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सोनू सूद ने कोरोनाकाल में किए गए बेहतर कार्यों के लिए दया का किया सम्मान

 रायपुर में आयोजित एक सम्मान समारोह में शामिल हुए सोनू सूद

भिलाई (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भाजपा पार्षद व बोल बम सेवा एवं कल्याण सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष दया सिंह को उनक किए गए अच्छे कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें एक्टर व देश के समाजसेवी सोनू सूद द्वारा दिया गया। रायपुर के एक निजी सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए सोनू सूद पहुंचे थे। जहां दया सिंह समेत छत्तीसगढ़ के समाज रत्नों का सम्मान किया गया। दया सिंह ने स्टेज पर सोनू सूद के साथ में चर्चा की। इस मुलाकात और चर्चा के बीच दया ने कोरोनाकाल में किए गए सड़क लेकर शमशान तक के कार्यों के बारे में बताया। दया की बातों को सोनू सूद ने पूरे ध्यान के साथ सुना और उनके अच्छे कार्यों के लिए पीठ थपथपाई। 

आपको बता दें कि दया सिंह समेत अन्य समाज रत्नों का सम्मान किया गया। बोल बम सेवा एवं कल्याण समिति के अध्यक्ष दया व उनकी टीम द्वारा कोरोनाकाल में बेहतर कार्य किए गए। जरूरतमंद लोगों तक सामान पहुंचाया और उनकी जरूरतों में दया सिंह उनकें साथ खड़े रहे। यही नहीं, कोरोनाकाल के अलावा लोगों की सेवा करने के लिए दया सिंह को सम्मानित किया गया। दया व उनकी टीम लगातार समाजसेवा के माध्यम से लोगों का दिल जीत रहे हैं।

 

 

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राशिफल 27 नवंबर : रविवार को इन राशियों का भाग्य देगा साथ, मिल सकती है बड़ी खुशखबरी ...

 ग्रह-नक्षत्रों की चाल से राशिफल का आकंलन किया जाता है। आज रविवार है और आज का दिन सूर्यदेव को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से सूर्यदेव की पूजा- अर्चना की जाती है। 

 

मेष-मन में उतार-चढ़ाव रहेगा। बातचीत में संयत रहें। नौकरी में कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है। विदेश यात्रा पर भी जाना पड़ सकता है। यात्रा सफल रहेगी। जीवनसाथी के स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। शैक्षिक कार्यों के सुखद परिणाम मिलेंगे। शासन-सत्ता का सहयोग मिलेगा। आत्मविश्वास में कमी आएगी। चिकित्सीय खर्च बढ़ सकते हैं। मित्रों से विवाद हो सकता है। कोई नया कारोबार शुरू कर सकते हैं।

 

वृष-संयत रहें। क्रोध एवं आवेश के अतिरेक से बचें। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। सन्तान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। सन्तान के स्वास्थ्‍य का ध्यान भी रखें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव की सम्भावना बन रही है। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान की यात्रा का कार्यक्रम बन सकता है। यात्रा सुखद रहेगी। कार्यक्षेत्र में व्यवधान आ सकते हैं। धर्म के प्रति श्रद्धा भाव रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। 

 

मिथुन-आशा-निराशा के भाव मन में हो सकते है। शैक्षिक कार्यों में कठिनाइयां आ सकती हैं। नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन की सम्भावना बन रही है। परिश्रम की अधिकता रहेगी। धैर्यशीलता बनाये रखने में प्रयास करें। बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ सकती है। यात्रा पर जाना पड़ सकता है। आत्मविश्वास से लवरेज रहेंगे। स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी रहेगा। माता से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। क्रोध पर नियंत्रण रखें।

 

कर्क-मन परेशान रहेगा। संयत रहें। क्रोध एवं आवेश के अतिरेक से बचें। किसी राजनेता से भेंट हो सकती है। कारोबार का विस्तार हो सकता है। पिता का सहयोग मिलेगा। आत्मविश्वास में कमी आएगी। कारोबार की स्थिति में सुधार होगा। किसी धार्मिक स्थान की यात्रा के योग बन रहे हैं। स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहेगा। माता के परिवार की किसी महिला से धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं। 

 

सिंह-आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। फिर भी आत्मसंयत रहें। मित्रों का सहयोग मिलेगा। सुस्वादु खानपान में रुचि बढ़ेगी। कारोबार के यात्रा पर जा सकते हैं। मानसिक शान्ति‍ रहेगी। नौकरी में अफसरों से वाद-विवाद से बचें। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। सेहत का ध्यान रखें। स्वास्थ्‍य के प्रति सचेत रहें। नौकरी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। शासन-सत्ता का सहयोग मिलेगा। सम्पत्ति में वृद्धि के योग बन रहे हैं।

 

 

कन्या-कारोबारी कार्यों में मन लगेगा। लाभ के अवसर मिलेंगे। नौकरी में स्थान परिवर्तन की सम्भावना बन रही है। भागदौड़ अधिक रहेगी। बातचीत में सन्तुलित रहें। अफसरों से वाद-विवाद से बचें। तरक्की के अवसर भी मिल सकते हैं। सेहत का ध्यान रखें। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता में कमी आएगी। किसी पुराने मित्र का आगमन हो सकता है। खर्चों में वृद्धि हो सकती है। वाणी में सौम्यता रहेगी। मित्रों से भेंट होगी।

 

तुला-व्यर्थ के क्रोध एवं वाद-विवाद से बचें। जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कारोबार में परिवर्तन के अवसर मिल सकते हैं। परिश्रम अधिक रहेगा। अपनी भावनाओं को वश में रखें। वाहन के रखरखाव पर खर्च बढ़ सकते हैं। क्रोध की तीव्रता में कमी आएगी। पिता का सहयोग मिलेगा। नौकरी के लिए साक्षात्कारादि कार्यों में सफलता मिलेगी। भाग-दौड़ अधिक रहेगी। किसी सम्पत्ति से आय के साधन बन सकते हैं। 

