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SCO Summit: इसी हफ्ते शी जिनपिंग, शहबाज शरीफ और व्लादिमीर पुतिन से मिल सकते हैं PM मोदी

 

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी हफ्ते चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के उज्बेकिस्तान के समरकंद में 15 और 16 सितंबर को होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में अपने पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने की उम्मीद है।

पीएम मोदी जाएंगे समरकंद
भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पीएम मोदी एससीओ काउंसिल ऑफ स्टेट्स ऑफ स्टेट्स की 22 वीं बैठक में भाग लेने के लिए समरकंद का दौरा करेंगे। पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर समरकंद में होंगे। जहां चीन, पाकिस्तान और रूस के राष्ट्राध्यक्ष भी मौजूद होंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस रिलीज में कहा गया है कि, "उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राज्य प्रमुखों की परिषद की 22 वीं बैठक में भाग लेने के लिए 15-16 सितंबर 2022 को समरकंद, उज्बेकिस्तान का दौरा करेंगे'। एससीओ शिखर सम्मेलन में एससीओ सदस्य देशों के नेता, पर्यवेक्षक राज्यों, एससीओ के महासचिव, एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (आरएटीएस) के कार्यकारी निदेशक, तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति और अन्य आमंत्रित अतिथि शामिल होंगे।

वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा
शिखर सम्मेलन के दौरान, एससीओ संगठन के नेताओं के बीच पिछले दो दशकों में संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करने और राज्य और बहुपक्षीय सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करने की उम्मीद है। बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के सामयिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी के शिखर सम्मेलन से इतर कुछ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी संभावना है। एससीओ काउंसिल ऑफ स्टेट्स ऑफ स्टेट्स की 21 वीं बैठक 17 सितंबर 2021 को दुशांबे में हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की गई थी। ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन ने बैठक की अध्यक्षता की थी। पीएम मोदी ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और वीडियो लिंक के माध्यम से शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित किया था। दुशांबे में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया था।

शी जिनपिंग से मिलेंगे पीएम मोदी?
एससीओ की यह बैठक संभावनाओं से भरी हुई है, क्योंकि नरेन्द्र मोदी और शी जिनपिंग, दोनों नेताओं ने 7 जुलाई 2017 को हैम्बर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर एक त्वरित बैठक में मुलाकात की थी और दोनों नेताओं के बीच की गई वो बैठक डोकलाम तनाव के ठीक बात हुई थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आखिरी आमने-सामने की बैठक 13 नवंबर 2019 को ब्राजील की राजधामी ब्रीसीलिया में हुई थी, जब दोनों नेताएं ने ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लिया था, लेकिन उसके बाद अलग अलग प्लेटफॉर्म पर हुए वर्चुअल बैठक में तो दोनों नेता शामिल हुए हैं, लेकिन आमने-सामने की बैठक नहीं हो पाई है और इस दौरान दोनों देशों के बीच के संबंध में काफी गिरावट आई है और जब पीएलए ने 5 मई 2020 को पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर और फिर गालवान, खुगरंग में जमीनी स्थिति को बदलने की कोशिश की, तो 17 मई 2020 को पूर्वी लद्दाख सेक्टर में नाला, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स में तनाव भड़क उठा, जो जून महीने में हिंसक झड़प में तब्दील हो गया था।
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श्रीलंका ने चीन से कर्ज लेकर बनाया था 350 मीटर ऊंचा टावर, देश डुबाने में इसका भी था बड़ा हाथ

 

कोलंबो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चीन ने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में सबसे ऊंचे टावर का निर्माण किया है। काफी दिनों से बंद पड़ा यहा टावर अगले गुरुवार से खोला जा सकता है।350 मीटर ऊंचे हरा-बैंगनी रंग का यह लोटस टावर चीनी पैसे से बना हुआ है जो कि बेदखल राजपक्षे परिवार की बीजिंग से निकटता का प्रतीक बन चुका है। लोटस संचार टावर के ऑपरेटर के मुताबिक यह गुरुवार तक खुल जाएगा।

स्टैचू ऑफ यूनिटी से दोगुनी ऊंची
इस टावर की विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी ऊंचाई भारत के सबसे ऊंचे स्टैचू ऑफ यूनिटी से लगभग दोगुनी है। इतनी ऊंचाई का टावर भारत में भी अब तक नहीं बन पाया है। इस टावर का निर्माण चीन के बेल्‍ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) के तहत किया गया है। भारत शुरुआत से चीन के इस प्रोजेक्‍ट का विरोध करता रहा है। इस टावर का निर्माण दस साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में शुरू हुआ था। इसके बाद से ही यह भ्रष्टाचार के दावों से ग्रसित है।

टावर के रखरखाव की लागत चुकाना मुश्किल
इस टावर चीनी ऋण के साथ निर्मित उन कई 'सफेद हाथी' परियोजनाओं में से एक है। राज्य के स्वामित्व वाली कोलंबो लोटस टावर मैनेजमेंट कंपनी ने कहा कि उन्होंने गुरुवार से आगंतुकों के लिए अपना डेक खोलने और नुकसान को कम करने के लिए टिकटों की बिक्री शुरू करने का फैसला किया है। मुख्य कार्यकारी प्रसाद समरसिंघे ने कहा कि हम इसे बंद नहीं रख सकते। इस टावर के रखरखाव की लागत बहुत अधिक है।

टावर बनाने में 80 फीसदी हिस्सा चीन का
संचालक का कहना है कि संचार टावर के रूप में यह किसी काम का नहीं है ऐसे में हम इस टावर को मनोरंजन का केंद्र बनाना चाहते हैं। करीब 113 मिलियन डॉलर की लागत से तैयार हुए इस लोटस टावर के निर्माण में 80 फीसदी धनराशि चीन ने प्रदान की है। 30,600 वर्ग मीटर में बने इस टावर में एक होटल, टेलिकम्‍युनिकेशन म्‍यूजियम, ऑडिटोरियम, ऑब्‍जर्वेशन टावर, मॉल शामिल हैं। श्रीलंका के पूर्व राष्‍ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना ने इस टावर के निर्माण से जुड़ी चीनी कंपनी पर 11 मिलियन डॉलर के घपले का आरोप लगा चुके हैं।

पूर्व राष्ट्रपति ने लगाया था भ्रष्ट्राचार का आरोप
राष्‍ट्रपति सिरीसेना ने आरोप लगाते हुए कहा कि 2012 में शुरू हुए इस प्रोजेक्‍ट के लिए चाइना एक्जिम बैंक से 16 मिलियन रुपए का कर्ज लिया गया था। राष्‍ट्रपति ने कहा कि त्रिपक्षीय समझौते के तहत चीनी कंपनी को 11 मिलियन डॉलर दिए गए थे। लेकिन यह कंपनी गायब हो गई। जब सरकार ने इस घपले की जांच की तो पता चला कि चीन में इस नाम की कोई कंपनी है ही नहीं।
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भारत ने UNHRC में उठाया तमिल मुद्दा, कहा- ठोस कदम नहीं उठा रहा श्रीलंका, ये हमारे लिए चिंता की बात

 

जेनेवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में तमिल का मुद्दा उठाया। भारत ने कहा कि श्रीलंका में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। भारत ने तमिल मुद्दे पर एक राजनीतिक समाधान तक पहुंचने की अपनी प्रतिबद्धता पर श्रीलंकाई सरकार द्वारा किसी भी औसत दर्जे की प्रगति की कमी पर चिंता व्यक्त की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 51वें सत्र में ओएचसीएचआर की रिपोर्ट श्रीलंका में सुलह, जवाबदेही और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के विषय पर आयोजित एक संवाद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि श्रीलंका खुद अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हट रहा है और अभी तक उसने तमिल मुद्दे के समाधान को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

श्रीलंका में मानवाधिकार में हो सुधार
भारत ने कहा कि पड़ोसी द्वीप राष्ट्र श्रीलंका में शांति और सुलह पर उसका लगातार दृष्टिकोण एक संयुक्त श्रीलंका के ढांचे के भीतर एक राजनीतिक समाधान के लिए रहा है, लेकिन वहां रहने वाले तमिल लोगों के लिए न्याय, शांति, समानता और सम्मान सुनिश्चित करना भी उसका मानवाधिकार है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका को मानवाधिकारों में सुधार करना चाहिए और मानवीय चुनौतियों से निपटने के लिए संस्थानों को मजबूत करना चाहिए। बता दें कि श्रीलंका इस समय सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। भारत ने कहा कि यह श्रीलंका के सर्वोत्तम हित में है कि वह अपने नागरिकों के हित में कार्य करे और उनके सशक्तिकरण की दिशा में काम करे।

श्रीलंका का समर्थन करने की अपील की
UNHRC के एक शीर्ष अधिकारी नादा अल-नशिफ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को श्रीलंका का समर्थन करना चाहिए क्योंकि देश में लोग भोजन, ईंधन, बिजली और दवा की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व वाली श्रीलंका की नई सरकार से जुलाई में पूर्व राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे को बाहर करने में मदद करने वाले विरोधी नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा कानूनों के उपयोग को समाप्त करने का भी आग्रह किया।
 
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महारानी एलिज़ाबेथ का अंतिम संस्कार 19 को, दुनियाभर के दिग्गज नेता व हस्तियां होंगीं शामिल

 लंदन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर एबे में 19 सितंबर को दिन में 11 बजे महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अंतिम संस्कार होगा। इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन समेत विश्व के बहुत से नेता दिवंगत महारानी को अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद रहेंगे। इससे पहले रविवार को महारानी का पार्थिव शरीर स्काटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग स्थित पैलेस आफ होलीरुड हाउस ले जाया जाएगा। स्काटलैंड में यह ब्रिटेन के शासक का आधिकारिक आवास है। यहां से 15 सितंबर को ताबूत लंदन ले जाया जाएगा, जहां महारानी का अंतिम संस्कार होगा।

लंदन में महारानी का पार्थिव शरीर चार दिन तक वेस्टमिंस्टर हाल में रखा जाएगा, जहां पर सामान्य जन उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। 19 सितंबर को प्रात: ताबूत को वेस्टमिंस्टर एबे ले जाया जाएगा जहां पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होगी। यहां पर विश्व भर से आए नेता और गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे। प्रार्थना और श्रद्धांजलि के बाद दिवंगत महारानी का ताबूत तोपगाड़ी पर रखा जाएगा। उसके बाद शवयात्रा शुरू होगी। यह यात्रा विंडसर कैसल में सेंट जार्ज चैपल जाकर पूरी होगी। वहीं पर स्वर्गीय पति प्रिंस फिलिप के बगल में दिवंगत महारानी को दफनाया जाएगा।

दिवंगत महारानी के अंतिम संस्कार की तारीख की सूचना देकर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विश्व भर के नेताओं से अनुरोध किया गया है। किंग चा‌र्ल्स तृतीय ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार के दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया है। ब्रिटेन के लोगों के लिए इस वर्ष यह दूसरा अतिरिक्त अवकाश होगा। इससे पहले महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की सत्ता के 70 साल पूरे होने पर जून में लोगों को अतिरिक्त अवकाश दिया गया था। जिस वेस्टमिस्टर एबे में महारानी का अंतिम संस्कार होगा, उसी के गिरजाघर में 1947 में प्रिंसेस रहीं एलिजाबेथ की प्रिंस फिलिप के साथ शादी हुई थी। उस समय नव विवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने के लिए लाखों लोग आए थे।

पीएम ट्रस और मंत्रियों ने ली किंग के वफादार रहने की शपथ
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज ट्रस और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने शनिवार को किंग चा‌र्ल्स तृतीय के प्रति वफादार रहने की शपथ ली। हाउस आफ कामंस में सबसे पहले स्पीकर लिडसे होयले ने किंग चा‌र्ल्स और उनके उत्तराधिकारियों के प्रति वफादार रहने की शपथ ली। उनके बाद प्रधानमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ सांसदों ने यह शपथ ली। राज सिंहासन के प्रति वफादार रहने की शपथ कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में सभी 650 सांसद वफादारी की शपथ लेने की कोशिश करेंगे। इससे पहले इस तरह की शपथ महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के प्रति वफादारी के लिए ली गई थी।

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भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को विकसित करने शक्तिशाली प्रयास किया है : जयशंकर

 रियाद/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि यूक्रेन संकट से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद भारत कम से कम सात प्रतिशत वृद्धि दर के साथ इस साल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन संकट की वजह से दुनियाभर में तेल की कीमतें बढ़ी हैं और परिणामस्वरूप मुद्रा स्फीति बढ़ी है लेकिन इन सबके बावजूद भारतीय आर्थिकी तेजी से बढ़ रही है। जयशंकर रियाद में प्रवासी भारतीयों को संबोधित कर रहे थे। वह शनिवार को यहां दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। भारत के विदेश मंत्री के रूप में उनकी यह सऊदी अरब की पहली यात्रा है।

जयशंकर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को विकसित करने और उच्च आय वाला देश बनाने की दिशा में शक्तिशाली प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत उन तरीकों के बारे में सोचता है जिससे वह अपनी क्रेडिट, बैंकिंग, शिक्षा और श्रम नीति को बदल सकता है। उन्होंने कहा कि कई बड़े सुधार हुए हैं और हम उसके परिणाम दो बहुत ही दिलचस्प वाकयों से देख सकते हैं। 31 मार्च, 2021 को समाप्त हुए बीते वित्त वर्ष में हमने अब तक का सबसे अधिक निर्यात किया है। हमारा कुल निर्यात 670 अरब अमेरिकी डालर का रहा। इसमें से 400 अरब अमेरिकी डालर के माल का व्यापार किया गया। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि एक व्यापारिक शक्ति के रूप में भारत का आइडिया आज विश्वसनीय हो गया है।

यात्रा के दौरान विदेश मंत्री अपने सऊदी समकक्ष प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ भारत-सऊदी अरब सामरिक भागीदारी परिषद के ढांचे के तहत स्थापित राजनीतिक, सुरक्षा, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे।

वंदे भारत मिशन के तहत सात करोड़ लोग वापस लाए गए
विदेश मंत्री ने वंदे भारत मिशन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके तहत दुनियाभर से सात करोड़ लोगों को वापस भारत लाया गया। कोविड महामारी के दौरान अन्य किसी देश ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान यात्रा प्रतिबंधों के बीच विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए वंदे भारत मिशन सबसे बड़ा निकासी अभ्यास रहा। भारत क्या है, इसे दुनिया ने देखा। इससे पहले खाड़ी युद्ध के दौरान इराक और कुवैत में फंसे करीब पौने दो लाख लोगों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया था।

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भूकंप के झटकों से हिली धरती, 7.7 रही तीव्रता, सुनामी की चेतावनी जारी...

