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‘मन की बात’ देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचारों और प्रेरक प्रयासों को देती है राष्ट्रीय पहचान : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी का श्रवण किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का देश के 140 करोड़ नागरिकों से आत्मीय संवाद का सशक्त माध्यम है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे नवाचारों, प्रेरक प्रयासों और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले लोगों की उपलब्धियों को पूरे देश के सामने रखते हैं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देशवासियों को प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ कार्यक्रम की प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इसमें ऐसे अनेक विषयों और व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हैं, जिनके बारे में सामान्यतः देश के लोगों को जानकारी नहीं मिल पाती। इससे जहां अच्छे कार्य करने वाले लोगों का उत्साह बढ़ता है, वहीं उनके प्रयास लाखों देशवासियों के लिए प्रेरणा बनते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश के दूरस्थ गांवों और छोटे-छोटे क्षेत्रों में अनेक लोग बिना किसी प्रचार और स्वार्थ के समाज तथा राष्ट्रहित में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। कोई पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहा है, कोई स्वच्छता के लिए कार्य कर रहा है, तो कोई स्थानीय संसाधनों के माध्यम से नवाचार कर अपने क्षेत्र में बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ‘मन की बात’ के माध्यम से ऐसे सामान्य लोगों के असाधारण कार्यों को राष्ट्रीय पहचान देते हैं। इससे देश में सकारात्मकता और जनभागीदारी की भावना मजबूत होती है तथा दूसरे लोगों को भी कुछ नया और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।

‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आज ‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के संकल्प को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। युवा शक्ति विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में युवाओं को नशे से दूर रखना परिवार, समाज और राष्ट्र सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज को झेलने पड़ते हैं। स्वस्थ, समर्थ और ऊर्जावान युवा पीढ़ी ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नशामुक्ति के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने और युवाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

‘हर घर तिरंगा’ में दिखा देशवासियों का राष्ट्रप्रेम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रति देशवासियों के अभूतपूर्व उत्साह का भी उल्लेख किया। अभियान के अंतर्गत 8 करोड़ से अधिक देशवासियों ने तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी अपलोड की। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्रध्वज के प्रति देशवासियों के सम्मान, गौरव और गहरे भावनात्मक जुड़ाव की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ आज जन-जन का अभियान बन चुका है। ऐसे अभियान राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने के साथ प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका और कर्तव्यों का स्मरण कराते हैं।

पीएम स्वनिधि से मातृशक्ति को मिल रही आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की भी चर्चा की। रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यवसायों से जुड़ी महिलाओं को योजना के माध्यम से अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और देशभर में करीब 35 लाख महिलाएं इससे जुड़कर अपने छोटे व्यवसायों को नई गति दे रही हैं। आर्थिक रूप से सशक्त महिला न केवल अपने परिवार को मजबूत बनाती है, बल्कि समाज और देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

स्वच्छता केवल अभियान नहीं, जन-जन का संकल्प बने

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। स्वच्छता में स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब यह केवल सरकारी अभियान न रहकर प्रत्येक नागरिक की आदत और जिम्मेदारी बने।

उन्होंने कहा कि जब किसी गांव, शहर अथवा क्षेत्र के लोग स्वयं अपने परिवेश को स्वच्छ रखने का संकल्प लेते हैं, तो उसका प्रभाव केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उस स्थान की पहचान और वहां के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक बदलाव आता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, मोहल्ले, गांव, शहर और आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

अंतरिक्ष विज्ञान में बेटियों की उड़ान, छत्तीसगढ़ की महिमा राजपूत पर गर्व

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज भारत की बेटियां अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं। उनकी आकांक्षाओं की उड़ान अब धरती से अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘मन की बात’ में मिशन शक्ति सैट जैसे प्रेरक प्रयास का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से भारत सहित विभिन्न देशों की हजारों छात्राओं को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को समझने, सीखने और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए विशेष गौरव का विषय है कि प्रदेश की महिमा राजपूत भी इस महत्वपूर्ण मुहिम का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने महिमा राजपूत को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उनकी उपलब्धियां प्रदेश की दूसरी बेटियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करती हैं।

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेश के लिए गौरव

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की विभिन्न कड़ियों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अवसरों पर छत्तीसगढ़ और यहां के उल्लेखनीय प्रयासों का उल्लेख किया है। बस्तर ओलंपिक से लेकर मल्हार में मिले प्राचीन ताम्रपत्रों और काले हिरण के संरक्षण तक, छत्तीसगढ़ की विशिष्टताओं और उपलब्धियों को प्रधानमंत्री ने देशवासियों के सामने रखा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के नवाचारों, संस्कृति, विरासत और सकारात्मक प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव की बात है। इससे छत्तीसगढ़ के अच्छे कार्यों को देशभर में पहचान मिलने के साथ प्रदेश के लोगों का उत्साह भी बढ़ता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों को एक सूत्र में जोड़ती है। यह कार्यक्रम नागरिकों को स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, नवाचार, समाजसेवा और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों के लिए प्रेरित करने के साथ जनभागीदारी की भावना को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह सतत संवाद देशवासियों में कर्तव्यबोध जगाकर विकसित भारत के निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू एवं श्री पुरंदर मिश्रा, संतजन, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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लोक भवन में गूंजा अपनत्व का संदेश, दिव्यांग बच्चों ने राज्यपाल श्री रमेन डेका को बांधा रक्षा सूत्र

 रक्षाबंधन के पावन अवसर पर कोपल वाणी के श्रवण बाधित दिव्यांग बच्चों तथा मिनी मार्वेल्स स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आज लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल श्री रमेन डेका को अपने हाथों से बनाई गई राखियां बांधीं। बच्चों ने रक्षा सूत्र बांधकर राज्यपाल के स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की और उन्हें अपने हाथों से तैयार की गई राखियों की विशेषता भी बताई। इसके बाद बच्चों ने राज्यपाल का मुंह मीठा कराया।


मासूम हाथों से बनाई गई राखियां जब राज्यपाल श्री डेका की कलाई पर सजीं तो रक्षाबंधन का यह अवसर आत्मीयता और भावनाओं से भर उठा। राज्यपाल ने बच्चों के स्नेह को सहर्ष स्वीकार करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया तथा उपहार भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।

लोक भवन पहुंचकर बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था। विशेष रूप से कोपल वाणी के दिव्यांग बच्चों के लिए यह अवसर सम्मान, आत्मविश्वास और गौरव से भरा रहा। अपने हाथों से राखियां तैयार कर उन्हें राज्यपाल की कलाई पर बांधना बच्चों की रचनात्मकता, कौशल और आत्मनिर्भरता का सुंदर उदाहरण रहा। इस अवसर ने यह संदेश भी दिया कि दिव्यांग बच्चे समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें समान अवसर एवं प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

राज्यपाल श्री डेका ने बच्चों की प्रतिभा और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि रक्षाबंधन प्रेम, स्नेह और पारस्परिक विश्वास का पर्व है। बच्चों का यह आत्मीय स्नेह मन को छू लेने वाला है। उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि समाज को दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

इस अवसर पर कोपल वाणी की संस्थापिका श्रीमती पदमा शर्मा, श्रद्धा साहू एवं सोनिया दामनी उपस्थित रहीं। मिनी मार्वेल्स स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती अनुभूति श्रीवास्तव सहित शिक्षकगण भी उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का किया शुभारंभ

 रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बगिया कैम्प कार्यालय में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले की 50 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान कर उन्हें आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ा।


रक्षाबंधन के आत्मीय वातावरण में स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने मुख्यमंत्री श्री साय की कलाई पर राखी बांधी और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने भी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें साड़ी और मिठाई उपहार स्वरूप भेंट की। बहनों के बीच मुख्यमंत्री का आत्मीय अंदाज कार्यक्रम को विशेष बना गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की बुनियाद है। हमारी बहनें आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं। ई-रिक्शा उनके लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि नियमित आय और सम्मानजनक स्वरोजगार का माध्यम बनेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी आजीविका गतिविधियों से भी जोड़ा जाए, जिनसे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकें।

