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पूर्व प्रधानमंत्री के लाइव भाषण पर सरकार ने लगाई रोक...

 इस्लामाबाद/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को नई शहबाज़ सरकार ने बड़ा झटका दिया है। पाकिस्तान के मीडिया नियामक प्राधिकरण ने उनके लाइव प्रसारण पर रोक लगा दी है। दरअसल पाकिस्तान के मीडिया नियामक प्राधिकरण ने इस्लामाबाद में एक संबोधन के दौरान एक पुलिस अधिकारी और एक महिला मजिस्ट्रेट को धमकी देने के लिए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान के लाइव भाषणों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है।

पीईएमआरए ने अपनी अधिसूचना में कहा कि इमरान खान का भाषण हमारे प्राधिकरण नियमों का खुला उल्लंघन है। इसके अलावा इमरान का भाषण संविधान के अनुच्छद 19 भी का उल्लंघन है। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पीईएमआरए) ने कहा है कि इमरान के रिकॉर्ड किए गए भाषण को प्रभावी निगरानी और संपादकीय नियंत्रण सुनिश्चित करने के बाद ही प्रसारित होने की अनुमति होगी।



बता दें कि इमरान खान ने जेल में बंद इमरान के करीबी नेता शाहबाज गिल के समर्थन में एक रैली निकाली थी। जिसमें इमरान ने यह  बयान दिया था। गिल को एक निजी टीवी चैनल पर देश के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इमरान ने कहा कि अगर गिल के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है, तो फजलुर रहमान, नवाज शरीफ और राणा सनाउल्लाह को भी न्यायिक कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। खान ने कहा कि गिल के साथ जो हुआ वह उनके द्वारा कही गई बातों के कारण नहीं था, यह बदले की राजनीति के तहत हुआ है।



पीईएमआरए ने उस समय यह फैसला लिया जब इमरान खान ने जेल में बंद पीटीआई नेता शाहबाज गिल के ऊपर अत्याचार को लेकर इस्लामाबाद के महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक और महिला मजिस्ट्रेट के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया। बताया जा रहा है कि इमरान खान के खिलाफ और भी पाबंदी लगाई जा सकती है।

इमरान खान ने सेनाध्यक्ष की नियुक्ति पर उठाया सवाल
इमरान खान ने पाकिस्तान में मौजूदा स्थिति को सेनाध्यक्ष की नियुक्ति से जोड़ा और इसे "दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया कि देश में सब कुछ एक नियुक्ति के लिए हो रहा था। पूर्व प्रधानमंत्री ने संघीय राजधानी में सोशल मीडिया प्रभावितों से बातचीत में कहा कि सेना प्रमुख की नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जानी चाहिए।

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राष्ट्रपति के करीबी की हत्या की कोशिश, धमाके में बेटी की मौत...

 मॉस्को/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी सहयोगी की बेटी की कथित तौर पर मास्को के पास हत्या कर दी गई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, जब दरिया दुगिन घर जा रही थीं, तभी कार में आग लगने से उनकी मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक, मास्को में एक कार बम विस्फोट में उनकी मौत हो गई। यह भी कहा जा रहा है कि हमलावरों का निशाना दारिया डुगिन के पिता थे अलेक्जेंडर ही थे, जिन्हें 'पुतिन का दिगाम' भी कहा जाता है।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बात सामने आई है कि यूक्रेन पर आक्रमण के बाद ब्रिटेन ने जिन रूसी लोगों पर प्रतिबंध लगाया है, उसमें अलेक्जेंडर दुगिन और उनकी दारिया दुगिन भी शामिल थीं। दारिया दुगिन एक रहस्यमयी लेखिका के रूप में भी जानी जाती हैं।  

डुगिन एक प्रमुख अति-राष्ट्रवादी विचारक हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि वे रूसी राष्ट्रपति के करीबी हैं। रूसी मीडिया आउटलेट 112 के अनुसार, पिता और पुत्री दोनों शनिवार शाम को उसी कार में एक कार्यक्रम से वापस यात्रा करने वाले थे, लेकिन डुगिन ने अंतिम समय में अपनी बेटी से अलग यात्रा करने का निर्णय लिया।

सूत्रों के मुताबिक टेलीग्राम पर पोस्ट किए गए असत्यापित फुटेज में डुगिन को सदमे में देखते हुए दिखाया गया है क्योंकि आपातकालीन सेवाएं एक वाहन के जलते हुए मलबे के दृश्य पर पहुंचती हैं। हालांकि इस फुटेज की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

कार में आग लगने से हुई मौत
एक अज्ञात कानून प्रवर्तन अधिकारी ने पुष्टि की कि मास्को क्षेत्र के ओडिंटसोवो जिले में एक राजमार्ग पर एक कार में आग लग गई थी, लेकिन आगे कोई विवरण नहीं दिया। अभी तक रूसी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

सरकार में आधिकारिक पद नहीं होने के बावजूद, डुगिन के पिता रूसी राष्ट्रपति के करीबी सहयोगी हैं और उन्हें 'पुतिन का रासपुतिन' भी कहा जाता है।

 

