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भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के सम्मान में उसके लोगों के साथ है अमेरिका : बाइडन

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के सम्मान में उसके लोगों के साथ है और दोनों देश अपरिहार्य साझेदार हैं। बाइडन ने एक बयान में कहा, करीब 40 लाख गौरवान्वित भारतीय-अमेरिकियों समेत दुनियाभर के लोगों द्वारा 15 अगस्त पर भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने के साथ ही अमेरिका महात्मा गांधी के सच और अहिंसा के चिरस्थायी संदेश द्वारा निर्देशित भारत की लोकतांत्रिक यात्रा के सम्मान में उसके लोगों के साथ है।

उन्होंने कहा, इस साल, हम अपने महान लोकतंत्रों के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ भी मना रहे हैं। भारत और अमेरिका अपरिहार्य साझेदार हैं और अमेरिका-भारत की सामरिक साझेदारी कानून के राज और मानव आजादी तथा प्रतिष्ठा को बढ़ावा देने की हमारी साझा प्रतिबद्धता पर टिकी है।

 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, हमारी साझेदारी दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों से और मजबूत हुई है। अमेरिका में जीवंत भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने हमें और नवोन्मेषी, समावेशी और मजबूत देश बनाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों लोकतांत्रिक देश नियम आधारित व्यवस्था की रक्षा करने, वृहद शांति, समृद्धि और सुरक्षा मजबूत करने, मुक्त एवं खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए एकजुट रहेंगे तथा दुनिया के सामने आ रही चुनौतियां से निपटते रहेंगे।

 

अमेरिका के विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने भी एक अलग बयान में भारत के लोगों को आजादी की 75वीं वर्षगांठ की बधाई दी। उन्होंने कहा, यह वर्ष हमारे दोनों देशों के लिए खासतौर से सार्थक है क्योंकि हम एक अहम उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं : कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष। हमारी सामरिक साझेदारी जलवायु से लेकर व्यापार और हमारे लोगों के बीच परस्पर जीवंत संबंधों तक हर क्षेत्र से जुड़ी है।

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सलमान रुश्दी पर हुए हमले से ईरान ने पल्ला झाड़ा, इन लोगों पर लगाया दोष, पद्म लक्ष्मी ने बताया बुरा सपना

 

वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चर्चित भारतवंशी लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में हुए हमले में हाथ होने से ईरान ने इनकार किया है। तेहरान ने इस घटना में उसकी किसी भूमिका से साफ इनकार किया है। रुश्दी पर शुक्रवार को हुए हमले के बाद ईरान की ओर से जारी यह पहला सार्वजनिक बयान है। सलमान रुश्दी (75) पर गत 12 अगस्त को न्यूयॉर्क में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हादी मतार नाम के एक युवक ने चाकू से हमला कर दिया था। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। रुश्दी का अमेरिका के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।

ईरान पर ऐसे आरोप लगाना सही नहीं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा, हमें नहीं लगता कि अमेरिका में लेखक सलमान रुश्दी पर हुए हमले को लेकर उनके तथा उनके समर्थकों के अलावा किसी और को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। कनानी ने कहा, किसी को ईरान पर ऐसे आरोप लगाने का अधिकार नहीं है। इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने दावा किया था कि ईरान के सरकारी संस्थानों ने लेखक रुश्दी के खिलाफ काफी समय तक हिंसा भड़काई और सरकारी मीडिया ने भी हाल ही में उन पर हुए हमले की निंदा नहीं की।

हिज्बुल्लाह ने भी किया इंकार
रुश्दी पर हुए हमले के बाद कुछ ईरानी अखबारों ने इस घटना को अंजाम देने वाले हादी मतार की प्रशंसा की थी, जबकि इस हमले का संदिग्ध आरोपी हादी मतार मूल रूप से लेबनान का रहने वाला है। लेबनान में ईरान समर्थित हथियारबंद समूह हिज्बुल्लाह का काफी असर है। बहरहाल हिज्बुल्लाह ने भी सलमान रुश्दी पर हमला करने वाले से कोई संबंध होने से साफ इनकार कर दिया है।

पद्म लक्ष्मी ने किया ट्वीट
वहीं सलमान रुश्दी की पूर्व पत्नी पद्मा लक्ष्मी ने लेखक की सेहत को लेकर राहत भरी जानकारी दी है, जिसके मुताबिक, सलमान रुश्दी अब काफी अच्छी तरह से रिकवर कर रहे हैं। पद्म लक्ष्मी ने सलमान रुश्दी के स्वास्थ्य में लगातार हो रहे सुधार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब वह अच्छा महसूस कर रही है क्योंकि सलमान वेंटीलेटर पर नहीं हैं। अपने ट्विटर अकाउंट पर, अमेरिकी टीवी शख्सियत पद्मा लक्ष्मी ने चाकू मारने के दिन को एक बुरा सपना बताया।

पूरी दुनिया में हो रही निंदा
इस बीच लेखक सलमान रुश्दी पर चाकू से हमला करने वाले 24 वर्षीय संदिग्ध हादी मतार को एक अदालत में पेश किया गया जहां उसने अपना दोष स्वीकार नहीं किया। वहीं जिला अटॉर्नी जेसन श्मिट ने शनिवार दोपहर को आरोपी की पेशी के दौरान रुश्दी को लगीं चोटों का विवरण भी अदालत को प्रदान किया। जिसके मुताबिक, लेखक की गर्दन के सामने कि दाहिने हिस्से में तीन घाव, पेट में चार और दाहिनी आंख और छाती के अलावा दाहिनी जांघ का एक घाव शामिल है। श्मिट ने कहा कि रुश्दी पर हमला पूर्वनियोजित था। इस बर्बरता पूर्ण हमले की विश्व के नेताओं और साहित्यकारों ने कड़े शब्दों में निंदा की है।
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चीन में सख्त कोविड नियमों से जनता परेशान, क्वारंटाइन के डर से भाग रहे लोग, वीडियो देखें

 

शंघाई (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन में कोरोना का कहर जारी है। अभी भी देश के कई इलाकों से कोविड-19 के केस निकल कर सामने आए हैं। वहां के हालात अच्छे नहीं हैं। वहीं, इन सबके बीच देश के व्यस्त शहरों में से एक शंघाई से एक बड़ी ही अजीब खबर निकल कर सामने आ रही है। शहर के एक IKEA स्टोर का यह मामला है। जहां क्वारंटाइन के डर से लोग स्टोर से भागते हुए दिख रहे हैं। यहां स्टोर में कोरोना का मामला सामने आया है।