पिछले रक्षाबंधन पर 14, इस बार 50 बहनों को ई-रिक्शा की सौगात

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बहनों को स्वरोजगार से जोड़ने की यह पहल लगातार आगे बढ़ रही है। पिछले रक्षाबंधन पर्व पर भी स्व-सहायता समूहों की 14 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान किए गए थे। इस वर्ष ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना के माध्यम से 50 और बहनों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं।

उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर में भी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 92 ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। ई-रिक्शा चला रही महिलाएं आज प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपए तक की आमदनी अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आय बढ़ने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता भी बढ़ी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी बहन के हाथ में स्वयं की कमाई आती है तो उसका लाभ पूरे परिवार को मिलता है। बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आवश्यकताओं और भविष्य के लिए बचत जैसे अनेक कार्यों में यह आय सहारा बनती है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की अधिक से अधिक महिलाओं को इसी तरह आयमूलक गतिविधियों से जोड़ना है।

किराना, सब्जी व्यवसाय से लेकर ई-रिक्शा तक, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं दीदियां

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज हमारी दीदियां किराना दुकान, सब्जी व्यवसाय और विभिन्न छोटे उद्यमों सहित अनेक आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। अब ई-रिक्शा जैसी सेवाओं में भी महिलाएं आगे आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। सरकार महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की दिशा में भी लगातार कार्य कर रही है, ताकि उनके उद्यम टिकाऊ हों और उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार प्रारंभ करने और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए मुद्रा ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। महिलाओं को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेकर अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप उद्यम शुरू करना चाहिए।

‘जशपुर एक्सप्रेस’ से स्वावलंबन की राह होगी आसान

‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना के माध्यम से महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराकर उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे एक ओर महिलाओं को नियमित आमदनी का माध्यम मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर आवागमन की सुविधा भी बेहतर होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रिक्शा प्राप्त करने वाली बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपने परिश्रम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम करें। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। शासन की योजनाओं और अपनी मेहनत के बल पर वे परिवार की आर्थिक शक्ति बनने के साथ प्रदेश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

बगिया में विकास कार्यों का भी भूमिपूजन

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने बगिया क्षेत्र को विकास कार्यों की सौगात भी दी। उन्होंने लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत से बगिया में बनने वाले विश्राम गृह का भूमिपूजन किया। इसके साथ ही बगिया में यादव मोहल्ला तक बनने वाली सीसी सड़क के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है। गांवों में सड़क, भवन एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास से लोगों के जीवन में सहूलियत बढ़ने के साथ स्थानीय विकास को भी गति मिलती है।

राखी के स्नेह के साथ आत्मनिर्भरता का संकल्प

रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बहनों और मुख्यमंत्री के बीच आत्मीय संवाद भी हुआ। स्व-सहायता समूह की दीदियों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बांधकर अपना स्नेह व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बहनों को साड़ी और मिठाई भेंट करते हुए उनके सुखद, समृद्ध और आत्मनिर्भर भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बहनों का स्नेह और आशीर्वाद उन्हें प्रदेश के विकास और जनसेवा के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश की प्रत्येक बहन को आगे बढ़ने का अवसर मिले, वह आर्थिक रूप से सशक्त बने और अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्धि में सहभागी बने।

इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित थीं।
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बहनों का सम्मान, सशक्तिकरण और खुशहाली से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम केरसई में आज भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। यहां आयोजित ‘रक्षाबंधन एवं बहनों से संवाद’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के पहुंचने पर क्षेत्र की बहनों ने बड़े उत्साह और आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। बहनों के स्नेह से अभिभूत मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद किया, उनकी बातें सुनीं और सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के स्नेह का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और सुरक्षा के संकल्प का भी पर्व है। जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो वह धागा जीवन भर उसके सम्मान और सुख-दुःख में साथ खड़े रहने की जिम्मेदारी से जोड़ देता है। प्रदेश की माताओं और बहनों का स्नेह तथा आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री ने बहनों से कहा कि “आपने मुझे जो स्नेह और विश्वास दिया है, उसे बनाए रखना मेरा दायित्व है। मेरा फर्ज है कि आपका और क्षेत्र की जनता का सिर हमेशा ऊंचा रहे तथा विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।” उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के सम्मान, सशक्तिकरण और खुशहाली से ही परिवार मजबूत होगा और मजबूत परिवारों से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा।

केरसई को मिली विकास की अनेक सौगातें

रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्रवासियों की मांगों को आत्मीयता से स्वीकार करते हुए अनेक विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने घासीमुंडा में जर्जर प्राथमिक शाला के स्थान पर नया शाला भवन, केरसई तालाब का सौंदर्यीकरण, केरसई में मिनी स्टेडियम, केरसई एवं घासीमुंडा के बजरंग बली मंदिरों का जीर्णोद्धार, मुख्य मार्ग से अरुण के घर तक सीसी सड़क, ग्राम पंचायत कोहपानी के गढ़वामुड़ा यादव बस्ती में सामुदायिक भवन, घासीमुंडा में सामुदायिक भवन तथा ग्राम ऊपरकछार में महतारी सदन बनाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने केरसई में लगभग 84.69 लाख रुपए के विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार गांवों में सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, सामुदायिक भवन सहित सभी आवश्यक अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार कर रही है। विकास कार्यों में ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और आने वाले समय में भी क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्य निरंतर स्वीकृत किए जाएंगे।

महिला सशक्तिकरण से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की नीतियों के केंद्र में माताओं और बहनों का सम्मान, आर्थिक स्वावलंबन और खुशहाली है। आज प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई शक्ति दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख बहनों को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई तथा सिलाई-कढ़ाई और अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए कर रही हैं। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदियों का उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब आधुनिक तकनीक से भी जुड़ रही हैं और इसके माध्यम से आय के नए अवसर प्राप्त कर रही हैं। जशपुर जिले की बहनों को 50 ई-रिक्शा प्रदान किए जाने से उनके लिए स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह खुलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि गांव की प्रत्येक महिला को उसकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आजीविका का अवसर मिले। महिलाओं के हाथों में आर्थिक शक्ति आने से परिवार और समाज दोनों मजबूत होते हैं।

किसान, गरीब और हर जरूरतमंद परिवार के साथ सरकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए भी प्रतिबद्ध है। प्रदेश में किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के लिए बड़ी संख्या में पक्के मकानों का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार आवास जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित न रहे। गरीब परिवार का अपना पक्का घर केवल एक भवन नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार है।

मुख्यमंत्री ने श्री रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार प्रदेशवासियों को धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर भी उपलब्ध करा रही है। समाज के ऐसे लोग, जो आर्थिक या अन्य कारणों से तीर्थयात्रा नहीं कर पाते थे, वे इन योजनाओं के माध्यम से अपनी आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के दर्शन कर पा रहे हैं।

नक्सलवाद के समाप्त होने से विकास को मिली नई गति

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई से प्रदेश के दूरस्थ और प्रभावित क्षेत्रों में विकास का नया वातावरण बना है। जिन इलाकों में पहले विकास कार्यों में बाधा आती थी, वहां अब तेजी से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क, राशन और दूरसंचार जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंच रही हैं। सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर सरकार लगातार कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए गांव, गरीब, किसान, महिला और युवा - सभी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 से सीधे दर्ज कराएं समस्या

मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित ग्रामीणों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि आम नागरिक अपनी समस्याएं और शिकायतें इसके माध्यम से सीधे दर्ज करा सकते हैं। शासन-प्रशासन को अधिक जवाबदेह और जनसमस्याओं के समाधान को अधिक सरल बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने लोगों से मुख्यमंत्री बिजली बिल राहत योजना का लाभ लेने तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अपने घरों में सौर पैनल लगवाने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा से परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।

जशपुर में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का होगा विस्तार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जशपुर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज सहित एमसीएच यूनिट, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग और स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर न जाना पड़े और स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों।

