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कोरोना अपडेट : 24 घंटे में 15 हजार से ज्याद नए मामले, 68 मौत

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। देश में बीते 24 घंटे में नए कोरोना केस, सक्रिय केस और संक्रमण दर तीनों में गिरावट आई। सक्रिय केस में बीते 24 घंटे में 4271 की गिरावट आई है। हालांकि बीते 24 घंटे में महामारी से 68 मौतें दर्ज हुई हैं। इनमें केरल द्वारा जोड़ी गई 24 मौतें शामिल हैं।

शनिवार सुबह 8 बजे अपडेट आंकड़ों के अनुसार 15,815 नए संक्रमित मिले। इस दौरान 20,018 मरीज कोरोना से उबर गए। देश में सक्रिय केस शुक्रवार की तुलना में और घटकर 1,19,264 हो गई। दैनिक संक्रमण दर 4.36 फीसदी रह गई है।

सक्रिय केस कुल केस की तुलना में घटकर 0.27 फीसदी हो गए हैं। बीते 24 घंटे में 68 मौतों के साथ कुल मौतें बढ़कर 5,26,996 हो गई है। इसी तरह कुल केस बढ़कर 4,42,39,372 हो गए हैं। शुक्रवार को देश में 16,561 नए संक्रमित मिले थे और संक्रमण दर 5.44 फीसदी दर्ज की गई थी। शनिवार को राष्ट्रीय कोविड रिकवरी रेट 98.54 फीसदी दर्ज की गई। शनिवार को साप्ताहिक संक्रमण दर 4.79 फीसदी दर्ज की गई। जबकि मृत्यु दर 1.19 फीसदी।

महामारी से उबरने वालों की संख्या बढ़कर 4,35,93,112 हो गई है। देशव्यापी कोविड  टीकाकरण अभियान के तहत अब तक कोविड वैक्सीन की 207.71 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं।

 

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नौसेना प्रमुख ने राष्ट्रमंडल खेल के प्रतिभागियों को किया सम्मानित

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। हाल ही में संपन्न बाइसवें राष्ट्रमंडल खेल- 2022 में भारतीय नौसेना के खिलाड़ियों ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। पदक विजेता कुश्ती (फ्री स्टाइल 74 किग्रा) में नवीन, एजी पीओ (पीटी), एथलेटिक्स (ट्रिपल जम्प) में एल्धोस पॉल, पीओ कॉम (टीईएल), भारोत्तोलन में लवप्रीत सिंह, कॉम आई (टीईएल) (109 किग्रा) और हॉकी में जुगराज सिंह, पीओ कॉम (टीईएल) हैं। यह वास्तव में एक सराहनीय उपलब्धि है कि राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने वाले भारतीय नौसेना के 07 खिलाड़ियों में से 04 खिलाड़ियों ने भारत के लिए पदक अर्जित किए हैं ।

टीम के भारत लौटने पर, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने दिनांक 12 अगस्त 2022 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में खिलाड़ियों को बधाई दी एवं उनसे बातचीत की। खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख ने उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को मानते हुए कहा कि उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन ने न केवल राष्ट्र और नौसेना को गौरवान्वित किया है बल्कि उन्हेंने देश के लिए एक आदर्श भी बनाया है। उन्होंने उन्हें आगामी सभी आयोजनों के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उनके प्रयासों को मानते हुए नौसेना प्रमुख ने खिलाड़ियों को नकद प्रोत्साहन और खेल किट के साथ सम्मानित किया।

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आयुष और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एमओयू पर किए हस्ताक्षर

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। आयुष ग्रिड परियोजना के तहत आयुष क्षेत्र के डिजिटलीकरण के लिए आयुष मंत्रालय को 3 साल की अवधि के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू दरअसल पिछले एमओयू की ही निरंतरता को दर्शाता है, जिस पर वर्ष 2019 में हस्ताक्षर किए गए थे। वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष और अलकेश कुमार शर्मा, सचिव, एमईआईटीवाई ने इन दोनों ही मंत्रालयों की ओर से इस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय लिया गया कि ये दोनों ही मंत्रालय आपसी सहयोग से काम करना जारी रखेंगे और एमईआईटीवाई के साथ-साथ एमईआईटीवाई के अधीनस्‍थ संगठन भी आयुष ग्रिड परियोजना के लिए आवश्यक सभी तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे जिसमें उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना भी शामिल है।

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प्रधानमंत्री काला जादू जैसी अंधविश्वासी बातें करके पद की गरिमा न घटाएं : राहुल

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधते हुए कहा कि काला जादू जैसी अंधविश्वासी बातें करके उन्हें अपने पद की गरिमा घटाना और देशवासियों को भटकाना बंद करना चाहिए।

उन्होंने ट्वीट किया, प्रधानमंत्री को महंगाई नहीं दिखती? बेरोज़गारी नहीं दिखती? अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए, ‘काला जादू’ जैसी अंधविश्वासी बातें करके पीएम पद की गरिमा को घटाना और देशवासियों को भटकाना बंद कीजिए, प्रधानमंत्री जी।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री को जनता के मुद्दों पर जवाब तो देना ही पड़ेगा। गौरतलब है कि कांग्रेस के नेताओं ने महंगाई के विरोध में पांच अगस्त को काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया था। इसे लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि जो लोग काले जादू में विश्वास करते हैं वे कभी भी फिर से लोगों का विश्वास नहीं जीत पाएंगे।

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रैली के दौरान कांग्रेस नेताओं पर हमला, 12 नेता-कार्यकर्ता घायल...

