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भारत के आध्यात्मिक नेता ने अमेरिका में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की शुरुआत की

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय आध्यात्मिक नेता स्वामी अवधेशानंद गिरि ने भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय-अमेरिकी समुदाय द्वारा आयोजित ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोहों की शुरुआत की। जूना अखाड़े के प्रमुख अवधेशानंद ने ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन’ (एफआईए) के पदाधिकारियों की उपस्थिति में शनिवार को समारोहों के एक पोस्टर का अनावरण किया और इस प्रयास के लिए भारतीय-अमेरिकी समुदाय को बधाई दी।

अनावरण का आयोजन न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में समुदाय के नेता प्रेम भंडारी के आवास पर किया गया। इसमें एफआईए के अध्यक्ष केनी देसाई, अध्यक्ष अंकुर वैद्य और एफआईए के पूर्व अध्यक्ष आलोक कुमार शामिल हुए। भंडारी ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोहों के लिए एफआईए के संयोजक हैं।

वैद्य ने वर्तमान में ‘टाइम्स स्क्वायर’ में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह का नेतृत्व करने के लिए अमेरिका आए अवधेशानंद को बताया कि एफआईए और उसके स्वयंसेवक एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए अगस्त में न्यूयॉर्क में 2,000 ‘डमरू’ बजाएंगे। उन्होंने बताया कि बाहर आयोजित (आउटडोर) किसी कार्यक्रम में सबसे अधिक झंडे फहराने का वर्तमान गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया सरकार के पास है और एफआईए इस रिकॉर्ड को भी तोड़ने की तैयारी कर रहा हैं।

उन्होंने बताया कि समारोहों के दौरान स्वयंसेवक 190 फुट लंबा तिरंगा फहराएंगे। यही झंडा ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष्य में 15 अगस्त को मैनहट्टन हवाई क्षेत्र में और उसके आसपास एक विमान के पीछे फहराया जाएगा। अवधेशानंद ने कहा कि मैनहट्टन के हवाई क्षेत्र में इस तरह तिरंगा फहराना न केवल प्रतीकात्मकता है, बल्कि दुनिया में भारत की स्थिति को लेकर यहां भारतीय प्रवासियों के विश्वास को भी दर्शाता है।

वैद्य ने यह भी बताया कि एफआईए मैनहट्टन में 43वीं वार्षिक भारत दिवस परेड के दौरान अयोध्या राम मंदिर विषय पर आधारित 50 फुट लंबी नौका प्रदर्शित करने की तैयारी कर रहा है।
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एक बार फिर भारत का दौरा करना चाहूंगा : जो बाइडन

वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन शुक्रवार को भारत के साथ रिश्ते को लेकर खुलकर बोले। जो बाइडन ने कहा कि उनके भारत के साथ बहुत ही अच्छे संबंध हैं और इसलिए उन्होंने दो बार भारत की यात्रा भी की है। उन्होंने कहा कि अगर दोबारा मौका मिलता है तो वे फिर से भारत जाना चाहेंगे। जो बाइडन अपने गृह राज्य डेलावेयर रवाना होने से पहले संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि मैं दो बार भारत जा चुका हूं और फिर से जाऊंगा। बाइडन ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों की भी सराहना की।


भारत के रूस के साथ संबंध पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब
वहीं अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि रूस के साथ भारत के संबंध कई दशकों में विकसित हुए हैं। प्राइस ने कहा कि यह दशकों के दौरान विकसित हुआ है, जब अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं था या भारत सरकार के लिए पसंद का भागीदार नहीं बन पाया था। उन्होंने कहा कि लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं। भारत के साथ संबंध एक द्विदलीय परंपरा की विरासत है जो अब दो दशकों से अधिक समय से चली आ रही है।

क्लिंटन के समय से भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते में हुआ सुधार: नेड प्राइस
नेड प्राइस ने कहा कि दोनों देशों का संबंध वास्तव में पूर्व राष्ट्रपति (बिल) क्लिंटन प्रशासन के साथ बढ़ना शुरू हुआ, निश्चित रूप से पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन में भारत के साथ अमेरिका की साझेदारी बढ़ी और वह भारत के लिए पसंद का भागीदार बनने का इच्छुक हुआ, जिसमें सुरक्षा क्षेत्र की बात भी शामिल है।
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23 जून 2022 को पेइचिंग में होगा 14वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

पेइचिंग (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन 23 जून से चीन की राजधानी पेइचिंग में आयोजित किया जाएगा। वर्चुअल माध्‍यम से आयोजित इस 14वें सम्‍मेलन की मेजबानी राष्‍ट्रपति षी जिनपिंग करेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता हुआ छुंग युंग ने आज इसकी घोषणा की। विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार 22 जून को राष्‍ट्रपति षी जिनपिंग ब्रिक्‍स व्‍यापार फोरम के उद्घाटन समारोह में मुख्‍य भाषण देंगे।

ब्रिक्‍स देशों की अध्‍यक्षता इस समय चीन के पास है। राष्‍ट्रपति जिनपिंग 24 जून को पेइचिंग में वैश्विक घटनाक्रम पर उच्‍चस्‍तरीय संवाद करेंगे। संवाद में ब्रिक्‍स नेताओं और बाजार से जुडे पक्षकार तथा विकासशील देशों के प्रतिनिधि हिस्‍सा लेंगे।
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गुरूद्वारे में आतंकी हमला : कई हताहत, मौके पर पहुंचे तालिबानी लड़ाके…

काबुल/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बंदूकधारियों द्वारा गुरुद्वारे में ताबड़तोड़ फायरिंग की खबर सामने आ रही है। इस घटना में कम से कम 25 लोगों के हताहत होने की आशंका है। स्थानीय सूत्रों ने गुरुद्वारा अध्यक्ष गुरनाम सिंह के हवाले से यह जानकारी दी है। गुरनाम सिंह ने बताया है कि बंदूकधारियों ने अचानक गुरुद्वारे पर धावा बोला और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे। कुछ लोग जान बचाने के लिए इमारत की दूसरी तरफ छिपे हुए हैं। वहीं कम से कम 25 लोग गुरुद्वारा के अंदर फंस गए हैं। ताजा जानकारी के अनुसार अभी भी गुरुद्वारा के अंदर दो हमलावर मौजूद हैं।

