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नेपाल में फिर लगे भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 4.2 मापी गई तीव्रता

 

अछाम (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नेपाल में भूकंप (Nepal Erthquake) आने का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। यह चौथी बार है जब भूकंप ने देश के कई हिस्सों को हिलाकर रख दिया है। क्या यह किसी बड़े प्राकृतिक आपदा के संकेत तो नहीं हैं। नेपाल के राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के अनुसार देश में अछाम जिले के बबाला के आसपास आज शाम करीब 6:18 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए।

नेपाल में भूकंप के झटके
आज फिर नेपाल में 4.2 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। हालांकि, अब तक किसी के मरने या घायल होने या फिर किसी भी इमारत के ढहने की कोई खबर नहीं मिली है। इससे पहले पिछले मंगलवार को देर रात आए 6.3 मैग्नीट्यूड के भूकंप के बाद अब गुरुवार सुबह नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भूकंप गुरुवार सुबह 5.13 बजे आया था। भूकंप के कारण किसी के जानमाल के नुकसान या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं आई।

नेपाल में भूकंप का भारत में भी दिखता है असर
ऐसा अक्सर होता रहा है कि, नेपाल में भूकंप आता है तो भारत की धरती भी कांपती है। वजह पड़ोस में मौजूद हिमालयी देश है और एशियन टेक्टोनिक प्लेट में हुई हलचल। बता दें कि, 8 नवंबर की देर रात करीब 1:57 बजे आए भूकंप की तीव्रता 6.3 थी। इसकी गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे बताई गई थी। इसका केंद्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से 90 किलोमीटर दूर पूर्व-दक्षिण-पूर्व की तरफ नेपाल में था।

नेपाल में भूकंप
बता दें कि, 8 नवंबर को देर रात करीब 1:57 बजे पूरा उत्तर भारत कांप गया था। उस समय 6.3 तीव्रता का भूकंप नेपाल में आया था। यह इस साल के अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप के झटकों में से एक था। इससे पहले नेपाल में 12 अप्रैल 2015 और 12 मई 2015 को 7.8 और 7.3 तीव्रता के भयानक भूकंप आए थे। जिसकी वजह से 9 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। 25 हजार से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे।
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डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के लिए तीसरा अभियान शुरू करने की तैयारी में

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को व्हाइट हाउस के लिए अपना तीसरा अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं, जो निराशाजनक मध्यावधि हार से आगे बढ़ने और इतिहास को खारिज करने की कोशिश कहा जा सकता है। ट्रंप ने पिछले सप्ताह के चुनावों से उम्मीद लगाई थी कि वह इसके नतीजों का इस्तेमाल अपनी पार्टी के नामांकन के लिए एक स्प्रिंगबोर्ड के रूप में कर सकते हैं। इसके बजाय, अब उन पर आरोप लग रहा है कि उनके समर्थन करने के कारण कई रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनाव हार गए । ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया नेटवर्क पर लिखा कि उम्मीद है, कल का दिन हमारे देश के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक होगा! पाम बीच में उनके क्लब से मंगलवार रात 9 बजे एक घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

एक और अभियान किसी भी पूर्व राष्ट्रपति के लिए एक उल्लेखनीय मोड़ है और वह भी ऐसे व्यक्ति के लिए जिसके खिलाफ बतौर राष्ट्रपति दो बार महाभियोग चल चुका हो और जिसका कार्यकाल उसके समर्थकों के जनवरी में सत्ता के शांतिपूर्ण परिवर्तन को रोकने के लिए घातक हमले को लेकर बदनाम रहा हो ।अमेरिकी इतिहास में सिर्फ एक राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज है कि वह पद से हटने के बाद दुबारा राष्ट्रपति चुने गए। उन्हें 1884 और 1892 में इस पद के लिये चुना गया था।

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सीनेट में सत्‍तारूढ डेमोक्रेटिक पार्टी अपना बहुमत बरकरार रखने में कामयाब रही

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमरीका के नेवादा राज्‍य में महत्‍वपूर्ण बढत हासिल करने के साथ ही सीनेट में सत्‍तारूढ डेमोक्रेटिक पार्टी अपना बहुमत बरकरार रखने में कामयाब रही है। सीनेट चुनाव के परिणाम सत्‍तारूढ पार्टी के लिए पिछले 20 वर्षों में सबसे बेहतर रहे हैं। अमरीका के राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी को अपनी असलियत समझ जानी चाहिए। सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शुमर ने कहा कि चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि अमरीका की जनता ने रिपब्लिकन पार्टी को नकार दिया है।

सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास अब 50 सीटें हो गई हैं जबकि रिपब्लिकन पार्टी के पास 49 सीटें हैं। जॉर्जिया सीट का चुनाव दिसम्‍बर में होगा। इसके बाद अगर सीनेट में दोनों दलों को बराबर सीटें हासिल होती हैं तो ऐसे में उप-राष्‍ट्रपति कमला हैरिस का वोट काफी महत्‍वपूर्ण साबित हो सकता है। दूसरी ओर, प्रतिनिधि सभा में इस समय रिपब्लिकन पार्टी के पास 211 सीटें हैं जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 204 सीटें हैं।

 

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तुर्की के इस्तांबुल में आतंकी बम विस्‍फोट में छह लोगों की मौत और 81 घायल