 अगरतला (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पश्चिम त्रिपुरा के जिले में कांग्रेस नेताओं पर जानलेवा हमला हुआ है। इसमें विधायक सुदीप रॉय बर्मन, कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष सुशांत चक्रवर्ती को गंभीर चोटें आई हैं। उन पर यह हमला अज्ञात उपद्रवियों के एक समूह ने किया है।

एक वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए कहा, ''वारदात को गुरुवार रानीर बाजार इलाके में अंजाम दिया गया।''

पुलिस अधिकारी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद विधायक सुदीप रॉय बर्मन और पार्टी की एक अन्‍य नेता सुमना साहा को तुरंत यहां स्थित जीबीपी अस्‍पताल में ले जाया गया। इस संबंध में गुरुवार तक कोई भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

उन्‍होंने बताया कि कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की अनुमति के बिना रानीर बाजार में एक रैली का आयोजन किया था। हमले के बाद आनन-फानन में उन्‍हें वहां से निकाला गया। कांग्रेस ने इस हमले का आरोप भाजपा पर लगाया है। हमले में कम से कम पार्टी के 12 नेता और कार्यकर्ता घायल हुए हैं और इस दौरान आठ वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।

त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी आशीष साहा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ''हम शांतिपूर्ण ढंग से एक रैली कर रहे थे। हमारे नेता और कार्यकर्ता उस समय हमले का शिकार हो गए जब सीआरपीएफ के जवान हमें सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे।''

उन्होंने कहा कि पार्टी का कानूनी प्रकोष्ठ शुक्रवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराएगा।

 

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इटावा लायन सफारी में शेरनी जेनिफर ने शावक को दिया जन्म

 लखनऊ (छत्तीसगढ़ दर्पण)। शेर दिवस पर लायन सफारी को खुशियों की सौगात मिली है। बुधवार रात 11 बजकर 8 मिनट पर शेरनी जेनिफर ने एक शावक को जन्म देकर शेर दिवस पर सफारी को तोहफा दिया है। सफारी के गॉडफादर बब्बर शेर मनन की 13 जून को मौत के बाद मायूसी छा गई थी।

28 जुलाई को बब्बर शेर कान्हा से शेरनी जेनिफर और जेसिका के गर्भवती होने की जानकारी मिलने पर सफारी में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लगातार दोनों शेरनियों को प्रजनन केंद्र के अलग-अलग सेल में रखकर निगरानी की जा रही थी। उपनिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि बुधवार को शेर दिवस के अवसर पर शेरनी जेनिफर ने एक शावक को जन्म दिया है।

13 जून को मनन की मौत के बाद 17 एशियाटिक बब्बर शेरों का कुनबा लायन सफारी में मौजूद है। अगस्त के लास्ट तक जेसिका भी शावक को जन्म दे सकती है। इटावा सफारी में पैदा हुए 9 शावकों में सभी शावक मनन से पैदा हुए थे। जिसमें 5 बब्बर शेर सुल्तान, सिम्बा, बाहुबली, भरत, केसरी शामिल हैं। वहीं 4 शेरनी रूपा, सोना, गार्गी और नीरजा हैं।

इनमें 8 शावक जेसिका तो 1 शावक जेनिफर से पैदा हुआ था। गुजरात के गिर से इटावा लायन सफारी में 2016 को शेर मनन, कान्हा, शेरनी जेसिका, जेनिफर लाए गए थे। मनन की मौत के बाद जेसिका और जेनिफर के साथ कान्हा की मीटिंग प्रजनन केंद्र में कराई गई थी।

 
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अरविंद केजरीवाल की राजनीति झूठ से शुरू हुई थी और झूठ पर बनी हुई है : अनुराग ठाकुर

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि झूठ का रिकॉर्ड बनाने का काम किसी ने किया तो वो अरविंद केजरीवाल हैं, जो जनता को गुमराह करने का काम करते हैं। वो भली भांति जानते हैं कि आपदा के समय भी मनरेगा का बजट बढ़ाकर 1 लाख करोड़ किया गया जो कांग्रेस के समय मात्र 30 हजार करोड़ खर्च होता था। महामारी के समय 80 करोड़ गरीबों को 28 महीने तक मुफ्त राशन दिया।

तो ये कहना कि अनाज को बंद किया गया है, अरविंद केजरीवाल जी का एक और झूठ है। अरविंद केजरीवाल जी की राजनीति झूठ से शुरू हुई थी और झूठ पर बनी हुई है।  

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उच्चतम न्यायालय ने ईवीएम से संबंधित प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

  दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। उच्चतम न्यायालय ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के उस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी, जिसके तहत देश में मतदान के लिए मतपत्र की जगह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल की शुरुआत हुई थी।

न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा-61ए को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जो चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल से संबंधित है। याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता एम एल शर्मा ने संविधान के अनुच्छेद 100 का हवाला दिया और कहा कि यह एक अनिवार्य प्रावधान है। अनुच्छेद 100 सदन में मतदान और रिक्तियों के बावजूद सदन के कार्य करने के अधिकार से संबंधित है।

