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अमेरिकी सेना ने ISIS प्रमुख अबू इब्राहिम अल-हाशिमी को मार गिराया

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन की तरह अब अमेरिकी सेना ने दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के सरगना अबू इब्राहिम अल हाशिमी अल कुरैशी को मार गिराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 30 नवंबर 2022 को ट्वीट कर यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि बुधवार रात मैंने अपनी सेना को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। हमारी बहादुर सेना ने आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया और ISIS नेता अबू इब्राहिम अल-हाशिमी अल-कुरैशी को मार गिराया।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी सेना ने उत्तर पश्चिमी सीरिया में आतंकवादियों के खिलाफ एक अभियान चलाया, जिसमें आतंकवादियों का सरगना मारा गया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिकों और हमारे सहयोगियों की सुरक्षा और दुनिया को एक सुरक्षित जगह बनाने के लिए सैन्य कर्मियों ने यह कार्रवाई की। उन्होंने सफल अभियान चलाने के लिए अमेरिकी सेना के जवानों की तारीफ की। कहा कि ऑपरेशन को अंजाम देकर सभी अमेरिकी सैनिक सुरक्षित लौट आए। 

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500 साल पुरानी चिट्ठी को वैज्ञानिकों ने किया डीकोड! किंग चार्ल्स पंचम ने लिखा था ये खूफिया खत

पेरिस (छत्तीसगढ़ दर्पण)।फ्रांस की क्रिप्टोग्राफर सेसिली पियरोट ने अपनी टीम के साथ मिलकर इस कोड को ब्रेक किया। 3 पन्नों की इस चिट्ठी में 70 लाइनें हैं। इसके साथ ही 120 अबूझ चिन्ह हैं, यानी वो शब्द खास तरह के कैरेक्टर से बने हैं।


फ्रांस के वैज्ञानिकों ने पूर्व रोमन सम्राट की 500 साल पुरानी चिट्ठी को डिकोड कर लिया है। 16वीं सदी के सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक किंग चार्ल्स पंचम ने फ्रांस में अपने एक दूत को यह चिट्ठी भेजी थी। 3 पन्ने की इस चिट्ठी में राजा ने अनेकों प्रकार के अबूझ चिह्नों का इस्तेमाल किया था ताकि कोई भी आसानी ने इसे पढ़ नहीं पाए। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक किंग जॉर्ज पंचम ने 1547 में फ्रांस में अपने राजदूत को खत लिखा था।

तीन साल की मेहनत के बाद हुई डिकोड
फ्रांस की क्रिप्टोग्राफर सेसिली पियरोट ने अपनी टीम के साथ मिलकर इस कोड को ब्रेक किया। उन्हें इस लेटर के बारे में तीन साल पहले अपने दोस्त की एक डिनर पार्टी में पता चला था। इसके बाद उन्होंने उसी शहर की पुरानी लाइब्रेरी के बेसमेंट में उस चिट्ठी को खोजा और उसपर शोध शुरू किया था। तीन सालों की मेहनत के बाद आखिरकार इस पहली को सुलझा लिया गया। 3 पन्नों की इस चिट्ठी में 70 लाइनें हैं। इसके साथ ही 120 अबूझ चिन्ह हैं, यानी वो शब्द खास तरह के कैरेक्टर से बने हैं।

बेहद डरकर जीता था किंग चार्ल्स
वैज्ञानिकों ने पाया कि चिह्न दो अलग प्रकार के थे। कई चिह्न एक अक्षर थे, वहीं कई चिह्न पूरा शब्द थे और कुछ ऐसे भी थे जिनका कोई काम नहीं था। डिकोड करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि चिट्ठी में किंग चार्ल्स ने अपने राजदूत से उस वक्त फ्रांस और स्पेन के बीच हुई कई लड़ाइयों और तनावों का जिक्र किया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक बेहद शक्तिशाली होने के बाद चार्ल्स पंचम डरकर जीता था।

राजा को था अपनी हत्या का डर
रिपोर्ट के मुताबिक इस चिट्ठी में उसने हत्या हो जाने की आशंका व्यक्त की थी। राजा ने चिट्ठी में लिखा है कि वे अंग्रेज और फ्रेंच विद्रोहियों की मदद पहुंचने से रोकना चाहते हैं। इसके अलावा उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि एक अफवाह फैल रही है जिसमें कहा जा रहा है कि पिएरे स्ट्रोजी उन्हें मारने की कोशिश कर रहा है जो इटैलियन हत्यारा है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इस चिट्ठी को डिकोड तो कर लिया, मगर इसके बारे में अभी तक पूरी रिपोर्ट नहीं दी है।

40 सालों तक किया यूरोप पर शासन
रोमन सम्राट और स्पेन के राजा किंग चार्ल्स पंचम ने अपने 40 से अधिक वर्षों के शासनकाल के दौरान यूरोप के एक विशाल भूभाग पर शासन किया था। इस दौरान वे अपने विश्वासपात्र मंत्रियों के सहारे ही इतने बड़े साम्राज्य को चला रहा था। वो गूढ़ भाषा में चिट्ठी लिखकर अपने मंत्रियों को संदेश पहुंचाता था। वो अपने पत्रों में किस भाषा का इस्तेमाल करता था, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इसी के तहत उसके अधिकांश चिट्ठियां आज भी एक पहेली बने हुए हैं।
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भारत के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौते की प्रतिबद्धता दोहरायी

ब्रिटेन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मुक्‍त व्‍यापार समझौते-एफटीए में अपने देश की वचनबद्धता दोहराई है, जिसमें भारत-प्रशांत क्षेत्र के साथ सम्‍बन्‍ध बढ़ाने पर विशेष ध्‍यान केन्द्रित करने के लिए भारत शामिल होगा। लॉर्ड मेयर ऑफ लंदन बैंक्‍वेट में ब्रिटेन की विदेश नीति पर कल श्री सुनक ने व्‍याख्‍यान दिया। उन्‍होंने अपनी विरासत का उल्‍लेख करते हुए विश्‍वभर में ब्रिटेन के स्‍वतंत्रता और खुलेपन के मूल्‍यों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने चीन के साथ अलग तरह से काम करने का संकल्‍प व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने कहा कि चीन ब्रिटेन के मूल्‍यों और हितों के समक्ष चुनौती बना हुआ है। श्री सुनक ने कहा कि भारत-प्रशांत 2050 तक विकास में आधे से अधिक योगदान देगा, जबकि यूरोप और उत्‍तर अमरीका दोनों, विश्‍व के विकास में एक-एक चौथाई का योगदान देंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत प्रशांत के अनुकूल पहलुओं पर विचार करते हुए ब्रिटेन ट्रांस-पेसिफिक व्‍यापार समझौते, सीपीटीपीई में शामिल हो रहा है और भारत के साथ नया मुक्‍त व्‍यापार समझौता कर रहा है और इंडोनेशिया के साथ ऐसे समझौते पर विचार कर रहा है।

