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पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अंबिकापुर से किया शुभारंभ, सरगवां में वृक्षारोपण के साथ बाउंड्रीवाल एवं ओपन जिम का लोकार्पण

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  के राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को आगे बढ़ाते हुए प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और मातृशक्ति के सम्मान के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा इस अभियान की शुरुआत अंबिकापुर से की गई। माननीय मंत्री पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग श्री राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में सरगवां स्थित अटल विहार योजना में वृक्षारोपण एवं विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।


मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने  इस अवसर पर कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मातृशक्ति के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी व्यक्त करने वाला भावनात्मक एवं जनसरोकार से जुड़ा संकल्प है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  के आह्वान पर शुरू किए गए इस अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक स्वरूप देना हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाए और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करे, यही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।

उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पूरे प्रदेश में सवा सात करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि कॉलोनी में बाउंड्रीवाल की लगातार मांग की जा रही थी। गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष की पहल से आज बाउंड्रीवाल का निर्माण पूर्ण कर उसका लोकार्पण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत यहां वृक्षारोपण किया गया था और कॉलोनीवासियों के संरक्षण से लगाए गए पौधे अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं।

अन्य आवासीय योजनाओं एवं कॉलोनियों में भी चलेगा अभियान

गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय वृक्षारोपण अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की अन्य आवासीय योजनाओं एवं कॉलोनियों में भी चरणबद्ध रूप से संचालित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अंबिकापुर से शुरू हुआ यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रत्येक परिवार और समाज को अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाने तथा उसके संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करेगा। मंडल का उद्देश्य अपनी विभिन्न आवासीय योजनाओं में हरित क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए कॉलोनियों को अधिक स्वच्छ, सुंदर, हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाना है। अभियान के माध्यम से पौधरोपण को जनभागीदारी से जोड़ने के साथ ही वृक्षों के संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

9.70 एकड़ में 251 भवनों का निर्माण एवं विकास

कार्यक्रम के दौरान अटल विहार योजना, सरगवां में वृक्षारोपण के साथ बाउंड्रीवाल एवं ओपन जिम का लोकार्पण भी किया गया। सरगवां में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा 9.70 एकड़ भूमि पर लगभग 3859.22 लाख रुपये की लागत से कुल 251 भवनों का निर्माण एवं विकास कार्य कराया गया है। इनमें 14 HIG, 12 Sr. MIG, 40 Jr. MIG, 63 LIG एवं 122 EWS भवन शामिल हैं।

योजनांतर्गत बाउंड्रीवाल एवं डब्ल्यू.एम.एम. सड़क सहित शेष निर्माण एवं विकास कार्य भी पूर्ण किए गए हैं। इन सुविधाओं के लोकार्पण से कॉलोनीवासियों को बेहतर आवासीय वातावरण के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

नन्हे बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम में कॉलोनी के नन्हे बच्चों ने वृक्षों के महत्व एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की प्रस्तुतियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ही ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के भावनात्मक संदेश को प्रभावी रूप से सामने रखा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता  श्री चिंतामणी महाराज सांसद सरगुजा ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में अंबिकापुर महापौर श्रीमती मंजूषा भगत,  श्रीमती निरुपा सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष सरगुजा,  श्री हरमिन्दर सिंह टिन्नी  सभापति नगर निगम अंबिकापुर,  श्रीमती दिव्या सिंह सिसोदिया  जिला पंचायत सदस्य सरगुजा, श्री भारत सिंह सिसोदिया, श्री अखिलेश सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं कॉलोनीवासी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं मंडल के अधिकारियों ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाने तथा अधिक से अधिक पौधों के रोपण एवं उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
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महिलाओं के संपत्ति अधिकार को मजबूत कर रही विष्णु भैया की सरकार, रजिस्ट्री में मिल रही 50 प्रतिशत की छूट

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल से महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने का सीधा लाभ अब प्रदेश की महिलाओं को मिल रहा है। रायगढ़ की श्रीमती शर्मिला मिश्रा ने इस सुविधा का लाभ उठाते हुए जमीन की रजिस्ट्री कराई, जिससे उन्हें करीब 25 हजार रुपये की बचत हुई। उन्होंने इस जनहितकारी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और  वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।


राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार महिलाओं के नाम पर जमीन एवं अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क की दर को आधा कर दिया गया है। पहले संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 4 प्रतिशत की दर से पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे अब महिलाओं के पक्ष में होने वाली रजिस्ट्री के लिए घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने और संपत्ति में उनकी भागीदारी बढ़ाने को प्रोत्साहन मिल रहा है।

रजिस्ट्री के खर्च में मिली सीधी आर्थिक राहत

रायगढ़ निवासी श्रीमती शर्मिला मिश्रा ने सरकार की इस सुविधा का लाभ लेते हुए जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराई। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें करीब 25 हजार रुपये की बचत हुई। उन्होंने बताया कि सरकार का यह निर्णय महिलाओं के लिए आर्थिक रूप से राहत देने वाला है। इससे न केवल रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ है, बल्कि महिलाओं के नाम पर संपत्ति होने से उनके आर्थिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा भी मजबूत होती है।

श्रीमती शर्मिला मिश्रा ने कहा कि महिलाओं के नाम पर संपत्ति को प्रोत्साहित करने का यह निर्णय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
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कवर्धा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले जिले के प्रथम छात्र हिमांशु को उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने फोन कर दी बधाई एवं शुभकामनाएं

 उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने कवर्धा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले जिले के प्रथम छात्र सहसपुर लोहारा निवासी श्री हिमांशु देवांगन से रायपुर से फोन पर बातचीत कर उन्हें बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। कवर्धा मेडिकल कॉलेज में इसी शैक्षणिक सत्र से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ चिकित्सा शिक्षा की शुरुआत हो रही है और संयोग से कॉलेज के प्रथम सत्र में प्रवेश लेने वाला छात्र कवर्धा जिले का ही निवासी है। जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि कवर्धा में चिकित्सा शिक्षा के नए अध्याय की शुरुआत जिले के ही प्रतिभावान विद्यार्थी के प्रवेश के साथ हुई है।


          उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने छात्र से बातचीत के दौरान उसकी स्कूली शिक्षा, नीट परीक्षा की तैयारी और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए हुई काउंसलिंग प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। हिमांशु ने बताया कि उसने कक्षा 12वीं में 83 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं तथा नीट परीक्षा में 512 अंक हासिल किए। नीट की तैयारी के लिए उसने भिलाई में कोचिंग भी ली। बातचीत के दौरान छात्र ने मेडिकल शिक्षा को लेकर अपनी रुचि और आगे की पढ़ाई के संबंध में भी जानकारी साझा की।

      उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने हिमांशु का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब पूरी लगन, मेहनत और अनुशासन के साथ पढ़ाई करते हुए अपने उज्ज्वल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि अपनी मेहनत और उपलब्धियों से माता-पिता एवं परिवार के सपनों को पूरा करने के साथ जिले का नाम भी रोशन करें। उप मुख्यमंत्री ने हिमांशु को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉक्टर के रूप में शिक्षा पूरी करने के बाद अच्छे संस्थानों और अस्पतालों में कार्य कर अनुभव प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के साथ अपने क्षेत्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी बनाए रखें। अपनी शिक्षा और अनुभव का उपयोग जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए करने का प्रयास करें, ताकि आपकी सफलता का लाभ समाज और स्थानीय लोगों तक भी पहुंच सके।