कोरोना को लेकर मचा हंगामा
मामला शंघाई के जुहुई जिले की है, जहां एक IKEA स्टोर में एक ग्राहक के साथ आए छह साल के बच्चे में कोरोना के लक्षण पाए जाने के बाद वहां हलचल मच गई। खबर के मुताबिक, इस घटना के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने जुहुई जिले में स्थित स्टोर को बंद करने का प्रयास किया। इस दौरान सैकड़ों लोग जबरदस्ती बंद किए जा रहे दरवाजों को खोलकर सड़कों पर भाग खड़े हुए।

घटना के कई वीडियो सोशल मीडि.या पर शेयर किए गए
घटना के कई वीडियो चीन के ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म वीबो पर साझा किए गए जहां नेटिज़न्स ने देश की सख्त "शून्य-कोविड" रणनीति की आलोचना की। इस साल की शुरुआत में दो महीने के गंभीर लॉकडाउन के बाद, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने उन क्षेत्रों के फ्लैश लॉकडाउन का आदेश दिया है जहां कोरोना के सकारात्मक मामले या उनके करीबी संपर्कों का पता चला है।

क्या कहा शंघाई स्वास्थ्य आयोग उप निदेशक ने
शंघाई स्वास्थ्य आयोग उप निदेशक झाओ दंडन के मुताबिक, आईकिया स्टोर को अचानक बंद करने का आदेश ऐसे ही नहीं आया है। उन्होंने बताया कि, एक 6 साल का बच्चा जो तिब्बत में ल्हासा का दौरा करके स्टोर में पहुंचा था, वह बाद में कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद स्टोर को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया।

क्वारंटाइन में रहने की सलाह
झाओ के अनुसार, जो लोग आइकिया स्टोर और आसपास के क्षेत्रों में थे, उन्हें दो दिनों के लिए क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी गई। क्वारंटीन से बाहर निकलने के बाद संभावित मरीज को पांच दिनों तक स्वास्थ्य निगरानी में रखे जाने की बात कही गई।

400 लोगों का पीसीआर टेस्ट करवाने का आदेश जारी
शंघाई डेली ने बताया कि, छह साल के बच्चे के संपर्क में आने को लेकर करीब 400 लोगों का पीसीआर टेस्ट करवाने का आदेश जारी किया गया। बता दें कि, 1998 में अपना पहला फ्लैगशिप ज़ुहुई स्टोर खोलने के बाद स्वीडिश फ़र्नीचर रिटेलर Ikea के अब पूरे चीन में 35 आउटलेट हैं। बता दें कि, कोरोना महामारी के कारण चीन की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ा है। चीन की जनता ने लॉकडाउन का विरोध कर रही है। हालांकि, इसके बावजूद चीन ने कोरोना के प्रसार को कम करने के लिए शून्य कोविड नीति पर अड़ा हुआ है।
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अमेरिका नहीं रहा सपनों का देश? बड़ी संख्या में देश छोड़ यूरोप पलायन करने लगे लोग, वजह ये है


वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका को सपनों का देश कहा जाता है। भारत से भी सबसे अधिक लोग इसी देश जाकर बसते हैं। दुनिया के करोड़ों लोगों का सपना अमेरिकन ड्रीम्स को जीना है लेकिन फिर भी अमेरिकी लोग, अपने देश से पलायन कर यूरोप बस रहे हैं। जी हां। आप सही पढ़ रहे हैं। अमेरिकी लोगों को अब, दुनिया का सबसे ताकतवर देश रास नहीं आ रहा है। रिटायर होकर लोग अब स्पेन, पुर्तगाल, इटली, ग्रीस, फ्रांस जैसे देशों में जाकर बसने लगे हैं। बीते एक साल में यह आंकड़ा 45 फीसदी बढ़ चुका है।

अमेरिका में अपराध बेलगाम
इस पलायन के पीछे की मुख्य वजह अमेरिकी लोगों में असुरक्षा बताई जा रही है। अमेरिका का गन कल्चर अब लोगों को रास नहीं आ रहा है। अमेरिका में अपराध, विकासशील और पिछड़े देशों से भी ज्यादा है। वहां अपराध बेलगाम है और लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। आए दिन अमेरिका में फायरिंग की घटनाएं सामने आती हैं। साल 2020 में हत्या के आंकड़े 30 फीसदी तक बढ़ गए थे। उसके बाद से ये हर साल बढ़ते ही जा रहे हैं।

यूरोप में माहौल बेहतर
सीडीसी रिपोर्ट 2020 में दावा किया गया है कि अमेरिका में कुल 79 फीसदी अपराध की वजह हथियार हैं। अगर दूसरे देशों से इसकी तुलना की जाए तो कनाडा में गन कल्चर की वजह से 37 फीसदी अपराध होते हैं। ऑस्ट्रेलिया में यह आंकड़ा 13 फीसदी है, वहीं ब्रिटेन में यह महज 4 फीसदी है। आंकड़े बताते हैं कि क्यों यूरोपीय देश लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

अमेरिका में इलाज महंगा
इसके अलावा देश में महंगी शिक्षा, इलाज, डॉलर का मजबूत होना भी पलायन की वजह बताई जा रही है। डॉलर मजबूत होने के कारण वे दूसरे देशों में अधिक खर्च कर सकते हैं। वहीं, अमेरिका में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद उन्नत हैं, लेकिन सामान्य लोगों के लिए पहुंच से बाहर हैं। लोग चेकअप तक नहीं करवा पा रहे हैं। यूरोपीय देशों में वे कम पैसों में अपना इलाज करा सकते हैं।

यूरोप में कल्याणकारी योजनाएं
अमेरिका में बच्चों को पढ़ाना भी बेहद महंगा सौदा है। इसलिए कई लोग उच्च शिक्षा नहीं ले पाते हैं। दूसरे देशों में ये अपेक्षाकृत बेहद सस्ता है। एक सर्वे के मुताबिक अमेरिकी लोगों का मानना है कि अमेरिका में महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है, इसके बाद सबसे बड़ा मुद्दा गन कल्चर है। वहीं, यूरोपीय देशों की बात करें तो यहां अपराध कम हैं। कल्याणकारी योजनाएं अधिक हैं। अमेरिका की तुलना में बेहद कम कीमत पर घर मिल जाते हैं। कोरोना के बाद रिमोट वर्क कल्चर ने भी अमेरिकी लोगों को दूसरे देशों में शिफ्ट करना आसान बना दिया है। कई ऐसे लोग हैं जो यूरोपीय देशों में रहकर अमेरिकी कंपनियों का काम कर रहे हैं।
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Mass Extinction: महाविनाश के छठे दौर की ओर बढ़ रही पृथ्वी, इंसानी प्रजाति पर मंडराया खतरा

