तंत्र के संरचना निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय न्यायमूर्ति जगदीश शरण वर्मा को हमेशा पथ-प्रदर्शक निर्णयों और उन विचारों के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने नागरिकों को सशक्त बनाया है और सरकार को भी सक्षम बनाया है, ताकि वह लोगों के कल्याण के लिए संस्थानों में व्यापक बदलाव कर सके।

न्यायमूर्ति श्री वर्मा द्वारा संघवाद से लेकर धर्मनिरपेक्षता तक और भारत में लैंगिक समानता से जुड़े कानूनों के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित किये जाने का उल्लेख करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि उनका जीवन एवं उनके विचार हमें और आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रवि मलीमथ, लोकसभा सदस्य राकेश सिंह, राज्यसभा सदस्य और जे एस वर्मा स्मृति समिति के अध्यक्ष विवेक तन्खा एवं दिवंगत न्यायमूर्ति जे एस वर्मा के परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में शामिल हुए।

स्मृति व्याख्यान के बाद उप राष्ट्रपति ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। तत्पश्चात, उपराष्ट्रपति मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह, जो 1857 के पहले स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान शहीद हुए थे, के ‘बलिदान दिवस’ की स्मृति में आयोजित एक समारोह में भाग लेने के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा कॉलेज परिसर गए।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री धनखड़ ने इस तथ्य पर संतोष व्यक्त किया कि हमारे जनजातीय समुदाय के नायकों के योगदान और बलिदान को ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोह के हिस्से के रूप में पहचाना जा रहा है और उन्हें विशेष महत्त्व दिया जा रहा है।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में पहली बार किसी जनजातीय महिला को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर देखना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। यह देखते हुए कि मध्यप्रदेश में देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि रानी दुर्गावती से लेकर राजा शंकर शाह तक जनजातीय समुदायों का बाहरी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध का गौरवशाली इतिहास रहा है।

उन्होंने स्मारकों और संग्रहालयों के निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की सराहना की। ये स्मारक और संग्रहालय हमारे जनजातीय नायकों की कहानियों को उजागर करते हैं और इनसे हमारी युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।

इस अवसर पर श्री धनखड़ ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर आयोजित एक प्रदर्शनी का भी दौरा किया और स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम देखे। उप राष्ट्रपति ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास भी किया और जेईई/एनईईटी/सीएलएटी में उत्तीर्ण होने वाले मेधावी जनजातीय छात्रों को सम्मानित किया।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री पटेल, मुख्यमंत्री श्री चौहान, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सदस्य वी डी शर्मा, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, मध्यप्रदेश सरकार की जनजातीय कल्याण मंत्री मीना सिंह, मध्यप्रदेश सरकार के वन मंत्री विजय शाह, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री गोपाल भार्गव, राज्यसभा सदस्य सुमित्रा बाल्मीकि, सदस्य राकेश सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में शामिल हुए।

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निराश लोगों की आवाज बन रही है भारत जोड़ो यात्रा : राहुल

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि सरकार की नीतियों के कारण देश के लोगों में निराशा का माहौल है और 'भारत जोड़ो यात्रा' निराश लोगों की आवाज बन रही है।

श्री गांधी ने कहा कि देश में सद्भाव का माहौल नहीं है, युवाओं के पास रोजगार नहीं है और लोग अपने भविष्य को लेकर के निराश हैं, लेकिन ‘भारत जोड़ो’ यात्रा उदास हुए इन सबकी आवाज बन रही है और लोग एकजुट होकर यात्रा के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

श्री गांधी ने ट्वीट किया सद्भाव के बिना कोई प्रगति नहीं है। प्रगति के बिना कोई रोजगार नहीं है। नौकरियों के बिना कोई भविष्य नहीं है। बेरोजगारी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए भारत जोड़ो यात्रा निराशा की आवाजों को एकजुट कर रही है।

 

 

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लाइट ब्लू में नजर आएंगे भारतीय सितारे, टीम इंडिया की नई जर्सी लॉन्च

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। टीम इंडिया की नई जर्सी लॉन्च हो गई है। भारतीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया में होने वाले अगले टी-20 वर्ल्ड कप में यही जर्सी पहन कर खेलेंगे। साथ ही ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के खिलाफ 20 सितंबर 2022 से शुरू हो रही टी-20 सीरीज में भी भारतीय स्टार्स इसी जर्सी में नजर आएंगे।

इस बार जर्सी के कलर के तौर पर लाइट ब्लू का इस्तेमाल किया गया है। भारतीय टीम इससे पहले डार्क ब्लू जर्सी पहन रही थी। लाइट ब्लू 2007 में हुए पहले टी-20 वर्ल्ड कप की भारतीय जर्सी में भी इस्तेमाल हुआ था। तब टीम इंडिया चैंपियन बनी थी। उसके बाद से भारत अब तक एक बार टी-20 वर्ल्ड चैंपियन नहीं बन पाया है।