उप मुख्यमंत्री की विशेष पहल से इसी सत्र में शुरू हो रहा मेडिकल कॉलेज
        उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की विशेष पहल से कवर्धा मेडिकल कॉलेज का संचालन इसी शैक्षणिक सत्र से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ प्रारंभ हो रहा है। मेडिकल कॉलेज की शुरुआत से कवर्धा जिले और आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का नया अवसर उपलब्ध हुआ है। अब विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के लिए अन्य बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी और जिले में ही मेडिकल शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होगी। मेडिकल कॉलेज के पहले सत्र में प्रवेश लेने वाला छात्र भी कवर्धा जिले के सहसपुर लोहारा का रहने वाला है। यह जिले के लिए गर्व की बात है कि कवर्धा में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत जिले के ही विद्यार्थी के प्रवेश से हुई है।
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छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के चेन्नई रोड शो में टूर ऑपरेटर्स से सीधा संवाद, छत्तीसगढ़ भ्रमण के लिए पर्यटकों को जोड़ने पर जोर

छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन बाजार से जोड़ने और राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने चेन्नई में “छत्तीसगढ़ टूरिज्म रोड शो” का भव्य आयोजन किया। फिक्की के सहयोग से आयोजित इस रोड शो में चेन्नई के 130 से अधिक ट्रैवल एजेंट एवं टूर ऑपरेटरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकों में छत्तीसगढ़ और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के बीच सार्थक संवाद हुआ, जिससे भविष्य में पर्यटक समूहों को छत्तीसगढ़ भ्रमण पर भेजने तथा कारोबारी साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुईं। 

 


दक्षिण भारत के पर्यटन बाजार से छत्तीसगढ़ को जोड़ने की पहल

चेन्नई में आयोजित यह रोड शो छत्तीसगढ़ को दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने की रणनीतिक पहल के रूप में सामने आया। रोड शो में छत्तीसगढ़ के पर्यटन उत्पादों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और निवेश की संभावनाओं को चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। B2B बैठकों के माध्यम से दोनों राज्यों के स्टेकहोल्डर्स को सीधे संवाद और संभावित व्यावसायिक सहयोग का अवसर मिला। कार्यक्रम में हुई चर्चा में पर्यटन व्यवसायियों की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष  श्री नीलू शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उनके संबोधन ने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों को छत्तीसगढ़ के पर्यटन से जोड़ने और राज्य की पर्यटन संभावनाओं के प्रति प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन (IAS) तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे (IAS) भी उपस्थित रहे। श्री चौबे ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन उत्पादों तथा राज्य में उपलब्ध निवेश संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। 

तमिल भाषा में पहली बार छत्तीसगढ़ पर्यटन का प्रस्तुतीकरण

रोड शो का सबसे खास आकर्षण रहा—छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और संभावनाओं को पहली बार तमिल भाषा में स्थानीय स्टेकहोल्डर्स के समक्ष प्रस्तुत किया जाना। इस पहल ने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों और स्थानीय पर्यटकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने अपने संबोधन में तमिल और अंग्रेजी भाषा में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं विरासत संपदा की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने राज्य की पर्यटन संपदा को देश के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। 

तमिलनाडु के पर्यटन क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों की मौजूदगी

रोड शो में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की सहायक निदेशक सुश्री एस. पद्मावती, फिक्की छत्तीसगढ़ टूरिज्म कमेटी के चेयरपर्सन एवं फिक्की छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री जसप्रीत सिंह भाटिया, फिक्की तमिलनाडु स्टेट काउंसिल के को-कन्वीनर श्री श्रीहरन बालन तथा तमिलनाडु पर्यटन के निदेशक डॉ. वी.पी. जयसीलन (IAS) सहित पर्यटन क्षेत्र के अनेक प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। 

चेन्नई में पदस्थ छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा किया आत्मीय जुड़ाव

रोड शो की एक विशेष उपलब्धि यह भी रही कि छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी श्री के.सी. देवासेनापति एवं श्री एलेक्स पॉल मेनन, जो वर्तमान में चेन्नई में पदस्थ हैं, विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए। दोनों अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ से अपने आत्मीय जुड़ाव और राज्य की पर्यटन संभावनाओं पर सारगर्भित विचार साझा किए। उनकी सहभागिता ने कार्यक्रम को एक अलग भावनात्मक आयाम प्रदान किया। 

व्यापारिक साझेदारी के साथ दिखी सांस्कृतिक निकटता

चेन्नई रोड शो में छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के बीच पर्यटन क्षेत्र में व्यावसायिक साझेदारी के साथ-साथ आत्मीय जुड़ाव और सांस्कृतिक निकटता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। एक ही मंच पर छत्तीसगढ़ से जुड़े वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ के पर्यटन कारोबारियों और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बनाया।

B2B बैठकों ने दोनों राज्यों के पर्यटन स्टेकहोल्डर्स को संभावित व्यापारिक सहयोग, पर्यटक समूहों के आवागमन और पर्यटन उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्यक्ष संवाद का मंच दिया। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दक्षिण भारतीय बाजार में नई पहचान और नए कारोबारी अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ी है। 

इस प्रकार चेन्नई का “छत्तीसगढ़ टूरिज्म रोड शो” केवल पर्यटन प्रचार का आयोजन नहीं रहा, बल्कि दक्षिण भारत के पर्यटन बाजार के साथ छत्तीसगढ़ के मजबूत व्यावसायिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनकर सामने आया।
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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन की समीक्षा बैठक सम्पन्न

 छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, उद्योग एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महानदी भवन, नवा रायपुर में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।


        मुख्य सचिव ने राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों एवं उद्योग प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर तकनीकी वस्त्र सम्मेलन, कानक्लेव आयोजित करने के निर्देश दिए। सम्मेलन में तकनीकी वस्त्रों के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के अंतर्गत उपलब्ध योजनाओं तथा उद्योगों की आवश्यकताओं पर जानकारी एवं संवाद किया जाएगा। तकनीकी शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच सीधा समन्वय स्थापित कर उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। 

       प्रारंभिक रूप से प्रत्येक तकनीकी संस्थान से 10-10 विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को तकनीकी वस्त्रों के वास्तविक औद्योगिक उपयोग का अनुभव मिलेगा तथा उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध होगा।  

हथकरघा एवं वस्त्र क्षेत्रों में विकसित होंगे 

        वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र हथकरघा एवं वस्त्र गतिविधियों वाले क्षेत्रों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को चरणबद्ध रूप से वस्त्र प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। प्रथम चरण में कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा एवं बिलासपुर जिलों के संस्थानों को स्थानीय वस्त्र उद्योगों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा।  

        राज्य के विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों को तकनीकी वस्त्रों से संबंधित अनुप्रयोग आधारित अनुसंधान, उत्पाद विकास, परीक्षण, नवाचार एवं प्रायोगिक परियोजनाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि, अधोसंरचना, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पर्यावरण, पैकेजिंग एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़ी राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 

        मिशन की योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन, विभागों एवं संस्थानों के बीच समन्वय तथा परियोजनाओं की नियमित निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी। यह इकाई तकनीकी संस्थानों एवं उद्योगों से परियोजना प्रस्ताव प्राप्त कर उन्हें मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार कराने, भारत सरकार को स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करने तथा स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। इकाई के गठन तक ग्रामोद्योग विभाग में राज्य स्तरीय समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

      बैठक में उद्योग विभाग, तकनीकी शिक्षा संचालनालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर तथा हथकरघा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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राज्यपाल श्री डेका ने उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन का किया आत्मीय स्वागत

 उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन के छत्तीसगढ़ आगमन पर राज्यपाल श्री रमेन डेका, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में उनका आत्मीय स्वागत किया।


       उपराष्ट्रपति का स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री श्री दयालदास बघेल, वाणिज्य एवं उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी ) श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन,  राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, राज्य सभा सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने आत्मीय स्वागत की। इसी प्रकार कौशल विकास,  तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री अनुज शर्मा, श्री सुनील सोनी, श्री मोती लाल साहू और जनप्रतिनिधि श्री अशोक बजाज और मुख्य सचिव श्री विकासशील, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, जनप्रतिनिधियों ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन का स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में आत्मीय स्वागत किया।
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बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में देश में प्रथम - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं।


