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लिज ट्रस बनीं ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री, भारतीय मूल के ऋषि सुनक को हराया

 लंदन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री की घोषणा कर दी गई है। कंजरवेटिव पार्टी की लिज ट्रस ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री बनी हैं। उन्होंने भारतीय मूल के ऋषि सुनक को हराया। ट्रस को बोरिस जानसन की जगह नया प्रधानमंत्री चुना गया है। ट्रस और सुनक दोनों कंजरवेटिव पार्टी के नेता हैं। ट्रस मंगलवार को औपचारिक हैंडओवर प्रक्रियाओं के बाद प्रधानमंत्री बनेंगी।

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री घोषित की गई ट्रस को 81,326 वोट मिले, जबकि ऋषि सुनक को 60,339 वोट मिले। इस तरह ट्रस ने सुनक को 20, 987 मतों से हराकर प्रधानमंत्री पद की रेस जीत ली।



लिज ट्रस ने कहा है कि प्रधानमंत्री बनने पर वह हफ्ते भर में ही बिजली के बिल को कम करने और बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाएंगी। वहीं, ट्रस के प्रतिद्वंद्वी और पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने कहा है कि चुनाव हारने की स्थिति में वह नई सरकार का सहयोग करेंगे। इससे स्पष्ट है कि सुनक सांसद के रूप में ब्रिटेन में कार्य करते रहेंगे।



ऐसे समय में जब ब्रिटेन मंदी की आशंका, रिकार्ड दस प्रतिशत के पार महंगाई दर और औद्योगिक क्षेत्र में अशांति की चुनौतियों से जूझ रहा है, तब नए प्रधानमंत्री के सामने हालात को सामान्य बनाने की बड़ी चुनौती होगी।



ट्रस ने कहा है कि वह अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई कड़े निर्णय भी लेंगी। संडे टेलीग्राफ में लिखे लेख में उन्होंने कहा कि वह नागरिकों और कारोबार की रोजमर्रा की मुश्किलों को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगी। सबसे पहले आने वाले ठंड के मौसम के लिए रणनीति बनाई जाएगी।

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सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे 4 दिन की सरकारी यात्रा पर नेपाल पहुंचे

 काठमांडू (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे नेपाल के सेना प्रमुख जनरल प्रभुराम शर्मा के आमंत्रण पर चार दिन की सरकारी यात्रा पर नेपाल पहुंच गये हैं। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच वर्तमान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढाने और आपसी हित के क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने का अवसर मिलेगा। सेना अध्‍यक्ष के रूप में जनरल पांडे की नेपाल की यह पहली यात्रा है। इस दौरान वह नेपाल के राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेनाध्‍यक्ष से मुलाकात करेंगे। वह भारत-नेपाल रक्षा संबंधों को बढाने पर भी चर्चा करेंगे।

 रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि नेपाल के राष्‍ट्रपति के सरकारी आवास, शीतल निवास में आयोजित समारोह में कल भारतीय सेना प्रमुख को नेपाली सेना के मानद जनरल रैंक से सम्‍मानित किया जाएगा। वह नेपाली सेना मुख्‍यालय भी जाएंगे और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे । जनरल पांडे नेपाली सेना के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ चर्चा भी करेंगे।

आपसी सम्‍मान और विश्‍वास के अलावा, भारत-नेपाल संबंध ऐतिहासिक और बहुआयामी हैं तथा दोनों देशों के बीच सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत समानताएं हैं। अपनी पड़ोस पहले और एक्‍ट ईस्‍ट नीति के अनुरूप भारत, नेपाल के साथ अपने संबंधों को अधिक प्राथमिकता देता है।

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कौन हैं सुएला ब्रेवरमैन? जो हो सकती हैं ब्रिटेन की कैबिनेट में शामिल, जानिए क्या है भारत से नाता?


नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन की नई संसद में सुएला ब्रेवरमैन को लेकर चर्चा दिनों काफी तेज है। नई ब्रिटिश कैबिनेट में उनके शामिल होने कयास लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में 42 वर्षीय सुएला ब्रेवरमैन अटॉर्नी जनरल के पद पर हैं। अब ब्रिटेन में नई सरकार बनने के बाद उनके प्रमोशन की तैयारी है। आइए जानते हैं कि सुएला ब्रेवरमैन कौन और वो भारत से किस प्रकार संबंधित हैं...

अटॉर्नी जनरल के पद पर हैं सुएला

यूके मीडिया में इन दिनों नई कैबिनेट में शामिल किए जाने वाले सांसदों को लेकर अटकलों पर विश्वास किया जाए तो सुएला ब्रेवरमैन को नई कैबिनेट में जगह मिल सकती है। 42 वर्षीय सुएला ब्रेवरमैन वर्तमान में अटॉर्नी जनरल के पद पर हैं। उनके साथ 47 वर्षीय लिज ट्रस भी नई सरकार की शीर्ष टीम में शामिल हैं। ब्रेवरमैन के अलावा भारतीय मूल की प्रीति पटेल को गृह सचिव के रूप में प्रमोट करने की तैयारी है।

42 वर्षीय सुएला ब्रेवरमैन भारत में गोवा मूल की हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 47 वर्षीय लिज ट्रस की टीम में वो शामिल हैं। ब्रेवरमैन को अब प्राथमिकता देने पर विचार किया जा सकता है। अगर उन्हें नई ब्रिटिश कैबिनेट में जगह मिलती है तो वो ऐसा पद पाने वाली इकलौती भारतीय मूल सांसद हो सकती हैं। वो नए मंत्रिमंडल में भारतीय मूल की एकमात्र ब्रिटिश राजनेता होंगी।

लिज ट्रस पीएम बनने को तैयार- सुएला ब्रेवरमैन
इससे पहले सुएला ब्रेवरमैन को कई बार लिज ट्रस की जमकर प्रशंसा की। चुनाव परिणाम आने से पहले सुएला ने एक बयान में कहा, 'लिज ट्रस अब पीएम बनने के लिए तैयार हैं। वो काफी अनुभवी हैं। देश में विकास तेजी होगा। हम स्थिरता को तत्काल तेजी से दूर करेंगे।'