शर्मा ने कहा, मैंने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-61ए को यह कहते हुए चुनौती दी है कि इसे लोकसभा या राज्यसभा में मतदान के जरिये पारित नहीं किया गया है। पीठ ने पूछा, क्या आप सदन में जो कुछ होता है, उसे चुनौती दे रहे हैं? या आप आम मतदान को चुनौती दे रहे हैं? आप किस चीज को चुनौती दे रहे हैं।

शर्मा ने कहा कि वह अधिनियम की धारा-61ए को चुनौती दे रहे हैं, जिसमें ईवीएम के उपयोग की अनुमति है, जबकि इसे मतदान के माध्यम से सदन में पारित नहीं किया गया था। पीठ ने कहा, हमें इसमें कोई गुण-दोष नहीं मिला... इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

याचिका में केंद्रीय कानून मंत्रालय को एक पक्ष बनाया गया था। इसमें ईवीएम के इस्तेमाल से संबंधित प्रावधान को अमान्य, अवैध और असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया गया था।

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विभाजन की त्रासदी हमें अखंड भारत का मूल्‍य समझाती है : देवेंद्र फडणवीस

 हिंदी विश्‍वविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्‍मृति प्रदर्शनी का उद्घाटन

वर्धा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्‍मृति में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्‍ट्र के उपमुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विभाजन की त्रासदी हमें अखंड भारत का मूल्‍य समझाती है। उपमुख्‍यमंत्री फडणवीस शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्‍मृति प्रदर्शनी के उदघाटन के पश्‍चात आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

विभाजन विभीषिका दिवस की स्‍मृति में कस्‍तूरबा सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्‍यक्षता विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने की। इस अवसर पर मंच पर वर्धा के सांसद रामदास तड़स, विधायक डॉ. पंकज भोयर, जिलाधिकारी प्रेरणा देशभ्रतार, प्रतिकुलपति द्वय प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्‍ल और प्रो. चंद्रकांत रागीट, कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान उपस्थित थे।



उपमुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हर घर तिरंगा अभियान को स्‍वाभिमान का अभियान बताते हुए कहा कि इस अभियान के तहत हमें राष्‍ट्रभक्ति की ज्‍वाला को प्रज्‍ज्‍वलित करना है। एक भारत श्रेष्‍ठ भारत को लेकर हमें आगे बढ़ना है। उन्‍होंने कहा कि महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय पर गर्व करते हुए कहा कि आज के समय में ज्ञान के बल पर हम पूरे विश्‍व पर राज कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि हिंदी भाषा के कारण भारत दुनिया में सबसे आगे बढ़ने वाला राष्‍ट्र है। भाषा अभिव्‍यक्ति ही नहीं अपितु परंपरा और सभ्‍यता की भी वाहक है। नई शिक्षा नीति का संदर्भ देते हुए उन्‍होंने कहा कि इस नीति के कारण काफी बदलाव हो रहे हैं। सभी भारतीय भाषाएं ज्ञान की भाषाएं बनेगी और इस नीति के कारण अपनी भाषा में हम इंजीनियर और डॉक्‍टर बना सकेंगे। नालंदा विश्‍वविद्यालय का उल्‍लेख करते हुए उपमुख्‍यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह विश्‍वविद्यालय ज्ञान का भंडार था। अब हमें भारतीय भाषाओं की मदद से पुरातन ज्ञान को वापस लाना चाहिए। हिंदी विश्‍वविद्यालय को लेकर उनका कहना था कि यह विश्‍वविद्यालय ज्ञान के साथ-साथ संस्‍कृति और सभ्‍यता को पुनर्जिवित करने का काम कर रहा है। अनुवाद प्रोद्योगिकी को विकसित करने में विश्‍वविद्यालय का अहम योगदान है। हिंदी को वैश्विक भाषा बनाने में अनुवाद की महत्‍वपूर्ण भूमिका है। उन्‍होंने आश्‍वस्‍त किया कि विश्‍वविद्यालय को दुनिया का श्रेष्‍ठतम विश्‍वविद्यालय बनाने के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्‍य सरकार भी सहयोग के लिए तैयार है। इस अवसर पर उपमुख्‍यमंत्री फडणवीस को विश्‍वविद्यालय के आवासीय लेखक प्रो. रामजी तिवारी ने तुलसी रचनावली की प्रति भेंट की।

