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किंग्स चार्ल्स तृतीय से मिलकर भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दुरैस्वामी ने सौंपा परिचय पत्र

 ब्रिटेन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दुरैस्वामी ने किंग चार्ल्स तृतीय को अपना परिचय पत्र सौंपा और इसी के साथ उन्होंने भारत के नए पद पर औपचारिक शुरुआत की। सितंबर में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद दुरैस्वामी चार्ल्स तृतीय के महल में अगवानी किए जाने वाले पहले भारतीय दूत हैं। इस कार्यक्रम के दौरान उनकी पत्नी और वे खुद सरकारी आवास से महल तक बग्घी में गए।

 
ब्रिटेन के राज्य प्रमुख के रूप में सम्राट को दुरैस्वामी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का औपचारिक पत्र 'लैटर्स ऑफ कमीशन' पेश किया। इस दौरान उनके साथ उप उच्चायुक्त सुजीत घोष भी मौजूद थे। 74 वर्षीय राजा के साथ विचार साझा रते हुए दुरैस्वामी ने कहा कि किंग ने बेहद गर्मजोशी और शालीनता से स्वागत किया और इस दौरान भारत के लिए उनके स्नेह से जुड़ी हमारी चर्चा भी हुई।
 
दुरैस्वामी ने इससे पहले उज्बेकिस्तान और कोरिया गणराज्य में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया है और हाल ही में ब्रिटेन के उच्चायुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। उन्हें ब्रिटिश विदेश कार्यालय के मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद ने भी सरकार की ओर से शुभकामनाएं दीं। मंत्री ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आपके कार्यकाल में भारत-ब्रिटेन संबंध नई ऊंचाई हासिल करेंगे।

ब्रिटेन में भारत के नए उच्चायुक्त विक्रम दुरैस्वामी ने सितंबर महीने में जब पदभार ग्रहण किया था, तो उन्होंने पार्लियामेंट स्क्वायर पर महात्मा गांधी की प्रतिमा और उत्तरी लंदन में आंबेडकर संग्रहालय में श्रद्धांजलि अर्पित की थी। दुरैस्वामी ने गायत्री इस्सर कुमार की जगह ली है जो जून के आखिर में ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त पद से सेवानिवृत हुईं। दुरैस्वामी ने अपने परिचय पत्र की प्रतियां शुक्रवार को लंदन में ब्रिटेन के डिप्लोमैटिक कोर के वाइस मार्शल को सौंपी जिन्होंने उन्हें नए भारतीय दूत के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता दी।
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यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर रूसी हमले जारी रहेंगे : व्‍लादिमीर पुतिन

 मास्को (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने चतावनी दी है कि यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर रूसी हमले जारी रहेंगे। क्रेमलिन में आयोजित समारोह में श्री पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के महत्‍वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले अक्‍टूबर में विस्‍फोट के जवाब में किए जा रहे हैं। यह विस्‍फोट क्रीमिया प्रायद्वीप को रूस से जोड़ने वाले पुल पर हुआ था जिसके लिए मास्‍को ने यूक्रेन को जिम्‍मेदार ठहराया था।

इस बीच यूक्रेन के अधिकारियों ने दावा किया है कि रूस की सेना ने यूक्रेन के बंद पड़े ज़ेपोरेज़्ज़िया परमाणु संयंत्र पर रॉकेट से कई हमले किए हैं।

 
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अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति को संघीय अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाया

 अर्जेंटीना (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति क्रिस्टीना फर्नांडीज डी किरचनर को एक संघीय अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाया है। 2007 और 2015 के बीच अर्जेंटीना के बीच दो बार राष्ट्रपति रहीं किरचनर को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया है। उन्हें सार्वजनिक कार्यों से संबंधित एक अरब डॉलर की धोखाधड़ी मामले में छह साल की जेल की सजा सुनाई गई है। संघीय अदालत ने सार्वजनिक पद संभालने पर भी आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया है।  

 

 

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सुष्मिता शुक्ला फेडरल रिजर्व बैंक की चीफ ऑपरेटिंग ऑफीसर नियुक्त

 न्यूयॉर्क (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय मूल की सुष्मिता शुक्ला को न्यूयॉर्क में फेडरल रिजर्व बैंक की प्रथम उपाध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब वह इस प्रतिष्ठित केंद्रीय बैंक की दूसरी सबसे बड़ी अधिकारी बन गई हैं। 

न्यूयॉर्क स्थित केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि शुक्ला की नियुक्ति को फेडरल रिजर्व सिस्टम के निदेशक मंडल ने मंजूरी दी है। शुक्ला को न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने प्रथम उपाध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी नियुक्त किया है और यह नियुक्ति मार्च 2023 से प्रभाव में आएगी। 

 

 

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पेरू में राष्ट्रपति को पद से हटाया गया, विवादित ऐलान के बाद चला महाभियोग, डीना ने संभाली कमान


लीमा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पेरू में राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो (pedro castillo) को सांसदों ने महाभियोग चलाकर उन्हें उनके पद से हटा दिया है। संसद को भंग करने के बाद उनकी जगह उपराष्ट्रपति डीना बोलुआर्टे (Dina Boluarte) को देश का अगला राष्ट्रपति बनाया गया। पेरू में 200 साल से ज्यादा के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार किसी महिला को राष्ट्रपति बनाया गया है।