सुएला के कैबिनेट में सेवा की संभावना नहीं- ऋषि सूनक
वहीं दूसरी ओर पीएम के पद के दावेदार श्री सूनक दावा किया कि कंजर्वेटिव सरकार आएगा। ऐसे में सुएला के कैबिनेट में सेवा की संभावना नहीं हैं। हालांकि, 42 वर्षीय पूर्व चांसलर के समर्थकों ने जोर देकर कहा है कि अगर लिज ट्रस वास्तव में 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर कार्यभार संभालती हैं तो सुएला को प्राथमिका मिलेगी।
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रोहिंग्या प्रवासी देश के लिए बड़ा बोझ, इन्हे हटाने में भारत निभा सकता है बड़ी भूमिका : शेख हसीना

 ढाका/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने रोहिंग्या प्रवासियों के मुद्दे पर खुलकर बात की। पीएम शेख हसीना ने रोहिंग्या प्रवासी को देश के लिए बड़ा बोझ बताया है। उन्होंने कहा कि दस लाख से अधिक रोहिंग्या प्रवासी बांग्लादेश पर बड़ा बोझ हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत प्रमुख भूमिका निभा सकता है और देश यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बात कर रहा है, ताकि वे अपनी मातृभूमि में लौट जाएं।

रोहिंग्याओं की मौजूदगी ने मुश्किलें खड़ी की
प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि उन्हें लगता है कि भारत समस्या के समाधान में अहम भूमिका निभा सकता है। एएनआई के साथ बातचीत में हसीना ने कबूल किया कि बांग्लादेश में लाखों रोहिंग्याओं की मौजूदगी ने उनके शासन के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी थीं। उन्होंने कहा कि आप जानते हैं कि ये हमारे लिए यह एक बड़ा बोझ है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में 11 लाख रोहिंग्या हैं। हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अपने पड़ोसी देशों से भी परामर्श कर रहे हैं, उन्हें भी कुछ कदम उठाने चाहिए ताकि वे घर वापस जा सकें।

रोहिंग्या की घर वापसी जरूरी : शेख हसीना
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए विस्थापित समुदाय की देखभाल करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि मानवीय आधार पर हम उन्हें आश्रय देते हैं और सब कुछ प्रदान करते हैं। लेकिन इस COVID के दौरान हमने सभी रोहिंग्या समुदाय का टीकाकरण किया। लेकिन वे यहां कब तक रहेंगे? इसलिए वे शिविर में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग नशीले पदार्थों की तस्करी, महिला तस्करी में लिप्त होते हैं और ये दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसलिए जितनी जल्दी वे स्वदेश लौटते हैं यह हमारे देश के लिए और म्यांमार के लिए भी अच्छा है।

रोहिंग्या की घर वापसी में बड़ी भूमिका निभा सकता है भारत


पीएम शेख हसीना ने कहा कि हम उन्हें आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, हम उनके लिए आसियान या संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अन्य देशों के साथ चर्चा कर रहे हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके देश ने रोहिंग्याओं को शरण देने की पेशकश की थी, जब वे कई परेशानियों का सामना कर रहे थे। हसीना ने कहा कि अब उन्हें अपने देश वापस जाना चाहिए। लेकिन एक पड़ोसी देश के रूप में भारत इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है, मुझे ऐसा लगता है। प्रधानमंत्री हसीना सोमवार से अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत करने वाली हैं।

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बराक ओबामा को मिला नेशनल पार्क श्रृंखला के लिए एमी पुरस्कार

 लॉस एंजिलिस (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को नेटफ्लिक्स की वृत्तचित्र श्रृंखला ‘‘अवर ग्रेट नेशनल पार्क्स’’ में आवाज देने के सर्वश्रेष्ठ नैरेटर का एमी पुरस्कार प्रदान किया गया। पांच हिस्सों में विभाजित इस श्रृंखला में दुनिया के प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों को दिखाया गया है। इसे बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा की कंपनी ‘हायर ग्राउंड’ ने बनाया है।

बराक ओबामा अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं जिन्हें एमी पुरस्कार से नवाजा गया है। इससे पहले ड्वाइट डी आइजनहावर को वर्ष 1956 में विशेष एमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे पहले ओबामा को उनकी दो किताबों के ऑडियो संस्करण के लिए ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बराक ओबामा को उनके संस्मरण द ऑडिसिटी ऑफ होप और द प्रॉमिस्ड लैंड के ऑडियो संस्करण के लिए ग्रैमी मिला था जबकि वर्ष 2020 में मिशेल को उनकी अपनी ऑडियो किताब के लिए ग्रैमी से सम्मानित किया गया।

 
 
 

इसी समारोह में ब्लैक पैंथर स्टार चैडविक बोसमैन को मरणोपरांत क्रियेटिव आर्ट के लिए एमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार डिज्नी प्लस श्रृंखला व्हाट इफ...? के लिए दिया गया। हॉलीवुड संवाददाता के मुताबिक बोसमैन की तरफ से उनकी पत्नी टेलर सिमोन लेडवॉर्ड ने शनिवार को समारोह में पुरस्कार ग्रहण किया। यह समारोह माइक्रोसॉफ्ट थियेटर में आयोजित किया गया था।

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भारतीय मूल की प्रोफेसर को इमर्जिंग लीडर इन हेल्थ एंड मेडिसिन स्कॉलर चुना गया