 पोर्ट मोर्सबी/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पापुआ न्यू गिनी में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.7 मापी गई है। भूकंप आने के बाद आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया है। लोग आनन-फानन में घर के बाहर निकल गए। वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई है। जिस तरह से भूकंप की तीव्रता थी उससे भारी नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है। बता दें, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया के पास प्रशांत महासागर क्षेत्र का एक देश है जो कि भूकंप के मद्देनजर बेहद संवेदनशील है। भूकंप का केंद्र राजधानी पोर्ट मार्सबे से करीब 60 किलोमीटर दूर लाई में था।

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महारानी एक चट्टान की तरह थीं जिस पर आधुनिक ब्रिटेन की नींव रखी : ट्रस

 लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन की नव निर्वाचित प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी तुलना ऐसी चट्टान से की जिस पर आधुनिक ब्रिटेन की नींव रखी हुई है। उन्होंने बकिंघम पैलेस द्वारा महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के स्कॉटलैंड में निधन की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद एक बयान जारी किया। ट्रस को 96 वर्षीय महारानी ने कुछ दिनों पहले ही प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया था।

ट्रस ब्रिटेन में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महारानी के निधन के बाद लंदन में बृहस्पतिवार को 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर आयीं। उन्होंने महारानी को राष्ट्रमंडल का एक चैम्पियन तथा 70 साल के उनके शासन के दौरान स्थिरता एवं ताकत का स्रोत बताया। ट्रस ने कहा, वह महान ब्रिटेन की बड़ी ताकत थीं और यह ताकत हमेशा बनी रहेगी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय एक चट्टान की तरह थीं जिस पर आधुनिक ब्रिटेन की नींव रखी हुई है। उनके शासन में हमारा देश समृद्ध हुआ और फला-फूला।

 
 
 

उन्होंने कहा, वह हमारी सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महारानी रहीं। 70 वर्ष तक इतनी प्रतिष्ठा और गरिमा के साथ देश की अगुवाई करना एक असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि सेवा को समर्पित उनका व्यक्तित्व इतना विशाल है जो हमने अपने होश संभालने के बाद तो नहीं देखा। इसके बदले में ब्रिटेन तथा दुनियाभर के लोगों ने उन्हें भरपूर प्यार दिया तथा उनकी सराहना की।

 
 
 

महारानी को निजी प्रेरणा बताते हुए ट्रस ने कर्तव्य के प्रति उनके समर्पण को सभी के लिए एक मिसाल बताया और प्रधानमंत्री के तौर उनसे अपनी पहली तथा आखिरी मुलाकात को याद किया। विपक्ष के नेता सर कीर स्टार्मर ने भी महारानी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने हम सभी के साथ खास, निजी संबंध बनाए। ऐसे संबंध जो उनके देश की सेवा तथा समर्पण पर आधारित हैं।

इस बीच, प्रतिष्ठित प्रवासी भारतीय उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल ने महारानी के 70 वर्षों के शासन के दौरान उनकी शानदार उपलब्धियों की प्रशंसा की।महारानी के निधन पर हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए लॉर्ड पॉल ने कहा, वह हमारी सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महारानी रहीं। सात दशकों तक इतनी प्रतिष्ठा और गरिमा के साथ ब्रिटेन जैसे देश की अगुवाई करना एक असाधारण उपलब्धि है।

 

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बाढ़ प्रभावित पाकिस्तान की यात्रा पर पहुंचे संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुतारेस

 इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनिया गुतारेस ने शुक्रवार को दुनिया से पाकिस्तान की मदद करने की अपील की। दक्षिण एशियाई मुल्क विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई है और सवा तीन करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। पाकिस्तान में सैलाब की भीषण स्थिति के बीच महासचिव गुतारेस एकजुटता दिखाने के लिए शुक्रवार को दो दिवसीय दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे।

अपनी यात्रा से दो हफ्ते से भी कम वक्त पहले उन्होंने पाकिस्तान में अप्रत्याशित बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए 16 करोड़ डॉलर के आपात कोष की अपील की थी। इस सैलाब में जून से करीब 1350 लोगों की मौत हो चुकी है तथा पाकिस्तान का करीब एक तिहाई हिस्सा पानी में डूबा हुआ है।

गुतारेस ने देश पहुंचने के बाद ट्वीट किया, मैं यहां विनाशकारी बाढ़ के बाद पाकिस्तानी लोगों के साथ अपनी गहरी एकजुटता व्यक्त करने के लिए पाकिस्तान पहुंचा हूं। उन्होंने कहा,  मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बड़े पैमाने पर मदद की अपील करता हूं। गुतारेस की अगवानी उप विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने की और वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ से भी मुलाकात करेंगी।

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता आसिम इफ्तिखार के मुताबिक, वह राष्ट्रीय बाढ़ प्रतिक्रिया और समन्वय केंद्र (एनएफआरसीसी) का भी दौरा करेंगे और प्रधानमंत्री शरीफ के संग संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करेंगे और विदेश मंत्री के साथ वार्ता भी करेंगे। उनके बाढ़ प्रतिक्रिया से संबंधित अन्य कार्यक्रम भी हैं।

गुतारेस बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित बलूचिस्तान और सिंध के इलाकों का दौरा करेंगे जहां वह प्रभावित लोगों से बातचीत भी करेंगे। पाकिस्तान का बड़ा इलाका पानी में डूब गया है और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं। सरकार का कहना है कि सैलाब से 3.3 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि बाढ़ के कारण 10 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ है।

इफ्तिखार ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार मुल्क के सामने पुनर्निर्माण और पुनर्वास की बड़ी चुनौती के बारे में दुनिया को अवगत कराने के लिए गुतारेस की इस यात्रा का इस्तेमाल करना चाहती है।

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9/11 हमलों के मास्टरमाइंड को दो दशक बाद भी न्याय के दायरे में नहीं लाया जा सका

 न्यूयॉर्क (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका ने 11 सितंबर, 2001 में हुए हमलों के साजिशकर्ताओं के खिलाफ बड़ी जीत हासिल करते हुए एक मार्च, 2003 को अलकायदा के आतंकवादी खालिद शेख मोहम्मद को पाकिस्तान के रावलपिंडी से गिरफ्तार करके बड़ी सफलता हासिल की थी। अमेरिकी खुफिया एजेंट को अलकायदा के तीसरे नंबर के नेता को पकड़ने में 18 महीने खासी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन अमेरिका की उसे न्याय के दायरे में लाने की कोशिश अब भी सफल नहीं हो पाई है।