परिसर के अंदर दो विस्फोट
रिपोर्ट के अनुसार परिसर के अंदर दो विस्फोट हुए और गुरुद्वारा से सटी कुछ दुकानों में आग लग गई। माना जा रहा है कि कम से कम 2 हमलावर गुरुद्वारा परिसर के अंदर हैं और तालिबानी लड़ाके उन्हें जिंदा पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
 
मौके पर पहुंचे तालिबानी लड़ाके
काबुल गुरुद्वारे पर हमला करने वाले बंदूकधारी संभवत: तालिबान के प्रतिद्वंद्वी दाएश समूह के हैं। तालिबान लड़ाके मौके पर पहुंच गए हैं और उनके बीच लड़ाई जारी है। गुरुद्वारा क्षतिग्रस्त हो गया है और चार सिख लापता हैं। पंजाब के राज्यसभा सांसद विक्रम साहनी ने इसकी जानकारी दी।
 
इससे पहले भी गुरुद्वारा पर हो चुका हमला
पिछले अक्तूबर में, तालिबान के सत्ता में आने के कुछ महीने बाद, अज्ञात बंदूकधारियों ने गुरुद्वारा करते परवन पर धावा बोल दिया था और संपत्ति में तोड़फोड़ की थी। तब से, अफगान सिख भारत को बचाए जाने की अपील कर रहे हैं।

हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे: भारतीय विदेश मंत्रालय
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम काबुल में एक पवित्र गुरुद्वारे पर हमले को लेकर बहुत चिंतित हैं। हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और आगे की घटनाओं के बारे में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
 
गुरुद्वारा के अंदर अब भी 7-8 लोग फंसे: मनजिंदर सिंह सिरसा
भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि जानकारी के अनुसार अब तक तीन लोग निकल चुके हैं। जिनमें से दो को अस्पताल भेजा गया है। गुरुद्वारा के गार्ड की मौत हो गई है। माना जा रहा है कि 7-8 लोग अभी भी अंदर फंसे हुए हैं लेकिन संख्या की पुष्टि नहीं हुई है। अभी भी फायरिंग जारी है।

 

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भारतीय आमों को यूरोप में बढ़ावा देने पियूष गोयल ने आयोजित किया ‘मैंगो फेस्टिवल’

ब्रुसेल्स/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत के स्वादिष्ट व रसीले आमों को यूरोपीय देशों के बाजारों में भी बड़े पैमाने पर पहुंचाने के प्रयास तेज हो गए हैं। इस बाजार में भारतीय आमों को बढ़ावा देने के इरादे से बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में ‘मैंगो फेस्टिवल’ का आयोजन किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को इसका शुभारंभ किया। अभी बेल्जियम में आम लैटिन अमेरिकी देशों से पहुंचते हैं।

इस मौके पर गोयल ने यूरोपीय संघ व भारत के बीच मुक्त व्यापार वार्ता (एफटीए) का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत ‘मैंगो मैनिया’ के साथ ही हुई थी। हालांकि, एफटीए को 2013 में रोक दिया गया था, हमने अब फिर से ये पहल की है। यह वार्ता औपचारिक रूप से फिर से शुरू की जाएगी।

भारत से आम का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है, लेकिन यह खासकर मध्य पूर्व व अरब देशों में ही जाता है। बेल्जियम, लक्जबर्ग व यूरोपीय संघ EU के भारतीय राजदूत संतोष झा का कहना है कि यहां के बाजार में भारतीय आमों के लिए अपार संभावना है।

झा ने कहा कि बेल्जियम में पहले मैंगो फेस्टिवल के आयोजन का उद्देश्य लोगों को इसका स्वाद चखना है। बेल्जियम को यूरोप की राजधानी माना जाता है। यहां ईयू के सभी संगठनों के दफ्तर हैं। इसके शुभारंभ के मौके पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का मौजूद रहना सुखद संयोग है। मुझे इस बात की खास खुशी है कि मैंगो फेस्टिवल में प्रदर्शित किए गए अधिकांश आम मेरे गृह राज्य बिहार के हैं। मैंने भी कई सालों बाद इनका लुत्फ लिया है।

भारतीय दूतावास में कृषि व मरीन उत्पादों की सलाहकार डॉ. स्मिता सिरोही ने बताया कि यूरोप में ब्रिटेन व जर्मनी में भारतीय बाजार हैं। बेल्जियम में मैंगो फेस्टिवल आयोजित करने का विचार यूरोपीय बाजारों में भारतीय आमों को प्रदर्शित करना है। बेल्जियम में ज्यादातर आम लैटिन अमेरिकी देशों से आ रहे हैं।

सात किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए
ब्रुसेल्स में आयोजित आम प्रदर्शनी में भारतीय आमों की सात किस्मों को प्रदर्शित किया गया है। आंध्र प्रदेश के बंगनपल्ली, उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद दशहरी, ओडिशा के आम्रपाली, के अलावा लक्ष्मण भोग, हिमसागर, जर्दालु आम, लंगड़ा आम और 12 जीआई-टैग उत्पाद पेश किए गए हैं।
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अमेरिका की इस दिग्गज कंपनी को खरीदेगी मुकेश अंबानी की रिलायंस, मैंडरिन होटल के बाद बड़ा सौदा

नई दिल्ली/वॉशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत के टॉप कारोबारियों में से एक मुकेश अंबानी की रिलायंस कंपनी अमेरिका की रेवलॉन इंक को खरीद सकती है, जिसने कुछ दिन पहले ही दिवालिएपन के लिए याचिका दायर की है। ईटी नाउ ने शुक्रवार को सूत्रों के हवाले से बड़ा दावा किया है और अगर ये सौदा किया जाता है, तो अंबानी की रिलायंस कंपनी न्यूयॉर्क में मैंडरिन ओरिएंटल होटल के बाद एक और बड़ा सौदा होगा।