‘विष्णु भैया’ के रूप में मिला बहनों का स्नेह

पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने क्षेत्रवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज पूरे प्रदेश की बहनों के ‘विष्णु भैया’ हैं। मुख्यमंत्री अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच बहनों के बीच पहुंचकर राखी बंधवा रहे हैं और उनसे आत्मीय संवाद कर रहे हैं। यह प्रदेश की माताओं-बहनों के साथ उनके आत्मीय रिश्ते को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांगें पूरी हो रही हैं और जशपुर निरंतर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत बालिका आयुषी को पासबुक प्रदान की गई। वहीं स्वामित्व योजना के अंतर्गत कौशल्या पैंकरा, कमला बाई, लालो, ज्योति बाई और सुमेत्रा खैरवार को आवासीय पट्टे वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री ने सरस्वती स्व-सहायता समूह को एक लाख रुपए का चेक भी प्रदान किया। उन्होंने समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए उन्हें आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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नक्सल भय का अंत, अबूझमाड़ में फिर जीवंत हुई 'घोटुल' की गौरवशाली परंपरा

 बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के​ अबूझमाड़ क्षेत्र में घोटुल परंपरा आदिवासी संस्कृति, अनुशासन और सामाजिक शिक्षा का एक अनूठा और जीवंत केंद्र है। अब अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों (जैसे झारावाही) में ग्रामीण अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेजने के लिए स्थानीय लकड़ियों और प्राकृतिक सामग्रियों से दोबारा पारंपरिक घोटुल तैयार कर रहे हैं।  बुजुर्गों द्वारा युवाओं को समाज के नियम, परंपराएं, संगीत, नृत्य और जीवनोपयोगी दायित्व सिखाए जाते हैं।


'चेलिक-मोटियारिन' के सुरीले लोकगीत गूंजने लगे हैं

         अबूझमाड़ की शाम अब भय के साये से मुक्त होकर अपनी पौराणिक और सांस्कृतिक लय में लौटने लगी हैं। जिस अंचल में कभी गोलियों की तड़तड़ाहट और सन्नाटे का खौफ हुआ करता था, वहां अब सूर्य ढलते ही मांदर की थाप और 'चेलिक-मोटियारिन' के सुरीले लोकगीत गूंजने लगे हैं। सुरक्षा वातावरण में आए सकारात्मक बदलाव के साथ ही आदिवासी समाज की ऐतिहासिक धरोहर 'घोटुल' की रौनक फिर से लौट आई है।

 युवा बेझिझक घोटुल पहुंच रहे हैं

    ​घोटुल केवल एक सामाजिक केंद्र नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, अनुशासन, लोककला और सामुदायिक मूल्यों की महत्वपूर्ण जीवन-पाठशाला है। नक्सली हिंसा और अनिश्चितता के दौर में गांव वाले शाम ढलते ही अपने घरों में दुबकने को मजबूर थे, जिससे घोटुल की गतिविधियां लगभग थम सी गई थीं।  ​सुरक्षा बलों के प्रभावी अभियानों और नक्सल प्रभाव में आई कमी के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है। अब युवा बेझिझक घोटुल पहुंच रहे हैं, जहां वे अपने बुजुर्गों से लोक परंपराएं, नृत्य और गीत सीखकर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

घोटुलों से आती मांदर की थाप परंपराएं और सामूहिक उल्लास जीवंत गवाही दे रही है

​      घोटुलों का पुनर्जीवन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के सांस्कृतिक अस्तित्व और आत्मसम्मान की वापसी का प्रतीक है। सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होने से ग्रामीणों की आवाजाही, खेती-किसानी, हाट-बाजार और त्योहारों का उत्साह फिर से लौट आया है। ग्रामीणों का मानना है कि इस शांति को स्थायी बनाने के लिए अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क कनेक्टिविटी, रोजगार और संचार सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। घोटुलों से आती मांदर की थाप इस बात की जीवंत गवाही दे रही है कि जब डर का अंधेरा छंटता है, तो परंपराएं और सामूहिक उल्लास अपने आप मुस्कुरा उठते हैं।
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मुख्यमंत्री ने ‘अंतरिक्ष संगवारी’ अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण पहल का किया शुभारंभ

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज कैम्प कार्यालय बगिया में विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से ‘अंतरिक्ष संगवारी’ अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण पहल का शुभारंभ किया। जिला प्रशासन जशपुर एवं IDYM Foundation के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभिनव कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष यात्रा और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण से परिचित होने का अवसर मिलेगा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जशपुर के विद्यार्थियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। जिले के बच्चों में प्रतिभा और सीखने की अपार क्षमता है। उन्हें सही अवसर, मार्गदर्शन और आधुनिक वैज्ञानिक संसाधन उपलब्ध कराकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ‘अंतरिक्ष संगवारी’ जैसी पहल विद्यार्थियों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान को केवल पुस्तकों में पढ़ने का विषय न रखकर उसे प्रत्यक्ष रूप से जानने और समझने का अवसर प्रदान करेगी। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी और उन्हें भविष्य में विज्ञान, अनुसंधान तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने की प्रेरणा मिलेगी।

यह पहल भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन एवं अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला द्वारा समर्थित है। कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण के साथ अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों के लिए बेंगलुरु यात्रा भी प्रस्तावित है, जहां उन्हें अंतरिक्ष एवं विज्ञान से जुड़े संस्थानों और गतिविधियों को करीब से समझने के साथ अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला से संवाद का अवसर मिलेगा।

10 हजार विद्यार्थियों की होगी स्क्रीनिंग

‘अंतरिक्ष संगवारी’ कार्यक्रम में जिले के सभी 8 विकासखंडों को शामिल किया गया है। कक्षा 8वीं से 12वीं तक के लगभग 10 हजार विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। विभिन्न चरणों में परीक्षा, मूल्यांकन और साक्षात्कार के माध्यम से प्रतिभाशाली एवं अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।

कार्यक्रम की घोषणा 27 अगस्त को की गई है। पंजीयन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद 26 सितंबर को परीक्षा आयोजित होगी तथा 27 से 29 सितंबर के बीच मूल्यांकन एवं साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

चयनित विद्यार्थियों के लिए 1 से 7 अक्टूबर तक रायपुर में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात 15 अक्टूबर से बेंगलुरु यात्रा का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें विद्यार्थियों को अंतरिक्ष यात्री श्री शुभांशु शुक्ला से मिलने और उनके अनुभवों को जानने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम का समापन 26 अक्टूबर 2026 को पुरस्कार समारोह के साथ होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ और जनजातीय अंचलों के बच्चों को भी आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। जशपुर के विद्यार्थी बड़े सपने देखें, वैज्ञानिक सोच विकसित करें और भविष्य में देश के विज्ञान एवं अंतरिक्ष अभियानों में अपना योगदान दें, इस दिशा में ‘अंतरिक्ष संगवारी’ महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर विशेषज्ञ दल ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर एवं शहरखेरवा का किया व्यापक सर्वेक्षण

 संस्कृति मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के निर्देशानुसार गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय रायपुर से पहुंचे चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने जिले के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का व्यापक मैदानी सर्वेक्षण एवं सूक्ष्म निरीक्षण किया।


विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर के साथ बेनीबाई, भस्मासुर टापू एवं शहरखेरवा स्थित पुरातात्विक धरोहरों का निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की आवश्यकता तथा भविष्य में विकसित की जा सकने वाली संभावनाओं का अध्ययन किया।

उल्लेखनीय है कि मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के जिले के प्रवास के दौरान कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने जिले में बिखरी प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता से उन्हें अवगत कराया था। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के निर्देश के बाद संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, सिविल लाइंस रायपुर से विशेषज्ञ दल को जिले के पुरातात्विक स्थलों के सर्वेक्षण के लिए भेजा गया।

चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने किया मैदानी अध्ययन

रायपुर से पहुंचे विशेषज्ञ दल में पुरातत्ववेत्ता श्री प्रभात कुमार सिंह, उत्खनन सहायक श्री प्रवीण तिर्की, शोधकर्ता डॉ. राजीव जॉन मिंज एवं शोधकर्ता श्री अमर भारद्वाज शामिल रहे। दल ने विभिन्न स्थलों का मौके पर पहुंचकर बारीकी से अध्ययन किया तथा पुरातात्विक अवशेषों, मूर्तियों और स्मारकों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

धनपुर की प्राचीन धरोहरों का सूक्ष्म निरीक्षण

विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर में स्थित प्राचीन मंदिर एवं वहां स्थापित ऐतिहासिक मूर्तियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने मंदिर की संरचना, परिसर में मौजूद पुरातात्विक अवशेषों तथा उनके संरक्षण की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