रविवार को इन आतंकवादी हमलों के 21 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इतने लंबे समय के बाद भी मोहम्मद और इन हमलों के चार अन्य आरोपी ग्वांतानामो बे में अमेरिकी हिरासत केंद्र में हैं और एक सैन्य न्यायाधिकरण के समक्ष उनकी नियोजित सुनवाई बार-बार स्थगित हो रही है। इस संबंध में ताजा झटका उस समय लगा, जब न्यायिक सुनवाई से पहले होने वाली सुनवाई को पिछले महीने रद्द कर दिया गया। यह हमले के करीब 3,000 पीड़ितों के संबंधियों के लिए एक और निराशाजनक घटना थी, जो लंबे समय से उम्मीद कर रहे हैं कि सुनवाई से संभवत: कई अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर मिल सकेंगे।

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 11 सितंबर, 2001 को हुए हमले में अपनी 25 वर्षीय बेटी एंड्रिया को खोने वाले गॉर्डन हाबरमैन ने कहा, अब, मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या होने वाला है। वह व्यक्तिगत रूप से कानूनी कार्यवाही देखने के लिए विस्कॉन्सिन स्थित वेस्ट बेंड में अपने घर से ग्वांतानामो तक चार बार यात्रा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल निराशा हाथ लगी।

हाबरमैन ने कहा, मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि अमेरिका को अंतत: सच्चाई पता चले कि क्या हुआ था और यह कैसे किया गया था। मैं व्यक्तिगत रूप से यह सुनवाई देखना चाहता हूं। यदि मोहम्मद को दोषी करार दिया जाता है, तो उसे मृत्युदंड मिल सकता है। न्यूयॉर्क के एक पूर्व अमेरिकी वकील डेविड केली ने हमलों में न्याय विभाग की राष्ट्रव्यापी जांच की सह-अध्यक्षता की थी। उन्होंने अभियोग शुरू करने में देरी और असफलता को पीड़ितों के परिवारों के लिए एक भयानक त्रासदी करार दिया।

अमेरिका ने अलकायदा के नेता ओसाबा बिन लादेन को 2011 में और उसके बाद आतंकवादी संगठन के नेता बने अयमान अल जवाहिरी को इस साल अगस्त में ड्रोन हमले में मार दिया था।

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किंग चार्ल्‍स ने विलियम को प्रिंस और केट को प्रिंसिस ऑफ वेल्‍स घोषित किया

 ब्रिटेन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन नरेश चार्ल्‍स-तृतीय ने दिवंगत महारानी एलिजाबेथ -द्वितीय को भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की है। उन्‍होंने निष्‍ठा, आदर और प्रेम भाव के संकल्‍प के साथ नरेश के रूप में राष्‍ट्र  सेवा की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। ब्रिटेन नरेश ने अपने पुत्र विलियम और पुत्रवधु केट को प्रिंस एंड प्रिंसेस ऑफ वेल्‍स नामित किया। हाल के वर्षों में राज परिवार में विलियम और केट की भूमिका महत्‍वपूर्ण हो गई थी। चार्ल्‍स ने कल बकिंघम पैलेस में प्रधानमंत्री लिज ट्रस के साथ पहली औपचारिक भेंट की।

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किंग चार्ल्स III बने ब्रिटेन ने नए सम्राट, सेंट जेम्स पैलेस में हुई ताजपोशी

 लंदन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। महारानी एलिजाबेथ के बाद आधिकारिक रूप से ब्रिटेन को अपना नया सम्राट मिल गया है। शनिवार को सेंट जेम्स पैलेस में परिग्रहण परिषद की बैठक में प्रिवी काउंसिल ने किंग चार्ल्स III को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के नए सम्राट के रूप में घोषित किया गया। इस मौके पर एक एतिहासिक समारोह आयोजित करके किंग चार्ल्स III की ताजपोशी की गई। इस मौके पर नया सम्राट बनाए जाने से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरीं की गईं। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में  क्वीन कैमिला, प्रिंस ऑफ वेल्स विलियम, पूर्व पीएम बोरिस जॉनसन और वर्तमान प्रधानमंत्री लिज ट्रस भी मौजूद रहीं।

ब्रिटेन के लंदन में सेंट जेम्स पैलेस में परिग्रहण परिषद और प्रधान उद्घोषणा करते हुए किंग चार्ल्स तृतीय ने कहा कि मेरी प्यारी मां और रानी के निधन की घोषणा करना मेरा दुखद कर्तव्य है। मुझे पता है कि हम सभी की अपूरणीय क्षति हुई है और आप इस क्षति में मेरे साथ कितनी गहरी सहानुभूति रखते हैं।

प्रिंस चार्ल्स का पूरा नाम चार्ल्स फिलिप आर्थर जॉर्ज है जो प्रिंस फिलिप और एलिजाबेथ द्वितीय के बड़े बेटे हैं। चार्ल्स का जन्म 14 नवंबर 1948, बकिंघम पैलेस में हुआ था। चार्ल्स ने 29 जुलाई, 1981 को लेडी डायना स्पेंसर से शादी की थी। दोनों के दो बेटे विलियम और हैरी हैं। 1996 में चार्ल्स और डायना दोनों अलग हो गए थे। 1997 में पेरिस में हुए एक कार हादसे में प्रिंसेस ऑफ वेल्स डायना की मौत हो गई। बाद में नौ अप्रैल, 2005 को चार्ल्स ने कैमिला पार्कर से शादी कर ली थी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद चार्ल्स को राजा घोषित कर दिया गया है। चार्ल्स अभी 73 वर्ष के हैं। चार्ल्स के राजा बनने के बाद उनके बड़े बेटे ड्यूक ऑफ कैंब्रिज प्रिंस विलियम अब वेल्स के राजकुमार कहलाएंगे।

यहां से की चार्ल्स ने पढ़ाई
चार्ल्स ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वेस्ट लंदन के हिल हाउस स्कूल में प्राप्त की। हैम्पशायर और स्कॉटलैंड में निजी स्कूली शिक्षा के बाद चार्ल्स ने 1967 में कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में प्रवेश लिया। उन्होंने 1971 में वहां स्नातक की डिग्री ली। जहां उन्होंने मानव विज्ञान, पुरातत्व और इतिहास की पढ़ाई की, कनाडा में जन्मे प्रोफेसर जॉन कोल्स उनके अनुशिक्षक थे।

कला में स्नातक की डिग्री हासिल की
23 जून 1970 को उन्होंने कला में स्नातक की डिग्री हासिल की और विश्वविद्यालय की डिग्री प्राप्त करने वाले शाही परिवार के वे तीसरे सदस्य बने। इसके बाद 2 अगस्त 1975 को विश्वविद्यालय के परंपरा के अनुसार उन्हें कैम्ब्रिज से कला में स्नातकोत्तर की डिग्री से सम्मानित किया गया। इसके बाद चार्ल्स ने ओल्ड कॉलेज (एबेरिस्टवेथ में स्थित वेल्स विश्वविद्यालय का एक हिस्सा) में भी दाखिला लिया, जहां उन्होंने वेल्स भाषा और वेल्स इतिहास का अध्ययन किया। वे वेल्स के ऐसे पहले युवराज थे, जिनका जन्म वेल्स से बाहर होने के बावजूद उन्होंने रियासत की भाषा सीखने का प्रयास किया।