 

 

वृश्चिक-मन परेशान रहेगा, परन्तु वाणी में सौम्यता रहेगी। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। किसी मित्र के सहयोग से रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। आत्म संयत रहें। नौकरी में परिवर्तन के योग बन रहे हैं। उच्च पद की प्राप्ति‍ हो सकती है। कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा। आत्मविश्वास से लवरेज रहेंगे। वाहन सुख में वृद्धि के योग बन रहे हैं। माता से धन प्राप्ति हो सकती है। संतान को स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। 

 

धनु-मन में शान्ति एवं प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास बहुत रहेगा। कारोबार में परिवर्तन की सम्भावना बन रही है। लाभ के अवसर मिलेंगे। यात्रा पर जा सकते हैं। क्रोध एवं आवेश के अतिरेक से बचें। भवन सुख में वृद्धि हो सकती है। किसी मित्र के सहयोग से नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। नौकरी में परिवर्तन की सम्भावना बन रही है। भवन सुख में वृद्धि होगी। परिवार से दूर भी जा सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। 

 

मकर-आत्मविश्वास तो बहुत रहेगा। नौकरी में परिवर्तन की सम्भावना बन रही है। सेहत का ध्यान रखें। आलस्य की अधिकता हो सकती है। परिवार की समस्याओं के प्रति सचेत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। जीवनसाथी से नोंकझोंक हो सकती है। अनियोजित खर्चों में वृद्धि होगी। स्वास्थ्‍य के प्रति सचेत रहें। परिवार में धार्मिक कार्य होंगे। भागदौड़ अधिक रहेगी। रहन-सहन अव्यवस्थित हो सकता है।

 

कुंभ-आशा-निराशा के भाव मन में हो सकते हैं। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। विदेश भी जा सकते हैं। खर्चों में वृद्धि होगी। मन प्रसन्न रहेगा। बातचीत में भी सन्तुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। माता के स्वास्‍थ्‍य का ध्यान रखें। बातचीत में सन्तुलन बनाये रखें। धैर्यशीलता में कमी आएगी। शैक्षिक एवं शोधादि कार्यों में सफलता मिलेगी। विदेश भी जा सकते हैं। 

 

मीन-पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कारोबार का विस्तार होगा। आय में वृद्धि होगी, परन्तु भागदौड़ अधिक रहेगी। किसी मित्र का सहयोग मिल सकता है। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। परिवार के स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। पिता का साथ मिलेगा। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। धर्म के प्रति श्रद्धाभाव रहेगा। सन्तान को स्वास्थ्‍य विकार रहेंगे।

 

 

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आम का लहसुनिया अचार

 अचार प्राय: प्रतिदिन उपयोग में आने वाला परीक्षित पदार्थ हैं। इसमें नमक की संतुलित मात्रा, हवा से बचाव व कुछ सब्जियों के अचार में एसिटिक एसिड का काम करता है। आम, नींबू, आंवला के अचार में नमक ही परिरक्षक होता है। याद रहे अचार में तेल ऊपर तक हो ताकि हवा अंदर प्रवेश न कर सके। आज जानते है

आम का लहसुनिया अचार बनाने की विधि: 

सामग्री- 1 किलो. आम के टुकड़े , 100 ग्रा. लहसुन की फांके, 300 मिलि. तेल, 250 ग्रा. नमक, 100 ग्रा. राई दालख् 50 ग्रा. काश्मीरी मिर्च, 20 ग्रा. जीरा पावडर, 10 ग्रा. मेथी पावडर, 5 ग्रा. करायल, 20 ग्रा. हल्दी पावडर, 

 

विधि- आम के टुकड़े में थोड नमक व हल्दी लगाकर छन्नी में 3-4 घंट रखें, पानी निथर जाने पर पंखे में 1 घंटा सुखा लें। आम के निकले पानी में लहसुन व 50 ग्राम नमक पावडर डालकर रख दें। राई दाल आधी मिक्सी में पीसें आधी खड़ी रहने दें। थोडा तेल गर्म कर करायल डालें फिर गैस बंद कर मिर्च छोड़ बाकी मसाले डालें। आम में मिलायें मिर्च बचे तेल में मिलाकर डालें। लहसुन 4-5 दिन आम के पानी में भीगाकर छानें फिर 1 घंटा पंखे में सुखाकर आम के आचार में अच्छी तरह मिलाकर जार में भर लें। 

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सलाम वेंकी में काजोल के बेटे की भूमिका में दिखेंगे विशाल जेठवा

 मुंबई (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मर्दानी 2 फेम विशाल जेठवा अपनी दूसरी फिल्म सलाम वेंकी के साथ वापस आ गए हैं। इस बार उनका किरदार रानी मुखर्जी स्टारर मर्दानी 2 के विलेन से बिल्कुल अलग होगा। सलाम वेंकी में विशाल जेठवा वेंकटेश का किरदार निभाएंगे, जिसमें काजोल भी अहम भूमिका में हैं। इस फिल्म का निर्देशन रेवती ने किया है। वह एक बार फिर सामाजिक मुद्दे वाली फिल्म में अहम किरदार निभाएंगे।