श्री सुनक ने इस बात की पुष्टि की कि ब्रिटेन की विदेश नीति से सम्‍बन्धित और विवरण नए वर्ष में अद्यतन समेकित समीक्षा में शामिल होगा जिसमें राष्‍ट्रमंडल के साथ निकट सहयोग का उल्‍लेख भी होगा।

 

 

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Twitter में हो सकता है बड़ा बदलाव, 280 से बढ़कर अब इतनी हो जाएगी कैरेक्टर लिमिट, एलन मस्क ने दिया संकेत

ट्विटर पर केवल 5 फीसदी यूजर ही ट्वीट करते समय 190 कैरेक्टर से अधिक वर्ड का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, सिर्फ 12 फीसदी लोग हैं जो ट्वीट के लिए 140 से अधिक अक्षरों का इस्तेमाल करते हैं।

Twitter के नए बॉस एलन मस्क ने कंपनी में कई सारे बदलाव किए हैं। इसी कड़ी में, अब वे ट्विटर में एक और बड़े बदलाव की तैयारी में हैं जिसका संकेत उन्होंने यूजर्स को दे दिया है। लंबे समय से लोगों की मांग को स्वीकारते हुए एलन मस्क ने ट्विटर पोस्ट के लिए कैरेक्टर लिमिट बढ़ाने के संकेत दिए है।

अधिकतर यूजर कम शब्दों में ही चलाते हैं काम
वर्तमान में ट्विटर पर किसी भी पोस्ट के लिए कैरेक्टर लिमिट 280 है। शुरुआत में इसकी लिमिट 140 कैरेक्टर थी, लेकिन नवंबर 2017 में इसे बढ़ाकर 280 किया गया था। अब इस लिमिट को बढ़ाकर 1,000 कैरेक्टर किया जा सकता है। हालांकि ट्विटर कैरेक्टर लिमिट से जुड़ी एक दिलचस्प बाद ये है कि पांच साल पहले शब्द सीमा बढ़ाने के बाद भी ऐसा पाया गया है कि अभी भी 95 फीसदी लोग ट्विटर पर 190 कैरेक्टर से कम अक्षर का इस्तेमाल करते हैं।

1 फीसदी यूजर्स ही करते हैं 280 कैरेक्टर का इस्तेमाल
ट्विटर पर केवल 5 फीसदी यूजर ही ट्वीट करते समय 190 कैरेक्टर से अधिक वर्ड का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, सिर्फ 12 फीसदी लोग हैं जो ट्वीट के लिए 140 से अधिक अक्षरों का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, केवल 1 फीसदी लोग ही ऐसे हैं जो ट्वीट करते समय पूरे के पूरे 280 कैरेक्टर का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब है कि अधिकतर यूजर कम शब्दों में ही अपना ट्वीट पोस्ट करते हैं।

एलन मस्क पहले भी दे चुके हैं संकेत
Mashable की एक रिपोर्ट के मुताबिक एलन मस्क ने ट्विटर प्लेटफॉर्म के टेकओवर के बाद से ही कई बार कैरेक्टर सीमा बढ़ाने के संकेत दिए हैं। इससे पहले 27 नवंबर को एक यूजर ने एलन मस्क को 280 शब्दों से बढ़ाकर इसे 420 करने का सुझाव दिया, जिसके जवाब में एलन मस्क ने गुड आईडिया लिखा। इससे पहले 30 अक्टूबर को एक शख्स ने एलन मस्क को कैरेक्टर लिमिट से छुटकारा पाने का सुझाव दिया था। इसके जवाब में एलन मस्क ने 'बिल्कुल' लिखा था।

जल्द ही कैरेक्टर लिमिट बढ़ाने का चला सकते हैं पोल
इससे पहले, एलन मस्क ने ट्वीट कर पूछा था कि क्या ट्विटर में भूल सुधार का विकल्प जोड़ा जाना चाहिए, जिसमें ज्यादातर यूजर्स ने हां में जवाब दिया और कुछ ही समय में ट्वीट एडिट करने का विकल्प प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया। एक अन्य ट्वीट में, मस्क ने पूछा था कि क्या उन्हें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अकाउंट एक्टिवेट करना चाहिए। इसके बाद अधिकांश यूजर्स इस बात पर भी सहमत थे, जिसके बाद मस्क ने अगले दिन अकाउंट एक्टिवेट कर दिया। ऐसे में उम्मीद है जताई जा रही है कि एलन मस्क जल्द ही कैरेक्टर लिमिट में बदलाव को लेकर भी एक पोल आयोजित करेंगे, जिसमें यूजर्स की चॉइस के आधार पर फैसले लिए जाएंगे।
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चीन में, कोविड पाबंदियों का विरोध कई बड़े शहरों में फैला

 पेइचिंग (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन में कोविड के कारण लगाए गए लॉकडाउन और सख्त प्रतिबंधों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पेइचिंग और शंघाई सहित कई बड़े शहरों में फैल गए है। राष्ट्रपति षी जिनपिंग की शून्य कोविड नीति के खिलाफ सोमवार की रात सैकड़ों प्रदर्शनकारी पेइचिंग में एकत्र हुए। शंघाई में सप्ताहांत में दूसरी बार प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाये और लॉकडाउन समाप्त करने की मांग की।

चीन में सोमवार को 40 हजार से अधिक कोविड के नये मामलों की पुष्टि हुई। इस बीच, स्टेट कांउसिल ने हाल ही में घोषित शून्य कोविड नीति के 20 बिंदुओं को सही ढंग से लागू नहीं करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को दोषी ठहराया है।

 

 

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चीन में उठ रही राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग को पद से हटाने की मांग

 शिनजियांग (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन में राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग की जीरो कोविड नीति और तिब्‍बत विरोधी नीतियों को लेकर कई बार देश के अलग-अलग हिस्‍सों में विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। हाल ही में शिनजियांग प्रांत की राजधानी उरुमकी में आधी रात को जो प्रदर्शन हुआ उसकी भी वजह यही दोनों मुद्दे थे।

तिब्‍बत के विभिन्‍न क्षेत्रों में राष्‍ट्रपति शी के खिलाफ होने वाले ये विरोध प्रदर्शन इस बात का भी सबूत हैं कि तिब्‍बत में चीन से अलग होकर अपनी पहचान बनाने की चिंगारी अब भी सुलग रही है। शनिवार रात को शिनजियांग में राष्‍ट्रपति शी का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों ने जो बैनर और पोस्‍टर लिए हुए थे उन पर शी को राष्‍ट्रपति पद से हटने और जीरो कोविड नीति के चलते लगे लाकडाउन को समाप्‍त करने के स्‍लोगन लिखे थे।

 

 

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पहले पुलिस ने पीटा... फिर पहनाई हथकड़ी... अब आमने सामने हुए दो देश...