 इस्ताम्बुल (छत्तीसगढ़ दर्पण)। तुर्की में मध्य इस्ताम्बुल के व्यस्त इलाके में बम विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई और 81 घायल हो गए। यह विस्फोट कल दोपहर तक्सीम चौक इलाके में हुआ। तुर्की के उपराष्ट्रपति फुएत ओक्टे ने बताया कि विस्फोट आतंकवादी हमला हो सकता है, जिसे एक महिला ने अंजाम दिया। अब तक किसी ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। 2016 में भी आत्मघाती हमलावर ने इस इलाके को निशाना बनाया था। 

 

 

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अमेरिका की करेंसी मानिटरिंग सूची से बाहर हुआ भारत

 वाशिंगटन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को अपनी मुद्रा निगरानी सूची से बाहर निकाल दिया है। विभाग ने अन्य जिन देशों को इस सूची से बाहर निकाला है, उनमें इटली, मैक्सिको, वियतनाम और थाईलैंड शामिल हैं। ट्रेजरी विभाग ने कांग्रेस को अपनी द्विवार्षिक रिपोर्ट में कहा कि चीन, जापान, कोरिया, जर्मनी, मलेशिया, सिंगापुर और ताइवान अभी भी वर्तमान निगरानी सूची का हिस्सा हैं।

बता दें कि ट्रेजरी ने प्रमुख व्यापारिक भागीदारों की एक निगरानी सूची स्थापित की है, जो उनकी मुद्रा प्रथाओं और व्यापक आर्थिक नीतियों पर ध्यान देने योग्य हैं। अमेरिका ने ये कदम तब उठाया है, जब ट्रेजरी के सचिव जेनेट येलेन ने भारत का दौरा किया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बातचीत की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 के अधिनियम में तीन मानदंडों में से दो को पूरा करने वाली अर्थव्यवस्था को निगरानी सूची में रखा गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "एक बार निगरानी सूची में एक अर्थव्यवस्था कम से कम दो लगातार रिपोर्टों के लिए बनी रहेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदर्शन बनाम मानदंड में कोई भी सुधार टिकाऊ है और अस्थायी कारकों के कारण नहीं है।' ट्रेजरी निगरानी सूची में किसी भी प्रमुख अमेरिकी व्यापारिक भागीदार को जोड़ेगी और बनाए रखेगी, जो कुल अमेरिकी व्यापार घाटे के एक बड़े और अनुपातहीन हिस्से के लिए जिम्मेदार है, भले ही वह अर्थव्यवस्था 2015 के अधिनियम के तीन मानदंडों में से दो को पूरा नहीं करती है।

अमेरिकी ट्रेजरी ने कहा, 'निगरानी सूची में चीन, जापान, कोरिया, जर्मनी, मलेशिया, सिंगापुर और ताइवान शामिल हैं। इटली, भारत, मैक्सिको, थाईलैंड और वियतनाम को इस रिपोर्ट में निगरानी सूची से हटा दिया गया है।' उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप को प्रकाशित करने में चीन की विफलता और इसकी विनिमय दर तंत्र की प्रमुख विशेषताओं के आसपास पारदर्शिता की व्यापक कमी इसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक बाहरी बनाती है और ट्रेजरी की करीबी निगरानी की गारंटी देती है।

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गांधी शांति तीर्थयात्री पुरस्कार से सम्मानित हुए श्रीश्री रविशंकर

 वाशिंगटन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय आध्यात्मिक नेता श्रीश्री रविशंकर को अटलांटा में गांधी शांति तीर्थयात्रा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये पुरस्कार उन्हें महात्मा गांधी और डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर द्वारा समर्थित शांति और अहिंसा के संदेशों को फैलाने के उनके प्रयासों के सम्मान में दिया गया।


श्रीश्री रविशंकर को अमेरिकी गांधी फाउंडेशन द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया। डॉ मार्टिन लूथर किंग जूनियर के भतीजे और अटलांटा में भारत के महावाणिज्य दूत डॉ स्वाति कुलकर्णी की उपस्थिति में श्री श्री रविशंकर को पुरस्कार प्रदान किया गया।

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक को उनकी सेवा और मानवता के लिए दुनिया में बदलाव लाने के योगदान के लिए ये पुरस्कार प्रदान किया गया है। श्री श्री रविशंकर ने अपने स्वीकृति भाषण में कहा, "कुछ संदेश टाइमलेस होते हैं। इस श्रेणी में मार्टिन लूथर किंग और महात्मा गांधी के संदेश बहुत प्रासंगिक हैं। वे हर युग में हर पीढ़ी के लिए हमेशा ताजा रहेंगे। कभी-कभी यह और भी प्रासंगिक हो जाता है। आज की दुनिया में जहां हम तनाव का सामना कर रहे हैं, शांति का संदेश जोर से और स्पष्ट रूप से सुना जाना चाहिए"।

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर का जन्म 1956 में दक्षिण भारत में हुआ था। महज चार वर्ष की उम्र में ही बाल रविशंकर भगवद गीता पढ़ने लगे थे। उनकी बचपन से ही रूचि ध्यान करने में थी। वैदिक साहित्य और भौतिक विज्ञान के विषयों में भी रविशंकर ने शिक्षा ग्रहण की है। वर्ष 1982 में कर्नाटक के शिमोगा में रविशंकर ने 10 दिन का मौन धारण किया था। बता दें कि आर्ट ऑफ लिविंग की सबसे लोकप्रिय विद्या सुदर्शन क्रिया है। रविशंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से कई लोगों की मानसिक अशांति को दूर किया है।

श्री श्री हर साल करीब 40 देशों की यात्रा करते हैं। देश-विदेश का दौरा करने वाले रविशंकर को 7 भाषाओं का ज्ञान हैं। बता दें कि 7 जुलाई को अमेरिकी और कैनेडियन शहरों की लीग में डेट्रॉइट के मेयर श्री श्री रविशंकर दिवस मनाते है। हर साल इन जगहों पर ये दिवस श्री श्री रविशंकर के दिवस के रूप में मनाया जाता है।

