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मोदी-मोदी के नारों से गूंज उठा म्यूनिख एयरपोर्ट…

म्यूनिख/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 देशों की शिखर बैठक में भाग लेने जर्मनी पहुंच गए हैं। यह बैठक जर्मनी की अध्यक्षता में हो रही है। इसमें दुनिया के सात ताकतवर देशों के प्रमुख हिस्सा लेंगे।

जर्मनी के म्यूनिख पहुंचने पर पीएम मोदी का शानदार स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर बावेरियन बैंड की धुनों के बीच उनका खासतौर से स्वागत किया गया। म्यूनिख एयरपोर्ट के बाहर भारतीय समुदाय के लोगों ने भी पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया। अनिवासी भारतीयों ने ‘मोदी-मोदी’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए।

यहां पहुंचने पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया ‘मैं शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व नेताओं के साथ उपयोगी चर्चा की आशा करता हूं।’ पीएम मोदी जी-7 शिखर नेताओं के साथ जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य जैसे तमाम विषयों पर विचार करेंगे। इसके अलावा वे सम्मेलन में शरीक होने वाले शीर्ष नेताओं से भी अलग से मुलाकात करेंगे।
 
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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी विकसित देशों के समूह जी-7 शिखर सम्‍मेलन में भाग लेने जर्मनी पहुंचे

म्‍यूनिख (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी-7 शिखर सम्‍मेलन में भाग लेने के लिए आज जर्मनी के शहर म्‍यूनिख पहुंचे। वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों ने श्री मोदी का गर्मजोशी से स्‍वागत किया। इस दौरान उन्होंने बच्‍चों से बातचीत भी की।

श्री मोदी जी-7 देशों और आमंत्रित अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों के साथ विचार-विमर्श में भाग लेने के अलावा विभिन्न मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेंगे। जी-7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमरीका शामिल हैं।
 
प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा कि वे विश्‍व नेताओं से सार्थक बातचीत करने के इच्छुक हैं। यात्रा से पहले श्री मोदी ने एक बयान में कहा था कि वे जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्‍ज़ के निमंत्रण पर जी-7 शिखर सम्‍मेलन में भाग लेने के लिए जर्मनी जा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि पिछले महीने भारत-जर्मनी अंतर सरकारी परामर्श के बाद श्री शोल्‍ज़ से फिर मिलना काफी सुखद होगा। जर्मनी ने अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका जैसे लोकतांत्रिक देशों को भी सम्मेलन में आमंत्रित किया है। इसमें यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व यूरोपीय परिषद के अध्‍यक्ष चार्ल्‍स माइकल और यूरोपीय आयोग की अध्‍यक्ष उर्सुला वोन डेर लियन करेंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे जर्मनी में यूरोप के विभिन्न देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिलने के उत्‍सुक हैं जो उन देशों के साथ भारत के संबंधों को समृद्ध करते हुए उनकी अर्थव्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

जी-7 शिखर सम्‍मेलन महत्‍वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर व्‍यापक विचार-विमर्श के लिए सदस्‍य देशों को एक साथ लाने का प्रभावी मंच है। इस वर्ष शिखर सम्‍मेलन उथल-पुथल के इस दौर में प्रगति, शांति, सुरक्षा और समृद्धि पर बल देते हुए एकता का सशक्‍त संदेश देने का महत्‍वपूर्ण अवसर है। सम्‍मेलन के सात सत्रों में वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था, विकासशील देशों की भागीदारी, विदेश और सुरक्षा नीति, खाद्य सुरक्षा, बहुपक्षवाद और डिजिटल बदलाव जैसे विभिन्‍न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

जर्मनी से वापस लौटते हुए श्री मोदी संयुक्‍त अरब अमारात के अबू धाबी में रूकेंगे। वे मंगलवार को वहां के राष्‍ट्रपति और अबू धाबी के शासक शेख मोहम्‍मद बिन जायद अल नहयान से मुलाकात करेंगे। इस अवसर पर श्री मोदी अमारात के पूर्व राष्‍ट्रपति और अबू धाबी के शासक शेख खलीफा बिन जायेद अल नहयान के निधन पर व्‍यक्तिगत रूप से संवेदना व्‍यक्‍त करेंगे।

 

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अमेरिका में गर्भपात पर प्रतिबंध, रेप पीड़िताओं को भी इस कानून से छूट नहीं

ऑस्टिन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका में एक संघीय अपील अदालत ने टेक्सास राज्य में गर्भपात पर प्रतिबंध बहाल कर दिया है। कुछ दिन पहले एक कोर्ट ने गर्भपात पर रोक लगाने वाले कानून पर रोक लगा दी थी। पांचवें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील ने शुक्रवार देर रात जारी एक पेज के आदेश में देश के कड़े गर्भपात कानून को बहाल कर दिया है।

इस कानून के तहत गर्भ में पल रहे भ्रूण में हृदय की गतिविधि का पता चलने के बाद गर्भपात प्रतिबंधित है। यह स्थिति छह सप्ताह के गर्भ में होती है। रेप पीड़िताओं को भी इस कानून से छूट नहीं है। सेंटर फॉर रिप्रोडक्शन राइट्स की अध्यक्ष नैन्सी नॉर्थअप, जो टेक्सास गर्भपात क्लीनिक का प्रतिनिधित्व करती है, ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने और इस मूर्खता को रोकने का आग्रह किया है।

अमेरिकी जिला न्यायाधीश रॉबर्ट पिटमैन ने बुधवार को टेक्सास कानून पर रोक लगा दी। इसके बाद गुरुवार को कुछ क्लीनिकों ने गर्भपात कराना शुरू कर दिया और इस वीकेंड के लिए बुकिंग भी कर दी थी। लेकिन 48 घंटों के भीतर, अपीलीय अदालत ने पिटमैन के फैसले को लंबित तर्कों को पलटने के टेक्सास के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इसने राष्ट्रपति जो बिडेन के प्रशासन से इस मंगलवार तक जवाब देने को कहा है। बाइडेन प्रशासन यह कानून लाया है।
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हांगकांग की यात्रा पर जाएंगे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