 ह्यूस्टन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय मूल की प्रोफेसर स्वाति अरूर को नेशनल अकैडमी ऑफ मेडिसिन (एनएएम) ने वर्ष 2022 के लिए ‘इमर्जिंग लीडर इन हेल्थ एंड मेडिसिन स्कॉलर’ चुना है। अरूर टेक्सास विश्वविद्यालय में ‘एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर’ में जेनेटिक्स की प्रोफेसर और उपाध्यक्ष हैं। एमडी एंडरसन की स्थापना 2016 में हुई थी और अरूर इस प्रतिष्ठित समूह में शामिल की जाने वाली फैकल्टी की पहली सदस्य हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर उनका जुनून तब से जगजाहिर है जब वह 1991-1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक कर रही थीं और उन्होंने एचआईवी पीड़ित बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए एक गैर सरकारी संगठन की शुरुआत की थी। अरूर ने 2001 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से माइक्रोबायलॉजी में पीएचडी किया और इसके बाद कनेक्टिकट विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की।

 
 
 

एमडी एंडरसन के अध्यक्ष पीटर पिस्टर्स ने कहा, हमें प्रसन्नता है कि नेशनल एकैडमी ऑफ मेडिसिन ने लाइफ साइंस के क्षेत्र में डॉ अरूर के योगदान और बेहतरीन नेतृत्व को मान्यता दी। पिस्टर्स ने कहा, कैंसर मेटास्टेसिस अनुसंधान को आगे बढ़ाने की उनकी लगन, विशेषज्ञता और कार्य हमारे प्रतिष्ठान के लिए अनमोल हैं और हम उन्हें चुने जाने का स्वागत करते हैं। ‘एनएएम इमर्जिंग लीडर फोरम’ वाशिंगटन में 18-19 अप्रैल 2023 को आयोजित किया जाएगा।

 
 
 

अरूर ने अपने चयन पर कहा, हमारे पास सर्वश्रेष्ठ दुनिया नहीं है। बल्कि विश्व हमारे कार्यों का प्रतिबिंब है कि हम पीछे क्या छोड़ कर जाएंगे और आगे क्या कीमत चुकाएंगे। उन्होंने कहा, उभरती हुई शख्सियत के तौर पर नामित होना न केवल एक सम्मान है बल्कि यह मुझे वैश्विक शख्सियतों के साथ काम करने और उनसे सीखने का एक मौका भी देगा...।

 

 

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चीन में शादी करने से क्यों कतरा रहे युवक-युवतियां? वजह जानकर चौंक जाएंगे

 

बीजिंग (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बीते कुछ सालों से चीन देश की लगातार कम हो रही जनसंख्या से परेशान है। घटती जनसंख्या की वजह शादी के प्रति युवाओं की अनिच्छा बतायी जा रही है। हाल में जारी 'चाइना स्टैटिस्टिकल ईयरबुक 2021' के मुताबिक,चीन में शादियों की संख्या 36 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। बीते साल चीन में मात्र 70.64 लाख जोड़ों ने शादियां रचाईं। यह 1986 की तुलना में सबसे कम आंकड़ा है।

2003 के बाद पहली बार 8 मिलियन से कम हुई शादी
चीन में 2003 के बाद यह पहली बार हुआ है जब शादियों की संख्या 8 मिलियन विवाह के आंकड़े से नीचे गिर गई है। नागरिक मामलों के विकास संबंधी 2021 की नवीनतम सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार, 2020 की तुलना में शादी करने वाले जोड़ों की संख्या 2021 में 6.1 प्रतिशत कम रही। आंकड़े दर्शाते हैं कि शादियों की संख्या में लगातार आठवें वर्ष गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विवाह दर में गिरावट का आर्थिक विकास पर भी असर पड़ेगा।

अधिक उम्र में शादी कर रहे युवा
इस आंकड़े में सुधार की वजह चीनी युवाओं का अधिक उम्र में शादी करना भी बताया जा रहा है। 2021 में शादी के लिए पंजीकरण कराने वाले लगभग आधे जोड़े 30 या उससे अधिक उम्र के थे। वहीं, 19.50 ऐसे जोड़े थे जिन्होंने 40 पार की उम्र में शादी रचाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि देर से शादी करने के चलन के कारण चीन द्वारा तीन बच्चों की अनुमति देने की नीति प्रभावित होगी, जिससे जनसंख्या संबंधी दिक्कतें दूर करने के लिए चुनौती और बढ़ेगी।

युवाओं पर नौकरी हासिल करने का भारी दवाब
चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) के जनसंख्या निगरानी और परिवार विकास विभाग के उप निदेशक यांग जिनरुई ने जनवरी में कहा था कि 30 साल से कम उम्र के ज्यादातर लोग शादी करने में देरी कर रहे हैं क्योंकि नौकरी हासिल करने के लिए भारी दबाव है जो एक परिवार को पालने के लिए पर्याप्त जरूरी है। उन्होंने कहा, "1990 और 2000 के दशक में पैदा हुए लोग, जो आजकल शादी कर सकते हैं या बच्चे पैदा कर सकते हैं, ने लंबी शिक्षा प्राप्त की है और अधिक रोजगार के दबाव का सामना कर रहे हैं।" यांग ने कहा कि इस घटना ने उनमें से अधिक को शादी स्थगित करने या कभी शादी नहीं करने का विकल्प चुना है।

बढ़ती महंगाई भी कम जनसंख्या की वजह
विवाह पंजीकरण में गिरावट के कारणों को रेखांकित करते हुए जनसांख्यिकी विशेषज्ञ हे याफू ने कहा- काम के अत्यधिक दबाव, महिला शिक्षा स्तर में सुधार तथा आर्थिक स्वतंत्रता जैसे कारणों से युवाओं में विवाह को लेकर दिलचस्पी घटी है। चीन में, सातवीं राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार पुरुषों की संख्या महिलाओं से 3.49 लाख अधिक है। याफू ने कहा कि इनमें विवाह योग्य उम्र की महिलाओं की तुलना में 20 वर्ष की आयु में 1.75 लाख अधिक पुरुष हैं। इसके अलावा बढ़ती महंगाई शादी करने व बच्चे पैदा करने की राह में एक बड़ी बाधा है।
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म्यांमार में पूर्व ब्रिटिश राजदूत को एक साल की कैद, जुर्म सुनकर आप भी हो जाएंगे हैरान