रेवलॉन इंक को खरीद सकती है रिलायंस 
ईटी नॉउ की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज संयुक्त राज्य अमेरिका में रेवलॉन इंक को खरीद सकती है, जिसके कुछ दिनों बाद कॉस्मेटिक्स दिग्गज ने दिवालिएपन के लिए दायर किया, है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाला इंडियन ऑयल टू रिटेव ग्रुप अब कॉस्मेटिक निर्माता कंपनी रेनलॉन के लिए बोली लगाने पर विचार कर रहा है, जिसने संयुक्त राज्य में अध्याय 11 दिवालियापन संरक्षण के लिए दायर किया है। 

रेवलॉन इंक कॉस्मेटिक कंपनी को जानिए 
रेवलॉन इंक कंपनी 90 साल पहले न्यूयॉर्क शहर में अपनी स्थापना के बाद से अमेरिका के घरों में विख्यात ब्रांड बन गया और रेवलॉन इंक के कॉस्मेटिक उत्पाद अमेरिका में काफी प्रसिद्ध हो गये। लेकिन, 1990 के बाद से कंपनी ने मॉडर्न जेनरेशन की बदलती मांगो के साथ तालमेल बिठाना कम कर दिया। हालांकि, उसके बाद भी रेवलॉन इंक का लाल लिपिस्टिक अमेरिका में काफी ज्यादा प्रसिद्ध रहा, लेकिन कंपनी का ब्रांड नाम बरकरार रहा, लेकिन प्रोडेक्ट्स कि बिक्री कम होने लगी। प्रॉक्टर एंड गैंबल जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों के आने के बाद रेवलॉन इंक ने तेजी से बाजार में अपनी हिस्सेदारी खोनी शुरू कर दी और काइली जेनर और अन्य हस्तियों की नवागंतुक कॉस्मेटिक लाइनों ने उत्पादों को सामने रखने वाले प्रसिद्ध चेहरों के बाद बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया पर सफलतापूर्वक पूंजीकरण किया। 

कोविड से कंपनी की स्थिति और बिगड़ी 
पहले से ही बढ़ते कर्ज से परेशान रेवलॉन की समस्याएं कोविड महामारी के साथ तेज हो गईं और महामारी की वजह से कंपनी को भारी नुकसान हुआ, क्योंकि लिपस्टिक ने फैशन में एक नए युग का मार्ग प्रशस्त किया। कोविड महामारी की वजह से साल 2020 में रेवलॉन कंपनी की बिक्री में 21 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। हालांकि, बाद में कंपनी ने 9.2 प्रतिशत की बिक्री बढ़ोतरी के साथ वापसी की और मार्च में समाप्त हुई नवीनतम तिमाही में, रेवलॉन की बिक्री लगभग 8% बढ़ी, लेकिन अभी भी एक वर्ष में 2.4 अरब डॉलर से अधिक की महामारी के पहले स्तर से पीछे है। वहीं, ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद हाल के महीनों में विश्व की सैकड़ों कंपनियां परेशान रही हैं और रेवलॉन पर इसका काफी बुरा असर पड़ा, जिसकी वजह से 2020 के अंत में कंपनी दिलालिएपन की स्थिति तक पहुंच गई। 

रेवलॉन कंपनी ने क्या कहा? 
यूक्रेन युद्घ और ग्लोबल सप्लाई चेन में रूकावट की वजह से अभी भी आशंका है कि, कंज्यूमर प्रोडक्ट सेक्टर में कॉरपोरेट री-स्ट्रक्चरिंग हो सकते हैं और इसके पीछे की वजह उत्पादन क्षेत्र में मंदी और बढ़ती लागत है। वहीं, रेवलॉन ने कहा कि अदालत की मंजूरी के बाद उसे उम्मीद है कि, उधारदाताओं से उसे मौजूदा वक्त में 575 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण होगा, जिससे वो अपने दिन-प्रतिदिन के संचालन को चालू रख पाएगा। 2018 में रेवलॉन के अध्यक्ष और सीईओ नामित डेबरा पेरेलमैन ने कहा था कि, 'फाइलिंग रेवलॉन को हमारे उपभोक्ताओं को दशकों से हमारे द्वारा वितरित किए गए प्रतिष्ठित उत्पादों की पेशकश करने की अनुमति देगी, जबकि हमारे भविष्य के विकास के लिए एक स्पष्ट मार्ग प्रदान करेगी।" उसके पिता, अरबपति कारोबारी रॉन पेरेलमैन, मैकएंड्रयूज़ और फोर्ब्स के माध्यम से कंपनी का समर्थन करते हैं, जिसने 1985 में शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण के माध्यम से व्यवसाय का अधिग्रहण किया। रेवलॉन 1996 में सार्वजनिक हुआ था।

जनवरी में मैंडरिन होटल का सौदा 
इससे पहले एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में विशालकाय लग्जरी होटल खरीदा था, जो हॉलीवुड का पसंदीदा ठिकाना है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया के सबसे बड़े अरबपति मुकेश अंबानी ने न्यूयॉर्क शहर में मैंडरिन ओरिएंटल को खरीदा था और अब अंबानी की कंपनी ने रेवलॉन को खरीदा है। 248 कमरों वाला ये विशालकाय होटल काफी ज्यादा महंगा और इसके एक कमरे की कीमत लाखों में है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी के समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मैंडरिन ओरिएंटल को 98 मिलियन डॉलर यानि करीब 9.81 करोड़ डॉलर यानि करीब 728 करोड़ रुपये में ये सौदा किया था।
 
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भारत-कनाडा ने मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू की, WTO से इतर दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल मिले

 जिनेवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत और कनाडा ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मौके पर मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चौथे दौर की वार्ता शुरू की। दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के बीच प्रस्तावित एफटीए पर चर्चा करने के लिए मिले। वहीं, कई गैर-टैरिफ बाधाएं, जैसे निवेशक संरक्षण से संबंधित नियम, बौद्धिक संपदा अधिकार, और शासन और मानकों के सामंजस्य, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में प्रमुख बिंदु हैं, जिन पर भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) ने इस साल दिवाली तक हस्ताक्षर करने का लक्ष्य रखा है। 