BCCI ने तीन दिन पहले ही नई जर्सी जल्द लॉन्च किए जाने की सूचना दी थी। टीम के किट स्पॉन्सर ने भी इस खबर की पुष्टि की थी। अब रविवार को नई जर्सी लॉन्च कर दी गई है। नई जर्सी का इस्तेमाल भारत के पुरुष क्रिकेटर्स के साथ-साथ महिला खिलाड़ी भी इस्तेमाल करेंगी। पिछली बार भी जो जर्सी लॉन्च की गई थी उसका इस्तेमाल दोनों टीमों ने किया था।

 

 

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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी केस: रात 1.30 बजे स्टूडेंट्स का धरना खत्म, 6 दिन पढ़ाई बंद

 चंडीगढ़ (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मोहाली की चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 60 से ज्यादा छात्राओं के नहाने का वीडियो वायरल करने के मामले में स्टूडेंट्स का धरना रात 1.30 बजे खत्म हुआ। रोपड़ रेंज के DIG गुरप्रीत भुल्लर और मोहाली के DC अमित तलवार ने भरोसा दिया कि उनकी सभी मांगे मानी जाएंगी। यूनिवर्सिटी में अब 24 सितंबर तक नॉन टीचिंग डे घोषित कर दिया गया है। इस मामले से सहमी लड़कियों ने हॉस्टल खाली करने शुरू कर दिए हैं। उनके माता-पिता सुबह ही बेटियों को लेने पहुंच गए।

इस मामले में आरोपी दो युवकों को हिमाचल पुलिस ने देर रात गिरफ्तार कर लिया है। इनमें लड़की ने जिस युवक की तस्वीर दिखाई थी, उसे शिमला के ढली से पकड़ा गया। उसका नाम रंकज वर्मा है। वहीं दूसरे आरोपी सन्नी मेहता को रोहड़ू से अरेस्ट किया गया। इससे पहले पंजाब पुलिस ने वीडियो बनाने वाली लड़की को गिरफ्तार किया था। लड़की भी शिमला के रोहड़ू की रहने वाली है। वो लड़कों को बहुत पहले से जानती है।

चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में कथित आपत्तिजनक वीडियो लीक मामले पर DSP रुपिंदरदीप कौर सोही ने बताया कि देर शाम दोनों युवक पंजाब पुलिस को सुपुर्द कर दिए गए। सन्नी (23 साल) एक बेकरी में, तो रंकज (31 साल) ट्रेवल एजेंसी में काम करता है। रंकज मूल रूप से ठियोग के संधू क्षेत्र का है। इनसे अब वीडियो मंगवाने और उसे वायरल करने के मकसद के बारे में पूछताछ होगी।

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4 साल में 2 हजार कारीगर तैयार करेंगे श्रीराम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा

 अयोध्या (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अयोध्‍या में लगने वाली भगवान राम की प्रतिमा 251 मीटर ऊंची मूर्ति 4 साल में बनकर तैयार होगी l इसके लिए दो हजार कारीगरों की टीम काम करेगी l इसे साहिबाबाद की फैंक्ट्री में तैयार करने की तैयारी चल रही है।  इस भव्य प्रतिमा की मूर्ति की डिजाइन अनिल राम सुतार ने तैयार की है। भगवान श्रीराम की यह मूर्ति स्टेच्यू आफ यूनिटी से 69 मीटर अध‍िक ऊंची होगी।

देश के प्रसिद्ध मूर्तिकार पद्मभूषण राम वी सुतारऔर उनके पुत्र अनिल राम सुतार इन दिनों अयोध्या में हैं। नयाघाट पर लता स्मृति चौक में वीणा को स्थापित कराने के लिए वे यहां पहुंचे हैं। राम वी सुतार ने बताया कि श्रीराम की यह प्रतिमा कांस्य से निर्मित होगीl गुजरात की स्टेच्यू आफ यूनिटी के रूप में सरदार पटेल की प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है। भगवान राम की प्रतिमा इससे 69 मीटर अधिक ऊंची होगी।

अनिल सुतार ने बताया कि वर्ष 2018 में सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने एक प्रतिमा का माडल प्रस्तुत किया गया था, जिसके निर्माण की अनुमति सीएम ने प्रदान की है। पर अभी प्रतिमा लगने के लिए भूमि खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। भूमि उपलब्ध होने के प्रतिमा का निर्माण कर लिया जाएगा।

भगवान राम की 251 फिट उंची प्रतिमा स्थल पर भगवान श्रीराम पर आधारित डिजिटल म्यूजियम, इंटरप्रेटेशन सेंटर, लाईब्रेरी, फूड प्लाजा, लैंडस्केपिंग के साथ पयर्टकों की मूलभूत सुविधाओं की स्थापना करने के निर्देश सरकार के द्वारा दो वर्ष पूर्व दिया गया था ।

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नई पारी की शुरुआत करेंगे कैप्टन अमरिंदर, दिल्ली में नड्डा से की मुलाकात...