 बीजिंग/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जल्द ही हांगकांग का दौरा करने वाले हैं। जिनपिंग की यह यात्रा हांगकांग शहर को चीन को सौंपे जाने की 25 वीं वर्षगांठ के मद्देनजर है। जनवरी 2020 में कोरोना की लहर के बाद से चीनी राष्ट्रपति का देश की मुख्य भूमि के बाहर यह पहला दौरा होगा।

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मर चुके 26/11 के मास्टमाइंड साजिद मीर को पाकिस्तान ने किया जिंदा, इस डर से करना पड़ा ये काम

इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मुंबई हमले का मास्टरमाइंड साजिद मीर जिंदा है। पाकिस्तान ने उसे मृत घोषित कर रखा था। लेकिन इस बीच पाकिस्तान सरकार ने उसे गिरफ्तार करने का दावा किया है। मुंबई में 26 नवंबर, 2008 (26/11) के आतंकवादी हमलों का मास्टमाइंड साजिद मीर को कथित तौर पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वहीं पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के बारे में बताया है कि वह उसके बारे कुछ नहीं जानता।

FBI की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल
FBI ने मीर को 'मोस्ट वांटेड' आतंकी घोषित किया हुआ है। अमेरिकी एजेंसी FBI ने मीर के खिलाफ विदेशी सरकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की साजिश करने, आतंकवादियों को सहायता प्रदान करने, अमेरिका के बाहर एक नागरिक की हत्या करने और सार्वजनिक स्थानों पर बमबारी करने के आरोप में साजिद मीर को 'मोस्ट वांटेड' आतंकी घोषित कर रखा है। इसके साथ ही FBI ने मीर की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि के लिए सूचना देने वाले के लिए $5 मिलियन तक का इनाम रखा है।
 
पाकिस्तान ने दुनिया से बोला झूठ
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने हमेशा से ही साजिद मीर की मौजूदगी से इंकार किया है। ऐसे में अचानक उसकी गिरफ्तारी का कदम यह दर्शाता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को लेकर अपने दाग लगे दामन को पाक साफ करना चाहता है। पाकिस्तान ने तो यहां तक दावा किया था कि साजिद मीर की मौत हो चुकी है। अब चूंकि पाकिस्तान आर्थिक कंगाली की कगार पर खड़ा है और FATF से राहत की उम्मीद कर रहा है ऐसे में वह अपने दामन से आतंक के दाग कम करना चाहता है।

FATF की ग्रे लिस्ट से निकलने की कोशिश
पाकिस्तान का यह दावा ऐसे समय में आया है जब वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट से बचने की पूरी कोशिश कर रहा है। हाल ही में उसे इस बदनाम लिस्ट से बाहर निकलने की पूरी उम्मीद थी लेकिन आतंकवाद रोधी निगरानी संस्था ने कहा है कि पाकिस्तान को इस लिस्ट से तभी हटाया जब वह यह सत्यापित करे कि आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश लगाने के लिए देश द्वारा उठाए गए कदम 'टिकाऊ' और 'अपरिवर्तनीय' हैं।

मुंबई हमले का था मास्टरमाइंड
साजिद मीर पाकिस्तानी आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा के लिए सीधे तौर पर काम करता था। साजिद मीर के साथ मिलकर लश्कर-ए-तैयबा ने आईएसआई की मदद और समर्थन से मुंबई में हमले किए थे। जब आतंकी मुंबई में थे तब साजिद मीर पाकिस्तान में उनका कंट्रोलर था और सारी जानकारी देता और लेता था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि वह 2001 से लश्कर का एक वरिष्ठ सदस्य रहा है। 2006 से 2011 तक, उसने समूह की ओर से विभिन्न आतंकवादी हमलों की योजना बनाई। FBI ने 22 अप्रैल, 2011 को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

2018 से ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान
इससे पहले 2021 में, अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान ने आतंक का मुकाबला करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, फिर भी उसने मीर जैसे आतंकवादियों के संचालन को नहीं रोका है। पाकिस्‍तान को जून 2018 में ग्रे लिस्‍ट में डाला गया था। पाकिस्तान फिलहाल 'अत्यधिक निगरानी और हाईरिस्क क्षेत्र' में शामिल है। हालांकि, पाकिस्तानी सरकार को इस बाद ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने की पूरी, उम्मीद थी। हालांकि इस बार भी पाकिस्तान को इस मामले में निराशा हाथ लगी है। एफएटीएफ पूरी दुनिया में मनी लॉन्ड्रिंग, सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और टेरर फाइनेंसिंग पर निगाह रखती है।


 
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पाकिस्तान की विधानसभा में मर्यादा तार-तार, महिला विधायक से छेड़खानी, सैकड़ों की भीड़ में खींचा दुपट्टा

इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पाकिस्तान की संसद में हाथ-पाई की घटना आम बात है। वहां पहले भी जनप्रतिनिधियों द्वारा एक दूसरे पर हमला करने की खबरें आती रही हैं। लेकिन सोमवार को विधानसभा में इस हाथापाई ने उस वक्त बदसूरत मोड़ ले लिया जब पीपीपी के एक विधायक ने कथित तौर पर पीटीआई की महिला विधायक दुआ भुट्टो का दुपट्टा छीन लिया। 

विधायक ने की माफी की मांग 
यह घटना पाकिस्तान के सिंध प्रांत के विधानसभा की है। इस घटना पर आपत्ति जताते हुए पीटीआई की नेता राबिया अजफर निजामी ने पीपीपी के विधायक से माफी की मांग की है। उन्होंने सिंध विधानसभा की डिप्टी स्पीकर रेहाना लेघारी से कहा कि इस घटना पर उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे महिला विधायकों को निराशा हुई है। 

डिप्टी स्पीकर से की शिकायत 
राबिया ने डिप्टी स्पीकर से कहा, 'आपके ऊपर हमें मान था, लेकिन आपसे मान टूटा है, इस एसेंबली के अंदर एक खातून का दुपट्टा खींचा गया। हम आपके पास आए...आज छठा दिन है...बल्कि सातवां दिन है। हमने इंतजार किया कि आपकी रिपोर्ट आ जाएगी। इससे ज्यादा नहीं मांगा था हमने... हमने कहा था कोई कमिटी नहीं चाहिए, कोई जांच नहीं चाहिए। पीपीपी विधायक को बस आप ये बोलते कि वो खड़े होकर विधानसभा में माफी मांगें लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। 