व्यापक व्यापार सौदा करने के लिए संबोधित करने की आवश्यकता 
इससे पहले, यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) के कार्यकारी अध्यक्ष, रिचर्ड हील्ड ने एक साक्षात्कार में समाचार एजेंसी ANI को बताया कि, ब्रिटेन के व्यवसाय, साथ ही भारतीय व्यवसाय, गैर-टैरिफ बाधाओं, विशेष रूप से तकनीकी पर समान ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई गैर-टैरिफ बाधाएं हैं जिन्हें दोनों देशों को एक व्यापक व्यापार सौदा करने के लिए संबोधित करने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे बताया ,यह न केवल टैरिफ बाधाओं से संबंधित है, बल्कि गैर-टैरिफ बाधाओं के बारे में भी है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों को जिन गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की जरूरत है, उनमें मूल के नियमों के आसपास के मुद्दे, शासन और मानकों का सामंजस्य, बौद्धिक संपदा अधिकारों के नियमों की पुष्टि और निवेशक संरक्षण शामिल हैं। बता दें कि, भारत और यूके ने मई 2021 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जॉनसन के बीच आयोजित वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते के अपने इरादे की घोषणा की थी। 

दोनों देशों के बीच प्रस्तावित एफटीए (FTA) पर औपचारिक बातचीत इस साल की शुरुआत में शुरू हुई थी। बातचीत का तीसरा दौर 6 मई को हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया था, जिसमें कुछ टीमों की बैठक नई दिल्ली में हुई थी। ब्रिटेन के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान भारतीयों के लिए अधिक स्किल्ड वीजा के लिए अपना समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि यूके वर्तमान में आईटी और प्रोग्रामिंग क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी का सामना कर रहा है।तीसरे दौर की वार्ता के दौरान, मसौदा संधि पाठ अधिकांश अध्यायों में उन्नत किया गया था। बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञ 23 नीति क्षेत्रों को कवर करते हुए 60 अलग-अलग सत्रों में चर्चा के लिए एक साथ आए। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए मई के अंतिम सप्ताह में लंदन का दौरा किया। ब्रिटेन के वार्ताकारों के साथ बैठक के बाद गोयल ने उम्मीद जताई थी कि दिवाली तक एफटीए पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। इस सप्ताह की शुरुआत में, ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने कहा, ब्रिटेन अब यूरोपीय संघ में नहीं है और यह वास्तव में यूके-भारत संबंधों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। मैं विशेष रूप से व्यापार के बारे में सोचता हूं, जहां हम एक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। हमारा अगला दौर अगले सप्ताह होगा और दोनों प्रधानमंत्रियों ने वार्ताकारों से कहा है कि यह दिवाली तक हो जाएगा। भारत और यूके ने इस साल जनवरी में मुक्त व्यापार समझौता वार्ता शुरू की। दोनों देश दोनों पक्षों के व्यवसायों को लाभ पहुंचाने के लिए त्वरित लाभ प्रदान करने के लिए एक अंतरिम समझौते की संभावना भी तलाश रहे हैं।
 
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ब्रिटेन सरकार ने असांजे के अमेरिका प्रत्यर्पण को मंजूरी दी, अपील की संभावना

लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन सरकार ने जासूसी के आरोपों में विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने की मंजूरी दे दी है। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि गृह मंत्री प्रीति पटेल ने प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इससे पहले ब्रिटेन की एक अदालत ने व्यवस्था दी थी कि असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

अमेरिका भेजे जाने से बचने के लिए असांजे की वर्षों से कानूनी लड़ाई में यह एक बड़ा मोड़ है। हालांकि असांजे के प्रयासों का यह अंत नहीं है और उनके पास अपील करने के लिए 14 दिन का समय है।
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यूरोपीय नेताओं ने जेलेंस्की के प्रति समर्थन व्‍यक्‍त किया

कीव (छत्तीसगढ़ दर्पण)। यूरोपीय नेताओं ने कीव में हुई बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोद्योमीर जेलेंस्की के प्रति समर्थन व्‍यक्‍त किया। इस बैठक में यूरोपीय नेताओं ने यूरोपीय संघ से जुड़ने की कीव की उम्मीदवारी का समर्थन किया।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज और इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी ने जेलेंस्की के साथ एक साझा संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। 
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मंगल ग्रह पर कहां से आया 'मानवीय कचरा' ? रहस्यमयी तस्वीर के बारे में NASA ने ये बताया

वॉशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नासा के वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह की सतह पर एक ऐसी चीज देखी जो दूसरी दुनिया की तो है ही, वह असल में 'मानव का छोड़ा हुआ कचरा' है। यह चमकीली पन्नी की तरह का कचरा ऐसे स्थान पर मंगल के चट्टानों के बीच पड़ा था, जहां से नासा का पर्सीवरेंस रोवर भी काफी दूर है। काफी पड़ताल के बाद पता चला कि लाल ग्रह पर पहुंचे इस मानवीय कचरे के लिए नासा का मंगल मिशन ही जिम्मेदार है। जानिए कि वह पन्नी जैसी चमकीली चीज है क्या और कैसे मंगल ग्रह तक पहुंच गई है।

मंगल ग्रह पर कहां से आया 'मानवीय कचरा' ?
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पर्सीवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह पर चट्टानों के बीच पड़े एक रहस्यमयी चीज की तस्वीर खींची है। देखने में यह चमकीली पन्नी का टुकड़ा लग रहा है, जिसपर अनेकों स्पॉट भी स्पष्ट नजर आ रहे हैं। जब नासा के वैज्ञानिकों की नजर इस तस्वीर पर पड़ी तो वह सोचने मजबूर हो गए कि लाल ग्रह पर यह 'मानवीय कचरा' आया कहां से? क्योंकि, मंगल ग्रह के चट्टानों के बीच यह पूरी तरह से बाहरी दुनिया की वस्तु नजर आ रही थी। जब वैज्ञानिकों ने तस्वीर की गहन जांच की तो उन्हें अंदाजा हो गया कि इस 'मानवीय कचरे' के लिए खुद वही जिम्मेदार हैं। (पहली तस्वीर सौजन्य ट्विटर: NASA Perseverance Mars rover)

