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बाल-बालिका, विशेष गृह व नारी निकेतन में शिविर

 अम्बिकापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष आर. बी. घोरे के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अमित जिन्दल ने बाल संप्रेक्षण गृह, बालिका संप्रेक्षण गृह, विशेष गृह व नारी निकेतन अम्बिकापुर का भ्रमण कर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया।

अमित जिंदल ने बाल संप्रेक्षण गृह में बताया कि बालक को नि:शुल्क प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21-ए में नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 पारित किया गया, जिसकी धारा 3 में प्रत्येक बालक को प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने का अधिकार है। धारा 5 के अनुसार बिना टीसी के भी प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार है। बालिका संप्रेक्षण गृह में किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 30 के उपखंड 13 के तहत लैंगिक रूप से दुव्र्यवहार से ग्रस्त बालकों के पुनर्वास के लिए बाल कल्याण समिति कार्य करेगी।

उन्होंने विशेष गृह में कहा कि विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाएं योजना 2015 भी बालकों के लिए एक मील का पत्थर है, जिसमें बच्ची को विधिक प्रतिनिधित्व, उनके साथ अच्छा व्यवहार, उन्हें सुनवाई का अधिकार सुरक्षा का अधिकार, जेल या हवालात में नहीं रखे जाने का अधिकार है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 10 का परंतुक इस बारे में स्पष्ट प्रावधान करता है तथा बालक की यदि गिरफ्तारी होती है, तो उक्त अधिनियम की धारा 13 के अनुसार उसके माता-पिता या संरक्षक को इस बारे में सूचना दी जाएगी।

जिंदल ने नारी निकेतन में बताया कि छत्तीसगढ़ टोनही प्रताडऩा निवारण अधिनियम 2005 की धारा 5 के अनुसार जो कोई टोनही के रूप में पहचानी गई किसी महिला को शारीरिक या मानसिक रूप से क्षति पहुचाएगा तो वह जुर्माने सहित 5 वर्ष की कठोर कारावास से दण्डनीय होगा। धारा 6 के अनुसार जो कोई यह दावा करता है कि वह टोनही के रूप में पहचानी गई किसी महिला का झाड़ फूंक आदि से ईलाज कर सकता है, तो व जुर्माना सहित 5 वर्ष की कठोर कारावास से दंडनीय होगा। धारा 7 की के अनुसार कोई टोनही के रूप में किसी प्रकार की क्षति कारित की शक्ति रखने का दावा करता है तो वह जुर्माने सहित 1 वर्ष की कठोर कारावास से दण्डनीय होगा।

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बुनियादी शिक्षा अभियान के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

 नारायणपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जिला नारायणपुर में बुनियादी शिक्षा कार्यक्रम का शुभारंभ बीते 12 सितंबर को किया गया था, जिसके तहत बीते 19 सितंबर को नीति आयोग की सहयोगी संस्था पिरामल फाऊंडेशन द्वारा सीएसीएस की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों के पठन-पाठन (हिंदी एवं गणित) के साथ-साथ छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए सतत प्रयास करना है। कार्यशाला के माध्यम से सीएसीएस को अभियान के बारे में पूरी जानकारी देना था, जिससे अभियान को बेहतर रूप से संचालित किया जा सके तथा आने वाली समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। इस कार्यशाला में मुख्य रूप से नारायणपुर ब्लॉक के सीएसीएस, मास्टर ट्रेनर के रूप में नारायण साहू, शकुंतला साहू तथा जिले में कार्यरत पिरामल फाऊंडेशन की टीम सेजल, यास्मीन,   गुलजार, महेंद्र मिश्रा एवम केएल मसीह उपस्थित थे। इस कार्यशाला में नई शिक्षा नीति, निपुण भारत मिशन, एएसएआर सरल, मेरा योगदान एप की जानकारी दी गई।

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स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में संवर रहा बच्चों का भविष्य

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कोई देश कितना विकसित है, इसके तीन पैमानों में स्वास्थ्य, आर्थिक खुशहाली के साथ शिक्षा भी शामिल हैं। कोई देश यदि शिक्षा में निवेश करता है, तो भविष्य में उसे अपने निवेश पर कई गुना लाभ प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य के लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के रूप में ऐसा निवेश कर दिया है, जिसका लाभ आने वाली अनेक पीढ़ियों को सुखद भविष्य के रूप में मिलता रहेगा। एक राजमर्मज्ञ आने वाले समय की नब्ज को पहचानता है। दुनिया तेजी से ग्लोबल विलेज बन रही है और यह प्रक्रिया तेजी से गति ले रही है। जो समय की नब्ज को पकड़कर उसके साथ कदमताल कर लें वो विजेता होगा। ग्लोबल विलेज की भाषा है अंग्रेजी। हमारे छत्तीसगढ़ के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, लेकिन अंग्रेजी में चूक जाते हैं। माता-पिता चाहते हैं कि वो भी उच्च वर्ग और उच्च-मध्यम वर्ग की तरह बच्चों को अच्छी अंग्रेजी शिक्षा दे पाएं, लेकिन पब्लिक स्कूल की मोटी फीस वहन करना उनके लिए संभव नहीं था।



मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस बाधा को तोड़ दिया। केवल अंग्रेजी की पढ़ाई ही नहीं, उच्च गुणवत्ता के साथ अंग्रेजी की पढ़ाई। अंग्रेजी की पढ़ाई केवल रायपुर जैसे महानगर में न हो बल्कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में भी हो। गांव का बच्चा क्यों अंग्रेजी शिक्षा से वंचित रहे, इसका दायरा गांव तक फैल गया। लाइब्रेरी की सुविधा नामी-गिरामी निजी स्कूल तक ही सीमित क्यों रहे, सर्वसुविधायुक्त लाइब्रेरी हमारे हर आत्मानंद स्कूल में भी है। यही नहीं आत्मानंद स्कूल में सुंदर खेल परिसर हैं, जहां से नामचीन खिलाड़ी भी निकल सकते हैं। आधुनिक सुविधाओं वाले प्रैक्टिकल लैब हैं, जहां इस पीढ़ी के सीवी रमन तैयार होंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हमेशा कहते हैं कि प्रतिभा तो है संसाधन नहीं दोगे तो यह कैसे उभरेगी। मुख्यमंत्री ने स्कूलों को संसाधनों से समृद्ध किया है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि हमारी पीढ़ी अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ हमारी संस्कृति से भी जुड़ी रहे इसलिए अंग्रेजी माध्यम के साथ-साथ हिंदी माध्यम के आत्मानंद स्कूल भी खोले जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय बोलियों को पाठ्यक्रम से जोड़ा गया है, इससे हमें अपनी संस्कृति, परम्पराओं और स्थानीयता पर भी गर्व होगा और अपने ग्लोबल पहचान के प्रति भी हम जागरूक होंगे।