डिप्टी स्पीकर ने दिया आश्वासन 
राबिया ने आगे कहा कि आपने अपना कमिटमेंट पूरा नहीं किया। मुझे किसी और से गिला नहीं... आप खुद एक औरत हैं.. आप जिस कुर्सी पर बैठी हैं, उससे मान था हमारा, हमारा मान टूटा है। डिप्टी स्पीकर ने राबिया को समझाने की कोशिश की कि अभी भी बहुत देर नहीं हुई है और उन्हें निराश नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मेरे पास रिपोर्ट आ जाए और उसके बाद अगर दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती... फिर आप निराश होइएगा। ऐसा मत कहिए। अभी रिपोर्ट आनी बाकी है। 

बीते सोमवार की है घटना 
डिप्टी स्पीकर की बातों से पीटीआई विधायक जरा भी संतुष्ट नहीं हुईं और उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि जांच हो या न हो, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, सभा में उनका मान टूटा है। बता दें कि सोमवार को सिंध की विधानसभा को संबोधित करते हुए दुआ भुट्टो, जो विपक्ष के नेता हलीम आदिल शेख की पत्नी भी हैं, ने पीपीपी सांसदों पर एक दिन पहले उनके साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था- मेरा दुपट्टा उतार दिया गया। जो अपनी मां या बहनों का सम्मान नहीं करते, वे ही ऐसा कर सकते हैं। 
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अमरीका के राष्‍ट्रपति ने पेट्रोल और डीजल पर केन्‍द्रीय कर तीन महीने के लिए स्‍थगित करने को कहा

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमरीका के राष्‍ट्रपति जो. बाइडेन ने देश में ईंधन की बढती कीमतों को देखते हुए संसद से पेट्रोल और डीजल पर केन्‍द्रीय कर तीन महीने के लिए स्‍थगित करने को कहा है। अमरीका में इस समय ईंधन की कीमतें औसतम पांच डॉलर प्रति गैलन पर चल रही हैं। करों में कटौती के बाद लोगों को ईंधन मूल्यों में करीब तीन दशमलव छह प्रतिशत की बचत होगी। अमरीका में इस समय पेट्रोल पर 18 सेंट प्रति गैलन और डीजल पर 24 सेंट प्रति गैलन केन्‍द्रीय कर लिया जाता है।

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अफगानिस्तान में आए भूकंप पर अमेरिका ने जताया दुख…

वाशिंगटन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका ने अफगानिस्तान में आए भीषण भूकंप पर दुख व्यक्त किया है। व्हाइट हाउस द्वारा बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को जारी एक बयान में कहा गया कि अमेरिका, अफगान लोग की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि अफगानिस्तान में कम से कम 1,000 लोगों की जान लेने वाले विनाशकारी भूकंप को देखकर अमेरिका बहुत दुखी है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं।

अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है अमेरिका

बयान के मुताबिक, अफगानिस्तान में मानवीय सहायता का सबसे बड़ा दाता होने पर अमेरिका को गर्व है। हमारे सहयोगी पहले से ही अफगानिस्तान में चिकित्सा देखभाल और दूसरे कार्य कर रहे हैं। बयान के अनुसार अमेरिका इस भयानक त्रासदी के समय अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है। बता दें कि अफगानिस्तान के दक्षिणपूर्वी हिस्से में खोस्त शहर के पास बुधवार तड़के एक भीषण भूकंप आया। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र खोस्त प्रांत के स्पेरा जिले और पक्तिका प्रांत के बरमाला, जिरुक, नाका और गयान जिला है।

भारत ने की मदद की पेशकश

अफगानिस्तान में आए प्राकृतिक आपदा पर भारत और पाकिस्तान ने भी दुख जाताया है। भारत ने मदद की पेशकश भी की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ‘भूकंप के कारण प्रभावित लोगों , पीड़ितों व उनके परिजनों के प्रति भारत संवेदना प्रकट करता है। हम अफगानिस्तान की जनता के दुख के साझेदार हैं। जरूरत के इस समय पर हम उनकी साहयता के लिए तैयार हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बुधवार को दुख जताते हु्ए कहा कि भारत जल्द से जल्द हर संभव आपदा राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अफगानिस्तान में आए विनाशकारी भूकंप के कारण हुई दर्दनाक मौतों पर दुख जताया है। उन्होंने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संकट से जूझ रहे परिवारों की मदद के लिए एकजुटता दिखाने का आह्वान किया है।

 

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मंत्रियों-सांसदों संग पीएम विक्रमसिंघे ने किया योग

कोलंबो/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कोलंबो में 8वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह आज सुबह प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, मंत्रियों और सांसदों की उपस्थिति में आयोजित किया गया। विक्रमसिंघे की मौजूदगी इस मायने में खास रही कि श्रीलंका में चल रही उथल-पुथल के बीच वह अब तक किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आए थे।

श्रीलंका संकट के बीच विक्रमसिंघे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। इस देश में भयंकर आर्थिक संकट के बीच महिंदा राजपक्षे को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा था। विक्रमसिंघे ने अपनी नियुक्ति के बाद भारत की जमकर तारीफ की थी और यहां से मिल रही मदद के लिए पीएम मोदी का शुक्रिया किया था।
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भारतवंशी डॉ. आरती प्रभाकर बनी राष्ट्रपति की शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार

वॉशिंगटन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक डॉ. आरती प्रभाकर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपना शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त किया है। डॉ. प्रभाकर व्हाइट हाउस के ‘ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (OSTP) की प्रमुख बनाई गई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने मंगलवार को डॉ. प्रभाकर को ओएसटीपी के निदेशक के रूप में नामित किया। अमेरिकी सीनेट की पुष्टि के बाद वह पहली महिला, अप्रवासी और अश्वेत होंगी जो ओएसटीपी का नेतृत्व करेंगी। प्रभाकर की नियुक्ति करते हुए बाइडन ने कहा कि वह एक शानदार और बेहद सम्मानित इंजीनियर और व्यावहारिक भौतिक विज्ञानी हैं। हमारी संभावनाओं का विस्तार करने, हमारी सबसे मुश्किल चुनौतियों को हल करने और असंभव को संभव बनाने के लिए तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने के लिए वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय का नेतृत्व करेंगी।