पत्रकार और टिप्पणीकार थीं दरिया डुगिन
दार्शनिक की बेटी दरिया डुगिन खुद एक प्रमुख पत्रकार और टिप्पणीकार थीं जिन्होंने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का समर्थन किया था। अलेक्जेंडर डुगिन के अति-राष्ट्रवादी लेखन को व्लादिमीर पुतिन के विश्वदृष्टि को गहराई से आकार देने का श्रेय दिया जाता है और वह यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से निकटता से जुड़ा हुआ है।

इससे पहले, विचारक ने यूक्रेन के प्रति रूसी आक्रामकता के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया था। उन्हें 2014 में क्रीमिया के मास्को के कब्जे में उनकी कथित संलिप्तता के लिए 2015 में अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत रखा गया था।

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बांग्लादेश में धर्मों से परे, सभी के पास समान अधिकार : शेख हसीना

 ढाका (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि देश में हिंदू समुदाय के पास भी उतने ही अधिकार हैं, जितने अधिकार खुद उनके पास हैं। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान ढाका में लगने वाले मंडपों की संख्या पश्चिम बंगाल में लगने वाले मंडपों की तुलना में कहीं अधिक होती है। हसीना जन्माष्ट्मी के अ‍वसर पर हिंदू समुदाय के नेताओं से मुखातिब हुईं और अन्य धर्मों में विश्वास रखने वाले लोगों से अनुरोध किया कि वे अपने आपको अल्पसंख्यक न मानें। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में धर्मों से परे, सभी के पास समान अधिकार हैं।

हसीना ने कहा, हम चाहते हैं कि सभी धर्मों के लोग समान अधिकारों के साथ रहें। आप इस देश के लोग हैं, आपको यहां समान अधिकार प्राप्त हैं, आपके पास भी वही अधिकार हैं जो मेरे पास हैं। हसीना ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर और चट्टोग्राम में जेएम सेन सभागार में हुए कार्यक्रमों में डिजिटल माध्यम से शामिल हुईं।

उन्होंने कहा कि हम भी आपको इसी तरह देखना चाहते हैं। कृपया स्वयं को दूसरों से कम न समझें। आप इस देश में पैदा हुए हैं। आप इस देश के नागरिक हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि कहा कि दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान ढाका में लगने वाले मंडपों की संख्या पश्चिम बंगाल में लगने वाले मंडपों की तुलना में कहीं अधिक होती है।

हसीना ने इस बात पर दुख जाहिर किया कि जब भी कोई अवांछित घटना होती है तो उसे इस तरह बढ़चढ़ा कर पेश किया जाता है मानो बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के पास कोई अधिकार ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और अवामी लीग किसी भी धर्म के लोगों को तवज्जो न देने में विश्वास नहीं करती । उन्होंने कहा, मैं साफ कह सकती हूं। हमारी सरकार इसे ले कर पूरी तरह सतर्क है। मैं इसका आपको आश्वासन दे सकती हूं।

साल 2022 की जनगणना के अनुसार बांग्लादेश में हिंदू समुदाय दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय है। 16 करोड़ से अधिक आबादी वाले बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 7.95 प्रतिशत है।

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'पिच ब्लैक' में शामिल होने ऑस्ट्रेलिया पहुंचा भारतीय वायुसेना का दल, बढ़ी चीन की टेंशन...

 डार्विन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। एलएसी में भारत-चीन के बीच तनातनी के दौरान भारतीय वायुसेना के एक दल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले द्विवार्षिक वायुसैनिक अभ्यास पिच ब्लैक 2022 में हिस्सा लेने के लिए अपने सुखोई लड़ाकू विमानों के साथ डार्विन पहुंच गया है। भारत के इस सैन्य अभ्यास में शामिल होने से चीन की टेंशन बढ़ गई है।

क्वाड देशों के बीच कूटनीति-रणनीतिक रिश्तों के साथ बढ़ते सैन्य सहयोग के तहत भारतीय वायुसेना ऑस्ट्रेलिया में होने वाले द्विवार्षिक वायुसैनिक अभ्यास पिच ब्लैक 2022 में हिस्सा लेने के लिए अपने सुखोई लड़ाकू विमानों के साथ डार्विन पहुंच गई है। रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स की ओर से आयोजित 16 देशों के इस वायुसेना अभ्यास में मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया ही नहीं क्‍वाड के चारों देश मेजबान ऑस्ट्रेलिया, भारत, अमेरिका और जापान की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच मजबूत होते रिश्ते जाहिर तौर पर चीन को असहज करते हैं।

खास बात यह है कि इस अभ्यास में इनके साथ ही जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे यूरोप के प्रमुख देश भी शिकरत कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के शहर डार्विन में 19 अगस्त से आठ सितंबर 22 तक पिच ब्लैक अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है। यह वायुसेना अभ्यास लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट वारफेयर पर केंद्रित होगा। चार साल बाद हो रहे इस अभ्यास का पिछला संस्करण 2018 में आयोजित हुआ था और कोविड के कारण 2020 में इसका आयोजन रद हो गया था। इस वर्ष के अभ्यास में इन तमाम देशों की वायु सेनाओं के 100 से अधिक विमान और 2500 वायुसैनिक कर्मी हिस्सा ले रहे हैं।