नेपीदाव (छत्तीसगढ़ दर्पण)। म्यांमार में पूर्व ब्रिटिश राजदूत विकी बॉवमैन और उनके पति को पिछले सप्ताह गिरफ्तार करने के बाद अब एक-एक साल की सजा सुनाई गई है। बॉवमैन के पति हतीन लीन म्यांमार के जाने-माने कलाकार हैं। दोनों को एक साल कैद की सजा सुनाई गई है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार की सेना नियंत्रित एक अदालत के इस फैसले से ब्रिटेन के साथ म्यांमार के संबंध और तनावपूर्ण होने वाले हैं।

म्यांमार में 5 साल राजदूत रहीं विकी बॉवमैन
विकी बॉवमैन 2002 से 2006 तक म्यांमार में ब्रिटिश राजदूत थीं। उन्हें और उनके पति को बीते 24 अगस्त को आव्रजन कानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब से उन्हें यंगून में हिरासत में रखा गया था। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने म्यांमार में अपना एक दूसरा पता भी रजिस्टर्ड कराया हुआ था। दोनों शान प्रांत स्थित कालाव में हतीन लिन के घर पर रह रहे थे। जबकि उन्होंने अपना पता यंगून के एक अपार्टमेंट का भी दर्ज करा रखा था।

गलत पता दर्ज कराने की मिली सजा
गलत पता दर्ज कराने के आरोप में बॉवमैन और उनके पति को पांच साल तक कैद सुनाई जा सकती थी। लेकिन कोर्ट ने उन्हें एक साल की जेल सुनाई है। इससे पहले बताया गया था कि दोनों पर लगे इल्जाम की सुनवाई 6 सितंबर को होगी लेकिन म्यांमार की अदालत ने मामले को फास्ट ट्रैक करने का फैसला किया। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को ही म्यांमार की एक सैन्य-संचालित अदालत ने भी पूर्व नेता आंग सान सूची को चुनावी धोखाधड़ी के आरोप में तीन साल की और जेल की सजा सुनाई है।

हमेशा से मुखर रही हैं बोमन
विक्की बोमन हमेशा से ही मुखर रही हैं। उन्होंने सैन्य सरकार के उठाए गए कुछ कदमों की भी आलोचना की है जिन्होंने यहां अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। उन्होंने तख्तापलट के बाद से म्यांमार के कई सेमिनारों में ये बात की है, हालांकि आम तौर पर वह सैन्य सरकार की किसी भी खुली आलोचना से बचने के लिए हमेशा सावधान रही हैं। अब तक बोमन ने कोई भी ऐसी सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है जो सैन्य सरकार को उत्तेजित कर सकती थी।

सजा मिलने से हैरान हुए लोग
ऐसे में विश्लेषक इस गिरफ्तारी के पीछे कोई और ही कारण होने की बात कह रहे हैं। चूंकि इससे पहले भी इस देश में कई विदेशियों ने वीजा से अधिक समय बिताया है, अक्सर कई महीनों तक, या अधिकारियों को सूचित किए बगैर पते बदल दिए हैं, लेकिन म्यांमार में ऐसे अपराधों के लिए मुकदमा लगभग अनसुना है। इस मामले में आमतौर पर एक छोटा सा जुर्माना मामले को सुलझा देने के लिए काफी होता है।

ब्रिटेन के लिए कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ीं
विश्लेषकों के मुताबिक, इस घटना से म्यांमार में ब्रिटेन के लिए कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। सैनिक शासकों ने बीते जुलाई में ब्रिटेन के कार्यवाहक राजदूत को देश से निकाल दिया था। हाल में म्यांमार सरकार ब्रिटिश कूटनीतिकों को वीजा देने में भी देर करती रही है। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक, ये सारी कार्रवाइयां ब्रिटेन की तरफ से म्यांमार पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में की गई हैं।
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पायलटों की हड़ताल के चलते 800 से ज्याद फ्लाइट निरस्त, दिल्ली एयरपोर्ट में हंगामा...

 बर्लिन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जर्मनी के पायलट गुरुवार को दिनी हड़ताल पर रहे। इसके कारण देश की अग्रणी लुफ्थांसा एयरलाइंस ने 800 से ज्यादा फ्लाइट निरस्त कर दी है। इसके कारण 1.30 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए हैं। उड़ान निरस्त होने से भारत में दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर बीती रात यात्रियों ने हंगामा किया। इसके कारण एयरपोर्ट पर आवाजाही में बाधा पड़ी।


जर्मनी की पायलट यूनियन ने विभिन्न मांगों को लेकर आज हड़ताल का एलान किया है। सूत्रों के मुताबिक, पायलटों की हड़ताल के चलते लुफ्थांसा एयर लाइन की 800 उड़ानें रद्द होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द होने के कारण करीब 1.30 लाख यात्रियों पर असर पड़ सकता है।

यात्रियों ने की रिफंड या वैकल्पिक उड़ान की मांग
दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट के डीसीपी ने बताया कि रात करीब 12 बजे 150 से ज्यादा लोगों की भीड़ एयरपोर्ट के डिपार्चर गेट नं. 1 व टर्मिनल नंबर 3 के सामने जमा हो गई। ये लोग लुफ्थांसा की फ्रेंकफर्ट व म्युनिख की उड़ानें निरस्त होने के कारण यात्रियों का पैसा रिफंड करने या वैकल्पिक उड़ान की मांग कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानतल के बाहर भीड़ जमा होने से अन्य यात्रियों को आवाजाही में दिक्कत होने लगी। इसके बाद आईजीआई के स्टाफ व सीआईएसएफ के जवानों ने स्थिति संभाली और भीड़ को दूर किया। डीसीपी ने कहा कि जर्मन एयरलाइंस के यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ान के प्रबंध किए जा रहे हैं।

 

 

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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष श्रीलंका को देगा दो अरब 90 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सहायता