केइको फुजीमोरी को हरा बने राष्ट्रपति
वहीं पेरू की नई राष्ट्रपति डीना बोलुआर्टे पेरू की राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले देश की उपराष्ट्रपति थीं। वह 2026 तक इस पद पर रहेंगी। इससे पहले पेड्रो कैस्टिलो ने देश में आपातकाल लगाने का ऐलान किया था जिसके बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया था। पेड्रो कैस्टिलो वामपंथी वाले नेता हैं जिन्होंने जून 2021 में अपने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी केइको फुजीमोरी को हराया था।

आपातकाल लगाने का किया था ऐलान
बुधवार को पेड्रो कैस्टिलो ने नाटकीय ढंग से देश के नाम संबोधन में ऐलान किया था कि वह देश में आपातकाल लगाने जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह विपक्षी दलों के वर्चस्व वाली कांग्रेस को भंग कर देंगे। उनके इस ऐलान के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया। कई मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद विपक्षी दलों ने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और उनके खिलाफ महाभियोग लाने का फैसला किया।

पेड्रो कैस्टिलो पर विद्रोह का आरोप
महाभियोग के प्रस्ताव पर 130 सांसदों में से 101 विधायकों ने सहमति जताई और राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को पद से हटाने के लिए मतदान किया। वहीं मात्र 6 ऐसे ऐसे सांसद थे जिन्होंने राष्ट्रपति के पक्ष में वोटिंग की और पेड्रो का समर्थन किया। जबकि 10 सांसदों ने पूरी तरह से वोटिंग प्रक्रिया से दूरी बनाकर रखी। वोटिंग प्रक्रिया के बाद राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को हिरासत में लिया गया और उनपर विद्रोह का आरोप लगाया गया।
 
पेरू की पहिला महिला राष्ट्रपति बनी डीना
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो वह राजधानी लीमा में मैक्सिकन दूतावास जा रहे थे। देश में नए राष्ट्रपति चुने जाने के बाद पेरू की पुलिस और सशस्त्र बलों ने एक संयुक्त बयान जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि वे संवैधानिक आदेश का सम्मान करते हैं। बतादें कि पेरू एक बुरे राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। हाल के वर्षों में कई राष्ट्रपतियों को पद से हटा दिया गया है। 2020 में, पांच दिनों के भीतर पेरू में तीन राष्ट्रपति बन गए थे।

 

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सॉफ्टवेयर की प्रमुख कम्पनी एडोब ने 100 कर्मचारियों की छटनी किया

 सैन फ्रांसिस्को (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सॉफ्टवेयर प्रमुख एडोब ने खराब वैश्विक व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के बीच अपनी बिक्री टीम से लगभग 100 कर्मचारियों को निकाल दिया है। एक बयान में, एडोब ने कहा कि कंपनी ने कुछ कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पहलों का समर्थन करने वाले पदों पर स्थानांतरित कर दिया और अन्य नौकरियों की छोटी संख्या को हटा दिया। सॉफ्टवेयर प्रमुख ने एक बयान में कहा, एडोब कंपनी-व्यापी छंटनी नहीं कर रहा है और हम अभी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं के लिए भर्ती कर रहे हैं।

हालांकि बिग टेक की तुलना में एडोब में कर्मचारियों की संख्या में कमी का आकार समान नहीं है, इस कदम को वैश्विक मंदी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है जो अब कंपनियों को गहरे स्तर पर प्रभावित कर रहा है।  ब्लूमबर्ग ने सबसे पहले एडोब छंटनी के बारे में रिपोर्ट की थी। एडोब की तीसरी तिमाही रिकॉर्ड तिमाही था, जिसमें इसने राजस्व में 4.43 डॉलर अरब प्राप्त किया, जो कि 15 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। एडोब के सीईओ शांतनु नारायण ने कहा, इस डिजिटल-फस्र्ट दुनिया में, एडोब क्रिएटिव क्लाउड, डॉक्यूमेंट क्लाउड और एक्सपीरियंस क्लाउड तेजी से बढ़ते ग्राहकों के लिए और भी अधिक मिशन-महत्वपूर्ण बन गए हैं। सॉ़फ्टवेयर निर्माता द्वारा अगले वित्तीय वर्ष के लिए मार्गदर्शन जारी करने के बाद एडोब के शेयरों में बढ़ोतरी हुई, जो उम्मीदों से कम हो गई, लेकिन मजबूत डॉलर और प्रतिकूल विदेशी विनिमय दरों पर कुछ कमी को दोषी ठहराया।

नारायण ने अक्टूबर में अमेरिका में एडोब मैक्स 2022 सम्मेलन में विश्लेषकों को बताया कि सॉफ्टवेयर प्रमुख, वास्तव में पिछले कुछ वर्षो की तुलना में कर्मचारियों की संख्या में कम प्रतिशत की वृद्धि करेगी। सीईओ के अनुसार, इस अनिश्चित व्यापक आर्थिक वातावरण में एडोब की निरंतर सफलता इस बात को रेखांकित करती है कि हमारे समाधान ग्राहकों के बढ़ते ब्रह्मांड के लिए मिशन-महत्वपूर्ण हैं।

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भारत का यूक्रेन, रूस में कूटनीतिक प्रयासों के लिए समर्थन की पेशकश

 संयुक्त राष्ट्र (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस और यूक्रेन व्यापार वार्ता में विफलता के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं ऐसे में भारत ने कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने की पेशकश की भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद में कहा, भारत ने दोनों पक्षों से कूटनीति और बातचीत के रास्ते पर लौटने का आह्वान किया है और संघर्ष को समाप्त करने के सभी राजनयिक प्रयासों के लिए अपना समर्थन भी व्यक्त किया है उन्होंने कहा, भारत तनाव कम करने के उद्देश्य से ऐसे सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है