प्रदेश में स्वामी आत्मानंद स्कूल की शुरूआत सबसे पहले 03 जुलाई 2020 को हुई। इसी वर्ष अलग-अलग शहरों में 52 स्कूल खोले गए। उस समय यहां प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम थी। फिर भी प्रथम वर्ष में आवेदन की संख्या 20 हजार से अधिक थी। धीरे-धीरे स्कूल की गुणवत्ता की चर्चा होने के साथ यहां आवेदन की संख्या बढ़ती गई। वर्ष 2022-23 में दो लाख 76 हजार से अधिक आवेदन मिले हैं। परिस्थितियों को देखते हुए स्कूलों की संख्या भी बढ़ाई गई। इस समय प्रदेश में 279 स्कूल संचालित हैं, जिसमें अंग्रेजी माध्यम के 247 और हिन्दी माध्यम के 32 स्कूल हैं। यही नहीं आने वाले शैक्षणिक सत्र में 439 हिन्दी माध्यम के स्वामी आत्मानंद स्कूल खोलने की योजना है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा थी कि छत्तीसगढ़ में ऐसे शिक्षण संस्थान हो जहां निजी स्कूल जैसी उत्कृष्ट सुविधाएं हो, वहां मध्यम और निर्धन वर्ग के पालक अपने बच्चों को पढ़ा सकें। इसे मूर्त रूप देने पुराने सरकारी स्कूलों को ही चिन्हित किया गया। इन स्कूलों में सबसे पहले आधारभूत संरचना को मजबूत किया गया। पुरानी बिल्डिंग का पुनरूद्धार किया गया। क्लास रूम को नया रूप प्रदान किया गया जहां पर कभी पुराने ब्लैक बोर्ड थे, वहां पर ग्रीन बोर्ड लगाए गए, कुछ जगह स्मार्ट बोर्ड ने जगह ले ली। पुराने बैंच-टेबल की जगह नए कम्फर्ट बैच-डैस्क की व्यवस्था की गई। साइंस के आधुनिक साज-सामानों के साथ नये प्रैक्टिकल लैब बनाए गए। एक्स्ट्रा कैरिकुलम एक्टिविटी को बढ़ावा दिया गया।



शिक्षण संस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण शिक्षक की जरूरतें पूरी की गई। अन्य स्कूलों से प्रतिनियुक्ति पर अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक लिए गए। यहीं नहीं संविदा में विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों की भर्ती की गई। शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। बच्चों को पढाने के लिए स्मार्ट बोर्ड का उपयोग किया गया। इससे बच्चे ऑडियो-विजुअल पद्धति से अध्ययन करने लगे, जिससे उन्हें विषय को समझने में आसानी हुर्ह, उनकी ग्रहण क्षमता बेहतर हुई।

विद्यार्थियों की दर्ज संख्या की बात करें, तो इसमें बेहतरीन परिणाम सामने आए। राजधानी रायपुर के बीपी पुजारी स्कूल में शुरूआत में जहां पूर्व में बच्चों की संख्या सिर्फ 100 के आस-पास थी, वहां अब 1000 से अधिक हो गई। बिलासपुर जिले के आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल तारबाहर की बात करें तो वहां तत्कालीन स्कूल में दर्ज संख्या करीब 124 थी, वहीं आत्मानंद स्कूल में परिवर्तित होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर लगभग 800 हो गई। हर वर्ग से बच्चों के स्कूल में प्रवेश की निरंतर मांग आने लगी। इसे देखते हुए स्कूल प्रबंधन को लाटरी सिस्टम की मदद लेनी पड़ी। विद्यार्थियों की दर्ज संख्या वर्ष 2021-22 में जो एक लाख 41 हजार 745 थी। वह अब 2022-23 में बढ़कर 2 लाख 31 हजार 403 हो गई।

स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना ने छत्तीसगढ़ में शैक्षणिक वातावरण ही बदल दिया है। यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राएं महसूस कर रहे है कि उन्हें आगे बढ़ने के वह सारे अवसर मिल रहे हैं जो एक महानगर की सर्वसुविधायुक्त गुणवत्तायुक्त प्राइवेट स्कूलों में है, वह भी निःशुल्क। इनके परिणाम इतने सकारात्मक हैं कि मुख्यमंत्री भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान वे जिन-जिन स्थानों पर जा रहे है, वहां जनता ने इस स्कूल के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही नए स्कूलों की मांग भी की। स्वामी आत्मानंद छत्तीसगढ़ की महान विभूति थे, जिन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगायी, जो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रयासों से छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में पहुंच गई है। निश्चित ही प्रदेश सरकार द्वारा किया गया यह प्रयास छत्तीसगढ़ को शिक्षा के क्षेत्र में देश में उच्च स्थान पर स्थापित करेगी।

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शिक्षा के स्तर में सुधार अपेक्षाकृत कम, यह स्थिति ठीक नहीं : भूपेश बघेल

 गुण्डरदेही में मुख्यमंत्री ले रहे अधिकारियों की समीक्षा बैठक

रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भेंट मुलाकात कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल बालोद जिले के गुण्डरदेही में अधिकारियों की समीक्षा बैठक ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के स्तर में सुधार अपेक्षाकृत कम, यह स्थिति ठीक नहीं। स्कूल कॉलेजों की नियमित जांच हो।

मुख्यमंत्री ने जिला मुख्यालय में नहीं रहने वाले अधिकारियों को मुख्यालय में अनिवार्य रूप से रहने के सख्त निर्देश दिए। बिजली संबंधी शिकायतें, अवैध शराब  की शिकायतों पर तत्काल सख्ती से कार्रवाई करें।

अधिकारी-कर्मचारी अपनी क्षमता का उपयोग शासन प्रशासन के कार्यों में और जनता की भलाई के लिए करें। आमजनता में यह संदेश जरूर जाएं कि शासन संवेदनशीलता से बेहतर कार्य कर रहा है।