फिल्म के बारे में बात करते हुए विशाल ने कहा, मैं यह सुनकर बहुत उत्साहित था कि मुझे काजोल मैम के साथ काम करने का मौका मिला है। जब मैं कहानी सुनाने गया तो हमें कहानी सुनाते वक्त हमारे लेखक भावुक हो गए। यह देखकर मैं सन्न रह गया। मैं अपनी मां के बहुत करीब हूं। नरेशन के दौरान उन्हें पता चला कि यह बहुत ही जटिल चुनौतियों का सामना करने वाली मां-बेटे की कहानी है, जिसके बाद वह इस भूमिका को निभाने के लिए तुरंत तैयार हो गए। यह भूमिका मुझे अपने व्यक्तित्व के दूसरे पक्ष को सामने लाने का अवसर दे रही है।

 

 

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डिजिटल प्लेटफॉर्म की बदौलत अभिनय के क्षेत्र में अवसरों में वृद्धि हुई : छाबड़ा

 पणजी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रसिद्ध कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने कास्टिंग डायरेक्टर की भूमिका के विकास और भारतीय फिल्म उद्योग में कास्टिंग की प्रक्रिया के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि कास्टिंग एक बहुत पुरानी प्रक्रिया है, हालांकि, एक अलग विभाग के रूप में कास्टिंग डायरेक्शन नई बात है। कास्टिंग डायरेक्टर, अभिनेता और निर्देशक के बीच में एक कड़ी के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि पहले निर्देशक और निर्माता जो भी उपलब्ध होता था, उसे कास्ट कर लेते थे, लेकिन अब प्रक्रिया अधिक व्‍यवसायी बन चुकी है।

53वें भारतीय अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव के दौरान इन-कन्वर्सेशन सत्र में भारतीय फिल्म जगत में कास्टिंग के क्षेत्र को सुव्यवस्थित करने की प्रेरक शक्ति मुकेश छाबड़ा और भारत में कास्टिंग के क्षेत्र की एक अन्‍य प्रसिद्ध हस्‍ती क्षितिज मेहता ने भाग लिया। उन दोनों ने 'कास्टिंग इन न्यू इंडियन सिनेमा' विषय पर अपनी बात रखी । उन्होंने कास्टिंग प्रक्रिया के विकास, भारतीय फिल्म उद्योग में कास्टिंग उद्योग पर ओटीटी प्लेटफार्मों के प्रभाव और किसी विशेष भूमिका के लिए अभिनेताओं की कास्टिंग में सोशल मीडिया के प्रभाव के बारे में अपने विचार साझा किए।

 

भारत में फिल्म उद्योग में कास्टिंग पर ओटीटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल दुनिया के प्रभाव के बारे में बोलते हुए मुकेश छाबड़ा ने कहा कि ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उदय से अभिनय के क्षेत्र में अवसरों में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ने प्रयोग की संभावना को जन्‍म दिया है। मुकेश छाबड़ा की बात को आगे बढ़ाते हुए क्षितिज मेहता ने कहा कि ओटीटी प्लेटफार्मों ने कास्टिंग की प्रक्रिया को और अधिक रोमांचक बना दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जो अभिनेता फिल्मों में बहुत छोटी भूमिएंका निभाया करते थे, वे अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज और शो में प्रमुख भूमिका निभाते नजर आते हैं। क्षितिज ने कहा कि इसके अलावा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दबाव कम है, इसकी बदौलत कास्टिंग आसान हो गई है और इसने प्रक्रिया अधिक खुला बना दिया है।

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फिल्म एक वास्तविक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है, जो समाज की वास्तविकताओं को उजागर करती है : मॉर्गन

 पणजी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में मर्सिडीज ब्रायस मॉर्गन की ‘फिक्सेशन’ को मिड फेस्ट फिल्म के रूप में अंतर्राष्ट्रीय प्रीमियर का अवसर दिया गया है। निर्देशक के तौर पर मर्सिडीज ब्रायस मॉर्गन की यह पहली फिल्म है। फिल्म एक वास्तविक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है, जो समाज की वास्तविकताओं और इसकी दमनकारी शक्ति संरचनाओं को उजागर करती है, जिससे दुर्व्यवहार करने वाले सशक्त होते हैं तथा दुर्व्यवहार सहने वालों को ही जवाब देने के लिए बाध्य होना पड़ता है।

फिल्म महोत्सव के दौरान पीआईबी द्वारा आयोजित आईएफएफआई 'टेबल टॉक्स' में मीडिया और प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हुए ‘फिक्सेशन’ की निर्देशक मर्सिडीज ब्रायस मॉर्गन ने कहा कि उनकी फिल्म सिगमंड फ्रायड और उनके प्रसिद्ध रोगी, डोरा के केस स्टडी से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि एक अतियथार्थवादी फिल्म होने के नाते, फिक्सेशन ने यूरोपीय और कोरियाई फिल्मों से भी प्रेरणा ली है, क्योंकि अमेरिकी फिल्मों में बहुत अधिक अतियथार्थवाद नहीं होता है।

 

फिल्म की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताते हुए, निर्देशक ने कहा कि यह कहानी उनके लिए और कई अन्य महिलाओं के लिए बहुत ही व्यक्तिगत है, जिन्हें वे जानती हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक बहुत छोटे शहर में पली-बढ़ी हूँ, जहाँ लोग अलग-थलग पड़ी जगहों पर रहते हैं और आप केवल सीमित लोगों को जानते हैं। जब कोई कहता है कि यह सच है, तो हम यह भी नहीं जान पाते हैं कि यह सच है या झूठ। आप वास्तविकता की इस स्थिति में फंस जाते हैं। हमें उन बातों पर संदेह होता है, जिन्हें हम निश्चित तौर पर नहीं जानते हैं और हम खुद से और अपने आसपास के लोगों से सवाल करने लगते हैं। एक फिल्म निर्माता के रूप में, मैं अपने दर्शकों को इस तरह के वास्तविक अनुभव से रूबरू कराना चाहती हूं। 