कंबोज ने कहा, हमारा मानना है कि निर्दोष लोगों की जान की कीमत पर कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता उन्होंने यूक्रेन में नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों के लिए रूस की दबी आवाज में आलोचना की, जिसने देश के कुछ हिस्सों में बिजली और पानी की आपूर्ति नेटवर्क को बुरी तरह बाधित किया उन्होंने कहा, हाल के सप्ताहों में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की खबरें बेहद चिंताजनक हैं हम इस संबंध में अपनी गंभीर चिंताओं को दोहराते हैं

कंबोज की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान परिषद को जानकारी देते हुए अवर महासचिव मार्टिन ग्रिफिथ्स ने कहा, आज यूक्रेन में नागरिकों पर हमला हो रहा है उन्होंने कहा, यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, बिजली स्टेशनों और ताप संयंत्रों समेत अन्य ठिकानों पर हमले ने बिजली-पानी तक लोगों को पहुंच से बाहर कर दिया है रूस के स्थायी प्रतिनिधि वैसिली नेबेंजिया ने कहा कि मास्को संघर्ष के कूटनीतिक समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के सुझावों को गंभीरता से ले रहा है और बातचीत करने को तैयार है

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थाइलैंड के समुद्री इलाके में फंसे 150 रोहिंग्या, बांग्लादेश से भागकर जा रहे थे मलेशिया


बैंकाक (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कम से कम 150 रोहिंग्या शरणार्थी थाइलैंड के पास समंदर में एक खराब नाव में फंसे हुए हैं। यह दावा एक्टिविस्टों के एक समूह ने किया है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कई लोग मारे भी जा चुके हैं। यह नाव किस जगह फंसी है इस बार में स्पष्ट नहीं हो पाया है। रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर यह नाव पिछले महीने के आखिर में बांग्लादेश से निकली थी।

नाव में आई खराबी
एक्टिविस्ट क्रिस लेवा ने कहा कि नाव जब दक्षिणी थाईलैंड के रानोंग के तट के पास से गुजर रही थी तभी उसमें कुछ खराबी आ गई और उसमें पानी भरने लगा। यात्रियों के रिश्तेदारों से की गई बातचीत के आधार पर लेवा ने बताया, "उनके पास पानी और भोजन लगभग खत्म हो गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि नाव पर मौजूद लोग नाव से पानी निकालने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने थाईलैंड की नौसेना की एक नाव देखी थी लेकिन उसने उनकी मदद नहीं की।

किए जा रहे अलग-अलग दावे
इस बीच थाई नौसेना के एक अधिकारी ने रायटर को फोन पर बताया है कि समंदर में फंसी नाव थाई जलसीमा में नहीं बल्कि भारतीय क्षेत्र में है। वहीं भारतीय नौसेना ने इसे लेकर अलग दावा किया है। भारतीय तटरक्षक बल के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें कई लोगों के साथ एक नाव के फंसे होने की सूचना मिली थी, लेकिन वे लोग भारतीय जल क्षेत्र में नहीं है। यह पूछे जाने पर कि नाव फिलहाल कहां है, अधिकारी ने कोई टिप्पणी नहीं की।

रोहिंग्या यात्रियों में नाटकीय बढ़त
वहीं, थाईलैंड के एक रोहिंग्या कार्यकर्ता सईद आलम, ने कहा कि उन्होंने फंसे हुए कुछ लोगों के रिश्तेदारों से बात की है। उन्होंने कहा कि कुछ यात्रियों की मौत हो गई है। अगर जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो बाकी लोगों की जान भी जा सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने पिछले सप्ताह कहा था कि इस साल म्यांमार और बांग्लादेश के बीच अंडमान सागर को पार करने की कोशिश करने वाले लोगों की संख्या में "नाटकीय बढ़त" देखी गई है।

दुनिया की सबसे खतरनाक यात्रा
यह दुनिया की सबसे खतरनाक समुद्री यात्राओं में से है जिसे इस साल कम से कम 1,900 लोगों ने पूरा किया है। 2020 के मुकाबले यह संख्या छह गुना ज्यादा है। आपको बता दें कि हर साल कई रोहिंग्या म्यांमार में हिंसा से बचने के लिए और बांग्लादेश शरणार्थी शिविरों में गंदगी से बचने के लिए अपने जीवन को खतरे में डालते हैं। इनमें से कई लोग जान बचाकर मुस्लिम देश मलेशिया पहुंचने का प्रयास करते हैं। 2017 में सात लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में सेना के एक हिंसक अभियान से बचने के लिए वहां से भाग कर बांग्लादेश चले गए थे।

थाइलैंड में 48 रोहिंग्या गिरफ्तार
एजेंसी ने बताया कि सिर्फ इसी साल में इस यात्रा को पूरा करने की कोशिश में कम से कम 119 लोग मर गए हैं। इस बीच एक अलग मामले में बुधवार को थाइलैंड पुलिस ने कुल 48 रोहिंग्या निवासियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 30 पुरुष और 18 महिलाए हैं। इनमें से पांच बच्चे भी हैं जिनकी उम्र 13 साल से कम है। पूछताछ के दौरान इन लोगों ने कहा कि वे रखाइन प्रांत के रहने वाले हैं मलेशिया जा रहे थे। इन सभी लोगों को पुलिस को सौंप दिया गया है।
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ट्रैक्स फ्रॅाड के मामले में डोनाल्ड ट्रंप की दो कंपनियां पाई गई दोषी