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मुख्यमंत्री ने किया बालोद के शासकीय पॉलिटेक्निक का लोकार्पण

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बालोद जिले में भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दूसरे दिन सोमवार को डौंडी विधानसभा क्षेत्र के मालीगोरी पहुंचे और वहां उन्होंने शासकीय पॉलिटेक्निक बालोद का लोकार्पण किया। पॉलिटेक्निक में सिविल, इलेक्ट्रिकल तथा माइनिंग एंड माइन सर्वेइंग ट्रेड के पाठ्यक्रम संचालित किये जाएंगे। इस पॉलिटेक्निक में कुल 180 सीटें हैं । बालोद तथा जिले के आसपास के क्षेत्रों के होनहार छात्रों को इस पॉलिटेक्निक के बनने से तकनीकी शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। शासकीय पॉलिटेक्निक बालोद में तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर छात्र रोजगार की ओर उन्मुख होंगे।

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लैटरल एंट्री में प्रवेश के लिए पंजीयन 23 तक

 उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। शासकीय पॉलीटेक्निक नाथियानवागांव कांकेर में डिप्लोमा इंजीनियरिंग कोर्स के लैटरल एंट्री में प्रवेश हेतु पंजीयन 20 से 23 सितम्बर तक कर सकते हैं। दो वर्षीय आईटीआई में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों को कक्षा 12वीं में भौतिक, रसायन एवं गणित विषय के साथ उत्तीर्ण के आधार पर प्रवेश दिया जायेगा। ऑनलाईन कांउसलिंग प्रथम चरण की प्रक्रिया के लिए 20 से 23 सितम्बर तक अभ्यर्थियों को रजिस्ट्रेशन एवं डीव्हीसी कराना होगा। सीटों का आबंटन 27 सितम्बर को किया जायेगा तथा आबंटित सीटां पर 28 सितम्बर से 01 अक्टूबर तक प्रवेश दिया जायेगा।

वर्तमान में शासकीय पॉलीटेक्निक कांकेर में मेकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग के डिप्लोमा कोर्स संचालित है। मेकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग ब्रांच में सीटों की संख्या क्रमषः 25, 11 और 33 है। इसके साथ ही समस्त तकनीकी पाठयक्रमों के लिए डीव्हीसी उक्त तिथियों में कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए संचालनालय तकनीकी शिक्षा रायपुर छत्तीसगढ़ के वेबसाइट  www.cgdteraipur.cgstate.gov.in    का अवलोकन किया जा सकता है।

 

 

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'चिरायु' योजना के माध्यम से स्कूलों-आंगनबाड़ियों में बच्चों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच व उपचार

बाल स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्रदेश में 330 ‘चिरायु’ दल कर रहे हैं काम

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत ‘चिरायु’ योजना के माध्यम से प्रदेश के एक लाख 76 हजार बच्चों का इलाज किया गया है। इसके तहत 18 दिसंबर 2018 से अब तक विभिन्न हृदय रोगों से पीड़ित 3081, होंठ एवं तालु की विकृति वाले 603, क्लबफुट वाले 670 और जन्मजात मोतियाबिंद से ग्रस्त 334 बच्चों का उपचार किया जा चुका है। ‘चिरायु’ योजना में इस वित्तीय वर्ष 2022-23 में अब तक 21 हजार 96 बच्चों का इलाज किया गया है।

बाल स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्रदेश भर में 330 चिरायु दल कार्यरत हैं। ये प्रदेश भर के स्कूलों और आंगनबाड़ियों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर उनकी शारीरिक कमियों व रोगों की पहचान कर निःशुल्क इलाज की व्यवस्था करते हैं।मितानिन व एएनएम के माध्यम से भी इन बच्चों का चिन्हांकन कर चिरायु योजना के अंतर्गत पंजीयन किया जाता है। चिरायु दल द्वारा इन बच्चों की उच्च स्तरीय जांच कर अनुबंधित अस्पतालों में ऑपरेशन करवाया जाता है।

प्रदेश में वर्ष 2014 से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित है। कार्यक्रम का उद्देश्य शून्य से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों में फोर-डी (4D) यानि डिफेक्ट एट बर्थ, डिसीज, डिफिसिएन्सी एंड डेवलपमेन्ट डिलेस इनक्लुडिंग डिसएबिलिटी (Defect at birth, Disease, Deficiency & Development delays including disability) की जांच कर शीघ्र उपचार उपलब्ध कराना है। इसके तहत बच्चों में 44 प्रकार की बीमारियों की पहचान व जाँच कर उपचार किया जाता है। जरुरत पड़ने पर उच्च संस्थाओं में रिफर भी किया जाता है। ‘चिरायु’ योजना के अंतर्गत जन्म से छह सप्ताह की आयु के नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण डिलीवरी प्वाइंट के स्टॉफ द्वारा, छह सप्ताह से छह वर्ष की आयु के बच्चों का आंगनबाड़ी केन्द्रों में और छह वर्ष से 18 वर्ष की आयु के बच्चों का शासकीय एवं अनुदान प्राप्त विद्यालयों में चिरायु दलों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है।

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कलेक्टर ने चयनित डेमो विद्यालयों की स्थिति पर शिक्षकों से की चर्चा

 बीजापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जिले में तीन दिन से चल रहें समर्थन बुनियादी शिक्षा अभियान की प्रथम जिला स्तरीय कार्यशाला का शनिवार को अंतिम दिन था, इस अभियान के कार्यशाला में कलेक्टर राजेन्द्र कुमार कटारा द्वारा  प्रधानपाठकों से व  भैरमगढ़ के स्वयंसेवक शिक्षिकाओं के साथ प्रशासन से उनकी  अपेक्षाओं पर चर्चा किया गया।  कार्यशाला के समापन के दौरान कलेक्टर द्वारा अपने वक्तव्य से प्रधानपाठकों  को संबोधित करते हुए कहा गया कि बच्चों की प्राथमिक शिक्षा हमारे जिले की  प्राथमिकता है जिसके लिए जिले में समर्थन बुनियादी शिक्षा अभियान की शुरुआत की गई है, शिक्षक बच्चों को संस्कार व जीने का तरीका बताते है, मनुष्य को बेहतर इंसान बनाने में शिक्षा का बहुत बड़ा योगदान है, शिक्षा एक ऐसा  माध्यम है जिससे हम संवाद स्थापित करते है, महत्वपूर्ण यह है कि हम सही गलत का निर्णय करें, शिक्षक क रूप में हमारा योगदान कितना रहा, मूल्यों के संवर्धन में, नैतिकता के संवर्धन में यह हमें देखना है, बच्चा क्या कैसे सीख रहा है इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है, तथा जिले की स्थिति को देखते हुए अभिभावकों को दोष देना उचित नहीं है,  शिक्षक को प्रत्येक बच्चें को व्यक्तिगत रूप से समझना आवश्यक है, जिससे वह बच्चा आगे बढ़ पाए व समाज निर्माण में अपना योगदान दें। इसी के साथ कलेक्टर द्वारा शिक्षकों की अपेक्षाओं को जानते हुए बताया गया कि खेल- खेल में पढ़ने के लिए पाठ्यसामग्री तथा अन्य मटेरियल को उपलब्ध कराया जाएगा। ट्रेनिंग के दौरान चल रहे बाल मनोविज्ञान विषय पर सेशन को कलेक्टर द्वारा अटेंड किया गया। इस सत्र के लिए दन्तेवाड़ा से मानस फाउंडेशन की मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ पार्वती जी को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने बाल मनोविज्ञान तथा शिक्षक को ध्यान में रखने वाली आवश्यक बातों पर पीपीटी के माध्यम से  प्रधानपाठकों की समझ बनाई गयी, इस दौरान बाल मनोविज्ञान के साथ साथ डिप्रेशन, अवसाद व चिंता इन विषयों पर समाधान तथा स्थिति पर चर्चा किया गया।

समर्थन बुनियादी शिक्षा अभियान की जिला स्तरीय कार्यशाला के इस अंतिम दिन में अधिकतम गतिविधियों को शिक्षकों द्वारा किया गया। कार्यशाला की शुरुआत गांधी फेलो अरुण कुमार व कु भूमिका पेंदोर द्वारा चेतना गीत से की गई,  जिसके उपरांत पिरामल फाउंडेशन व नीति आयोग के एडीसी जिला समन्वयक मांशु शुक्ला द्वारा शिक्षकों की बीते दिन से सिख व चुनौतियों पर समझ बनाई गई, कार्यशाला के मुख्य विषयों में नई शिक्षा नीति, बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान, निपुण भारत मिशन पर डाइट के मास्टर ट्रेनर विद्याभूषण नेताम द्वारा, भाषा गतिविधियों कराने हेतु वीडियो के माध्यम से ललित निषाद द्वारा तथा सरल कार्यक्रम पर जरासंघ सोनवानी द्वारा समझ बनाई गई, इस दौरान कार्यक्रम में टेक्निकल सपोर्ट तथा सेशन व हॉल मैनेजमेंट की जिम्मेदारी गांधी फेलो सागर गजभिये व जुबेर आलम द्वारा निभाई गयी, डेटा एनेलिसिस्ट आशीष वर्मा द्वारा प्रधानपाठकों की समस्याओं व अपेक्षाओं हेतु गूगल फॉर्म को साझा किया गया तथा कार्यशाला के समापन की घोषणा की गई। कार्यक्रम में एडमिन संपोर्ट के रूप में शिक्षा विभाग के शिव बोरला सहित रोहित, अजय व गौतम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान चयनित डेमो विद्यालय के 131 प्रधान पाठकों के साथ डाइट, शिक्षा  विभाग, पिरामल फाउंडेशन की टीम मुख्य रूप से उपस्थित थी।

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व्यवसायिक शिक्षा के छात्रों ने की राज्यपाल से भेंट

दीवाली के अवसर पर स्वयं द्वारा बनाए कलात्मक वस्तुओं को किया भेंट

गरियाबंद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। हरिहर शाला के व्यवसायिक शिक्षा मीडिया विषय के छात्रों ने रविवार को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन राज्यपाल अनुसुईया उइके के समक्ष किया। ग्रामीण क्षेत्र के इतने प्रतिभाशाली छात्रों के कार्यों से राज्यपाल न सिर्फ प्रभावित हुई बल्कि प्रत्येक छात्र के साथ उनकी कलात्मक वस्तुओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई। छात्रों की इस प्रतिभा के लिए उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर छात्र दीपक चक्रधारी ने राज्यपाल की स्वयं के हाथों से बनाई हुई तस्वीर भी भेंट की। शाला की प्राचार्य संध्या शर्मा, व्यवसायिक प्रशिक्षिका सोमा शर्मा के मार्गदर्शन में इन छात्रों ने राजिम में कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचीं राज्यपाल से राजिम रेस्ट हाउस में भेंट मुलाकात की। इस दौरान प्रशिक्षिका सोमा शर्मा ने राज्यपाल को विगत 4 वर्षों से दिवाली के अवसर पर छात्रों द्वारा तैयार किए जा रहे कलात्मक वस्तुओं की ऑनलाइन बिक्री, बिक्री से प्राप्त राशि से उनकी पढ़ाई का खर्च, जरूरतमंद छात्रों की मदद करने की जानकारी दी। इस अवसर पर राजिम विधायक अमितेश शुक्ल, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल एवं केदार कश्यप ने भी छात्रों की इस प्रतिभा को सराहा तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राज्यपाल से मिलने वाले छात्रों में दीपक चक्रधारी, हर्षल देवांगन, राज टंडन, खिलेश पैगंबर, गणेश साहू, संतोष निषाद, योगेंद्र चक्रधारी छात्र विशेष रूप से शामिल थे।

 

 

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स्वरोजगार के जरिये आत्मनिर्भर बनने के लिए कौशल विकास जरूरी : मंत्री भगत