 

 

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फिल्म बिहाइंड द हेस्टैक्स में प्रवासी संकट की विचित्र हकीकत को दर्शाया गया

 पणजी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बिहाइंड द हेस्टैक्स वर्ष 2015 में ग्रीस में उस समय गहराए प्रवासी संकट की पृष्ठभूमि में बनाई गई एक सामाजिक फिल्म है, जब यूरोपीय देशों ने अपनी सीमाओं को बंद कर दिया था, और जिस वजह से प्रवासी और शरणार्थी ग्रीस की उत्तरी सीमा पर एकत्र होने पर विवश हो गए थे। इस फिल्म का अंतर्राष्ट्रीय प्रीमियर 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के दौरान किया गया।

निर्देशक और पटकथा लेखक असि‍मिना प्रोएड्रो ने 'इफ्फी टेबल टॉक्स' में कहा कि इस फि‍ल्‍म की कहानी एक परिवार के सभी तीन केंद्रीय पात्रों यथा एक पिता, मां और एक बेटी के नजरिए से सुनाई गई है। इन तीनों अलग-अलग लोगों को भ्रष्ट व्‍यवस्‍था के आगे झुकने के लिए विवश किया जाता है। असि‍मिना प्रोएड्रो ने कहा, इस फिल्म के तीनों ही खंड में से प्रत्येक में इस बात पर फोकस किया गया है कि कोई भी व्यक्ति आखिरकार इस तरह का व्यवहार क्यों कर रहा है। 

 

उन्होंने कहा, मैं मुख्य पात्रों में से प्रत्येक को करीब से पेश करना चाहता था। हालांकि, फि‍ल्‍म के आखिर में इन तीनों ही किरदारों के मकसद सामने आ जाते हैं। शुरू में हमने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि ये पात्र अजीबोगरीब व्यवहार क्यों कर रहे हैं।  बिहाइंड द हेस्टैक्स ग्रीस की उत्तरी सीमा पर रहने वाले एक मध्यम आयु वर्ग के कर्ज में डूबे मछुआरे की कहानी है, जो मोटी फीस के बदले सीमावर्ती झील के पार प्रवासियों की तस्करी करना शुरू कर देता है। चर्च जाने के प्रति समर्पित उनकी पत्नी, ईश्वर के वचन में सच्चाई की तलाश कर रही है, जबकि दम्पति की बेटी अपने जीवन को स्वयं परिभाषित करने की कोशिश करती है।

 

परिवार में एक दुःखद घटना के घटित होने का बाद, तीनों पात्र अपने स्वयं के व्यक्तिगत बाधाओं और कमजोरियों का सामना करने के लिए प्रेरित होते हैं और उन्हें जीवन में पहली बार अपने कार्यों की कीमत चुकाने के बारे में विचार करना पड़ता है।

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एक्स वाइफ और बेटे के साथ घूमने निकले एक्टर आमिर खान

 मुंबई (छत्तीसगढ़ दर्पण)। हाल ही में आमिर खान को एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया। वह कहीं घूमने निकले हैं। दिलचस्प बात यह है कि एयरपोर्ट पर आमिर अकेले नहीं दिखे, बल्कि उनके साथ एक्स-वाइफ किरण राव और बेटा आजाद भी साथ नजर आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों मुंबई से बाहर कहीं घूमने गए हैं। उनका यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है। 

 

बता दें कि आमिर खान ने दो शादियां की हैं। हालांकि, उनकी दोनों ही शादी टूट चुकी हैं। आमिर खान ने पहली शादी रीना दत्ता के साथ की थी। आमिर और रीना के दो बच्चे जुनैद खान और आयरा खान हैं। 2002 में उनका तलाक हो गया। वर्ष 2005 में आमिर ने किरण राव से शादी रचाई, लेकिन 2021 में दोनों ने तलाक ले लिया। आमिर और किरण राव के एक बेटा आजाद है। हाल ही में आमिर खान की बेटी आयरा ने नुपुर शिखरे के साथ सगाई की है। 

 

 

 एक यूजर ने लिखा, 'क्या नौटकीं है? जब साथ घूमना है तो तलाक क्यों लिया?' एक यूजर ने लिखा, 'फाइनली ये लोग भारत छोड़कर जा रहे हैं।' बता दें कि आमिर खान ने बीते वर्ष किरण राव से तलाक की बात सार्वजनिक की थी। 

 

 

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गरीबी से जूझ रहे राज्य के रूप में बिहार के चित्रण को तोड़ने की जरूरत

 पणजी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। 53वें इफ्फी में स्थापित बिहार पवेलियन ने नवोदित फिल्म निर्माताओं से बुद्ध और महावीर की भूमि की ऐतिहासिक, पुरातात्विक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का अन्वेषण करने का आह्वान किया है। इस वर्ष इफ्फी में, एक पहल के तौर पर, कई राज्य सरकारों ने अपने - अपने राज्यों में फिल्म निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फिल्म बाजार में अपना पवेलियन स्थापित किया है।

प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी, जिन्होंने बिहार पवेलियन का उद्घाटन किया, आईएफएफआई में अपने गृह राज्य का प्रतिनिधित्व देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा कि राज्य में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं हैं, जिनका उपयोग किये जाने की जरूरत है। बिहार सरकार की अधिकारी श्रीमती बंदना प्रेयशी ने कहा, बिहार में शूटिंग करने के लिए फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करने के क्रम में राज्य सरकार ने कई पहलें की हैं।