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से एक और झटका लगा है। ट्रंप की दो कंपनियों को धोखेधड़ी के मामले में दोषी ठहराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी द्वारा दाखिल किए गए एक मामले में ट्रंप के दो कॉर्पोरेट संस्थाओं को सभी 17 मामलों में दोषी पाया गया, जिसमें व्यापार रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करना शामिल है। ट्रंप की कंपनियों पर आरोप लगाया गया था कि यह कंपनियां, किराए से मुक्त अपार्टमेंट और लक्जरी कारों और नौकरी के भत्तों पर व्यक्तिगत आयकर का भुगतान करने से बचती रही हैं।

 


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श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने श्वेत क्रांति के लिए भारत से मांगी सहायता

 कोलम्बो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने श्वेत क्रांति के लिए भारत से सहायता की मांग की है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और अमूल श्रीलंका में दुग्ध उत्पादन दोगुना करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। श्री विक्रमसिंघे ने एक समिति का गठन किया है जो स्थानीय स्तर पर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की लघु, मध्यम और दीर्घकालिक योजना बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ मिलकर काम करेगी। भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है।

यहां विश्व का 22 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन होता है। श्रीलंका में किए गए प्रयासों के बाद 2015 से 2021 के बीच दुग्ध उत्पादन में 34 प्रतिशत वृद्धि हुई लेकिन वह इस क्षेत्र आत्मनिर्भरता हासिल करने से अभी काफी दूर है। दो करोड़ 20 लाख की आबादी वाले श्रीलंका में सालाना 30 करोड़ अमरीकी डॉलर से अधिक के डेयरी उत्पादों का आयात होता है।

 

 

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लैंडस्लाइड की चपेट में आए बस सहित कई वाहन, 33 की मौत

बोगोटा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कोलंबिया के रिसाराल्डा प्रांत में बारिश की वजह से हुए लैंडस्लाइड में एक बस समेत कई अन्य वाहन दब गए, जिसमें कम से कम 33 लोगों की मौत हो चुकी है।  इसके अलावा 9 लोगों को जिंदा बचा लिया गया है, जिनमें से चार की हालत गंभीर है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोमवार को घटना पर शोक जताते हुए कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ इस मुश्किल समय में साथ खड़ी है।

कोलंबिया की राजधानी बोगोटा से करीब 230 किमी दूर कॉफी उत्पादन के लिए मशहूर कोलम्बिया के एक पहाड़ी इलाके में पुएब्लो रिको और सांता सेसिलिया के गांवों के बीच यात्रा करते समय रविवार को लैंडस्लाइड में बस समेत कई वाहन दब गए थे। मलबे में दबी बस कोलंबिया के तीसरे सबसे बड़े शहर कैली और कोंडोटो नगर पालिका के बीच रास्ते में थी। 

अधिकारियों के अनुसार, इसमें लगभग 25 यात्री सवार थे। हादसे में बचे एक शख्स ने बताया कि ड्राइवर ने बस को बचाने का काफी कोशिश की, जब मलबा नीचे आ रहा था और बस उससे थोड़ी पीछे थे।  रेडियो स्टेशन से बात करते हुए शख्स ने बताया कि जब हादसा हो गया तो भी ड्राइवर बस बैक करने की कोशिश कर रहा था। घटना में घायल हुए 5 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

 

 

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दक्षिण कोरियाई फिल्म बेचने वाले दो लड़कों को उत्तर कोरिया में मारी गई गोली, सरेआम दी गई तालिबानी सजा

 

फियोंगयांग (छत्तीसगढ़ दर्पण)। उत्तर कोरिया में तीन नाबालिग बच्चों की सार्वजनिक तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई है और इनमें से दो बच्चों पर किम जोंग उन के फिल्म वाले आदेश का उल्लंघन करने का आरोप था। रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया में तीन बच्चों की गोली मारकर हत्या की गई है, जिनमें से एक किशोर पर अपनी सौतेली मां की हत्या करने का आरोप था, जबकि दो लड़कों पर दक्षिण कोरिया की फिल्मों को बेचने का आरोप था। रेडियो फ्री एशिया ने सूत्रों के हवाले से कहा कि, जिन किशोरों की गोली मारकर हत्या की गई है, उनकी उम्र 16 से 17 साल के करीब होने का अनुमान है।

लोगों को देखने के लिए किया मजबूर
रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जब तीनों लड़कों को गोली मारने के लिए लोगों के बीच लाया गया, तो लोगों को उन्हें गोली लगते हुए देखने के लिए मजबूर किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक गोलीबारी की इस घटना के बाद निवासी काफी डरे हुए हैं और माना जा रहा है, कि लोगों को डराने के लिए ही सरेआम तीनों लड़कों को गोली मारी गई। स्थानीय निवासियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर रेडियो फ्री एशिया को बताया कि,'जो लोग दक्षिण कोरियाई फिल्में और नाटक देखते हैं या फिर उन्हें बेचते हुए पाए जाते हैं, उन्हें काफी खौफनाक सजा दी जाती है। वहीं, उत्तर कोरिया में किसी की हत्या करने पर या फिर सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ने की स्थिति में भी माफ करने का प्रावधान नहीं है और ऐसे काम में शामिल लोगों को मौत की सजा दी जाती है"। रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों किशोरों को चीन से लगती सीमा के पास स्थिति हायसन शहर में गोली मारी गई है।