इसके साथ ही धनपुर-धोबहर धरोहर केंद्र में संग्रहित प्राचीन मूर्तियों एवं अन्य पुरावशेषों का भी गहन अवलोकन किया गया। दल ने इन पुरावशेषों के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का अध्ययन करते हुए उनके संरक्षण, रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन की संभावनाओं पर भी विचार किया।

प्राचीन मंदिर परिसर का निरीक्षण करते हुए विशेषज्ञों ने संरचना के संरक्षण एवं आवश्यक सुदृढ़ीकरण की संभावनाओं का भी जायजा लिया।

बेनीबाई और भस्मासुर टापू की धरोहरों का भी अध्ययन

सर्वेक्षण दल ने बेनीबाई एवं भस्मासुर टापू में संरक्षित एवं स्थापित प्राचीन मूर्तियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने इन धरोहरों की वर्तमान स्थिति, रखरखाव तथा संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। मौके पर उपलब्ध पुरातात्विक सामग्री और स्मारकों की स्थिति को देखते हुए आवश्यक संरक्षण उपायों की संभावनाओं का भी आकलन किया गया।

शहरखेरवा में पुरातात्विक संभावनाओं की तलाश

विशेषज्ञ दल ने ऐतिहासिक महत्व के स्थल शहरखेरवा का भी विस्तृत सर्वे किया। यहां उपलब्ध पुरातात्विक अवशेषों एवं संभावित धरोहर स्थलों का निरीक्षण करते हुए क्षेत्र की पुरातात्विक संभावनाओं का अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों ने स्थल की विशेषताओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संरक्षण एवं आगे के अध्ययन की संभावनाओं का जायजा लिया।

कलेक्टर ने विशेषज्ञ दल के साथ की बैठक

क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं निरीक्षण पूरा होने के बाद कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने रायपुर से आए विशेषज्ञ दल के साथ बैठक कर सर्वेक्षण के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी ली। बैठक में विभिन्न पुरातात्विक स्थलों की वर्तमान स्थिति, संरक्षण की जरूरतों तथा आवश्यक कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कलेक्टर ने पुरातात्विक मूर्तियों एवं स्मारकों के संरक्षण और सुदृढ़ीकरण से संबंधित आवश्यक कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धनपुर क्षेत्र में मौजूद प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें जिले की अमूल्य पहचान हैं। इन धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए योजनाबद्ध और व्यापक प्रयास किए जाएंगे, ताकि जिले की इस महत्वपूर्ण विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई जा सके।

संरक्षण के साथ पर्यटन विकास की भी संभावनाएं

धनपुर सहित जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों का यह सर्वेक्षण केवल संरक्षण की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भविष्य में इन स्थलों को सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी आधार तैयार कर सकता है। व्यवस्थित संरक्षण, बेहतर रखरखाव और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास से इन ऐतिहासिक स्थलों को जिले के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

पूरे फील्ड सर्वेक्षण के दौरान जिला प्रशासन एवं ग्राम पंचायत धनपुर की टीम विशेषज्ञ दल के साथ मौजूद रही और सर्वेक्षण कार्य के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।
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बड़ी संख्या में युवा इंजीनियरों की नियुक्ति से जल जीवन मिशन एवं अन्य कार्यों में आएगी और गति – उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव

 लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 111 उप अभियंताओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। इनमें 101 सिविल अभियंता और 10 विद्युत/यांत्रिक अभियंता शामिल हैं। प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा नियुक्ति के साथ ही सभी चयनित उप अभियंताओं की पदस्थापना के आदेश भी जारी किए गए हैं। चयनितों को नियुक्ति आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर पदस्थापना कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने कहा गया है। निर्धारित तिथि तक उपस्थित नहीं होने की स्थिति में नियुक्ति स्वयंमेव निरस्त मानी जाएगी। 


लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में उप अभियंता (सिविल) के 118 पदों तथा उप अभियंता (विद्युत/यांत्रिकी) के 10 पदों पर भर्ती के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा अप्रैल-2025 में लिखित परीक्षा ली गई थी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद जुलाई-2025 में  विभाग द्वारा व्यापम की मेरिट सूची के अनुसार अभ्यार्थियों के दस्तावेज परीक्षण और पदस्थापना विकल्प के संबंध में कांउसलिंग के बाद उच्चतम न्यायालय में दायर स्थगन के कारण नियुक्ति प्रक्रिया विलंबित रही। उच्चतम न्यायालय द्वारा 20 अगस्त 2026 को याचिका के निराकरण के बाद उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने तत्काल 22 अगस्त को प्रथम चरण में अनुशंसित चयन सूची के अनुसार सिविल के 101 उप अभियंताओं तथा विद्युत/यांत्रिकी के 10 उप अभियंताओं के पदस्थापना आदेश जारी कर दिए हैं।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव ने एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नियुक्ति पर खुशी जताते हुए कहा कि युवा इंजीनियरों की विभाग में नियुक्ति से विभागीय कार्यों, विशेषकर जल जीवन मिशन के कार्यों में गति आएगी। उच्चतम न्यायालय से प्रकरण के निराकरण के तत्काल बाद हमने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर पदस्थापना आदेश जारी किए हैं। इन युवा इंजीनियरों की ऊर्जा और तकनीकी दक्षता का लाभ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को मिलेगा।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने सभी चयनितों को पदस्थापना कार्यालय में उपस्थिति देते समय शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, स्थाई जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, सक्षम मेडिकल बोर्ड का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्रों की मूल प्रति अनिवार्यतः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मूल तकनीकी शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र के साथ कक्षा दसवीं की अंकसूची जिसमें जन्मतिथि अंकित हो या मूल जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। ????????
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छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति के पाठ पढ़ेंगे कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी

 छत्तीसगढ़ के स्कूली छात्र कक्षा 6वीं से 12वीं तक स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे, जिससे नई पीढ़ी अपनी माटी और संस्कृति से गहरे से जुड़ सकेगी।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर, स्थापत्य, लोक परंपराओं, गीत-संगीत, संतों, महापुरुषों और रचनाकारों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। 

          इसी उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शंकर नगर रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक त्रि-दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति पर केंद्रित आर्ट रिपोजिटरी तैयार करने के लिए प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय-विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता एवं जनसंचार विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।

स्थानीय कला-संस्कृति को पाठ्य सामग्री से जोड़ने की पहल

         राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों से ऐसी पूरक पाठ्य एवं दृश्य सामग्री विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसके माध्यम से कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षक, प्रशिक्षक, शैक्षिक प्रबंधक एवं पालक समुदाय स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी स्थानीय धरोहरों के प्रति कलात्मक बोध, संवेदना और गौरव की भावना विकसित करना है।

          कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ की विविध कला एवं सांस्कृतिक विधाओं पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।

100 विषयों पर तैयार होगी सामग्री

           कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विषय-विशेषज्ञों, संस्कृतिविदों, शोधकर्ताओं एवं जनसंचार विशेषज्ञों द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े लगभग 100 विषयों पर लेखन एवं मार्गदर्शन किया जा रहा है। इन विषयों को प्रमुख विधाओं में विभाजित कर विषयवार समूह गठित किए गए हैं।

विभूतियों से लेकर लोक परंपराओं तक का समावेश

            आर्ट रिपोजिटरी में छत्तीसगढ़ की विभूतियों, संतों एवं महापुरुषों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा। इनमें लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, नागार्जुन, श्रृंगी ऋषि, गहिरा गुरु, शबरी माता, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, तुलसीराम देवांगन, सुरुज बाई खांडे, माधवराव सप्रे, दाऊ कल्याण सिंह, मिनीमाता, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, झाडूराम देवांगन, पं. सुंदरलाल शर्मा, धनी धर्मदास, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अनेक विभूतियां शामिल हैं।

              स्थापत्य कला एवं तीर्थ स्थलों में कौशल्या मंदिर, सिरपुर, भोरमदेव, दंतेश्वरी मंदिर, बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रहासिनी मंदिर, मां महामाया मंदिर रतनपुर और राजीव लोचन मंदिर राजिम जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया गया है।  पंथ एवं परंपराओं के अंतर्गत सतनाम पंथ, कबीर पंथ, रामनामी पंथ, घोटुल, मामा-भांजा, मितान-बदना, लमसेना और मानस मंडली जैसी विशिष्ट परंपराओं पर सामग्री तैयार की जा रही है।