उन्होंने बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, तेज कनेक्टिविटी और मजबूत अवसंरचना की उपलब्धता के बारे में बात की। एक्सप्लोर बिहार' पवेलियन में मौजूद राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि गरीबी से जूझ रहे राज्य के रूप में बिहार के चित्रण को तोड़ने की जरूरत है। वास्तव में, रेल, सड़क, हवाई संपर्क और अवसंरचना के विभिन्न रूपों के सन्दर्भ में बिहार की अवसंरचना में कई गुनी वृद्धि हुई है। 'एक्सप्लोर बिहार' पवेलियन इस तथ्य पर प्रकाश डालता है कि मुख्यधारा के फिल्म उद्योग के कई प्रसिद्ध अभिनेताओं, निर्देशकों, तकनीशियनों का गृह राज्य बिहार है।

उम्मीद है कि बिहार से जुड़े और मुख्यधारा के बॉलीवुड फिल्म उद्योग या अन्य क्षेत्रीय फिल्म उद्योग में खुद को स्थापित करने वाले कुशल फिल्म निर्माता, अभिनेता अपने गृह राज्य वापस आने और मजबूत फिल्म निर्माण उद्योग की स्थापना में योगदान देने के लिए प्रेरित होंगे।

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ज्यादातर क्षेत्रीय फिल्मों में झलकता है भारत का सार : अभिनेता अखिलेंद्र छत्रपति मिश्रा

 पणजी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। फिल्म लोटस ब्लूम्स के कलाकारों और क्रू ने इफ्फी टेबल टॉक्स के हिस्से के तौर पर एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। जाने माने अभिनेता अखिलेंद्र छत्रपति मिश्रा ने कहा, मैंने इस प्रोजेक्ट में काम करना इसलिए चुना क्योंकि ये संदेश व्यक्त करने के लिए सिनेमा की भाषा का इस्तेमाल करता है। इस फिल्म के विषय पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये दिखाती है कि जीवन भी कमल के फूल की तरह है, जो सूर्योदय के साथ खिलता है और सूर्यास्त के साथ मुरझा जाता है।

उन्होंने इस फिल्म में इसलिए भी काम किया क्योंकि ये मैथिली भाषा को बढ़ावा देती है। उन्होंने टिप्पणी की कि भारत का सार ज्यादातर क्षेत्रीय फिल्मों में झलकता है, हालांकि क्षेत्रीय भाषाओं में ज्यादा फिल्में नहीं बनती हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में और फिल्में बनाई जानी चाहिए और दिखाई जानी चाहिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि सिनेमा जीवन का ही विस्तार है। इसे लार्जर दैन लाइफ कहा जाता है क्योंकि ये संस्कृति, भाषा और आध्यात्मिक दृष्टि को अपने में समाहित करता है। उन्होंने कहा कि जो नवरस होते हैं वो ही सिनेमा की भाषा गढ़ते हैं।

 

 

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दर्शकों से जुड़ती हैं यथार्थवादी फिल्में : अनुपम खेर

 गोवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। 'द कश्मीर फाइल्स' के मुख्य अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि 32 साल बाद इस फिल्म ने दुनिया भर के लोगों को 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई त्रासदी के बारे में जागरूक होने में मदद की है। वे पणजी, गोवा में 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में आयोजित इफ्फी टेबल टॉक्स में हिस्सा ले रहे थे।

उन्होंने कहा, ये सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने इस फिल्म के लिए दुनिया भर से लगभग 500 लोगों का साक्षात्कार लिया था। 19 जनवरी 1990 की रात को बढ़ती हिंसा के बाद 5 लाख कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी में अपने घरों और यादों को छोड़ना पड़ा था। एक कश्मीरी हिंदू के रूप में मैंने उस त्रासदी को जिया है। लेकिन उस त्रासदी को कोई कुबूल करने को तैयार नहीं था।

 

दुनिया इस त्रासदी को छिपाने की कोशिश कर रही थी। इस फिल्म ने उस त्रासदी का दस्तावेजीकरण करके एक हीलिंग प्रोसेस शुरू किया। एक त्रासदी को परदे पर जीने की प्रक्रिया याद करते हुए अनुपम खेर ने कहा कि द कश्मीर फाइल्स उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक भावना है जिसे उन्होंने निभाया है। उन्होंने कहा, चूंकि मैं उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता हूं जिन्हें उनके घरों से निकाल दिया गया है, इसलिए मैं सर्वोत्तम संभव तरीके से इसे व्यक्त करने को एक बड़ी जिम्मेदारी मानता हूं। मेरे आंसू, मेरी मुश्किलें जो आप इस फिल्म में देख रहे हैं, वे सब असली हैं।

अनुपम खेर ने आगे कहा कि इस फिल्म में एक अभिनेता के रूप में अपने शिल्प का इस्तेमाल करने के बजाय, उन्होंने असल जिंदगी की घटनाओं के पीछे की सच्चाई को अभिव्यक्ति देने के लिए अपनी आत्मा का इस्तेमाल किया। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि फिल्म के पीछे मुख्य विषय ये है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा, उम्मीद हमेशा आसपास ही कहीं होती है।

कोविड महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन ने लोगों के फिल्में देखने के तरीके को प्रभावित किया है। अनुपम खेर ने इस तथ्य पर जोर देते हुए कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म से दर्शकों को विश्व सिनेमा और विभिन्न भाषाओँ की फिल्में देखने की आदत पड़ गई है। उन्होंने कहा, दर्शकों को यथार्थवादी फिल्मों का स्वाद मिला। जिन फिल्मों में वास्तविकता का अंश होगा, वे निश्चित रूप से दर्शकों के साथ जुड़ेंगी। कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों की सफलता इसका प्रमाण है। गाने और कॉमेडी के बगैर भी यह फिल्म कमाल की साबित हुई। यह वास्तव में सिनेमा की जीत है।