फौरन दी गई तालिबानी सजा
स्थानीय लोगों ने रेडियो फ्री एशिया को बताया कि, उत्तर कोरियाई अधिकारी तीन किशोरों को कहीं से पकड़कर लाए और फिर उन्हें लोगों की भीड़ के सामने खड़ा किया और फिर उन्हें फौरन मौत की सजा सुनाई गई और इससे पहले की किसी को कुछ समझ आता, तीनों को गोली मार दी गई, जिससे फौरन उनकी मौत हो गई। उत्तर कोरिया में पहले इस तरह से किसी को मौत की सजा मिलने की खबर दुर्लभ होती थी और विरले ही किसी को मौत की सजा देने की खबर सामने आती थी, लेकिन अब मौत की सजा के मामले तेजी से सामने आने लगे हैं। अधिकारी आम तौर पर लोगों को अपने मनचाहे तरीके से सजा सुनाने लगे हैं, ताकि लोगों में डर कायम किया जा सके।

विदेशी फिल्मों से किम को नफरत
उत्तर कोरिया शासन शुरू से ही विदेशी फिल्मों से नफरत करता रहा है, लेकिन हाल के सालों में दक्षिण कोरियाई और पश्चिमी फिल्में और टीवी शो काफी तेजी से उत्तर कोरिया में फैल गये हैं। वहीं, यूएसबी पेन ड्राइव के जरिए फिल्मों को चीन से तस्करी कर लाया जाता है और फिर उसे पूरे उत्तर कोरिया में भेजा जाता है। लिहाजा, उत्तर कोरिया के अंदर विदेशी फिल्मों की तस्करी का कारोबार काफी फैल गया है। लेकिन, अगर कोई ऐसा काम करते हुए पकड़ा जाता है, तो फिर उसे गोली मार दी जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उत्तर कोरिया में काफी ज्यादा गरीबी है, जबकि दक्षिण कोरिया काफी तेजी से तरक्की कर रहा है, लिहाजा उत्तर कोरियाई शासन दक्षिण कोरियाई संस्कृति को लेकर चिंतित हो गया है और उसे जनता के विद्रोह का डर सताता रहता है, लिहाजा उत्तर कोरिया के अंदर दक्षिण कोरियाई फिल्म देखने या बांटने पर सख्ततम सजा का प्रावधान है।

जासूसी में पकड़े गये दोनों लड़के
सूत्रों के मुताबिक, जिन दोनों लड़कों को गोली मारी गई है, वो दोनों थंब ड्राइव में दक्षिण कोरियाई फिल्मों को बेच रहे थे और उत्तर कोरियाई जासूसों ने उन्हें जाल बिछाकर पकड़ा है। सूत्र ने कहा कि, किम जोंग के अधिकारी जनता के बीच जासूसी करते हैं और फिर दुकानदारों और फिल्म बेचने वालों को पकड़ लेते हैं। सूत्र ने कहा कि, ये दोनों लड़के भी जाल में फंस गये। उत्तरी हामग्योंग प्रांत के एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर आरएफए को बताया कि, फांसी की खबर पूरे देश में फैल गई और लोगों में दहशत फैल गई।
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कश्मीर पर दे चुकी हैं विवादित बयान, जर्मन विदेश मंत्री अब क्यों बता रही हैं भारत को आदर्श?

 

जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक दो दिवसीय भारत दौर पर आई हुई हैं। इस दौरान उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष डॉ. एस जयशंकर के साथ मुलाकात की और कई विषयों पर चर्चा की। इसके बाद दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी के बीच माइग्रेशन और मोबिलिटी को ले कर एक महत्वपूर्ण संधि पर हस्ताक्षर किए। इस संधि का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के लिए एक दूसरे के देश में पढ़ना, शोध करना और काम करना आसान बनाना है। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस अवसर पर जर्मनी की विदेश मंत्री ने भारत को दुनिया भर में कई देशों के लिए आदर्श बताया।

जर्मन मंत्री ने कश्मीर पर दिया था विवादित बयान
बेयरबॉक ने भारत रवाना होने से पहले कहा था कि भारत बीते 15 सालों में 40 लाख से अधिक लोगों को गरीबी के दायरे से बाहर निकालने में सफल रहा है, जो सराहना के योग्य है। इससे पता चलता है कि सामाजिक बहुलता, आजादी और लोकतंत्र भारत में आर्थिक विकास, शांति और स्थिरता का चालक है। बतादें कि इससे पहले जर्मनी की विदेश मंत्री बेयरबॉक भारत विरोधी बयान को लेकर चर्चा में रही थीं। उन्होंने कहा था कि हम कश्मीर मामले में शांतिपूर्ण समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र की बातचीत का समर्थन करते हैं। हालांकि अब एनालेना ने भारत को कई देशों का आदर्श बताया है।

यूक्रेन युद्ध से पूरी दुनिया में आया संकट
जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने भारत की जी-20 की अध्यक्षता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की इस महीने की अध्यक्षता की जिम्मेदारी संभालने का स्वागत किया और कहा कि जर्मनी "भारत के साथ सुरक्षा सहयोग मजबूत करना चाहता है।" इसके साथ ही एनालीना बेरबॉक ने कहा, "यूक्रेन में चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया को एक कठिन स्थिति में ला दिया है, जिसमें भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की भी समस्याएं शामिल हैं। जर्मन विदेश मंत्री ने कहा कि एक अवैध युद्ध ने पूरी दुनिया को एक मुश्किल स्थिति में ला दिया है और जब ऊर्जा आपूर्ति और उर्वरक की बात आती है तो इसने आपके देश के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।"