स्‍वागत वक्‍तव्‍य में कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने कहा कि इस वर्ष विश्‍वविद्यालय अपनी स्‍थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। इस वर्ष अनेक महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्‍होंने आश्‍वस्‍त किया कि जितनी उपलब्धियां विश्‍वविद्यालय ने पिछले 25 वर्ष में हासिल की हैं उतनी हम एक वर्ष में अर्जित करेंगे। उन्‍होंने विश्‍वास जताया कि विश्‍वविद्यालय परिवार के सभी सदस्‍यों के समवेत प्रयास से यह उपलब्धी हासिल की जा सकेगी। उन्‍होंने विश्‍वविद्यालय में उज्‍बेकिस्‍तान एवं अन्‍य देशों से आएं अध्‍यापक, विद्यार्थी और अधिकारियों का उल्‍लेख करते करते हुए कहा कि आगामी दिनों में 24 देशों के विद्यार्थी अध्‍ययन के लिए आएंगे। उन्‍होंने कहा कि विश्‍वविद्यालय अपनी अंतरराष्‍ट्रीय भूमिका का निर्वहन कर रहा है और श्रेष्‍ठ भारत के निर्माण में योगदान भी दे रहा है। इस अवसर पर उन्‍होंने उपमुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सांसद रामदास तड़स का स्‍वागत शॉल, स्‍मृतिचिन्‍ह एवं पुष्‍पमाला से किया। मंचासीन अतिथियों का स्‍वागत प्रतिकुलपति प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्‍ल, डॉ. सुप्रिया पाठक ने किया। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव कादर नवाज खान ने किया तथा आभार प्रतिकुलपति प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्‍ल ने ज्ञापित किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप दीपन से तथा समापन राष्‍ट्रगान से किया गया।

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प्रधानमंत्री मोदी ने दी रक्षाबंधन की बधाई, जानें देशभर में कैसी चल रही हैं तैयारियां...

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम का प्रतीक है। हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनके लंबे जीवन की कामना करती हैं। वहीं, भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन लेते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी हैं।


नारियण पूर्णिमा और कजरी पूर्णिमा क्या है?
रक्षाबंधन को देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। रक्षा बंधन को देश के पश्चिमी भाग में नारियल पूर्णिमा तो उत्तर भारत में कजरी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। नारियल पूर्णिमा के दिन मछुआरे इंद्रदेव और वरुण देवा की पूजा करते हैं। इस दौरान समुद्र में नारियल फेंके जाते हैं। जबकि कजरी पूर्णिमा के दिन किसान देवी दुर्गा से अच्छी फसल की कामना करते हैं। इस दिन वे खेत में अनाज बोते हैं।

रक्षाबंधन के दिन धारण किया जाता है नया जनेऊ
रक्षा बंधन के दिन दक्षिण भारत में ब्राह्मण नया जनेऊ धारण करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही, बुरे कर्मों से भी मुक्ति मिलती है।

गुजरात में रक्षाबंधन को कहते हैं पवित्रोपन्ना
रक्षा बंधन को गुजरात में पवित्रोपन्ना के नाम से जाना जाता है। इस दिन रूई को पंचगव्य में डुबोकर शिवलिंग के चारों ओर बांधा जाता है।

रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त को 8 बजकर 25 मिनट से पहले तक चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। इस दौरान भद्राका वास पाताल लोक में होता है। पाताल लोक में भद्रा का वास होने से इसका पृथ्वी पर कोई प्रभाव नहीं रहेगा। यह भी माना जाता है कि होलिका दहन और रक्षाबंधन किसी भी दशा में भद्रा में नहीं हो सकता। इसलिए शुभ मुहूर्त 11 बजे की रात 8 बजकर 15 मिनट से 12 अगस्त की सुबह 7 बजकर 16 मिनट तक है।



रक्षाबंधन को लेकर बाजार सजे

रक्षाबंधन को लेकर देश भर के बाजार सजे हुए हैं। रंग-बिरंगी राखियां लोगों का मन मोह रही हैं। मिष्ठान दुकानें भी सजी हुई हैं। भाई अपने बहनों को देने के लिए उपहार खरीद रहे हैं। इस बार तिरंगा राखी की मांग काफी ज्यादा है। लोग तिरंगा राखी खरीद रहे हैं। इसके अलावा, कार्टून वाली राखी भी का क्रेज लोगों में देखने को मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश में रक्षाबंधन पर बहनों को निशुल्क यात्रा की सुविधा
उत्तर प्रदेश में रक्षाबंधन के मौके पर सभी माताओं, बहनों और बेटियों को बुधवार की रात 12 बजे से लेकर 12 अगस्त की रात 12 बजे तक निशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, प्रदेश सरकार जल्द ही 60 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए सरकारी बसों में नि:शुल्क यात्रा की व्यवस्था करने जा रही है।

हिमाचल प्रदेश में इस तरह बनाई जाती है राखी
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ग्रामीण महिलाएं सूखे पाइन सुइयों का उपयोग करके राखी और अन्य उपहार वस्तुएं बनाकर हिमालयी क्षेत्र और पर्यावरण को संरक्षित करने में योगदान दे रही हैं।
 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को महिलाओं ने बांधी राखी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को रक्षा बंधन की पूर्व संध्या पर बड़ी संख्या में प्रदेश की महिलाओं ने मुख्यमंत्री को उनके आवास व मुख्य सेवक सदन सभागार में राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। रक्षाबंधन के मौके पर उत्तराखंड के बाजार भी रंग-बिरंगी और देशभक्ति राखियों से सजे हुए हैं। बहनें अपने भाइयों के लिए राखी खरीद रही हैं।
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ऐसा गांव जहां पिछले 250 साल में नहीं मनाई गई राखी, जानें क्यों...