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इंसाफ के लिए एक भ्रष्ट सिस्टम से लड़ने वाली लड़की की दिल दहला देने वाली कहानी है फिल्म सिया

 गोवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। 'सिया' एक असरदार फिल्म है जो हमारी सामाजिक न्याय प्रणाली को प्रतिबिंबित करती है। ये उन लोगों के मानवीय पक्ष को चित्रित करने का प्रयास है जिनके साथ अन्याय हुआ है। ये बातें कहीं फिल्म 'सिया' के निर्देशक मनीष मूंदड़ा ने, जो कि इंसाफ के लिए एक ख़राब पितृसत्तात्मक व्यवस्था से लड़ने वाली एक लड़की की दिल दहला देने वाली कहानी है। आंखें देखी, मसान और न्यूटन जैसी कुछ बेहतरीन फिल्मों का निर्माण करने वाले मनीष मूंदड़ा पहली बार 'सिया' के जरिए बतौर निर्देशक पदार्पण कर रहे हैं।

गोवा में 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव से इतर पीआईबी द्वारा आयोजित किए जा रहे 'टेबल टॉक्स' सत्र में मीडिया और इस महोत्सव के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हुए मनीष मूंदड़ा ने कहा कि ये फिल्म उस दर्द को समझने की एक ईमानदार कोशिश है जिससे पीड़ितों को तब गुजरना पड़ता है जब वे न्याय की तलाश में पूरी प्रक्रिया से दो-चार होते हैं।

 

उन्होंने कहा, हम सभी को भी पीड़ितों के उस दर्द और पीड़ा को महसूस करना चाहिए ताकि बदले में हमें जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद मिल सके।"'सिया' आत्मा को झकझोर देने वाली फिल्म है, जो दुष्कर्म पीड़िताओं की दहशत और दर्द को बयां करती है। यह फिल्‍म वास्तविक जीवन की घटना से प्रेरित है। उत्तर भारत की एक ग्रामीण युवती यौन उत्पीड़न के बाद इंसाफ की लड़ाई लड़ने का फैसला करती है। वह न्याय की खातिर लड़ने का साहस जुटाती है और शक्तिशाली लोगों के हाथों की कठपुतली बन चुकी दोषपूर्ण न्याय प्रणाली के खिलाफ मुहिम शुरू करती है।

जिस तरह 'सिया' वास्तविक जीवन की घटना पर आधारित है, ऐसे में फिल्म निर्माण के लिए विषय की पसंद के बारे में पूछे जाने पर मनीष मूंदड़ा ने कहा, मुझे फिल्में बनाना बहुत अच्‍छा लगता है। मैं कमर्शियल ब्लॉकबस्टर नहीं बनाना चाहता। मैं उन विषयों को चुनता हूं जो मेरे दिल और आत्मा को छूते हैं। अनंत काल तक टिके रहने के लिए कहानी को दर्शकों की आत्मा को झकझोरना चाहिए।

यह फिल्म 6 अंतरराष्ट्रीय और भारतीय फिक्शन फीचर डेब्यू के संग्रह के साथ एक निर्देशक श्रेणी की सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फीचर फिल्म के तहत प्रतिस्पर्धा कर रही है, जो इस बात का उदाहरण है कि अगली पीढ़ी के फिल्म निर्माता ऑनस्क्रीन क्या देख रहे हैं। इफ्फी 53 में भारतीय पैनोरमा के फीचर फिल्म वर्ग के तहत 'सिया' की स्क्रीनिंग की गई। अभिनेत्री पूजा पांडे और विनीत कुमार सिंह ने फिल्म में मुख्य किरदार सीता और महेंद्र की भूमिका निभाई है।

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महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा की तकलीफदेह सच्चाई की ओर ले जाती है फिल्म हैप्पीनेस

 गोवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अस्कर उज़ाबायेव के निर्देशन में बनी फिल्‍म हैप्पीनेस में एक महिला की खुशी और सम्मान की तलाश की यात्रा को दर्शाया गया है। निर्देशक अस्कर उज़ाबायेव की पिछली अधिकांश फ़िल्में कॉमेडी ड्रामा हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रयोग किया है, जो दर्शकों की अंतरात्मा को झकझोर सकता है। गोवा में 53वें इफ्फी में पीआईबी द्वारा आयोजित टेबल टॉक्स में निर्देशक ने कहा, हम हिंसक दुनिया में रहते हैं। फिल्म के मुख्य विषय घरेलू हिंसा पर प्रकाश डालते हुए निर्देशक अस्कर उज़ाबायेव ने कहा कि परिवार, समाज की महत्वपूर्ण संस्था है और यह पीढ़ियों से चले आ रहे सामाजिक मुद्दों को रोकने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा, वास्तव में यह एक दुष्चक्र है। लगातार होने वाले दुर्व्‍यवहारों को महिलाओं द्वारा अपने परिवारों में उकसाया जाता है और अब वक्‍त आ गया है, जब हमारे समाज में इस तरह की सामाजिक बुराई को रोका जाना चाहिए'। कजाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर निर्देशक ने कहा कि महिलाओं के पास परिवार में निर्णय लेने की उच्च शक्ति होती है। समाज महिलाओं पर निर्भर करता है, लेकिन साथ ही पितृसत्तात्मक समाज में महिला-पुरुष समानता की बात कहीं पीछे छूट जाती है।

 

सह-निर्माता अन्ना कैचको, जो इफ्फी टेबल टॉक्स में भी मौजूद थीं, उन्होंने कहा कि वे उन महिलाओं की संख्या देखकर हैरान थीं, जिन्होंने फिल्म देखने के बाद अपनी कहानियां साझा करने के लिए उनसे संपर्क किया था। उन्होंने कहा, 'पटकथा और कहानी को लोगों पर केंद्रित होना चाहिए और दर्शकों को बांधे रखना चाहिए। मेरे लिए ऐसी फिल्में बनाना बहुत महत्वपूर्ण है जिनका सामाजिक असर ज्यादा हो।' उन्होंने ये भी बताया कि फिल्म 'हैप्पीनेस' उनके देश की असल घटनाओं से प्रेरित है।

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दिग्गज कलाकार विक्रम गोखले का 82 साल की उम्र में निधन...