 कोलम्बो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष श्रीलंका को भीषण आर्थिक संकट और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए अगले चार सालों में दो अरब 90 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सहायता प्रदान करने पर राज़ी हो गया है। यह कदम अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और श्रीलंका के अधिकारियों के बीच सप्ताह भर चली बातचीत के बाद लिया गया। पीटर ब्रियुअर और मासाहिरो नोज़ाकी की अध्यक्षता में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आयोग 24 अगस्त से एक सितंबर तक श्रीलंका में मौजूद था।

उन्होंने श्रीलंका के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सहायता और प्रशासनिक तौर पर व्यापक आर्थिक सुधार कार्यक्रमों पर विस्तार से बातचीत की। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने एक विज्ञप्ति में बताया कि इस सुविधा से श्रीलंका में आर्थिक और ऋण स्थिरता फिर से स्‍थापित करने में मदद मिलेगी।

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मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री नजीब रजाक की पत्नी को भ्रष्टाचार के मामले में 10 साल की सजा

 कुआलालंपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मलेशिया की एक अदालत ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री नजीब रजाक की पत्नी रोस्माह मंसूर को अपने पति के कार्यकाल में रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराने के बाद बृहस्पतिवार को 10 साल की सजा सुनाई। नजीब को पहले ही मलेशियाई विकास बरहाद कोष (1एमडीबी) के सरकारी धन के गबन के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और पिछले सप्ताह उन्हें जेल भेज दिया गया था। उन्हें पांच में से भ्रष्टाचार के एक मामले में 12 साल की सजा सुनाई गई है।

रोस्माह मंसूर को बोर्नियो द्वीप के स्कूलों को सौर ऊर्जा पैनल लगाने करने की परियोजना का काम एक कंपनी को दिलाने के लिए 2016 और 2017 के बीच 65 लाख रिंगिट रिश्वत (15 लाख अमेरिकी डॉलर) मांगने और उसे स्वीकार करने के तीन मामलों में दोषी ठहराया गया। अदालत ने उन्हें हर एक मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई और उन पर 97 करोड़ रिंगिट का जुर्माना भी लगाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

 
 
 

शीर्ष अदालतों में उनकी अपील लंबित होने तक वह जमानत के लिए गुहार लगा सकती हैं। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मोहम्मद जैनी मजलान ने कहा कि अभियोजकों ने यह साबित कर दिया है कि रोस्माह मंसूर ने रिश्वत मांगी और उसे स्वीकार भी किया था।

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भारत-चीन संबंधों का सामान्य होना एशिया के लिए महत्वपूर्ण : जॉर्ज यो

 सिंगापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज यो ने कहा है कि भारत और चीन के बीच संबंधों का सामान्य होना क्षेत्रीय समृद्धि और स्थिरता के लिए जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों (भारत और चीन) के शीर्ष नेतृत्व शीघ्र ही इंडोनेशिया में मुलाकात करेंगे और एशियाई सदी के लिए काम करेंगे।

पूर्व विदेश मंत्री ने अपनी पुस्तक जॉर्ज यो म्यूजिंग्स के विमोचन से इतर कहा, हमारे लिए, यदि भारत और चीन के संबंध अच्छे हैं तो यह फायदेमंद है...और यदि भारत चीन-संबंध खराब हैं तो यह हमें प्रभावित करेगा। बिहार में 800 साल पुराने नालंदा विश्वविद्यालय पुनरूद्धार में भी यो (67) का अहम योगदान रहा है।

 
 
 

उन्होंने कहा , नालंदा विश्वविद्यालय में मेरी पूरी भागीदारी इस आंशिक उम्मीद के साथ रही कि इस परियोजना के जरिये हम भारत और चीन को सभ्यताओं के रूप में एक-दूसरे के करीब लाएंगे। यो का मानना है कि नवंबर में प्रस्तावित जी-20 शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के बाद दोनों एशियाई देशों के नेतृत्व के बीच बाली में एक बैठक होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के जी-20 शिखर सम्मेलन में शरीक होने की उम्मीद है। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख गतिरोध शुरू होने के बाद से दोनों नेता एक-दूसरे से नहीं मिले हैं, ना ही उनके बीच बातचीत हुई है। अभी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के ली कुआन येव स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी संस्थान में अध्यापन कर रहे यो ने कहा है कि उन्हें लगता है कि भारत शीघ्र ही क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) में शामिल होगा।

 
 
 

उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि भारत अनिश्चितकाल तक आरसीईपी से बाहर रहेगा। आरसीईपी एशिया-प्रशांत देशों के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है। इसमें 15 देश शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकाक में भारत ने आरसीईपी समझौते पर इन चिंताओं को लेकर हस्ताक्षर नहीं किया कि भारतीय कृषि उत्पाद और छोटे उद्योगों के उत्पाद क्षेत्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।

 
 
 

यो ने टाटा समूह के जमशेदपुर संयंत्र के इस्पात का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरूआत में इसके उत्पाद स्कॉटिश और ब्रिटिश कारखानों के उत्पादों के सामने प्रतिस्पर्धी नहीं थे लेकिन अब भारतीय इस्पात अंतरराष्ट्रीय बाजार में है। उन्होंने टाटा समूह के अधिकारियों के न्योते पर 2007 में जमशेदपुर (झारखंड) की यात्रा की थी। यो ने 464 पृष्ठों की अपनी पुस्तक में लिखा है, मेरी बेटी ने स्कूल में भारतीय नृत्य सीखा है।

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पीएम मोदी, सीएम रेड्डी और अडानी के खिलाफ डॉक्टर ने दायर किया मुकदमा...