 लखनऊ (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के बीच अटूट प्रेम का प्रतीक है। हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनके लंबे जीवन की कामना करती हैं। भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन लेते हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बेनीपुर चक गांव में करीब 250 साल से रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया जाता है। इसके पीछे अजीब कारण है। दरअसल, यहां के लोगों को डर है कि उनसे बहन कहीं ऐसा उपहार न मांग ले, जिससे उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ जाए। रक्षाबंधन के दिन इस गांव में सन्नाटा रहता है।

उपहार के बदले में मांगी जमींदारी

यहां के लोग बताते हैं कि उनके पूर्वज अलीगढ़ के अतरौली तहसील के सेमरई गांव के रहने वाले थे। यहां यादव जमींदार थे। इस गांव में ठाकुर परिवार भी रहता था। ठाकुर के यहां कोई बेटा न होने की वजह से उनकी बेटियां यादवों के हाथों में राखी बांधती थी। इसी तरह, एक बार रक्षाबंधन के मौके पर ठाकुर की बेटियों ने उपहार में यादवों से उनकी जमींदारी मांग ली, जिसके बाद से यादव उस गांव को छोड़कर बेनीपुर चक गांव में आकर बस गए। हालांकि ठाकुर ने बहुत मनाने की कोशिश की, लेकिन यादव नहीं मानें।

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देश के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में जगदीप धनखड़ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिलाई शपथ

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जगदीप धनखड़ ने आज, गुरुवार को भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में भारत के निर्वाचित उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पद की शपथ दिलायी। पद की शपथ लेने से पहले जगदीप धनखड़ ने आज राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। शपथ लेते ही धनखड़ 14वें उपराष्ट्रपति बन गए।
धनखड़ को 6 अगस्त को उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया था। उन्होंने विपक्ष की मार्गरेट अल्वा को हराकर चुनाव जीता है। धनखड़ ने 74.36 फीसद वोट हासिल किए थे। बता दें कि 1997 के बाद से हुए पिछले छह उप-राष्ट्रपति चुनावों को देखा जाए तो उनके पास सबसे अधिक जीत का अंतर है।

18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक किसान परिवार में जन्मे धनखड़ ने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से पूरी की है। भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की।
वकील भी रह चुके

71 वर्षीय धनखड़ ने राजस्थान उच्च न्यायालय और भारत के सर्वोच्च न्यायालय दोनों में अभ्यास किया है। 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर झुंझुनू से सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 1990 में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उनकी राजनीति शुरू में पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल से प्रभावित थी।

गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है। धनखड़ के उपराष्ट्रपति के रूप में चुनाव के साथ ही लोकसभा और राज्यसभा दोनों के पीठासीन अधिकारी राजस्थान से होंगे।

 

 

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कृषि मंत्री ने किया स्वदेशी वैक्सीन लम्पी-प्रोवैक टीके का शुभारंभ

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज पशुधन को त्वचा रोग से बचाने के लिए स्वदेशी वैक्सीन लम्पी-प्रोवैक टीके का शुभारंभ किया। इस वैक्सीन को हरियाणा स्थित हिसार के राष्ट्रीय अश्‍व अनुसंधान केंद्र ने विकसित किया है। इस अनुसंधान में बरेली स्थित इज्‍जतनगर के भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने सहयोग किया है।

इस अवसर पर श्री तोमर ने इस टीके को लम्‍पी रोग के उन्मूलन के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि इस अनुसंधान में वैज्ञानिकों ने सभी मानकों का पालन करते हुए शत-प्रतिशत प्रभावी वैक्सीन विकसित कर ली है। यह वैक्‍सीन लम्पी रोग से निजात दिलाने में कारगर होगी।

 

 

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महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की मुआवजा- राशि दोगुनी करने का लिया निर्णय

 मुंबई (छत्तीसगढ़ दर्पण)। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने राज्य में पिछले महीने अत्यधिक वर्षा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों की मुआवजा- राशि दोगुनी करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद कैबिनेट की पहली बैठक हुई।

राष्ट्रीय आपदा राहत कोष-एन.डी.आर.एफ. के मौजूदा नियमों के अनुसार फसल के नुकसान की भरपाई के लिये किसानों को प्रति हेक्टेयर छह हजार 800 रुपए का मुआवजा दिया जाता है। राज्य सरकार ने यह राशि दोगुनी करने का फैसला किया है। इसके अतिरिक्त अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र की फसल के नुकसान के लिए मुआवजे का प्रावधान है। मंत्रिमंडल ने इसे भी बढ़ाकर तीन हेक्टेयर कर दिया है।

मंत्रिमंडल ने मुंबई मेट्रो के तीसरे चरण की परियोजना के संशोधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की पहले लागत 23 हजार 136 करोड़ रुपए थी। इसमें अब लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई है।  यह लागत बढ़कर अब 33 हजार 405 करोड़ 82 लाख रुपए हो गई है।

मुंबई मेट्रो के तीसरे चरण की परियोजना की कुल लंबाई साढ़े 33 किलोमीटर है और यह पूरी तरह से भूमिगत होगी। इसके मार्ग में 27 स्टेशन होंगे। इसमें वर्ष 2031 तक प्रतिदिन 17 लाख यात्रियों के यात्रा करने का अनुमान है।

मंत्रिमंडल ने रत्नागिरी में एक सौ विद्यार्थियों की क्षमता वाले नए सरकारी मैडिकल कॉलेज की स्थापना को भी मंजूरी दी है। जिला अस्पताल में बिस्तरों की संख्या 430 तक बढ़ाकर इसे मेडिकल कॉलेज के साथ जोड़ दिया जाएगा।