 

 

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भारत और जर्मनी के बीच झगड़ा बढ़ा, बहुत जल्द गंभीर असर दिखने की आशंका

बर्लिन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। India Germany LNG Gas Conflict: भारत और जर्मनी के बीच नेचुरल एलएनजी गैस को लेकर बढ़ा झगड़ा अब दोनों देशों के बीच के डिप्लोमेटिक तनाव में बदल गया है और जल्द ही इसका गंभीर असर दिखने की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही भारी ऊर्जा संकट से जूझ रहे यूरोप की वजह से पूरी दुनिया के विकास पर भी असर पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच चल रहे इस झगड़े से परिचित अधिकारियों के मुताबिक, इस तनाव का आगाज उस वक्त हुआ, जब जर्मनी ने नेचुरल लिक्विड गैस की आपूर्ति भारत को कम कर दी और फिर भारत की तरफ से सख्त उत्तर दिया गया।


डिप्लोमेसी के स्तर तक बढ़ा झगड़ा
मामले से परिचित अधिकारियों के मुताबिक, जर्मनी सरकार द्वारा समर्थिक गैस कंपनी ने भारत को नेचुरल गैस की आपूर्ति कम कर दी है, जिसके बाद पनपे विवाद के बीच दोनों देशों के डिप्लोमेट्स के बीच बातचीत के जरिए विवाद का हल करने की अपील की गई है। मामले से परिचित अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि, अब भारत ने आपूर्ति में कटौती का गैप भरने के लिए रूस के साथ बातचीत शुरू कर दी है, वहीं अभी तक ये मामला प्राइवेट रखा गया है।

मामला असल में है क्या?
जर्मनी की सिक्योरिंग एनर्जी फॉर यूरोप GmbH भारतीय कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड को गैस की आपूर्ति करता है, लेकिन इस साल मई महीने के बाद से ही गैस की आपूर्ति में कमी आने लगी। जर्मनी का कहना है, कि रूस पर लगाए गये प्रतिबंधों की वजह से जर्मनी की गैस कंपनी के लिए रूस से गैस कार्गो प्राप्त करना असंभव हो गया है। वहीं, इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक सूत्र ने बताया कि, इस व्यवघान के बीच भारत सुझाव दे रहा है, कि जर्मन कंपनी को भारतीय कंपनी के साथ किए गये कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए अपने पोर्टफोलियो से वैकल्पिक आपूर्ति करनी चाहिए, लेकिन जर्मनी इसके लिए तैयार नहीं हो रहा है।

क्यों उत्पन्न हुआ है ये संकट?
यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से ही पूरी दुनिया में प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल ने विकसित देशों की भी हालत खस्ता कर दी है, खासकर जर्मनी काफी प्रभावित हुआ है। लिहाजा, जर्मनी इस सर्दी में गैस संकट कम करने के लिए भारत को गैस की आपूर्ति में कटौती कर दी है, जबकि जर्मनी से गैस लेने के लिए भारत रिकॉर्ड राशि का भुगतान करता रहा है और भारत गैस आपूर्ति के लिए अभी भी मुंहमांगी कीमत देने के लिए तैयार है। वहीं, कीमतों में इजाफा होने के बाद दक्षिण एशिया के कुछ आपूर्तिकर्ताओं ने जिस देश से ज्यादा पैसा मिल रहा है, उस देश में सप्लाई शुरू कर दी है और उन्होंने लंबे समय से निर्धारित डिलीवरी को रद्द कर दिया है, जिसका असर भी भारत पर पड़ा है।

जर्मनी की कंपनी का डबल गेम
जर्मन सरकार की गैस कंपनी SEFE की सिंगापुर इकाई ने सितंबर महीने में कहा था, कि वह GAIL के साथ अपने दीर्घकालिक LNG कॉन्ट्रैक्ट को पूरा नहीं कर सकती है। आपको बता दें कि, जर्मन कंपनी SEFE, रूसी गैस-तेल कंपनी Gazprom का एक पूर्व PJSC व्यवसाय है, जो अब जर्मन सरकार के नियंत्रण में है और ये कंपनी कॉन्ट्रैक्ट शर्तों के मुताबिक, शिपमेंट के मूल्य का 20% का एक छोटा सा पेनल्टी चुका रही है, जो यूरोप में वर्तमान स्पॉट गैस की कीमतों के मूल्य का एक अंश है, लेकिन ये गेल के लिए एक बड़ा अंतर साबित हो रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मन कंपनी SEFE के एक प्रवक्ता ने कहा कि, "SEFE और इसकी सहायक कंपनियों, SM&T और SM&T सिंगापुर रूस के खिलाफ लगे प्रतिबंधों की वजह से काफी प्रभावित हुआ है, लिहाजा SEFE समूह और GAIL दोनों की आपूर्ति प्रभावित हैं।" "एसईएफई और गेल अपने अनुबंध समझौतों के तहत इस मुद्दे को एक साथ संबोधित कर रहे हैं।"