 

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। हाल ही में पृथ्वी अचानक बहुत ही तेजी से घूमने लगी थी। इतना ही नहीं बढ़ते तापमान और हो रहे जलवायु परिवर्तन के बाद पृथ्वी को लेकर वैज्ञानिक वक्त-वक्त पर खतरे के संकेत भी देते रहते हैं। इस बीच अब विशेषज्ञों ने दावा किया है कि पृथ्वी को महाविनाश का जल्दी ही सामना करना पड़ सकता है। पृथ्वी छठे सामूहिक विलोपन (Sixth mass extinction) यानी एक और महाविनाश की ओर बढ़ रही है।

पिछले बार डायनासोर गायब, इस बार खतरे में इंसान
साढ़े चार अरब साल पुरानी धरती ने अपनेपिछले 54 करोड़ सालों के दौरान अब तक पांच बड़े पैमाने पर विलुप्त होने की घटनाओं का सामना किया है। यानी की धरती पांच महाविनाशों को झेल चुकी है। अब माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन ग्रह को अगले विनाशकारी स्थिति की ओर ले जा रहा है। बताया जाता है कि इससे पहले 5वीं सामूहिक विलुप्ति की घटना में कई दूसरे जीवों के साथ धरती से डायनासोर गायब हो गए थे। वहीं इस बार अगर ऐसा होता है तो इस विलुप्त खतरे के शुरुआत में भी इंसान गायब हो सकता हैं।

वैज्ञानिकों ने किया कयामत के दिन की भविष्यवाणी
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अब कयामत के दिन की भविष्यवाणी के रूप में पृथ्वी 'छठे सामूहिक विलुप्त होने की घटना' की ओर बढ़ रही है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है ग्रह से टकराने वाली अगली सामूहिक विलुप्ति (महाविनाश) की घटना जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित होगी। हालांकि अब पृथ्वी को ऐसी स्थिति में आने की जरूरत होगी, जहां जलवायु परिवर्तन ग्रह को तेजी से नष्ट कर रहा है, और अब उसे बदला जा सकता है।

प्राग की चार्ल्स यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने जानिए क्या कहा?
प्राग की चार्ल्स यूनिवर्सिटी में इकोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डेविड स्टॉर्च ने लाइव साइंस को बताया कि "विलुप्त होने की वर्तमान दर विलुप्त होने की सामान्य दर से अधिक परिमाण के लगभग दो आदेश हैं। उन्होंने कहा कि इन अंतिम सामूहिक विलुप्त होने के दौरान पाया गया जलवायु परिवर्तन विलुप्त होने का एकमात्र कारण नहीं हो सकता है, लेकिन विलुप्त होने की दर उस समय हुए अन्य वैश्विक परिवर्तनों का परिणाम हो सकती है।"

महानिवाश के कुछ कदम दूर पृथ्वी
वहीं जापान में तोहोकू विश्वविद्यालय में पृथ्वी विज्ञान विभाग में प्रोफेसर कुनियो काहो ने समझाया कि जिस तरह से ग्रह गर्म हो रहा है, यह पृथ्वी को तेजी से नष्ट करने के लिए आवश्यक तापमान से केवल कुछ डिग्री दूर है, इसे ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा: "9C या 16.2F के औसत वैश्विक तापमान में वृद्धि, ग्लोबल वार्मिंग के साथ बड़े पैमाने पर विलुप्त होने के लिए आवश्यक है।"

ग्रहों के गर्म होने की वर्तमान दर से दोगुने से अधिक
इधर, यूके सरकार की वेबसाइट के अनुसार 1880 के बाद से संयुक्त भूमि और समुद्र के तापमान में 0.14F या 0.08C प्रति दशक की औसत दर से वृद्धि हुई है। यानी कि साल 1880 और 2022 के बीच लगभग दो डिग्री। हालांकि, 1981 के बाद से वृद्धि की औसत दर 0.18C या 0.32F है, जो कि ग्रहों के गर्म होने की वर्तमान दर से दोगुने से अधिक है। वहीं जापान के जलवायु वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी से यह भी निष्कर्ष निकला है कि अगर मौजूदा वक्त में तबाही आती है तो वह पिछले पांच घटनाओं की तरह नहीं होगी और साथ ही बताया गया है कि कम से कम कई शताब्दियों तक फिर ऐसा नहीं होगा।
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सलमान रुश्दी के बाद जेके राउलिंग को मिली जान से मारने की धमकी, ट्वीटर पर लिखा 'अगला नंबर तुम्हारा'

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के न्यूयोर्क में लेखक सलमान रुश्दी पर जानलेवा हमले के बाद अब हैरी पॉटर की लेखिका जेके राउलिंग को जान से मारने की धमकी मिली है। उन्हें ट्विटर पर एक यूजर ने जान से मारने की धमकी दी है। राउलिंग ने रुश्दी पर हुए हमले पर दुख व्यक्त किया था। राउलिंग ने ट्विटर पर एक यूजर के धमकी भरे मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। 

जेके राउलिंग ने कहा था कि सलमान रुश्दी पर हुए हमले से उन्हें काफी दुख हुआ है। वो उम्मीद करती हैं कि उपन्यासकार जल्द ठीक हो जाएंगे। राउलिंग के ट्वीट पर एक यूजर ने धमकी भरा कमेंट किया. यूजर ने लिखा, ‘यू आर नेक्स्ट’ यानी चिंता मत करो, आप अगली हैं।' राउलिंग ने ट्विटर सपोर्ट टीम को टैग किया और खतरे को देखते हुए मदद मांगी। जिस ट्विटर हैंडल ने राउलिंग को मौत की धमकी दी है, उसने न्यू जर्सी के हमलावर हादी मटर की तारीफ की है।

बता दें कि रुश्दी पर चाकू से हमला करने के आरोपी हदी मटर ने अपना अपराध स्वीकार नहीं किया है। न्यू जर्सी निवासी 24 वर्षीय मटर पर हत्या का प्रयास और हमला करने के आरोप लगाये गए हैं। न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि मटर ने अपना अपराध स्वीकार नहीं किया है और उसे चौटाउक्वा काउंटी जेल में रखा गया है।

 

 

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भारत में पहली बार आतंकरोधी अभ्यास में भाग लेगी पाकिस्तानी सेना, जानें इस बारे में सबकुछ

 