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनअभियान बनाया : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है।

उन्होंने कहा कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है।

कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’, किसान स्वयं दे रहे जमीन

मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है।

इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके।

इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।

खेत में ही वर्षा जल को रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और जल सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।

JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम

जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।

‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा।

दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया।

अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है।

इस प्रकार अभियान के अलग-अलग चरणों में छत्तीसगढ़ ने बड़े पैमाने पर जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाओं को विकसित और दर्ज किया है। इन प्रयासों का मूल उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना, स्थानीय स्तर पर उसका संचयन करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है।

छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में

राज्य स्तर की उपलब्धि के साथ ही छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में जल संरक्षण को स्थानीय समुदायों से जोड़ते हुए गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्य किए गए हैं। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप जल संरचनाओं के निर्माण के साथ लोगों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि जब शासन की योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य को भी जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है।

26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक

राज्य में किए जा रहे जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। साथ ही पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।

भू-जल की स्थिति में सुधार के लिए राज्य में जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के साथ पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और स्थानीय स्तर पर नियमित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के मंत्र को जमीन पर उतार रहा छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन - जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को छत्तीसगढ़ ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप धरातल पर उतारा है। प्रदेश की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की आवश्यकता और जल उपलब्धता के अनुसार जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।

राज्य का प्रयास है कि बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए। इससे न केवल भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सिंचाई, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए जल उपलब्धता को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के अपने अनुभवों, नवाचारों और सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

हर राज्य का हो अपना ‘कैच द रेन’ प्लान : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मेलन में देशभर में जल संरक्षण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप, भू-जल स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे। इससे जल संरक्षण के लिए राज्यवार स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति निर्धारित की जा सकेगी।

उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ प्रारंभ करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने तथा अभियान की प्रगति की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन महीने में समीक्षा करने का भी सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी - इन तीनों के समन्वय से जल संरक्षण के प्रयासों को अधिक परिणाममूलक बनाया जा सकता है।

जल संरक्षण से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बारिश का पानी खेतों और गांवों में रोकने तथा उसे जमीन में पहुंचाने से भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। इसका सीधा लाभ खेती को मिल सकता है और किसानों की मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

जल उपलब्धता बेहतर होने से कृषि और उससे जुड़े आजीविका के अवसरों को भी मजबूती मिल सकती है। गांवों में पेयजल स्रोतों की स्थिति बेहतर होने से परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम में भी कमी आ सकती है।

छत्तीसगढ़ का यह मॉडल बताता है कि जल संरक्षण केवल संरचनाओं के निर्माण का विषय नहीं है। यह सरकार, किसान, पंचायत और समाज की साझा जिम्मेदारी है। खेत का एक छोटा-सा हिस्सा पानी के लिए छोड़ने से शुरू हुई पहल भविष्य के लिए जल सुरक्षित करने के बड़े अभियान का आधार बन सकती है।

शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस एवं समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अधिकारी कर्मचारी को किया सम्मानित

 मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले मंत्रालयीन अधिकारी एवं कर्मचारियों को जुलाई माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इसी प्रकार से ई-ऑफिस में सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग को दूसरा तथा ग्रामोद्योग विभाग को तीसरे स्थान पर सम्मानित किया गया। 


मुख्य सचिव ने सभी सम्मानित प्रशंसा पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में लगातार अच्छा प्रदर्शन करें यही अपेक्षा है। उन्होंने आई-गाट पर प्रत्येक माह कम से कम 3 से 4 कोर्स प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी अपने विभाग की आवश्यकता के अनुसार अवश्य करें। मुख्य सचिव ने प्रदेश स्तर पर आई गाट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। 

संयुक्त सचिव से कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में ई-ऑफिस रैंकिंग के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक प्रथम, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन द्वितीय, आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव श्री दूरदेशी राम सोन्टापर विभाग प्रथम स्थान, श्रम विभाग के उप सचिव श्री विपुल कुमार गुप्ता द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-8) के उप सचिव श्रीमती ऋतु वर्मा तृृतीय स्थान पर सम्मानित किया हुए। गृह विभाग के अवर सचिव श्री पूरन लाल साहू प्रथम स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-1) के अवर सचिव श्री कैलाश कुमार नेताम द्वितीय स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अवर सचिव श्रीमती दिव्या वैष्णव तृतीय स्थान पर सम्मानित किया। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अनुभाग अधिकारी श्री वीरेन्द्र कुमार प्रथम स्थान, अनुभाग अधिकारी श्री जीवन लाल नेताम द्वितीय स्थान, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अनुभाग अधिकारी श्री योगेन्द्र कुमार साहू तृतीय स्थान पर सम्मानित किया हुए। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री मोहम्मद शाहिर अंसारी प्रथम स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के सहायक अनुभाग अधिकारी श्रीमती प्रिया बागड़े द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग (कक्ष-4) के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री जलेश राम तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। 

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मुकेश राम प्रधान प्रथम स्थान, अनुसूचित जाति विकास विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री गौरव कुमार राय द्वितीय स्थान, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रीमती अंजू दत्ता तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री प्रभु सिंह राठिया प्रथम स्थान, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री संदीप कुमार तारम द्वितीय स्थान, नगरीय प्रशासन विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्री उमेश यादव तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए। आदिम जाति विकास विभाग के सहायक ग्रेड-2 श्री शेष नारायण साहू प्रथम स्थान, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की डाटा एन्ट्री ऑपरेटर श्रीमती माया देवांगन द्वितीय स्थान, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के सहायक ग्रेड-श्री तरूण कुमार धृतलहरे तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया।

अटेंडेंस रेंक में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले में अवर सचिव श्री अनिल तिर्की, निज सचिव सुश्री आराधना साहू, अनुभाग अधिकारी श्री आशिष कुमार शर्मा, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री आशुतोष वर्मा, अनुभाग अधिकारी श्री अश्वनी कुमार भतपहरी, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री भागेश कुमार ध्रुव, अवर सचिव श्री भूपेन्द्र सिंह राजपूत, अवर सचिव श्रीमती दिव्या वैष्णव, उप सचिव श्रीमती हेमिन बाघे, भृत्य श्री किशोर कुमार, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री लोक नारायण शर्मा, अनुभाग अधिकारी श्रीमती मंजूषा राजपूत, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मेलू राम ध्रुव, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री मिर्जा मुस्कान बेग, अनुभाग अधिकारी श्री मुकेश कुमार शाकार, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री नरेश कुमार बाघमार, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री पवन कुमार साहू, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रीमती पुष्पांजली गजभिये, भृत्य श्री राज कुमार सोरी, सचिव (भारसाधक) श्री राजेश सिंह राणा,  स्टैनो टायपिस्ट सुश्री राखी सिदार, स्टैनो टायपिस्ट श्री रमाकांत, वरिष्ठ सचिवालय सहायक सुश्री रूपाली तिवारी, सहायक अनुभाग अधिकारी श्री शिवचरण राठौर,  सहायक अनुभाग अधिकारी श्रीमती सुधा शेंडे, सहायक ग्रेड-01 श्री तरूण कुमार धृतलहरे, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री विवेक सोनी को रैंकिंग एक के लिए सम्मानित किया गया।

तीन माह का ई-ऑफिस रैंकिंग में आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव, श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत प्रथम स्थान, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक द्वितीय स्थान, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन तृतीय स्थान सम्मानित किया गया।

तीन माह के लिए अडेंटेंस रैकिंग में उच्च शिक्षा विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री लोक नारायण शर्मा प्रथम स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग के भृत्य श्री राज कुमार सोरी द्वितीय स्थान, सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मेलू राम ध्रुव तृतीय स्थान पर सम्मानित किया गया।

