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कोलकाता मेट्रो का नया अध्याय: 9 लाख से अधिक यात्री करेंगे हर दिन सफर

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आधारभूत संरचना में युगांतरकारी बदलाव हुए हैं। ऐसा ही बदलाव कोलकाता मेट्रो में भी हुआ है जहां प्रतिदिन 9 लाख से अधिक यात्रियों के सफर के लिए रेलवे नेटवर्क को विस्तृत किया गया है।

वस्तुत: भारत में मेट्रो सेवा की नींव रखने वाला शहर कोलकाता अब मेट्रो नेटवर्क के मामले में एक नया इतिहास रचने जा रहा है। अब हर दिन कोलकाता मेट्रो से करीब 9.15 लाख यात्री सफर कर सकेंगे। इस बदलाव की बुनियाद बनी है 3 मेट्रो सेक्शन की 366 नई मेट्रो ट्रेन सेवाएँ जो यात्रियों को तेज़ और नियमित सेवा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

22 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोलकाता मेट्रो की ग्रीन लाइन पर 2.45 किलोमीटर लंबी एस्प्लानेड–सियालदह मेट्रो सेक्शन, येलो लाइन पर 6.77 किलोमीटर लंबी नोआपाड़ा–जय हिंद विमानबंदर मेट्रो सेक्शन और ऑरेंज लाइन पर 4.4 किलोमीटर लंबी हेमंत मुखोपाध्याय–बेलेघाटा मेट्रो सेक्शन का उद्घाटन करेंगे और तीनों ही लाइनों पर 3 मेट्रो ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। 
366 नई मेट्रो सेवाओं का सबसे बड़ा लाभ ग्रीन लाइन के यात्रियों को होगा। जिसपर सेवाओं की संख्या बढ़कर 186 हो गई है। साथ ही, ऑरेंज लाइन पर अब 60 सेवाएँ और येलो लाइन पर 120 सेवाएँ यात्रियों की राह आसान बनाएंगी। नई सेवाओं से अधिक ट्रेनों की उपलब्धता बढ़ेगी, इंतज़ार का समय घटेगा और भीड़-भाड़ से राहत मिलेगी। 

ग्रीन लाइन – एस्प्लानेड से सियालदह (2.45 किमी)। यह सेक्शन शहर के लिए सबसे बड़ी राहत लेकर आया है। अभी हावड़ा और सियालदह जैसे दो बड़े रेलवे टर्मिनलों के बीच पहुँचने में सड़क से 40–45 मिनट तक लगते हैं। अब मेट्रो से यह सफर सिर्फ़ 11 मिनट में पूरा होगा। रोज़ाना लाखों यात्रियों के लिए यह समय बचत किसी वरदान से कम नहीं होगी।

दूसरी बड़ी उपलब्धि है येलो लाइन – नोआपाड़ा से जय हिंद विमानबंदर (6.77 किमी)। अब एयरपोर्ट तक पहुँचने के लिए सड़क से यात्रा करने वालों को नया विकल्प मिलेगा। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्री, एयरलाइन स्टाफ और एयरपोर्ट कर्मचारी सब तेज़, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव करेंगे। दमदम कैंटोनमेंट से इंटरचेंज सुविधा मिलने से पूरे शहर और प्रमुख रेलवे स्टेशनों तक सीधा कनेक्शन भी आसान हो जाएगा। एस्प्लानेड से एयरपोर्ट तक अब यह दूरी सिर्फ़ 30 मिनट में पूरी होगी।

तीसरी कड़ी है ऑरेंज लाइन – हेमंत मुखोपाध्याय से बेलेघाटा (4.4 किमी)। यह विस्तार साइंस सिटी, बड़े अस्पतालों, स्कूलों और व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ेगा। यात्रियों की संख्या यहाँ दोगुनी होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि बेलेघाटा से कवि सुभाष तक की यात्रा भी अब सिर्फ़ 32 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इससे दक्षिण कोलकाता और पूर्वी कोलकाता के बीच सफर बेहद आसान हो जाएगा।
इन नई मेट्रो लाइनों से न सिर्फ़ कोलकाता बल्कि उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के यात्रियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। जिस दूरी को तय करने में पहले घंटों लग जाते थे, अब वही सफर कुछ ही मिनटों में पूरा होगा। शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँचना अब पहले से कहीं अधिक सहज और तेज़ हो जाएगा।
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मिले मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय – छत्तीसगढ़ के विकास को मिली नई रफ्तार

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को 1 नवंबर 2025 को रायपुर में आयोजित अमृत रजत महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य सरकार की भावी योजनाओं, विकास की प्राथमिकताओं और जनकल्याण से जुड़े प्रमुख विषयों की जानकारी भी दी।


उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में राज्य गठन की 25वीं वर्षगांठ अमृत रजत जयंती वर्ष के रूप में मनाई जा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक होगा और प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति से इसकी महत्ता और भी बढ़ जाएगी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ तेज़ी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ‘अंजोर विज़न @2047’  दस्तावेज़ तैयार किया है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ के समावेशी और सतत विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। यह विज़न दस्तावेज़ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, नवाचार और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में सुधार और नवाचार-आधारित पहलों पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार के “जन विश्वास अधिनियम 2023” से प्रेरणा लेते हुए राज्य में “जन विश्वास विधेयक 2025” पारित किया है, जिससे न्याय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और आम नागरिकों की पहुंच अधिक सुलभ एवं सहज बनी है।

राजधानी नवा रायपुर के सुनियोजित और तीव्र विकास हेतु गठित छत्तीसगढ़ राज्य राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCRDA) की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से साझा की। उन्होंने बताया कि इस प्राधिकरण के माध्यम से राजधानी क्षेत्र को एक आधुनिक, स्मार्ट एवं तेज़ी से विकसित शहरी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को राज्य में औद्योगिक निवेश और रोज़गार सृजन के क्षेत्र में हो रही उल्लेखनीय प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में लागू की गई नई औद्योगिक नीति 2024-30 के परिणामस्वरूप राज्य में निवेशकों की रुचि निरंतर बढ़ रही है। नीति के तहत सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया गया है, जिससे उद्योगों की स्थापना सरल, त्वरित और पारदर्शी बनी है। 1000 से अधिक व्यक्तियों को रोज़गार प्रदान करने वाले उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच अब तक 84 कंपनियों से कुल 6.65 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नवा रायपुर में देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट की नींव रखी जा चुकी है, और एआई डेटा सेंटर का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो गया है। इसी प्रकार, टेक्सटाइल, फार्मा, रेडीमेड गारमेंट और आईटी सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ को तकनीकी और औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध है। आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल संसाधनों और प्रशिक्षित शिक्षकों के सहयोग से शिक्षा को तकनीक से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार मेडिसिटी और एडु सिटी जैसी दो नई महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेज़ी से कार्य कर रही है। रायपुर में विकसित की जा रही मेडिसिटी एक आधुनिक और उत्कृष्ट स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभर रही है, जिससे छत्तीसगढ़ को मेडिकल हब के रूप में पहचान प्राप्त होगी और व्यापक स्तर पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रही पुनर्वास और विश्वास बहाली की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियों के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन की ओर लौटे हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का तीव्र विस्तार किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में शासन के प्रति विश्वास सुदृढ़ हुआ है और वे विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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मुख्यमंत्री साय की पहल से खुला विकास का रास्ता, चार नए पुलों का भूमि पूजन जल्द

छत्तीसगढ़ की अधोसंरचना को रफ्तार देने के लिए आज एक अहम क़दम उठाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात की, जिसमें राज्य की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली।