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तहत भारत द्वारा आयोजित आतंकवाद रोधी अभ्यास में पाकिस्तान भी शामिल होगा। पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, पाकिस्तानी और भारतीय सैन्य टुकड़ियां एक साथ आतंकवाद रोधी अभ्यास में हिस्सा लेंगे। यह पहली बार होगा जब पाकिस्तानी सेना, भारत में इस तरह के अभ्यास में हिस्सा लेगी।

भारत के मानेसर में होगा युद्धाभ्यास
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता असीम इफ्तिखार की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के हवाले से अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी ढांचे के तहत इस साल अक्टूबर में होने वाले अंतरराष्ट्रीय आंतकवाद रोधी अभ्यास में भाग लेगा। भारत इस साल शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी ढांचे की अध्यक्षता कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये अभ्यास भारत में अक्टूबर में मानेसर में आयोजित होने वाले हैं। चूंकि पाकिस्तान इसका सदस्य है, तो हम इसमें हिस्सा लेंगे।

पाकिस्तान के अलावा ये देश होंगे शामिल
हरियाणा के मानेसर में होने वाले इस अभ्यास में भारत के अलावा रूस, चीन, पाकिस्तान, ईरान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान हिस्सा लेगा। एससीओ के बैनर तले भारत और पाकिस्तान नौ सदस्यीय बीजिंग स्थित क्षेत्रीय निकाय का हिस्सा हैं।

370 हटने के बाद बिगड़े रिश्ते
5 अगस्त 2019 को भारत ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था। यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था। भारत के इस फैसले का पाकिस्तान ने विरोध जताया था। तब से दोनों दोनों के देशों के बीच तनाव है। तनाव को देखते हुए दोनों देशों की सेनाओं के बीच यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद पाकिस्तान ने राजनयिक संबंधों को डाउनग्रेड किया था और भारतीय राजदूत को निष्कासित कर दिया था। भारत ने पाकिस्तान से बार-बार कहा है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग था, है और रहेगा। भारत ने साथ ही यह भी कहा है कि वह आतंक, शत्रुता और हिंसा से मुक्त वातावरण में पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंध चाहता है।
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भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयार्क में जानलेवा हमला, हालत नाजुक...

 न्यूयार्क/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी (75) पर शुक्रवार को न्यूयार्क में चाकू से जानलेवा हमला हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक कार्यक्रम में व्याख्यान देने गए रुश्दी को हमलावर ने कई मुक्के मारे, इसके बाद चाकू से कई वार किए। चाकू प्रहार से उनकी गर्दन में गहरा घाव हो गया और रक्तस्त्राव से शरीर का ऊपरी हिस्सा भीग गया। हमले से घायल होकर रुश्दी मंच पर ही गिर गए। कुछ ही क्षणों में पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर से बचाकर उन्हें हेलीकाप्टर से अस्पताल भेजा।


हमलावर से हो रही पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक हमलावर को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है। रुश्दी 1988 में लिखी अपने उपन्यास द सैटेनिक वर्सेस में की गई इस्लाम विरोधी टिप्पणियों के लिए विवाद में आए थे। एक साल बाद 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खोमैनी ने उनकी हत्या के लिए फतवा जारी किया था। इसके बाद से उनकी जान पर खतरा बना हुआ था।


काला फेस मास्क लगाए था हमलावर

न्यूयार्क के गवर्नर कैथी होचल ने कहा है कि रुश्दी के उचित इलाज के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी सर्जरी की जा रही है। पुलिस ने काले लिबास और काला फेस मास्क लगाए हमलावर की पहचान और उसके उद्देश्य के बारे में अभी कुछ नहीं बताया है।

चौटौक्वा इंस्टीट्यूशन के कार्यक्रम में हुए थे शरीक
शुक्रवार को वह पश्चिमी न्यूयार्क के चौटौक्वा इंस्टीट्यूशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गए थे, वहीं उन पर व्याख्यान देने से पहले हमला हुआ। रुश्दी वहां मौजूद करीब ढाई हजार लोगों को लेखकों-कलाकारों की वैचारिक स्वतंत्रता और अमेरिका में उन्हें शरण देने पर व्याख्यान देने वाले थे।
2016 में मिली अमेरिकी नागरिकता

मुंबई में मुस्लिम परिवार में जन्मे रुश्दी कई दशक तक ब्रिटेन में रहे हैं। 2007 में रुश्दी को साहित्य की सेवा के लिए ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने नाइट की उपाधि से सम्मानित किया, जिसके बाद उन्हें सर का खिताब हासिल हुआ। रुश्दी सन 2000 के बाद अमेरिका चले गए। 2016 में उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल गई थी और इस समय वह न्यूयार्क सिटी में रह रहे थे।

कई देशों में प्रतिबंधित है द सैटेनिक वर्सेस
द सैटेनिक वर्सेस प्रकाशित होने के बाद मिली धमकियों को देखते हुए ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें सुरक्षा दी थी। उपन्यास में की गई टिप्पणियों को कई मुस्लिम देशों ने इस्लाम विरोधी माना था और उस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। कई देशों में यह उपन्यास प्रतिबंधित है। ईरान की तत्कालीन कट्टरपंथी सरकार ने रुश्दी की हत्या के लिए 30 लाख डालर के पुरस्कार की घोषणा भी की थी।

ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा, प्रभावी है फतवा
ईरान सरकार की ओर से फतवा जारी होने के बाद रुश्दी ने कई साल तक गुमनामी का जीवन जिया। 1998 में ईरान की सरकार ने फतवा के प्रभावी न होने की बात कही। लेकिन 2017 में ईरान में खुमैनी के उत्तराधिकारी अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा, फतवा अभी भी प्रभावी है।

मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के लिए मिला बुकर अवार्ड
रुश्दी को मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के लिए 1981 में प्रतिष्ठित बुकर अवार्ड मिला था। उनका नया उपन्यास विक्ट्री सिटी फरवरी 2023 में प्रकाशित होने वाला है। रुश्दी धार्मिक कट्टरता के विरोधी हैं और भारत में बढ़ रही धार्मिक हिंसा के प्रति भी आलोचनात्मक विचार रखते हैं। भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने रुश्दी पर हमले को स्तब्धकारी बताया है और उसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। तस्लीमा अपने लिखे उपन्यास लज्जा के कुछ अंशों के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।

 

 

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ताइवान में युद्ध अभ्यासों को सामान्य स्थिति के तौर पर स्थापित करने नहीं दे सकते : पेलोसी