कूटनीतिक समधान खोजने की कोशिश?
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, गेल के प्रवक्ता, जर्मनी की अर्थव्यवस्था और विदेश मंत्रालय और भारत के विदेश मंत्रालय, सभी ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, मामले से जुड़े लोगों ने कहा कि कूटनीतिक समाधान खोजना उद्देश्य है, लेकिन SEFE और GAIL के बीच पूर्व-मध्यस्थता वार्ता भी हो रही है। हालांकि, इस बीच भारत ने भी रूस से जर्मन गैस को रिप्लेस करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। मामले से परिचित लोगों के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने इस सप्ताह की शुरुआत में मास्को का दौरा किया था। वहीं, गेल ने अपने ग्राहकों को गैस आपूर्ति में कटौती कर दी है और कमी के कारण अपने पेट्रोकेमिकल संयंत्र में उत्पादन भी कम कर दिया है। गेल के निदेशक राजेश कुमार जैन ने कहा कि, SEFE ने मई के बाद से भारत को भेजे जाने वाले 17 कार्गो को रद्द कर दिया है। आपको बता दें कि, GIIGNL के आंकड़ों के मुताबिक, LNG गैस खरीदने के लिए गेल और जर्मन कंपनी के बीचत साल 2041 तक के लिए कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके तहत जर्मन कंपनी को हर साल 2.5 मिलियन टन गैस की आपूर्ति भारत को करनी है।
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नीलाम होने जा रही है स्टीव जॉब्स की सैंडल, कीमत जानकर हो जायेंगे हैरान...

 न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स को आज भी कई लोग अपना आदर्श मानते है। उनके प्रति लोगों की दीवानगी आज भी कायम है और उनसे जुड़ी हुई चीजें महंगे दामों पर नीलाम होती है। उनके निधन के बाद उनसे जुड़ी हुई कई चीजों की अब तक नीलामी की जा चुकी है। चाहे वह उनकी नौकरी के लिए दिया हुआ आवेदन पत्र हो या इस्तेमाल किया गया कंप्यूटर।

नीलामकर्ता जूलियन्स ऑक्शंस को उम्मीद है कि एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स के पहने जाने वाले भूरे चमड़े के बिरकेनस्टॉक एरिज़ोना सैंडल की जोड़ी $ 60,000 से $ 80,000 (48,32,889-64,43,852 रुपये) तक मिल सकती है।



सैंडल के साथ, नीलामी में सैंडल की एक एनएफटी तस्वीर भी शामिल है, साथ ही फोटोग्राफर जीन पिगोज़ी की एक किताब भी शामिल है। पुस्तक का शीर्षक 'द 213 मोस्ट इम्पोर्टेन्ट मेन इन माई लाइफ' है और इसमें मिस्टर जॉब्स को एक महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में दिखाया गया है।

नीलामी 11 नवंबर को लाइव रहेगी और इसके 13 नवंबर को समाप्त होने की उम्मीद है। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पूर्व पत्नी, क्रिसन ब्रेनन ने वोग के साथ एक साक्षात्कार में स्टीव जॉब्स के अलमारी के बारे में चर्चा की। तब उन्होंने बताया कि स्टीव जॉब्स की सैंडल उनके साधारण पक्ष का हिस्सा थे। वे सैंडल को भी अपने वर्दी का एक अंग मानते थे।

 

 

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US मिड टर्म इलेक्शन में भारतवंशी नबीला सैयद संसद में सबसे कम उम्र की मेंबर बनीं

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन हो रहे हैं। इससे संसद के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव (लोअर हाउस), सीनेट (अपर हाउस) के मेंबर्स और राज्यों में गवर्नर को चुना जाता है। अब इलेक्शन के रिजल्ट सामने आने लगे। अमेरिकी इतिहास में पहली बार 23 साल की सैयद सबसे कम उम्र की संसद (कांग्रेस) मेंबर चुनी गई हैं।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के चुनाव में नबीला को 52.3% वोट मिले हैं। उन्होंने इलिनोइस सीट पर जीत हालिस करते हुए रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी क्रिस बोस को हरा दिया। उन्होंने कहा- जब मैंने चुनाव लड़ने की घोषणा की, तो मेरा एक ही मिशन था लोगों से बातचीत करना। असल और जमीनी मुद्दे जानना। मैं चाहती थी कि लोग भी लोकतंत्र में शामिल हो। इसमें उनका बराबरी का हिस्सा हो।

 

 

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भारतीय-अमरीकी नागरिक अरुणा मिलर मैरीलैंड के लेफ्टिनेंट गवर्नर पद के चुनाव में विजयी

 मैरीलैंड (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय-अमरीकी नागरिक अरुणा मिलर मैरीलैंड के लेफ्टिनेंट गवर्नर पद के चुनाव में विजयी घोषित हुई हैं। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही अरूणा मिलर इस पद पर चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमरीकी राजनेता और प्रथम दक्षिण एशियाई महिला भी बन गई हैं।  मिलर ने मैरीलैंड के लोगों को उनके फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। 

सुश्री मिलर इंडियन अमरीकन इम्‍पैक्‍ट की पूर्व कार्यकारी निदेशक हैं। सरकार के हर स्तर पर भारतीय-अमरीकी प्रतिनिधित्व का समर्थन करने वाले इस संगठन ने उनका समर्थन किया था और साथ ही उन्हें महत्वपूर्ण भारतीय-अमरीकी संगठनों और लोगों का समर्थन भी मिला।

 

 

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मिस्र की आखिरी रानी क्लियोपेट्रा की कब्र से उठेगा पर्दा? 4800 फीट लंबी 2000 साल पुरानी सुरंग मिली

 