चीन में कोविड नीति के विरोध-प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहा ब्रिटिश पत्रकार गिरफ्तार

 शंघाई/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन में जीरो कोविड नीति के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गया है। इस दौरान शंघाई में जीरो कोविड नीति के खिलाफ हुए प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान पुलिस ने बीबीसी के एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया। अपने पत्रकार को गिरफ्तार किए जाने की बीबीसी ने कड़े शब्‍दों में निंदा की है। बीबीसी ने चीन के प्रशासन द्वारा पत्रकार के साथ किए जाने वाले दुर्व्‍यवहार पर भी चिंता जताई है। बीबीसी का कहना है कि उसके पत्रकार को प्रशासन ने उस वक्‍त गिरफ्तार किया जब वो शंघाई में विरोध प्रदर्शन की रिपार्टिंग कर रहा था। उसके हाथों में हथकड़ी पहनाई गई और उसके साथ बदसलूकी की गई।


आमने सामने हुए ब्रिटेन और चीन
ब्रिटेन के मंत्री ग्रांट शेप ने कहा है कि ये घटना बेहद निंदनीय है। इस पर चीन की तरफ से किसी भी बहाने को स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है। न ही चीन की माफी ही मानी जाएगी। वहीं चीन ने इस मामले में टिप्‍पणी देते हुए कहा कि पत्रकार ने अपनी पहचान को उजागर नहीं किया था। इस वजह से ये सब कुछ हो गया। चीन की तरफ से ये बयान विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने दिया है। 



बीबीसी ने इस घटना के बाबत एक बयान जारी कर इस पूरी घटना पर चिंता जताई है। बीबीसी का आरोप है कि उसके पत्रकार Ed Lawrence को रिपोर्टिंग करने से रोकने के लएि पहले लात मारी और फिर उसकी पिटाई की, बाद में उसको गिरफ्तार कर लिया गया। अपने पत्रकार के साथ हुए इस तरह के दुर्व्‍यवहार से चिंतित बीबीसी ने कहा है कि उसको पुलिस ने कई घंटों तक अपनी गिरफ्त में रखा और फिर बाद में छोड़ दिया।

माफी से काम नहीं चलेगा
बीबीसी ने कहा है कि जिनके साथ ऐसा हुआ वो एक प्रतिष्ठित संस्‍था से जुड़ा है। अपने पत्रकार के साथ हुए इस दुर्व्‍यवहार पर बीबीसी ने यहां तक कहा है कि उनके पत्रकार पर उस वक्‍त हमला किया गया जब वो अपने आधिकारिक काम को अंजाम दे रहे थे। बीबीसी ने ये भी साफ कर दिया है कि वो इस घटना के लिए किसी भी तरह की माफी या चीन की तरफ से किसी भी आधिकारिक टिप्‍पणी को नहीं मानने वाली है। ये संस्‍था इस घटना की कड़ी निंदा करती है।

कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन
अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया के मुताबिक इस बीच चीन के कई शहरों में सरकार की जीरो कोविड नीति के खिलाफ जबरदस्‍त विरोध प्रदर्शन जारी है। इन सभी में राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग को पद से हटाने की मांग की जा रही है। शिनजियांग के अपार्टमेंट में पिछले दिनों आग लगने की घटना के बाद यहां की प्रांतीय राजधानी में भी व्‍यापक स्‍तर पर इस जीरो कोविड नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस घटना में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

लोगों का भड़का गुस्‍सा
शिनजियांगा की इस घटना ने लोगों का गुस्‍सा भड़काने में मदद की है। वीडियो फुटेज में इस बात का भी दावा किया जा रहा है कि लाकडाउन की वजह से फायरफाइटर्स को आग वाली जगह पर पहुंचने में काफी देरी हुई थी। चीन के फाइनेंशियल हब कहे जाने वाले शंघाई में सैकड़ों लोगों ने इस आग में मरने वालों के प्रति श्रद्धांजलि देने के लिए कैंडल मार्च भी निकाला था।

 

 

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आतंकियों ने होटल पर किया कब्ज़ा... रुक-रुक कर हो रही गोलीबारी... 4 की मौत...

 मोगादिशु/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सोमालिया की राजधानी मोगादिशु के होटल पर आतंकियों ने कब्ज़ा कर लिया है। आतंकियों ने रविवार रात होटल पर हमला कर वहां अपना कब्जे जमा लिया है। इस दौरान 4 लोगों की मौत हो गई है।


सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति भवन के करीब स्थित विला रोज होटल (Villa Rose hotel) पर रविवार को अल कायदा से जुड़े अल शबाब के आतंकियों ने हमला किया था। इनके पास बंदूकें और विस्फोटक थे। हमला होने के बाद बचाव के लिए कुछ सरकारी अधिकारी होटल की खिड़कियों से बाहर निकले। सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया कि कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई है। आज भी  होटल में गोलियां चलने की आवाज सुनाई दे रहीं हैं। यह जानकारी होटल के करीब रहने वाले शख्स और पुलिस अधिकारी ने दी।

इस होटल में अक्सर सरकारी अधिकारी बैठकें करते हैं। होटल के करीब रहने वाले इस्माइल हाजी ने बताया, 'अभी तक होटल के अंदर भारी गोलीबारी हो रही है और हम लगातार विस्फोटों की आवाजें सुन रहे हैं। बीती रात से अब तक हम अपने घरों में हैं।'

होटल के भीतर सुरक्षाबलों व हमलावरों के बीच जारी है जंग
नाम न बताने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ' गाशान और हरमकैड (Gaashaan and Haramcad) के नाम से मशहूर स्पेशल फोर्स यूनिट ने यह ऑपरेशन अपने हाथ ले लिया।' अधिकारी ने आगे बताया, होटल के भीतर अब तक हमलावरों के साथ संघर्ष जारी है। होटल पर हमला होने के बाद वहां से कितने लोगों को सुरक्षित निकाला गया और कितने हताहत हुए हैं, इस बारे कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। मोगादिशु के सरकारी अधिकारी अधिकतर इस होटल में मीटिंग्स करते रहे हैं।

अल शबाब (Al Shabaab) सरकार पर अपना कब्जा चाहता है। कट्टरपंथी इस्लामिक कानून के आधार पर यह गुट मोगादिशु में अपनी सत्ता लागू करना चाहता है। मोगादिशु व अन्य इलाकों में इस आतंकी गुट के हमले होते रहते हैं। राष्ट्रपति हसन शेख महमूद (Hassan Sheikh Mohamud) ने इसी साल सत्ता संभाली है। उन्होंने इस गुट के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है।

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हिंद महासागर में घुसने के लिए चीन ने 19 देशों के साथ की 'सीक्रेट मीटिंग', भारत को नहीं बुलाया


Indi-China in Indian Ocean (छत्तीसगढ़ दर्पण)। हिन्द महासागर में घुसने की फिराक में लगा चीन लगातार नये नये प्लान बना रहा है और दो महीने पहले श्रीलंकन पोर्ट हंबनटोटा में जासूसी जहाज भेजने के बाद अब चीन ने 19 देशों के साथ मिलकर बड़ा प्लान तैयार किया है। 19 देशों के साथ चीन की चली इस मीटिंग का हिस्सा भारत नहीं था और इस बैठक का आयोजन चायना इंटरनेशनल डेवलपमेंट को- ऑपरेशन एजेंसी यानि CIDCA ने करवाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक चीन के युन्नान प्रांत के कुनमिंग में आयोजित किया गया था, जिसके एजेंडे में "साझा विकास" को रखा गया था, जिसमें ब्लू इकोनॉमी पर चर्चा की गई है। 