बैठक में केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 7000 करोड़ से ऊपर के नियोजित कार्यों की वित्तीय स्वीकृति को शीघ्र करने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

इसके साथ ही केंद्रीय सड़क निधि (CRF) के तहत 600 करोड़ रुपये की मंज़ूरी दी गई। इसके ज़रिए छत्तीसगढ़ में कई सड़कों के निर्माण और उन्नयन का रास्ता साफ़ होगा।

रायपुर शहर की भीड़भाड़ को कम करने के लिए चार बड़े ब्रिज बनाए जाएंगे, जिनका भूमि पूजन शीघ्र ही होगा। वहीं, राजधानी रायपुर से अन्य ज़िलों तक की सड़कें दो लेन से चार लेन में बदली जाएंगी, जिससे आवागमन तेज़ और सुरक्षित हो जाएगा।

बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य की सड़क योजनाएं की प्लानिंग में अब केंद्र के ‘गति शक्ति पोर्टल’ का उपयोग किया जाएगा, ताकि जल्द मंजूरी मिल सके। श्री गडकरी ने रायपुर-आरंग-बिलासपुर-दर्री के बीच करीब 95 किमी लंबी छह लेन सड़क के लिए डीपीआर जल्दी बनाने के लिए आदेशित किया, जो औद्योगिक, कृषि और शैक्षिक क्षेत्रों को जोड़ेगी। साथ ही, समृद्धि एक्सप्रेसवे का विस्तार रायपुर तक भी किया जाएगा।

इसके अलावा कुछ ज़रूरी योजनाओं को आज मंजूरी भी मिल गई। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 ए में उन्नयन कार्य, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 में रेजिंग का कार्य एवं राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 में मजबूतीकरण के कुल 115.95 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति मिली है। इनमें बिलासपुर शहर के भीतर 15 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शामिल है, जिससे शहर में ट्रैफिक आसान होगा। कटनी-गुमला मार्ग के हिस्से में 11 किलोमीटर सड़क बनेगी जो गांवों को जोड़ने में मदद करेगी। वहीं, केशकाल के 4 किलोमीटर हिस्से की सड़क को मज़बूत किया जाएगा, जिससे पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़कें केवल यात्रा का साधन नहीं हैं, बल्कि विकास, रोज़गार और सामाजिक बदलाव का रास्ता हैं। अँजोर विजन 2047’ के तहत छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव, हर नागरिक तक बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन पहुंचे। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह भी उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सांसदों संग सौजन्य भेंट — रात्रि भोज में हुई सार्थक चर्चा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली स्थित 17, छत्तीसगढ़ सदन में राज्य के सांसदों से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर आयोजित रात्रि भोज के दौरान मुख्यमंत्री ने सांसदों के साथ राज्य और राष्ट्र के समसामयिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।


मुख्यमंत्री ने सभी सांसदों को छत्तीसगढ़ के समग्र विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय उपस्थिति और सहभागिता से राज्य के हित और ज़मीनी ज़रूरतें राष्ट्रीय फलक पर बेहतर ढंग से प्रस्तुत हो पाती हैं।

इस सौहार्दपूर्ण मुलाक़ात में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में हो रहे व्यापक परिवर्तनों की चर्चा भी हुई। सांसदों ने छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति को लेकर फीडबैक साझा किया और राज्य के जमीनी अनुभवों से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति, निवेश आकर्षण, युवाओं को मिल रहे नए अवसर, किसानों की आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे परिवर्तनकारी विकास कार्यों की भी विस्तार से जानकारी दी।
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आतंकी संचार व नशे की समस्या से निपटने की तैयारी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवादी समूहों द्वारा एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफार्मों का इस्तेमाल करने पर चिंता जताई और साथ ही इस समस्या से निपटने के लिए एक विशेष मंच स्थापित करने के निर्देश दिए ताकि आतंकी संगठनों के सोशल मीडिया के जरिए खुफिया संचार पर लगाम कसी जा सके। गृह मंत्री ने भगोड़ों को वापस लाने के लिए भी एक मजबूत तंत्र और बेहतर समन्वय स्थापित करने की अपील की।

राष्ट्रीय सुरक्षा के कई मुद्दों पर हुआ मंथन
गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय 8वें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में ये बातें कही। इस सम्मेलन में देशभर से 800 के करीब अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें से कुछ भौतिक तो कुछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े थे। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विचार विमर्श किया गया। सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्र के हितों के खिलाफ रहने वाले बाहरी तत्वों की भूमिका और मादक पदार्थों के व्यापार में उनकी संलिप्तता सहित उनके घरेलू संबंधों के मुद्दे पर मंथन हुआ। इनमें आतंकी समूहों द्वारा इस्तेमाल की जानी वाली एन्क्रिप्टेड संचार ऐप्स और अन्य नई तकनीकों के गलत इस्तेमाल से पैदा हुईं चुनौतियों पर बात हुई। साथ ही भीड़ प्रबंधन, निर्जन द्वीपों की सुरक्षा के मुद्दे पर मंथन हुआ।

आतंकवाद के वित्तपोषण से मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। गृह मंत्री ने आतंकवादी और तस्करी गतिविधियों में शामिल भगोड़ों को वापस लाने के लिए कड़े उपाय करने के भी निर्देश दिए, जिसमें केंद्रीय और राज्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाने, आतंकवाद-अपराधी के घरेलू गठजोड़ को तोड़ने के निर्देश दिए। गृह मंत्रालय ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि पुलिस संगठनों द्वारा केवल स्वदेशी तकनीक का ही उपयोग किया जाए।

दूसरे दिन इन चुनौतियों से निपटने पर होगी चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन नागरिक उड्डयन और बंदरगाह सुरक्षा, आतंकवाद-निरोध, वामपंथी उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम के मुद्दे पर केंद्रित होगा। इस बैठक में भाग लेने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में, केंद्रीय गृह सचिव, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों व केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख शामिल रहे। साल 2016 में डीजीएसपी और आईजीएसपी सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर साल राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन आयोजित करने का निर्देश दिया था, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों के अनुभव के माध्यम से और क्षेत्र विशेषज्ञों के सहयोग से प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समाधान खोजना था। प्रधानमंत्री के निर्देशों के तहत साल 2021 से सम्मेलन हाइब्रिड मोड में आयोजित किया जा रहा है। 

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पीएम मोदी का तमिलनाडु दौरा, 4800 करोड़ की परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

 ब्रिटेन और मालदीव की अपनी यात्रा से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को तमिलनाडु का दौरा करेंगे। यहां वह तूतीकोरिन में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में 4800 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह कार्यक्रम रात 8 बजे आयोजित होगा। इसके बाद वह रविवार को तिरुचिरापल्ली के गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में दोपहर 12 बजे महान चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम की जयंती समारोह और आदी तिरुवथिरा उत्सव में भाग लेंगे।

तूतीकोरिन हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे

 


मालदीव की राजकीय यात्रा के बाद प्रधानमंत्री सीधे तूतीकोरिन पहुंचेंगे। यहां वे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण करेंगे। ये परियोजनाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, रसद दक्षता, स्वच्छ ऊर्जा ढांचे और तमिलनाडु के नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगे। प्रधानमंत्री विश्वस्तरीय हवाई अड्डा ढांचे के विकास और कनेक्टिविटी बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत तूतीकोरिन हवाई अड्डे पर 450 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। 17,340 वर्ग मीटर में फैला यह टर्मिनल व्यस्त समय के दौरान 1,350 यात्रियों और सालाना 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। 100 प्रतिशत एलईडी लाइटिंग, ऊर्जा-कुशल विद्युत से युक्त यांत्रिक प्रणालियों, और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से जल पुनर्चक्रण के साथ यह टर्मिनल जीआरआईएचए-4 स्थिरता रेटिंग प्राप्त करेगा। इस परियोजना से तमिलनाडु में पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा।