पर्व, लोकनृत्य, संगीत और शिल्प भी होंगे पाठ्य सामग्री का हिस्सा

            छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व एवं उत्सवों में हरेली, नवाखाई, बस्तर दशहरा, गोंचा पर्व, गौरी-गौरा, रथयात्रा, छेरछेरा, तीजा-पोला, भोजली और मड़ई सहित पारंपरिक खेल एवं गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। दृश्य कला एवं शिल्प के अंतर्गत डोकरा आर्ट, टेराकोटा, बांस शिल्प, लौह शिल्प, गोदना और रजवार भित्ति चित्रों पर सामग्री तैयार होगी। वहीं लोक संगीत एवं वाद्ययंत्र में कबीर गायन, सुवा, बांस, डंडा, पंथी, भोजली, देवार, ददरिया, फाग, भरथरी, विवाह एवं चंदैनी गीत तथा मांदर, मोहरी, ढोल, बांसुरी, सारंगी, धनकुल और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्यों को स्थान दिया जाएगा।

             लोक नृत्य एवं रंगमंच में पंथी, राउत नाचा, गेड़ी, ककसाड़, गौर, शैला, सुवा, सरहुल नृत्य, नाचा, पंडवानी एवं लोककथाओं को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक कला को भी विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। ठेठरी, खुरमी, फरा-मुठिया, अंगाकर रोटी, चौसेला, बफौरी, चापड़ा चटनी, माड़िया पेज और पपची जैसे पारंपरिक व्यंजनों पर भी सामग्री तैयार की जाएगी।

तीन दिनों में पाठ्य सामग्री से लेकर लघु फिल्म की पटकथा तक

           कार्यशाला के प्रथम दिवस पाठ्य सामग्री का प्रस्तुतीकरण, विषयवार समीक्षा और समूह गठन किया जा रहा है। द्वितीय दिवस 25 अगस्त को सामग्री का संशोधन एवं परिमार्जन, अंतिम ड्राफ्ट का निर्धारण तथा लघु फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लेखन किया जाएगा। तृतीय दिवस 26 अगस्त को लघु फिल्म की स्क्रिप्ट का प्रस्तुतीकरण, अंतिम संपादन, स्वीकृति और समापन सत्र आयोजित होगा।

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगी आर्ट रिपोजिटरी

            छत्तीसगढ़ की प्रस्तावित आर्ट रिपोजिटरी केवल पाठ्य सामग्री का संग्रह नहीं होगी, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोकज्ञान, परंपराओं और कला विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी मिट्टी की कला, संस्कृति और विरासत को जानने के साथ-साथ उसके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी जागरूक होंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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मुख्यमंत्री श्री साय 25 अगस्त को महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त की राशि करेंगे जारी

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय 25 अगस्त को बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डीलोहारा के लाल रघुवीर सिंह स्टेडियम में आयोजित बिहान दीदी एवं स्व-सहायता समूह के सम्मान समारोह के अवसर पर महतारी वंदन योजना के 31वीं किस्त 67 लाख 28 हजार 918 हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ 38 लाख 37 हजार 700 रूपये की राशि का अंतरण करेंगे। 


उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु भैय्या के द्वारा रक्षाबंधन के ठीक पूर्व महतारी वंदन योजना की राशि बहनों के खातें में सीधे अंतरण कर लाभान्वित करेंगे। राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य तथा सुपोषण के लिए अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इसके अलावा इस राशि का उपयोग राज्य की महिलाओं के द्वारा बेटियों की सुरक्षित एवं सुखद भविष्य हेतु सुकन्या समृद्धि योजना में जमा करने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के निष्पादन में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। महतारी वंदन योजना से अब तक 30 किस्तों में 19 हजार 444 करोड़ की सहायता राशि बहनों को प्रदान की जा चुकी है। ज्ञातव्य है कि सितंबर 2026 की 31वीं किस्त की सहायता राशि का भुगतान सितंबर माह में किया जाना है, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा बहनों को सौगात के तौर पर सितंबर माह की राशि को राखी त्योहार के पूर्व बहनोें के खातें में अंतरित किया जाएगा।
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‘कोहरा’ जैसी रचनाएं समाज को सजग करने और सच सामने लाने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने का भी सशक्त माध्यम है। ‘कोहरा’ जैसे उपन्यास सामाजिक विषयों को विमर्श के केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने युवा साहित्यकार श्री करुणा सागर पण्डा को उनके उपन्यास के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषय पर लेखन के लिए साहस की आवश्यकता होती है। रचनाकार जब समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का माध्यम बनता है।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। विनोद कुमार शुक्ल जैसे मूर्धन्य रचनाकार को साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ मुक्तिबोध की सृजनभूमि रही है और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के रचनाकार इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समकालीन विषयों को साहित्य के माध्यम से समाज के सामने ला रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सिनेमा और साहित्य ने समय-समय पर समाज के संवेदनशील विषयों को सामने लाने का काम किया है। उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन और मार्मिक विषयों को उठाने पर मतभेद और विरोध के स्वर भी सामने आते हैं, लेकिन रचनाकार का दायित्व है कि वह अपनी दृष्टि और संवेदना के साथ समाज के सामने विषय रखे। उन्होंने ‘कोहरा’ के लेखक के साहसिक प्रयास की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अच्छी पुस्तकें अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं। इसलिए हर परिवार को अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकों का संग्रह अवश्य रखना चाहिए।

नक्सलवाद की अनकही पीड़ा को भी सामने लाएं रचनाकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए साहित्यकारों और रचनाकारों से इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और बस्तर शांति एवं विकास के नए दौर की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की हिंसा में अनेक निर्दोष लोगों ने अपने परिजनों को खोया, बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित हुआ तथा दशकों तक अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। नक्सलवाद की इस मानवीय त्रासदी और इसके कारण समाज पर पड़े प्रभावों को भी व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के माध्यम से उन परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और बदलते बस्तर की कहानी को देश-दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री सुनील गंगाराम गर्ग ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता और विशिष्टता के साथ सहअस्तित्व को स्वीकार करती है। उन्होंने श्री करुणा सागर पण्डा की लेखनी की सराहना करते हुए ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर लिखी गई प्रासंगिक कृति बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय विचारों के संवाद का समय है और साहित्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रश्नों पर सार्थक विमर्श पैदा करने वाली रचनाएं समाज को आत्ममंथन का अवसर देती हैं। ‘कोहरा’ भी अपने विषय के माध्यम से पाठकों को विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि ‘कोहरा’ केवल समस्या को सामने नहीं रखता, बल्कि समाधान की दिशा में भी सोचने के लिए प्रेरित करता है। बीबीजे के स्वतंत्र निदेशक श्री जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि नई पीढ़ी को देश की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक वास्तविकताओं से परिचित कराने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वरिष्ठ साहित्यकार श्री गिरीश पंकज ने ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का उदाहरण बताते हुए कहा कि रचनाकार को समाज के ज्वलंत प्रश्नों पर अपनी बात रखने का साहस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपन्यास में सामाजिक विषयों के साथ नक्सलवाद की समस्या को भी अभिव्यक्ति दी गई है। साहित्य समाज में वैचारिक चेतना और सकारात्मक प्रतिरोध का स्वर मजबूत करता है।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, श्री जलज कुमार अनुपम सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।
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रक्षाबंधन से पहले बहनों को विष्णु भैया का महतारी वंदन उपहार

  रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले छत्तीसगढ़ की बहनों को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त के रूप में विशेष उपहार दिया है। 7 अगस्त 2026 को जारी 30वीं किस्त के साथ प्रदेश की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 19,444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। रक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची यह राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ पर्व की खुशियों को और बढ़ाने वाली सौगात बन गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित महतारी वंदन योजना अब महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है। योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता सीधे डीबीटी के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है।

रक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची राशि, बहनों के चेहरे पर खुशी

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व है। इस बार पर्व से पहले महतारी वंदन की राशि मिलने से महिलाओं में विशेष उत्साह है। महिलाएं इस राशि से भाई के लिए राखी, मिठाई और उपहार खरीदने के साथ-साथ घर-परिवार की जरूरतों को पूरा करते हुए रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रही हैं।
महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन की राशि देकर बहनों की खुशियों को दोगुना कर दिया है। उनके लिए यह केवल एक हजार रुपये की मासिक सहायता नहीं, बल्कि अपने छोटे-बड़े फैसले स्वयं लेने का भरोसा और सम्मान का अहसास है।