वायुसेनाओं की लड़ाकू क्षमता बढ़ेगी
ग्रुप कैप्टन वाईपीएस नेगी के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना की टुकड़ी में 100 से अधिक वायु योद्धा अभ्यास में शामिल होने के लिए ऑस्टेलिया पहुंच गया है। भारतीय वायुसेना के चार सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान और दो सी-17 विमान इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे और इस दौरान जटिल वातावरण में बहु-डोमेन हवाई युद्ध मिशन करेंगे। अभ्यास के दौरान भाग लेने वाली अन्य वायु सेनाओं के साथ सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान भी होगा। इस वर्ष, भाग लेने वाले कई देशों के बीच हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सहयोग भी किए जाएंगे और इससे वायुसेनाओं की लड़ाकू क्षमता बढ़ती है।

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भारत ने रूस से तेल खरीदने के अपने रुख का कभी बचाव नहीं किया: जयशंकर

 बैंकॉक (छत्तीसगढ़ दर्पण)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले की अमेरिका और दुनिया के अन्य देश भले ही सराहना न करें, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है, क्योंकि नयी दिल्ली ने अपने रुख का कभी बचाव नहीं किया, बल्कि उन्हें यह एहसास कराया कि तेल एवं गैस की अनुचित रूप से अधिक कीमतों के बीच सरकार का अपने लोगों के प्रति क्या दायित्व है।

जयशंकर भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की नौवीं बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को यहां पहुंचे और उन्होंने एक समारोह में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। जयशंकर ने भारतीय समुदाय के साथ मुलाकात के दौरान यूक्रेन एवं रूस के मध्य जारी युद्ध के बीच, रूस से कम दाम पर तेल खरीदने के भारत के फैसले का बचाव किया और कहा कि भारत के कई आपूर्तिकर्ताओं ने अब यूरोप को आपूर्ति करना शुरू कर दिया है, जो रूस से कम तेल खरीद रहा है।

उन्होंने कहा कि तेल की कीमत अनुचित रूप से अधिक हैं और यही हाल गैस की कीमत का है। उन्होंने कहा कि एशिया के कई पारंपरिक आपूर्तिकर्ता अब यूरोप को आपूर्ति कर रहे हैं, क्योंकि यूरोप रूस से कम तेल खरीद रहा है। जयशंकर ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, आज स्थिति ऐसी है कि हर देश अपने नागरिकों के लिए सर्वश्रेष्ठ सौदा करने की कोशिश करेगा, ताकि वह इन उच्च कीमतों का असर झेल सके और हम यही कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत रक्षात्मक तरीके से ऐसा नहीं कर रहा है। जयशंकर ने कहा, हम अपने हितों को लेकर बहुत खुले एवं ईमानदार रहे हैं। मेरे देश में प्रति व्यक्ति आय दो हजार डॉलर है। वे लोग ऊर्जा की अत्यधिक कीमत को वहन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना उनका दायित्व एवं नैतिक कर्तव्य है कि भारत को सर्वश्रेष्ठ सौदा मिले।

रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, मुझे लगता है कि न केवल अमेरिका बल्कि अमेरिका समेत सभी जानते हैं कि हमारी क्या स्थिति है और वे इस बारे में अब आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने कहा, जब आप खुलकर और ईमानदारी से अपनी बात रखते हैं, तो लोग उसे स्वीकार कर लेते हैं।

जयशंकर ने कहा, वे हमेशा संभवत: उसकी सराहना नहीं करेंगे, लेकिन जब आप बात करते हैं और चालाकी करने की कोशिश नहीं करते, जब आप बिल्कुल सीधे तरीके से अपने हित सामने रखते हैं, तो मुझे लगता है कि दुनिया वास्तविकता को काफी हद तक स्वीकार कर लेती हैं।

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शहबाज शरीफ एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी से कर सकते हैं मुलाकात

 इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ उज्बेकिस्तान में अगले महीने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक कर सकते हैं। खबर के मुताबिक, राष्ट्रपति शी के समरकंद में 15 और 16 सितंबर को होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद है।

एससीओ के सदस्य देशों में पाकिस्तान, चीन, रूस, भारत और मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान तथा किर्गिस्तान शामिल हैं। सूत्रों के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री शहबाज के बीच एससीओ शिखर वार्ता से इतर एक द्विपक्षीय बैठक होने की योजना है।

 
 
 

बहरहाल, अभी आधिकारिक तौर पर यह साफ नहीं हुआ है कि राष्ट्रपति शी खुद शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे या नहीं। कुछ खबरों से संकेत मिलता है कि वह कोविड-19 संबंधी सख्त प्रोटोकॉल के कारण वर्चुअल रूप से शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि पाकिस्तान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शहबाज के बीच द्विपक्षीय बैठक की संभावना भी तलाश रहा है। हालांकि, अभी कुछ तय नहीं है।

 
 
 

रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने एक अनौपचारिक बैठक में पाकिस्तान के अपने समकक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी को मॉस्को की यात्रा का निमंत्रण दिया है।

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स्कॉटलैंड में मासिक धर्म उत्पाद नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाने संबंधी कानून लागू

 लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। स्कॉटलैंड में माहवारी उत्पाद नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाने संबंधी कानून लागू हो गया है। स्कॉटलैंड सरकार ने बताया कि वह ‘पीरियड प्रोडक्ट एक्ट’ (माहवारी उत्पाद कानून) लागू होते ही दुनिया की पहली ऐसी सरकार बन गई है, जो मासिक धर्म संबंधी उत्पादों तक नि:शुल्क पहुंच के अधिकार की कानूनी रूप से रक्षा करती है।

इस नए कानून के तहत, विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों एवं स्थानीय सरकारी निकायों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे अपने शौचालयों में टैम्पोन और सैनिटरी नैपकिन समेत माहवारी संबंधी विभिन्न उत्पाद उपलब्ध कराएं।

स्कॉटलैंड सरकार ने शैक्षणिक संस्थाओं में माहवारी संबंधी उत्पाद नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए 2017 से लाखों रुपए पहले ही खर्च किए हैं, लेकिन कानून लागू होने से अब यह कानूनी अनिवार्यता बन गया है।

इसके अलावा एक मोबाइल फोन ऐप्लीकेशन भी उपलब्ध कराया गया है, जिसकी मदद से स्थानीय पुस्तकालय या सामुदायिक केंद्र जैसे ऐसे निकटतम स्थान का पता लगाया जा सकता है, जहां से माहवारी संबंधी उत्पाद लिए जा सकते हैं।

स्कॉटलैंड की सामाजिक न्याय मंत्री शोना रोबिसन ने कहा, माहवारी संबंधी उत्पाद नि:शुल्क उपलब्ध कराना समानता एवं गरिमा के लिए अहम है और इससे इन उत्पादों तक पहुंच की वित्तीय बाधा दूर होती है। यह विधेयक 2020 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

 

 
 
 
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अंतरराष्ट्रीय समुदाय को खुश करने में जुटा तालिबान

 काबुल (छत्तीसगढ़ दर्पण)। तालिबान के शासन की वर्षगांठ पर, कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने वैश्विक नेताओं के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तालिबान सरकार को मान्यता देने और तालिबान के साथ सहयोग करने का आग्रह किया। खान मुत्ताकी ने एक बयान में कहा, 'हम सभी को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान और नई सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए। मुत्ताकी ने यह टिप्पणी 15 अगस्त को इस्लामिक अमीरात की सत्ता में वापसी की पहली वर्षगांठ पर आयोजित एक समारोह में की थी।

इसके अलावा, मुत्ताकी ने दोहा समझौते पर प्रकाश डाला और कहा कि अफगानिस्तान संयुक्त राज्य अमेरिका सहित किसी भी देश के लिए खतरा नहीं है, जिस पर कतर में शांति वार्ता के दौरान सहमति बनी थी।

 
 
 

इस बीच, दूसरे उप प्रधानमंत्री, अब्दुल सलाम हनफ़ी और इस्लामिक अमीरात के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने उन उपलब्धियों के बारे में बात की जो उनके नेतृत्व ने अफगान लोगों और राष्ट्र के लिए लाईं। पिछले एक साल में, तालिबान के शासन ने कई अफ़गानों को देश से भागने और पड़ोसी देशों में शरण लेने के लिए मजबूर किया है। पिछले साल काबुल में तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से अभूतपूर्व पैमाने के एक राष्ट्रव्यापी आर्थिक, वित्तीय और मानवीय संकट ने मानवाधिकारों की स्थिति को बढ़ा दिया है।

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गोटाबाया राजपक्षे अगले सप्ताह श्रीलंका लौटने के लिए तैयार

 कोलंबो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे अगले सप्ताह द्वीप राष्ट्र लौटने के लिए तैयार हैं। बता दें कि श्रीलंका में बिगड़े जुलाई में  उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया था, जिसके कारण वह देश छोड़ कर चले गए थे। रूस में श्रीलंका के पूर्व राजदूत उदयंगा वीरातुंगा जो गोटाबाया से भी संबंधित हैं, ने संकेत दिया है कि राजपक्षे 24 अगस्त को देश लौट आएंगे।

श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिसके कारण देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके कारण राजपक्षे देश छो़ड़ कर विदेश भागने के लिए मजबूर हो गए थे और पिछले महीने अपना इस्तीफा भी सौंप दिया था।

राजपक्षे की वापसी पर एक सवाल के जवाब में, वीरतुंगा ने कहा, तारीख बदल सकती है। आज मैं ये जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, लेकिन अगर वह बाद में तारीख बदलते हैं तो मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता।

 

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नए भारत के निर्माण में अहम साझेदार होगा अमेरिका : संधू

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत समृद्धि की नयी ऊंचाइयों पर पहुंचने की इच्छा रखता है और अमेरिका अगले 25 वर्षों में उसकी यात्रा में अहम साझेदार होगा। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका की साझेदारी दोनों देशों तथा दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक बन गयी है।