राजा को मिलीं शक्तियां
महारानी एलिजाबेथ ब्रिटेन के अलावा 14 कॉमनवेल्थ देशों की भी महारानी थीं। अब किंग चार्ल्स इन देशों के राजा हैं। अब राजा के पास देश में सरकार की नियुक्ति को लेकर शक्तियां हैं। आम चुनाव जीतने वाली पार्टी के नेता को आमतौर पर बकिंघम पैलेस बुलाया जाता है, जहां उन्हें सरकार बनाने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया जाता है। वहीं पहले रानी दूसरे देशों के मेहमान राष्ट्राध्यक्षों की मेजबानी करती थीं। अब उनकी जगह अब किंग चार्ल्स III यानी चार्ल्स फिलिप आर्थर जॉर्ज करेंगे।

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 25 साल की उम्र में संभाला था सिंहासन
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 6 फरवरी 1952 को पिता किंग जॉर्ज की मौत के बाद ब्रिटेन का शासन संभाला था। उस समय  उनकी उम्र सिर्फ 25 साल थी। तब से 70 साल तक उन्होंने शासन किया।

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संमदर बन गया पाकिस्तान, जहां से देखो पानी ही पानी दिखता है, बाढ़ देख PM शहबाज शरीफ की हालत खराब

 

इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद बताया कि देश के कई इलाके समंदर में बन चुके हैं। पाकिस्तान में जल प्रलय के कारण देश का एक तिहाई हिस्सा जलमग्न हो चुका है। बुधवार तक बाढ़ से मरने वाले लोगों का कुल आंकड़ा 1,343 हो गया है। पाकिस्तान में 22 करोड़ की जनसंख्या में से तीन करोड़ तीस लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेवार बताया जा रहा है जिसके कारण हजारों लोग बेघर हो गए और 10 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।

बाढ़ देख चिंतित हुए पीएम
बुधवार को सिंध के दक्षिणी प्रांत का दौरा करने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मीडिया को बताया, 'जितना नुकसान हुआ है आप उसपर सहज भरोसा नहीं करेंगे। जहां तक आप देखेंगे हर जगह पानी ही पानी है। यह समंदर की तरह है।' इस त्रासदी से निजात पाने के लिए हमें अरबों रुपये की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए नकद सहायता को बढ़ाकर 70 अरब पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। अब सरकार बाढ़ के कारण विस्थापितों के लिए 200,000 टेंट खरीदेगी।

बाढ़ से निपटने के लिए होगी करोड़ों रुपये की जरूरत
पीएम शरीफ ने कहा कि घटता जलस्तर नई चुनौतियां लेकर आया है। पानी के कारण संक्रामक बीमारियां हो रहीं हैं। उन्होंने कहा, 'हमें इस आपदा के बाद होने वाली समस्याओं से निबटने के लिए खरबों रुपये की जरूरत होगी।' संयुक्त राष्ट्र ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 160 मिलियन डॉलर की सहायता का आह्वाहन किया है। बाढ़ प्रभावितों में से अधिकतर सिंध के हैं जहां पाकिस्तान की सबसे बड़ी झील का पानी खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है।

24 घंटे में 8 बच्चों की हुई मौत
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले ही कह दिया है कि 6.4 मिलियन से अधिक लोग हैं जिन्हें मानवीय सहायता की जरूरत है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के अधिकारियों ने बताया कि बीते 24 घंटों में बाढ़ के कारण हुई मौतों में आठ बच्चे हैं। देश का यह हाल मानसून के मौसम में हुई रिकार्ड बारिश व देश के उत्तरी पहाड़ों पर ग्लेशियर पिघलने का नतीजा है।

मोहनजोदड़ो भी बाढ़ की चपेट में आया
इस बाढ़ से मोहनजोदड़ो के पुरातात्विक स्थल पर भी भारी असर पड़ा है। सिंधु नदी के बढ़े जलस्तर से आई बाढ़ से इस इलाके के कई महत्वपूर्ण हिस्से डूब गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐतिहासिक खंडहर के कई इलाके सीवरेज नाले बाढ़ के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। सिंधु नदी पर बने ज्यादातर बांध अपनी क्षमता से ज्यादा भरे हुए हैं और उनके ऊपर से पानी बह कर आ रहा है।

 

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मंच पर भाषण दे रहे थे राष्ट्रपति, सुपरमैन की ड्रेस में साइकिल से पहुंचा बच्चा, देखने वालों की नहीं रुकी हंसी

 

सैंटियागो(छत्तीसगढ़ दर्पण)। चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक के भाषण के दौरान एक बच्चे के साइकिल चलाने का मजेदार वीडियो दूनिया भर में वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि बच्चा सुपरमैन के ड्रेस में साइकिल से राष्ट्रपति के पास पहुंच जाता है। जोश में बोरिक भाषण देते हैं, वो उतने ही जोश में उनके आगे पीछे साइकिल घुमाता है।

एक सप्ताह पुराना है वीडियो
स्‍थानीय मीडिया 24 होरास के मुताबिक ये वीडियो एक सप्ताह पुराना है। रिपोर्ट के मुताबिक चिली के राष्ट्रपति बोरिक लोगों से नया संविधान बनाने के लिए वोट डालने को कह रहे थे। दो दिन पहले लोगों ने वोट डाला और उनका प्रस्ताव लोगों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। यानी कि राष्ट्रपति का भाषण लोगों पर कोई असर नहीं डाल सका। लेकिन उसी भाषण के दौरान एक बच्चे ने लोगों को अपनी खींचा है। इसमें बच्चा सुपरहीरो सुपरमैन की ड्रेस पहने नजर आ रहा है।

खूब वायरल हो रहा वीडियो
यह बच्चा कौन है इसके बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं मिल पायी है लेकिन राष्ट्रपति के भाषण के दौरान बच्चे का इस तरह साइकिल चलाना लोगों को काफी पसंद आ रहा है। हालांकि एक और वजह है जिसकी वजह से यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है। रायटर्स के अनुसार, सिर्फ 36 साल की उम्र में चिली के राष्ट्रपति बने बोरिक ने जब लोगों से नए संविधान के लिए वोट करने को कहा तो 79 लाख लोगों ने वोट डाला। लेकिन इसमें से 49 लाख लोग नया संविधान बनाने के खिलाफ वोट किए। लगभग 62 फीसदी लोगों ने उनके विचार से असहमति जताते हुए नए संविधान के विचार के खिलाफ वोट दिया। इसलिए राष्ट्रपति के लिए इसे बड़ा झटका कहा जा रहा है।

लोगों ने नए संविधान को नकारा
अगर यह नया संविधान लागू होता तो दशकों पहले सैन्य तानाशाह ऑगस्टो पिनोशे के कार्यकाल में तैयार किया संविधान इतिहास बन चुका होता। दरअसल ऑगस्टो पिनोशे के संविधान ने चिली को विकास के रास्ते पर तो अग्रसर किया, लेकिन जबर्दस्त असमानताएं भी साथ लेकर आया। इन असमानताओं की वजह से 2019 में बोरिस के नेतृत्व में कई महीनों तक चिली में हिंसक प्रदर्शन हुए। बतादें कि चिली दुनिया में तांबे का शीर्ष उत्पादक देश है। बैटरी बनाने के काम आने वाली धातु लीथियम के उत्पादन में उसे दूसरा स्थान हासिल है। ऐसे में अगर नए संविधान का मसौदा स्वीकार कर लिया जाता, तो पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से कड़े नियमों का मार्ग प्रशस्त हो जाता।