दीक्षांत समारोह में प्रशिक्षार्थियों को दिए गए प्रमाण पत्र

 अम्बिकापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में जनशिक्षण संस्थान की ओर से शनिवार को राजमोहनी देवी भवन में कौशल दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति व उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अमरजीत भगत तथा विशिष्ट अतिथियों की ओर से विभिन्न विषयों में कौशल प्राप्त प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री भगत ने कहा कि वर्तमान में सभी शिक्षितों को सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं है, ऐसे में स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए युवाओं को अपने रुचि के विषय मे कौशल विकास करना होगा। किसी भी विषय मे दक्षता हासिल कर बेहतर कार्य कर सकते हैं, जैसे टेलरिंग, ब्यूटीपार्लर, बढ़ाई, इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री या इलेक्ट्रॉनिक मेकेनिक आदि। युवाओं को स्वरोजगार के लिए कौशल विकास के लिए हमारी सरकार निरंतर नई-नई योजना ला रही है। इन योजनाओं से इससे पिछड़े व वंचित तबके के लोगो को प्रशिक्षित कर दक्ष किया जा रहा है। महापौर डॉ अजय तिर्की ने कहा कि केंद्र व राज्य शासन की ओर से कई कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे है। वर्तमान में समय के साथ आगे बढऩे के लिए किसी न किसी क्षेत्र में दक्ष बनना होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता बस उस काम के प्रति समर्पण का भाव व लगन होनी चाहिए। अपने रुचि के विषय में दक्षता हासिल कर आजीविका के शिखर तक पहुंच सकते हैं।

समारोह में बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष प्रबोध मिंज, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह मेजर, जनपद उपाध्यक्ष  प्रदीप गुप्ता, पार्षद दीपक मिश्रा, इरफान सिद्दीकी, परवेज आलम, राजीव गुप्ता, जनशिक्षण संस्थान के निदेशक एम सिद्दीकी, परियोजना अधिकारी गिरीश गुप्ता सहित अन्य अधिकारी व बड़ी संख्या में प्रशिक्षार्थी उपस्थित थे।

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आजादी क्वेस्ट के सवालों का जवाब देकर जेएनवि के विद्यार्थियों ने जीते पुरस्कार


पत्र सूचना कार्यालय रायपुर व केंद्रीय संचार ब्यूरो ने आयोजित की प्रतियोगिता

 अंबिकापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) रायपुर व केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) रायपुर द्वारा जिले के खलीवा स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में ‘आजादी क्वेस्ट’ हिंदी पखवाड़ा व सुपोषण माह विषयक जागरूकता प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सभी प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को तत्काल मंच से पुरस्कार प्रदान किया गया। इस अवसर पर पीआईबी रायपुर के क्षेत्रीय निदेशक कृपाशंकर यादव व उपनिदेशक सुनील तिवारी व नवोदय विद्यालय के प्राचार्य सुरेंद्र पाल मौजूद रहे।

स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से रूबरू कराने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा आजादी क्वेस्ट गेमिंग एप लांच किया गया है। यह एप प्रतिभागी को स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से रूबरू कराता है। इसमें कई स्टेज हैं। इस गेमिंग एप में कोई भी हिस्सेदारी कर सकता है। गेम का उद्देश्य विद्यार्थियों खासकर स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को हिंसात्मक गेम से बचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसी के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से पीआईबी व सीबीसी द्वारा नवोदय के विद्यार्थियों के बीच जागरूकता प्रसार किया।



इस अवसर पर हिंदी पखवाड़ा के तहत आयोजित जागरूकता प्रतियोगिता में राजभाषा से संबंधित सवाल पूछे गए। जिन विद्यार्थियों ने सवालों का सही जबाव दिया उन्हें तत्काल पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत भी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।



इस संबंध में पीआईबी रायपुर के निदेशक कृपा शंकर यादव ने बताया कि भारत सरकार ने आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आजादी क्वेस्ट गेम लांच किया है। वहीं भारत सरकार द्वारा सुपोषण माह व हिंदी पखवाड़ा भी मनाया जा रहा है। इन सभी को ध्यान में रखते हुए नवोदय विद्यालय के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपनिदेशक सुनील कुमार तिवारी ने राजभाषा हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। प्राचार्य सुरेंद्र पाल ने आयोजन के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने कहा इस आयोजन से संबंधित विषय पर विद्यार्थियों का उत्साह में बढ़ोत्तरी हुई। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ एफपीए केवी गिरी ने किया। समन्वय में हिमांशु सोनी, प्रशांत कुमार व अंबिकालाल व जवाहर नवोदय विद्यालय के शिक्षक ज्योति जैन, ओनिमा कंचन लता, ऋषि कुमार व मुकेश कुमार सोनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर जेएनवि के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति से मन मोह लिया।

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जिला प्रशासन की टीम ने बच्चों को बताया बाल अधिकार संरक्षण

 कवर्धा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देशानुसार जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं चाईल्ड लाईन 1098 की संयुक्त टीम द्वारा बाल अधिकार संरक्षण हेतु जिले में निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

संयुक्त टीम द्वारा विकासखण्ड बोड़ला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चिल्फी, अदिवासी बैगा आश्रम लूप एवं विकासखण्ड पण्डरिया के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाण्डातराई में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों को किशोर न्याय (बालकों के देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015, लैगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, बाल अधिकार संरक्षण, एकीकृत बाल संरक्षण कार्यक्रम मिशन वात्सल्य के तहत् जिला बाल संरक्षण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई, जिला बाल संरक्षण इकाई, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, शासकीय बाल गृह, विशेषीकृत दत्तक ग्रहण अभिकरण, प्रवर्तकता, पोषण देखरेख एवं पश्चातवर्ती देखरेख कार्यक्रम, पीएम केयर फॉर चिल्ड्रन योजना, चाईल्ड हेल्प लाईन 1098, देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पहचान, बच्चों को नशे की लत से बचाव एवं मोबाइल के मोह से बाहर निकलने के उपाय भिक्षावृत्ति रोकथाम बाल श्राम अपशिष्ट संग्राहक एवं सड़क जैसे स्थिति में रहने वाले बच्चों का चिन्हांकन रेस्क्यू एवं पुर्नवास की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बच्चों को गुडटच बेडटच के बारे में बताया गया साथ ही सघन कोरोना टीकाकरण लगवाने के लिये जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग सत्यनारायण राठौर, परियोजना अधिकारी बाल विकास सेवा परियोजना चिल्फी नमन देशमुख, संरक्षण अधिकारी संस्थागत सुश्री क्रांति साहू, परामर्शदाता अविनाश ठाकुर, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती परमेश्वरी धुर्वे, आउटरीच वर्कर श्रीमती श्यामा धुर्वे, आउटरिच वर्कर श्रीमती नितिन किशोरी वर्मा, आउटरिच वर्कर विनय कुमार जंघेल, जिला बाल संरक्षण इकाई रामसागर साहू, केन्द्र समन्वयक महेश निर्मलकर, काउंसलर चित्ररेखा राडेकर, रामलाल पटेल, आरती यादव, लवली दास, भुपेन्द्र बघेल टीम मेंम्बर चाईल्ड लाईन 1098 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चिल्फी एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाण्डातराई प्राचार्य एवं शिक्षक शिक्षिकाएं व सभी बच्चें उपस्थित थे।