दो राजमार्ग परियोजनाएं राष्ट्र को करेंगे समर्पित
सड़क व बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में प्रधानमंत्री दो महत्वपूर्ण राजमार्ग परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित करेंगे। पहली परियोजना एनएच-36 के सेथियाथोप-चोलपुरम खंड की 50 किमी की 4-लेन वाली सड़क है। इसे विक्रवंडी-तंजावुर कॉरिडोर के तहत 2,350 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। इसमें तीन बायपास, कोल्लिदम नदी पर एक किमी का चार-लेन पुल, चार प्रमुख पुल, सात फ्लाईओवर और कई अंडरपास शामिल हैं। इससे सेथियाथोप और चोलपुरम के बीच यात्रा समय 45 मिनट तक कम हो जाएगा। दूसरी परियोजना एनएच-138 तूतीकोरिन पोर्ट रोड की 5.16 किमी की 6-लेनिंग है। इसे लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इसमें अंडरपास और पुल शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे सीएम, न आने की बताई ये वजह

 


तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में स्टालिन ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि 'अस्पताल में होने की वजह से उन्होंने मुख्य सचिव के जरिए एक याचिका भेजी है, जिसे मुख्य सचिव प्रधानमंत्री मोदी को देंगे।' पीएम मोदी मालदीव का दौरा पूरा कर आज तमिलनाडु पहुंचेंगे, जहां वे 4800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

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छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरी स्वच्छता की चमक, 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में बिल्हा देश का सबसे स्वच्छ शहर

केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में छत्तीसगढ़ के सात शहरों ने अपनी स्वच्छता की चमक बिखेरी है। बिल्हा नगर पंचायत 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में अब देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बन गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बिल्हा ने देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है। तीन लाख से दस लाख जनसंख्या वाले शहरों में बिलासपुर को पूरे देश में दूसरा और 20 हजार से 50 हजार आबादी वाले शहरों में कुम्हारी को तीसरा स्थान मिला है।


राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में इन तीनों नगरीय निकायों के साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य के कुल सात नगरीय निकायों को पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव, संबंधित निकायों के महापौर, अध्यक्षों और अधिकारियों ने ये पुरस्कार ग्रहण किए। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल और केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी पुरस्कार समारोह में शामिल हुए।

भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में अंबिकापुर, पाटन, विश्रामपुर और रायपुर ने भी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में पहली बार शामिल नई श्रेणी 'स्वच्छता सुपर लीग' (एसएसएल) में अंबिकापुर, पाटन और विश्रामपुर ने जगह बनाई है। यह सम्मान उन शहरों को दिया गया, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में रहे हैं और वर्तमान वर्ष में शीर्ष 20 शहरों में शामिल हैं। अंबिकापुर ने 50 हजार से तीन लाख जनसंख्या श्रेणी में तथा पाटन और विश्रामपुर ने 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में एसएसएल में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। इनके अतिरिक्त, राजधानी रायपुर को छत्तीसगढ़ का 'प्रॉमिसिंग (Promising) स्वच्छ शहर' का पुरस्कार मिला है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी विजेता नगरीय निकायों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इन शहरों में स्वच्छता के प्रति नागरिकों, स्थानीय निकायों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ये पुरस्कार राज्य के अन्य शहरों को भी अपने शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए प्रेरित करेंगे।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने भी आज पुरस्कृत नगरीय निकायों को बधाई दी और कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक सम्मान ही नहीं, बल्कि स्वच्छता के प्रति निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। आने वाले समय में अन्य नगरीय निकायों को भी स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होंगे। शहरी सरकारों से लेकर राज्य और केंद्र की सरकार शहरों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने के लिए कई नवाचारों के साथ सतत काम कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के 51,000 अभ्यर्थियों को किया संबोधित

रोजगार मेला के 16वें चरण के अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर, रायपुर एवं नागपुर में रोजगार मेलों का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में चयनित कुल 407 नवनियुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।


इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के लगभग 51,000 नवनियुक्त अभ्यर्थियों को संबोधित किया एवं उन्हें नई भूमिका हेतु शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

बिलासपुर कार्यक्रम

बिलासपुर में यह आयोजन नॉर्थ ईस्ट इंस्टिट्यूट ऑडिटोरियम में किया गया, जहाँ 185 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।
इसमें 173 अभ्यर्थी रेलवे विभाग से तथा 12 अभ्यर्थी अन्य विभागों (सीआईएसएफ एवं डाक विभाग) से थे।

मुख्य अतिथि के रूप में माननीय श्री तोखन साहू, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री, भारत सरकार, उपस्थित रहे। उन्होंने प्रारंभिक 30 नियुक्ति पत्र प्रदान किए। शेष नियुक्ति पत्र विभागीय अधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में माननीय विधायक श्री सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, मंडल रेल प्रबंधक श्री राजमल खोईवाल, रेल अधिकारीगण, जनप्रतिनिधि एवं मीडिया कर्मी उपस्थित रहे।

रायपुर कार्यक्रम

रायपुर रेल मंडल में यह आयोजन कम्युनिटी हॉल, डब्लूआरएस कॉलोनी में किया गया। यहां 73 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए, जिनमें से 57 अभ्यर्थी फिजिकली उपस्थित रहे।

इसमें रेलवे विभाग के 45, पोस्टल विभाग के 4, गृह मंत्रालय के 2, स्वास्थ्य मंत्रालय के 5 एवं संस्कृति मंत्रालय के 1 अभ्यर्थी शामिल थे।

मुख्य अतिथि के रूप में माननीय श्री दुर्गादास उइके, केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री उपस्थित रहे। साथ ही माननीय सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री सुनील सोनी, श्री मोतीलाल साहू, अपर मंडल रेल प्रबंधक श्री बजरंग अग्रवाल, वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी श्री राहुल गर्ग सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

नागपुर कार्यक्रम

नागपुर में रोजगार मेला मंगल मंडप, कड़बी चौक में आयोजित किया गया। यहाँ 149 नवनियुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, भारत सरकार रहे। उनके साथ माननीय विधायक श्री कृष्णा खोपड़े (नागपुर पूर्व) भी मंचासीन रहे।

रोजगार मेला के इस आयोजनों के माध्यम से युवाओं को रोजगार प्रदान कर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में सार्थक योगदान दिया गया। तीनों स्थानों पर अभ्यर्थियों, जनप्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इन आयोजनों को अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक बनाया।
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देश की ऊर्जा और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला में अग्रणी भूमिका निभा रहा है दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे

 देश के कोयला आधारित पावर प्लांट्स, भारी उद्योगों और विभिन्न कारखानों को आवश्यक सामग्रियाँ जैसे कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, उर्वरक और मैगनीज की आपूर्ति सुनिश्चित करने में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की प्रमुख भूमिका रही है । इस अहम जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में माल लदान और राजस्व अर्जन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है ।


इस अवधि में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा 64.61 मिलियन टन माल लदान किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2.03% अधिक है । केवल लदान ही नहीं, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने माल ढुलाई से ₹7807.88 करोड़ की आय अर्जित की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आय ₹7404.06 करोड़ थी । इस प्रकार दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को ₹403.80 करोड़ की अतिरिक्त आय हुई, जो कि 5.45% की वृद्धि को दर्शाता है । यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रथम तिमाही प्रदर्शन है ।

इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ-साथ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में भी सराहनीय पहल की है । यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न त्योहारों एवं धार्मिक आयोजनों के मद्देनज़र विशेष रेलगाड़ियों का संचालन किया गया है । हाल ही में रथयात्रा पर्व के अवसर पर यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए कई फेरों के लिए रथयात्रा स्पेशल ट्रेनों का सफल संचालन किया गया । इसके अतिरिक्त, श्रावण मास के दौरान श्रद्धालु यात्रियों की सुविधा हेतु श्रावणी स्पेशल ट्रेनों का भी संचालन किया जा रहा है, जिससे तीर्थयात्रियों को निर्बाध यात्रा का अनुभव मिल सके ।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे रेलवे द्वारा व्यापार सुलभ बनाने, सेवा गुणवत्ता में सुधार लाने और ग्राहकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किए गए लगातार प्रयास हैं । नीति-निर्माण में त्वरित निर्णय, ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और व्यवसाय विकास इकाइयों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ।

माल ढुलाई के लिए संरचनात्मक सुविधाओं के विस्तार के अंतर्गत कई प्रमुख गुड्स शेडों को सक्रिय किया गया है। कलमना और रामटेक को कोयला लदान, कमालपुर को खाद्य सामग्रियों (फूड ग्रेन) और अन्य माल लदान हेतु खोला गया है । भानुप्रतापपुर गुड्स शेड लौह अयस्क (आयरन) के लदान हेतु पुनः चालू किया गया है । इसके साथ ही रायपुर स्टोर डिपो (RSD) और चंदिया गुड्स शेड को एक्सक्लूसिव कंटेनर रेल टर्मिनल (ECRT) की सुविधा प्रदान की गई है ।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे भविष्य में भी इसी गति और प्रतिबद्धता के साथ देश की औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए माल लदान और राजस्व अर्जन के नए आयाम स्थापित करने हेतु अग्रसर रहेगा ।
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केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने एनएफएसयू और एनएफएसएल का किया भूमिपूजन

केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नवा रायपुर के ग्राम बंजारी में राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) और राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (एनएफएसएल) के भवनों के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। नवा रायपुर के बंजारी में 40 एकड़ में दोनों राष्ट्रीय संस्थानों के सर्वसुविधायुक्त आधुनिक भवन बनाए जाएंगे। परिसर में दोनों संस्थानों के भवनों के निर्माण के लिए प्रारंभिक रूप से 130-130 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा, छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डा. रमन सिंह, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम और वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप भी भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए।


एनएफएसएल देश की सबसे हाइटेक फोरेंसिक लैब है। इसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ को साइंटिफिक इन्वेस्टीगेशन के क्षेत्र में बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। वहीं एनएफएसयू फोरेंसिक विज्ञान के अध्ययन के लिए देश का शीर्षस्थ संस्थान है। यह फोरेंसिक विज्ञान, खोजी विज्ञान और अपराध विज्ञान में विशेषज्ञता के कोर्सेज संचालित करती है। वर्ष 2020 में इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया गया है। राज्य में इसकी स्थापना से फोरेंसिक विज्ञान, अपराध विज्ञान, खोजी अनुसंधान और फोरेंसिक मनोविज्ञान जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में शिक्षा और प्रशिक्षण सुलभ होगा।  

इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, विधायकगण सर्वश्री किरण देव, इंद्र कुमार साहू, अनुज शर्मा और गुरू खुशवंत साहेब, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन और पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम सहित गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
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5 दिवसीय यात्रा पर पीएम मोदी जाएंगे साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15 से 19 जून तक कनाडा, साइप्रस और क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। प्रधानमंत्री कनाडा में वे जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जो भारत की वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की ओर बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम होगा। यह यात्रा भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर मोदी कनानास्किस में जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। यह उनकी छठी जी-7 भागीदारी होगी। वे जी-7 देशों, अन्य आमंत्रित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेताओं के साथ ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी।

 
 

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के निमंत्रण पर पीएम मोदी 15-16 जून को साइप्रस जाएंगे। यह 20 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की साइप्रस की पहली यात्रा होगी। निकोसिया में वे राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और लिमासोल में व्यापार जगत के नेताओं को संबोधित करेंगे। यह यात्रा भारत-साइप्रस संबंधों को प्रगाढ़ करने और यूरोपीय संघ और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी।

 
 

क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के निमंत्रण पर मोदी 18 जून को क्रोएशिया जाएंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली यात्रा होगी, जो दोनों देशों के संबंधों में ऐतिहासिक होगी। वे प्रधानमंत्री प्लेंकोविच के साथ वार्ता करेंगे और राष्ट्रपति ज़ोरान मिलनोविच से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा भारत के यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को और मजबूत करेगी।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ये यात्राएं भारत की वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देंगी। साइप्रस और क्रोएशिया के साथ पहली बार हो रही ये यात्राएं व्यापार, संस्कृति और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देंगी। जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की प्रभावी भूमिका वैश्विक मंच पर फिर से उजागर होगी।

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केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने हाल ही में नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों से आज नई दिल्ली में भेंट कर इन ऑपरेशंस की ऐतिहासिक सफलता पर उन्हें बधाई दी

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने हाल ही में नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों से आज नई दिल्ली में भेंट कर इन ऑपरेशंस की ऐतिहासिक सफलता पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार नक्सलवाद के दंश से भारत को मुक्त करने के लिए संकल्पित है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा उपस्थित थे।


गृह मंत्री ने X पर किए गए एक पोस्ट में कहा, “हाल ही में नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों से भेंट कर इन ऑपरेशंस की ऐतिहासिक सफलता पर उन्हें बधाई दी। इन अभियानों को अपनी बहादुरी से सफल बनाने वाले जवानों से भी मिलने के लिए उत्सुक हूँ और जल्द ही छत्तीसगढ़ आकर उनसे भेंट करूँगा। मोदी सरकार नक्सलवाद के दंश से भारत को मुक्त करने के लिए संकल्पित है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री के निर्देशन में माओवादी विरोधी अभियानों का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत अबूझमाड़ के अंदरूनी क्षेत्रों में दिनांक 18.05.2025 से 21.05.2025 तक छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा (जिसमें जिला नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कोण्डागांव एवं बीजापुर पुलिस के डीआरजी बल शामिल थे) संचालित अभियान में दिनांक 21.05.2025 को ग्राम बोटेर के जंगलों में हुए मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) के महासचिव व पोलित ब्यूरो सदस्य बसवाराजू उर्फ गगन्ना सहित 27 नक्सली मारे गये तथा भारी मात्रा में हथियार एवं गोला बारूद बरामद हुए।

इस अभियान में शामिल छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान/ एसआईबी/ एसटीएफ) श्री विवेकानंद, बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री सुंदरराज, नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक श्री प्रभात कुमार, बीजापुर के पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र यादव और नक्सल मुक्त जिला बस्तर के पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिंह को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, आसूचना ब्यूरो के निदेशक श्री तपन डेका सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के संबंध में की चर्चा

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्माण के संबंध में विस्तार से चर्चा की है ।


उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है, इसी वजह से संभाग सिंचाई साधनों के विकास में पिछड़ गया है,  संभाग में सिंचाई साधनों की समस्या को दूर करने और चहुमुखी विकास को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना पर काम कर रही है। 