 

मुंबई (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अभिनेता अजय देवगन ने ट्विटर पर लिखा- विक्रम गोखले सर ने अपने अभिनय से किरदारों को वजनदार बनाया। सिनेमा में उनका कद हमेशा ऊंचा रहा। मैं सौभाग्यशाली हूं कि उनके साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला। उनका जाना बेहद दुखद है। दुआ करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले। श्रद्धांजलि विक्रम सर। परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं। अजय देवगन साल 2001 में आई फिल्म ये रास्ते हैं प्यार के में विक्रम गोखले के साथ स्क्रीन शेयर कर चुके हैं। 

विक्रम गोखले ने 1971 में आयी अमिताभ बच्चन की फिल्म परवाना से हिंदी फिल्मों में बतौर अभिनेता पारी शुरू की थी। उन्हें ज्यादातर संजय लीला भंसाली की फिल्म हम दिल दे चुके सनम के लिए याद किया जाता है, जिसमें उन्होंने ऐश्वर्या राय बच्चन के पिता का किरदार निभाया था। इस फिल्म में लीड रोल सलमान खान ने निभाया था, जबकि अजय देवगन सहयोगी भूमिका में थे। इसके अलावा कई बॉलीवुड हिट फिल्मों में उन्होंने अहम भूमिकाएं अदा की थीं, जिनमें हे राम, तुम बिन, भूल भुलैया, हिचकी और मिशन मंगल जैसी फिल्में शामिल हैं। आखिरी बार उन्हें शिल्पा शेट्टी की फिल्म निकम्मा में देखा गया था।

उनका पार्थिव शरीर मुंबई के बालगंधर्व सभाग्रह में अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा। वेटरन एक्टर के निधन पर कई सेलेब्स ने सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धांजलि दी है। 

 
 
 

 

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जानें कौन है ये एक्टर जिसके Govinda के पैर छूने पर भड़क गया पाकिस्तान ...

 दुबई (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय कलाकरों के फैंस सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि कोरिया, अरब, नेपाल, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों में है। खासकर बात करें तो 90 के दशक के कलाकारों की तो बात ही कुछ और है, क्योंकि इनकी फिल्में देख कर  आज कल के नए कलाकरों ने सीखा है। साथ ही बात करें तो पड़ोसी देश पाकिस्तान में तो भारतीय कलाकारों को लीजेंड माना जाता है। 

लेकिन एक पाकिस्तानी एक्टर का भारतीय कलाकार का हद से ज्यादा बड़ा फैन होना पड़ोसी मुल्क को नागवार गुजर गया। और अब पाकिस्तान ही अपने एक्टर का विरोध कर रहा है। दरअसल, पूरा मामला हाल ही में दुबई में आयोजित एक अवॉर्ड फंक्शन का है जहां भारत और पाकिस्तान के फिल्मी कलाकार इकट्ठा हुए। इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी एक्टर फहाद मुस्तफा ने खुद को गोविंदा का फैन बताया और उनके पैर छू लिए। बस यही उनके लिए नई मुसीबत की जड़ बन गया और अब फहाद मुस्तफा के इस तरह गोविंदा के पैर छूने पर पाकिस्तान में बवाल मच गया है। 

 
 

दरअसल दुबई में फिल्मफेयर मिडिल ईस्ट अचीवर्स अवॉर्ड्स सेरेमनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में फहाद अवॉर्ड से नवाजे गए और उन्होंने स्टेज पर गोविंदा की जमकर तारीफ की और कहा कि वह गोविंदा की वजह से एक्टिंग में हैं। उन्होंने उनसे प्रेरणा ली है। जब फहाद स्टेज से उतरे तो वह सीधे गोविंदा के पास पहुंचे और उनके पैर छुए, फिर उनसे गले मिलते हैं। गोविंदा मुस्कुराते हुए उनका अभिवादन करते हैं। फहाद का गोविंदा का पैर छूना पाकिस्तान में लोगों को पसंद नहीं आया और सोशल मडिया पर फहाद को ट्रोल किया जा रहा है।

यूजर्स के कमेंट्स

एक यूजर ने कहा, पाकिस्तानी होकर पांव क्यों पकड़े। फहाद मुस्तफा आप एक मुस्लिम हैं। एक ने लिखा, सारा का सारा एटीट्यूड चला गया पांव पकड़कर, ये क्या कर दिया। एक  यूजर लिखते हैं, ये क्या हरकत थी फहाद, गोविंदा के पैर क्यों छुए। एक ने कहा, किसी के प्रति सम्मान दिखाना मायने नहीं रखता, मायने रखता है आपकी आइडियोलॉजी। एक मुस्लिम के तौर पर आपका सिर केवल आपको बनाने वाले के आगे झुकना चाहिए।

 
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फिल्म बाजार के आकार के संबंध में भारत और चेक गणराज्य की तुलना करना सार्थक नहीं

 गोवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। देश की राजनीतिक स्थिति की पृष्ठभूमि में एक रोमांटिक फिल्म' निर्देशक जान ब्रेज़िना ने कुछ इन्‍हीं शब्‍दों में अपनी पहली फिक्शन फीचर फिल्म 'एरहार्ट' का वर्णन किया है। चेक गणराज्य की इस फिल्म ने 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में अपना एशियाई प्रीमियर किया।