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समावेशी शिक्षा: दृष्टिबाधित स्कूली बच्चों को स्मार्टफोन के जरिए मिलेगी अध्ययन सामग्री

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अध्ययनरत् दृष्टिबाधित बच्चों को अब समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के तहत अध्ययन सामग्री स्मार्टफोन के जरिए उपलब्ध करायी जाएगी। इस कार्यक्रम के संचालन के लिए शिक्षकों की कार्यशाला 14 से 23 सितंबर तक राजधानी रायपुर के ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान निमोरा में आयोजित किया जा रहा है। कार्यशाला का उद्घाटन प्रशिक्षण संस्थान निमोरा के निदेशक पी.सी. मिश्रा एवं समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक नरेंद्र कुमार दुग्गा रायपुर के मुख्य आतिथ्य में हुआ।

इस कार्यशाला में प्रथम एवं द्वितीय चरण में विद्यालयों में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत दृष्टिबाधित बच्चों के साथ चयनित बीआरपी (समावेशी शिक्षा) को स्मार्टफोन में पाठ्यपुस्तक के उपयोग हेतु प्रशिक्षित किया जा रहा है। तृतीय चरण में सत्र 2019-20 में जिन बच्चों को समग्र शिक्षा द्वारा स्मार्टफोन प्रदान किया गया था, उनके लिए रिफ्रेशर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान निमोरा के निदेशक पी.सी. मिश्रा के द्वारा समस्त दृष्टिबाधित बच्चों को शुभकामना देते हुए सक्षम बनने एवं विशेषज्ञों से प्रशिक्षण का पूर्ण लाभ प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया गया। समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक दुग्गा द्वारा राज्य में दिव्यांग बच्चों के चिन्हांकन पर जोर देते हुए उनके शैक्षणिक उपलब्धि के लिए समग्र शिक्षा द्वारा समुचित प्रयास किए जाने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित बच्चे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए आत्मनिर्भर बन सकेंगे एवं भविष्य में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समग्र शिक्षा के द्वारा सतत रूप से आयोजित किए जाएंगे।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के स्कूलों में अध्ययनरत् दृष्टिबाधित बच्चों के अध्ययन में आ रही समस्याओं को दूर कर उन्हें शिक्षा के मुख्य धारा से जोड़ना है। कार्यक्रम के अंतर्गत दृष्टिबाधित बच्चों को स्मार्टफोन के जरिए सुगम्य पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराना है। दृष्टिबाधित बच्चों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में कोलकाता की संस्था एम जंक्शन का सहयोग लिया जा रहा है। समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित की जा रही इस योजना में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत् दृष्टिबाधित बच्चों को स्मार्टफोन के जरिए अध्ययन सामग्री उपलब्ध करायी जाएगी। जिससे कि ये बच्चे डिजिटल शिक्षा में कुशलता प्राप्त कर सके।

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पोस्टर प्रतियोगिता में आरडी तिवारी स्कूल तो भाषण में होलीक्रास स्कूल ने बाजी मारी

अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस पर भाषण एवं पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, नवा रायपुर द्वारा शुक्रवार को नवीन विश्राम गृह, सिविल लाईंस, रायपुर में पोस्टर एवं पर्यावरणीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में लगभग 550 प्रतिभागीयों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किये गये।


इस अवसर पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह को सम्बोधित करते हुए मंडल के सदस्य सचिव आर.पी. तिवारी ने उपस्थित छात्र-छात्राओं का आह्नान किया कि वे ओजोन परत की सुरक्षा हेतु जन चेतना जागृत करें। तिवारी ने कहा कि स्वयं जागरूक होने के बाद ही हम आम जनता को ओजोन परत के संरक्षण के उपायों को को बेहतर ढंग से समझा सकते हैं। हमें अपनी जीवन शैली में परिवर्तन कर यह सुनिश्चित करना होगा कि ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ धीरे-धीरे समाप्त हो जाये। तिवारी ने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने की भी अपील की। उन्होंने प्लास्टिक के दुष्प्रभावों की चर्चा करते हुए कहा कि यह सैंकडो सालों तक हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता रहता है।

प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ रमया सुन्दर रमन, प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ एण्ड इन्वायरमेंटल साइंस, हेड सेन्टर फॉर साइंस एण्ड सोसाईटी, इंडियन इन्सिटीट्यूट ऑफ साइंस, एजुकेशन एण्ड रिसर्च, भोपाल ने ओजोन परत संरक्षण तथा वायु प्रदूषण व उसके नियंत्रण पर रोचक प्रस्तुतीकरण दिया। डॉ रमन ने कहा कि क्लोरोफ्लोरो कार्बन के सीमित उपयोग से ओजोन परत के संरक्षण के साथ-साथ ग्रीन हाऊस गैस के प्रभाव भी कम हुआ हैे। क्योटो प्रोटोकॉल से अधिक मॉन्ट्रियल प्रोटोकाल प्रभावी है। इस से पृथ्वी के तापक्रम में एक डिग्री कमी आयी है।



भाषण प्रतियोगिता मिडिल स्कूल में प्रथम स्थान अंबिका गुप्ता, बी.पी. पुजारी इंग्लिश मिडियम स्कूल, रायपुर, द्वितीय पुरस्कार लक्ष्यवीर वराडे, प्रो. जे.एन. पाण्डेय, रायपुर एवं तृतीय पुरस्कार सुरभि साहू, बी.पी. पुजारी इंग्लिश मिडियम स्कूल, रायपुर हायर सेकेण्डरी स्कूल में प्रथम अविवा रहमान, होलीक्रास सीनियर सेकेण्डरी, द्वितीय उन्नति सिंह, डी.पी.एस. रायपुर, तृतीय पुरस्कार आकाश सिन्हा, केन्द्रीय विद्यालय रायपुर, महाविद्यालय स्तर पर प्रथम पुरस्कार एन.आदित्य, पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर, द्वितीय डी. दिया, दिशा कॉलेज रायपुर तथा तृतीय पुरस्कार गुलाब सिंह वर्मा, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को प्रदान किया गया।