थर्मल ब्लैंकेट का हिस्सा है वह 'रहस्यमयी' चीज
दरअसल, वह रहस्यमयी चीज वास्तव में भी एक चमकीली पन्नी का टुकड़ा है, जो नासा के मुताबिक उस थर्मल ब्लैंकेट का हिस्सा है, जो मंगल की सतह पर रॉकेट से रोवर और इनजेनिटी मार्स हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान आया हो सकता है। लेकिन, एक बात अभी भी नासा के वैज्ञानिकों को समझ में नहीं आई है कि जिस जगह पर थर्मल ब्लैंकेट का हिस्सा पड़ा हुआ है, वह लैंडिंग वाली जगह से 2 किलो मीटर की दूरी पर है। वैज्ञानिक इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि यह टुकड़ा रॉकेट से यहीं पर गिरा था या फिर मंगल ग्रह की हवाओं से बहाकर लाया गया है।

पर्सीवरेंस रोवर टीम ने दी जानकारी
15 जून को पर्सीवरेंस रोवर टीम ने इसके बारे में ट्वीट करके जानकारी दी है। इसमें कहा गया है, 'मेरी टीम को कुछ अप्रत्याशित मिला है: यह थर्मल कंबल का एक टुकड़ा है जो उन्हें लगता है कि मेरे उतरने के चरण में आया हो सकता है, रॉकेट-पावर्ड जेट पैक जिसने मुझे 2021 में लैंडिंग के दिन यहां पर उतारा था।' 13 जून को रोवर के बाएं मास्टकैम-जेड कैमरे से खींची गई फोटो में, पन्नी का एक टुकड़ा जिसके चारों ओर डॉट्स मौजूद हैं, स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

'सात मिनट का आंतक' के समय आता है काम
नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के एक प्रवक्ता एंड्र्यू गुड ने भी सीएनईटी से कहा कि वह टुकड़ा निश्चित तौर पर थर्मल ब्लैंकेट का हिस्सा है। लेकिन, उन्होंने कहा कि यह पता नहीं चल पाया है कि यह स्पेसक्राफ्ट के किस पार्ट से आया है। ये थर्मल कंबल वास्तव में महत्वपूर्ण समय में तापमान को नियंत्रित करने का काम करते हैं, जिसमें ग्रह पर एंट्री, नीचे उतरने और लैंडिंग की प्रक्रिया शामिल है। इस प्रक्रिया को ही 'सात मिनट का आंतक' के नाम से भी जानते हैं।

मंगल पर प्राचीन जीवन की खोज में लगा है रोवर
रोवर की सोशल मीडिया टीम ने उन लोगों के बारे में भी जानकारी साझा की है, जो इस तरह का थर्मल कंबल बनाते हैं। ट्वीट में लिखा है, 'उन्हें अंतरिक्ष यान ड्रेसमेकर के रूप में समझें। वे इन अनूठी चीजों को एक साथ जोड़ने के लिए सिलाई मशीनों और दूसरे उपकरणों के साथ काम करते हैं।' रोवर इस समय मंगल ग्रह पर जेजेरो क्रेटर के अंदर एक प्राचीन नदी डेल्टा क्षेत्र का अध्ययन कर रहा है, जिससे लाल ग्रह पर प्राचीन जीवन के प्रमाण मिलने की उम्मीद है।

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मंगल से धरती पर सैंपल लाकर किया जाएगा अध्ययन
मंगल का यह स्थान वहां के चट्टानों का सैंपल जुटाने और इतिहास में पानी की मौजूदगी के साक्ष्य जुटाने के लिए उपयुक्त है। नासा की योजना इन सैंपलों को धरती पर लाकर उनका विस्तार से अध्ययन करना है। इसके लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने यूरोपियन स्पेस एजेंसी के साथ साझेदारी की हुई है। इसके लिए मंगल के सैंपल की जांच के लिए 16 वैज्ञानिकों का ग्रुप बनाया गया है, जो आगे का भी रोडमैप तैयार करेगा।
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कौन है केविन ब्‍लाट, जिनके पास थे 50 फेमस एक्ट्रेस के 'सेक्स टेप', उनके बदले कमाए अरबों

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। इन दिनों केविन ब्‍लाट का नाम काफी ज्यादा सुर्खियों में है। कहा जाता है कि उनके पास कई बड़ी एक्ट्रेस के सेक्स टेप थे। जिसकी वजह से उन्होंने अरबों रुपये की कमाई की। हालांकि ज्यादातर मामलों में उन्होंने टेप रिलीज करने के बजाए उसे बर्बाद कर दिया। वो खुद को दुनिया का 'स्‍कैंडल स्‍पेशिलिस्‍ट' बताते हैं। हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें उनके बिजनेस को लेकर बड़ा खुलासा हुआ। 

एडल्ट इंडस्ट्री में करते थे काम
हॉलीवुड वालों ने केविन का नाम 'सेलिब्रेटी सेक्‍स टेप ब्रोकर' रखा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वो पहले ऑनलाइन एडल्ट इंडस्ट्री में काम करते थे। उसी दौरान उन्होंने 50 से ज्यादा फेमस हॉलीवुड एक्ट्रेस के टेप देखे। इसमें किम कार्दशियन का नाम भी शामिल है। 

किम से 156 करोड़ लिए?
केविन का दावा है कि उन्होंने अमेरिकन सिंगर रे जे के साथ इस सेक्स टेप को लेकर 156 करोड़ रुपये की कमाई की। ये घटना 2006 की है। हालांकि किम और रे दोनों इस तरह की घटना से इनकार कर चुके हैं।