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने कहा कि उनका देश चीन को ताइवान जलडमरूमध्य में अपने उकसावे वाले युद्घाभ्यासों और युद्धक विमानों की घुसपैठ के साथ इसे ताइवान में सामान्य स्थिति के तौर पर स्थापित करने नहीं दे सकता।

पेलोसी ने एशिया की अपनी हालिया यात्रा के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, हमने चीन के साथ देखा है कि वे ऐसी स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश कर रहे हैं और हम यह होने नहीं दे सकते। चीन ने एलान किया कि उसे अपने सप्ताह भर चलने वाले और अभूतपूर्व सैन्य अभ्यास सफलतापूर्वक पूरे कर लिए, जिसके तहत ताइवान की घेराबंदी की गयी। उसने आगाह किया कि बीजिंग अपनी एक-चीन नीति को लागू कराने के लिए सामान्य स्थिति के तौर पर आए दिन युद्ध अभ्यास करेगा।

गौरतलब है कि चीन ने पेलोसी की ताइवान यात्रा को देखते हुए युद्ध अभ्यास शुरू किए थे। पेलोसी ने कहा, हम वहां चीन के बारे में बात करने नहीं गए। हम वहां ताइवान की प्रशंसा करने गए थे और हम अपनी मित्रता दिखाने के लिए वहां गए थे कि चीन ताइवान को अलग-थलग नहीं कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि एक स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता अडिग है।

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मैं झूठे वादे करके जीतने के बजाय हारना पसंद करूंगा: ऋषि सुनक

 लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ऋषि सुनक ने कहा कि आर्थिक संकट से निपटने की उनकी योजना के संबंध में झूठे वादे करके जीत हासिल करने के बजाय वह हारना पसंद करेंगे। एक साक्षात्कार में ब्रिटेन के पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि कमजोर तबके के परिवारों के कल्याण के लिए काम करने को वह प्रतिबद्ध हैं।

सुनक और उनकी प्रतिद्वंद्वी ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज़ ट्रस इस मुद्दे को लेकर आमने-सामने हैं। ट्रस ने कर कटौती का वादा किया है, जिसको लेकर पूर्व वित्त मंत्री सुनक ने दावा किया है कि इससे केवल अमीर परिवारों को फायदा होगा, न कि उन लोगों को जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। सुनक (42) ने कहा, मैं झूठे वादे करके जीतने की बजाय हारना पसंद करूंगा।

कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों द्वारा दोनों उम्मीदवारों से सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। ये सदस्य चुनाव में मतदान करेंगे। इस दौरान बढ़ती मुद्रास्फीति और कीमतों का मुद्दा हावी होता दिख रहा है। सुनक ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के दौरान वित्त मंत्री के तौर पर अपने कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा, लोग मुझे मेरे काम के आधार पर आंक सकते हैं, जब इस साल की शुरुआत में बिल 1200 पाउंड से अधिक आ रहे थे, मैंने सुनिश्चित किया कि कमजोर तबके के लोगों के बिल 1200 पाउंड के आसपास ही आएं।

सुनक ने प्रधानमंत्री पद के लिए चुने जाने पर अपने द्वारा किए गए कार्यों को और आगे बढ़ाने का वादा किया। उन्होंने कहा, मुझे पता है कि लाखों लोग महंगाई को लेकर चिंतित हैं, खासकर उनके बिजली के बिल को लेकर....मेरा कहना है कि अगर मैं प्रधानमंत्री बनता हूं तो मैं उन परिवारों की और अधिक मदद करूंगा जिन्हें सबसे अधिक मदद की जरूरत है क्योंकि स्थिति अब इस साल की शुरुआत से बदतर है, जब मैंने इन उपायों की घोषणा की थी।

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ट्रंप के भारतीय-अमेरिकी समर्थकों ने एफबीआई के छापे की निंदा की

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय मूल के समर्थकों ने फ्लोरिडा में उनके आलीशान घर पर छापे मारे जाने के कदम को पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया है। गौरतलब है कि संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने सोमवार को ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित आवास पर छापा मारा था और उनकी तिजोरी भी तोड़ दी थी। अमेरिका का न्याय मंत्रालय इस बात की तफ्तीश कर रहा है कि क्या ट्रंप ने 2020 में व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद अपने फ्लोरिडा स्थित आवास पर गोपनीय रिकॉर्ड छिपाए हैं।

अमेरिकी उद्यमी एवं फ्लोरिडा के ओकोला में समुदाय के नेता दिग्विजय गायकवाड़ ने कहा, यह अनुचित, अन्यायपूर्ण, अनसुनी और पूरी तरह से आश्चर्यजनक कार्रवाई थी। ट्रंप के भारतीय-अमेरिकी समर्थक एफबीआई के छापे के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है।

इंडियन अमेरिकन ट्रंप अभियान की सदस्य डॉ. शोभा ने कहा, मुझे लगता है कि यह जरूरी नहीं था और जांच करने का यह सही तरीका नहीं है। यह केवल निशाना बनाने को लेकर की गई दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का रूप ले रहा है। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, लेकिन साथ ही आपको उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

एफबीआई ने ट्रंप के घर पर ऐसे वक्त में छापा मारा है जब वह 2024 में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान के लिए निधि एकत्रित करने वाले और उनके समर्थक अल मैसन ने कहा, ट्रंप सकारात्मकता पर एक किताब हैं। यह छापा ट्रंप के लिए सकारात्मक है उनके लिए एक तरह का आशीर्वाद है। यह निश्चित ही उन्हें 2024 में फायदा पहुंचाएगा। वहीं, निवेशक एवं उद्यमी श्रीधर चित्याला ने एफबीआई के छापों को अभूतपूर्व और अवांछित बताया है।

 

 

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श्रीलंका के संविधान संशोधन मसौदे में राष्ट्रपति की शक्तियों में कमी के लिए नये प्रावधान जोड़े गए

 कोलंबो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। श्रीलंका के संविधान संशोधन मसौदा विधेयक में राष्ट्रपति की शक्तियों में कमी लाने के साथ ही कई अन्य नये प्रावधान जोड़े गए हैं, जिसके तहत राष्ट्रपति के पास प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने की शक्ति नहीं रहेगी। न्याय मंत्री विजयदास राजपक्षे ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के पद से हटने के बाद संविधान के 22वें संशोधन मसौदे में बदलाव किया गया है।

मंत्री ने कहा, पूर्व राष्ट्रपति अपनी इच्छानुसार प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने की शक्ति बरकरार रखना चाहते थे। उनके जाने के बाद हमने इसमें बदलाव किया है, जिसके तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को बर्खास्त नहीं कर सकते हैं। राष्ट्रपति की शक्तियों को कम करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद में प्रस्तुत किए जाने के बीच न्याय मंत्री की यह टिप्पणी सामने आयी है।