 

 

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भाजपा के साथ असहज थे नीतीश कुमार : प्रशांत किशोर

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बुधवार को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन में असहज महसूस कर रहे थे और इसी वजह से उन्होंने दूसरे दलों के साथ गठबंधन करने का फैसला किया।

कभी कुमार के करीबी माने जाने वाले किशोर ने कहा कि बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम का असर फिलहाल राज्य तक ही सीमित रहेगा।उन्होंने कहा कि अल्पावधि में राष्ट्रीय स्तर पर इस बदलाव का कोई असर दिखने की संभावना नहीं है।

किशोर ने पटना में समाचार चैनल को कहा,  2017 से 2022 तक वह भाजपा के साथ थे, लेकिन कई कारणों से मैंने उन्हें कभी सहज नहीं पाया। उन्होंने सोचा होगा कि क्यों न महागठबंधन के साथ प्रयोग किया जाए। कुमार के प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षाओं की खबरों पर, किशोर ने कहा कि घटनाक्रम पूरी तरह से केवल बिहार तक सीमित है।

उन्होंने कहा कि 2012-13 से बिहार में सरकार बनाने के लिए छह तरह के गठबंधन किए गए और हमेशा नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने।किशोर ने कहा, जहां तक सरकार गठन का सवाल है, 2012-13 के बाद से यह छठा प्रयोग है। इन सभी समय नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने। हालांकि, बिहार की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। मैं उम्मीद करता हूं कि नयी सरकार कुछ अच्छा करेगी।

किशोर ने कहा कि यह देखना होगा कि नयी सरकार कुछ करती है या नहीं, क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (यूनाइटेड) का भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों पर रुख एकदम अलग है। 

 

 

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कोरोना के नए मामलों में फिर उछाल : 24 घंटे में 16 हजार से ज्यादा केस

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। देश में कोरोना के मामलों में एक बार फिर उछाल आया है। हालांकि, इस दौरान संक्रमित होने वालों के मुकाबले ठीक होने वाले लोगों की संख्या अधिक रही। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बीते 24 घंटे में कोरोना के 16,047 नए मामले सामने आए हैं। वहीं, इस दौरान 19,539 मरीज ठीक भी हुए हैं।

देश में सक्रिय मरीजों की संख्या अब कम हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में एक्टिव केस अब 1,28,261 हो गए हैं। बता दें कि मंगलवार को एक्टिव मरीजों की संख्या 1 लाख 31 हजार 807 थी। एक्टिव केस कुल मामलों का 0.29 फीसद है।

रिपोर्ट में कहा गया कि देश में अब तक कुल 4 करोड़ 35 लाख 35 हजार 610 मरीज ठीक हो चुके हैं। वहीं, कुल 5 लाख 26 हजार 826 मरीजों की जान जा चुकी है। रिकवरी रेट अभी 98.52 फीसद है।

डेली पाजिटिविटी दर 4.94 फीसद जबकि साप्ताहिक पाजिटिविटी दर 4.90 फीसद है। इसी बीच, बीते 24 घंटे में कोरोना वैक्सीन की 15 लाख 21 हजार 429 डोज लगाई जा चुकी है।

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पर्यावरण नियमों में फंसा सेंट्रल विस्टा एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव...

 8 महीनों बाद भी SEIAA ने CPWD के प्रस्ताव को नहीं दी मंजूरी

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनाए जा रहे एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव के निर्माण की योजना पर्यावरण नियमों में फंस गई है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) द्वारा करीब आठ माह पूर्व इस संबंध में भेजे गए प्रस्ताव को दिल्ली राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआइएए) ने स्वीकृति नहीं दी है। इस प्रस्ताव की समीक्षा के लिए दिल्ली राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) ने एक उपसमिति का गठन किया है, जो साइट का दौरा कर यह सुनिश्चित करेगी कि प्रस्ताव में दिल्ली की पर्यावरण नीति का पालन हो रहा है अथवा नहीं।

सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत एक्जीक्यूटिव एन्क्लेव में प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय का निर्माण किया जाना है। यहां आने वाले वृक्षों के प्रत्यारोपण को लेकर सीपीडब्ल्यूडी ने पिछले साल प्रस्ताव भेजा था। एसईआइएए को भेजने से पहले प्रस्ताव की जांच एसईएसी द्वारा की जाती है। इस संबंध में शनिवार को एसईएसी की बैठक हुई थी। इस बैठक के जो दस्तावेज हाथ लगे हैं, उनके मुताबिक इसमें पेड़ो को बनाए रखने के लिए योजना बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए एक उपसमिति का गठन किया है, जो वृक्ष प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली की नीति के क्रियान्वयन की जांच करेगी। इस संबंध में दिल्ली सरकार ने दिसंबर 2020 में नीति अधिसूचित की थी। इसके तहत संबंधित एजेंसियों को विकास कार्य से प्रभावित होने वाले कम से कम 80 प्रतिशत पेड़ों का प्रत्यारोपण करना आवश्यक है, जिसमें प्रत्यारोपित किए गए वृक्षों के जीवित रहने की दर 80 प्रतिशत होनी चाहिए।
 