कौन-कौन से देश हुए थे शामिल
चीन में आयोजित इस बैठक में इंडोनेशिया, पाकिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव, अफगानिस्तान, ईरान, ओमान, दक्षिण अफ्रीका, केन्या, मोजाम्बिक, तंजानिया, सेशेल्स, मेडागास्कर, मॉरीशस, जिबूती और ऑस्ट्रेलिया सहित 19 देशों के प्रतिनिधि और 3 अंतरराष्ट्रीय संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे। जानकार सूत्रों के अनुसार भारत को कथित तौर पर इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था। आपको बता दें कि, पिछले साल भी चीन ने भारत की भागीदारी के बिना COVID-19 वैक्सीन सहयोग पर कुछ दक्षिण एशियाई देशों के साथ बैठक की थी। CIDCA का नेतृत्व पूर्व उप विदेश मंत्री और भारत में राजदूत रह चुके लुओ झाओहुई ने किया है जो चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी के लीडरशिप ग्रुप के सचिव भी हैं।

चीन की इस बैठक का मकसद क्या था?
CIDCA की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, संगठन का उद्देश्य विदेशी सहायता के लिए रणनीतिक दिशानिर्देश, योजना और नीतियां बनाना, प्रमुख विदेशी सहायता मुद्दों पर आपसी समन्वय करना और सलाह देना, विदेशी सहायता से जुड़े मामलों में देश के सुधारों को आगे बढ़ाना और प्रमुख कार्यक्रमों की पहचान करना और उनका कार्यान्वयन भी शामिल है। लेकिन, बैठक का असल उद्येश्य चीन को हिन्द महासागर में खुद को एक शक्ति के तौर पर प्रोजेक्ट करना है और इसके लिए उसने भारत के सभी पड़ोसियों को इस बैठक में शामिल किया था। इस साल जनवरी में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने श्रीलंका की यात्रा की थी और इसी दौरान चीनी विदेश मंत्री ने हिंद महासागर के देशों को लेकर एक मंच बनाने की शुरूआत की थी और उन्होंने श्रीलंका से इस ग्रुप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को कहा था। जाहिर है, चीन का मकदस हिंद महासागर की सबसे बड़ी शक्ति भारत को दरकिनार कर हिन्द महासागर में अपना वर्चस्व स्थापित करना है। सीआईडीसीए की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि, 21 नवंबर की बैठक में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और देशों के बीच एक समुद्री आपदा रोकथाम और शमन सहयोग तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है और चीन ने कहा है, कि वो इसके लिए आवश्यक वित्तीय, सामग्री और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।

हिन्द महासागर में घुसने की कोशिश
चीन लगातार हिंद महासागर में वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए वो बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान के साथ तेजी से रणनीतिक संबंध विकसित करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही चीन ने जिबूती में एक पूर्ण नौसैनिक अड्डा स्थापित किया है, जो देश के बाहर उसका पहला नौसैनिक बंदरगाह है। इसके साथ ही बीजिंग ने 99 साल के पट्टे पर श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह का भी अधिग्रहण किया हुआ है। वहीं, चीन ने भारत को घेरने के लिए भारत के पश्चिमी तट के विपरीत अरब सागर में पाकिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह का निर्माण किया है। वहीं, मालदीव में भी समुद्र में चीन लगातार बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है। चीनी फोरम का उद्देश्य स्पष्ट रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के मजबूत प्रभाव का मुकाबला करना है। भारत की स्थिति पहले से ही हिंद महासागर में काफी मजबूत है और भारत ने पहले ही हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) की स्थापना कर रखी है, जिसमें 23 सदस्य हैं।

भारत का IORA संगठन क्या है?
IORA संगठन का गठन साल 1997 में किया गया था और IORA साल 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा और अफ्रीकी संघ का पर्यवेक्षक बना था। IORA के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंद महासागर क्षेत्र के तटीय देशों के बीच सक्रिय सहयोग के लिए साल 2015 में "क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास" (SAGAR) का प्रस्ताव दिया है। वहीं, भारतीय नौसेना समर्थित 'हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी' (आईओएनएस) क्षेत्र की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग को बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। वहीं, जून 2020 में चीनी और भारतीय सेनाओं के बीच गलवान घाटी में झड़प के बाद से द्विपक्षीय संबंध गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। वहीं, भारत ने लगातार कहा है कि, चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता महत्वपूर्ण है।
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सोना समझकर जिस पत्थर को वर्षों तक सहेजकर रखा, वह और भी अनमोल और दुर्लभ निकला


कैनबरा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ऑस्ट्रेलिया में एक व्यक्ति को सोने की खदान से 17 किलो का एक पत्थर मिला। उसपर सुनहरे रंग की मौजूदगी की वजह से उसे जरा भी संदेह नहीं था कि वह सोना नहीं है। उसे अपने हाथ सोने का खजाना लगने का अनुभव हो रहा था। लेकिन, वर्षों गुजर गए, वह उस चट्टान के टुकड़े को तोड़ नहीं पाया। उससे जितना भी जतन हो सकता था, सब किया लेकिन पत्थर नहीं तोड़ पाया। वर्षों बाद वह मायूस होकर उस टुकड़े को म्यूजियम वालों को देने पहुंचा। वहां मौजूद जियोलॉजिस्ट उसकी पड़ताल में जुटे। प्रोफेशनल तरीके से उसपर रिसर्च करना शुरू किया। अंत में पता चल गया कि वह चीज है क्या ? वह सोने से कहीं ज्यादा मूल्यवान चीज निकली, जो तीसरी दुनिया से धरती पर पहुंची है।

पत्थर से सोना निकालने की कोशिश में जुटा था शख्स
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के पास 2015 में डेविन होल नाम के एक शख्स अपने खोजी अभियान में लगे हुए थे। घटना मैरीबोरो रीजनल पार्क की है। वहां पर उन्हें एक असामान्य सा पत्थरनुमा कोई चीज दिखी। इस काम के लिए वह मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल करते थे। उन्हें वहां एक बड़ा लाल रंग का पत्थर जैसा कुछ मिला था, जिसपर पीले रंग जैसा कुछ फैला हुआ था। मैरीबोरो ऑस्ट्रेलिया की वह जगह है, जहां सोने की खदान है। 19वीं सदी में यहां खोने की खूब खुदाई होती थी। इसलिए उन्हें विश्वास हो गया कि यह पत्थर असल में सोना ही है। सोना निकालने के लिए वह तभी से इसे तोड़ने की कोशिशों में जुट गए।