श्रीलंका इन दिनों अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट का सामना कर रहे है। प्रदर्शनकारी इससे निपटने के साथ ही व्यापक स्तर पर राजनीतिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति की शक्तियों में कटौती का प्रावधान किया जा रहा है।

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अब्दुल रऊफ अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव को चीन ने किया बाधित

 संयुक्त राष्ट्र (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन ने संयुक्त राष्ट्र में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के भाई एवं पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन के दूसरे नंबर के ओहदेदार अब्दुल रऊफ अजहर को काली सूची में डालने के अमेरिका और भारत के प्रस्ताव को बाधित कर दिया। चीन ने दो महीने से भी कम समय में दूसरी बार ऐसा कदम उठाया है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने चीन की अध्यक्षता में सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि बिना कोई उचित कारण दिए आतंकवादियों को काली सूची में डालने के अनुरोध पर रोक लगाना रुकना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी को प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की विश्वसनीयता अभी तक के सबसे निचले स्तर पर है।

पाकिस्तान में 1974 में जन्मे अब्दुल रऊफ अजहर पर दिसंबर 2010 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे। वह 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 को अगवा करने की वारदात का मुख्य साजिशकर्ता था, जिसके एवज़ में उसके भाई मसूद अजहर को जेल से रिहा कराया गया था।

सूत्रों ने बुधवार को बताया कि अमेरिका और भारत द्वारा अब्दुल रऊफ अजहर को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में डालने व उसकी संपत्ति जब्त करने, यात्रा प्रतिबंध लगाने संबंधी रखे गए प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन तथा उसके सहयोगी पाकिस्तान ने बाधित किया।

यह दो महीने से भी कम समय में दूसरा मौका है, जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के तहत पाकिस्तान स्थित एक आतंकवादी को काली सूची में डालने के अमेरिका और भारत के प्रस्ताव को बाधित किया है। चीन ने इससे पहले पाकिस्तानी आतंकवादी अब्दुल रहमान मक्की को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के भारत तथा अमेरिका के संयुक्त प्रस्ताव को आखिरी क्षण में बाधित कर दिया था। मक्की लश्कर-ए-तैयबा के सरगना एवं 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद का रिश्तेदार है।

भारत और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की और अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत मक्की को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन चीन ने इस प्रस्ताव को अंतिम क्षण में बाधित कर दिया।

अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने दिसंबर 2010 में  जैश-ए-मोहम्मद के खूंखार आतंकवादियों में से एक अब्दुल रऊफ अजहर को जैश व उसकी ओर से काम करने के लिए आतंकवादी घोषित कर दिया था। पाकिस्तान के मित्र देश चीन ने भारत और उसके सहयोगियों द्वारा पाकिस्तानी आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने के प्रयासों को इससे पहले भी कई बार बाधित किया है।

भारत ने मई 2019 में संयुक्त राष्ट्र में एक बड़ी राजनयिक जीत हासिल की थी, जब वैश्विक निकाय ने पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया था। ऐसा करने में भारत को करीब एक दशक का समय लग गया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यीय निकाय में चीन एक मात्र ऐसा देश था, जिसने अजहर को काली सूची में डालने के प्रयासों को बाधित करने की कोशिश की थी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच राष्ट्र - अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और रूस - स्थायी सदस्य हैं। इनके पास वीटो का अधिकार है यानी यदि उनमें से किसी एक ने भी परिषद के किसी प्रस्ताव के विरोध में वोट डाला तो वह प्रस्ताव पास नहीं होता।

 

 

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हिमालय के आर-पार रेल चलाने के लिए नेपाल को अरबों का कर्ज देगा चीन, श्रीलंका की तरह बर्बादी तय?


काठमांडू (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पाकिस्तान को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना और श्रीलंका को हंबनटोटा बंदरगाह के जरिए कर्ज के जाल में फंसा देने के बाद अब चीन ने नेपाल को बर्बाद करने की ठान ली है। चीन ने इस साल नेपाल को 118 मिलियन डॉलर कर्ज देने पर सहमति जताई है। चीन ने यह कर्ज नेपाल के साथ सीमा पार रेलवे कनेक्टिविटी नेटवर्क, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के हिस्से के तहत ये रुपये देने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने ये जानकारी दी है।

सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञों को भेजेगा चीन
चीनी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि चीन इस साल रेलवे लाइन के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञों को भेजेगा। मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बीजिंग में एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी और उनके नेपाली समकक्ष, नारायण खडका के बीच बुधवार को पूर्वी चीनी शहर किंगदाओ में एक बैठक के दौरान इस पर सहमति बनी। प्रवक्ता वांग ने कहा, "जैसा कि मैंने अभी कहा, दोनों विदेश मंत्रियों ने अपनी बातचीत के दौरान एक क्रॉस-हिमालयन, बहुआयामी कनेक्टिविटी नेटवर्क बनाने पर सहमति व्यक्त की है। स्टेट काउंसलर वांग ने कहा कि चीन पैसे लगाएगा, रेलवे लाइन के लिए अध्ययन करने में नेपाल की मदद करेगा और एक साल के अंदर विशेषज्ञों को जांच के लिए नेपाल भेजेगा।"

2019 में दोनों देशों के बीच हुआ था समझौता
ट्रांस-हिमालयन मल्टी-डायमेंशनल कनेक्टिविटी नेटवर्क को ट्रांस-हिमालयी नेटवर्क के रूप में भी जाना जाता है। यह नेपाल और चीन के बीच एक आर्थिक गलियारा है। यह चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है जो विशेष रूप से पूरे यूरेशिया में कनेक्टिविटी विकसित करता है। 2019 में नेपाल की यात्रा के दौरान इस कॉरिडोर पर चीनी राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी जिनपिंग ने नेपाल के साथ समझौता किया था। इस कॉरिडोर में कई परिवहन बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी शामिल होंगी।