संधू ने कहा, चूंकि भारत सकारात्मक प्रगति कर रहा है तो हमें भविष्य की पीढ़ियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए और काम करना पड़ेगा। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की है...अगले 25 वर्षों का सफर एक नए भारत का निर्माण करेगा। इस ‘अमृत काल’ का लक्ष्य समृद्धि की नयी ऊंचाइयों पर पहुंचना है।

उन्होंने सोमवार को भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर इंडिया हाउस में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, अमेरिका इस यात्रा में भारत के लिए एक अहम साझेदार होगा। संधू ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडन की अगुवाई में भारत-अमेरिका संबंध दोनों देशों के लिए तथा दुनिया के लिए सबसे अहम संबंधों में से एक बन गए हैं। हम वैश्विक शांति, स्थिरता और मानव विकास के लिए लगातार, मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारतीय प्रवासी समुदाय एक अहम स्तंभ बना रहेगा। इस कार्यक्रम में कुचिपुड़ी, ओडिशी, कत्थक और भरतनाट्यम समेत भारतीय शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियों के साथ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय मूल के छात्रों ने भाग लिया। सीनेट और प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठ सदस्यों समेत अमेरिका के सभी नेताओं और उद्योग, कला, विज्ञान आदि क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने इस मौके पर अपनी शुभकामनाएं दीं।

बाद में एक कार्यक्रम में संधू ने कहा, 1947 में जब भारत आजाद हुआ था तो चुनौतियों से निपटने की उसकी क्षमताओं पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आयी। 75 वर्षों बाद भारत यहां है, अपने तथा मानवता के भविष्य के लिए मजबूत, उम्मीद और आशा से भरा। अमेरिका की राजधानी में हुए इस कार्यक्रम में चुनिंदा प्रभावशाली लोग शामिल हुए। संधू ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि भारत अनिश्चितताओं और जटिलताओं वाले क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता का प्रकाशस्तंभ रहा है।

भारतीय राजदूत ने कहा कि आजादी से पहले 50 वर्षों तक भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर एक प्रतिशत से कम रही और आज इस दशक में यह दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। इस समारोह में अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन ताइ मुख्य अतिथि थीं।

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अब बेरोकटोक पेंटागन जा सकते हैं भारतीय रक्षा अताशे : केन्डाल

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारतीय रक्षा अताशे अब बिना किसी रोक-टोक (अनएस्कॉर्ट) के पेंटागन जा सकते हैं।

रक्षा अताशे आमतौर पर राजनयिक मिशन से संबद्ध एक सैन्य विशेषज्ञ होता है। अमेरिकी वायु सेना के सेक्रेटरी फ्रैंक केन्डाल ने अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू की ओर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सोमवार को ‘इंडिया हाउस’ में आयोजित भोज के दौरान कहा कि इस तरह का कदम उस भरोसे और सहयोग को रेखांकित करता है जो अमेरिका और भारत के बीच हैं।

 
 
 

केन्डाल ने कहा, भारतीय (रक्षा) अताशे टीम अब बेरोकटोक पेंटागन में जा सकती है। यह अहम रक्षा साझेदार के तौर पर भारत के साथ हमारे संबंधों की शुरुआत है। उन्होंने कहा, अगर आपको नहीं लगता कि पेंटागन तक बिना बाधा के पहुंच बड़ी बात है तो बता दूं कि मैं पेंटागन में अनुरक्षक (एस्कॉर्ट) के बिना नहीं जा सकता।

अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन में जाने की अनुमति पाना बेहद मुश्किल काम माना जाता है। यहां तक की अमेरिकी नागरिक भी उच्च स्तरीय सुरक्षा मंजूरी के बिना वहां नहीं जा सकते। केन्डाल ओबामा प्रशासन के दौरान भारतीय मुद्दों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि तभी से यह इच्छा थी कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में संबंध मजबूत हों।

 
 
 

उन्होंने कहा, भारत वह देश है जिसके साथ हम किसी अन्य देश की तुलना में ज्यादा अभ्यास करते हैं। हमारे दीर्घकालिक करीबी संबंध हैं और हम इसे बनाने तथा मजबूत करने में सफल रहे हैं....। केन्डाल ने कहा कि द डिफेंस ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी संबंधी पहल मजबूत हुई है।

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अमरीका में राष्‍ट्रपति जो. बाइडेन ने जलवायु और स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कानून पर हस्‍ताक्षर किए

 वाशिंटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य देखभाल व्‍यय संबंधी कानून पर हस्ताक्षर कर दिये हैं। इस कानून का उद्देश्य दवाओं की कीमतों में बदलाव लाना है। खबरों के अनुसार निगमों पर कम से कम 15 फीसदी कर लगेगा। व्हाइट हाउस के अनुसार, 740 अरब डॉलर का बिल देश के इतिहास में जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की सबसे बड़ी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक दशक में लगभग 375 अरब डॉलर का निवेश करेगी। व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि बाइडेन की मुद्रास्फीति में कमी अधिनियम 2030 में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लगभग एक अरब टन कम कर देगा।