भारत एक बड़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहा हैः जर्मन विदेश मंत्री
एनालेनी बेयरबॉक ने कहा कि भारत ऐसे कठिन वक्त में बड़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। यह हमारे वक्त की सबसे कठिन घड़ी है। जर्मन विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की G20 अध्यक्षता और UNSC में आपकी अध्यक्षता हमारे G7 अध्यक्षता के साथ ओवरलैप करती है। बेयरबॉक ने कहा, "जी20 की अध्यक्षता संभालने के लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं। आपने हमारी चर्चा में स्पष्ट किया कि यह एक बहुत ही खास काम है। भारत इस मुश्किल घड़ी में वैश्विक जिम्मेदारी संभाल रहा है।" उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि भारत अपनी जी20 अध्यक्षता के दौरान 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' के आदर्श वाक्य के साथ जलवायु संकट से निपटने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

भारत को बताया महत्वपूर्ण व्यापारिक साझीदार
इससे पहले, जर्मन विदेश मंत्री ने बाली में हाल ही में संपन्न जी20 शिखर सम्मेलन में भारत द्वारा निभाई गई रचनात्मक भूमिका की सराहना की और यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर जी20 की स्पष्ट स्थिति के लिए नई दिल्ली को श्रेय दिया। दोनों नेताओं के बीच चीन को लेकर भी बातचीत हुई। बेरबॉक ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि चीन, जर्मनी के लिए कई मायनों में एक प्रतियोगी और एक प्रतिद्वंदी है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत जर्मनी का पुराना और महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है।
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Russia-Ukraine Crisis: यूक्रेन पर रूस ने और तेज किया हवाई हमला, पूरे देश में अलर्ट जारी


कीव (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच सोमवार को डोनेट्स्क और पोल्टावा क्षेत्रों में हवाई धमाके की खबर मिल रही है। खबरों के मुताबिक इन हमलों में दो व्यक्ति की मौत हो गई है वहीं, 3 लोग घायल हो गए हैं। यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि रूसी मिसाइलें दक्षिणी यूक्रेन के ज़ापोरिज़्ज़िया क्षेत्र में इमारतों से टकराईं, जिससे कई घर नष्ट हो गए और कम से कम दो लोगों की मौत हो गई।

अधिकारियों ने पूरे देश में अलर्ट जारी किया

शेफाली वर्मा को 18 साल की उम्र में मिली टीम इंडिया की कप्तानी
अधिकारियों ने पूरे देश में हवाई हमले की चेतावनी दी है और लोगों से सुरक्षित जगह शरण लेने का आग्रह किया है।रॉयटर्स ने बताया कि राष्ट्रपति कार्यालय के उप प्रमुख किरिलो टायमोशेंको ने हमलों के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी। शहर के एक अधिकारी ने कहा कि ज़ापोरिज़्ज़िया शहर के उपनगरों में इमारतों को निशाना बनाया गया था और कुछ रूसी मिसाइलों को मार गिराया गया था। एक बिजली प्रदान करने वाली कंपनी ने कहा कि नवीनतम मिसाइल हमलों में सुमी के उत्तरी क्षेत्र में बिजली गुल हो गई है।

मिसाइल हमले से बिजली सेवा बाधित

वहीं, ओडेसा में, स्थानीय जल आपूर्ति कंपनी ने कहा कि एक मिसाइल हमले ने पम्पिंग स्टेशनों की बिजली काट दी, जिससे पूरे शहर में पानी की कमी हो गई। द कीव इंडिपेंडेंट ने बताया कि यूक्रेन में हवाई हमले की चेतावनी दी गई है। हवाई हमले की चेतावनी में क्रीमिया और लुहांस्क शामिल नहीं हैं। कीव इंडिपेंडेंट के अनुसार, खार्किव क्षेत्र में विस्फोटों की सूचना मिली थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूक्रेन के अधिकांश हिस्सों में हवाई हमले के अलर्ट बंद हो गए हैं।

रूस के दो इलाकों में भी धमाके की सूचना

इसी बीच रूस से दो सैन्य हवाई क्षेत्रों में भी धमाके की खबर आई है। इस धमाके में कई लोग मारे गए हैं। बीबीसी की खबर के मुताबिक मॉस्को के दक्षिण-पूर्व में रियाजान शहर के पास एअर फील्ड में एक ईंधन टैंकर में विस्फोट होने से तीन लोगों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। वहीं, साराटोव क्षेत्र में हुए विस्फोट में दो अन्य लोगों के घायल होने की सूचना मिल रही है। फिलहाल अभी तक इन धमाकों की वजह का पता नहीं चला है। ये दोनों इलाके यूक्रेन की सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इन दोनों घटनाओं के बारे में सूचना दे दी गई है।


जेलेंस्की ने एकजुट रहने का किया आह्वान

इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने देशवासियों से सर्दियों के दौरान एकजुट रहने का आह्वान किया है। रविवार को एक वीडियो संबोधन में जेलेंस्की ने देशवासियों से कहा कि सभी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। रूस की मंशा सर्दियों का फायदा उठाकर यूक्रेन के खिलाफ कार्रवाई करने की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूक्रेन के लोगों को इस सर्दी को सहने के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है, चाहे वह कितनी भी कठिन क्यों न हो।
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“जब मैं बच्चा था...”, नस्लवाद पर ऋषि सुनक ने खोली जुबान, बकिंघम पैलेस घटना पर भी दी राय


लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन के बकिंघम पैलेस में नस्लवाद की घटना दुनियाभर में सुर्खियां बटोर रही है। इस मामले में प्रिंस विलियम की गॉडमदर लेडी सुजैन हसी के इस्तीफे के बाद अब प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी नस्लवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। सुनक ने कहा कि अतीत में उन्होंने खुद भी नस्लवाद का अनुभव किया है। उन्होंने कहा कि नस्लवाद के आरोप जहां कहीं भी लगेंगे, उसका सामना किया जाना चाहिए।

शाही महल घटना पर टिप्पणी से इनकार किया
दरअसल शाही परिवार की सदस्य सुजैन हसी के इस्तीफे के बाद जब इस मामले पर सुनक से सवाल किया गया तो उन्होंने अपनी बात रखी। सुनक ने कहा कि शाही महल के मामलों पर टिप्पणी करना उनके लिए सही नहीं होगा, हालांकि हम देख चुके हैं कि जिन्होंने ये गलती की थी उसे उन्होंने स्वीकार किया और उसके लिए माफी मांगी है। इस पर कार्रवाई भी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जैसा कि मैंने अतीत में बात की है, मैंने अपने जीवन में नस्लवाद का अनुभव किया है। हालांकि अब चीजें आगे बढ़ चुकी हैं।

नस्लवाद से निपटने में यूके ने की खूब प्रगति
सुनक ने कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि कुछ चीजें हैं जो मैंने तब अनुभव कीं जब मैं एक बच्चा और एक युवा व्यक्ति था और मुझे आज नहीं लगता है अब ऐसा होगा क्योंकि हमारे देश ने नस्लवाद से निपटने में अविश्वसनीय प्रगति की है।" इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नस्लवाद से निपटने की दिशा में अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है। इसलिए हम जहां कहीं भी नस्लवाद देखें तो हमें उसका सामना करना चाहिए। यह सही है कि हम गलतियों से सबक लेते हैं और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ते हैं।

प्रिंस विलियम की गॉडमदर पर लगे नस्लवाद के आरोप
यूके पीएम ऋषि सुनक का यह बयान प्रिंस विलियम की गॉडमदर लेडी सुजैन हसी पर लगे नस्लवाद के आरोपों के बाद आया है। यह घटना ब्रिटेन की महारानी कैमिला के कार्यक्रम में हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को लेकर किया गया था। 83 साल की प्रिंस विलियम की गॉड मदर लेडी सुजैन हसी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुईं थी। सुजैन पर आरोप है कि उन्होंने 61 वर्षीय एक अश्वेत महिला नगोजी फुलानी से पूछा की वह अफ्रीका के किस हिस्से से आई हैं, जबकि महिला पहले ही कई बार यह बता चुकी थी की वो ब्रिटेन की ही नागरिक है।

सुजैन हसी को देना पड़ा इस्तीफा
नगोजी फुलानी के बार-बार यह बताने पर कि वह ब्रिटेन की हैं, और हैकनी में पैदा हुई थीं, सुजैन ने इस पर यकीन करने से इनकार कर दिया और अपना सवाल पूछना जारी रखा। नगोजी फुलानी घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए चैरिटी का काम करती हैं। घटना और आरोपों के प्रकाश में आने के बाद, बकिंघम पैलेस के एक प्रवक्ता ने इस्तीफा देने की खबर साझा करते हुए प्रतिक्रिया दी है। बकिंघम पैलेस के सदस्य की टिप्पणी पर महल के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह निराशाजनक है और इस मामले की जांच की जा रही है।
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन कोविड-19 से संक्रमित

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कहा कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं लेकिन उनमें बीमारी के लक्षण हल्के हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से कोविड-19 रोधी टीके की खुराक लेने की अपील की। अमेरिका के 42वें राष्ट्रपति रहे क्लिंटन अक्टूबर 2021 को मूत्र नली के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती रहे थे। क्लिंटन ने बुधवार को ट्वीट किया, मैं कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया हूं। मुझे हल्के लक्षण हैं लेकिन मैं कुल मिलाकर ठीक हूं और अपने आप को घर पर व्यस्त रख रहा हूं।

उन्होंने कहा, शुक्र है कि मैंने टीके की खुराक और बूस्टर खुराक ले रखी है जिसने मेरे लक्षणों को हल्का रखा और मैं सभी से टीका लगवाने की अपील करता हूं खासतौर से जब सर्दियां करीब आ रही हैं। जॉन्स हॉप्किंस यूनिवर्सिटी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, करीब तीन साल पहले कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से अमेरिका में संक्रमण के 9.86 करोड़ मामले आए और 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

 

 

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ब्रिटेन के शाही महल में नस्लवाद का मुद्दा फिर गरमाया, प्रिंस विलियम की गॉडमदर को देना पड़ा इस्तीफा

 

लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन का शाही महल एक बार फिर से नस्लीय टिप्पणी को लेकर विवादों में है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बकिंघम पैलेस की एक सदस्य पर नस्लीय टिप्पणी करने का आरोप है। इस मामले का खुलासा होने के बाद शाही परिवार की सदस्य को इस्तीफा देना पड़ा है। ब्रिटिश मीडिया द्वारा ऐसा दावा किया जा रहा है शाही परिवार की एक सदस्य ने शाही महल से जुड़ा काम करने वाली एक अश्वेत महिला से बार-बार उसके मूल स्थान को लेकर सवाल पूछा था।