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री आज अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर आज अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का भाजपा में विलय करेंगे। नई दिल्‍ली में आयोजित समारोह में उनके समर्थक, करीबी कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में भाजपा की सदस्यता लेंगे। भाजपा में पार्टी के विलय से पूर्व कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार सुबह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मुलाकात की।

कैप्टन अमरिंदर के साथ कुछ पूर्व विधायक भी भाजपा में शामिल होंगे। इनमें से तीन मुक्तसर से करन कौर बराड़, माहिल कलां से हरचंद कौर और भदौड़ से पिरमल सिंह के नाम सामने आए हैं। वहीं कैप्टन के पुत्र रणइंदर सिंह और बेटी जयइंदर भी भाजपा में शामिल होंगे। हालांकि कैप्टन की पत्नी और पटियाला से कांग्रेस सांसद परनीत कौर इस मौके पर उपस्थित नहीं रहेंगी। इसका बड़ा कारण यह है कि अगर वह भाजपा में शामिल होती हैं तो उन्हें लोकसभा की सदस्यता छोड़नी होगी।

कैप्‍टन अमरिंदर सिंह का राजनीतिक सफर
कैप्‍टन 1980 में पहली बार कांग्रेस टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीते थे। 1984 में आपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में उन्होंने न केवल लोकसभा से बल्कि कांग्रेस से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए और 1985 में तलवंडी साबो से विधानसभा चुनाव जीता, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर कांग्रेस में शामिल हो गए।

2002 से 2007 तक वह पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद कांग्रेस को लगातार दो बार विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 2017 में एक बार फिर कैप्टन की अगुवाई में कांग्रेस ने पंजाब में सरकार बनाई। परंतु सितंबर 2021 में कांग्रेस से मनमुटाव के कारण कैप्टन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद उन्होंने अपनी पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी का गठन किया। 2022 के विधानसभा चुनाव उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन करके लड़ा लेकिन उनकी पार्टी का कोई भी नेता चुनाव नहीं जीत सका। इसके बाद से ही कैप्टन की पार्टी की भाजपा में विलय को लेकर चर्चा चल रही थी।

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नान घोटाला : ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से की मामले की दूसरे राज्य में सुनवाई करने की मांग...

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत के मुख्य न्यायाधीश, यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस अजय रस्तोगी ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला मामले में जांच स्थानांतरित करने की मांग की गई है, जो छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में भ्रष्टाचार से संबंधित है।

पीठ ने पक्षों को निर्देश दिया कि वे जिस सामग्री पर भरोसा करना चाहते हैं उसे सीलबंद लिफाफे में दें। यह मामला अब 26 सितंबर 2022 को दोपहर 3 बजे के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अदालत ने आगे पक्षकारों को याचिकाओं के सुनवाई योग्य होने पर अपनी लिखित प्रस्तुतियां पेश करने का निर्देश दिया।

भारत के सॉलिसिटर जनरल, तुषार मेहता ने कहा कि मामला इतना बड़ा है कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में संवैधानिक पदों पर अधिकारियों की मिलीभगत से उच्च पदस्थ अधिकारी अपने पदों का फायदा उठा रहे हैं। प्रतिवादियों की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उक्त घोटाला छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के शासन के दौरान हुआ था।

एसजी मेहता ने कहा कि यह सामने आया है कि छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी याचिकाकर्ताओं के मामले को कमजोर करने में सक्रिय रूप से शामिल हैं और अभियुक्तों ने न केवल गवाहों को ईडी के समक्ष अपने बयान वापस लेने के लिए प्रभावित किया था, बल्कि एसआईटी ने भी कार्रवाई को रोकने के सात प्रयास किए थे। उन्होंने प्रस्तुत किया कि ईडी की जांच से पता चला है कि आरोपी संवैधानिक पदाधिकारियों के संपर्क में था और अन्य सह-आरोपियों के अपराधों की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों को वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार से मदद मिली थी।

इस पर सीनियर एडवोकेट रोहतगी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, "उन्होंने मेरे मामले पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए इसे पढ़ा है लेकिन उन्होंने सामग्री दायर नहीं की है। या तो आप सामग्री का खुलासा करें या इसे न पढ़ें।"

एसजी मेहता ने प्रस्तुत किया कि जबकि उन्हें सामग्री को रिकॉर्ड पर रखने में कोई संकोच नहीं है, उक्त सामग्री का खुलासा करने से सिस्टम में लोगों का विश्वास हिल जाएगा।

उन्होंने कहा, "अगर यह सार्वजनिक डोमेन में आता है, तो यह सिस्टम में लोगों के विश्वास को हिला सकता है। हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश संवैधानिक अधिकारियों के संपर्क में थे जो आरोपी की मदद कर रहे थे, क्या आप चाहते हैं कि मैं इसे सार्वजनिक कर दूं?"