 वाशिंगटन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय मूल के एक अमेरिकी चिकित्सक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगनमोहन रेड्डी और दिग्गज करोबारी गौतम अडाणी के खिलाफ भ्रष्टाचार, पेगासस स्पाइवेयर के इस्तेमाल तथा अन्य मुद्दों को लेकर एक वाद दायर किया है। कोलंबिया के ‘यूएस डिस्ट्रिक कोर्ट’ ने इन सभी लोगों को समन जारी किए हैं। न्यूयॉर्क के प्रख्यात भारतीय-अमेरिकी अटॉर्नी रवि बत्रा ने इसे ‘व्यर्थ का मुकदमा’ करार दिया। रिचमंड के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ लोकेश वुयुररु ने यह वाद प्रधानमंत्री मोदी, रेड्डी और अडाणी के खिलाफ दायर किया है।


इस वाद में ‘वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम’ के अध्यक्ष तथा संस्थापक प्रोफेसर क्लॉस श्वाब का भी नाम शामिल है। आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले चिकित्सक ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री मोदी, रेड्डी, अडाणी तथा अन्य लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं जिसमें अमेरिका में बड़े पैमाने पर नकदी हस्तांतरण और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल शामिल है। हालांकि चिकित्सक ने इस संबंध में कोई साक्ष्य नहीं पेश किए हैं। चिकित्सक ने वाद 24 मई को दायर किया था, जिसके बाद अदालत ने 22 जुलाई को समन जारी किए। भारत में उन्हें ये समन चार अगस्त को और श्वाब को स्विट्जरलैंड में दो अगस्त को समन दिया गया। इस मामले के बारे में पूछे जाने पर बत्रा ने कहा कि चिकित्सक के पास फिजूल का बहुत वक्त है। उन्होंने कहा कि यह ‘व्यर्थ का मुकदमा है।
 

 

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चीन को सबक सिखाने अब ताइवान करेगा इन घातक हथियारों की खरीदी...

 ताइपे/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन के खतरे को देखते हुए ताइवान ने अपने बजट प्रपोजल में कई घातक हथियारों को खरीदने का प्रपोजल दिया है। एक बार सदन की इस पर मुहर लग जाएगी तो सरकार आगे बढ़ जाएगी। चीन को इनसे सबक सिखाया जा सकेगा।

चीन और ताइवान में लगातार तनाव बढ़ता ही जा रहा है। एक तरफ जहां चीन लगातार सैन्‍य अभ्‍यासों के जरिए ताइवान पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा है वहीं दूसरी तरफ ताइवान भी बुरे दौरे के लिए अपने सुरक्षा व्‍यवस्‍था को मजबूत कर रहा है। इसको देखते हुए ही ताइवान ने अपने बजट में 29 HIMARS राकेट और 84 long range missile systems खरीदने काप्रपोजल दिया है। जिन Truck Mount Rocket Systems को इस बार बजट प्रपोजल में रखा गया है पहले इसको केवल 18 ही खरीदने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब चीन के खतरे को देखते हुए इसमें इजाफा किया गया है।


ताइवान ने केवल इन्‍हीं दो हथियारों की खरीद के लिए सेना को धन आवंटित नहीं किया है, बल्कि इसमें पहले से अधिक M142 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी राकेट सिस्‍टम लान्‍चर और 84 ATACMS को अमेरिका से खरीदने का भी प्रपोजल बजट में दिया है। पहले ताइवान M109A6 Paladin Self-Propelled Howitzers को खरीदने पर विचार कर रहा था। आपको बता दें कि अमेरिका ने यूक्रेन को भी HIMARS की सप्‍लाई की है। रूस से मुकाबले में इनका अच्‍छा रिजल्‍ट सामने आ रहा है। बजट में दिए इन प्रपोजल्‍स पर अब सदन में बहस होगी और फिर इनको पास किया जा सकेगा।

इस बजट प्रपोजल में ताइवान ने चीन के खतरे को देखते हुए लान्‍ग रेंज गाइडेड मिसाइल सिस्‍टम और 300 किमी की दूरी तक मार करने वाले HIMARS राकेट सिस्‍टम की भी संख्‍या में इजाफा किया है। HIMARS का इस्‍तेमाल पिछले वर्ष मोरक्‍को में सैन्‍य अभ्‍यास के दौरान भी किया गया था। ताइवान का इस बार का पूरा बजट करीब 32.5 अरब डालर का है। यदि ताइवान समय पर बजट प्रपोजल को मंजूरी दे देता है और इसके आर्डर कर दिए जाते हैं तो HIMARS के पहले बैच के 11 राकेट सिस्‍टम ताइवान को वर्ष 2024 तक हासिल भी हो जाएंगे। सेना की तरफ से इस बजट प्रपोजल में दिए गए हथियारों की खरीद पर कहा गया है कि यदि ये उन्‍हें हासिल हो जाते हैं तो दुश्‍मन को अपनी धरती से दूर रखना काफी आसान हो जाएगा। इतना ही नहीं वो जल्‍दी मदद भी हासिल नहीं कर सकेगा।

HIMARS को लेकर मन बना रही सेना ने अब 40 Paladins की खरीद करने से इनकार कर दिया है। इसको लेकर ताइवान के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सुरक्षा ने मई में फैसला लिया था। ऐसा इसलिए किया गया क्‍योंकि अमेरिका ने इसको समय पर डिलीवर न करने की बात कही थी। अमेरिका का कहना है कि वो इतनी संख्‍या में इनका उत्‍पादन कर पाने में समर्थ नहीं है। अमेरिका ने ही इनकी जगह HIMARS की खरीद का प्रपोजल ताइवान को दिया था।

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ब्रिटेन को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश बनाने के लिए सुनक ने दिन-रात काम करने का संकल्प लिया

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कंजर्वेटिव पार्टी के नेता और ब्रितानी प्रधानमंत्री के रूप में बोरिस जॉनसन के स्थान पर निर्वाचन के लिए जारी प्रचार मुहिम के बुधवार को अंतिम चरण में पहुंचने के बीच, पूर्व मंत्री ऋषि सुनक ने ब्रिटेन को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश बनाने के लिए दिन-रात काम करने का संकल्प जताया। 10 डाउनिंग स्ट्रीट में शीर्ष पद के पहले ब्रितानी भारतीय उम्मीदवार एवं पूर्व चांसलर सुनक के सामने प्रतिद्वंद्वी लिज ट्रस की चुनौती है।