काहिरा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। 2000 year old tunnel found in Egypt: दुनिया का एक मिस्र ऐसा देश है, जिसकी धरती प्राचीन रहस्यों और इतिहास से भरी पड़ी है। मिस्र अपने अंदर हजारों-सैकड़ों साल पुरानी इतिहास को पाले हुए हैं। ऐसे में अब मिस्र में प्राचीन मंदिर के नीचे 2000 साल पुरानी सुरंग मिली है, जिसकी तस्वीरें जारी की गई है। मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने इससी जुड़ा बयान भी जारी किया है। इसी के साथ इस सुरंग को लेकर दावा किया जा रहा है कि मिस्र के अंतिम फिरौन क्लियोपेट्रा और उसके प्रेमी मार्क एंटनी की कब्र से जुड़े राज से पर्दा उठने वाला है।

मिस्र के प्राचीन शहर में मिली 2000 साल पुरानी सुरंग
मानव सभ्यताओं और पिरामिडों के देश के नाम से दुनिया भर में मशहूर मिस्र (Egypt) पर पुरातात्विक वैज्ञानिकों की खोज हमेशा जारी रहती है। हाल ही में एक प्राचीन सूर्य मंदिर की खोज की गई थी, जो लगभग 4500 साल पुराना बताया जा रहा था। इस मंदिर को लेकर संकेत दिए गए थे कि ये पांचवें राजवंश के खोए हुए चार सूर्य मंदिरों में से एक का हो सकता है। वहीं अब मिस्र के प्राचीन शहर तापोसिरिस मैगना (Taposiris Magna) के एक प्राचीन मंदिर (ओसिरिस के महान मकबरे) के नीचे खुदाई का काम कर रहे पुरातत्वविदों ने 1300 मीटर लंबी सुरंग की खोज की है, जो संभवत: 2000 साल पुरानी बताई जा रही है।
मशहूर रानी क्लियोपेट्रा को लेकर किया ये दावा
यूनिवर्सिटी ऑफ सैन डोमिंगो के पुरातत्वविद कैथलीन मार्टिनेज ने बताया कि सुरंग के सर्वे और खुदाई के दौरान इसका एक हिस्सा भूमध्य सागर के पानी में डूबा हुआ मिला। पुरातत्वविदों की मानें तो प्राचीन शहर के नीचे जो 4800 फुट लंबी सुरंग मिली है, वो मशहूर रानी क्लियोपेट्रा (Egypt last pharaoh Cleopatra) के लंबे समय से खोए हुए मकबरे तक ले जा सकती है।

पत्थरों को काटकर बनाई गई सुरंग
तापोसिरिस मैगना के नीचे 2000 साल से अधिक पुरानी ग्रीको-रोमन सुरंग की खोज की गई थी। मिस्र के उत्तरी तट पर स्थित 4281 फीट तक फैली पत्थरों को काटकर बनाई रंग मिस्र के डोमिनिकन पुरातत्व मिशन द्वारा पाई गई है। बता दें कि तापोसिरिस मैगना, जो कि 280 और 270 ईसा पूर्व के बीच फिरौन टॉलेमी द्वितीय फिलाडेल्फ़स द्वारा स्थापित एक शहर है, मिस्र में आजकल अलेक्जेंड्रिया में स्थित है। 332 ईसा पूर्व में सिकंदर महान (Alexander the Great) द्वारा मिस्र पर विजय प्राप्त करने और अलेक्जेंड्रिया की स्थापना के बाद अतीत में यह एक महान सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र का प्रतिनिधित्व करता था।

दावा- 21वीं सदी की सबसे बड़ी खोज होगी
पुरातत्वविद् कैथलीन मार्टिनेज का मानना ​​​​है कि 1 प्रतिशत संभावना है कि क्लियोपेट्रा और उसके प्रेमी मार्क एंटनी को वहां दफनाया जा सकता है, जिस तरह से सुरंग आगे बढ़ रही है। इसी के साथ उन्होंने कि यह भी कहा कि अगर मिस्र के आखिरी शासक रानी क्लियोपेट्रा की कब्र के अवशेष मिलते हैं तो यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी खोज होगी। मार्टिनेज का मानना ​​​​है कि मार्क एंटनी की आत्महत्या के बाद क्लियोपेट्रा ने दोनों को वहीं दफनाने की योजना बनाई थी।

खुदाई में मिले दो मूर्तियों के सिर
मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने एक बयान में खुलासा किया कि नई खोजी गई सुरंग 6.5 फीट ऊंची थी और 43 फीट भूमिगत है। सुरंग के अलावा पिछले 14 वर्षों से मार्टिनेज के नेतृत्व वाली टीम को मंदिर के पास टॉलेमिक-युग की अलबास्टर की दो मूर्तियों के सिर मिले। खुदाई में मिट्टी और रेत के तलछट के नीचे छिपे चूना पत्थर के एक आयताकार ब्लॉक के साथ-साथ कई सिरेमिक जार और बर्तन भी मिले।
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Twitter में कर्मचारियों के बुरे दिन शुरू!, 20 घंटे तक कर रहे काम, बुलाए गए कर्मचारियों को सता रहा ये डर

 

Elon Musk Twitter News (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जब से दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार एलन मस्क ने ट्विटर (Twitter) को खरीदा है, तब से रोजाना माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को लेकर नई-नई खबरें सामने आ रही है। इस हफ्ते मस्क ने आधे से ज्यादा कर्मचारियों को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। जिसके बाद कुछ लोगों को वापस बुलाने के लिए भी ट्विटर की तरफ से लेटर जारी किया गया था। कंपनी ने अपने लेटर में उन्हें गलती से निकालने का बात कही थी। वहीं अब ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कई बर्खास्त ट्विटर कर्मचारियों को फिर से शामिल होने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इतना ही नहीं ट्विटर की टीमें अब 20 घंटे तक काम करने को मजबूर हो रही है। 