अनमोल और दुर्लभ उल्का पिंड मिला
उन्होंने पार्क से मिले चट्टान के टुकड़े को आरी से काटना चाहा, ड्रिल करने की कोशिश की और यहां तक कि एसिड में भी डुबो दिया। लेकिन, उन्हें सफलता नहीं मिली। क्योंकि, वह गलत थे। उन्हें जो चीज मिली थी, वह इस दुनिया से बाहर की चीज थी। खैर, वर्षों बाद होल उस पत्थर की पहचान के लिए उसे मेलबर्न म्यूजियम लेकर पहुंचे। वहां उन्हें मालूम पड़ा कि वह जिस पत्थर से सोना निकालने के फिराक में थे, वह दरअसल उससे भी अनमोल और दुर्लभ चीज है। वह सोना नहीं, उससे भी मूल्यवान उल्का पिंड है। क्योंकि, उसमें जो तत्व मौजूद हैं, वह धरती पर नहीं मिलते।

460 करोड़ साल पुराना है उल्का पिंड
म्यूजियम के एक जियोलॉजिस्ट डर्मोट हेनरी ने दावा किया कि उनके 37 साल के कार्यकाल में उन्हें सिर्फ दो ही असली उल्का पिंड हाथ लगे हैं, जिसमें से एक होल लेकर पहुंचे थे। 460 करोड़ साल पुराने इस उल्का पिंड को मैरीबोरो नाम दिया गया, क्योंकि यह उसी स्थान से मिला था। इस खोज के बारे में शोधकर्ताओं ने एक वैज्ञानिक शोध प्रकाशित की है। शोधकर्ताओं ने इस उल्का पिंड की बनावट के बारे में जानने के लिए हीरे की आरी का इस्तेमाल किया। इसके पतले टुकड़े निकाले। मैरीबोरो एक विशाल एच5 ऑर्डिनरी क्रोंड्राइट (chondrite) है, जिसका वजन 17 किलो ग्राम है। इसकी परत निकालने पर धात्विक खनीजों के छोटे-छोटे क्रिस्टल ड्रॉप कोंडरुल्स (chondrules) दिखते हैं। इसमें लोहा भी है।

उल्का पिंड आकाशगंगा को समझने का जरिया- वैज्ञानिक
हेनरी के मुताबिक उल्का पिंड अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में रिसर्च करने के सबसे सस्ते साधन हैं। उनका दावा है कि कुछ उल्का पिंड हमें हमारे सोलर सिस्टम से भी पुराने अंतरिक्ष की जानकारी देते हैं। यह बता सकते हैं कि तारे कैसे पैदा हुए और कैसे उनका विकास होता है। एक्सपर्ट का मानना है कि मैरीबोरो उल्का पिंड का मूल्य सोने से कहीं ज्यादा हो सकता है, क्योंकि यह बहुत ही ज्यादा दुर्लभ है। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में अबतक सिर्फ 17 उल्का पिंड मिले हैं, जिसमें से यह दूसरा सबसे बड़ा क्रोंड्राइट का टुकड़ा है। 2003 में एक और उल्का पिंड मिला था, वह 55 किलोग्राम का था।

इस उल्का पिंड पर और शोध की आवश्यकता
डर्मोट के मुताबिक उल्का पिंडों में कई बार जीवन के संकेत छिपे होते हैं, जो अमीनो एसिड के रूप में होते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक अभी तक यह जानकारी नहीं जुटा पाए हैं कि मैरीबोरो उल्का पिंड आकाशगंगा के किस क्षेत्र से धरती पर आया है। वैसे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह बृहस्पति और मंगल के बीच चक्कर काट रहे उल्का पिंडों के किसी समूह से छिटक कर धरती पर आ गिरा हो। लेकिन, इसकी पुष्टि के लिए अभी बहुत ज्यादा रिसर्च की आवश्यकता है।
 
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एलन मस्क ने ट्रम्प का ट्विटर अकाउंट बहाल किया

 वॉशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ट्विटर अकाउंट बहाल कर दिया गया है। ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने ट्रंप की वापसी से जुड़ा एक पोल ट्विटर पर कराया। इस पोल में ज्यादातर लोगों ने कहा है कि ट्रंप का ट्विटर अकाउंट बहाल किया जाए। 6 जनवरी 2021 को अमेरिका के कैपिटल हिल पर डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने हमला किया था।

ऐसा तब हुआ था जब अमेरिका में चुनाव के परिणाम आ गए थे और जो बाइडन को बहुमत मिला था। लेकिन ट्रंप लगातार चुनावों में धांधली की बात करते रहे। एलन मस्क ने एक पोल ट्विटर पर डाला और लिखा, पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को बहाल करें? इसके साथ उन्होंने हां और न का विकल्प भी रखा। एलन मस्क ने पोल रिजल्ट की घोषणा करते हुए खाते की बहाली का ऐलान किया। एलन मस्क ने बताया कि 51.8 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया है और ट्रंप के अकाउंट बहाली का समर्थन किया है।

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बेट्सी शावेज बनी पेरू की नई प्रधानमंत्री

 लीमा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पेरू के राष्ट्रपति प्रेडो कैस्टिलो ने एनीबल टोरेस की जगह बेट्सी शावेज को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। टोरेस ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया था। रिपोर्ट के अनुसार पूर्व में संस्कृति मंत्री और श्रम और रोजगार प्रोत्साहन मंत्री के रूप में काम कर चुकी शावेज को शुक्रवार को राजधानी लीमा के गवर्नमेंट पैलेस में आयोजित एक समारोह के दौरान शपथ दिलाई गई।

टोरेस के इस्तीफे से उत्पन्न कार्यकारी और विधायी शाखाओं के बीच नए तनाव के बीच वह प्रधान मंत्री बनीं, जिन्होंने विधायिका द्वारा एक विधेयक के अनुमोदन के लिए विश्वास मत के उनके अनुरोध को अस्वीकार करने के बाद पद छोड़ दिया था।

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स्वीडनः ग्रेटा थनबर्ग ने अपने ही देश के खिलाफ ठोक दिया केस, जानें क्या है मामला

 

स्वीडन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। स्वीडन की चर्चित क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने अपने ही देश के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया है। थनबर्ग ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय करने में विफल रहने के लिए स्वीडन के खिलाफ एक क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया है। स्वीडन के खिलाफ यह कड़ा रुख अख्तियार करने में ग्रेटा थनबर्ग का सहयोग 600 बच्चे और युवा कर रहे हैं। यह मुकदमा जलवायु से जुड़ी कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2019 में सुनाया था अहम फैसला
स्टॉकहोम में शुक्रवार को दायर मुकदमे में ग्रुप ने अदालत से अपील की है कि सरकार पेरिस समझौते के लक्ष्यों के मुताबिक ही ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बनाए रखने के लिए वैश्विक उपाय करे। स्वीडन में जलवायु से जुड़ा यह मामला नीदरलैंड के उस हाई-प्रोफाइल केस के बाद आया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने साल 2019 में फैसला सुनाया था कि ये सरकार का कानूनी दायित्व है कि वह ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए उचित कदम उठाए।