ज्यादातर के नाम रखे सीक्रेट 
केविन के मुताबिक उन्होंने बहुत सारी एक्ट्रेस के सेक्स टेप से अरबों कमाए, लेकिन 70 प्रतिशत मामलों में उन्होंने टेप को बर्बाद कर दिया। साथ ही दुनिया को दो-तीन एक्ट्रेस को छोड़कर किसी का नाम नहीं बताया। उन्होंने अपनी निजी जिंदगी पर कहा कि वो 1996 में अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में शिफ्ट हुए थे। पहले उन्होंने नौकरी की लेकिन 2003 से वो सेक्स टेप से जुड़े धंधे में आ गए। 

पेरिस हिल्टन का टेप रिलीज 
केविन के मुताबिक 2003 के आसपास उनके एक फ्रेंड के पास अमेरिकी एक्ट्रेस पेरिस हिल्‍टन का सेक्स वीडियो था। जिसमें वो अपने बॉयफ्रेंड रिक सोलोमन के साथ नजर आ रही थीं। उस दौरान उन्होंने उसे 37 लाख में खरीदा, लेकिन कई लोगों ने उन पर 1.5 अरब का केस कर दिया। फिर 2003 में ये सेक्स वीडियो रिलीज हो गया। कहा जाता है कि शुरू में पेरिस इस वीडियो को बेचने के लिए तैयार थीं, लेकिन बाद में उनकी इजाजत के बिना इसे रिलीज किया गया। जिस वजह से काफी बवाल हुआ था। 

कैमरून डियाज के न्यूज फोटोज 
केविन ने एक्ट्रेस कैमरून डियाज का भी किस्सा शेयर किया। उनका दावा है कि एक वक्त ऐसा था, जब उन्हें कैमरून डियाज के न्यूज फोटो मिल गए थे। उसे एक फोटोग्राफर ने लाकर दिया था। फोटोग्राफर चाहता था कि इसके बदले उसे ढाई मिलियन डॉलर मिले। जिसके बाद एक्ट्रेस ने केविन से मदद मांगी और उन्होंने आईपी एड्रेस की मदद से फोटोग्राफर का पता लगा लिया। उस फोटोग्राफर की पहचान जॉन रटर के रूप में हुई थी।
 
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भारत से इतना चावल क्यों खरीद रहा चीन? अधिक धान उपजाकर कैसे हो रहा है देश को नुकसान

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन हमारे चावल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। आश्चर्य की बात ये है कि चीन ने भारत से कोरोनाकाल में चावल खरीदना शुरू किया है और दो सालों से भी कम समय में भारत से सबसे अधिक चावल खरीदने लगा है। चीन लगभग तीन दशकों तक भारतीय चावल को खराब बताकर खरीदने से इंकार करता रहा। लेकिन भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच अब अचानक शत्रु देश का भारतीय चावल का सबसे बड़ा खरीदार बन जाना कुछ संदेह पैदा करता है।

लगभग 400 फीसदी तक बढ़ा निर्यात
एक विश्लेषण के अनुसार, चीन महामारी के दौरान भारतीय चावल का शीर्ष खरीदार बनकर उभरा है। चीन ने भारत से इस दौरान 16.34 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल का आयात किया है। यह आंकड़ा भारत की तरफ से कुल चावल निर्यात 212.10 LMT का 7.7 प्रतिशत है। साल 2021-22 में, भारत का कुल चावल निर्यात - बासमती और गैर-बासमती दोनों मिलाकर 212.10 एलएमटी था, जो कि 2020-21 में निर्यात किए गए 177.79 एलएमटी से 19.30 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में, चीन को चावल का निर्यात 392.20 प्रतिशत से बढ़कर 3.31 एलएमटी से 16.34 एलएमटी हो गया।
 
नुकसान का सौदा बना धान की खेती
अगर व्यापारिक दृष्टि से देखा जाए तो यह बेहद अच्छी बात है कि चीन, चावल खरीद के मामले में हमारे देश पर आश्रित हो रहा है। इससे अच्छी बात क्या होगी कि हम अपने प्रोडक्ट निर्यात कर शत्रु देश से लाभ कमा रहे हैं। पर इसमें एक समस्या है। धान की खेती करना अब फायदा नहीं नुकसान का सौदा बनता जा रहा है और ये बात विकसित देश समझ चुके हैं। चीन, दीर्घकालीन सोच के साथ उन फसलों और उत्पादों को अपने यहां हतोत्साहित कर रहा है, जो अधिक पानी मांगते हैं और पर्यावरण के लिए समस्या बनते हैं।

पानी की अंधाधुंध खपत
आंकड़ों के मुताबिक हमारे किसान एक किलो चावल उगाने के लिए लगभग 5000 लीटर पानी की खपत कर रहे हैं। अंधाधुंध धान की खेती पर जोर देने के कारण भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। इसकी वजह से जल और जलवायु संकट बढ़ रहा है। धान की खेती देश की अर्थव्यवस्था के साथ किसानों की राह की बड़ी चुनौती बन गए हैं। इनकी खेती से लेकर खपत तक की पूरी श्रृंखला इतनी बोझिल हो गई है कि उसे आगे बनाए रखना कठिन हो गया है।

धान की खेती से खेत बने बांझ
हरित क्रांति के पुरोधा राज्यों पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की माटी को धान की खेती ने बांझ बनाकर रख दिया है। इसकी वजह से इन राज्यों का भूजल इतना नीचे चला गया है कि हर साल खेती से पहले नलकूपों की खुदाई करनी पड़ रही है। ऐसे में चीन जैसे देश प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करने वाली फसलों के साथ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली खेती से दूरी बनाने लगे हैं। अत्यधिक पानी की खपत के कारण चीन, गन्ने और चावल की खेती को सीमित करने पर काम कर रहा है।