महारानी के कार्यक्रम में हुई घटना
यह घटना ब्रिटेन की महारानी कैमिला के कार्यक्रम में हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को लेकर किया गया था। 83 साल की प्रिंस विलियम की गॉड मदर लेडी सुजैन हुस्से भी इस कार्यक्रम में शामिल हुईं थी। सुजैन पर आरोप है कि उन्होंने 61 वर्षीय एक अश्वेत महिला नगोजी फुलानी से पूछा की वह अफ्रीका के किस हिस्से से आई हैं, जबकि महिला पहले ही कई बार यह बता चुकी थी की वो ब्रिटेन की ही नागरिक है।

शाही महल के प्रवक्ता ने जताया दुख
नगोजी फुलानी के बार-बार यह बताने पर कि वह ब्रिटेन की हैं, और हैकनी में पैदा हुई थीं, सुजैन ने इस पर यकीन करने से इनकार कर दिया और अपना सवाल पूछना जारी रखा। नगोजी फुलानी घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए चैरिटी का काम करती हैं। घटना और आरोपों के प्रकाश में आने के बाद, बकिंघम पैलेस के एक प्रवक्ता ने इस्तीफा देने की खबर साझा करते हुए प्रतिक्रिया दी है। बकिंघम पैलेस के सदस्य की टिप्पणी पर महल के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है।

लेडी सुजैन ने भी टिप्पणी पर जताया खेद
प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह के मामलों को बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस तरह की टिप्पणी पर हमें खेद है। हम नागोजी से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, यदि वे चाहें तो इस मामले पर व्यक्तिगत रूप से हमें अपने बुरे अनुभव बता सकती हैं। हालांकि प्रवक्ता ने इस दौरान उसका नाम नहीं लिया जिस पर नस्लीय टिप्पणी करने का आरोप है। प्रवक्ता ने कहा कि उस सदस्य ने माफी मांगने की इच्छा जाहिर की है और उन्हें इस बात पर अफसोस है कि उनकी टिप्पणी से किसी को तकलीफ हुई है।

शाही परिवार में नस्लवाद के लगते रहे हैं आरोप
आपको बता दें कि ब्रिटेन के शाही महल में नस्लभेद का यह कोई पहला मामला नहीं है। किंग चार्ल्स के छोटे बेटे प्रिंस हैरी की पत्नी मेगन मर्केल ने भी आरोप लगाया था कि महल में उन पर नस्लभेदी टिप्पणी की गई थी। मेगन ने कहा था कि उनके गर्भवती होने के दौरान महल के लिए काम करने वाले सदस्य ने उनके बच्चे के रंग को लेकर सवाल किए थे। लोगों को यह चिंता थी कि कहीं बच्चे का रंग अश्वेत न हो जाए।
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दो महिला PM जैसिंडा अर्डर्न और सना मारिन से रिपोर्टर ने पूछ दिया सेक्सिस्ट सवाल, जवाब सुन हो गई बोलती बंद


हेलसिंकी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन अपनी समकक्ष जैसिंडा अर्डर्न से मिलने न्यूजीलैंड पहुंचीं। यह दोनों की पहली मुलाकात थी। इस मुलाकात के बाद दोनों ने प्रेस को भी संबोधित किया। इस दौरान एक पत्रकार ने उनसे एक अजीब सवाल पूछ दिया जिसके बाद न्यूजीलैंड की पीएम ने ऐसा जवाब दिया जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। पत्रकार के सवाल और पीएम के जवाब को सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है।

रिपोर्टर ने पूछ दिया गलत सवाल
साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने पूछा, 'बहुत से लोग सोच रहे होंगे, कि क्या आप दोनों सिर्फ इसलिए मिल रही हैं क्योंकि आप दोनों महिलाए हैं और आपकी उम्र लगभग बराबर है। आप दोनों में बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो कि एक जैसी हैं। जैसे कि आप दोनों की राजनीति में एंट्री या फिर क्या ये मीटिंग फिनलैंड और न्यूजीलैंड के रिलेशन को लेकर स्ट्रैटजी बनाने के लिए रखी गई थी?

जेसिका अर्डर्न ने रिपोर्टर की बोलती बंद
42 साल की न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न इस सवाल से हैरान हुईं मगर इसका जवाब उन्होंने बेहद संतुलित तरीके से दिया। अर्डर्न ने सवाल का जवाब देते हुए कहा, पहली बात तो ये कि क्या ऐसा सवाल कभी बराक ओबामा (अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति) और जॉन की (न्यूज़ीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री) से किया गया था? फिर ऐसा सवाल महिला प्रधानमंत्रियों से क्यों किया जा रहा है।

सना मारिन ने भी दिया जवाब
इसके आगे अर्डर्न ने कहा, हम जानते हैं कि आमतौर पर राजनीति में पुरूष अधिक होते हैं, लेकिन अगर दो महिला नेत्री मुलाकात करती हैं तो इसकी वजह सिर्फ जेंडर नहीं है। अर्डर्न की प्रतिक्रिया के बाद, 37 वर्षीय फिनलैंड की पीएम सना मारिन ने कहा कि 'हम मिल रहे हैं क्योंकि हम समकक्ष हैं। हम दोनों में काफी कुछ कॉमन है और हम एक साथ मिलकर बहुत काम करना चाहते हैं।"

यूजर कर रहे तारीफ
जैसिंडा अर्डर्न और सना मरीन ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा- हमने फिनलैंड-न्यूजीलैंड में होने वाले इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट, टेक्नोलॉजी, रूस-यूक्रेन जंग, क्लाइमेट क्राइसेस, ईरान में महिलाओं की स्थिति जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की। इस वीडियो के वायरल होने के बाद यूजर्स ने दोनों प्रधानमंत्रियों के जवाब के तरीकों की खूब तारीफें की।
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