यह फिल्म 23 वर्ष के एक युवक की कहानी बयां करती है, जो अपनी मां को लेने के लिए अपने गृहनगर लौटता है और उसे अपने परिवार के अतीत के बारे में खतरनाक सच्चाई और स्थानीय समुदाय की स्‍याह विरासत के बारे का पता लगता है। संवाददाता सम्‍मेलन में अपने देश के इतिहास के बारे में जान ​​ब्रेज़िना ने कहा, 30 साल पहले चेक गणराज्य समाजवादी शासन व्‍यवस्‍था से पूंजीवादी शासन व्‍यवस्‍था में परिवर्तित हो गया। यह अव्‍यवस्‍था का दौर था। राज्य के स्वामित्व वाली समस्‍त संपत्ति का निजीकरण किया गया। इससे अपराध जुड़े थे। यह सब तीस साल पहले हुआ था, लेकिन आज भी इसका कुछ प्रभाव बाकी है। इसलिए, मुझे यह देखना था कि चेक गणराज्य की आज की युवा पीढ़ी इसे किस नजरिए से देखती है।

 

निर्माता मारेक नोवाक ने कहा कि यह फिल्म अगले साल वसंत या सर्दियों में चेक गणराज्य में रिलीज होगी। अपने देश के फिल्म बाजार के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, फिल्म बाजार के आकार के संबंध में भारत और चेक गणराज्य की तुलना करना सार्थक नहीं है; हमारा सिर्फ 10 मिलियन आबादी वाला देश हैं और हम एक साल में लगभग 30-35 फिक्शन फीचर फिल्में बनाते हैं। मारेक ने यह भी बताया कि महामारी के बाद की अवधि में, फिल्मों का एक बड़ा बैकलॉग हो गया है, जिन्‍हें अपने देश में रिलीज होने का इंतजार है, क्योंकि वहां हर हफ्ते पांच से छह प्रीमियर होते हैं। हमारे आकार के देश के लिए यह पर्याप्‍त है।  एरहार्ट को फिल्म फेस्टिवल कॉटबस के 32वें संस्करण में प्रदर्शित किया गया है।

 

 

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अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित पुस्तकें आकर्षण का केंद्र

 

 गोवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। 20 से 28 नवंबर 2022 तक गोवा में आयोजित हो रहे देश के प्रसिद्ध फिल्म समारोह, 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अपनी पुस्तकों और पत्रिकाओं को बड़े गर्व से प्रदर्शित कर रहा है। विभाग आईनॉक्स गोवा में आयोजित हो रहे इस भव्य कार्यक्रम में एक प्रदर्शक के तौर पर शामिल हुआ है। इसके अलावा, प्रकाशन विभाग फिल्म बाजार में भी मौजूद है, इफ्फी में एनएफडीसी द्वारा आयोजित इस बाजार की काफी चर्चा है। यहां विभाग का बिक्री-सह-प्रदर्शक काउंटर है।

आजादी का अमृत महोत्सव के आयोजन को जारी रखते हुए, प्रकाशन विभाग भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित अपनी पुस्तकों का संग्रह लाया है, जिससे आगंतुकों और कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को आकर्षित किया जा सके। यहां सिने प्रेमियों को भारतीय सिनेमा, कला एवं संस्कृति, जानी-मानी हस्तियों और बच्चों के साहित्य पर प्रकाशन विभाग की किताबों के बारे में जानने का मौका मिलेगा। यहां प्रकाशन विभाग द्वारा राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री के भाषणों पर विशेष रूप से प्रकाशित उत्कृष्ट पुस्तकें भी मिलेंगी।

 

प्रकाशन विभाग की प्रदर्शनी का एक अन्य आकर्षण का केंद्र हाल ही में लॉन्च किया गया 'आजादी क्वेस्ट' गेम है, जिसे सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा जिंगा द्वारा विकसित किया गया है। मैच 3 और हीरोज ऑफ भारत खेल मनोरंजक और शैक्षिक दोनों हैं, जो खिलाड़ियों को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और साहसी स्वतंत्रता सेनानियों के वीरतापूर्ण योगदान के बारे में बताते हैं। आगंतुकों के पास उन्हें खेलने व डाउनलोड करने और साथ ही रोमांचक पुरस्कार भी जीतने का मौका होगा।

 

प्रकाशन विभाग 20 से 24 नवंबर, 2022 तक ई1 पवेलियन, प्रोमेनेड, फिल्म बाजार, इफ्फी और 20 से 28 फरवरी, 2022 तक आईनॉक्स, गोवा में अपने प्रकाशनों की प्रदर्शनी लगा रहा है।

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छत्तीसगढ़ी गायिका मोनिका खुरसैल का निधन

बिलासपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सुप्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गायिका मोनिका खुरसैल का निधन हो गया है। ब्रेन हेमरेज की वजह से मोनिका को रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली है। अब मोनिका का अंतिम संस्कार बिलासपुर में किया जायेगा।

बता दें कि मोनिका खुरसैल बिलासपुर की रहने वाली थी, उनकी आयु सिर्फ 25 साल थी। मोनिका खुरसैल ने कई छत्तीसगढ़ी गाने गाए हैं, रायपुर बिलासपुर में स्टेज शोज किए हैं। सोशल मीडिया पर कई फेमस छत्तीसगढ़ी एक्टर्स के साथ मोनिका के फोटोज और वीडियो हैं। मोनिका ने मेरी ख़ुशी, अरपा पैरी के धार, बाबा साहेब, होली गीत डारन दे, जैसे कई गाने गाएँ जो लोगों को काफी पसंद आये हैं।

 

 

 

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