'स्वीडन की नीतियां जलवायु कानूनों के खिलाफ'
मुकदमा दायर करने वाले इस ग्रुप का दावा है कि स्वीडन की जलवायु नीतियां न सिर्फ देश के संविधान का उल्लंघन करती हैं बल्कि मानवाधिकारों पर यूरोपीय सम्मेलन की भी तौहीन भी करती है। समूह ने एक बयान में कहा, "स्वीडन वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अच्छा वातावरण देने और बेहतर विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक चीजों को पूरा करने में विफल रहा है।"

क्लाइमेट लॉ अपना चुका है स्वीडन
बतादें कि स्वीडन ने वर्ष 2017 में एक 'क्लाइमेट लॉ' यानी जलवायु कानून को अपनाया था। इस कानून के मुताबिक स्वीडन को 2045 तक के लिए सेट किए नेट-जीरो कार्बन एमिशन टारगेट हासिल करने के लिए, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए काम करना है। इक्कीसवीं शताब्दी के खत्म होने तक ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के 2015 के पेरिस समझौते के टारगेट को पूरा करने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करना बेहद जरूरी है।

रूस-यूक्रेन के बाद स्थितियां बदली
हालांकि, फरवरी में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से स्थितियां बदल चुकी हैं। यूरोपीय देशों ने ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक हाथापाई शुरू कर दी है, जिससे जलवायु संबंधी सारे प्रयास अब पीछे छूट चुके हैं। फिलहाल स्वीडन में पहली बार उल्फ क्रिस्टर्सन के नेतृत्व में एक दक्षिणपंथी सरकार बनी है। नई सरकार की नीतियों से भी जाहिर होता है कि वह जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों को लेकर गंभीर नहीं है।

बेहतर परिणाम हासिल नहीं कर पाई COP27
इस साल मिस्र में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित हुई जलवायु वार्ता भी कोई खास मुकाम हासिल करने में असफल साबित हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेटा थनबर्ग ने कहा कि जलवायु कानूनों को और अधिक सख्त किए जाने की जरुरत है। ग्रेटा ने कहा कि हमारे पास ऐसे कानून बिल्कुल नहीं हैं, जो जलवायु और पर्यावरण से आने वाले खतरों के परिणामों से लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान कर सकें। हालांकि जो हम कर सकते हैं, उन्हें करना जारी रखना चाहिए।
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मलेशिया में विपक्ष के नेता अनवर इब्राहिम बने नए प्रधानमंत्री

 मलेशिया (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मलेशिया में विपक्ष के नेता अनवर इब्राहिम ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। शाह अल-सुल्तान अब्दुल्ला ने उन्हें प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया। देश में हाल में सम्पन्न संसदीय चुनाव में श्री अनवर और उनके प्रतिद्वंदी पूर्व प्रधानमंत्री मुहीदीन यासिन में से किसी को भी सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं मिला। कई संविधान विशेषज्ञों से विचार विमर्श के बाद शाह अब्दुल्ला ने 75 वर्षीय अनवर इब्राहिम अब्दुल्ला को देश के 10वें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया।

 


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चीन ने 10 जगहों पर हड़पी नेपाली जमीन, हिंदुओं को मंदिर जाने पर भी लगाई रोक-रिपोर्ट


काठमांडू (छत्तीसगढ़ दर्पण)। China Nepal land grab: नेपाल की पिछली कम्युनिस्ट सरकार पूरी तरह से चीन की गोद में बैठी थी, जिसके नतीजे अब सामने आ रहे हैं। नेपाल सरकार की एक सर्वे रिपोर्ट से पता चलता है कि चीन एक-दो नहीं कम से कम 10 जगहों पर उसकी जमीन को अपनी सीमा में मिला चुका है। रिपोर्ट में यह तक बताया जा रहा है कि कुछ इलाकों में तो चीन इतनी दादागीरी पर उतर आया है कि हिंदुओं और बौद्धों को मंदिरों तक जाने से भी रोक रहा है। लेकिन, हैरानी की बात है कि नेपाल की तमाम सरकारें इस मसले पर संदिग्ध चुप्पी साधे रही हैं और चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार अपने खौफनाक इरादों को अंजाम देने में जुटी हुई है।

चीन ने नेपाल की 36 हेक्टेयर जमीन पर किया कब्जा- रिपोर्ट
चीन ने सलामी स्लाइिसिंग की अपनी रणनीति पर चलते हुए नेपाल की उत्तरी सीमा पर बहुत बड़ा खेल कर दिया है। चीन ने नेपाल के उत्तरी बॉर्डर पर कम से कम 10 स्थानों पर नेपाली जमीन पर कब्जा कर लिया है। नेपाली कृषि मंत्रालय की ओर से जारी सर्वे दस्तावेजों के मुताबिक चीन 36 हेक्टेयर नेपाली जमीन को अपने हिस्से में मिला चुका है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने विभिन्न माध्यमों से जो जानकारी उपलब्ध की है, उसके मुताबिक नेपाली गृह मंत्रालय भी अब इस नतीजे पर पहुंचा है कि सीमा मुद्दे को नेपाल की 'स्टेट पॉलिसी' के रूप में आवश्यक तौर पर शामिल करना होगा। शायद चीन नेपाल के साथ अचानक से इस तरह की साजिशें नहीं कर रहा है, लेकिन पता नहीं नेपाल के लोग अबतक इस समस्या की भयानकता को समझने में देर करते रहे हैं।


चीन लगातार नेपाल की जमीन पर कर रहा है कब्जा-रिपोर्ट
2016 में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) ने नेपाल के एक जिले में घुसकर पशुपालन के लिए पशु चिकित्सा केंद्र तक बना लिया था, लेकिन तब नेपाल ने उसका माकूल जवाब नहीं दिया। 2022 के फरवरी में एक यूके स्थित मीडिया की रिपोर्ट थी कि उलटे चीन ने नेपाल पर साझा सीमा वाले क्षेत्र में अतिक्रिमण करने का आरोप लगा दिया था। आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने नेपाल के पश्चिमी जिले हुमला में बॉर्डर पोस्ट के आसपास नहरें और सड़कें बनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने लालुंग्जोंग सीमा इलाके में सर्विलांस की गतिविधियां भी बढ़ा रखी हैं।

हिंदुओं और बौद्धों को मंदिर जाने से रोक रहा है चीन- रिपोर्ट
एक चौंकाने वाला खुलासा तो ये हुआ है कि चीन अब नेपाल की सीमावर्ती इलाकों में ना सिर्फ किसानों को मवेशी चराने से रोक रहा है, बल्कि बॉर्डर पर स्थित हिंदू और बौद्ध मंदिरों तक भी नहीं पहुंचने दे रहा है। नेपाल पर चीन के बढ़ते प्रकोप का अंदाजा इसी से लग जाता है कि उसके 15 जिलों में से सात से ज्यादा किसी ना किसी वजह से चीन की ओर से हो रहे जमीन अतिक्रमण से पीड़ित हैं। इन जिलों में दोलखा, गोरखा, दारचुला, हुमला, सिंधुपालचौक, संखुवासा और रसुवा जिले शामिल हैं। नेपाल के रुई गांव पर चीनी कब्जे की खबर एक बार खूब सुर्खियां बनी थी और पता चला था कि ड्रैगन अपनी सलामी स्लाइसिंग नीति को कैसे अंजाम देने में लगा रहा है। हुमला में 2020 के सितंबर में तो उसने स्थायी निर्माण भी खड़े कर दिए थे। पता चला था कि चीन ने चोरी से सीमा निर्धारिण के लिए बने पिलर हटा दिए थे। तब नेपाल में चीन समर्थक कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार थी।