हर महीने की सहायता बनी परिवारों का सहारा

सूरजपुर जिले की श्रीमती तेज कुमारी, श्रीमती मंजू रजवाड़े, श्रीमती पुनिया प्रजापति, श्रीमती शहनाज बेगम, श्रीमती गणेश्वरी प्रजापति, श्रीमती मेनका रजवाड़े और श्रीमती लता केंवट जैसी महिलाओं ने बताया कि महतारी वंदन की राशि से वे बच्चों की पढ़ाई, कॉपी-किताब, पौष्टिक भोजन और दैनिक जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर भी यह राशि उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है।

बचत से स्वरोजगार तक की नई राह

महतारी वंदन योजना का सकारात्मक प्रभाव केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। अनेक महिलाओं ने नियमित मिलने वाली राशि को बचाकर स्वरोजगार की नींव रखी है।

मुंगेली विकासखंड के ग्राम घुठेरा की श्रीमती अनीता गंधर्व ने महतारी वंदन से मिली राशि को बचाकर मुंगेली के पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में मनिहारी एवं सिलाई दुकान शुरू की। आज वे प्रतिदिन 500 से 1,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं और बच्चों की पढ़ाई तथा घरेलू खर्च में सहयोग कर रही हैं।
जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम सरखों की श्रीमती शबीना बेगम ने योजना की राशि से अपनी चूड़ी दुकान में नया सामान और चूड़ियों की विविधता बढ़ाई। इससे ग्राहकों की संख्या और आमदनी दोनों में वृद्धि हुई है।

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की श्रीमती गायत्री श्रीवास्तव ने राशि बचाकर सेकेंड हैंड सिलाई-पिको मशीन खरीदी। अब वे सिलाई के साथ पिको का काम भी कर आय बढ़ा रही हैं। रायगढ़ की श्रीमती राशी कँवर ने भी महतारी वंदन की किस्तों से सिलाई मशीन खरीदी, जो उनके लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता का साधन बन गई है।

भविष्य की सुरक्षा का भी भरोसा

कोरबा की श्रीमती शकुंतला कुर्रे महतारी वंदन की राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के साथ अपनी बेटी ध्रीयांशी के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में बचत करने में कर रही हैं। सक्ती जिले की श्रीमती हेमंत बंजारे, मोहला जिले की श्रीमती देवकी निषाद और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की श्रीमती अनीता गुप्ता भी योजना की राशि से घरेलू जरूरतों और छोटे व्यवसाय को मजबूती दे रही हैं।

30 किस्तों ने बनाया भरोसे का मजबूत आधार

1 मार्च 2024 से शुरू हुई महतारी वंदन योजना की 30 किस्तों की निरंतरता ने महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल दिया है। इस भरोसे के कारण महिलाएं अपनी जरूरतों के अनुसार खर्च, बचत और निवेश की योजना बना पा रही हैं। कई महिलाएं सिलाई, मनिहारी, चूड़ी व्यवसाय और अन्य छोटे स्वरोजगार से जुड़कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं।

महतारी वंदन से खुशहाल परिवार, सशक्त मातृशक्ति

महतारी वंदन योजना ने महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी को मजबूत करने के साथ बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च को बढ़ावा दिया है। महिलाओं के हाथ में नियमित आर्थिक सहायता पहुंचने से परिवारों में आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ा है।
रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन की 30वीं किस्त इस बदलाव की एक सुखद तस्वीर पेश कर रही है। प्रदेश की बहनें इस राशि से राखी और मिठाई खरीदने के साथ अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते हुए भाई-बहन के स्नेह का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएंगी।

महतारी वंदन योजना की यह कहानी केवल आर्थिक सहायता की कहानी नहीं है। यह उस विश्वास की कहानी है, जिसमें मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति को सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की नई ताकत मिल रही है। रक्षाबंधन से पहले बहनों के खातों में पहुंची राशि उनके लिए ‘विष्णु भैया का उपहार’ बनकर पर्व की खुशियों को और खास बना रही है।
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जनजातीय कारीगरों के हुनर को मिलेगा व्यापक बाजार, 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने लगाए स्टॉल

 छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के लाइवलीहुड कॉलेज में 'जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता (एम्पैनलमेंट) मेला' आयोजित किया गया। इसे जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन TRIFED (ट्राइफेड) और जिला प्रशासन ने मिलकर आयोजित किया था, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार दिलाना है।


मेले में 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए

             जिले के जनजातीय कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों के पारंपरिक हुनर को स्थानीय बाजार से निकालकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के बाजारों से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। जनजातीय कारीगरों को बेहतर बाजार, पहचान, विपणन और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुरुवार को लाइवलीहुड कॉलेज में एक दिवसीय ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेला’ आयोजित किया गया। मेले में जिले के 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों तथा जनजातीय उद्यमियों को ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने का अवसर प्रदान किया गया।

कारीगरों को राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगा अवसर

           कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि जिला प्रशासन की यह पहल जनजातीय कलाकारों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराएगी। ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने के बाद कारीगरों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों, ‘जनजातीय भारत’ बिक्री केंद्रों, मेलों तथा विभिन्न विपणन गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और कारीगरों को आय के नए अवसर प्राप्त होंगे।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने पर जोर

           कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आजीविका से जुड़ी गतिविधियां केवल आय का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि जनजातीय समाज की पारंपरिक कला, कौशल और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए। उन्होंने कारीगरों से कहा कि “आज इंटरनेट और सोशल मीडिया का दौर है। अपने उत्पादों और हुनर को सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाएं।” उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग कर कारीगर सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना सकते हैं और अपने उत्पादों की बाजार क्षमता बढ़ा सकते हैं।

प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर विशेष ध्यान

             कलेक्टर ने जिले की भौगोलिक स्थिति एवं वन उपज की प्रचुर उपलब्धता का उल्लेख करते हुए युवाओं को प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक एवं ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। नगरी क्षेत्र में उपलब्ध सतावर के साथ-साथ लाख, इमली और अन्य वन उपज का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रसंस्करण कर बेहतर आय का माध्यम बनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं एवं जनजातीय समाज के लोगों को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सहित उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
      
प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास पर फोकस

        कलेक्टर ने कहा कि जिले के जनजातीय कारीगरों का एक विशेष बैच तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार प्रबंधन एवं उत्पाद प्रस्तुतीकरण का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, ताकि वे अपने पारंपरिक कौशल को आधुनिक उद्यमिता से जोड़ सकें।

पारंपरिक कला को मिलेगा नया आयाम

सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जे.एल. ध्रुव ने कहा कि जनजातीय समाज की अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा, कला एवं शिल्प शैली है। यदि इन कारीगरों को उचित बाजार और मार्केट लिंकेज उपलब्ध कराया जाए, तो उनकी आय एवं जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इससे जिले की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलेगी।

विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी

           मेले में अतिथियों एवं अधिकारियों ने कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों का अवलोकन किया तथा उनके कार्य, उत्पादों की मांग, बाजार की उपलब्धता और आय के संबंध में जानकारी ली। स्टॉलों में वस्त्र एवं हस्तकला, धातु शिल्प, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, मिट्टी शिल्प, बांस एवं बेंत शिल्प, जनजातीय आभूषण, उपहार एवं उपयोगी सामग्री तथा चित्रकला सहित विभिन्न श्रेणियों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए।

ट्राइफेड नेटवर्क से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

             सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने कहा कि यह मेला जिले के जनजातीय कारीगरों एवं उद्यमियों को ट्राइफेड के व्यापक विपणन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों एवं जनजातीय उद्यमियों से उत्कृष्ट उत्पादों के साथ ऐसे अवसरों का लाभ उठाने की अपील की।