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भारत ने चार वॉलन्‍टरी ट्रस्‍ट फंड में चार लाख डॉलर का योगदान किया

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत ने चार वॉलन्‍टरी ट्रस्‍ट फंड में चार लाख डॉलर का योगदान किया है। यह राशि संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार के वैश्विक मानव अधिकार प्रोत्‍साहन और संरक्षण के सहयोग में दी गई है। जिनेवा में संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के स्‍थायी मिशन ने एक ट्वीट में कहा है कि यह योगदान इस संबंध में भारत की प्रतिबद्धता दर्शाता है।

यह राशि चार ट्रस्‍ट फंड, वॉलन्‍टरी फंड फॉर विक्टिम्‍स ऑफ टॉर्चर, द वॉलन्‍टरी फंड फॉर टेक्‍नीकल कॉपरेशन, द वॉलन्‍टरी फंड फॉर फाइनेंसियल एण्‍ड टेक्‍नीकल असिसटेंस फॉर द इम्‍पलीमेंटेशन ऑफ यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्‍यू और द वॉलन्‍टरी टेक्‍नीकल असिसटेंस ट्रस्‍ट फंड टू सपोर्टस द पार्टिपेसन्‍स ऑफ एल डी सी एण्‍ड एस आई डी इन वर्क ऑफ काउन्‍सिल को दिया गया है।

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ईरान ने परमाणु समझौता वार्ता के अंतिम मसौदे पर अंतिम प्रतिक्रिया दी

 दुबई (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  ईरान ने कहा कि उसने विश्व शक्तियों के साथ अपने परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए तैयार अंतिम मसौदे पर लिखित प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने इस प्रतिक्रिया के संबंध कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन संकेत दिया कि ईरान अब भी यूरोपीय संघ की मध्यस्थता के प्रस्ताव को नहीं स्वीकार करेगा जबकि ऐसा ना करने पर बातचीत आगे ना बढ़ने की चेतावनी दी गई है।

खबर के अनुसार,  तीन मुद्दों को लेकर विवाद है, अमेरिका ने इनमें से दो मामलों में लचीलापन दिखाने का मौखिक रूप से आश्वासन दिया है, लेकिन इसे लिखित रूप में भी दिया जाना चाहिए। तीसरा मुद्दा (समझौते की) निरंतरता की गारंटी से संबंधित है, जो अमेरिका के यथार्थवाद पर निर्भर करता है। 

राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी के नेतृत्व में ईरान ने समझौते तक पहुंचने में देरी के लिए बार-बार अमेरिका को दोषी ठहराने की कोशिश की है। ऐसा कहा जा रहा था कि ईरान को सोमवार तक इस पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया था। यूरोपीय संघ ने ईरान की प्रतिक्रिया दिए जाने के संबंध में तत्काल कोई पुष्टि नहीं की है।

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि अमेरिका अपनी प्रतिक्रिया यूरोपीय संघ के साथ साझा करेगा। प्राइस ने कहा, हालांकि, हम (यूरोपीय संघ के) इस मौलिक बिंदु से सहमत हैं, और वह यह है कि जिस पर बातचीत की जा सकती है, उस पर बातचीत हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि ईरान 2015 के परमाणु समझौते से परे जाकर अस्वीकार्य मांग कर रहा है। ईरान ने 2015 में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, रूस और चीन के साथ परमाणु समझौता किया था। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा की थी। इसके बाद से ईरान ने एक बार फिर अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार करना शुरू कर दिया।

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ईरान ने सलमान रुश्दी पर हुए हमले में अपनी संलिप्तता से किया इनकार

 तेहरान (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ईरान की सरकार के एक अधिकारी ने लेखक सलमान रुश्दी पर हुए हमले में तेहरान का हाथ होने की बात से सोमवार को इनकार कर दिया। रुश्दी पर शुक्रवार को हुए हमले के बाद ईरान की ओर से जारी यह पहला सार्वजनिक बयान है।

ईरान हालांकि देश की 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद के वर्षों में असंतुष्टों को निशाना बनाने के लिए विदेशों में इस तरह के अभियानों को अंजाम देने से इनकार करता रहा है, लेकिन कई अभियोजकों और पश्चिमी सरकारों ने तेहरान को इस तरह के हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा,  हमें नहीं लगता कि अमेरिका में सलमान रुश्दी पर हुए हमले को लेकर उनके तथा उनके समर्थकों के अलावा किसी और को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। कनानी ने कहा, किसी को ईरान पर ऐसे आरोप लगाने का अधिकार नहीं है।

गौरतलब है कि रुशदी (75) पर शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान न्यूजर्सी के हादी मतार (24) ने चाकू से हमला कर दिया था। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे लक्षित, बिना किसी उकसावे के और एक साजिश के तहत किया गया हमला बताया है। लेखक रुश्दी को किताब द सैटेनिक वर्सेज लिखने के 30 साल से अधिक समय बाद तक इस्लामी चरमपंथियों से मौत की धमकियों मिल रही हैं।