चावल की खेती से कतरा रहा चीन
यही वजह है कि चीन ने खुद को चावल निर्यात से बाहर कर लिया है। और धान और गन्ने की को कम से कम करने की दिशा में काम कर रहा है। यही वजह थी कि साल 2020 के अंत में चीन ने भारत समेत कई और देशों से चावल आयात के सौदे किए थे। इसी का असर है कि 2 सालों से भी कम समय में चीन भारत के चावल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।
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कनाडा-डेनमार्क के बीच 1.3 वर्ग किमी के द्वीप का 49 साल पुराना विवाद खत्म

कोपेनहेगन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। डेनमार्क और कनाडा के बीच आर्कटिक में एक बंजर और आबादी रहित चट्टानी द्वीप को लेकर 49 साल पुराना विवाद खत्म हो गया है। दोनों देश इस छोटे से द्वीप को बांटने पर सहमत हो गए हैं। समझौते के मुताबिक, इस 1.3 वर्ग किलोमीटर के हैंस द्वीप पर एक सीमा रेखा खींची जाएगी। यह द्वीप डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिम तट और कनाडा के एलेस्मेयर द्वीप के बीच समुद्री मार्ग पर स्थित है। हैंस द्वीप पर खनिजों का कोई भंडार नहीं है।


डेनमार्क के विदेश मंत्री जेप्पे कोफोड ने कहा, यह स्पष्ट संकेत है कि सीमा विवादों को व्यवहारिक और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना संभव है जिसमें सभी पक्षों की जीत हो। उन्होंने कहा कि दुनिया में युद्ध और अशांति के बीच यह अहम संकेत है।
 
कनाडा और डेनमार्क 1973 में नारेस जलडमरूमध्य के माध्यम से ग्रीनलैंड और कनाडा के बीच एक सीमा बनाने के लिए सहमत हुए थे। लेकिन वे इस बात से सहमत नहीं थे कि हंस द्वीप पर किस देश की संप्रभुता होगी, जो उत्तरी ध्रुव से लगभग 1,100 किलोमीटर (680 मील) दक्षिण में स्थित है। अंत में, उन्होंने बाद में स्वामित्व के सवाल पर काम करने का फैसला किया।
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प्रदर्शनकारियों को मिलेगी देश निकाला की सजा…

कुवैत सिटी/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। खाड़ी देश कुवैत में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले भारतीय दोबारा कभी कुवैत वापस नहीं लौट पाएंगे। जल्द ही उन्हें वापस भारत भेज दिया जाएगा। इसके बाद शायद ही कुवैत सरकार उन्हें वापस आने की मंजूरी दे। दरअसल, कुवैत में अप्रवासियों के लिए श्रम कानून इतने सख्त हैं कि इनका उल्लंघन करना वहां ‘पाप’ के समान है। और कुवैत सरकार द्वारा कानून का पालन न करने पर नरमी की कोई संभावना नहीं रहती।

श्रम कानूनों के मामले में अप्रवासियों के लिए अलग से नियम बनाए गए हैं। इसमें अप्रवासी कामगारों को कुवैत में किसी भी प्रकार का प्रदर्शन या धरना देने की अनुमति नहीं है। इसके बाद भी वहां रह रहे भारतीयों और एशियाई नागरिकों ने नुपुर शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद उन्हें वापस भारत भेजने का फैसला किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें जल्द ही वापस भेज दिया जाएगा।
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विश्व व्यापार संगठन के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भाग लेने स्विट्जरलैंड के जिनेवा पहुंचे पीयूष गोयल

जिनेवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल विश्व व्यापार संगठन के आज से शुरू हो रहे बारहवें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा पहुंच गये हैं। यह सम्‍मेलन करीब पांच वर्षं के अंतराल के बाद हो रहा है। श्री गोयल सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। एक ट्वीट में, श्री गोयल ने कहा कि बारहवें मंत्रिस्‍तरीय सम्‍मेलन में भारत का प्रयास रहेगा कि वार्ताओं के सकारात्मक और न्यायसंगत परिणाम प्राप्‍त हों। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त कि  सम्‍मेलन में समाज के कमजोर वर्गों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर भारत की चिंताओं का समाधान होगा।

इस वर्ष सम्मेलन में कई विषयों पर चर्चा और वार्ता होगी। इनमें कोविड महामारी पर विश्व व्यापार संगठन की प्रतिक्रिया, मत्स्य पालन सब्सिडी वार्ता और खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडार व्‍यवस्‍था सहित  कृषि से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
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अमेरिका के शिकागो में गोलीबारी में 5 की मौत, 16 घायल

शिकागो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका में एक के बाद एक लगातार गोलीबारी की घटनाएं सामने आ रही हैं। एक बार फिर से अमेरिका के शिकागो में गोलीबारी की घटना सामने आई है, इस गोलीबारी में 5 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 16 लोग घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार इस हफ्ते शिकागो में शूटिंग की घटनाओं में 5 लोगों क मौत हुई है। साउथ एल्बी में शनिवार को रात तकरीबन 12.19 बजे एक 37 वर्षीय महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। महिला रात में गाड़ी में सफर कर रही थी तभी अनजान व्यक्ति ने उन्हें गोली मार दी और फरार हो गया।

यही नहीं शनिवार को ही रात 2.27 बजे एक 34 वर्षीय युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना साउथ इंडियाना में हुई जब युवक को उसकी कार में गोली मार दी गई। युवक को कई गोलियां मारी गई, जिसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो मेडिकल सेंटर युवक को मृत घोषित कर दियागया। यही नहीं 23 वर्षीय युवक की शनिवार रात 3.20 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए। यह घटना साउथ डेमेन के 8600 ब्लॉक में हुई।

इसके अलावा 39 साल के एक आदमी को उसके बाएं पैर में गोली मार दी गई, हालांकि उनकी हालत स्थिर है। वहीं 24 साल के एक और युवक को गोली मारने की घटना सामने आई है, उसे भी बाएं पैर में गोली मारी गई है। चौथे घायल की उम्र 42 साल है उन्हें भी कई गोलियां मारी गई हैं, फिलहाल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। इस शुक्रवार को पहली बड़ी घटना साउथ जस्टिन में 6800 ब्लॉक में हुई जहां पर 25 साल के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पीड़ित को कोई राउंड गोलियां मारी गई थी। अभी तक मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। शुक्रवार को रात 11.05 बजे 400 ब्लाड में भी गोली बारी की घटना सामने आई, जिसमे 26 साल के युवक की हत्या कर दी गई।
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एक छोटे से नियम की अनदेखी और डूब गया 15 हजार से अधिक भेड़ों से भरा जहाज