             इस अवसर पर उप संचालक कृषि मनीष साहू, उप संचालक पंचायत नकुल वर्मा, सहायक संचालक आजीविका संदीप गन्नाडे, उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक, जनजातीय कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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युवाओं को ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में वैश्विक आर्थिक जगत की प्रमुख हस्तियों के समक्ष छत्तीसगढ़ की तेजी से बदलती आर्थिक तस्वीर, निवेश की व्यापक संभावनाओं और भविष्य के विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अपनी पारंपरिक औद्योगिक और खनिज आधारित पहचान से आगे बढ़कर युवा शक्ति, नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक विनिर्माण पर आधारित नई अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बड़े निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि निवेश को रोजगार, उद्यमिता, बेहतर आय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना है। छत्तीसगढ़ के युवा केवल रोजगार तलाशने वाले न रहें, बल्कि अपने नवाचार और उद्यमिता के बल पर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करें, इसी सोच के साथ राज्य की नीतियों और योजनाओं को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

फोरम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री श्री एस. जयशंकर, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सहित भारत और विश्व की अनेक प्रमुख हस्तियां शामिल हो रही हैं।

6.31 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, 11.57 प्रतिशत की विकास दर

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रही है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 1 लाख 79 हजार 244 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए विकास और जनकल्याण को समान प्राथमिकता दी गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में अधोसंरचना निर्माण, पूंजीगत व्यय और सामाजिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। सड़क, रेल, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

नई औद्योगिक नीति के बाद 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े सुधारों के माध्यम से निवेश प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। इन सुधारों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब स्टील, सीमेंट और खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश के लिए नई संभावनाएं तैयार हुई हैं।

2030 तक 5 हजार स्टार्टअप, युवा बनेंगे रोजगार सृजक

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था के केंद्र में युवा हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा केवल नौकरी की प्रतीक्षा करने वाले ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बनें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नए उद्यमियों को अपने अभिनव विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक सीड फंड सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ युवाओं को तकनीक, नवाचार, कौशल और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने से न केवल नए व्यवसाय खड़े होंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी निर्मित होंगे।

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण, 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को छत्तीसगढ़ के भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि प्रदेश में 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके साथ ही नागरिकों को बेहतर और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 से अधिक एआई आधारित सरकारी सेवाएं विकसित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, युवाओं के लिए भविष्य के रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार करना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

500 करोड़ का एआई मिशन, नवा रायपुर में एआई डेटा सेंटर पार्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन पर काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 100 एआई डेटा लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे तथा 300 से अधिक एआई स्टार्टअप्स को सहयोग देने का लक्ष्य है।

नवा रायपुर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ को देश के उभरते डिजिटल और एआई इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा तथा युवाओं के लिए नई पीढ़ी के रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

बस्तर बनेगा छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बदलता हुआ बस्तर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। सुरक्षा की स्थिति में तेजी से हुए सुधार के बाद अब बस्तर में विकास, निवेश, रोजगार और उद्यमिता के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 4,824 करोड़ रुपये की आजीविका उन्नयन योजना तैयार की जा रही है। बस्तर में 421 बंद स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ते हुए 34 लाख से अधिक लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना बस्तर के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे बस्तर की औद्योगिक और व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

बस्तर में पर्यटन और स्थानीय उत्पाद बनेंगे रोजगार का बड़ा माध्यम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को विश्वस्तरीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से इस क्षेत्र में निजी निवेश के साथ होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के वनांचलों में मिलने वाले लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि छत्तीसगढ़ केवल कच्चे माल का उत्पादक न रहे, बल्कि यहीं तैयार उत्पाद बनें और उनकी अधिकतम आर्थिक मूल्य स्थानीय लोगों को मिले।

ग्रीन एनर्जी से जुड़ेगा छत्तीसगढ़ का विकास

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब पारंपरिक ऊर्जा में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आने वाले वर्षों में प्रदेश में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 90 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। भिलाई में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।

उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी का विस्तार राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ नए निवेश और ग्रीन जॉब्स के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

कच्चे माल से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन पर फोकस

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन राज्य की नई आर्थिक नीति का लक्ष्य केवल इन संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि प्रदेश के भीतर ही उनका अधिकतम वैल्यू एडिशन करना है।

इसी दिशा में नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा रही है। राजनांदगांव में प्रस्तावित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क तथा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट पार्क भविष्य के औद्योगिक विकास को नई गति देंगे। कोरबा में लिथियम की खोज से प्रदेश में बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और न्यू एनर्जी सेक्टर में भी नई संभावनाएं खुली हैं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम से निवेश प्रक्रिया होगी और आसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू किया गया है। कम जोखिम वाले उद्योगों के प्रकरणों में निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर स्वतः अनुमति का प्रावधान किया गया है।

इसके अंतर्गत आठ विभागों की 43 सेवाओं को शामिल किया गया है। इससे प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनुमति और प्रक्रियाओं में अनावश्यक समय न लगे और वे अपना ध्यान उद्योग तथा रोजगार सृजन पर केंद्रित कर सकें।

संसाधन से नवाचार तक - नए छत्तीसगढ़ का निवेश मॉडल

मुख्यमंत्री श्री साय ने वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ को ऐसे राज्य के रूप में प्रस्तुत किया, जहां प्राकृतिक संसाधन, पर्याप्त ऊर्जा, भूमि, कुशल और युवा मानव संसाधन, बेहतर होती कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियां एक साथ उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का अगला चरण संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण का है। निवेश इस परिवर्तन का माध्यम है, जबकि इसका अंतिम उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार, उद्यमिता और आय के अवसर उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद एवं श्री राहुल भगत, विशेष सचिव एवं जनसम्पर्क आयुक्त श्री रजत बंसल, आवासीय आयुक्त श्रीमती श्रुति सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
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स्वास्थ्य लाभ ले रहे जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव से मिले मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली के द्वारका स्थित छत्तीसगढ़ निवास में जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव से मुलाकात की। उपचार के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे श्री किरण सिंह देव से मुख्यमंत्री श्री साय ने आत्मीयता से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

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उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किया शौर्य वाटिका का भूमिपूजन, लगभग 79 लाख रुपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

 जिले के वीर बलिदानियों की पावन स्मृति को संजोने और उनकी शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम सोनपुर में शौर्य वाटिका का भूमिपूजन किया गया। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में जिले के 37 शहीद परिवारों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर लगभग एक एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही 'शौर्य वाटिका' में शहीदों के नाम पर उनके परिजनों द्वारा स्मृति वृक्ष लगाए गए। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने भी शहीदों की स्मृति में पीपल का पौधा रोपित कर शौर्य वाटिका में पौधरोपण की शुरुआत की।


           कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री  शर्मा ने लगभग 78.96 लाख रुपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें तालाब गहरीकरण, खेल मैदान, पहुंच मार्ग निर्माण, शौचालय, चबूतरा निर्माण, वृक्षारोपण एवं शेड निर्माण सहित विभिन्न कार्य शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के अंतर्गत 37.95 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण, आहता निर्माण एवं शेड निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण किया गया।

          उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में छत्तीसगढ़ के जवानों और बस्तर के लोगों ने बड़ी कीमते चुकाई है। उन्होंने शहीद जवानों और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहा कि आज बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। जिन क्षेत्रों में कभी नक्सल हिंसा के कारण स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाती थीं, वहां अब विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

         उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा  कि बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे में शहीद जवानों की बहादुरी और बलिदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज नक्सल क्षेत्रों में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, जहां कभी जाना मुश्किल था, अब वहां शांति और बदलाव का माहौल है। उपमुख्यमंत्री ने सोनपुर गांव के विकास की सराहना करते हुए कहा कि यहां शहीदों की स्मृति में शौर्य वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले के शहीद परिवारों और शहीदों के नाम पर यहां पौधरोपण किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके त्याग और शौर्य को याद रख सकें।

            उन्होंने कहा कि सोनपुर गांव में योजना के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। उपमुख्यमंत्री ने गांव में निर्मित विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनरेगा सहित वीवीजी राम जी के माध्यम से रोजगार के साथ-साथ कौशल विकास और अधोसंरचना निर्माण को गति दी जा रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजनाबद्ध तरीके से गांव के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

           इस अवसर पर सांसद श्री विजय बघेल ने भी शहीदों को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम में साजा विधायक श्री ईश्वर साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष कीर्ति नायक, श्री सुरेन्द कोशिक, सरपंच श्री संत कुमार कुंभकार, सेवानिवृत शिक्षक श्री रामू राम चक्रधर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक गण उपस्थित थे।
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नगरीय प्रशासन विभाग के नए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने ली मैराथन बैठक

 नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के नए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कार्यभार ग्रहण करने के अगले ही दिन आज मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की मैराथन बैठक लेकर योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), नालंदा परिसर, अधोसरंचना एवं अन्यो विभागीय योजनाओं के अंतर्गत निर्माणाधीन कार्यों में लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति, मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन तथा आगामी कार्ययोजना पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। 


निगम आयुक्तों और सीएमओ को टीम के साथ रोजाना वार्ड भ्रमण के दिए निर्देश

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बैठक में अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ नागरिकों तक समय पर पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। इसके लिए योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना जरूरी है। उन्होंने सभी नगर निगमों के आयुक्तों  तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्यर नगर पालिका अधिकारियों को अपर आयुक्तों , उपायुक्तोंव, जोन आयुक्तों  एवं अन्यध अधिकारियों के साथ रोजाना वार्डों का भ्रमण कर विभागीय वाट्स-अप ग्रुप में फोटोग्राफस साझा करने के निर्देश दिए। 
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत स्वीकृत और पूर्ण आवासों की घटकवार प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने आवासों के निर्माण की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों और शेष कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ समय पर उपलब्ध कराने तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति पर लगातार निगरानी रखते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। 

श्री बोरा ने अमृत मिशन के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की वर्तमान स्थिति, प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की समीक्षा केवल कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नहीं होनी चाहिए, अधिकारी नियमित रूप से मौके पर जाकर कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और उससे नागरिकों को मिल रहे लाभों का आकलन करें। उन्होंने निर्माण एवं विकास कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने और सभी कार्य समय-सीमा में पूरा करने को कहा। 

प्रमुख बाजारों की नियमित साफ-सफाई और कचरा निष्पाूदन पर जोर

श्री बोरा ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत संचालित गतिविधियों और कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और नगरीय निकायों में चल रहे स्वच्छता संबंधी कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निकायों में चार डस्ट बिन व्यवस्था के व्यवस्थित क्रियान्वयन, नागरिकों में जागरूकता तथा कचरे के उचित संग्रहण एवं प्रबंधन की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने घरों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के पृथक्करण की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू करने और निकायों द्वारा इसकी नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित करने पर जोर दिया।
प्रमुख सचिव ने बाजार क्षेत्रों में नियमित सफाई, समय पर कचरा उठाव, व्यवस्थित कचरा संग्रहण और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी नियमित और सतत व्यवस्था विकसित की जाए, जिसका सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई दे। उन्होंने नगरीय निकायों और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। 

नालंदा परिसर का निर्माण प्राथमिकता से पूर्ण करने कहा

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना नालंदा परिसर - सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन के अंतर्गत विभिन्न निकायों में निर्माणाधीन 38 नालंदा परिसरों के निर्माण कार्यों का सतत् निरीक्षण करते हुए समय-सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्य पूर्ण होते तक परिसर में आवश्यक अन्य सामग्री यथा लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें] कम्प्यूटर पैनल्स] लाइब्रेरियन सहित अन्य आनुषांगिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। इससे विद्यार्थियों को परिसर की पूर्णता के तुरंत बाद लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
 
बैठक में श्री बोरा ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान किए गए महत्व पूर्ण कार्यों एवं नवाचारों के साथ ही कार्य के दौरान आने वाली समस्यादओं तथा उनके समाधान के संबंध में अपने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंसने बताया कि शहरों के विकास और नगरीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए स्थाोनीय जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार समन्वचय करने की आवश्यओकता होती है। इससे विभाग को जमीनी स्तकर पर कार्यों की जानकारी एवं प्रगति की सूचना मिलते रहती है। उन्होंने सीएम हेल्पिलाइन और सीपीग्राम्स (CPGRAMS) पोर्टल के माध्यशम से प्राप्त  शिकायतों का निराकरण पूर्ण निष्ठा् एवं समय-सीमा के भीतर किए जाने के निर्देश दिए।  

’पयर्टन एवं धार्मिक महत्वत के स्थरलों में उपलब्धा कराएं मूलभूत सुविधाएं’

श्री बोरा ने बैठक में रायपुर नगर निगम के आयुक्तक को रायपुर शहर के पर्यटन स्थ लों का चिन्हांरकन कर वहां शुध्दक पेयजल, सुगम शौचालय, डस्टपबिन तथा सफाई की पर्याप्तज व्यनवस्था  सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में अर्बन-फारेस्ट्री के विकास तथा पब्लिक गार्डन के पुनरोध्दारर की कार्ययोजना बनाकर प्राथमिकता से कार्य करने तथा पीपीपी मोड पर फण्डड की व्योवस्थार के विकल्पा तलाशने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों के परिसीमन के बाद शामिल नए क्षेत्रों में शुध्दक पेयजल, सफाई व्येवस्था, शहरी हरियाली तथा अरबन एग्रीकल्च र जैसे बिन्दुसओं को प्राथमिकता से शामिल करते हुए योजना तैयार करने के निर्देश दिए। 

प्रमुख सचिव ने नगरीय क्षेत्रों में पूर्व निर्मित हाउसिंग प्रोजेक्स्शा की मरम्मजत, स्ल म रिडेव्हसल्पनमेंट तथा हाउसिंग प्रोजेक्टा के लिए उपलब्धर ईडब्यूकरनेएस भूमि पर वायबल कॉर्मिर्शियल प्रोजेक्टप के नवीन विकल्पि तलाशने तथा योजनाओं के क्रियान्वडयन में आउट-ऑफ-द-बॉक्सक विचार के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री आर. एक्का, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित अग्रवाल, नगर निगम रायपुर के आयुक्त श्री संबित मिश्रा, नगर निगम बिरगांव के आयुक्त श्री युगल किशोर उर्वशा, उप सचिव श्री भागवत जायसवाल, अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, मुख्यल अभियंता श्री राजेश शर्मा, संयुक्त संचालक श्री मिथिलेश अवस्थी, उप संचालक श्री अरुण साहू, सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील अग्रहरि, श्री सचित साहू तथा अधीक्षण अभियंता श्री रमेश सिंह भी बैठक में मौजूद थे।
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बाढ़ आपदा से निपटने सभी 33 जिलों में मॉक ड्रिल- सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी

 छत्तीसगढ़ में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति से निपटने और त्वरित, प्रभावी राहत-बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल एक्सरसाइज आयोजित की गई। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला प्रशासन के नेतृत्व में यह अभ्यास संपन्न हुआ। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरी गतिविधि की निगरानी की गई।


विभिन्न विभागों और सुरक्षा बलों का दिखा तालमेल

       मॉक ड्रिल के दौरान बाक़ायदे बाढ़ की अलग-अलग संभावित परिस्थितियां निर्मित की गईं। इसमें एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), सेना, पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना और अग्निशमन सेवाओं के अलावा राजस्व, जल संसाधन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पशुपालन और दूरसंचार विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और समन्वय की गति को परखा गया।

पूर्व चेतावनी से लेकर राहत शिविरों तक की कार्यप्रणाली का अभ्यास

       इस अभ्यास में बाढ़ की पूर्व चेतावनी जारी करने, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविरों के संचालन, बचाव नौकाओं व संसाधनों की तैनाती और मेडिकल टीमों की व्यवस्था का पूरा रिहर्सल किया गया। जिला स्तर पर त्वरित निर्णय लेने और मैदानी अमले की प्रतिक्रिया क्षमता की समीक्षा की गई।

गैप्स को पहचानकर दूर करने पर जोर

       आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (छक्ड।) के अधिकारियों ने रायपुर जिले में अभ्यास का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय किसी भी स्तर पर सामने आने वाले अंतर (गैप्स)कृजैसे सूचना में देरी या संसाधनों की कमीकृको समय रहते पहचानकर दूर करना है।

        राज्य स्तरीय इस टेबल-टॉप और व्यावहारिक मॉक ड्रिल में एनडीएमए नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार श्री रविंद्र गुरुंग, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के डॉ. जीवन कुमार, राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के उप सचिव श्री गजेंद्र ठाकुर सहित विभिन्न अंतर-विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े रहे।
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