तीन माह के लिए डिपार्टमेंट रैकिंग में प्रथम स्थान में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वितीय, गृह विभाग तृतीय स्थान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सम्मानित किया गया।
ई-ऑफिस रैंकिंग विभागाध्यक्ष के अधिकारियों में उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त सुश्री रीता यादव प्रथम स्थान, आदिम जाति विकास विभाग के आयुक्त श्री डी. राहुल वेंकट द्वितीय स्थान, उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक श्री जॉन तिग्गा तृतीय स्थान, चिकित्सा शिक्षा विभाग सहायक ग्रेड-3 श्री वेद प्रकाश देवांगन चतुर्थ स्थान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग डाटा एन्ट्री ऑपरेटर श्री पीताम्बर प्रसाद पाचवें स्थान पर सम्मानित किया गया।

ई-ऑफिस जिला कार्यालय में जिला रायपुर की सहायक परियोजना अधिकारी सुश्री अनिता जैन प्रथम स्थान, जिला सक्ती कार्यालय सहायक सह डाटा एन्ट्री ऑपरेटर सुश्री नंदनी सोनी द्वितीय स्थान, रायपुर जिले के नोडल अधिकारी श्री पंकज कुमार शर्मा तृतीय स्थान, सक्ती जिला के ई-जिला तकनीकी प्रबंधक श्री तुलसी देवांगन चौथा स्थान, कबीरधाम जिले के अधीक्षक श्री राजेन्द्र सिंह धु्रर्वे पांचवा स्थान पर सम्मानित किया गया।

आई-गाट रैंकिंग में श्री गौतम कुमार देवांगन, चौकीदार, आयुक्त बिलासपुर को प्रथम स्थान, श्री प्रेम नारायण नायक, व्याख्याता, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार, द्वितीय स्थान और श्री दिनेश कुमार, पुलिस आरक्षक, पुलिस अधीक्षक बालोद, तृतीय स्थान सम्मानित किया गया।
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राष्ट्रपति से भेंट कर लौटे प्रतिभावान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट कर लौटे छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को राष्ट्रपति भवन की अपनी यादगार यात्रा और राष्ट्रपति महोदया के साथ हुए आत्मीय संवाद के अनुभव सुनाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को इस विशेष अवसर के लिए बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है। प्रदेश के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।

 


मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी यात्रा के संबंध में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा। राष्ट्रपति महोदया ने उनसे सहजता और आत्मीयता के साथ बातचीत की तथा उनकी शिक्षा, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन के भ्रमण और वहां बिताए क्षणों से जुड़े अपने अनुभव भी मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिले तो वे हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकते हैं। ऐसे अवसर विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके सपनों को नई ऊंचाई देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।

उल्लेखनीय है कि रक्षाबंधन के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट और संवाद का विशेष अवसर प्राप्त हुआ था। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदया ने विद्यार्थियों से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

राष्ट्रपति भवन में इस मुलाकात का एक अत्यंत भावुक और यादगार क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने CWSN (Children with Special Needs) विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को स्वयं राखी बांधी। राष्ट्रपति महोदया का यह आत्मीय स्नेह नुकेश के साथ ही वहां उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी जीवनभर संजोकर रखने वाली स्मृति बन गया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक भी राष्ट्रपति भवन में देखने को मिली। छात्राओं ने प्रदेश के पारंपरिक सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक सौंदर्य से सजी इस प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्तुति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह विशेष रूप से प्रसन्नता की बात है कि प्रदेश के बच्चों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़े राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा के साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी सुंदर परिचय दिया। उन्होंने कहा कि हमारी लोक संस्कृति हमारी पहचान और हमारी अमूल्य धरोहर है। नई पीढ़ी जब इसे आत्मसात कर देश के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुत करती है, तो हमारी परंपराओं को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिलती है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्रपति महोदया से प्राप्त प्रोत्साहन और इस यात्रा से मिले अनुभव को वे अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को बड़ा रखें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपनी उपलब्धियों से परिवार, प्रदेश और देश को गौरवान्वित करें।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट करने वाले विद्यार्थियों में नारायणपुर जिले की राजवती पोयाम, सुकमा जिले के हिमांशु ठाकुर, दुर्ग जिले की पायल राजानी, महासमुंद जिले की रागनी साहू, रायपुर जिले के नुकेश कुमार वर्मा तथा महासमुंद जिले के दुर्गेश साहू एवं डिगेश सेन शामिल थे।

इस अवसर पर डॉ. मुक्ति बैस, राज्य नोडल अधिकारी, समग्र शिक्षा, रायपुर तथा श्री चंद्रशेखर मिथलेश, व्याख्याता (भौतिकी), शासकीय आशी बाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद भी उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ में यूसीसी पर व्यापक मंथन: बस्तर से सरगुजा तक की उठी आवाज

 छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का सर्वसमावेशी प्रारूप तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आज यूसीसी समिति के समक्ष बस्तर से लेकर सरगुजा तक के प्रतिनिधियों की आवाज गूंजी। इस परिचर्चा में सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष और प्रतिनिधियों, अध्यक्ष राज्य महिला आयोग और अध्यक्ष राज्य फिल्म विकास निगम ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े ने सभी सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ताने-बाने का पूरा ध्यान रखा जाएगा।


​      इस दौरान कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जैसी प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए आदिवासियों की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टता को नए कानून में पूर्ण संरक्षण देने की बात कही। इसके साथ ही विवाह पंजीयन, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी समिति के साथ गंभीर विचार-विमर्श हुआ।

       ​महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक बदलावों का समर्थन किया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने और धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के संदर्भ में यूसीसी की आवश्यकता को रेखांकित किया। वहीं, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-कला और जनजातीय धरोहर को अक्षुण्ण रखने का सुझाव देते हुए कहा कि वैवाहिक और संपत्ति अधिकारों में समानता से समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को नया आत्मविश्वास और कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

      ​संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत समिति प्रदेशभर में व्यापक जन-संवाद चला रही है। प्रस्तावित संहिता का मूल उद्देश्य धर्म या समुदाय के भेदभाव से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए एक समान विधिक ढांचा तैयार करना है। इसके तहत विवाह एवं तलाक,भरण - पोषण,उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव इन संबंध में विचार और सुझावों पर समिति मंथन करेगी। वर्तमान में समिति जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम जनता, कानूनविदों और सामाजिक संगठनों की राय जुटा रही है, ताकि छत्तीसगढ़ में एक पारदर्शी, न्यायसंगत और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता लागू की जा सके।
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रायपुर के नंदनवन का 50 करोड़ से होगा कायाकल्प

 रायपुर जिले के अटारी गांव स्थित नंदनवन को अब एक नए और आकर्षक स्वरूप में पुनर्विकसित किया जाएगा। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों ने मुख्य सचिव श्री विकासशील के समक्ष नंदनवन पुनर्विकास की प्रस्तावित परियोजना का प्रस्तुतिकरण दिया।


परियोजना की मुख्य बातें

        नंदनवन के कायाकल्प और विकास कार्य में लगभग 50 करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत यह पूरी परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित होगी। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बॉटनिकल गार्डन को नए सिरे से पुनर्जीवित और विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने परियोजना में पर्यटकों की सुविधा और आकर्षण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न जन-सुविधाएं विकसित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

       मुख्य सचिव द्वारा दिए गए समीक्षा बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, NRDA के सीईओ श्री चंदन कुमार समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 छत्तीसगढ़ में उपलब्ध समृद्ध खनिज संपदा और क्रिटिकल मिनरल्स की व्यापक संभावनाएं प्रदेश को विकास के नए क्षितिज पर ले जाने की क्षमता रखती हैं। हमारा लक्ष्य केवल धरती से खनिज निकालना नहीं, बल्कि अन्वेषण से उत्खनन, प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करना है। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के प्रमुख आधार होंगे। आज के तेजी से बदलते वैश्विक और तकनीकी परिदृश्य में इन खनिजों का महत्व बहुत आगे बढ़ चुका है। रक्षा उद्योग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर उभरते क्षेत्र के लिए इन खनिजों की विश्वसनीय उपलब्धता आवश्यक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ महत्वपूर्ण एमओयू भी किए गए।