प्रसिद्ध भौतिकी वैज्ञानिक डॉ. आरती प्रभाकर एरिक लैंडर का स्थान लेंगी। 34 वर्षीय डॉ. प्रभाकर इसके पूर्व 1993 में तत्कालीन क्लिंटन प्रशासन ने राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) के प्रमुख के रूप में चुना था। इसके बाद ओबामा प्रशासन ने प्रभाकर को डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) का प्रमुख बनाया था।

सीनेट से पुष्टि के बाद डॉ. प्रभाकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रपति की सहायक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार और विज्ञान व प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रपति की सलाहकार परिषद की सह-अध्यक्ष तथा बाइडन मंत्रिमंडल की सदस्य होंगी।

दिल्ली में जन्मीं, टेक्सास में पली बढ़ीं
डॉ. आरती प्रभाकर का जन्म दिल्ली में हुआ था। उनका बचपन और शुरुआती पढ़ाई टेक्सास में हुई। 1984 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पीएचडी करने के बाद वह संघीय सरकार के लिए काम करने चली गईं। उन्होंने 30 जुलाई 2012 से 20 जनवरी 2017 तक यूनाइटेड स्टेट्स डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA)की प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। वह एक गैर-लाभकारी संगठन एक्चुएट (Actuate) की संस्थापक और सीईओ हैं। उन्होंने 1993 से 1997 तक राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) का नेतृत्व किया और इसकी प्रमुख बनने वाली पहली महिला रहीं।
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अफगानिस्तान में भूकंप के झटके, 150 से ज्यादा लोगों की मौत

काबुल/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अफगानिस्तान के पूर्वी इलाके पाकटिका में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। वहां की स्थानीय मीडिया के अनुसार, भूकंप के कारण 155 लोगों की मौत हो गई। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई। आपदा प्रबंधन अधिकारियों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार इस भूकंप में अधिक नुकसान पाकटिका में हुआ है। तालिबानी प्रशासन के आपदा प्रबंधन अथारिटी के प्रमुख मोहम्मद नसीम हक्कानी ने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत व बचाव कार्य जारी है।

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फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों बहुमत खोने के बाद अब क्या करेंगे? जानिए

पेरिस (छत्तीसगढ़ दर्पण)। फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों नेशनल असेंबली में बहुमत खोने के बाद मंगलवार को विपक्षियों से मुलाक़ात करेंगे. मैक्रों पर अपनी सरकार के सुधारवादी एजेंडा को पूरा करने के लिए विपक्षियों का समर्थन पाने का दबाव है. लेकिन मरीन ली पेन की धुर-दक्षिणपंथी पार्टी और जीन लुच मेलेनचोन का लेफ्ट-ग्रीन गठबंधन दोनों ही मैक्रों के साथ काम करने के इच्छुक नहीं है. फ़्रांस में ऐसा बहुत कम ही मौक़ों पर देखा गया जब सरकार अल्पमत में हो और मैक्रों की पार्टी और अन्य गठबंधन सहयोगी अब भी बहुमत से 44 सीट पीछे हैं. इसका मतलब है कि उन्हें अब साधारण बहुमत बनाने के लिए लेफ्ट और राइट दोनों ही राजनीतिक धड़ों के सांसदों के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी. एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार और बुधवार को सभी पार्टी के प्रतिनिधि उच्च-स्तरीय वार्ता के लिए अलग-अलग समय पर राष्ट्रपति भवन पहुँचेंगे. जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति दक्षिणपंथी रिपब्लिकन से सौदा करने पर विचार कर रहे हैं और पार्टी ने भी पुष्टि की है कि उनके नेता क्रिस्चियन जैकब वार्ता में शामिल होंगे. 

ली पेन वार्ता में हिस्सा लेंगी लेकिन मेलेनचोन नहीं जाएंगे. सोशलिस्ट पार्टी के नेता ओलीवियर फ़ॉअर और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख फ़ेबियन रूज़ेल, लेफ्ट पार्टियों के गठबंधन न्यूप्स के सदस्य भी मैक्रों से मिलेंगे. फ़्रांस की सेन्ट्रिस्ट सरकार संसद में बहुमत खोने के बाद से ही राजनीतिक व्यवस्था को पंगु बनने से रोकने के लिए बेसब्र है. कुछ जानकारों ने चेताया है कि इस स्थिति की वजह से फ़्रांस बिना शासन व्यवस्था वाला देश बन सकता है. मैक्रों को अपने उन तीन मंत्रियों को भी बदलना पड़ेगा जो रविवार को चुनाव हार गए हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री एलिज़ाबेथ बोर्न के भविष्य पर भी ख़तरा मंडरा रहा है.

चुनाव में इस बार बहुत कम लोगों ने मतदान किया और 53 फ़ीसदी लोगों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. राष्ट्रपति मैक्रों ने देश में बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए कई योजनाओं का प्रस्ताव दिया है. इसमें फ़ूड वाउचर और लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं मे बढ़ोतरी भी शामिल है. दूसरा सबसे बड़ा प्रस्तावित सुधार रिटायरमेंट की उम्र को 62 साल से बढ़ाकर 65 वर्ष करना है. माना जा रहा है कि ये प्रस्ताव अधिकतर इलेक्टोरेट के बीच अलोकप्रिय साबित हुआ. राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "हमारा मक़सद एक ऐसे समय में फ्रांस के लोगों की सेवा करना है, जब मैक्रों की सत्ताधारी गठबंधन के लिए कोई वैकल्पिक बहुमत नहीं है." लेफ़्ट और राइट पार्टियों के विपक्षी नेता राष्ट्रपति के सुधारवादी कार्यक्रम पर रोक गाना चाहते हैं. हालाँकि, मी पेन की पार्टी नेशनल रैली ने कहा है कि अगर उसके प्रस्तावों को स्वीकार किया जाए तो वो महंगाई कम करने के लिए उठाए गए कदमों का समर्थन करने को तैयार हैं. 