मुख्यमंत्री ने कहा है कि बस्तर क्षेत्र के चहुमुखी विकास के लिए बोधघाट बहुउद्देशीय बांध परियोजना निर्णायक परियोजना साबित होगी। यह परियोजना, लंबे समय से इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है। इंद्रावती, गोदावरी नदी की बड़ी सहायक नदी है। गोदावरी जल विवाद अभिकरण के वर्ष 1980 के अवॉर्ड में भी अन्य योजनाओं के साथ इस परियोजना का उल्लेख है। इस अवॉर्ड में उल्लेखित अन्य परियोजनाओं का क्रियान्वयन दूसरे राज्यों द्वारा किया जा चुका है परंतु दूरस्थ अंचल में होने एवं नक्सल समस्या के कारण इस परियोजना को प्रारंभ नहीं किया जा सका।

बस्तर के विकास की रफ्तार होगी डबल 

बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना से संभाग में सिंचाई साधनों का दायरा बढ़ने के साथ ही बस्तर के विकास को डबल रफ्तार मिलेगी। इस परियोजना से 125 मेगावाट का विद्युत् उत्पादन, 4824 टन वार्षिक मत्स्य उत्पादन जैसे अतिरिक्त रोजगार, खरीफ एवं रबी मिलाकर 3,78,475 हेक्टेयर में सिंचाई विस्तार एवं 49 मि.घ.मी पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगा। वही इंद्रावती- महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना से कांकेर जिले की भी 50,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सहित कुल 3,00,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। बस्तर को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दोनों परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।


क्या है बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना ?
 
बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना, गोदावरी नदी की बड़ी सहायक इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है। राज्य में इन्द्रावती नदी कुल 264 कि. मी. में प्रवाहित होती है। यह परियोजना दंतेवाड़ा जिले के विकासखंड एवं तहसील गीदम के ग्राम बारसूर से लगभग 8 कि.मी. एवं जगदलपुर शहर से लगभग 100 कि. मी. दूरी पर प्रस्तावित है।

परियोजना की विशेषताएं 

दोनों परियोजनाओं की अनुमानित लागत 49000 करोड़ रूपए है। जिसमें इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना की लागत लगभग 20 हजार करोड़ रूपए एवं बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना में लगभग 29 हजार करोड़ रुपए की लागत संभावित है। जिसमें हाइड्रोपावर इलेक्ट्रोमैकेनिकल कार्य, सिविल कार्य (सिंचाई) भी शामिल हैं। इस परियोजना में उपयोगी जल भराव क्षमता 2009 मि.घ.मी, कुल जल भराव क्षमता 2727 मि.घ.मी, पूर्ण जल भराव स्तर पर सतह का क्षेत्रफल 10440 हेक्टेयर सम्भावित है।

इन जिलों का होगा लाभ 

बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना से दंतेवाड़ा,  बीजापुर, सुकमा जिले के 269 गांवों को बड़ा लाभ होगा। जबकि इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना से कांकेर जिले के अनेकों गांवों में सिंचाई सुविधा का विस्तार हो सकेगा। बस्तर संभाग को विकसित, आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने की दिशा में दोनों परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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प्रधानमंत्री ने चिनाब रेल पुल के निर्माण से जुड़े लोगों के साथ परस्पर बातचीत की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज चिनाब रेल पुल के निर्माण से जुड़े  कुछ लोगों के साथ परस्पर बातचीत की। श्री मोदी ने राष्ट्र के लिए आधुनिक अवसंरचना के निर्माण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।


चिनाब रेल पुल के निर्माण से जुड़े कुछ लोगों के साथ परस्पर बातचीत की। वे भारत के विभिन्न हिस्सों के रहने वाले हैं और देशवासियों के लिए आधुनिक अवसंरचना के निर्माण के अपने संकल्प में अडिग हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा किए, जिसमें बहुत चुनौतीपूर्ण समय में काम करना भी शामिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार उनके द्वारा किए गए काम पर कितना गर्व करते हैं!
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भारत निर्वाचन आयोग की 21 नई पहल: 100 दिनों में निर्वाचन प्रबंधन और मतदाता सुविधा में ऐतिहासिक सुधार

 भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के कार्यभार संभालने के पहले 100 दिनों में निर्वाचन प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी, कुशल और मतदाता अनुकूल बनाने के उद्देश्य से 21 नई पहलों की शुरुआत की है। 19 फरवरी 2025 से 29 मई 2025 के दौरान लागू इन सुधारों ने देशभर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और सशक्त किया है।


इन सुधारों के माध्यम से निर्वाचन प्रक्रिया में तकनीकी सुधार, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कानूनी ढांचे को मजबूती और हितधारकों के साथ समन्वय को प्राथमिकता दी गई है। इन सुधारों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1. मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या: प्रति मतदान केंद्र अधिकतम 1,200 मतदाता सुनिश्चित कर भीड़ प्रबंधन और सुविधाजनक मतदान का प्रावधान।


2. अतिरिक्त मतदान बूथ: ऊँची इमारतों और कॉलोनियों में नए मतदान बूथ की स्थापना, जिससे शहरी क्षेत्रों में सुगम मतदान अनुभव।


3. निर्वाचक नामावली का अद्यतनीकरण: मृत्यु पंजीकरण डेटा को सीधे रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) के डेटाबेस से लिंक कर सत्यापन उपरांत नामावली को अद्यतन करने की प्रक्रिया।


4. मतदाता सूचना पर्ची: मतदाता के क्रमांक और भाग संख्या को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा ताकि मतदाताओं को आसान जानकारी मिले।


5. मोबाइल जमा सुविधा: मतदान केंद्रों के ठीक बाहर मोबाइल जमा करने की सुविधा, जिससे मतदान केंद्र के भीतर निष्पक्षता और गोपनीयता सुनिश्चित हो।


6. सर्वदलीय बैठकें: पूरे देश में CEO, DEO और ERO स्तर पर 4,719 बैठकें आयोजित, जिनमें 28,000 से अधिक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


7. ECI की बैठकें: राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों (AAP, BJP, BSP, CPI(M), NPP) के प्रमुखों के साथ सीधे संवाद और चर्चा।


8. क्षमता निर्माण: बिहार, तमिलनाडु और पुडुचेरी में IIIDEM द्वारा बूथ लेवल एजेंटों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम।


9. प्रचार दूरी नियम में बदलाव: राजनीतिक दल अब मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी पर बूथ स्थापित कर सकेंगे (पहले 200 मीटर की बाध्यता थी)।


10. ECINET डैशबोर्ड: हितधारकों के लिए सभी सेवाओं को एकीकृत करने हेतु नया प्लेटफार्म, जो 40 से अधिक ऐप्स/वेबसाइट्स को समाहित करेगा।


11. यूनिक EPIC नंबर: डुप्लिकेट EPIC नंबर की समस्या के समाधान के लिए नया तंत्र विकसित किया गया है।


12. हितधारक पहचान: निर्वाचक नामावली और चुनाव प्रक्रिया में शामिल 28 प्रमुख हितधारकों की पहचान और प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, नियम 1960 और ECI के निर्देशों के अनुरूप कार्य।


13. प्रशिक्षण सामग्री: अधिनियमों, नियमों और निर्वाचन आयोग के निर्देशों के आधार पर हितधारकों के लिए प्रशिक्षण प्रस्तुतियों का विकास।


14. कानूनी ढांचे को मजबूत करना: निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर तालमेल और कानूनी सहायता को सशक्त बनाना।


15. BLO पहचान पत्र: बूथ लेवल अधिकारियों को मानक फोटो पहचान पत्र प्रदान कर उनकी पहचान और कार्य प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना।