नेपाल की 150 हेक्टेयर जमीन पर चीन का कब्जा- ब्रिटिश मीडिया
हालांकि, ऐसा नहीं है कि चीन नेपाल में अपनी सलामी स्लाइसिंग नीति को पिछले दो-तीन वर्षों से अंजाम देने लगा है। चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार इस गोरखधंधे में वर्षों से लगी हुई है। 2009 में चीन की सेना के जवान 'एक खुले इलाके में घुस गए थे और वेटनरी सेंटर' बना लिया था। हिमालयन टाइम्स के मुताबिक 2017 का कृषि विभाग का एक दस्तावेज बताता है कि 'चीन ने उत्तरी सीमा पर 10 स्थानों पर नेपाल के 36 हेक्टेयर पर अतिक्रमण किया है।' वैसे 2020 में एक ब्रिटिश अखबार ने अपनी जांच में पाया था कि चीन हुमला समेत नेपाल के पांच जिलों में 150 हेक्टेयर नेपाली जमीन हड़प चुका है।

चीन की सलामी स्लाइसिंग पर नेपाली नेताओं की चुप्पी की वजह ?
हुमला के सांसद चक्का बहादुर लामा ने भी चीन की कारगुजारियों पर चिंता जताई थी और सितंबर 2020 में काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के बाहर उसकी जमीन हड़पने की नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुआ था। वैसे रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा तो करते हैं कि नेपाल का विदेश मंत्रालय इन मुद्दों को चीन के सामने उठा चुका है, लेकिन आम धारणा यही है कि नेपाल कूटनीतिक तौर पर इस विषय पर शांत है। मीडिया दबाली के मुताबिक यह चुप्पी सिर्फ चीन की पिछलग्गू कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने ही नहीं साधी है, बल्कि निवर्तमान नेपाली कांग्रेस का भी इस मामले में ऐसा ही रवैया है।

चीन बन चुका है नेपाल के लिए बड़ा खतरा ?
मीडिया दबाली के मुताबिक, 'वास्तविक नियंत्रण हासिल करना' और सीमा पर अपना कंट्रोल बढ़ाना। नेपाल में चीन की घुसपैठ, पड़ोसी भूटान और भारतीय क्षेत्र में चाइनीज अतिक्रमण के बॉर्डर पैटर्न में फिट बैठती है।' यानि सीमा पर चीन की गतिविधियां नेपाल के लिए खतरा बन चुकी है और यह बात नेपाल की सत्ता में बैठे नेताओं की समझ में जितनी जल्दी आ जाए, उसी में वहां की जनता की भलाई है। क्योंकि, इससे ना सिर्फ नेपाल का क्षेत्र उसके हाथ से निकलता जा रहा है, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर भी चोट पहुंचाई जा रही है। (कुछ तस्वीरें सांकेतिक और फाइल)
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आसिम मुनीर होंगे पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख

 इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पाकिस्तान में नए आर्मी चीफ के नाम का एलान हो गया है। ले. जनरल सैयद आसिम मुनीर पाकिस्तान के नए आर्मी चीफ होंगे। आसिम मुनीर जनरल कमर जावेद बाजवा की जगह लेंगे। पाक पीएम शहबाज शरीफ ने आसिम मुनीर के नाम की घोषणा की है। पाकिस्तान की सूचना एवं प्रसारण मंत्री मरियम औरंगजेब ने इसकी पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि पीएम शहबाज शरीफ ने लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ और लेफ्टिनेंट जनरल सैयद आसिम मुनीर को थल सेनाध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला किया है। सूचना मंत्री ने ट्विटर पर लिखा कि मुनीर को देश की शक्तिशाली सेना का नया प्रमुख बनाया गया है। उन्होंने बताया कि मुनीर निवर्तमान जनरल कमर जावेद बाजवा से पदभार ग्रहण करेंगे।

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रूस ने तुर्की को चेता दिया, कहा- भूल से भी मत करना सीरिया पर हमला, जानिए क्यों शुरू हुआ ये विवाद


मॉस्को (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस ने तुर्की से सीरिया में जमीनी हमले से बचने के लिए कहा है। वरिष्ठ रूसी वार्ताकार अलेक्जेंडर लावेरेंटयेव ने बुधवार को कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां हिंसा को बढ़ा सकती हैं। बतादें कि तुर्की ने पिछले दिनों सीरिया पर कई हमलें किए थे जो रूस को पसंद नहीं आई हैं। सीरिया, रूस का बेहद करीबी साथी रहा है। ऐसे में रूस ने तुर्की को चेतावनी दे दी है कि वह सीरिया पर हमले करना बंद कर दे। इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने कहा था कि अंकारा जल्द ही टैंकों और सैनिकों के साथ सीरिया में कुर्द आतंकवादियों पर हमला करेगा।

दोनों तरफ से हुए हवाई हमले
गौरतलब है कि तुर्की के इस्तांबुल के तक्सीम स्कॉयर में हुए इस धमाके में कुल 6 लोगों की मौत हो गई थी और 81 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। तुर्की ने इस धमाके के लिए कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) को जिम्मेदार ठहराया था। इसका बदला लेने के लिए 20 नवंबर को तुर्की ने सीरिया और इराक के उत्तरी इलाकों में एयरस्ट्राइक कर दिया था जिसमें कुल 31 लोग मारे गये थे और कई घायल हो गये थे। इसके बाद फिर सीरिया के उत्तरी इलाके से इसका जवाब आया। तुर्की की सीमा में रॉकेट दाग दिया गया, जिसमें 3 लोग घायल हो गए।

सीरिया को लेकर रूस और तुर्की के संबंधों में कड़वाहट
दोनों देशों के बीच फिर से शुरू हो गए हमले को लेकर अब रूस की प्रतिक्रिया आई है। आपको बता दें कि तुर्की यूं तो नाटो का सदस्य है लेकिन वह रूस के अधिक करीबी है। रूस और तुर्की के बीच पुतिन युग में संबंध दिन प्रतिदिन गहरे होते चले गए हैं। लेकिन सीरिया मुद्दे पर दोनों देशों के संबंध बंटे हुए हैं। तुर्की अपने यहां पर मौजूद कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) को एक आतंकी संगठन मानता है और उसका मानना है कि सीरिया में लड़ रहा YPG इसी की शाखा है, जिसे वो समाप्त करना चाहता है।