इस्लाम पर मैक्रों के बयान से कई अरब देशों में नाराज़गी, सामानों के बहिष्कार की अपील सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत से दूर इमैनुएल मैक्रों की अगुवाई वाला गठबंधन (एनसेंबल) के पास अभी भी संसद में सबसे अधिक सीटे हैं. एनसेंबल जिसका अर्थ अंग्रेज़ी में टुगेदर है, के पास संसद में 244 सीटे हैं. बहुमत के लिए 289 सीटें चाहिए. मैक्रों दो महीने पहले ही दूसरी बार फ़्रांस के राष्ट्रपति बने हैं. आख़िरी बार सन् 1988 में फ़्रांस की संसद में राष्ट्रपति बहुमत हासिल करने में विफल रहे थे. इसके बाद नेशनल रैली को भी संसद में 89 सीटें मिली हैं, जो कि पूर्वानुमान की तुलना में कहीं अधिक हैं. पिछले चुनाव में पार्टी को केवल आठ सीटें ही मिली थीं.

संसदीय चुनावों के लिए बने हालिया गठबंधन न्यूप्स अब मुख्य विपक्षी की भूमिका में है. ये गठबंधन लेफ्ट नेता जीन लुच मेलेनचोन की अगुवाई में बना. मेलेनचोन राष्ट्रपति चुनाव के पहले राउंड में ही बाहर हो गए थे. अब उनकी अगुवाई वाले गठबंधन के पास संसद में 137 सीटे हैं. न्यूप्स नाम के इस गठबंधन में लेफ्ट पार्टी ला फ़्रांस इनसोमाइज़ के साथ सोशलिस्ट पार्टी और कम्युनिस्ट शामिल है. फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने अभी तक चुनाव के नतीजों पर टिप्पणी नहीं की है. ऐसी स्थिति में ये साफ़ नहीं हो सका है कि वो आगे के लिए क्या योजना बना रहे हैं. उनके पास फिलहाल एक विकल्प ये भी है कि वो फ़्रांस की पारंपरिक दक्षिणपंथी पार्टी रिपबल्किन्स के साथ गठजोड़ कर लें, जिसने संसद में 61 सीटे जीती हैं.
 
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गेहूं के बाद चावल संकट में फंस सकती है दुनिया, भारत पर उम्मीद भरी नजर, परेशान हुए दर्जनों देश

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। गेहूं की बढ़ती कीमतों से परेशान भारत में लोग भोजन का सस्ता विकल्प चुनने के लिए चावल की तरफ अपना रूख कर सकते हैं, जिससे चावल की कीमतों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। पर्याप्त स्टॉक और मजबूत उत्पादन के कारण चावल की कीमत अभी स्थिर बनी हुई है। लेकिन यह बदल सकता है, अगर ग्राहक चावल की तरफ अपना ध्यान करते हैं तो। जिससे चावल के भंडार में कमी आ सकती है और निर्यात पर प्रतिबंध लग सकता है, लिहाजा एशियाई देशों के साथ साथ अमेरिका भी परेशान है।


अब चावल ने किया दुनिया को परेशान
चावल दुनिया की आधी से अधिक आबादी के लिए प्राथमिक ख्याद्य सामग्री है और इसका लगभग 90% एशिया में उगाया जाता है। वहीं, भारत सरकार और भारतीय किसान लगातार मॉनसून की तरफ निगाह बनाए हुए हैं, ताकि चावल की खेती अच्छी हो, जिससे खाद्य महंगाई को कंट्रोल में रकने के साथ साथ चावल की ग्लोबल सप्लाई भी की जा सकते। भारतीय डिप्लोमेसी के लिए चावल और गेहूं काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। जापान की फाइनेशियल होल्डिंग नोमूरा ने अपने एक नोट में कहा है कि, 'एक खाद्य पदार्थ की कीमत में इजाफा होने का असर दूसरे खाद्य पदार्थों पर पड़ता है, ऐसे में हमें लग रहा है कि, खाद्य महंगाई दर और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। खासकर हम चावल की कीमत पर करीब से नजर रख रहे हैं। मौजूदा वक्त में चावल की कीमत में इजाफा होने की उम्मीद कम है, क्योंकि गेहूं की कीमत में उछाल के बाद भी चावल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रही हैं।'

आगे हो सकती है स्थिति गंभीर
गेहूं संकट के बीच वैश्विक चावल भंडार तेजी से कम हो सकता है और स्थिति को गंभीर होने में वक्त नहीं लगेगा। नोमूरा ने अपने नोट में कहा कि, 'हालांकि, अगर गेहूं की बढ़ती कीमतों से चावल की जगह ले ली जाती है, तो यह मौजूदा स्टॉक को कम कर सकता है, घरेलू खाद्य सुरक्षा कारणों से प्रमुख उत्पादकों चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकते हैं, और समय के साथ चावल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। वर्ल्ड राइस एक्सपोर्ट इस सीजन में 52.6 मिलिय मैट्रिक टन रहा है, जो विश्व में कुल चावल उत्पादन (512.8 मिलियन मीट्रिक टन) का करीब 10.3 प्रतिशत है। लिहाजा, अगर गेहूं की तरफ से लोग चावल की तरफ शिफ्ट होते हैं, या फिर अगर कोई भी एक चावल निर्यातक देश चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाता है, तो वैश्विक चावल बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है।

वैश्विक चावल उत्पादन में भारत
संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि 2022-23 में चावल की वैश्विक खपत और चावल के वैश्विक उत्पादन में वृद्धि में भारत का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, भारत का निर्यात 10 लाख टन से बढ़कर रिकॉर्ड 2 करोड़ 20 लाख टन होने का अनुमान है, जो वैश्विक शिपमेंट का लगभग 41% हिस्सा है। भारत का अनुमानित निर्यात चावल के अगले तीन सबसे बड़े निर्यातकों, थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान के संयुक्त शिपमेंट से काफी ज्यादा है। भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है और कई देश चिंतित हैं, कि अगर गेहूं और चीनी की तरह, भारत ने चावल निर्यात पर भी नियंत्रण रखने के लिए प्रतिबंधों का ऐलान किया, तो उनकी स्थिति बिगड़ सकती है। हालांकि, भारत सरकार ने आश्वासन दिया है, कि वह ऐसा नहीं करेगा। लेकिन, इस परिदृश्य में, योजनाओं में अचानक बदलाव खाद्य मुद्रास्फीति की स्थिति को बढ़ा सकता है।