नेपाल को 800 मिलियन रुपये कर्ज देगा चीन
वांग और खडका की बैठक के बाद नेपाली विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि चीनी राजनयिक ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए नेपाल को अनुदान सहायता में 800 मिलियन नेपाली रुपये देने का वादा किया है। नेपाली बयान के अनुसार, वांग ने घोषणा करते हुए कहा कि चीन अनुदान सहायता के तहत केरुंग-काठमांडू रेलवे प्रोजेक्ट का अध्ययन करेगा। चीन ने मार्च 2022 में सहमति जताई थी कि नेपाल-चीन सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन के अध्ययन का भी समर्थन करेंगे।" केरुंग-काठमांडू रेलवे ट्रांस-हिमालयी बहु-आयामी कनेक्टिविटी नेटवर्क का हिस्सा है। इस योजना के लिए पहली बार 2017 में चीन और नेपाल के बीच औपचारिक रूप से सहमति हुई थी। उसी समय काठमांडू चीन के बीआरआई में शामिल हुआ था।

श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह होगी नेपाल की हालत
सूत्रों की मानें तो नेपाल की सीमा पर ट्रांस-हिमालयी रेलवे प्रोजेक्ट का असली मकसद भारत को घेरना है। इसके जरिये चीन तेजी से अपने सैनिकों को नेपाल की सीमा में भेज सकता है। नेपाल को भी यह अच्छी तरह से पता है कि काठमांडो चीन रेल संपर्क उसके लिए काफी कठिनाई वाला और महंगा साबित होगा। श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह नेपाल का भी अंजाम होगा, और वह हिमालय में मुश्किल और महंगी सुरंगों के निर्माण की लागत चुका नहीं पाएगा।

 

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बाइडन सीएएटीएसए प्रतिबंधों से भारत को मिली खास छूट की प्रक्रिया में तेजी लाएंगे

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रभावशाली भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भारत को सीएएटीएसए प्रतिबंधों से मिली खास छूट की प्रक्रिया में तेजी लाएंगे क्योंकि उनके पास राजनीतिक बढ़त और कांग्रेस के 300 सदस्यों का समर्थन है।

उन्होंने कहा कि हाल में अमेरिका की प्रतिनिधि सभा द्वारा भारत को रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए सीएएटीएसए प्रतिबंधों से खास छूट दिलाने वाले विधेयक पारित करना असैन्य परमाणु समझौते के बाद हुआ सबसे अहम मतदान है।

खन्ना द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन से भारत को चीन जैसे आक्रामक रुख वाले देश को रोकने में मदद करने के लिए काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) से छूट दिलाने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया गया है।

खन्ना ने एक साक्षात्कार में कहा, अमेरिका-भारत संबंध पहले कभी इतने महत्वपूर्ण नहीं रहे। जब आप एक विस्तारवादी चीन को विस्तारवादी रूस के साथ देखते हैं, तो मुझे लगता है कि यह 21वीं सदी के संबंधों को नया आयाम देने जा रहा है। हमें भारत को स्पष्ट संदेश देने की जरूरत है कि अमेरिका इस संबंध को बहुत महत्वपूर्ण मानता है।

यह विधेयक अभी अमेरिकी सीनेट में पारित नहीं हुआ है। इसके बाद ही इसे राष्ट्रपति बाइडन के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। वर्ष 2017 में पेश सीएएटीएसए के तहत रूस से रक्षा और खुफिया लेन-देन करने वाले किसी भी देश के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का प्रावधान है। इसे 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे और 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मॉस्को के कथित हस्तक्षेप के जवाब में लाया गया था।

खन्ना ने कहा, इस संशोधन में, कांग्रेस के 300 सदस्य राष्ट्रपति बाइडन से प्रतिबंधों में छूट देने के लिए कह रहे हैं तो यह उस रिश्ते के लिए बहुत बड़ा समर्थन है। यह भारत के साथ असैन्य परमाणु समझौते के बाद से सदन में सबसे ऐतिहासिक मतदान है।

हाल में ताइवान गईं अमेरिकी संसद की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे खन्ना ने कहा कि सदन द्वारा पारित इस संशोधन विधेयक को बाइडन प्रशासन का समर्थन हासिल है।

 
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प्रिंस सलमान की ट्विटर में थी सेटिंग, महंगी घड़ी के बदले हासिल करते थे दुश्मनों की निजी जानकारी


वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ट्विटर से जुड़ी एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने कंपनी की पॉलिसी और यूजर्स के डेटा सेफ्टी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल सऊदी अरब के लिए जासूसी करने के आरोपी में ट्विटर के पूर्व कर्मचारी को छह आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया है। ट्विटर के इस पूर्व कर्मचारी का नाम अहमद अबूअम्मो है। अहमद के पास अमेरिका और लेबनान की दोहरी नागरिकता है।

सऊदी प्रिंस के लिए करता था जासूसी
अहमद अबूअम्मो पर सऊदी क्राउन प्रिंस, प्रिंस के करीबी सहित अन्य सऊदी अधिकारियों के लिए जासूसी करने का दोषी पाया गया है। इसके अलावा उस पर विदेशी सरकार के अवैध एजेंट होने, मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी व कई अन्य आपराधिक मामलों में शामिल होने के लिए भी दोषी माना गया है। अहमद अबूअम्मो को सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत ने छह मामलों में दोषी पाया तथा 5 मामलों में उसे बरी कर दिया है। ट्वीटर ने इस मामले पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

कोर्ट ने 5 मामलों में किया बरी
कुछ समय पहले तक इस ट्विटर कर्मचारी के पास कंपनी के लगभग सभी यूजर्स की जानकारी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जूरी ने इस मामले में सुनवाई के बाद निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तीन दिनों तक विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद कोर्ट ने अहमद को 11 आरोपों में से 6 पर दोषी पाया, जबकि बाकी से बरी कर दिया। कथित तौर पर, अभियोजन पक्ष का मानना है कि अहमद और उसके एक साथी कर्मचारी अली अलज़बाराह को सऊदी अधिकारियों ने 2014 में मोल्स के रूप में कार्य करने और शासन के लिए महत्वपूर्ण जानकारी खोजने के लिए काम पर रखा था।

महंगी घड़ियों के बदले देता था जानकारी
अमेरिकी अभियोजक कॉलिन सैम्पसन के अनुसार, अहमद ने बड़ी संख्या में ट्विटर यूजर्स की जानकारी करीब 3 लाख डॉलर कैश और 20 हजार डॉलर की घड़ी के बदले सऊदी क्राउन प्रिंस के किसी करीबी को बेची थी। उसने इन पैसों को लेबनान में एक रिश्तेदार के खाते में जमा कर रखा था। वह उन लोगों की जानकारी सऊदी सरकार को देता था जो सरकार की आलोचना करते थे। जानकारी के मुताबिक अहमद ने सऊदी प्रिंस को @mujtahidd नामक यूजर की जानकारी भी दी। यह यूजर एक छद्म आंदोलनकारी था जिसने सऊदी परिवार पर भ्रष्टाचार और अन्य कुकर्मों का आरोप लगाया था। अरब स्प्रिंग विद्रोह में इस यूजर्स के पास लाखों ट्विटर फॉलोवर मिले थे।