विकसित भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता आवश्यक

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख आर्थिक और तकनीकी शक्तियों में अपनी जगह बना रहा है। मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के माध्यम से देश में क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, प्रसंस्करण और इनसे जुड़े उन्नत उद्योगों के विकास को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सभी प्रमुख देश अपने रणनीतिक संसाधनों और उनकी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में जुटे हैं। ऐसे समय में भारत के लिए क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की उपलब्धता में आत्मनिर्भर होना आर्थिक आवश्यकता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

रक्षा से एआई तक - नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं क्रिटिकल मिनरल्स

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रक्षा उद्योग तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी तकनीक की प्रभावशीलता को दुनिया ने देखा। आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में अनेक स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए इनकी सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार एआई, सेमीकंडक्टर, बैटरी, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल प्रौद्योगिकी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भविष्य की अर्थव्यवस्था में इनकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली है।

क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के पास बड़ी संभावनाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में है और अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी प्रदेश नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट की संभावनाएं मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक्स हैं।

मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं है। यह अन्वेषण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, नवाचार और नए उद्योगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ तथा देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का अवसर है। ये क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स विकसित भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी बन सकते हैं।

पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच खनिज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि खनिज आधारित उद्योगों की पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित हो। अन्वेषण और उत्खनन के बाद खनिज बाहर भेजने के बजाय उनका प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और उनसे संबंधित एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रदेश में हो, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम आर्थिक लाभ छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को मिले।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे आधुनिक उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता होगी। खनिज संसाधनों की निकट उपलब्धता प्रदेश को इन उद्योगों के लिए स्वाभाविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करेगी।

नई औद्योगिक नीति और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से निवेश को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नए जमाने के उद्योगों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए निवेश अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। नई औद्योगिक नीति में उभरते और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के लिए अनेक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के माध्यम से कम एवं मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को सरल किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 से विभिन्न अनुमतियों और एनओसी की प्रक्रिया भी सुगम हुई है।

उन्होंने कहा कि पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क एवं विद्युत शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन सहित विभिन्न सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य में खनिज संपदा, ऊर्जा, भूमि, कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना की उपलब्धता क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योगों के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करती है।

खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपए था। ढाई वर्ष पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व का उपयोग प्रदेश के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उद्योग जगत और निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आज पूरा देश छत्तीसगढ़ की ओर देख रहा है। प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और तेजी से औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह रोड शो छत्तीसगढ़ में निवेश, तकनीकी सहयोग और नई साझेदारियों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा तथा प्रदेश को देश की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता देश की रणनीतिक आवश्यकता : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। लंबे समय तक देश अनेक महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ इस दिशा में तेजी से काम हुआ है।

उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग वाहनों, इनवर्टर और ई-रिक्शा से लेकर जहाजों तथा आधुनिक रक्षा उपकरणों तक में होता है। उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल खनिजों का दोहन नहीं, बल्कि सतत और जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देना है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए।

खनन के साथ सुनियोजित और टिकाऊ विकास भी जरूरी : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच छत्तीसगढ़ के पास अपनी समृद्ध खनिज संपदा और मजबूत औद्योगिक आधार के बल पर नई संभावनाओं को साकार करने का बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की सफलता केवल उनके आवंटन से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव अन्वेषण, निवेश, प्रोसेसिंग सुविधाओं की स्थापना, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन के रूप में दिखाई देना चाहिए। खनन और औद्योगिक निवेश के साथ आवास, परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी नागरिक सुविधाओं का सुनियोजित विकास भी जरूरी है। इसके लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।

निवेशकों को हर स्तर पर मिलेगा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट : मुख्य सचिव श्री विकास शील

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि राज्य सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए 43 सेवाओं को रिस्क रेटेड अप्रोच के तहत अधिसूचित किया गया है। लो और मीडियम रिस्क गतिविधियों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन तथा हाई रिस्क गतिविधियों के लिए आवश्यक अनुमति की व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं की समयबद्ध स्थापना के लिए रणनीतिक परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खनन क्षेत्र में सर्वे, एनफोर्समेंट, परिवहन, रॉयल्टी भुगतान और नीलामी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जा रहा है तथा भविष्य में ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और अधिक तेज तथा पेपरलेस बनाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों में निवेशकों को सक्रिय हैंडहोल्डिंग सपोर्ट दे रही है। अब खनिज ब्लॉक्स की नीलामी लैंड शेड्यूलिंग के बाद की जा रही है, जिससे निवेशकों को भूमि, वन क्षेत्र एवं संबंधित प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी पहले ही उपलब्ध हो सके।

मुख्य सचिव ने निवेशकों से केवल खदानों में निवेश तक सीमित न रहते हुए पूरी मिनरल वैल्यू चेन और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने वाले नए बिजनेस मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया।

देश में अब तक 56 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी

भारत सरकार के खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने कहा कि भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढ़ने के साथ क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। ये खनिज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रक्षा, एयरोस्पेस और उर्वरक सहित अनेक उन्नत उद्योगों के लिए जरूरी हैं।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी का अधिकार मिलने के बाद अब तक 88 ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ की खनिज संभावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत के पहले लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से हुई। आठवीं किश्त में 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स में से 5 छत्तीसगढ़ में हैं।

उन्होंने बताया कि नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और निवेशक अनुकूल बनाने के लिए माइलस्टोन आधारित अनुपालन, समयबद्ध स्वीकृतियों, यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल और बीमा सिक्योरिटी बॉन्ड जैसे अनेक सुधार किए गए हैं। उन्होंने निवेशकों से इन अवसरों का लाभ उठाते हुए भारत के सुरक्षित और आत्मनिर्भर क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम के निर्माण में भागीदार बनने का आग्रह किया।

वैज्ञानिक अन्वेषण और पारदर्शी व्यवस्था पर राज्य का विशेष जोर : खनिज सचिव श्री पी. दयानंद

खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के सतत उपयोग, वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी नीलामी और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण सहित विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से वैज्ञानिक सर्वेक्षण, भू-आंकड़ों के संकलन और मैपिंग को मजबूत कर रही है। ऑनलाइन एवं पारदर्शी व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि संभावित खनिज क्षेत्रों को तेजी से उत्पादनशील खदानों में परिवर्तित किया जा सके। सरकार का लक्ष्य खनिज उत्खनन के साथ खनिज आधारित उद्योग, स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और मूल्य संवर्धन को भी गति देना है।

ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट, 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे

खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में सतत खनन पद्धतियों के साथ खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को लगभग 16 हजार 700 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है। खनिज राजस्व में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है। प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की गई है, जिनसे लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, गोल्ड, टंगस्टन, निकेल, क्रोमियम, कॉपर, लेड-जिंक और डायमंड सहित विभिन्न महत्वपूर्ण खनिजों की व्यापक संभावनाएं हैं। कटघोरा में लिथियम, बलरामपुर में ग्रेफाइट-वैनेडियम-गैलियम तथा बस्तर के टिन बेल्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में अन्वेषण एवं नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ 2.0 और ई-नीलामी जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत की गई है। खदानों और माइनर मिनरल्स की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे का भी उपयोग किया जा रहा है।

ई-रेत संगवारी से पीएम आवास हितग्राहियों को सुविधा, टिन पोर्टल से आदिवासी परिवारों को मिलेगा उचित मूल्य

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा।

इसी प्रकार दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से टिन पोर्टल शुरू किया गया है। इन डिजिटल पहलों से खनिज प्रशासन में तकनीक के उपयोग के साथ आम नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।

सीएमडीसी के दो महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इसके साथ ही कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए सीएमडीसी और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच भी एमओयू हुआ। इन समझौतों से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और निवेश की संभावनाओं को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप बसंत कदम सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, खनिज क्षेत्र से जुड़े निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स उपस्थित थे।
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समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मुस्लिम समाज की बैठक 1 सितंबर को रायपुर में

 राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। उक्त समिति को सुझाव देने के लिए रायपुर मुस्लिम समाज की ओर से एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया है। यह जानकारी छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड (कैबिनेट मंत्री दर्जा) के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने दी है।


1 सितंबर को गुरु घासीदास ऑडिटोरियम में होगी बैठक  

           मुस्लिम समाज की यह बैठक 01 सितंबर 2026, मंगलवार को स्थान- गुरु घासीदास ऑडिटोरियम, कार्यालय छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड के सामने, कलेक्ट्रेट चौक, रायपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक में मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए गए सुझावों को एकत्रित किया जाएगा। इसके लिए रायपुर की समस्त मस्जिदों में जुमा को ऐलान के माध्यम से सूचना दी गई है।

दो प्रतियों में लिखित सुझाव लाने की अपील  

          आयोजकों ने अपील की है कि UCC के संबंध में सुझाव लिखित में अध्यक्ष, समान नागरिक संहिता समिति, छत्तीसगढ़ के नाम से संबोधित करते हुए दो प्रतियों में प्रस्तुत करें। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शहर काजी जनाब कारी डॉ. मोहम्मद इमरान अशरफी साहब और अध्यक्षता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता जनाब फैसल रिजवी साहब उपस्थित रहेंगे। मुस्लिम समाज द्वारा दिए गए सुझावों को बैठक में एकत्रित कर शाम 04:00 बजे समान नागरिक संहिता (UCC) समिति, छत्तीसगढ़ के माननीय सदस्यों के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत किया जाएगा।
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पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने शासकीय आवास में सुना ‘मन की बात’ का 137वां संस्करण, कहा—प्रधानमंत्री का संवाद जनभागीदारी और राष्ट्रनिर्माण की भावना को देता है नई ऊर्जा

 पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर स्थित अपने शासकीय आवास में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 137वें संस्करण का सामूहिक श्रवण किया। इस अवसर पर अंबिकापुर की महापौर श्रीमती मंजूषा भगत सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नागरिक उपस्थित रहे।


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश की विविध उपलब्धियों, सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर देशवासियों से संवाद किया। कार्यक्रम में इतिहास को डिजिटल माध्यमों से संरक्षित करने के अभिनव प्रयासों से लेकर युवाओं को नशे से दूर रखने, स्वच्छता, स्थानीय उद्यमिता, कृषि में वैज्ञानिक नवाचार और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए।

डिजिटल माध्यमों से इतिहास और विरासत के संरक्षण पर जोर

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने इतिहास और देश की समृद्ध विरासत को आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए सहेजने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे प्रयासों को आने वाली पीढ़ियों को अपने अतीत, गौरव और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। इतिहास, लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। इससे हमारी विरासत आने वाली पीढ़ियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।

नशा मुक्त युवा और विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री ने ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान के तहत ड्रग फ्री इंडिया के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया। युवाओं को नशे से दूर रखते हुए उनकी ऊर्जा को रचनात्मक और राष्ट्रहित के कार्यों में लगाने पर विशेष जोर दिया गया।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि युवा शक्ति भारत के भविष्य की आधारशिला है। स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त युवा ही विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान दे सकते हैं। समाज के हर वर्ग को मिलकर युवाओं के लिए सकारात्मक और प्रेरक वातावरण तैयार करना होगा।

तिरंगा यात्रा ने जगाई राष्ट्रप्रेम की भावना

प्रधानमंत्री ने अगस्त माह में देशभर में आयोजित भव्य तिरंगा यात्राओं का उल्लेख करते हुए इनमें लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी को राष्ट्रभावना की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है।

रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आत्मनिर्भर बनाने में पीएम स्वनिधि की भूमिका

‘मन की बात’ में छोटे रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली पीएम स्वनिधि योजना का भी उल्लेख किया गया। इस योजना के माध्यम से छोटे उद्यमियों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि छोटे व्यवसाय हमारे स्थानीय अर्थतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जब एक छोटा दुकानदार, ठेला संचालक या रेहड़ी-पटरी व्यवसायी अपने पैरों पर मजबूती से खड़ा होता है, तो इसका सीधा लाभ उसके परिवार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है।

स्वच्छता को निरंतर जनआंदोलन बनाए रखने का संदेश

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान की निरंतरता पर भी चर्चा की और स्वच्छता को केवल किसी अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन की आदत और सामाजिक जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि स्वच्छता और पर्यटन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। स्वच्छ पर्यटन स्थल न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा करते हैं। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है।

अमरनाथ यात्रा और आध्यात्मिक पर्यटन की समृद्ध परंपरा

प्रधानमंत्री ने हाल ही में संपन्न हुई श्री अमरनाथ जी की पावन यात्रा का उल्लेख करते हुए देश की आध्यात्मिक एवं धार्मिक यात्रा परंपरा की व्यापकता को रेखांकित किया। भारत में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक यात्राएं हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखती हैं। छत्तीसगढ़ भी राम वन गमन पथ, माता कौशल्या की नगरी और अनेक प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के माध्यम से देश की आध्यात्मिक पर्यटन परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

कृषि में आधुनिक विज्ञान और नवाचार से किसानों की समृद्धि

प्रधानमंत्री ने किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कृषि में नई तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और नवाचारों का उपयोग किसानों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अधिक सक्षम बनाने में सहायक है।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि कृषि में विज्ञान और तकनीक का समावेश किसानों के लिए नए अवसर खोल रहा है। आधुनिक नवाचारों के साथ स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है।

‘Vocal for Local’ से स्थानीय उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

प्रधानमंत्री ने स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘Vocal for Local’ के मंत्र को भी दोहराया। स्थानीय उत्पादों को अपनाने और उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने से कारीगरों, शिल्पकारों, छोटे उद्यमियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि हमारे स्थानीय शिल्प, हस्तकला, लोककलाएं और पारंपरिक उत्पाद केवल वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान के वाहक हैं। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से संस्कृति का संरक्षण होने के साथ-साथ कलाकारों और कारीगरों की आजीविका भी मजबूत होती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देश के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नवाचारों और जनभागीदारी की प्रेरक कहानियों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे संवाद समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और नागरिकों को अपने स्तर पर राष्ट्रहित में योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी संबोधन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ देश के करोड़ों नागरिकों को एक-दूसरे से जोड़ने और देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे रचनात्मक प्रयासों को साझा करने का सशक्त माध्यम है। प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन हमें अपनी संस्कृति, पर्यावरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, युवा शक्ति और विकास के लिए निरंतर बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।
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‘मन की बात’ देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचारों और प्रेरक प्रयासों को देती है राष्ट्रीय पहचान : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी का श्रवण किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का देश के 140 करोड़ नागरिकों से आत्मीय संवाद का सशक्त माध्यम है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे नवाचारों, प्रेरक प्रयासों और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले लोगों की उपलब्धियों को पूरे देश के सामने रखते हैं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देशवासियों को प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ कार्यक्रम की प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इसमें ऐसे अनेक विषयों और व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हैं, जिनके बारे में सामान्यतः देश के लोगों को जानकारी नहीं मिल पाती। इससे जहां अच्छे कार्य करने वाले लोगों का उत्साह बढ़ता है, वहीं उनके प्रयास लाखों देशवासियों के लिए प्रेरणा बनते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश के दूरस्थ गांवों और छोटे-छोटे क्षेत्रों में अनेक लोग बिना किसी प्रचार और स्वार्थ के समाज तथा राष्ट्रहित में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। कोई पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहा है, कोई स्वच्छता के लिए कार्य कर रहा है, तो कोई स्थानीय संसाधनों के माध्यम से नवाचार कर अपने क्षेत्र में बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ‘मन की बात’ के माध्यम से ऐसे सामान्य लोगों के असाधारण कार्यों को राष्ट्रीय पहचान देते हैं। इससे देश में सकारात्मकता और जनभागीदारी की भावना मजबूत होती है तथा दूसरे लोगों को भी कुछ नया और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।

‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आज ‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के संकल्प को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। युवा शक्ति विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में युवाओं को नशे से दूर रखना परिवार, समाज और राष्ट्र सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज को झेलने पड़ते हैं। स्वस्थ, समर्थ और ऊर्जावान युवा पीढ़ी ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नशामुक्ति के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने और युवाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

‘हर घर तिरंगा’ में दिखा देशवासियों का राष्ट्रप्रेम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रति देशवासियों के अभूतपूर्व उत्साह का भी उल्लेख किया। अभियान के अंतर्गत 8 करोड़ से अधिक देशवासियों ने तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी अपलोड की। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्रध्वज के प्रति देशवासियों के सम्मान, गौरव और गहरे भावनात्मक जुड़ाव की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ आज जन-जन का अभियान बन चुका है। ऐसे अभियान राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने के साथ प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका और कर्तव्यों का स्मरण कराते हैं।

पीएम स्वनिधि से मातृशक्ति को मिल रही आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की भी चर्चा की। रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यवसायों से जुड़ी महिलाओं को योजना के माध्यम से अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और देशभर में करीब 35 लाख महिलाएं इससे जुड़कर अपने छोटे व्यवसायों को नई गति दे रही हैं। आर्थिक रूप से सशक्त महिला न केवल अपने परिवार को मजबूत बनाती है, बल्कि समाज और देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

स्वच्छता केवल अभियान नहीं, जन-जन का संकल्प बने

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। स्वच्छता में स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब यह केवल सरकारी अभियान न रहकर प्रत्येक नागरिक की आदत और जिम्मेदारी बने।

उन्होंने कहा कि जब किसी गांव, शहर अथवा क्षेत्र के लोग स्वयं अपने परिवेश को स्वच्छ रखने का संकल्प लेते हैं, तो उसका प्रभाव केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उस स्थान की पहचान और वहां के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक बदलाव आता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, मोहल्ले, गांव, शहर और आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

अंतरिक्ष विज्ञान में बेटियों की उड़ान, छत्तीसगढ़ की महिमा राजपूत पर गर्व

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज भारत की बेटियां अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं। उनकी आकांक्षाओं की उड़ान अब धरती से अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘मन की बात’ में मिशन शक्ति सैट जैसे प्रेरक प्रयास का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से भारत सहित विभिन्न देशों की हजारों छात्राओं को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को समझने, सीखने और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए विशेष गौरव का विषय है कि प्रदेश की महिमा राजपूत भी इस महत्वपूर्ण मुहिम का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने महिमा राजपूत को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उनकी उपलब्धियां प्रदेश की दूसरी बेटियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करती हैं।

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेश के लिए गौरव

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की विभिन्न कड़ियों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अवसरों पर छत्तीसगढ़ और यहां के उल्लेखनीय प्रयासों का उल्लेख किया है। बस्तर ओलंपिक से लेकर मल्हार में मिले प्राचीन ताम्रपत्रों और काले हिरण के संरक्षण तक, छत्तीसगढ़ की विशिष्टताओं और उपलब्धियों को प्रधानमंत्री ने देशवासियों के सामने रखा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के नवाचारों, संस्कृति, विरासत और सकारात्मक प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव की बात है। इससे छत्तीसगढ़ के अच्छे कार्यों को देशभर में पहचान मिलने के साथ प्रदेश के लोगों का उत्साह भी बढ़ता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों को एक सूत्र में जोड़ती है। यह कार्यक्रम नागरिकों को स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, नवाचार, समाजसेवा और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों के लिए प्रेरित करने के साथ जनभागीदारी की भावना को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह सतत संवाद देशवासियों में कर्तव्यबोध जगाकर विकसित भारत के निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू एवं श्री पुरंदर मिश्रा, संतजन, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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लोक भवन में गूंजा अपनत्व का संदेश, दिव्यांग बच्चों ने राज्यपाल श्री रमेन डेका को बांधा रक्षा सूत्र

 रक्षाबंधन के पावन अवसर पर कोपल वाणी के श्रवण बाधित दिव्यांग बच्चों तथा मिनी मार्वेल्स स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आज लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल श्री रमेन डेका को अपने हाथों से बनाई गई राखियां बांधीं। बच्चों ने रक्षा सूत्र बांधकर राज्यपाल के स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की और उन्हें अपने हाथों से तैयार की गई राखियों की विशेषता भी बताई। इसके बाद बच्चों ने राज्यपाल का मुंह मीठा कराया।


मासूम हाथों से बनाई गई राखियां जब राज्यपाल श्री डेका की कलाई पर सजीं तो रक्षाबंधन का यह अवसर आत्मीयता और भावनाओं से भर उठा। राज्यपाल ने बच्चों के स्नेह को सहर्ष स्वीकार करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया तथा उपहार भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।

लोक भवन पहुंचकर बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था। विशेष रूप से कोपल वाणी के दिव्यांग बच्चों के लिए यह अवसर सम्मान, आत्मविश्वास और गौरव से भरा रहा। अपने हाथों से राखियां तैयार कर उन्हें राज्यपाल की कलाई पर बांधना बच्चों की रचनात्मकता, कौशल और आत्मनिर्भरता का सुंदर उदाहरण रहा। इस अवसर ने यह संदेश भी दिया कि दिव्यांग बच्चे समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें समान अवसर एवं प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

राज्यपाल श्री डेका ने बच्चों की प्रतिभा और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि रक्षाबंधन प्रेम, स्नेह और पारस्परिक विश्वास का पर्व है। बच्चों का यह आत्मीय स्नेह मन को छू लेने वाला है। उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि समाज को दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

इस अवसर पर कोपल वाणी की संस्थापिका श्रीमती पदमा शर्मा, श्रद्धा साहू एवं सोनिया दामनी उपस्थित रहीं। मिनी मार्वेल्स स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती अनुभूति श्रीवास्तव सहित शिक्षकगण भी उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का किया शुभारंभ

 रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बगिया कैम्प कार्यालय में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले की 50 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान कर उन्हें आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ा।


रक्षाबंधन के आत्मीय वातावरण में स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने मुख्यमंत्री श्री साय की कलाई पर राखी बांधी और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने भी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें साड़ी और मिठाई उपहार स्वरूप भेंट की। बहनों के बीच मुख्यमंत्री का आत्मीय अंदाज कार्यक्रम को विशेष बना गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की बुनियाद है। हमारी बहनें आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं। ई-रिक्शा उनके लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि नियमित आय और सम्मानजनक स्वरोजगार का माध्यम बनेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी आजीविका गतिविधियों से भी जोड़ा जाए, जिनसे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकें।

पिछले रक्षाबंधन पर 14, इस बार 50 बहनों को ई-रिक्शा की सौगात

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बहनों को स्वरोजगार से जोड़ने की यह पहल लगातार आगे बढ़ रही है। पिछले रक्षाबंधन पर्व पर भी स्व-सहायता समूहों की 14 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान किए गए थे। इस वर्ष ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना के माध्यम से 50 और बहनों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं।

उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर में भी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 92 ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। ई-रिक्शा चला रही महिलाएं आज प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपए तक की आमदनी अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आय बढ़ने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता भी बढ़ी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी बहन के हाथ में स्वयं की कमाई आती है तो उसका लाभ पूरे परिवार को मिलता है। बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आवश्यकताओं और भविष्य के लिए बचत जैसे अनेक कार्यों में यह आय सहारा बनती है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की अधिक से अधिक महिलाओं को इसी तरह आयमूलक गतिविधियों से जोड़ना है।

किराना, सब्जी व्यवसाय से लेकर ई-रिक्शा तक, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं दीदियां