इसी साल बने सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति
बतादें कि इसी साल मार्च में वामपंथी झुकाव वाले पूर्व छात्र नेता गेब्रियल बोरिक चिली के राष्ट्रपति बने थे। दिसंबर 2021 में हुए चुनाव में रूढ़िवादी जोस एंटोनियो कास्ट के खिलाफ बोरिक को 56 प्रतिशत वोट मिले थे। मात्र 36 साल की उम्र में यह पद हासिल कर वह देश के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति बने। वह केवल चार साल के थे, जब 17 साल की सैन्य तानाशाही के बाद देश में लोकतंत्र बहाल हुआ था, जिसने आधुनिक चिली के लिए आधार तैयार किया।
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पीएम ने लिज ट्रस समझकर किसी और महिला को भेज दीं शुभकामनाएं, आया दिल खुश कर देने वाला जवाब

 

लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बोरिस जॉनसन के इस्तीफा देने के बाद लिज ट्रस को ब्रिटेन का 56वां प्रधानमंत्री घोषित किया गया है। भारतवंशी उम्मीदवार ऋषि सुनक से अंतिम बाजी जीतने के तुरंत बाद लिज ट्रस को पूरी दुनिया से बधाई मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान नेताओं ने @LizTruss हैंडल को टैग करके यूके की प्रधानमंत्री को अपनी प्रतिक्रियाएं और शुभकामनाएं भेजीं। लेकिन ये शुभकामनाएं ब्रिटिश पीएम को नहीं बल्कि किसी और महिला को मिल रही थीं।

गलत ट्विटर हैंडल को कर दिया टैग
दरअसल कई नेताओं ने जिस महिला को शुभकामना भेजते हुए टैग किया वह लिज ट्रस नहीं बल्कि लिज ट्रससेल नाम की एक महिला है। ट्विटर यूजर्स के लिए ये मौका जैसे खास लम्हा लेकर आया जिसका उन्होंने जमकर आनंद उठाया और मजेदार कमेंट्स किए। गलत ट्विटर हैंडल को संदेश भेजने में स्वीडिश पीएम भी रहीं। स्वीडिश प्रधानमंत्री मेगदालेना एंडरसन ने @trussliz को टैग करके यूके की नई प्रधानमंत्री को बधाई दी।

ट्रससेल ने दिया मजेदार जवाब
मेगदालेना एंडरसन ने जिस ट्विटर हैंडल को बधाई भेजी वह लिज ट्रससेल मिली। ट्रससेल ने भी जवाब देने में देर नहीं लगाई। उसने लिखा- "जल्द ही एक यात्रा करना चाहती हूं! मीटबॉल्स तैयार रखें"। इसी तरह जब ब्रिटिश सांसद कैरोलिन लुकास ने लिज की तुलना बोरिस जॉनसन से करते हुए उनके चुनाव को नाउम्मीदी करार दिया तो इसमें भी इस महिला ने मजेदार जवाब दिया।

पांच साल पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने की थी गलती
ट्रससेल आम लोगों की लंबी कतार में नया नाम हैं जिन्हें उनके नाम और विशेष रूप से सोशल मीडिया यूजर नामों के कारण हाई-प्रोफाइल व्यक्ति समझ लिया गया। यह पहली बार नहीं है जब गलत ट्विटर पहचान के मामले में किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री का नाम शामिल रहा हो। पांच साल पहले 2017 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तत्कालीन पीएम थेरेसा मे को एक ट्वीट में टैग करना था, लेकिन इसके बजाय उन्होंने @theresamay, 40 साल की एक ब्रिटिश महिला को टैग कर दिया जिसके मुश्किल से 6 ट्विटर फॉलोअर थे।

चुनचुन कर विरोधियों को ठिकाने लगा रही ट्रस
पीएम पद की शपथ लेने के बाद लिज ट्रस अपने विरोधियों को चुन-चुन कर ठिकाने लगाती जा रही हैं। उन्होंने सभी अहम पदों पर अपने लोगों को बैठाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में लिज ट्रस ने अपनी कैबिनेट में भारतीय मूल की इकलौती सांसद सुएला ब्रेवरमैन को भी जगह दी है। 47 साल की ट्रस ने ब्रेवरमैन को गृह मंत्रालय सौंपा है और इससे पहले जॉनसन कैबिनेट में प्रीति पटेल के पास यह विभाग था। 42 साल की सुएला ब्रेवरमैन भारत के गोवा की रहने वाली हैं और इस समय अटॉर्नी जनरल हैं। ब्रेवरमैन, ट्रस की सबसे बड़ी समर्थक हैं।
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Explain: इजरायल से दोस्ती करने को लेकर सऊदी अरब के लोग क्या सोचते हैं?

 

तेल अवीव/रियाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। इजरायल में सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहे नेता सऊदी अरब राज्य द्वारा संचालित टीवी चैनल पर बार बार दिखाई देते रहते हैं, एक अमेरिकन-इजरायल पर्यटक सऊदी अरब पहुंचने के बाद अपने आप को "सऊदी अरब का प्रमुख रब्बी" घोषित करता है और सऊदी अरब का एक प्रमुख व्यापारिक परिवार इजरालय की दो कंपनियों में भारी निवेश करता है और इसे छिपाने की कोशिश भी नहीं करता है। हाल के समय में घटी ये घटनाएं आज से 10 या 15 साल पहले तक सोचने पर अकल्पनीय लग सकती थीं, लेकिन अब सऊदी अरब और इजरायल गुप्त संबंधों से आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। लेकिन, सवाल ये है, कि इजरायल और सऊदी अरब के बीच की दुश्मनी भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन क्या ये दोनों देश दोस्त बनेंगे?

मध्य-पूर्व में लगातार बदलती राजनीति
पिछले कुछ सालों में मध्य-पूर्व में राजनीति काफी तेजी से बदली है और इस क्षेत्र में मौजूद देशों के बीच काफी तेजी से प्रतिद्वंदिता बढ़ी है, यहां तक की संयुक्त अरब अमीरात भी अब सऊदी अरब का 'छोटा भाई' बनकर नहीं रहना चाहता है और इस क्षेत्र के देश काफी सावधानीपूर्वक व्यावहारिक आर्थिक और सुरक्षा संबंधों की तरफ कदम आगे बढ़ा रहे हैं। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और वास्तविक नेता मोहम्मद बिन सलमान अपने देश की अर्थव्यवस्था को तेल-निर्भर ही बनाकर नहीं रखना चाहते हैं, लिहाजा वो अपनी योजनाओं में तेजी लाना चाहते हैं, जबकि इजराइल छोटे खाड़ी देशों के साथ 2020 की राजनयिक सफलताओं की बुनियाद पर नये संबंधों का निर्माण करने का इच्छुक है। प्रिंस मोहम्मद ने इस साल की शुरुआत में इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा विवादित माने जाने वाले इजरायल को लेकर कहा था, कि "हम इजरायल को एक दुश्मन के रूप में नहीं, बल्कि एक संभावित सहयोगी के रूप में देखते हैं।" क्राउन प्रिंस का ये बयान यही माना गया, कि सऊदी अरब एक बार फिर से इजरायल के साथ अपने संबंधों का पुनर्मुल्यांकन कर रहा है।