कार्यक्रम में आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में मिडिल स्कूल में प्रथम स्थान योगिता वर्मा, सेंट मेरी इंग्लिश मिडियम स्कूल, द्वितीय पुरस्कार हर्षिता जंघेल, आदर्श विद्यालय, देवेन्द्र नगर, तृतीय पुरस्कार कशिश अंजुम खान बी.पी. पुजारी, जी.ई.एम. स्कूल को मिला। हायर सेकेण्डरी स्कूल स्तर पर प्रथम पुरस्कार आदित्य चौरसिया पं. आर.डी. तिवारी उत्कृष्ट विद्यालय रायपुर, द्वितीय पुरस्कार इशिता साहू, केन्द्रीय विद्यालय नं 2 रायपुर एवं तृतीय पुरस्कार छाया कुर्रे, पी.जी.उमाठे शा. कन्या शाला को प्रदान किया गया। महाविद्यालय स्तर पर प्रथम पुरस्कार रितिक पहरिया, शा. महाप्रमु वल्लभाचार्य स्ना. महाविद्यालय, महासमुंद, द्वितीय पुरस्कार महक कश्यप, दिशा कॉलेज रायपुर, तृतीय पुरस्कार शाजिया ईरम, सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई को मिला। निर्णायक के रूप में जी.एस. सलूजा, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, छ.ग. विधानसभा, ए.एन. द्विवेदी, प्रधान संपादक, पायनियर एवं पोस्टर प्रतियोगिता में संघर्ष यदु उपस्थित थे। भाषण प्रतियोगिता की अध्यक्षता श्री एम.आर. सावंत, प्राचार्य शा. जे.एन. पाण्डये उ.मा. शाला रायपुर ने की।

 

 

 
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जिले में प्रारंभ हो गया स्वच्छता पखवाड़ा, 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलेगा

 गरियाबंद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जिला गरियाबंद में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता की थीम स्वच्छता ही सेवा का प्रारंभ किया गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रोक्तिमा यादव ने बताया कि इस अभियान के तहत जिले के समस्त ग्रामों में सामूहिक श्रमदान, स्वच्छता रैली, पौधारोपण, जल स्त्रोतों का श्रमदान के माध्यम से साफ-सफाई इत्यादि चरणबध्द तरीके से किया जाएगा, इस अभियान में सामाजिक संस्थाओं, स्वंयसेवी संस्थाओं के साथ-साथ जनप्रतिनिधि व आम जनों से भी स्वच्छता के कार्य में आगे आकर सहयोग करने का आग्रह किया गया है। 

इस अवधि में समस्त ग्राम पंचायतों को स्वच्छाग्रहियों के माध्यम से आम लोगों के बीच स्वच्छता के प्रति जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इस अभियान की अवधि में आम पात्र ग्रामीण जिनकों पूर्व में शौचालय का लाभ किसी भी योजना से नहीं मिला है अथवा ऐसे नये परिवार जिनके घर में शौचालय नहीं है व ऐसे परिवार जो स्वयं से शौचालय बनाने में सक्षम नहीं है, वो व्यक्तिगत शौचालय के लिए ग्राम पंचायत के माध्यम से अपने-अपने जनपदों में आवेदन कर सकते है। स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत ग्रामों में कचरा संग्रहण व पृथक्करण शेड के निर्माण में गति लाकर उसे भी पूर्ण कराया जाना है तथा 02 अक्टूबर तक अधिक से अधिक ग्रामों को ओ.डी.एफ. प्लस की श्रेणी में लाया जाना है।

 
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अभियान चलाकर एक माह में तैयार करे स्कूली बच्चों के जाति प्रमाणपत्र : कलेक्टर

 अम्बिकापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कलेक्टर ने गुरुवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला अधिकारियां की बैठक लेकर विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने तथा राजस्व प्रकरणों के निराकरण में धीमी प्रगति पर एसडीएम, तहसीलदार व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तेजी से प्रगति लाने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने अभियान चलाकर एक माह में स्कूली बच्चां से प्राप्त सभी पात्र आवेदनों पर कार्यवाही कर स्थाई जाति प्रमाण पत्र बनाकर देने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने कहा कि स्कूली बच्चों के जाति प्रमाणपत्र बनाने में एसडीएम की महत्वपूर्ण भूमिका है। आवेदन पत्रों की ऑनलाइन प्रविष्टि व संवीक्षा से लेकर प्रमाण पत्र जारी करने तक प्रत्येक चरण में सक्रिय मॉनिटरिंग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिविर लगवाएं तथा अधिकारी आपसी समन्वय करें। जाति प्रमाण पत्र बनाने में जनपद सीईओ भी सक्रियता से अपना सहयोग दें। बताया गया कि करीब 2766 स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाया जाना है, इसमें से अब तक 180 स्थाई जाति प्रमाणपत्र तैयार हो गए है। कलेक्टर ने जिले के जर्जर व मरम्मत योग्य स्कूल भवनों की समीक्षा करते हुए कहा कि अति जर्जर भवनों को ढहाने की कार्यवाही शीघ्र करें तथा मरम्मत योग्य भवनों की सूची एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें।

गिरदावरी कार्य का होगा अंतरतहसील निरीक्षण : 

कलेक्टर ने खरीफ  फसलों के गिरदावरी कार्य की समीक्षा करते हुए शुद्ध व त्रुटि रहित गिरदावरी के लिए गिरदावरी कार्य का अंतरतहसील निरीक्षण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही एसडीएम भी अपने अनुभाग के स्थान पर अन्य अनुभाग के तहसील में गिरदावरी का रैंडम जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि पटवारियों की ओर से किये जा रहे गिरदावरी शुद्ध व त्रुटि रहित होनी चाहिए। गिरदावरी में गड़बड़ी के लिए सम्बंधित तहसीलदार जिम्मेदार होंगे और उस पर कार्यवाही होगी। उन्होंने लुण्ड्रा, लखनपुर, दरिमा तहसीलदारों को गिरदावरी कार्य मे प्रगति लाने के निर्देश दिए।

कोर्ट केस में जल्द हो आदेश : 