इस साल मुद्रास्फीति ज्यादा रहने की उम्मीद
जब भारत में खाद्य मुद्रास्फीति की बात आती है, तो जापानी फाइनेशियल फर्म नोमुरा को उम्मीद है कि यह 2022 तक ऊंचा रहेगा और वार्षिक आधार पर औसतन 8.0% तक रहेगा, तो साल 2021 में 3.7% के मुकाबले ढाई गुना से ज्यादा है। नोमुरा ने यह भी कहा है कि, जब स्थानीय अज्ञात कारकों के साथ संयुक्त, फीडस्टॉक की बढ़ती लागत, उर्वरक कमी को दक्षिण कोरिया, भारत, हांगकांग, फिलीपींस और सिंगापुर से जोड़ दिया जाए, तो एशिया में खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति इस साल काफी ज्यादा बढ़ जाती है।

वैश्विक चावल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी
भारत, दुनिया में गेहूं का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक, जिसने गेहूं निर्यात प्रतिबंध लगा दिए हैं। क्योंकि तेज गर्मी के कारण इस साल के लिए गेहूं के उत्पादन का अनुमान तेजी से कम हो गया था और वैश्विक बाजार चिंतित थे कि चावल अगला टारगेट हो सकता है। नेशनल कमोडिटीज मैनेजमेंट सर्विसेज के प्रबंध निदेशक सिराज चौधरी ने इस महीने की शुरुआत में ब्लूमबर्ग टीवी से बात करते हुए बताया था कि, 'जैसा कि आज चीजें दिखाई दे रही हैं, फसलों के अच्छे मानसून को देखते हुए आशावादी होने का हर कारण है।" उन्होंने कहा, "विश्वास करने का कोई कारण नहीं है" कि चावल के शिपमेंट पर कोई प्रतिबंध लग सकताहै, क्योंकि भारत अपने उत्पादन का केवल 20% ही निर्यात करता है और भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है'। यानि, चावल पर भारत का रूख क्या होगा, उसने दुनिया को टेंशन में डाल रखा है, लिहाजा उम्मीद यही की जा रही है, कि इस बार मॉनसून अपने साथ अच्छी बारिश लेकर आए, ताकि भारत के साथ साथ दुनिया के बाकी देश भी खाद्य संकट से बच सकें।
 
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भारी कर्ज के बीच श्रीलंका और चीन की दोस्ती कायम, गोटबाया ने शी जिनपिंग को कहा धन्यवाद

 

कोलंबो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। श्रीलंका घोर आर्थिक संकट की दौर से गुजर रहा है। वहां की जनता खाद्य संकट से जूझ रही है और महंगाई की मार से उनकी कमर टूट चुकी है। ऐसे समय श्रीलंका को मदद के लिए भारत और चीन आगे आया। वहीं, दूसरी तरफ देश के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग को इन कठिन परिस्थितियों में साथ देने के लिए धन्यवाद दिया है।

गोटबाया ने शी जिनपिंग को धन्यवाद कहा श्रीलंका के राष्ट्रपति ने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग को जन्मदिन की बधाई देते हुए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ऐसे कठिन परिस्थिति में चीन जैसे मित्र राष्ट्र ने अपनी मित्रता का परिचय देते हुए श्रीलंका का साथ दिया, इसके लिए शी जिनपिंग को धन्यवाद। गोटबाया राजपक्षे ने ट्वीट कर सबसे पहले राष्ट्रपति शी जिनपिंग को उनके जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने दोनों देशों के बीच आपसी संबंध में मजबूती आने की आशा जताई। बता दें कि, बीजिंग ने श्रीलंका को काफी कर्ज दे रखा है और ऐसे समय में श्रीलंका की स्थिति और भी अधिक खराब हो गई है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने चीन से बकाया कर्ज के पुर्नगठन की बात कही है।

चीन से भारी कर्ज ले रखा है श्रीलंका 
जानकारी के मुताबिक, श्रीलंका ने चीन से इस साल 1.5 से 2 बिलियन अमेरिकी डालर कर्ज ले रखा है। पिछले कुछ सालों में श्रीलंका में चीन के ऋण और निवेश का अनुमान 8 बिलियन अमेरिकी डालर से अधिक था। बता दें कि, चीन इन दिनों हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति को बढ़ाने के लिए श्रीलंका पर लगातार डोरे डाल रहा है। ड्रैगन ने भारत के इस पड़ोसी देश को इतनी अधिक मात्रा में कर्ज दिया हुआ है, जिसको श्रीलंका चाहकर भी अगले 100 साल में भी चुका नहीं पाएगा। यही कारण है कि श्रीलंका को अपना हंबनटोटा बंदरगाह चीनी कंपनी को 99 साल की लीज पर देना पड़ा है। 

ड्रैगन की जाल में श्रीलंका 
बता दें कि, श्रीलंका ने देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए चीन से फिर 2.2 बिलियन डॉलर (16 हजार करोड़ से अधिक) का नया कर्ज मांगा था। श्रीलंका पर चीन का पहले से ही अरबों डॉलर का कर्ज है। 

कितना कर्ज है श्रीलंका पर ?
 जानकारी के मुताबिक, श्रीलंका पर दुनियाभर के देशों का कुल 55 अरब डॉलर का कर्ज है। रिपोर्ट के अनुसार, यह धनराशि श्रीलंका की कुल जीडीपी की 80 फीसदी है। इसमें सबसे अधिक कर्ज चीन और और एशियन डिवेलपमेंट बैंक का है। जबकि इसके बाद जापान और विश्व बैंक का स्थान है। भारत ने भी श्रीलंका को भारी कर्ज दे रखा है।
 
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सऊदी ने तुर्की, भारत, इथियोपिया और वियतनाम के लिए कोरोना यात्रा प्रतिबंध हटाया

रियाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सऊदी अरब ने तुर्की, भारत, इथियोपिया और वियतनाम की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों पर सोमवार को कोरोना यात्रा प्रतिबंध हटा दिया। वहां की राज्य समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में, देश ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए उपायों को हटा दिया, जिसमें घर के अंदर फेस मास्क पहनने की आवश्यकता भी शामिल थी।

कोरोना प्रतिबंध हटा
बता दें कि इससे पूर्व, सऊदी अरब ने कोरोना वायरस (Coronavirus) से जुड़े सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह खत्म कर दिया था। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए ये प्रतिबंध लगाए गए थे। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) ने गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि अब बंद जगहों पर मास्क लगाने की भी जरूरत नहीं होगी। लोगों को घर के अंदर फेस मास्क लगाने की जरूरत नहीं होगी। सऊदी में रहने वाले भारतीयों समेत सभी के लिए ये एक राहत है।

कहां मास्क है जरूरी
हालांकि आदेश में कहा गया है कि अपवाद स्वरूप मक्का में ग्रैंड मस्जिद और मदीना में पैगंबर की मस्जिद में मास्क पहनना होगा। हवाई जहाज, सार्वजनिक परिवहन और किसी भी गतिविधि में शामिल होने के लिए वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। आदेश में ये भी कहा गया है कि जो नागरिक सऊदी अरब छोड़ना चाहते हैं उन्हें तीन की जगह आठ महीने के बाद तीसरी बूस्टर खुराक लेनी होगी।

वहीं, कोरोना वायरस महामारी के चलते हज यात्री पूरी तरह बंद थी, जिससे हर साल सऊदी अरब को 12 बिलियन डॉलर का घाटा हुआ है। वहीं इस बीच पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात में एक हफ्ते में कोरोना के मामले दोगुने हो गए हैं, जिसके बाद सरकार लोगों से मास्क पहनने को कह रही है।
 
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Climate change: इस देश के आधे से ज्यादा हिस्से में पानी खत्म! दुनिया के लिए बहुत बड़ी चेतावनी

मेक्सिको सिटी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जलवायु परिवर्तन ने अपना भयावह रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मेक्सिको जैसे देश में आज की तारीख में स्थिति ये है कि इसका आधा हिस्सा बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। पानी के सारे स्रोत सूख रहे हैं। नल से सप्लाई बंद है। लोग पूरे दिन पानी के इंतजाम में ही बिता रहे हैं। उन्हें पानी जमा करने से ही फुर्सत नहीं मिल पा रही है तो बाकी कुछ करने के लिए समय ही नहीं बच पा रहा है। सवाल है कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा। सरकार बारिश का इंतजार कर रही है। लेकिन, सवाल है कि पहले से ही सूखा झेल रहे देश में एकबार और बरसात ने धोखा दिया तो क्या होगा ? यह चिंता सिर्फ मेक्सिको के लोगों की नहीं है। यह संकट पूरी दुनिया का है।

मेक्सिको में ऐतिहासिक जल संकट
उत्तरी अमेरिकी देश मेक्सिको ऐतिहासिक जल संकट झेलने को मजबूर है। फेडरल वाटर कमीशन कोनागुआ के मुताबिक आधा से ज्यादा मेक्सिको इस समय मध्यम से बहुत ही गंभीर सूखे की चपेट में है। भीषण गर्मी अलग पड़ रही है और वैज्ञानिक इसके लिए जलवायु परिवर्तन को दोष दे रहे हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मेक्सिको के कई शहरों में लोगों के पास पानी नहीं है। सियेरा वेंटाना के कई इलाकों में एक हफ्ते पहले से ही पानी के नल सूख चुके हैं। देश का सबसे महत्वपूर्ण ऑद्योगिक शहर ऐतिहासिक जल संकट की चपेट में आ चुका है। 60 वर्षीय महिला रोबल्स ने कहा, 
 
'हम सभी इसलिए जूझ रहे हैं, क्योंकि पानी नहीं आ रहा है।'
'हम अत्यधिक पर्यावरण संकट झेल रहे हैं' हताश होकर रोबल्स और उनके पड़ोसी पास के म्युनिसिपल वाटर टैंक पर चढ़ गईं और उनके जो भी बर्तन था, सब में एक-एक करके पानी इकट्ठा करना शुरू किया। क्योंकि, इसी से पीना है, खाना पकाना है, कपड़े धोने हैं और स्कूल यूनिफॉर्म की सफाई करनी है। उधर मॉनटेरी मेट्रोपॉलिटन एरिया में भी सूखे और कई वर्षों से कम बारिश की वजह से पूरे शहर में पानी की किल्लत चल रही है। यहां की आबादी करीब 53 लाख है। पिछले हफ्ते नुएवो लिओन के गवर्नर सैमुअल ग्रेसिया ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था, 'हम अत्यधिक पर्यावरण संकट झेल रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'आज, हम सब ऐसे ही जी रहे हैं और इससे पीड़ित हैं।'

सुपरमार्केट से पानी की बोतलें खत्म
यहां जून की शुरुआत से से ही पानी की कटौती शुरू की गई थी। दिन में सिर्फ 6 घंटे पानी उपलब्ध कराया जा रहा था। इसकी वजह से स्कूलों का समय बदलना पड़ गया। इससे इतनी घबराहट पैदा हुई कि लोगों ने बोतल बंद पानी का स्टॉक करना शुरू कर दिया और सुपरमार्केट से पानी ही खत्म हो गया। ऊपर से लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर उबलने लगा कि सोडा और बीयर कंपनियों को पानी निकालने की इजाजत मिलती रही है, जबकि आम लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे थे।

बारिश की उम्मीद में जी रही है सरकार
स्थानीय सरकार का कहना है कि वह पाइप लीक की मरम्मत करके और प्रेशर वॉल्व लगाकर पानी को बचाने की कोशिश कर रही है। यही नहीं, उन खेतों, कंपनियों और बूचड़खानों पर नकेल कसा जा रहा है, जो नदियों या गुप्त कुओं से पानी चुराते हुए पकड़े गए हैं। सबसे ज्यादा गर्मी का महीना अभी बाकी है, इसलिए फिलहाल यह संकट दूर होने की उम्मीद नहीं है। उम्मीद सिर्फ आसमान पर टिकी है कि बारिश की कुछ बौछारें हो जाएं।