एलन मस्क ने हाल ही में ट्विटर के आधे कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था, लेकिन छंटनी के कुछ घंटों बाद यह बताया गया कि कंपनी ने कुछ अहम कर्मचारियों को गलती से निकाल दिया और अब उन्हें बनाए रखेगी। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट बताती है कि बहुत से लोग जो फिर से जुड़ने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

Platformer की रिपोर्ट के मुताबिक बर्खास्त कर्मचारियों में से कुछ को फिर से शामिल होने के लिए टॉप मैनेजमेंट को ना कहने का डर है। कर्मचारियों का मानना ​​​​है कि ट्विटर औपचारिक रूप से छंटनी की सूचना को रद्द कर सकता है यदि वे स्वेच्छा से फिर से शामिल नहीं होते हैं। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को अगले 60 दिनों के लिए वेतन और एक महीने का विभाजन निधि (severance) का वादा किया गया है। इसलिए अब उन्हें डर है कि अगर वे फिर से शामिल नहीं होते हैं, तो कंपनी उन्हें नौकरी पर नहीं लौटने के लिए निकाल सकती है। इस तरह कर्मचारियों को कथित तौर पर तीन महीने के वेतन का नुकसान होगा जो उन्हें बिना काम किए मिलने वाला था।

इस बीच ट्विटर पर कुछ मैनेजर्स को अधिक कार्यभार दिया जाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तकनीकी प्रबंधकों (technical managers) को कम से कम 20 व्यक्तिगत कंट्रीब्यूट को कोड लिखने में अधिकांश समय बिताने के लिए कहा गया है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरों को डायरेक्ट रिपोर्ट की संख्या बहुत ज्यादा दी गई है। इसके अलावा ट्विटर पर काम करने वाले एक कर्मचारी ने प्लेटफॉर्मर को बताया कि कुछ मौजूदा टीमें, जो मस्क के प्रोजक्ट पर काम कर रही हैं, दिन में 20 घंटे काम कर रही हैं। इतना ही नहीं कर्मचारियों को यह भी नहीं पता कि मौजूदा वक्त में किया जा ओवरटाइम का पैसा मिलेगा या नहीं।
 
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नेपाल में छह दशमलव तीन तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में छह लोगों की मौत

 काठमांडू (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नेपाल में शक्तिशाली भूकंप के बाद दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई सेकंड तक तेज झटके महसूस किए गये। तड़के एक बजकर 57 मिनट पर आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर छह दशमलव तीन मापी गई। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व नेपाल के दैलेख में स्थित था। इससे नेपाल के धोती जिले में छह लोगों के मारे जाने की खबर है।

 


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इस महीने दुनिया की आबादी 8 अरब हो जाएगी, चीन से आगे निकलेगा भारत


वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। दुनिया में बढ़ती महंगाई के बीच आबादी (Population) भी लगातार बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक आने वाले 15 नवंबर को दुनिया की आबादी 8 अरब को पार कर जाएगी। यह 1950 में 2.5 अरब की जनसंख्या का तीन गुना है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग ने कहा है कि आने वाले दशको में भी जनसंख्या वृद्धि जारी रहेगी। वहीं, जीवन प्रत्याशा ( Life Expectancy) 2050 तक बढ़कर औसतन 77.2 वर्ष की हो जाएगी। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रेचल स्नो ने बताया कि, 1960 के दशक में आबादी बढ़ने की रफ्तार चरम पर थी जो 2020 में एक फीसदी तक नाटकीय रूप से नीचे आ गई।

दुनिया की आबादी 8 अरब हो जाएगी
वहीं, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के साथ-साथ बच्चे पैदा करने की उम्र के लोगों की संख्या को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र ने यह अनुमान लगाया है कि जनसंख्या 2030 में 8 बिलियन, 2050 में 9.7 बिलियन और 2080 में लगभग यह 10.4 बिलियन तक बढ़ती रहेगी। हालांकि, इस विषय पर अन्य समूहों ने अलग-अलग आंकड़ों की गणना की है।

जनसंख्या उतार-चढ़ाव
अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) ने 2020 के एक अध्ययन में अनुमान लगाया कि वैश्विक जनसंख्या 2064 तक अधिकतम हो जाएगी और 2100 तक घटकर 8.8 बिलियन हो जाएगी। आईएचएमई अध्ययन के प्रमुख लेखक स्टीन एमिल वोलसेट ने बताया, हम संयुक्त राष्ट्र से नीचे हैं और मुझे लगता है कि हमारे पास इसका एक अच्छा कारण भी है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर का कहना है कि उनके, 'काफी अलग प्रजनन मॉडल' के तहत, मानव आबादी केवल नौ से 10 अरब के बीच ही पहुंच पाएगी।

प्रजनन दर में लगातार गिरावट
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक प्रजनन दर में लगातार गिरावट हो रही है, जिसके कारण यह आंकड़ा संभावित रूप से 2050 तक लगभग 0.5 फीसदी तक गिर जाएगी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2021 में औसतन प्रजनन दर एक महिला के जीवनकाल में 2.3 बच्चों की थी जो 1950 में लगभग पांच से कम थी। अगर इसके भविष्य की बात करें तो अनुमान है कि 2050 तक ये 2.1 हो जाएगी। दुनिया की आबादी बढ़ाने में जीवन प्रत्याशा का भी एक महत्वपूर्ण रोल है। इसमें लगातार वृद्धि जारी है। 2019 में जीवन प्रत्याशा 72.8 वर्ष थी जो 1990 की तुलना में 9 वर्ष ज्यादा है। संयुक्त राष्ट्र की भविष्यवाणी है कि 2050 तक जीवन प्रत्याशी 77.2 वर्ष होगी।