कलेक्टर ने एसडीएम व तहसीलदार कोर्ट में लंबित प्रकरणों के तेजी से निराकरण के लिए जल्द आदेश करने के निर्देश दिए, उन्होंने कहा कि राजस्व के प्रकरणों की संवेदनशीलता के साथ निराकरण करें। आदेश पारित नहीं करने से प्रकरण लंबा चलता है, जिससे पक्षकारों का समय व धन अनावश्यक व्यय होता है। उन्होंने राजस्व अधिकारियां को निर्देशित किया है कि अगले 15 दिन में निराकरण का प्रतिशत 80 प्रतिशत तक करें। कलेक्टर ने सभी राजस्व प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाने के लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।

पंजीयन के लिए शुरू होगा सिंगल विंडो सिस्टम : 

कलेक्टर ने श्रमिकां को श्रम विभाग में पंजीयन कराने में सुविधा प्रदान करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू करने के निर्देश श्रम पदाधिकारी को दिए। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग अगले एक माह में कम से कम 30 हजार श्रमिकों का पंजीयन कराएं ताकि अधिक से अधिक श्रमिक विभाग की योजना का लाभ ले सकें। कलेक्टर ने जिले में 5 नए विद्युत उप केन्द्र के लिए जमीन आवंटन, आदिवासी विकास विभाग की ओर से आश्रम छात्रावासों के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अधिकारी व कर्मचारियों के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से निर्माण किए जा रहे ट्रांजिट हॉस्टल को भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला पंचायत सी.ई.ओ. विनय कुमार लंगेह, अपर कलेक्टर ए.एल. ध्रुव, तनुजा सलाम, सभी एस.डी.एम. तहसीलदार जनपद सी.ई.ओ. और जिला अधिकारी उपस्थित थे।

 
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राष्ट्रीय पोषण माह : आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण वाटिका का किया गया निर्माण

 कुपोषण से लड़ाई में सब्जी व फलदार पौधेें होगी सहायक

कोरबा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। गर्भवती, शिशुवती माताओं व बच्चों का स्वास्थ्य और पोषण सुनिश्चित करने के लिए जिले में सितंबर महीना राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। पोषण माह के दौरान जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण आधारित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए जन-जागरूकता का प्रसार भी किया जा रहा है। पोषण माह कार्यक्रम के तहत् पोषण वाटिका का भी निर्माण किया गया। 

इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्र में सर्वश्रेष्ठ पोषण वाटिका विकसित करने वाले केंद्र को प्रोत्साहित किया गया। जिले में कुपोषण दर कम करने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों, ग्राम पंचायतों व सामुदायिक स्थानों पर श्रेष्ठ पोषण वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। पोषण वाटिका मे लगाये गये सब्जी व फलदार पौधे कुपोषण से लड़ाई में सहायक सिद्व होंगी। पौधों से प्राप्त फल व सब्जियों का उपयोग छोटे बच्चों के मध्यान्ह भोजन में किया जाएगा। पौष्टिक भोजन के उपयोग से बच्चों और महिलाओं के कुपोषण दर में कमी आएगी। पोषण माह के दौरान अभिभावकों को पोषण आहार से संबंधित बीज व फलदार पौधे के महत्व को भी बताया जा रहा है। इस दौरान शिशु संरक्षण के प्रति महिलाओं को जागरूक करने के लिए भी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा हैं। साथ ही जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए लोगों को संकल्पित किया जा रहा है।

 
 

महिला व बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जिले के सभी एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं में आंगनबाड़ी केंद्रों एवं शालाओं में मातृ वंदना योजना व शिशु संरक्षण संबंधी गतिविधियों को आयोजित किया जा रहा है। मातृ वंदना संयुक्त कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भवती माताओ के साथ सामूहिक बैठक कर गर्भवती महिलाओं को जांच, पोषण आहार वितरण, टीकाकरण आदि गतिविधि के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। पोषण माह के दौरान जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों में जनप्रतिनिधियों, परियोजना अधिकारी, महिला पर्यवेक्षकों, आंगनबाड़ी सहायिकाओं की उपस्थिति में पोषण वाटिका, पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शन, मातृ वंदना योजना व शिशु संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक कर कुपोषण मुक्ति का संदेश दिया जा रहा है।

 
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हिंदी दिवस पर अग्रसेन महाविद्यालय प्रश्नोत्तरी का आयोजन

 कम्प्यूटर संकाय बना विजेता, पत्रकारिता संकाय उपविजेता

रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अग्रसेन महाविद्यालय, पुरानी बस्ती, में हिंदी दिवस पर प्रश्नोत्तरी स्पर्धा का आयोजन किया गया। इसमें सर्वाधिक सही उत्तर देने वाली कम्प्यूटर विभाग की टीम विजेता रही, वहीँ पत्रकारिता विभाग  की  टीम उपविजेता रही। इनके अलावा वाणिज्य और समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। स्पर्धा के प्रश्न हिंदी भाषा के शुद्ध-अशुद्ध वाक्यों के अलावा एक वचन-बहुवचन तथा लिंग भेद से सम्बंधित रहे। इनमें “तुम वापस लौट जाओ”, “गुलामी की दासता बुरी है” और “वृक्षों पर कौवा बोल रहा है”- जैसे सरल वाक्य भी रहे, जिनके उत्तर देने के लिए प्रतिभागियों को बहुत समय भी लगा। अंततः संचालकों ने इन प्रश्नों के सही उत्तर देकर छात्रों की उलझन को दूर किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के डायरेक्टर डॉ वी.के. अग्रवाल ने कहा कि हमारे मन मे अंग्रेजी के प्रति ज्यादा सम्मान होना ही, वास्तव में हिंदी को कमज़ोर बना रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत सी जटिल व्याख्या और प्रक्रिया को मातृभाषा मे आसानी से सुलझाया जा सकता है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ युलेन्द्र कुमार राजपूत ने कहा कि हिंदी का महत्व भारत के अलावा विश्व के अनेक देशों में लगातार बढ़ रहा है। इसलिए इसकी प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी। कार्यक्रम का संयोजन कम्प्यूटर संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. विकास शर्मा ने किया। वहीँ निर्णायक के रूप में प्राध्यापक-द्वय प्रो. हेमंत सहगल तथा प्रो. फरहीन बानो ने विजेता तथा उपविजेता का चयन किया। इस आयोजन में महाविद्यालय के सभी विभागों के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।

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