खारतूम (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सूडान के लाल सागर बंदरगाह सुकिन में रविवार को हजारों भेड़ों से लदा एक जहाज डूब गया। इस दुर्घटना में सभी जानवर मारे गए जबकि चालक दल को बचा लिया गया। तय सीमा से कई हजार अधिक भेड़ें निर्यात करने की वजह से जहाज पर अतिरिक्त दबाव पड़ा और जहाज डूब गया।

सूडान से सउदी अरब जा रहा था 
जहाज इन भेड़ों को सूडान से सउदी अरब भेजा जा रहा था। सूडानी बंदरगाह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह जहाज था बद्-1 था जो रविवार सुबह तड़के डूब गया। अधिकारी के मुताबिक जहाज में कुल 15,800 भेड़ें थीं जो कि सउदी अरब को निर्यात की जा रही थीं। लेकिन अधिक भार होने के कारण जहाज इसे सहन न कर सकता और यह बीच समंदर में डूब गया।
अधिक वजन के कारण डूबा जहाज 

अधिकारी ने कहा कि जहाज में केवल 9,000 भेड़े होनी चाहिए थीं। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि सभी चालक दल को बचा लिया गया है। इसके साथ ही अधिकारी ने दुर्घटना के आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जलमग्न जहाज बंदरगाह के संचालन को तो प्रभावित करेगा ही इसके अलावा बड़ी संख्या में जानवरों की मौत के कारण पर्यावरणीय पर भी असर पड़ेगा।

नतीजे आने में लगेगा वक्त 
गौरतलब है कि बीते महीने सुकिन बंदरगाह के कार्गो क्षेत्र में भीषण आग लग गई थी, जो घंटों तक चली और भारी क्षति हुई। लेकिन अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि बंदरगाह में आग कैसे लगी थी। आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन अभी तक इसके नतीजे सामने नहीं आए हैं।

ऐतिहासिक बंदरगाह है सुकिन 
सुकिन, सूडान का एक ऐतिहासिक बंदरगाह है। हालांकि अब यह सूडान का मुख्य विदेशी व्यापार केंद्र नहीं है। इसकी जगह अब पोर्ट सूडान ने ले ली है। यह लाल सागर तट के साथ लगभग 60 किलोमीटर दूर है। सूडान फिलहाल आर्थिक संकट की चपेट में है, जो पिछले साल सेना प्रमुख अब्देल फतह अल-बुरहान के नेतृत्व में सैन्य तख्तापलट के बाद और गहरा गया है।



 

 

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UN ने चेताया, श्रीलंका में खराब आर्थिक स्थिति के बीच आ सकता है गंभीर मानवीय संकट

कोलंबो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। श्रीलंका में घोर आर्थिक संकट के कारण वहां की जनता की स्थिति और अधिक खराब हो गई है। संयुक्त राष्ट्र ने संकट पर एक और बड़ी चेतावनी जारी की है। यूएन का कहना है कि, नकदी की तंगी से जूझ रहा श्रीलंका का अभूतपूर्व आर्थिक संकट गंभीर मानवीय संकट में बदल सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने आगे कहा कि,देश में लाखों लोगों को पहले से ही सहायता की जरूरत है।

गहरा सकता है मानवीय संकट
संयुक्त राष्ट्र मानवीय एजेंसी ओसीएचए (OCHA) के प्रवक्ता जेन्स लार्के ने संवाददाताओं से कहा, 'हम चिंतित हैं कि यह एक पूर्ण मानवीय आपातकाल में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि, वे इस बड़ी चिंता को दूर करने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं।

जल्द मदद की जरूरत 
जेन्स लार्के ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी सबसे कमजोर लोगों और संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित 17 लाख लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए 47 मिलियन डॉलर की अपील कर रहे हैं। बता दें कि, श्रीलंका में घोर आर्थिक संकट के कारण महीने दिनों बिजली की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी कतार दिख रही है। साथ ही रिकॉर्ड मुद्रास्फीति ( Inflation)ने दक्षिण एशियाई द्वीप राष्ट्र के 22 मिलियन लोगों के दैनिक जीवन को कष्टों से भर दिया है।
 
श्रीलंका में घोर आर्थिक संकट 
बता दें कि, घोर आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे ने प्रधानमंत्री का पदभार संभाला था। हालांकि, अभी तक स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। वहीं, भारत दक्षिणी देश से चीन का प्रभाव कम करने के लिए श्रीलंका के सामने मसीहा बनकर उभरा है। भारत मसीहा बनकर उभरा आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका को भारत ने अब तक कई बार मदद पहुंचाई है। जानकारी के मुताबिक भारत ने श्रीलंका को उर्वरकों के आयात के लिए 5.5 करोड़ डॉलर तक के कर्ज की स्वीकृति दी है। भारतीय उच्चायोग के मुताबिक श्रीलंका को खाद्यान्न संकट से बचाने के लिए उर्वरक की खरीद में धन कमी नहीं आने देने के लिए अधिकतम ऋण सीमा प्रदान की है।
 
भारत मसीहा बनकर उभरा 
आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका को भारत ने अब तक कई बार मदद पहुंचाई है। जानकारी के मुताबिक भारत ने श्रीलंका को उर्वरकों के आयात के लिए 5.5 करोड़ डॉलर तक के कर्ज की स्वीकृति दी है। भारतीय उच्चायोग के मुताबिक श्रीलंका को खाद्यान्न संकट से बचाने के लिए उर्वरक की खरीद में धन कमी नहीं आने देने के लिए अधिकतम ऋण सीमा प्रदान की है।
 
 
 

 

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