सऊदी और इजरायल में कैसे रहे संबंध?
1948 में इजराइल की स्थापना के बाद के दशकों तक सऊदी अरब और उसके फारस की खाड़ी के पड़ोसियों ने यहूदी राज्य के साथ संबंध नहीं बनाए, बल्कि इन सभी मुस्लिम देशों ने फिलीस्तीन के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया और इजरायल को हमेशा दुश्मन देश ही माना। आज भी हालात कुछ ज्यादा बदले नहीं हैं और मुस्लिम देशों की बहुमत के आधार पर देखें, तो मतदान से यही पता चलता है कि, खाड़ी में एक विशाल बहुमत इजरायल को सिर्फ एक अन्य देश के रूप में स्वीकार करने का विरोध करता है और इजरायल के साथ व्यापारिक संबंध बनाने को घृणित मानता है, लेकिन इन देशों की स्वीकार्यता या फिर अस्वीकार्यता से ज्यादा मायने ये रखता है, कि सऊदी अरब और यूएई क्या चाहता है और इन दोनों देशों ने कम से कम इजरायल के लिए अपने घर के दरवाजे तो खोल ही दिए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रति सऊदी की विदेश नीति का अध्ययन करने वाले एक शोधकर्ता अब्दुलअजीज अल्घाशियान का मानना है, कि "यह संबंधों के गर्म होने के बजाय संबंधों के पिघलने का वक्त है। और यह अभी भी बहुत महत्वपूर्ण है।" इजरायल के लोग अब काफी आसानी से किसी तीसरे देश के पासपोर्ट के जरिए सऊदी अरब आने-जाने लगे हैं और अपना कारोबार चलाने लगे हैं, जाहिर है इसका फायदा भी सऊदी अरब को हो रहा है, क्योंकि जहां इजरायली हैं, वहां साइंस और टेक्नोलॉजी है और सऊदी अरब इस बदलाव की हवा को महसूस कर रहा है।
 
बहने लगा है रुपया...
क्वालिटेस्ट 2019 में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों द्वारा अधिग्रहित एक इजराइली इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर-टेस्टिंग कंपनी है। यह सीधे सऊदी अरब में काम नहीं करती है, लेकिन इस कंपनी के यूरोप, इजरायल और मध्य पूर्व के डायरेक्टर शाई लिबरमैन ने कहा कि, वो अपनी कंपनी के प्रोडक्ट्स को किसी तीसरे देश को बेचते हैं और फिर वो देश सऊदी अरब में उन प्रोडक्ट्स को बेचती है और ये बिक्री काफी ज्यादा है। और ये निवेश और व्यापार सिर्फ एकतरफा नहीं है, बल्कि सऊदी अरब से भी रुपये का बहाव होने लगा है। सऊदी अरब की कंपनी मिठाक कैपिटल एसपीसी, जो अलराझी परिवार का है, जिसे सऊदी बैंकिंग स्कियंस नियंत्रित करता है, इस कंपनी ने इजरायल की दो कंपनियों मोबिलिटी इंटेलिजेंस फर्म ओटोनोमो टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और लंदन में रजिस्टर्ड इजरायली कंपनी ट्रेमर इंटरनेशनल लिमिटेड में भारी निवेश किया है और सऊदी राज परिवार इस बात से परिचित है।
 
इजरायल से क्यों संबंध बनाना चाहता है अरब
गल्फ देश ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं और अपनी साझा चिंताओं को दूर करने के लिए अरब देशों ने इजरायल से 'गुप्त समझौते' स्थापित किए हुए हैं। जिसके अंतर्गत हथियारों की खरीददारी तक शामिल है। लेकिन, अब अरब देश आर्थिक विकास चाहते हैं और प्रिंस सलमान ने इसके लिए विजन-2030 भी बनाया हुआ है, जिसके तहत सऊदी अरब में सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन शामिल है और सऊदी अरब को टेक्नोलॉजी के हिसाब से उन्नत बनावा है, लिहाजा प्रिंस सलमान की पहली पसंद इजरायल रहा है और वो इजरायल की मदद से सऊदी अरब में टेक्नोलॉजी हब स्थापित करना चाहते हैं।
 
बेंजामिन नेतन्याहू का इंटरव्यू
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मिथाक कैपिटल के प्रबंध निदेशक मुहम्मद आसिफ सीमाब ने कहा कि, "हमें इजराइल का इनोवेशन और टेक्नोलॉजी को लेकर उनकी संस्कृति काफी पसंद है और हम इससे लाभ उठाने के तरीके खोजने की कोशिश करते हैं।" वहीं, सऊदी अरब सरकार ने शामिल होने वाले नये अधिकारी इजरायल के साथ संबंधों को खुले तौर पर विस्तार देने का समर्थन कर रहे हैं। इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का सऊदी टेलीविजन चैनल अल अरबिया पर साक्षात्कार लिया गया था, जो हिब्रू भाषा के नक्शे के सामने बैठे थे और ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते के खतरे की चेतावनी दे रहे थे। वहीं, रब्बी जैकब हर्ज़ोग भी एक नाम हैं, जिन्हें सऊदी राजधानी रियाद में विदेशी श्रमिकों के एक छोटे यहूदी समुदाय में मंत्री बनने की अनुमति दी गई है।
 
क्या सऊदी अरब से मिलेगा पुरस्कार?
जब साल 2020 में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इजरायल के साथ राजनीतिक संबंध जोड़ लिए, जिसे अब्राहम समझौते के तौर पर जाना जाता है, तो यही संदेश मिला, कि सऊदी अरब भी निकट भविष्य में इसका पालन करेगा। इजराइली नेताओं के लिए, सऊदी अरब से मान्यता प्राप्त करना मध्य पूर्व की जियोपॉलिटिक्स के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भी एक प्रतिष्ठित पुरस्कार होगा और इजरायल की कोई भी सरकार हो, उसकी सबसे बड़ी कोशिश यही होती है। लेकिन, सऊदी अरब के लिए भी ये फैसला अचानक लेना मुश्किल है। सऊदी अरब में धार्मिक कट्टर संगठन अभी भी हावी हैं और सऊदी अरब के लिए अपने पड़ोसी इस्लामिक देशों को भी इजरायल से संबंध स्थापित करने के लिए मनाना आसान नहीं होने वाला है, लिहाजा अभी भी व्यापारिक बाधाएं मौजूद हैं और रियाद का दौरा करने वाला एक इजराइली व्यापारी मालिक बताते हैं, कि वो अभी भी तेल अवीव सीधे फोन नहीं कर सकते हैं और वो वो अकेले पैसे ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं।