एसईएसी ने पहली बार 31 जनवरी को एक बैठक में प्रस्ताव की जांच की थी। इसमें एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव की साइट से अत्याधिक पेड़ों को हटाए जाने को लेकर चिंता जताई थी। इस पर सीपीडब्ल्यूडी ने प्रस्ताव को संशोधित किया था, जिसमें प्रत्यारोपित किए जाने वाले पेड़ों की संख्या 630 से घटाकर 487 कर दी गई थी। इसके अलावा छेड़छाड़ नहीं किए जाने वाले पेड़ों की संख्या 154 से बढ़ाकर 320 कर दी गई। इसके बाद नौ अप्रैल को हुई बैठक में एसईएसी ने पर्यावरण मंजूरी के लिए एसईआइएए को संशोधित प्रस्ताव की सिफारिश करने का फैसला किया। इसे एसईआइएए ने 19 अप्रैल को दिल्ली सरकार की वृक्ष प्रत्यारोपण नीति-2020 के मानकों पर जांचने के लिए एसईएसी को वापस भेज दिया था।

1,381 करोड़ की है परियोजना
सीपीडब्ल्यूडी के संशोधित प्रस्ताव के मुताबिक 1,381 करोड़ रपये की इस परियोजना में 1,022 पेड़ों का रखरखाव किया जाएगा। ताकि, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रति 80 वर्गमीटर भूखंड में एक पेड़ का मानक पूरा किया जा सके। साइट पर 47,000 वर्गमीटर के निर्मित क्षेत्र को ध्वस्त कर 90,000 वर्गमीटर में कुल पांच भवनों का निर्माण किया जाना है।

 

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शाम 4 बजे 8 वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे नीतीश कुमार...

 पटना (छत्तीसगढ़ दर्पण)। एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार बुधवार शाम चार बजे एक बार फिर सीएम पद की शपथ लेंगे। नीतीश पहली बार साल 2000 में सात दिन के मुख्यमंत्री बने थे। अगले 22 साल में अब तक वे कुल छह बार सीएम पद की शपथ ले चुके हैं। यानी आज नीतीश कुल आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। यह अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है, क्योंकि देश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता भी इतनी बार शपथ नहीं ले पाए हैं।

इस बीच यह जानना अहम है कि नीतीश कुमार को रिकॉर्ड आठवीं बार शपथ लेने की वजह क्या है? आखिर देश में सबसे लंबे समय तक किसी राज्य की कमान संभालने वाले नेता इस रिकॉर्ड को कैसे नहीं बना पाए? इसके अलावा वे कौन-कौन से मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने पांच बार सीएम पद संभाला है। आइये जानते हैं...

22 साल में नीतीश कुमार का आठवां शपथग्रहण कैसे?

2000: पहली बार सिर्फ सात दिन के लिए सीएम बने नीतीश
नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को सीएम बने थे। हालांकि, बहुमत न जुटा पाने की वजह से उन्हें 10 मार्च 2000 को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद बिहार में 2005 में हुए चुनाव में नीतीश भाजपा के समर्थन से दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए। 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर जनता ने नीतीश को ही सीएम बनाया।

2014: हार की जिम्मेदारी ले छोड़ा पद
लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ पार्टी के खराब प्रदर्शन की वजह से उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। इस दौरान उन्होंने जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री पद सौंपा। हालांकि, 2015 में जब पार्टी में अंदरुनी कलह शुरू हुई तो नीतीश ने मांझी को हटाकर एक बार फिर खुद सीएम पद ग्रहण किया।

2015: महागठबंधन के साथ दर्ज की जीत
2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन) की एनडीए के खिलाफ जीत के बाद नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने। यह कुल पांचवीं बार रहा, जब नीतीश ने सीएम पद की शपथ ली।

2017: तेजस्वी पर लगे आरोप, महागठबंधन छोड़ एनडीए से जुड़े
राजद और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया। उन्होंने जुलाई 2017 में ही पद से इस्तीफा दिया और एक बार फिर एनडीए का दामन थाम कर सीएम पद संभाला।

2020: जदयू की कम सीटें, फिर भी बने सीएम
2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने जीत हासिल की। हालांकि, जदयू की सीटें भाजपा के मुकाबले काफी घट गईं। इसके बावजूद नीतीश कुमार ने सीएम पद की शपथ ली। हालांकि, भाजपा में उनके मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय तक पसोपेश की स्थिति रही। अब नीतीश ने एनडीए से अलग होने का एलान कर एक बार फिर इस्तीफा दे दिया है।

2022: महागठबंधन में लौटे, बनेंगे 8वीं बार सीएम
एनडीए से अलग होने के एलान के ठीक बाद नीतीश कुमार ने राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से जुड़ने का एलान कर दिया। इसी के साथ यह तय हो गया कि नीतीश कुमार अब आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। मंगलवार शाम तक शपथग्रहण के समय का एलान भी हो गया। कहा गया कि इसमें सिर्फ सीएम और डिप्टी सीएम शपथ लेंगे।

बाकी मुख्यमंत्री क्यों नहीं बना पाए ये रिकॉर्ड?
नीतीश कुमार के बाद सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड हिमाचल प्रदेश के वीरभद्र सिंह और तमिलनाडु की सीएम रहीं जयललिता के पास है।