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज हमारी दीदियां किराना दुकान, सब्जी व्यवसाय और विभिन्न छोटे उद्यमों सहित अनेक आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। अब ई-रिक्शा जैसी सेवाओं में भी महिलाएं आगे आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। सरकार महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की दिशा में भी लगातार कार्य कर रही है, ताकि उनके उद्यम टिकाऊ हों और उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार प्रारंभ करने और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए मुद्रा ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। महिलाओं को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेकर अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप उद्यम शुरू करना चाहिए।

‘जशपुर एक्सप्रेस’ से स्वावलंबन की राह होगी आसान

‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना के माध्यम से महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराकर उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे एक ओर महिलाओं को नियमित आमदनी का माध्यम मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर आवागमन की सुविधा भी बेहतर होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रिक्शा प्राप्त करने वाली बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपने परिश्रम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम करें। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। शासन की योजनाओं और अपनी मेहनत के बल पर वे परिवार की आर्थिक शक्ति बनने के साथ प्रदेश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

बगिया में विकास कार्यों का भी भूमिपूजन

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने बगिया क्षेत्र को विकास कार्यों की सौगात भी दी। उन्होंने लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत से बगिया में बनने वाले विश्राम गृह का भूमिपूजन किया। इसके साथ ही बगिया में यादव मोहल्ला तक बनने वाली सीसी सड़क के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है। गांवों में सड़क, भवन एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास से लोगों के जीवन में सहूलियत बढ़ने के साथ स्थानीय विकास को भी गति मिलती है।

राखी के स्नेह के साथ आत्मनिर्भरता का संकल्प

रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बहनों और मुख्यमंत्री के बीच आत्मीय संवाद भी हुआ। स्व-सहायता समूह की दीदियों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बांधकर अपना स्नेह व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बहनों को साड़ी और मिठाई भेंट करते हुए उनके सुखद, समृद्ध और आत्मनिर्भर भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बहनों का स्नेह और आशीर्वाद उन्हें प्रदेश के विकास और जनसेवा के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश की प्रत्येक बहन को आगे बढ़ने का अवसर मिले, वह आर्थिक रूप से सशक्त बने और अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्धि में सहभागी बने।

इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित थीं।
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बहनों का सम्मान, सशक्तिकरण और खुशहाली से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम केरसई में आज भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। यहां आयोजित ‘रक्षाबंधन एवं बहनों से संवाद’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के पहुंचने पर क्षेत्र की बहनों ने बड़े उत्साह और आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। बहनों के स्नेह से अभिभूत मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद किया, उनकी बातें सुनीं और सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के स्नेह का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और सुरक्षा के संकल्प का भी पर्व है। जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो वह धागा जीवन भर उसके सम्मान और सुख-दुःख में साथ खड़े रहने की जिम्मेदारी से जोड़ देता है। प्रदेश की माताओं और बहनों का स्नेह तथा आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री ने बहनों से कहा कि “आपने मुझे जो स्नेह और विश्वास दिया है, उसे बनाए रखना मेरा दायित्व है। मेरा फर्ज है कि आपका और क्षेत्र की जनता का सिर हमेशा ऊंचा रहे तथा विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।” उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के सम्मान, सशक्तिकरण और खुशहाली से ही परिवार मजबूत होगा और मजबूत परिवारों से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा।

केरसई को मिली विकास की अनेक सौगातें

रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्रवासियों की मांगों को आत्मीयता से स्वीकार करते हुए अनेक विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने घासीमुंडा में जर्जर प्राथमिक शाला के स्थान पर नया शाला भवन, केरसई तालाब का सौंदर्यीकरण, केरसई में मिनी स्टेडियम, केरसई एवं घासीमुंडा के बजरंग बली मंदिरों का जीर्णोद्धार, मुख्य मार्ग से अरुण के घर तक सीसी सड़क, ग्राम पंचायत कोहपानी के गढ़वामुड़ा यादव बस्ती में सामुदायिक भवन, घासीमुंडा में सामुदायिक भवन तथा ग्राम ऊपरकछार में महतारी सदन बनाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने केरसई में लगभग 84.69 लाख रुपए के विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार गांवों में सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, सामुदायिक भवन सहित सभी आवश्यक अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार कर रही है। विकास कार्यों में ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और आने वाले समय में भी क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्य निरंतर स्वीकृत किए जाएंगे।

महिला सशक्तिकरण से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की नीतियों के केंद्र में माताओं और बहनों का सम्मान, आर्थिक स्वावलंबन और खुशहाली है। आज प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई शक्ति दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख बहनों को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई तथा सिलाई-कढ़ाई और अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए कर रही हैं। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदियों का उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब आधुनिक तकनीक से भी जुड़ रही हैं और इसके माध्यम से आय के नए अवसर प्राप्त कर रही हैं। जशपुर जिले की बहनों को 50 ई-रिक्शा प्रदान किए जाने से उनके लिए स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह खुलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि गांव की प्रत्येक महिला को उसकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आजीविका का अवसर मिले। महिलाओं के हाथों में आर्थिक शक्ति आने से परिवार और समाज दोनों मजबूत होते हैं।

किसान, गरीब और हर जरूरतमंद परिवार के साथ सरकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए भी प्रतिबद्ध है। प्रदेश में किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के लिए बड़ी संख्या में पक्के मकानों का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार आवास जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित न रहे। गरीब परिवार का अपना पक्का घर केवल एक भवन नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार है।

मुख्यमंत्री ने श्री रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार प्रदेशवासियों को धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर भी उपलब्ध करा रही है। समाज के ऐसे लोग, जो आर्थिक या अन्य कारणों से तीर्थयात्रा नहीं कर पाते थे, वे इन योजनाओं के माध्यम से अपनी आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के दर्शन कर पा रहे हैं।

नक्सलवाद के समाप्त होने से विकास को मिली नई गति

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई से प्रदेश के दूरस्थ और प्रभावित क्षेत्रों में विकास का नया वातावरण बना है। जिन इलाकों में पहले विकास कार्यों में बाधा आती थी, वहां अब तेजी से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क, राशन और दूरसंचार जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंच रही हैं। सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर सरकार लगातार कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए गांव, गरीब, किसान, महिला और युवा - सभी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 से सीधे दर्ज कराएं समस्या

मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित ग्रामीणों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि आम नागरिक अपनी समस्याएं और शिकायतें इसके माध्यम से सीधे दर्ज करा सकते हैं। शासन-प्रशासन को अधिक जवाबदेह और जनसमस्याओं के समाधान को अधिक सरल बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने लोगों से मुख्यमंत्री बिजली बिल राहत योजना का लाभ लेने तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अपने घरों में सौर पैनल लगवाने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा से परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।

जशपुर में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का होगा विस्तार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जशपुर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज सहित एमसीएच यूनिट, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग और स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर न जाना पड़े और स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों।

‘विष्णु भैया’ के रूप में मिला बहनों का स्नेह

पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने क्षेत्रवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज पूरे प्रदेश की बहनों के ‘विष्णु भैया’ हैं। मुख्यमंत्री अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच बहनों के बीच पहुंचकर राखी बंधवा रहे हैं और उनसे आत्मीय संवाद कर रहे हैं। यह प्रदेश की माताओं-बहनों के साथ उनके आत्मीय रिश्ते को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांगें पूरी हो रही हैं और जशपुर निरंतर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत बालिका आयुषी को पासबुक प्रदान की गई। वहीं स्वामित्व योजना के अंतर्गत कौशल्या पैंकरा, कमला बाई, लालो, ज्योति बाई और सुमेत्रा खैरवार को आवासीय पट्टे वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री ने सरस्वती स्व-सहायता समूह को एक लाख रुपए का चेक भी प्रदान किया। उन्होंने समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए उन्हें आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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