16. IIIDEM, नई दिल्ली में क्षमता निर्माण: 3,500 से अधिक बूथ लेवल सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण; आगामी 45 दिनों में 20 बैचों में लगभग 6,000 BLOs/सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण; अगले कुछ वर्षों में 1 लाख+ BLO सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य।


17. मीडिया प्रशिक्षण: सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के CEO कार्यालयों के मीडिया अधिकारियों के लिए विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम।


18. पुलिस प्रशिक्षण: बिहार के पुलिस अधिकारियों के लिए IIIDEM में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर चुनाव प्रक्रिया को सुचारु बनाने में सहयोग।


19. बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली: निर्वाचन कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति की पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली लागू।


20. ई-ऑफिस रोलआउट: निर्वाचन प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और कार्यप्रणाली को और अधिक सहज और प्रभावी बनाने हेतु ई-ऑफिस की शुरुआत।


21. नियमित ECI-CEO बैठकें: सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित कर समन्वय, पारदर्शिता और कुशल प्रबंधन को और अधिक सशक्त किया गया।



ये सभी 21 पहलें मतदाता सुविधा, पारदर्शिता और निर्वाचन प्रक्रिया की दक्षता को निरंतर मजबूत करने के लिए आयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
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रतलाम-नागदा रेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार, तीसरी और चौथी लाइन से जुड़ेगा विकास का ट्रैक

प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान के अंतर्गत रतलाम-नागदा रेलखंड की तीसरी और चौथी रेल लाइन को मंजूरी के उपलक्ष्य में रेल भवन, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में केंद्रीय रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की। इस अवसर पर मंच पर उज्जैन-अलोट के सांसद श्री अनिल फिरोजिया उपस्थित थे, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअली इस कार्यक्रम से जुड़े। उनके साथ राज्य सरकार के मंत्री श्री चेतन्य कश्यप, सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान, विधायक श्री मथुरा लाल डामर और विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान भी वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

रेल मंत्री ने बताया कि यह परियोजना मध्य प्रदेश के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए लगातार नई परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा रही है। 41 किलोमीटर लंबा रतलाम-नागदा रेल सेक्शन अब तीसरी और चौथी लाइन के साथ चार ट्रैकों वाला बन जाएगा, जिसकी कुल लागत ₹1,018 करोड़ निर्धारित की गई है।

रतलाम जंक्शन देश के उन महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल है, जहां से उत्तर (नागदा), दक्षिण (वडोदरा), पूर्व (इंदौर) और पश्चिम (चित्तौड़गढ़) की ओर सीधी रेल कनेक्टिविटी है। इस परियोजना से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को पश्चिमी तट के बंदरगाहों से तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी।

रेल मंत्री ने बताया कि यह परियोजना ‘जीरो कार्बन’ लक्ष्य की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे हर वर्ष लगभग 38 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 1.5 करोड़ पेड़ों के बराबर है। 11वें वर्ष तक यह संख्या बढ़कर 16.5 करोड़ पेड़ों के बराबर होगी। साथ ही, 7.5 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत भी संभव होगी।

इस परियोजना से लगभग 27 लाख मानव-दिवस का रोज़गार भी सृजित होगा। इसके अलावा यह रतलाम क्षेत्र से नागदा थर्मल पावर प्लांट, विस्कोस फाइबर एवं केमिकल प्लांट जैसे औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। कृषि उत्पादों, कोयला, कंटेनर और पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन में भी गति और कुशलता आएगी।

परियोजना से खजुराहो, ग्वालियर, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, ओंकारेश्वर, सांची, उज्जैन, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, अमरकंटक और भीम जन्मभूमि जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य के पर्यटन उद्योग को नया बल मिलेगा।

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि हाल ही में दिल्ली से डॉ. अंबेडकर नगर के लिए एक नई ट्रेन सेवा शुरू की गई है। इसके साथ ही रीवा-सतना-जबलपुर-पुणे, जबलपुर-रायपुर  और ग्वालियर-पुणे-भोपाल-बेंगलुरु के लिए तीन और नई ट्रेन सेवाओं को भी मंजूरी दी जा चुकी है। इनकी समय-सारणी तय हो चुकी है और ये जल्द शुरू की जाएंगी।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल एक नई सुविधा नहीं है, बल्कि यह विकास के एक नए युग का द्वार है। वास्तव में, आज मध्य प्रदेश का स्वर्णकाल चल रहा है।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के दाहोद में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण किया

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के दाहोद में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित किया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 26 मई का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन उन्होंने 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने गुजरात के लोगों के अटूट समर्थन और आशीर्वाद को स्वीकार किया, जिन्होंने उन्हें देश का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस विश्वास और प्रोत्साहन ने दिन-रात देश की सेवा के लिए उनके समर्पण को बढ़ावा दिया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऐसे अभूतपूर्व और अकल्पनीय निर्णय लिए हैं, जो दशकों पुरानी बाधाओं से मुक्त हैं और हर क्षेत्र में आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा, “आज देश निराशा और अंधकार के युग से निकलकर आत्मविश्वास और आशावाद के नए युग में प्रवेश कर चुका है।”


श्री मोदी ने कहा, "140 करोड़ भारतीय एक विकसित भारत के निर्माण में एकजुट हैं।" उन्होंने भारत के भीतर आवश्यक वस्तुओं के विनिर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता समय की मांग है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और घरेलू उत्पादन और निर्यात दोनों में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत अब स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, खिलौने, रक्षा उपकरण और दवाओं सहित कई तरह के उत्पादों का निर्यात कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत न केवल रेल और मेट्रो तकनीक का विनिर्माण कर रहा है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर निर्यात भी कर रहा है। इस प्रगति का एक प्रमुख उदाहरण दाहोद, जहां हजारों करोड़ रुपये की प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ किया गया, को बताते हुए श्री मोदी ने दाहोद इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने तीन वर्ष पूर्व इसकी आधारशिला रखने को याद किया और गर्वपूर्वक कहा कि अब पहला इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव सफलतापूर्वक विनिर्मित किया गया है। उन्होंने लोकोमोटिव को झंडी दिखाकर रवाना किया, जो गुजरात और पूरे देश के लिए गौरव का क्षण था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने घोषणा की कि गुजरात ने अपने रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल कर लिया है। उन्होंने इसे एक उल्लेखनीय
उपलब्धि बताया और इसके लिए गुजरात के लोगों को बधाई दी।

दाहोद के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और इस क्षेत्र से जुड़ी कई यादों का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे दशकों से दाहोद आते रहे हैं और अपने शुरुआती वर्षों में वे अक्सर साइकिल से इस क्षेत्र का भ्रमण करते थे। उन्होंने रेखांकित किया कि इन अनुभवों से उन्हें दाहोद की चुनौतियों और संभावनाओं दोनों को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद भी वे कई बार इस क्षेत्र का दौरा करते रहे और इसके मुद्दों को हल करने के लिए निर्णायक कदम उठाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दाहोद में हर विकास पहल से उन्हें अपार संतुष्टि मिलती है और आज का दिन उनके लिए एक और सार्थक दिन है।