दुनिया के लिए बहुत बड़ी चेतावनी
वाटर एंड सीवेज एजेंसी के हेड जुआन इग्नासियो बैरागन के मुताबिक मेट्रोपॉलिटन एरिया के दो प्रमुख डैम जहां से इसे पानी की सप्लाई होती है, मंगलवार सुबह तक खाली हो सकता है। एक तीसरा डैम है, जहां क्षमता का सिर्फ 45% पानी बच गया है। उन्होंने प्रेस के सामने माना है कि कई इलाकों में पानी की सप्लाई ठप पड़ चुकी है। इनमें से वह इलाका भी है, जहां रोबल्स रहती हैं। मेक्सिको में आज जो हालात बन रहे हैं, वह भविष्य के लिए बहुत बड़ी चेतावनी है। दिन के समय 40 डिग्री का तापमान झेल रहे इस इलाके में लोगों की पूरी दिनचर्या पानी जुटाने तक सिमट चुकी है। जलवायु परिवर्तन धरती पर कितना बड़ा संकट बनता जा रहा है, यह इसका बहुत बड़ा उदाहरण है।
 
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इजराइल में 3 साल के अंदर पांचवी बार बनी चुनाव की स्थिति, नफ्ताली बेनेट होंगे सत्ता से बेदखल

यरुशलम (छत्तीसगढ़ दर्पण)। इजराइल में एक साल के अंदर फिर से सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। इजरायल का शासी गठबंधन अगले सप्ताह के भीतर संसद को भंग करने के लिए मतदान करेगा और सरकार को गिराएगा। आपको बता दें कि इजराइल के अंदर पिछले 3 साल के अंदर यह पांचवा मौका होगा, जब वहां सरकार गिरने के बाद फिर से चुनाव होंगे। इजराइल में पिछले साल जून में ही बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता उखाड़ फेंकने के बाद से सरकार चला रहे नफ्ताली बेनेट अब प्रधानमंत्री पद से हटने वाले हैं।

यायिर लापिद चुनाव तक होंगे नए प्रधानमंत्री!

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल में नफ्ताली बेनेट की सरकार जाने के बाद मौजूदा विदेश मंत्री यायिर लापिद चुनाव संपन्न होने तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। आपको बता दें कि इजराइल में सत्ता परिवर्तन होने की खबरों के बाद से बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक जीवन को नई उम्मीदें मिल गई हैं। माना जा रहा है कि अगर चुनाव होते हैं तो बेंजामिन फिर से नए प्रधानमंत्री हो सकते हैं, क्योंकि वर्तमान स्थिति में अगर चुनाव होते हैं तो उनकी पार्टी की लोकप्रियता के आधार पर वो चुनाव जीत सकते हैं।

गठबंधन तोड़ने का किया ऐलान 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को इजराइल के मौजूदा प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और विदेश मंत्री यायिर लापिद ने एक संयुक्त बयान जारी कर गठबंधन को तोड़ने का ऐलान किया। गठबंधन टूटने के बाद नफ्ताली बेनेट का संसद में समर्थन चला गया है, जिसके बाद उनकी सरकार गिर जाएगी और पूरी संभावना है कि देश के अंदर फिर से चुनाव होंगे। आपको बता दें कि इजराइल में अप्रैल 2019 के बाद से पांचवा चुनाव होगा।
 
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भारत और बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक आज, सातवीं बार हो रही JCC की बैठक क्यों है खास?

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत और बांग्लादेश के बीच सातवीं बार 'ज्वाइंट कंसल्टेटिव कमीशन' यानि संयुक्त सलाहकार आयोग (जेसीसी) की बैठक होने जा रही है, जिसमे दोनों देशों के विदेश मंत्री शिरकत कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से इस बैठक को लेकर जानकारी दी गई है। हालांकि, दोनों देशों के बीच ये बैठक सातवीं बार आयोजित की जा रही है, लेकिन पहली बार आमने सामने इस बैठक का आयोजन हो रहा है और बैठक में भाग लेने के लिए बांग्लादेश के विदेश मंत्री दिल्ली में मौजूद हैं।

भारत-बांग्लादेश के बीच बैठक
भारत और बांग्लादेश के बीच पहली भौतिक जेसीसी बैठक आज नई दिल्ली में होगी और विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने बांग्लादेशी समकक्ष एके अब्दुल मोमेन के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि जेसीसी की बैठक में कोविड-19, सीमा प्रबंधन और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, जल संसाधन, विकास साझेदारी और क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों के मद्देनजर सहयोग सहित द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेगा। कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से यह पहली शारीरिक बैठक होगी। पिछली बैठक 2020 में हुई थी। दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए सहयोग परियोजनाओं में सक्रिय रूप से शामिल हैं। भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग के हिस्से के रूप में, भारत और बांग्लादेश की सेनाओं ने हाल ही में बांग्लादेश में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त सैन्य अभ्यास के 10वें संस्करण का आयोजन किया था।

कई अहम मुद्दो पर सहमति बनने की उम्मीद
बांग्लादेशी पक्ष द्वारा तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे के लिए एक अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को लाने की उम्मीद है। मामले से परिचित लोगों ने कहा कि, दोनों पक्षों द्वारा छह अन्य संयुक्त नदियों - मनु, मुहुरी, खोवाई, गुमटी, धरला और दूधकुमार के पानी को साझा करने की व्यवस्था पर जल्द निष्कर्ष निकालने की उम्मीद है। आपको बता दें कि, बांग्लादेश में जल्द ही लोकसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा शेख हसीना सरकार तीस्ता नदी जल बंटवारे को लेकर जल्द समझौता करना चाहती है, जो बांग्लादेश के लिए अहम चुनावी मुद्दा रहता है। वहीं, गुवाहाटी में NADI सम्मेलन भी भारत और बांग्लादेश के विशेषज्ञों को सीमा पार नदियों के मुद्दे पर चर्चा करने और दोनों सरकारों के लिए सिफारिशें करने के लिए प्रदान करेगा।

 

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