तदनुसार, एसजी ने पीठ से अनुरोध किया कि वह कुछ समय लें और सामग्री को 'आराम से' देखें और फिर अपना निर्णय लें।

एक आरोपी की ओर से सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि उक्त आरोपी को 2015 में गिरफ्तार किया गया था और इस मामले में 170 से अधिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है, जिसमें अंतिम गवाह भी शामिल है जो जांच अधिकारी था। इधर, एसजी ने कहा कि कोई भी आरोपी जेल में नहीं है और वे जमानत पर बाहर हैं।

एसजी ने यह भी कहा कि रजिस्ट्री में उल्लेखित करने के बावजूद मामलों को सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "मैंने छह बार इसका उल्लेख किया है। मैं केवल इतना कह रहा हूं कि मेरी याचिका लंबित है, कृपया मामले को समाप्त न करें।"

तदनुसार, सीजेआई ललित ने कहा, "जस्टिस रस्तोगी बिना साथी के थे इसलिए वह यहां हमारे साथ बैठे हैं। लेकिन जब हमने मामले की सुनवाई शुरू की है, हम इसे उसी संयोजन में समाप्त करेंगे। जो भी दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में हैं, हमने उन्हें नहीं देखा है लेकिन एसजी ने अनुरोध किया कि हम उन पर एक नज़र डालें ताकि हम उन्हें देख सकें। यदि हम पाते हैं कि सामग्री को सार्वजनिक किया जाना है, तो हम इसकी अनुमति देंगे। एक अनुरोध किया गया है कि जांच को स्थानांतरित किया जाए और इस अदालत ने नवंबर 2021 में नोटिस जारी किया था। लगभग 10 महीने बीत चुके हैं... मुकदमे के समाप्त होने से पहले, हमें यह तय करना होगा कि क्या दूसरे पक्ष में सार है। मामले को अगले सोमवार को 3 बजे सूचीबद्ध करें... अभी तक, हम वह नोटिस कह रहे हैं 2021 में जारी किया गया था, जिसका अर्थ है कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ कुछ पाया गया था। इस प्रकार, यह सुनना हमारा कर्तव्य है।"

सीजेआई ने आदेश सुनाते हुए कहा, "एसजी के पास सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज और सामग्री है। प्रतिवादी प्रस्तुत करते हैं कि सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज़ जमा करने की प्रथा को इस अदालत के एक नवीनतम निर्णय द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है। राज्य का कहना है कि यदि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर विचार किया जाता है, तो राज्य भी सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज़ रखने के इच्छुक हों। इसलिए, हम चाहते हैं कि वकील ऐसी सामग्री रखें जिस पर राज्य भी भरोसा करना चाहता है। दोनों सीलबंद लिफाफे मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों के आवास पर भेजे जाएं। हम याचिकाओं के सुनवाई योग्य होने के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं पर भी प्रस्तुतियां चाहते हैं।

उत्तरदाताओं में से एक ने हमारे ध्यान खींचा है कि याचिकाकर्ता द्वारा जांच किए जाने वाले सभी 170 गवाहों की जांच की गई है, जिसमें अंतिम गवाह, जांच अधिकारी शामिल हैं। हमें यह भी अवगत कराया गया है कि ईडी द्वारा आवेदन के निपटान तक ट्रायल कोर्ट की सुनवाई को स्थगित करने की मांग की गई है। इस संबंध में मामले पर 24 सितंबर 2022 को विचार किया जाएगा। साक्ष्यों के निष्कर्ष के बाद अब सीआरपीसी की धारा 313 के तहत आरोपियों के बयान दर्ज करने पर विचार किया जाना है। उस अभ्यास को करने के लिए, अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है। प्रशांत भूषण ने हस्तक्षेपकर्ता, प्रदीप श्रीवास्तव की ओर से, प्रस्तुत किया है कि जांच में वांछित बहुत कुछ छोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि जांच की गुणवत्ता सही नहीं है। उनका कहना है कि स्वतंत्र एजेंसी में ट्रांसफर होने के बाद भी जांच की प्रक्रिया की निगरानी इस अदालत द्वारा एसआईटी या किसी पदाधिकारी को नियुक्त करके की जाए। हमें अभी इन सवालों में जाने की जरूरत नहीं है। पहले मामले में, हम सुनवाई योग्य होने पर विचार करेंगे। इस मामले को सोमवार को अपराह्न 3 बजे इसी पीठ के समक्ष रखा जाए।"

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