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्ला ख़ामेनेई ने उन्हें मार डालने की मांग करते हुए एक फतवा भी जारी किया था। एक ईरानी फाउंडेशन ने लेखक के लिए 30 लाख डॉलर से अधिक का इनाम घोषित कर रखा है। कनानी ने कहा कि ईरान के पास अमेरिकी मीडिया में आ रही खबरों के अलावा इस संबंध में अन्य कोई जानकारी नहीं है।

कनानी ने कहा कि पश्चिम का हमलावर के कृत्यों की निंदा करते हुए इस्लामी मान्यताओं के अपमान करने वाले के कृत्यों का महिमामंडन करना... यह एक विरोधाभासी रवैया है।

 

 

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रुश्दी ने अभिव्यक्ति, धर्म, प्रेस की स्वतंत्रता के सार्वभौमिक अधिकारों के लिए आवाज उठाई : ब्लिंकन

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिेकन ने रविवार को कहा कि सलमान रुश्दी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के सार्वभौमिक अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के सरकारी संस्थानों ने भारतीय मूल के लेखक के खिलाफ काफी समय तक हिंसा भड़काई और सरकारी मीडिया ने भी हाल ही में उन पर हुए हमले की निंदा नहीं की।

गौरतलब है कि रुश्दी (75) पर शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान न्यूजर्सी के 24 वर्षीय युवक ने चाकू से हमला कर दिया था। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे लक्षित, बिना किसी उकसावे के और एक साजिश के तहत किया गया हमला बताया है। ब्लिंकन ने एक बयान जारी कर कहा कि वे घातक हमले में घायल सलमान रुश्दी के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

उन्होंने कहा, एक साहित्यकार से कहीं अधिक सक्रिय भूमिका निभाते हुए रुश्दी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म या आस्था की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के सार्वभौमिक अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं। कानून प्रवर्तन अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। हालांकि, मुझे उन खतरनाक ताकतों का ख्याल आ रहा है, जो इन अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं, जिसमें नफरत भरे बयानों को बढ़ावा देना और हिंसा के लिए उकसाना शामिल है।

उन्होंने कहा, खासकर ईरान के सरकारी संस्थान कई पीढ़ियों से रुश्दी के खिलाफ हिंसा भड़का रहे हैं। ब्लिंकन ने कहा कि ईरान की सरकारी मीडिया ने भी रुश्दी पर हुए हमले की निंदा नहीं की और न ही कोई अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी इससे निपटने के लिए हर तरीका अपनाएंगे और इन खतरों के आगे घुटने नहीं टेकेंगे।

ब्लिंकन ने कहा, रुश्दी और दुनियाभर के वे सभी लोग, जिन्होंने इस तरह के खतरों का सामना किया है, हम उनके प्रति एकजुटता व्यक्त करते हैं। यही नहीं, हम एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रूप में उन लोगों के खिलाफ एकजुट होने की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं, जो इन सार्वभौमिक अधिकारों के लिए खतरा हैं।

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श्रीलंकाई नौसैना को डोर्नियर समुद्री टोही विमान सौंपेगा भारत

 कोलंबो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत यहां एक समारोह में श्रीलंकाई नौसेना को एक डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान सौंपेगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे भाग लेंगे। भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल एस एन घोरमडे कोलंबो में भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले के साथ श्रीलंकाई नौसेना को समुद्री निगरानी विमान सौंपेंगे। एडमिरल घोरमडे श्रीलंका की दो दिवसीय यात्रा पर हैं।

श्रीलंकाई वायु सेना के प्रवक्ता कैप्टन दुशन विजयसिंघे ने बताया कि राष्ट्रपति विक्रमसिंघे इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह समारोह कोलंबो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से सटे कातुनायके में श्रीलंका वायु सेना के अड्डे पर आयोजित किया जाएगा। श्रीलंकाई अधिकारियों ने बताया कि भारत और श्रीलंका के बीच नयी दिल्ली में 2018 में हुए रक्षा संवाद के दौरान श्रीलंका ने अपनी समुद्री निगरानी क्षमताएं बढ़ाने के लिए भारत से दो डोर्नियर टोही विमान हासिल करने की संभावनाओं पर बातचीत की थी।

इस विमान को श्रीलंकाई वायु सेना के 15 सदस्य ही उड़ा पाएंगे, जिन्हें चार महीनों तक भारत में खासतौर से प्रशिक्षण दिया गया है। इस दल में पायलट, पर्यवेक्षक, इंजीनियरिंग अधिकारी और टेक्नीशियन शामिल हैं। श्रीलंकाई वायु सेना से जुड़ा भारत सरकार का तकनीकी दल इसकी निगरानी करेगा।

भारत द्वारा श्रीलंका को डोर्नियर विमान ऐसे समय में सौंपा जा रहा है जब एक दिन पहले चीनी जहाज ‘युआन वांग 5’ एक सप्ताह के लिए दक्षिणी बंदरगाह हंबनटोटा में रुका है। इस जहाज को 11 अगस्त को ही बंदरगाह पर पहुंचना था लेकिन श्रीलंकाई प्राधिकारियों से मंजूरी न मिलने के कारण इसके आने में देरी हुई।