PKK को अमेरिका भी मानता है आतंकी संगठन
PKK को अमेरिका भी आतंकी संगठन मानता है लेकिन YPG कुर्द मिलिशिया के नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF) से अमेरिका का गठबंधन है क्योंकि इस संगठन की मदद से अमेरिका ISIS पर लगाम लगाने में कामयाब हुआ है। इसे लेकर अमेरिका और तुर्की के बीच संबंधों में गहरी दरार पैदा हो चुकी है। बुधवार को कजाकिस्तान में तुर्की और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के साथ सीरिया वार्ता के नए दौर के बाद लावेंटयेव ने कहा, "हमें उम्मीद है कि अंकारा में हमारी दलीलें सुनी जाएंगी और वहां समस्या को हल करने के अन्य तरीके खोजे जाएंगे।"

अमेरिका के बिना कुर्द मसले का होगा हल
लवरेंटयेव ने कहा, "अमेरिकी उपस्थिति के बिना, कुर्द मुद्दे को बहुत जल्दी हल किया जा सकता था। रूस, तुर्की और ईरान ने वार्ता के बाद एक संयुक्त बयान में सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कम करने और सीमा पार हमलों और घुसपैठ सहित पड़ोसी देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के उद्देश्य से अलगाववादी योजनाओं का विरोध करने का संकल्प लिया। लवरेंटयेव ने कहा कि पक्षों ने एक पर्यवेक्षक के रूप में चीन को आगे की अस्ताना वार्ता में शामिल करने पर चर्चा की है, एक ऐसा विचार जिस पर ईरान सहमत हो गया है, जबकि तुर्की अभी भी इस पर विचार कर रहा है। बता दें कि साल 2017 में रूस, ईरान और तुर्की ने अस्ताना प्रक्रिया के तहत राजनीतिक बातचीत शुरू की थी।
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कोरोना पाबंदियों के चलते फूटा कर्मचारियों का आक्रोश, आईफोन फैक्ट्री में उग्र प्रदर्शन...

 बीजिंग/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन में एक बार फिर कोरोना का मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है, जिसके चलते कई स्थानों में लॉकडाउन की स्थिति निर्मित हो गई है। इस दौरान यहां स्थित दुनिया की सबसे बड़ी आईफोन फैक्ट्री में कर्मचारियों द्वारा उग्र प्रदर्शन की खबर आ रही है। सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री में कोरोना तालाबंदी और वेतन विवाद को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है। इसे लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। सुरक्षाबलों के साथ संघर्ष में कई श्रमिकों के घायल होने की बात कही जा रही है।



चीन में एप्पल आईफोन की असेंबलिंग वाले झेंगझोऊ फैक्ट्री में बुधवार को फिर से उपद्रव शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कर्मचारियों और प्रशासन के बीच होने वाली झड़पों को देखा जा सकता है। एप्पल आईफोन फैक्ट्री के कई कर्मचारियों को कोरोना वायरस प्रतिबंधों के बीच शुरू हुए अनुबंध विवादों के कारण पीटा गया और बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

सैकड़ों कर्मचारियों का फैक्ट्री के सुरक्षा कर्मियों के साथ संघर्ष हुआ। कोरोना के चलते करीब एक माह से फैक्ट्री में कठोर पाबंदियों व वेतन को लेकर विवाद के कारण श्रमिकों के भड़क उठने की खबर है। एपल संयंत्र में अक्तूबर से तनाव देखा जा रहा था। कोरोना पाबंदियों के चलते तालाबंदी शुरू होने से श्रमिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा था। आईफोन सिटी में 2,00,000 से अधिक श्रमिकों में से कई को आइसोलेट किया जा चुका था। उन्हें भोजन व दवाओं की मुश्किल हो रही थी।

 



सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार फॉक्सकॉन प्लांट के कर्मचारी फैक्ट्री से  बाहर निकल आए। इसके बाद उनकी सुरक्षा कर्मियों से झड़प हुई। एक अन्य वीडियो में गार्ड जमीन पर लेटे एक श्रमिक को लाठियों से पीटते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान लड़ो, लड़ो के नारे गूंजते हैं। श्रमिकों की भीड़ बैरिकेड्स लांघते हुए प्रदर्शन करते नजर आए। पुलिस के साथ भी श्रमिकों की तकरार हुई।  एक वीडियो में उग्र श्रमिक एक प्रबंधक को घेरे हुए नजर आए। एक श्रमिक ने कहा कि सभी श्रमिकों के कोविड पॉजिटिव होने का खतरा है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि आप हमें मौत के मुंह में भेज रहे हैं।

सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में कहा गया है कि एप्पल के ये कर्मचारी अनुबंध तोड़ने का विरोध कर रहे थे। चीन में इन दिनों कोरोना के मामले फिर से बढ़ रहे हैं। इसको देखते हुए फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों के सामने संकट गहरा गया है। उन्हें फैक्टरी से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। उन्हें खाने-पीने के सामान और दवाईयों मिलने में दिक्कत हो रही है।

एप्पल आईफोन असेम्ब्लिंग फैक्ट्री की संचालक फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप ने पहले कहा था कि वो 'क्लोज्ड-लूप मैनेजमेंट' सिस्टम का उपयोग कर रही है। इसके तहत कार्यस्थल पर रहने वाले कर्मचारियों को कड़ी सुरक्षा घेरे में बिना किसी बाहरी संपर्क रखा जाता है। पिछले महीने हजारों कर्मचारियों ने अपर्याप्त सुरक्षा और बीमार पड़ने वाले सहकर्मियों को उचित मेडिकल हेल्प न मिलने की शिकायतों पर वाक-आउट किया था।

एप्पल दे चुका है चेतावनी
एप्पल इंक ने पहले चेतावनी दी थी कि झेंगझोऊ कारखाने पर लगाए गए रोग नियंत्रण प्रतिबंधों के कारण उसके नए आईफोन 14 मॉडल की डिलीवरी में देरी होगी। बता दें कि सरकार ने कारखाने के चारों ओर औद्योगिक क्षेत्र तक आवागमन को रोक दिया है। फॉक्सकॉन ने कहा है कि इस कारखाने में लगभग 200,000 लोग कार्यरत हैं।

फॉक्सकॉन ने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मीडिया रिपोर्टों में पहले कहा गया था कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से फॉक्सकॉन के उन कर्मचारियों को वापस बुलाने के लिए कहा था, जो कंपनी छोड़कर चले गए थे।

आपको बता दें कि Zhengzhou की iPhone फैक्ट्री में दीवार फांदकर भाग रहे कर्मचारियों का वीडियो पहले भी वायरल हो चुका है। चीन में Covid Lockdown की दहशत के कारण पहले भी एप्पल आईफोन बनाने वाली फॉक्सकॉन फैक्ट्री में काम कर रहे कर्मचारी फैक्ट्री छोड़कर भागने की कोशिश कर चुके हैं। तब वर्कर्स ने आरोप लगाया था कि उन्हें खाने-पीने की दिक्कत हो रही है।

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