वीरभद्र सिंह
वीरभद्र सिंह 1983 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। 1985 में उन्होंने फिर चुनाव जीता और सीएम पद की शपथ ली। इसके बाद 1993, 1998, 2003 और 2012 में वीरभद्र फिर हिमाचल के सीएम बने। 2016 में भाजपा के खिलाफ हार के साथ ही उनका राजनीतिक करियर ढलान पर आ गया।

जे जयललिता
छह कार्यकाल वाले मुख्यमंत्रियों में तमिलनाडु की जयललिता भी नाम है। वे पहली बार 1991 में मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद 2001 में उन्होंने चुनाव जीतकर दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली। हालांकि, भ्रष्टाचार के एक मामले की वजह से उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। जयललिता के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का मौका 2002 में ही आया, जब कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। वे 2006 तक सीएम रहीं। 2011 में उन्होंने एआईएडीएमके को फिर से जीत की दहलीज तक पहुंचाया। 2014 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। हालांकि, 2015 में बरी होने के बाद उन्होंने पांचवीं बार सीएम पद की शपथ ली। 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के बाद जयललिता छठी बार तमिलनाडु की सीएम बनीं।

पवन कुमार चामलिंग
भारत में सबसे लंबी अवधि तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड सिक्किम के सीएम पवन कुमार चामलिंग के पास है। चामलिंग ने 1994, 1999, 2004, 2009 और 2014 में चुनाव जीता और सीएम पद ग्रहण किया। यानी 28 साल लंबे करियर में भी चामलिंग सिर्फ पांच बार ही शपथ ले पाए।

ज्योति बसु
इसी तरह पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम ज्योति बसु के पास रहा है। बसु 1977 से लेकर 2000 तक लगातार बंगाल के मुख्यमंत्री बने रहे। इस दौरान उन्होंने कुल पांच बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चूंकि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था, इसलिए शपथग्रहण का रिकॉर्ड उनके पास नहीं है।

सबसे ज्यादा बार शपथग्रहण करने वाले बाकी मुख्यमंत्री कौन?

इन दोनों नेताओं के अलाव अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग भी पांच बार सीएम पद की शपथ ले चुके हैं। वे 1980, 1985, 1990, 1995  में सीएम बने। हालांकि, 1999 में कांग्रेस में टूट के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा। 2003 में एनडीए का हिस्सा बनने के कुछ समय बाद अपांग 2004 में एक बार फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद वे एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। उनका पांचवां कार्यकाल 2007 तक चला।

मौजूदा समय में पांच बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास है, जो कि पहली बार वर्ष 2000 में सीएम बने थे। 2019 में अपनी पार्टी बीजू जनता दल को जीत दिलाने के बाद पटनायक ने पांचवीं बार सीएम पद की शपथ ली।

इसी तरह मिजोरम के मुख्यमंत्री ललथनहावला भी पांच बार मिजोरम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। ललथनहावला 1984 से 1986, 1989 से 1993, 1993 से 1998, 2008 से 2013 और 2013 से 2018 तक पांच बार सीएम रहे।

सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं की लिस्ट में एक नाम है एम करुणानिधि का, जो कि 00 बार तमिलनाडु के सीएम पद पर रहे। पहली बार 1969 से 1971 के बीच, फिर 1971 से 1976 तक। मुख्यमंत्री के तौर पर उनका अगला कार्यकाल 1989 से 1991 तक चला। इसके बाद चौथा कार्यकाल 1996 से 2001 तक रहा। उनका पांचवां कार्यकाल 2006 से 2011 तक चला।

पंजाब के प्रकाश सिंह बादल भी पांच बार सीएम के तौर पर शपथ लेने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। वे पहली बार 1970 से 1971 तक, फिर 1977 से 1980 तक सीएम रहे। इसके बाद बादल ने 1997 से 2002 तक राज्य की कमान संभाली। भाजपा के साथ 2007 से लेकर 2012 और फिर 2012 से लेकर 2017 में भी उन्होंने सीएम पद संभाला।

हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार भी पांच बार राज्य के सीएम पद पर रहे। वे 1952 से 1956, 1963 से 1967, 1967 से 1971 तक तीन बार सीएम पद पर रहे। इसके बाद उन्हें 1972 से 1977 तक एक बार फिर मुख्यमंत्री पद पर रहने का मौका मिला।

पांच बार मुख्यमंत्री बनने वाले नेताओं में एक नाम राजस्थान के सीएम मोहन लाल सुखाड़िया का है, जो महज 38 साल की उम्र में सीएम बन गए थे। उनका पहला कार्यकाल 1954-1957,  फिर 1957 से 1962, 1962 से 1967 और पांचवां कार्यकाल 1967 से 1971 तक चला।

इन सबके अलावा कई और नेताओं ने तीन से लेकर पांच बार तक अलग-अलग राज्यों में मुख्यमंत्री पद संभाला। इन बड़े नामों में गोवा के प्रतापसिंह राणे। नगालैंड के एससी जमीर, नेफियू रियो जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, मणिपुर के ओकराम इबोबी सिंह, असम के तरुण गोगोई, बंगाल के बिधान चंद्र रॉय और बिहार के श्रीकृष्ण सिन्हा जैसे नाम शामिल हैं। 

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