पिछले 10-11 वर्षों में भारत के रेलवे क्षेत्र के त्वरित विकास को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने मेट्रो सेवाओं के विस्तार और सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों की शुरुआत पर जोर दिया, जिससे पूरे देश में कनेक्टिविटी रूपांतरित हो रही है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेनें अब लगभग 70 रूटों पर चल रही हैं, जो भारत के परिवहन नेटवर्क को और सुदृढ़ बनाती हैं। उन्होंने अहमदाबाद और वेरावल के बीच एक नई वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत की घोषणा की। श्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत में आधुनिक ट्रेनों का उदय देश की प्रौद्योगिकी में प्रगति की वजह से है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोच और इंजन अब घरेलू स्तर पर विनिर्मित होते हैं, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है। श्री मोदी ने कहा, "भारत रेलवे उपकरणों के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में उभरा है।" उन्होंने कहा कि भारत ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच और इंग्लैंड, सऊदी अरब और फ्रांस को ट्रेन कोच निर्यात करता है। उन्होंने कहा कि मैक्सिको, स्पेन, जर्मनी और इटली भी भारत से रेलवे से संबंधित कंपोनेंट आयात करते हैं। श्री मोदी ने यह भी कहा कि भारतीय यात्री कोच मोजाम्बिक और श्रीलंका में उपयोग में लाए जा रहे हैं और 'मेड इन इंडिया' इंजनों को कई देशों में निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह 'मेक इन इंडिया' पहल के निरंतर विस्तार को दर्शाता है तथा राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "एक मजबूत रेलवे नेटवर्क सुविधाएं बढ़ाता है और उद्योगों तथा कृषि को बढ़ावा देता है।" उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के कई क्षेत्रों में पिछले दशक में पहली बार रेलवे कनेक्टिविटी मिली है। उन्होंने कहा कि गुजरात के कई क्षेत्रों में पहले केवल छोटी, धीमी गति वाली ट्रेनें थीं, लेकिन अब कई नैरो-गेज मार्गों का विस्तार किया गया है। दाहोद और वलसाड के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन सहित कई रेलवे मार्गों के उद्घाटन, जिससे जनजातीय क्षेत्र को बहुत लाभ होगा, की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कारखाने युवाओं के लिए व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दाहोद की रेल फैक्ट्री 9,000 हॉर्स पावर के इंजनों का विनिर्माण करेगी, जिससे भारत की रेलगाड़ियों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि दाहोद में बनने वाले हर इंजन पर शहर का नाम अंकित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में सैकड़ों इंजन बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार पैदा होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह कारखाना रेलवे के पुर्जे बनाने वाले छोटे उद्योगों को भी समर्थन देगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक विकास होगा। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर फैक्ट्री से परे भी उपलब्ध हैं, जिससे किसानों, पशुपालकों, दुकानदारों और मजदूरों को लाभ मिलता है तथा व्यापक आर्थिक प्रगति सुनिश्चित होती है।

श्री मोदी ने रेखांकित किया कि गुजरात ने शिक्षा, आईटी, सेमीकंडक्टर और पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसने खुद को विभिन्न उद्योगों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि गुजरात में हजारों करोड़ रुपये के निवेश से एक प्रमुख सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जो वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि ये पहल गुजरात में लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं, जो राज्य की आर्थिक वृद्धि और विकास में योगदान दे रही हैं।

इस बात को रेखांकित करते हुए कि दाहोद, वडोदरा, गोधरा, कलोल और हलोल ने सामूहिक रूप से गुजरात में एक उच्च तकनीक इंजीनियरिंग और विनिर्माण गलियारा स्थापित किया है, प्रधानमंत्री ने कहा कि वडोदरा विमान विनिर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा है और कुछ ही महीने पहले एयरबस असेंबली लाइन का उद्घाटन किया गया है। उन्होंने कहा कि वडोदरा में भारत का पहला गति शक्ति विश्वविद्यालय भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सावली में पहले से ही एक प्रमुख रेल-कार विनिर्माण कारखाना है, जबकि दाहोद में अब भारत के सबसे शक्तिशाली इंजनों- 9,000-हॉर्सपावर इंजन का उत्पादन करने वाली एक सुविधा केंद्र है, जो राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गोधरा, कलोल और हलोल में विनिर्माण इकाइयों, छोटे उद्योगों और एमएसएमई की महत्वपूर्ण उपस्थिति है, जो गुजरात के औद्योगिक विकास में योगदान दे रहे हैं। एक ऐसे भविष्य की कल्पना करते हुए जहां गुजरात का यह क्षेत्र साइकिल और मोटरसाइकिल से लेकर रेलवे इंजन और विमान तक सब कुछ बनाने के लिए जाना जाएगा, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह का उच्च तकनीक इंजीनियरिंग और विनिर्माण गलियारा वैश्विक स्तर पर दुर्लभ है, जो एक औद्योगिक महाशक्ति के रूप में गुजरात की स्थिति को मजबूत करता है।

श्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा, “विकसित भारत के निर्माण के लिए जनजातीय क्षेत्रों का विकास आवश्यक है।” उन्होंने रेखांकित किया कि जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए पिछले 11 वर्षों में अभूतपूर्व प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के जनजातीय क्षेत्रों में काम करने के उनके लंबे अनुभव ने राष्ट्रीय स्तर की पहल में योगदान दिया है। श्री मोदी ने उस समय को याद किया जब गुजरात में जनजातीय बच्चों को विज्ञान की पढ़ाई करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज, पूरे जनजातीय क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध है, अच्छे कॉलेज, आईटीआई, मेडिकल कॉलेज और इन समुदायों की सेवा करने वाले दो समर्पित जनजातीय विश्वविद्यालय हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में एकलव्य मॉडल स्कूलों का नेटवर्क काफी मजबूत हुआ है, जिससे जनजातीय छात्रों के लिए बेहतर शैक्षिक अवसर सुनिश्चित हुए हैं। श्री मोदी ने कहा कि दाहोद में ही कई एकलव्य मॉडल स्कूल हैं, जो जनजातीय शिक्षा को अधिक बढ़ावा दे रहे हैं।

देश भर में जनजातीय समुदायों के विकास के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार जनजातीय गांवों के उत्थान के लिए एक बड़ी योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि 'धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान' एक ऐतिहासिक पहल है, जिसके कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत गुजरात सहित देश भर के 60 हजार से अधिक गांवों में विकास कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर डाला कि इन गांवों को जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए बिजली, पानी, सड़क, स्कूल और अस्पतालों से सुसज्जित किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनजातीय परिवारों के लिए पक्के घर बनाए जा रहे हैं, जिससे समुदाय के लिए जीवनयापन की बेहतर स्थिति सुनिश्चित हो रही है।

श्री मोदी ने सबसे सीमांत जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार उन लोगों को प्राथमिकता देती है जिनकी लंबे समय से अनदेखी की गई है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पहली बार सरकार ने विशेष रूप से निर्बल जनजातीय समूहों को सहायता देने के लिए पीएम जनमन योजना शुरू की है, जो दशकों से आवश्यक सुविधाओं से वंचित रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस योजना के तहत जनजातीय गांवों में नए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का विकास किया जा रहा है और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए जा रहे हैं, जिससे इन समुदायों के लिए अधिक आर्थिक और सामाजिक समावेश सुनिश्चित हो रहा है।

जनजातीय समुदायों को सिकल सेल एनीमिया से मुक्त करने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन के शुभारंभ पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पहल के तहत लाखों जनजातीय नागरिक पहले ही जांच करवा चुके हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार पिछड़े क्षेत्रों के विकास में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 100 से अधिक जिलों को पहले पिछड़े के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिनमें से कई जनजातीय बहुल क्षेत्र थे। उन्होंने कहा कि दाहोद ऐसा ही एक जिला था, लेकिन आज यह एक आकांक्षी जिले के रूप में प्रगति कर रहा है, जो आधुनिक बुनियादी ढांचे और स्मार्ट सुविधाओं के साथ परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि दक्षिण दाहोद को पानी की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब सैकड़ों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनें बिछाई गई हैं, जिससे नर्मदा का पानी हर घर तक पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में उमरगाम से अंबाजी तक 11 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई से जोड़ा गया है, जिससे जनजातीय समुदायों के लिए खेती करना सुगम हो गया है।