आबादी के मामले में चीन से आगे निकलेगा भारत
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2023 की शुरुआत में भारत आबादी में पहले नंबर पर पहुंच जाएगा और चीन दूसरे नंबर पर होगा। चीन की आबादी 1.4 अरब है जो 2050 तक कम होकर 1.3 अरब पहुंच जाएगी। आंकड़ा यह भी कहता है कि सदी के अंत तक चीन की आबादी 80 करोड़ पहुंच सकती है। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका 2050 तक तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश बना रहेगा।
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फिनलैंड में मिली 6000 साल पुरानी कब्र, बाज के पंख और कुत्ते की फर के साथ दफनाया गया था बच्चा

 

फिनलैंड (छत्तीसगढ़ दर्पण)। फिनलैंड के जंगल में पुरातत्वविदों को एक बच्चे की कब्र मिली है। इस बच्चे की कब्र पाषाण युग की बताई जा रही है। हालांकि इस क्रब में बच्चे की दांतों के अलावा कोई और हड्डी नहीं मिली है। ये दांत 6,000 साल पहले, मेसोलिथिक काल के बताए जा रहे हैं। पथरीली सड़क के नीचे मिली इस कब्र में कुछ ऐसी भी चीजें भी मिली हैं जिसने पुरातत्विविदों की जिज्ञासाएं बढ़ा दी हैं।

जानवरों के फर और पक्षियों के पंख मिले
पुरातत्विदों को कब्र से कुछ जानवरों के फर और पक्षियों के पंख मिले हैं. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि ये उस समय के अंतिम संस्कार के रीति-रिवाजों में से एक हो सकता है। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिल भी चुके हैं। PLOS ONE जर्नल में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, फिनलैंड की मिट्टी अम्लीय है, जिसमें मानव अवशेष ज्यादा लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह पाते हैं। यही वजह है कि लंबे वक्त से दफन अवशेषों के बारे में कुछ हासिल करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

दस साल के बच्चे की मिली दांत
पुरातत्विदों की टीम को वहां से कंकाल मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी, इसलिए उन्होंने कब्र से माइक्रोपार्टिकल्स की खोज की और उन्हें वहां से जो भी मिला वह उम्मीद से ज्यादा मिला। शोध की लेखक क्रिस्टीना मनेरमा ने कहा कि दांतों की जांच से पता चला कि मृतक एक बच्चा था। इस बच्चे की उम्र लगभग 10 साल होगी। दांतों की रेडियोकार्बन डेटिंग करना संभव नहीं था, इसलिए शोधकर्ताओं ने बच्चे के साथ दफन की गईं पत्थर की कलाकृतियों के आधार पर कब्र की उम्र का पता लगाया।

शोधकर्ताओं ने लगाया अनुमान
शोधकर्ताओं को दो क्वार्ट्ज के तीर मिले जो मेसोलिथिक काल की भौतिक संस्कृति के अनुरूप थे। इस कब्रगाह को मजूनसुओ के नाम से जाना जाता है, जहां से पक्षी के पंख भी मिले। इनमें से सात पंख एक जलपक्षी के थे, जिससे यह पता चलता है कि या तो बच्चे ने पंखों से बना कोट पहना होगा या उसे पंखों के बिस्तर पर लिटाकर दफनाया गया होगा। शोधकर्ताओं को बाज के पंख वाला बारबुल भी मिला है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि बाज के पंखों का इस्तेमाल कब्र या मृत बच्चे के कपड़ों को सजाने के लिए किया जाता रहा होगा।

अंतिम संस्कारों के बारे में मिली अहम जानकारी
इसके साथ ही शोधकर्ताओं को क्रब से से कुत्ते जैसे किसी जानवर के तीन बाल भी मिले हैं। हालांकि भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये बाल कुत्ते के हैं या भेड़िए के हैं। हालांकि, माजूनसुओ साइट से कु्त्ते का कोई दांत नहीं मिला जिससे लगता है कि बच्चे को शायद पूरे जानवर के साथ नहीं, बल्कि सिर्फ उसकी फर के साथ दफनाया गया होगा। इन फरों का इस्तेमाल कपड़े या कब्र के सामान के रूप में किया गया होगा। क्रिस्टीना का कहना है कि इन सबसे हमें पाषाण युग में होने वाले अंतिम संस्कारों के बारे में अहम जानकारी मिलती है। इससे पता लगता है कि तब के लोग मृत्यु के बाद की यात्रा के लिए बच्चे को किस तरह तैयार करते थे।
 
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मनी लॉन्ड्रिंग केस: जल्द भारत लाया जा सकता है आर्म्स डीलर संजय भंडारी, UK कोर्ट ने दी मंजूरी

 

लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। हथियार डीलर संजय भंडारी को भारत प्रत्यर्पित करने के मामले में बड़ी खबर आई है। यूनाइटेड किंगडम में वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने सोमवार को विवादास्पद हथियार डीलर संजय भंडारी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संजय भंडारी के प्रत्यर्पण का आदेश दिया गया है। एजेंसी भारत सरकार की ओर से यूके की अदालत में केस लड़ रही थी।