श्रीलंका ने भारत की चिंताओं को देखते हुए चीन से इस जहाज को फिलहाल रोकने को कहा था। बहरहाल, शनिवार को कोलंबो ने जहाज को 16 अगस्त से 22 अगस्त तक बंदरगाह पर रुकने की मंजूरी दे दी।

 

 

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कोविड लैब लीक थ्योरी दम तोड़ चुकी है, हम कैसे जानते हैं कि वायरस वुहान के बाजार से आया

 सिडनी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पिछले महीने साइंस जर्नल में कोविड-19 महामारी की शुरुआती घटनाओं का सबसे विस्तृत अध्ययन प्रकाशित किया। साथ में, ये कागजात 2019 के उत्तरार्ध के दौरान वुहान शहर में हुई घटना की एक सुसंगत साक्ष्य-आधारित तस्वीर पेश करते हैं। यह माना जा सकता है कि महामारी संभवत: वहीं से शुरू हुई जहां पहले मामलों का पता चला था - हुआनन सीफूड होलसेल मार्केट में।

साथ ही यह इस विचार को दरकिनार करता है कि वायरस एक प्रयोगशाला से निकला। सबसे पहले ज्ञात कोविड मामलों के भौगोलिक स्थानों के विश्लेषण - दिसंबर 2019 तक -से हुआनान बाजार के आसपास एक मजबूत क्लस्टरिंग का पता चला। यह न केवल उन लोगों के लिए सच था जो बाजार में काम करते थे या आते थे, बल्कि उन लोगों के लिए भी जिनका इससे कोई संबंध नहीं था।

 

हुआनान बाजार महामारी का केंद्र था। वहां इसका उत्पत्ति के बाद से, सार्स-कोव-2 वायरस तेजी से 2020 की शुरुआत में वुहान के अन्य स्थानों और फिर दुनिया के बाकी हिस्सों में फैल गया।

हुआनन बाजार फुटबॉल के दो मैदानों के आकार का एक इनडोर स्थान है। इसका नाम सीफूड है और यह शब्द इसके बारे में भ्रामक छाप छोड़ता है। जब मैंने 2014 में बाजार का दौरा किया, तो विभिन्न प्रकार के जीवित वन्यजीव बिक्री के लिए थे, जिनमें रैकून कुत्ते और मस्करैट शामिल थे।

 

उस समय सुझाव दिया था कि हम बाजार के इन जानवरों का वायरस के लिए नमूना लें। इसके बजाय, उन्होंने पास के वुहान सेंट्रल अस्पताल में एक वायरोलॉजिकल निगरानी अध्ययन केन्द्र स्थापित किया, जिसने बाद में कई शुरुआती कोविड रोगियों की देखभाल की।

2019 में हुआनन बाजार में वन्यजीव भी बिक्री पर थे। चीनी अधिकारियों द्वारा एक जनवरी 2020 को बाजार बंद करने के बाद, जांच टीमों ने सतहों, दरवाजों के हैंडल, नालियों, जमे हुए जानवरों और अन्य स्थानों के नमूने लिए।

 

बाद में सार्स-कोव-2 के लिए सकारात्मक परीक्षण किए गए अधिकांश नमूने बाजार के दक्षिण-पश्चिमी कोने से थे। 2014 में अपनी यात्रा के दौरान मैंने जो वन्यजीव बिक्री के लिए देखे थे, वे दक्षिण-पश्चिमी कोने में ही थे। यह वायरस के लिए जानवरों से मनुष्यों तक पहुंचने का एक सरल रास्ता बनाता है।

प्रयोगशाला रिसाव सिद्धांत एक निराधार आरोप के रूप में खड़ा है। यदि प्रयोगशाला की जांच में रिसाव का कोई सबूत नहीं मिला, तो इसमें शामिल वैज्ञानिकों पर संबंधित सामग्री को छिपाने का आरोप लगाया जाएगा। कोविड की उत्पत्ति पर बहस ने ऐसे घाव खोल दिए हैं जो शायद कभी ठीक नहीं होंगे। इसने विज्ञान में अविश्वास पैदा किया है और विभाजनकारी राजनीतिक राय को हवा दी है। व्यक्तिगत वैज्ञानिकों को उनकी सरकारों के पाप ढोने पड़ रहे हैं। लगातार आरोप-प्रत्यारोप और उंगली उठाने के खेल ने वायरल उत्पत्ति का पता लगाने की संभावना को और भी कम कर दिया है।
 
वैश्विक सहयोग प्रभावी महामारी की रोकथाम का आधार है, लेकिन हम संबंध बनाने के बजाय नष्ट करने के खतरे में हैं। हम 2019 की तुलना में महामारी के लिए भी शायद कम तैयार हैं। राजनीतिक बाधाओं और एक लार टपकाने वाले मीडिया के बावजूद, पिछले दो वर्षों में सार्स-कोव-2 के लिए एक प्राकृतिक पशु उत्पत्ति के प्रमाण में वृद्धि हुई है। इसे नकारना हम सभी को जोखिम में डालता है।
 

 

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