वडोदरा में हजारों महिलाएं, जो राष्ट्र और उसके सशस्त्र बलों का सम्मान करने के लिए एकत्र हुई थीं, उनकी भारी उपस्थिति की सराहना करते हुए श्री मोदी ने भारत की महिलाओं के प्रति उनके अटूट समर्थन के लिए सम्मान और हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दाहोद त्याग और समर्पण की भूमि है। उन्होंने स्मरण किया कि महर्षि दधीचि ने सृष्टि की रक्षा के लिए दूधमती नदी के तट पर अपना जीवन त्याग दिया था। श्री मोदी ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र ने संकट के समय स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे का साथ दिया और मानगढ़ धाम गोविंद गुरु और सैकड़ों जनजातीय योद्धाओं द्वारा किए गए बलिदान का प्रतीक है। इस बात पर जोर देते हुए कि भारत के सांस्कृतिक मूल्य अन्याय के कदम उठाने की मांग करते हैं, उन्होंने प्रश्न किया कि क्या जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद राष्ट्र चुप रह सकता था। श्री मोदी ने बताया, "ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत के मूल्यों और भावनाओं का प्रतिबिंब था।" उन्होंने टिप्पणी की कि आतंकवादियों को अपने कुकृत्यों का कोई अनुमान नहीं था और याद किया कि किस प्रकार बच्चों के सामने उनके पिता की क्रूर हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि ऐसी तस्वीरें आज भी पूरे देश में आक्रोश पैदा करती हैं, क्योंकि 140 करोड़ भारतीयों को आतंकवाद से चुनौती मिली। श्री मोदी ने घोषणा की कि उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया, भारत के सशस्त्र बलों को पूरी आजादी दी, उन्होंने दशकों में एक अभूतपूर्व ऑपरेशन को अंजाम दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सीमा पार नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों की पहचान कर 22 मिनट में उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई करने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय सेना ने उन्हें पूरी तरह से धूल चटा दी। श्री मोदी ने भारत के सशस्त्र बलों की वीरता के प्रति सम्मान जताया और दाहोद की पवित्र भूमि से उनके साहस और समर्पण को सलाम किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन के बाद पैदा हुए देश ने भारत के प्रति शत्रुता और नुकसान पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा, "दूसरी ओर, भारत गरीबी उन्मूलन, अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विकास हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।" प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एक विकसित भारत का निर्माण तभी हो सकता है जब उसकी सशस्त्र सेना और अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत हों। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास एक साथ हो सके।

दाहोद की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि यह आयोजन इसकी क्षमताओं की एक झलक मात्र है। श्री मोदी ने दाहोद के मेहनतकश लोगों पर पूरा भरोसा जताया और इस बात पर जोर दिया कि वे नव विकसित सुविधाओं का सर्वोत्तम उपयोग करेंगे और दाहोद को देश के सबसे विकसित जिलों में से एक बना देंगे। उन्होंने दाहोद के लोगों को एक बार फिर बधाई देते हुए उनके समर्पण और प्रगति के प्रति अपना विश्वास दोहराया।

इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 पृष्ठभूमि

कनेक्टिविटी बढ़ाने और विश्व स्तरीय यात्रा अवसंरचना के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री ने दाहोद में भारतीय रेलवे के लोकोमोटिव विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया। यह संयंत्र घरेलू उद्देश्यों और निर्यात के लिए 9000 एचपी के इलेक्ट्रिक इंजनों का उत्पादन करेगा। उन्होंने संयंत्र से विनिर्मित पहले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को भी झंडी दिखाई। ये लोकोमोटिव भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। ये लोकोमोटिव रिजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से सुसज्जित होंगे और इन्हें ऊर्जा उपभोग को कम करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान देता है।

इसके बाद, प्रधानमंत्री ने दाहोद में 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में रेल परियोजनाएं और गुजरात सरकार की विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने वेरावल और अहमदाबाद के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस और वलसाड तथा दाहोद स्टेशनों के बीच एक्सप्रेस ट्रेन को भी झंडी दिखाई।
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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में बस्तर के नवाचारों की खुलकर सराहना

राजधानी दिल्ली स्थित अशोक होटल में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन मॉडल, नवाचारों और जनभागीदारी आधारित योजनाओं ने विशेष पहचान बनाई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रस्तुत बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों का ध्यान आकर्षित किया। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने प्रस्तुतीकरण की शुरुआत राज्य में सुशासन की संस्थागत पहल से की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन कर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। ‘अटल मॉनिटरिंग पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से योजनाओं की निगरानी की जा रही है, जिससे शिकायतों का समाधान निर्धारित समय में संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर ईमानदारी व संवेदनशीलता से लागू करना है।

बैठक में केंद्र की फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को छत्तीसगढ़ में ग्रामसभा, जनसंवाद और तकनीक के माध्यम से आमजन तक पहुँचाया गया है।

बैठक का सबसे प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम पर विशेष प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘खेलोगे इंडिया, जीतोगे इंडिया’ मंत्र को उद्धृत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने इसे धरातल पर साकार किया है। बस्तर ओलंपिक अब सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति बन चुका है — जिसने युवाओं के हाथों से बंदूकें छीनकर गेंद, भाला और तीर थमा दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों से 1.65 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया। तीन चरणों — विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित यह प्रतियोगिता 11 पारंपरिक खेलों जैसे तीरंदाजी, खो-खो, कबड्डी, दौड़, रस्साकसी आदि पर केंद्रित थी। चार श्रेणियों — जूनियर, सीनियर, महिला और दिव्यांग — में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

मुख्यमंत्री साय ने दोरनापाल के पुनेन सन्ना का उदाहरण साझा किया, जो कभी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र से थे, पर आज व्हीलचेयर दौड़ में पदक जीतकर पूरे समाज के लिए प्रेरणास्तंभ बन गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा का उत्सव है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम उत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने न केवल आदिवासी संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं को संरक्षित किया, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय मंच भी प्रदान किया। इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों की 1,885 ग्राम पंचायतों के 1,743 सांस्कृतिक दलों और 47,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लोकनृत्य, गीत-संगीत, हाट-बाजार, पकवान प्रतियोगिताएं जैसे विविध रंगों से सजा यह उत्सव बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक को जोड़ते हुए बस्तर की एकता, पहचान और विकास का प्रतीक बन गया। सरकार द्वारा 2.4 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस आयोजन ने उत्सव और खेल के माध्यम से सकारात्मक भविष्य की नई चेतना जगाई है।

बैठक में जिन राज्यों को अपनी योजनाओं के प्रस्तुतीकरण का अवसर मिला, उनमें छत्तीसगढ़ का ‘बस्तर मॉडल’ बेहद प्रभावशाली रहा।जनभागीदारी, संस्कृति और विकास के इस अनोखे मेल ने सभी को प्रभावित किया। बैठक में सुझाव दिया गया कि जनभागीदारी व सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित ऐसे मॉडल्स को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इन पहलों को अनुकरणीय बताते हुए सुझाव दिया कि ऐसे नवाचार, जो समाज की जड़ों से जुड़ते हों और विकास की दिशा तय करते हों, उन्हें  विस्तार दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के ‘बस्तर मॉडल’ को जिस तरह सराहा गया, उसने यह स्पष्ट किया कि जनसहभागिता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के समन्वय से किस तरह दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
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