ट्विटर छोड़ अमेजन में हासिल की नौकरी
आपको बता दें कि जिस वक्त इस आरोपी कर्मचारी के पास यूजर्स डेटा का एक्सेस था, उस वक्त ट्विटर पर यूजर्स की ईमेल आईडी, जन्म तिथि, फोन नंबर और निजी डेटा आदि दिखता था। अपना काम निकल जाने के बाद, अहमद ने 2015 में ट्विटर छोड़ दिया और सिएटल में अमेजॉन में नौकरी हासिल कर ली थी। हालांकि अहमद के वकील एंजेला चुआंग ने तर्क दिया कि वह उसके काम का हिस्सा था। वकील ने कहा कि यह अहमद को फंसाने की एक साजिश थी और अगर अभियोजक किसी के पीछे जाना चाहते थे, तो उन्हें अली अलज़बारा को पकड़ना चाहिए। क्योंकि वह संयुक्त राज्य अमेरिका से भाग गया था।
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मैक्सिको के राष्ट्रपति को PM मोदी से उम्मीद, जंग खत्म कर दुनिया में ला सकते हैं शांति, UN में रखेंगे प्रस्ताव

 

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन-ताइवान में बढ़ते तनाव के बीच मैक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर संयुक्त राष्ट्र को एक लिखित प्रस्ताव पेश करने पर विचार कर रहे हैं। इस प्रस्ताव में दुनिया में सम्मानित 3 लोगों का एक आयोग बनाने की मांग होगी। यह आयोग दुनिया भर में अगले पांच साल के लिए युद्ध विराम को बढ़ावा देगा। इस अवधि में न कोई शीत युद्ध होगा न ही कोई व्यापार युद्ध। राष्ट्रपति ओब्रेडोर ने इन तीन लोगों में पीएम मोदी को शामिल करने की बात कही है।

पीएम मोदी से जताई उम्मीद
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ओब्रोडोर ने कहा, "मैं संयुक्त राष्ट्र में लिखित प्रस्ताव दूंगा। उम्मीद है कि मीडिया इसे फैलाने में हमारी मदद करेगा। आयोग का गठन पोप फ्रांसिस, एंटोनियो गुटेरेस और नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा।" मैक्सिकन राष्ट्रपति के कहा कि उनका लक्ष्य इन तीनों को एक साथ लाना है, जो दुनिया भर में युद्ध को समाप्त करने के लिए तेजी से एक योजना प्रस्तुत कर सकें और कम से कम पांच साल तक चलने वाले संघर्ष को देखने के लिए एक समझ विकसित कर सकें।

पांच साल शांति कायम करने पर बल
ओब्रेडोर ने कहा कि आयोग के गठन के जरिए कम से कम पांच साल का समझौता करने की कोशिश होगी ताकि दुनिया भर की सरकारें अपने लोगों के लिए काम कर सकें। उन्होंने कहा कि दुनिया में पांच साल, बिना तनाव हिंसा के बीतेगा और शांति होगी। इससे युद्ध और उसके प्रभावों से सबसे अधिक पीड़ित लोगों का जीवन बदला जा सकेगा। लोपेज ओब्रेडोर ने संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और रूस से युद्ध जैसी स्थितियों को समाप्त करने और शांति की दिशा में काम करने का प्रयास करने का भी आग्रह किया।

युद्ध के कारण दुनिया पर छाया संकट
ओब्रेडोर ने कहा कि एक साल से अधिक समय से इन तीन देशों के टकराव के चलते आज दुनिया को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। दुनिया रिकॉर्ड मुद्रास्फीति और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं से जूझ रही है। बहुत से इंसानों की जानें जा चुकी हैं। ओब्रेडोर ने उम्मीद जताई कि अमेरिका, रूस और चीन मध्यस्थता को सुनेंगे और स्वीकार करेंगे। यह संघर्ष विराम ताइवान, इजरायल और फिलिस्तीन के मामले में समझौतों तक पहुंचने में मदद करेगा। इससे टकराव शांत होगा।

बातचीत को दी जाए प्राथमिकता
राष्ट्रपति ओब्रेडोर ने आगे कहा कि देशों को अपने व्यापार संघर्षों को रोकना चाहिए और अपनी प्रासंगिक प्रतिबद्धताओं पर नजर रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र के ढांचे का उपयोग करना चाहिए। अमेरिका के निचले सदन की स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद से एशिया प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बारे में बोलते हुए, लोपेज़ ओब्रेडोर ने कहा कि संघर्ष पर बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, यह दुनिया के हित में होगा।
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सरकार ने इस न्यूज चैनल का प्रसारण किया बंद, पत्रकार भी गिरफ्तार...

 स्लामाबाद/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पाकिस्तान में शहबाज सरकार की तानाशाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि देश के नियामक अधिकारियों द्वारा पाकिस्तानी के टेलीविजन स्टेशन एआरवाई न्यूज के प्रसारण पर रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं इसके बाद इस चैनल के वरिष्ठ पत्रकार अम्माद यूसुफ को भी गिरफ्तार कर लिया गया। जानकारी के मुताबिक एआरवाई न्यूज पाकिस्तान का सबसे बड़ा निजी प्रसारक है। अपने पत्रकार की गिरफ्तारी के बाद एआरवाई न्यूज ने अपना बयान जारी किया है। न्यूज चैनल ने कहा है कि कराची पुलिस ने आधी रात को हमारे पत्रकार के घर का मेन गेट तोड़ उसे जबरन गिरफ्तार किया है। सभी पुलिसकर्मी सादे कपड़े में थे। पीटीआई नेता मुराद सईद ने वरिष्ठ पत्रकार की देर रात गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है।

चैनल पर गंभीर आरोप

सूत्रों के अनुसार नियामक निगरानी संस्था पीईएमआरए ने आरोप लगाया है कि चैनल गलत, घृणित और देशद्रोही सामग्री प्रसारित कर रहा था। चैनल का यह प्रसारण सशस्त्र बलों के भीतर विद्रोह को भड़काकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट और वर्तमान खतरे के साथ पूर्ण दुष्प्रचार पर आधारित था। समाचार आउटलेट को अपने नोटिस में, नियामक प्रहरी ने समाचार एंकर को पक्षपाती करार दिया। PEMRA ने चैनल के सीईओ को आज (10 अगस्त) सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने का भी निर्देश दिया है।

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