सऊदी में इजरायल को लेकर राय
वाशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी ने एक सर्वे में सऊदी अरब के लोगों के बीच इजरायल को लेकर राय जानने की कोशिश की थी, जिसमें पता चला कि, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इजरायल के साथ जो अब्राहम अकॉर्ड किया, उसको लेकर निराशा है और सिर्फ 19 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक सऊदी अरब के लोगों का मानना है, कि इजरायल के साथ संबंध जोड़कर सही फैसला लिया गया। हालांकि, जिन लोगों को अब्राहम समझौता पसंद नहीं आया है, उनमें ज्यादातर लोगों का ये मानना है, कि इजरायल के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है और इजरायल के साथ अनौपचारिक संबंधों को स्वीकृति देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। हालांकि, सभी लोगों का ऐसा नहीं सोचना है। इसी साल जुलाई महीने में मक्का की भव्य मस्जिद के एक इमाम ने जुमे की नमाज़ की अगुवाई करते हुए यहूदियों के देश पर कब्जा करने के नारे लगाए और इस खातिर जुमे की नमाज में प्रार्थना की। वहीं, जब राष्ट्रपति बाइडने की यात्रा के दौरान एक यहूदी पत्रकार 'पवित्र शहर मक्का' में दाखिल हुआ, तो उसे वहां से बाहर निकाल दिया और उसकी निंदा की गई।
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क्वीन एलिजाबेथ ने लिज ट्रस को नियुक्त किया ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री, ट्वीट कर दी जानकारी

 

लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कंजर्वेटिव पार्टी की ओर से पीएम पद के लिए नामित की गईं लिज ट्रस ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री बन गई हैं। मंगलवार को क्वीन एलिजाबेथ II ने लिज ट्रस को ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है। इसकी जानकारी रॉयल फैमिली के ट्विटर हैंडल के जरिए दी गई। क्वीन एलिजाबेथ II ने लिज ट्रस को पीएम एवं ट्रेजरी का पहला लॉर्ड नियुक्त किया गया है।

रॉयल फैमिली की ओर से किया गया ट्वीट

मंगलवार को रॉयल फैमिली की ओर से ट्वीट कर कहा गया है, "महारानी एलिजाबेथ ने आज बालमोरल कैसल में लिज ट्रस से मुलाकात की और इस दौरान उन्होंने लिज ट्रस को नई सरकार का गठन करने के लिए कहा और उन्हें ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया। क्वीन की इस पेशकश को लिज ट्रस ने स्वीकार कर लिया।

आपको बता दें कि ब्रिटेन में करीब दो महीने तक चले मतदान में सोमवार को लिज ट्रस को कंजरवेटिव पार्टी का प्रमुख चुना गया। पीएम पद की इस रेस में उन्होंने भारतीय मूल के ऋषि सुनक को हराया। यह पहला मौका है जब ब्रिटेन के किसी नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति परंपरा के अनुसार बकिंघम पैलेस में न होकर स्कॉटलैंड में हुई है।

45 साल की लिज ट्रस ब्रिटेन की तीसरी महिला प्रधानमंत्री बन गई हैं। पार्टी से नया पीएम चुनने के लिए कंजरवेटिव सदस्यों ने पोस्टल बैलेट से मतदान किया। इस वोटिंग में लिज को 81,326 वोट जबकि सुनक को 60,399 वोट मिले।
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दुनिया की पहली इनहेल्ड वैक्सीन को चीन ने आपात इस्तेमाल की दी मंजूरी, जानिए कैसे होगी इस्तेमाल

 

बीजिंग (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अभी भी कोरोना की मार झेल रहे चीन ने दुनिया की पहली इनहेल्ड कोविड 19 वैक्सीन तैयार कर ली है। इस वैक्सीन के जरिए चीन की प्राथमिकता कोरोना की रफ्तार पर रोक लगाना है। सोमवार को चीन के दवा नियामक ने इस इनहेल्ड वैक्सीन को बतौर बूस्टर डोज के रूप में इसके आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दे दी।

बिना सुई के लगेगी यह वैक्सीन
वैक्सीन निर्माता कंपनी कैनसिनो बायोलॉजिक्स इंक ने एक बयान जारी कर बताया है कि दुनिया की पहली इनहेल्ड वैक्सीन को चीन के दवा नियामक ने मंजूरी दे दी है। आपको बता दें कि लोगों को यह वैक्सीन बिना सुई लगाए दी जा सकेगी। इसे नाक के जरिए सूंघ कर लिया जाएगा। Convidecia Air नाम की इस वैक्सीन को नेबुलाइजर से सांस के जरिए लिया जाएगा।

आपको बता दें कि CanSino की इंजेक्टेड Convidecia कोविड 19 वैक्सीन का पहले से ही चीन में इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा कुछ अन्य देशों में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। अगर इस इनहेल्ड वैक्सीन के असर की बात की जाए तो इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि यह लक्षणों को रोकने में 66 प्रतिशत प्रभावी है और गंभीर बीमारी निपटने में 91 प्रतिशत प्रभाव के साथ काम करती है, लेकिन कई एक्सपर्ट इस वैक्सीन पर सवाल उठा चुके हैं।

कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार सूंघने वाली वैक्सीन की मदद से सेलुलर इम्यूनिटी को स्टीमुलेट किया जा सकता है, जिससे इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन के बिना ही सुरक्षा को बढ़ाया जा सकता है। जैसा कि यह वैक्सीन सुई रहित है, इसलिए इसका इस्तेमाल खुद भी किया जा सकता है। इस वैक्सीन को खुद लेने वाली खासियत से लोगों को यह आकर्षित कर सकती है और इसकी डिमांड बढ़ सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा बनाए गए एक डेटाबेस के अनुसार, कैनसिनो का नया उत्पाद दो विशेष रूप से "इनहेल्ड" टीकों में से एक है, जो नैदानिक ​​चरण के विकास तक पहुंच गया था, क्योंकि दुनिया भर में कई कंपनियां कोविड -19 सुरक्षा प्रदान करने के लिए इनहेल्ड वैक्सीन पर शोध कर रही हैं।
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दो समुदायों के बीच चाकूबाजी : 10 लोगों की मौत, 15 घायल

 सस्केचेवान/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कनाडा के सस्केचेवान प्रांत में दो समुदायों के बीच जमकर चाकू चले जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई और 15 घायल हो गए। अधिकारियों ने कहा कि पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। पुलिस ने कहा कि जेम्स स्मिथ क्री नेशन और सास्काटून के उत्तर-पूर्व में वेल्डन गांव में कई स्थानों पर चाकूबाजी हुई है।

आरसीएमपी सस्केचेवान के सहायक आयुक्त रोंडा ब्लैकमोर ने कहा कि कुछ लोगों पर संदिग्धों ने हमला किया है। अभी इसके पीछ कोई मकसद सामने नहीं आया है कि हमला क्यों किया गया। ब्लैकमोर ने कहा कि आज हमारे प्रांत में जो कुछ हुआ है, वह भयावह है।



उन्होंने कहा कि 13 जगह ऐसी हैं यहां लोग मृत और घायल अवस्था में पाए गए हैं। ब्लैकमोर ने कहा कि पुलिस को सुबह छह बजे से एक समुदाय पर छुरा घोंपने की रिपोर्ट मिलनी शुरू हुई। हमलों की और खबरें तेजी से आईं और दोपहर तक पुलिस ने चेतावनी जारी की।



पुलिस रेजिना निवासियों से सावधानी बरतने और आश्रय लेने पर विचार करने के लिए कह रही है। आरसीएमपी ने कहा कि निवासियों को दूसरों को अपने घरों में आने की अनुमति देने के बारे में सावधान रहना चाहिए और सुरक्षित स्थान नहीं छोड़ना चाहिए।

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