सुनक की रेडीफॉरऋषि प्रचार मुहिम ने मंगलवार रात जारी एक बयान में उनके हवाले से कहा, किसी के पलने-बढ़ने, परिवार शुरू करने और कारोबार स्थापित करने के लिए ब्रिटेन दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश है और यहां हमारा भविष्य उज्ज्वल नजर आता है, लेकिन हम वहां तभी पहुंच सकते हैं, जब हम चुनौतियों का ईमानदारी और विश्वसनीय योजना के साथ सामना करेंगे।

 

उन्होंने कहा, मेरे पास सही योजना है, जो कंजर्वेटिव मूल्यों में निहित है और मैं इस प्रतियोगिता के दौरान हमेशा इस बात को लेकर स्पष्ट और ईमानदार रहा हूं कि हमें पहले मुद्रास्फीति से निपटना चाहिए। सुनक ने कहा, यह ब्रिटेन के बारे में मेरी सोच है और मैं जिस देश से प्यार करता हूं, उसके एवं पार्टी के लिए यह हासिल करने की खातिर दिन-रात काम करूंगा।

सुनक भारतीय मूल के पहले ब्रितानी प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रचना चाहते हैं और उन्हें भारतीय समुदाय से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। चुनावी मुकाबले के शुरुआती चरण में सांसदों ने उन्हें जबरदस्त समर्थन देकर दो अंतिम उम्मीदवारों में चुना, लेकिन ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, वह अब ट्रस से पीछे चल रहे हैं।

 

 

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आग लगने की घटनाओं के बाद चिनूक की उड़ान पर रोक, भारत ने मांगी रिपोर्ट...

 वाशिंगटन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। CH-47 चिनूक हेलिकॉप्टरों में आग लगने की घटनाओं के बाद अमेरिकी सेना ने इनके उड़ानों पर पाबंदी लगा दी है। वहीं इस घटना के बाद भारतीय सेना ने भी अमेरिका ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अमेरिकी वायुसेना के फैसले के बाद भारतीय अधिकारियों ने कहा कि मामले की पड़ताल की जा रही है। अमेरिकी सेना की मटेरियल कमांड ने 70 से अधिक हेलीकॉप्टरों का निरीक्षण करते हुए इसके बेड़े की उड़ानें रोकने का फैसला किया।

सेना के अधिकारियों ने कहा कि इन हेलिकॉप्टरों के इंजन में आग लगने के बारे में पता चला है। हालांकि इन घटनाओं में कोई घायल नहीं हुआ और न ही किसी की मौत हुई। ये हेलिकॉप्टर आमतौर पर सैन्य साजो सामान की ढुलाई व राहत व बचाव कार्यों में इस्तेमाल किए जाते हैं। चिनूक हेलीकॉप्टरों की ग्राउंडिंग अमेरिकी सैनिकों के लिए परिवहन संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकती है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उड़ानें रोकने का आदेश कितने समय तक लागू रहता है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सेना के बेड़े में लगभग 400 हेलीकॉप्टर हैं। अमेरिकी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि  सैनिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे विमान या हेलिकॉप्टर सुरक्षित और उड़ने लायक बने रहें।

छह दशकों से है सेना का मददगार
चिनूक सेना के लिए जबर्दस्त उपयोगी हेलिकॉप्टर है। इसका उपयोग नियमित और विशेष मौकों पर सेना द्वारा किया जाता है। यह चार दर्जन से ज्यादा सैनिकों या कार्गां ले जा सकता है। बीते छह दशकों से यह सेना का बड़ा मददगार बना हुआ है। इसका निर्माण  एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने किया है।

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खुद को रईस की बेटी बताकर पूर्व राष्ट्रपति के घर में घुसी जासूस...

 फ्लोरिडा/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर मार-ए-लागो में रूसी, ईरानी और चीनी जासूसों ने सेंध मारी का प्रयास किया। हाल ही में एक यूक्रेन मूल की रूसी महिला एजेंट अमेरिका जांच एजेंसी (FBI) के निशाने पर आई है। उसकी तेजी से तलाश की जा रही है। वह ट्रंप को झांसा देकर उनके बेहद करीब पहुंच गई थी।

यह पूरा मामला हाल ही में ट्रंप के निवास से गोपनीय दस्तावेज बरामद होने के बाद सामने आया है। आरोप है कि ट्रंप ने राष्ट्रपति पद से विदाई के बाद कई अहम गुप्त दस्तावेज अपने इस बंगले में छिपाकर रख लिए थे। एफबीआई ने हाल ही में छापा मारकर इन्हें बरामद किया था। जांच में पता चला है कि ट्रंप का यह घर जासूसी के निशाने पर था। उन्होंने अमेरिकी सरकार के गुप्त दस्तावेज हासिल किए हैं या नहीं, यह अभी पता नहीं चला है।

 
 

एफबीआई के निशाने पर आई रूसी महिला जासूस की पहचान 33 साल की यूक्रेन की महिला इना याचिशिन के तौर पर हुई है। उसने अमेरिका के गुप्त दस्तावेज हासिल करने के लिए ट्रंप से नजदीकी बनाकर उनके बंगले तक घुसपैठ कर ली थी। ट्रंप से रिश्ते गांठने के लिए उसने खुद को यूरोप के एक रईस व्यक्ति की बेटी बताया था। उसने खुद को यूरोप के रईस राथ्सचाइल्ड की बेटी एना डे राथ्सचाइल्ड बताया था।

फर्जी लाइसेंस व पहचान पत्र से बंगले तक पहुंची
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इना पहली बार पिछले साल 2021 में पहली बार फर्जी लाइसेंस, फर्जी पहचान पत्र और पासपोर्ट के माध्यम से ट्रंप के बंगले तक पहुंची थी। वह खुद को रईस और रईस की बेटी बताने के लिए झूठी शानो शौकत का प्रदर्शन करती थी। वह मर्सिडीज कार में घूमती और महंगी घड़ी व कपड़े पहनती थी।

ट्रक ड्राइवर की बेटी है इना, रूसी अपराधियों से जुड़े तार

 
 


कथित रूसी जासूस इना के तार कई अपराधियों से जुड़े पाए गए हैं। अमेरिकी जांच एजेंसी को जांच में पता चला है कि इना असल में एक ट्रक ड्राइवर की बेटी है। वह स्वैच्छिक संगठन 'यूनाइटेड हार्ट्स ऑफ मर्सी' की अध्यक्ष रही थी। यह संगठन रूस के बड़े व्यवसायी ने किया था। इसके माध्यम से  रूसी अपराधी गिरोहों को पैसा पहुंचाया जाता था। इना ने चालाकी दिखाते हुए ट्रंप से न केवल नजदीकी बनाई, बल्कि उनके साथ उनके बंगले के गोल्फ कोर्स पर तस्वीरें भी ली थीं। इना ने पिछले एक साल में कई बार ट्रंप बंगले में आयोजित पार्टियों में शिरकत की।

कई देशों के एजेंटों ने लगाई सेंध
एफबीआई के पूर्व उप निदेशक पीटर स्ट्रोजोक के अनुसार रूस, चीन व ईरान जैसे देशों के कई एजेंटों ने ट्रंप के इस बंगले में सेंधमारी की कोशिश की। वे वहां रखे खुफिया व गोपनीय दस्तावेज हासिल करना चाहते थे। ये जासूस कितने कामयाब हुए, इसे लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता। स्ट्रोजोक को अपने फोन से ट्रंप विरोधी संदेश भेजने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि रूस ही नहीं चीन, ईरान व क्यूबा जैसे देश भी अमेरिका की जासूसी में रुचि रखते हैं और उनके एजेंट इसके प्रयास करते रहते हैं।

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पुतिन और किम जोंग उन की नज़दीकियां किसके लिए बन रही हैं सिरदर्द

 
नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस और उत्तर कोरिया के बीच एक ज़माने बाद नज़दीकियां बढ़ती हुई दिख रही हैं. शीत युद्ध के ज़माने में उत्तर कोरिया और सोवियत संघ एक दूसरे के काफी करीब हुआ करते थे.

हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें दोनों के रिश्तों को और मजबूत बनाने का वादा किया गया है.

किम जोंग उन की ओर से इस चिट्ठी का जवाब भी दिया गया है जिसमें उन्होंने कहा है, "विरोधी ताक़तों के ख़िलाफ़ साझा हितों के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग अपने उच्चतम स्तर पर है."

साल 2019 में पूर्वी रूस के शहर व्लादिवोस्तोक में एक ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन हुआ था जिसमें दोनों नेताओं रूस-उत्तर कोरिया की नई दोस्ती पर मुहर लगाई थी.

इसके बाद से ही किम जोंग उन हर विवादास्पद मामले में मॉस्को के लिए अपने समर्थन का खुलेआम एलान करते रहे हैं. यूक्रेन पर जब रूस ने धावा बोला तब भी उत्तर कोरिया ने रूस के लिए अपनी वफादारी दिखलाई.

यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को जब रूस ने जुलाई के महीने में अपने नियंत्रण में लेने की घोषणा की तो इसका समर्थन करने वाला उत्तर कोरिया तीसरा देश था.

रूस और व्लादिमीर पुतिन की तारीफ़ में किम जोंग उन हमेशा सक्रिय रहे हैं. उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में रूस से जुड़ी ख़बरों को खासी तवज्जो मिलती रही है.

बीबीसी की मुंडो सेवा ने रूस और उत्तर कोरिया के संबंधों को समझने के लिए कई विशेषज्ञों से बात की है.

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साल 1948 में उत्तर कोरिया की स्थापना से पहले किम इन सुंग ने सोवियत संघ में प्रशिक्षण लिया था

दोनों देशों का इतिहास
वॉशिंगटन डीसी स्थित थिंकटैंक विल्सन सेंटर के एक्सपर्ट सैमुअल वेल्स बीबीसी मुंडो से कहते हैं, "सोवियत संघ के विघटन के बाद प्योंगयांग और मॉस्को के संबंध काफी कमज़ोर हो गए थे. उस लिहाज से देखें तो अब दोनों देशों के रिश्तों में काफी सुधार हो रहा है."

प्योंगयांग और मॉस्को के संबंधों की शुरुआत साल 1948 में उत्तर कोरिया की स्थापना के साथ ही शुरू हो गई थी.

द्वितीय विश्व युद्ध के ख़त्म होने के बाद सोवियत संघ के तत्कालीन नेता जोसेफ स्तालिन ने किम इल सुंग को उत्तर कोरिया की सत्ता में स्थापित करने में काफी मदद की थी. वहां ऐसा निज़ाम स्थापित किया गया जो कोरियाई संस्कृति और परंपरा के मुताबिक़ और सोवियत संघ के अनुकूल था.

किम इल सुंग उत्तर कोरिया के मौजूदा शासक किम जोंग उन के दादा थे.

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उत्तर कोरिया
साल 1950-53 के दौरान हुए कोरियाई युद्ध में दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़ सोवियत संघ ने उत्तर का साथ दिया. सहयोग का ये सिलसिला कोरियाई युद्ध के बाद भी जारी रहा. बाद में चीन ने भी किम की हुकूमत को हर तरह के संसाधनों के साथ मदद पहुंचाई.

न्यूज़ एजेंसी ईएफ़ई के लिए उत्तर कोरिया में 14 सालों तक रिपोर्टिंग कर चुके एंड्रेस सांचेज़ बारुन उत्तर कोरिया, रूस और चीन के संबंधों पर लंबा अनुभव रखते हैं.

उन्होंने बीबीसी मुंडो को बताया, "शीत युद्ध के समय किम इल सुंग रूस और चीन के साथ संबंधों में संतुलन साधने में हमेशा कामयाब रहे. बिना किसी पर विशेष रूप से निर्भर हुए वे रूस और चीन दोनों के अच्छे दोस्त बने रहे. साल 1953 में ख्रुश्चेव के सत्ता में आने के बाद रूस और चीन के संबंधों में आई दूरियों का भी उन्होंने फ़ायदा उठाने
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