संजय भंडारी पर आरोप क्या हैं?
भंडारी को जुलाई 2020 में प्रत्यर्पण वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। भंडारी ने इसके खिलाफ वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपील की थी। सीबीआई और ईडी की तरफ से संजय भंडारी के खिलाफ भारत में मनी लान्ड्रिंग यानी गलत तरीके से विदेशों में पैसे भेजने के आरोप लगाए गए हैं। टैक्स देने से बचा जा सके, इसके लिए संजय भंडारी ने अपने दोस्तों की मदद से काफी पैसा बाहर भेजा। इस वजह से राष्ट्रीय खजाने को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। ईडी ने 1 जून, 2020 को संजय भंडारी और अन्य सह-साजिशकर्ताओं के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिसमें उनके द्वारा विदेशी अधिकार क्षेत्र में बनाई गई विभिन्न कंपनियां भी शामिल थीं।

भगोड़ा साबित कर चुकी है भारत सरकार
बता दें कि ब्रिटेन में होने के कारण उसे भारत सरकार पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है। उसके बाद से ही उसे भारत लाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए भारत सरकार ने प्रत्यर्पण की अपील ब्रिटेन से की थी। 16 जून 2020 को तत्कालीन ब्रिटिश गृहमंत्री प्रीति पटेल ने भंडारी के प्रत्यर्पण आग्रह को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद 15 जुलाई 2020 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। उसे अदालत ने 1.20 लाख पाउंड की सिक्योरिटी के साथ अपना पासपोर्ट जमा कराने, मध्य लंदन स्थित घर में नजरबंद रहने और नजदीकी पुलिस स्टेशन में रोजाना हाजिरी लगाने समेत सात शर्तों के साथ जमानत दी गई थी।

रॉबर्ट वाड्रा संग संजय भंडारी का कनेक्शन!
सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग की जांच में रॉबर्ट वाड्रा और संजय भंडारी के बीच संबंध स्थापित हुए थे। रॉबर्ट वाड्रा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बहनोई हैं। वाड्रा के खिलाफ लंदन में भंडारी से बहुत सस्ते दाम पर बंगला खरीदने की जांच भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है। इसके अलावा साल 2016 में आयकर विभाग संजय भंडारी से रॉबर्ट वाड्रा की 2012 के फ्रांस ट्रिप को लेकर भी कई सवाल पूछ चुका है। हालांकि रॉबर्ट वाड्रा, संजय भंडारी संग कोई भी व्यापारिक संबंध होने से इनकार करते रहे हैं।

रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान, यह पता चला कि संजय भंडारी के हिस्सेदारी यूएई, पनामा सहित अन्य देशों की कंपनियों में हैं। आयकर विभाग के मुताबिक भंडारी ने विदेशी संपत्ति को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। इस सब के अलावा संजय भंडारी पर रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप भी है। यूपीए सरकार के जामने में हुई कुछ डीलों को लेकर वो विवाद है जिसमें संजय भंडारी का नाम भी सामने आया है। भारतीय वायुसेना को 75 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की आपूर्ति का ठेका दिलाने में कथित भ्रष्टाचार के मामले में संजय भंडारी का नाम आ चुका है।
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पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के भाई तालिबान की हिरासत में, दुबई भागने की फिराक में थे, फ्लाइट से उतार लिया

 

अफगानिस्तान (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के भाई महमूद करजई को तालिबान ने हिरासत में ले लिया है। स्थानीय मीडिया खामा प्रेस के अनुसार तालिबान की खुफिया एजेंसी ने उन्हें उस समय पकड़ा जब वे दुबई जाने की तैयारी कर रहे थे और एरियाना एयरलाइंस में बैठने जा रहे थे। महमूद करजई अफगानिस्तान के बड़े बिजनेसमैन में से एक हैं। इस गिरफ्तारी के पीछे का कारण पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई द्वारा तालिबान की आलोचना करना माना जा रहा है।

तालिबान के प्रवक्ता ने बताया कि पूर्व अर्बन डेवलपमेंट एंड लैंड मिनिस्ट महमूद करजई पर कानूनी मामलों के चलते विदेश जाने से रोक है। तालिबान के प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े एक शख्स ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, 'महमूद करजई को काबुल एयरपोर्ट से तालिबान की खुफिया सर्विस ने हिरासत में ले लिया। वह दुबई जाने वाली एरियाना एयरलाइन फ्लाइट पर सवार होने वाले थे।'

हामिद के बयानों से तालिबान है नाराज

बताया जा रहा है कि हामिद के बयानों से तालिबानी काफी आहत हुए हैं। पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई काफी समय से महिलाओं के अधिकारों पर अंकुश लगाने को लेकर तालिबान सरकार की आलोचना करते रहे हैं। साथ ही वह तालिबान से 'समावेशी' सरकार बनाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतिरोधी बलों (NRF) और अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात के बीच पंजशीर में संघर्ष के लिए तालिबान को फटकार लगाई है। देश में बढ़ती हत्याओं के बीच उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि जब रक्तपात बंद होना चाहिए।

सरकारी जमीन कब्जा करने का आरोप

गौरतलब है कि दक्षिणी कंधार प्रांत में महमूद करजई आधुनिक वाणिज्यिक शहर ऐनो मीना में एक प्रमुख शेयरधारक हैं। रिपोर्ट के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी ने उन पर उनके भाई हामिद करजई की अध्यक्षता के दौरान ऐनो मीना शहर बनाने के लिए सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया था। मालूम हो कि हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला अफगानिस्तान के दो बड़े नेता हैं, जो तालिबान की ओर से अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के बाद भी देश में बने रहे।
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झील में क्रैश हुआ प्लेन, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी...

 बुक़ोबा/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। तंजानिया में रविवार को एक यात्री विमान हादसे का शिकार हो गया। बुक़ोबा शहर में लैंडिंग के दौरान यात्री प्लेन विक्टोरिया झील में डूब गया। इस विमान में 49 यात्री सवार थे। अब तक इसमें से 23 यात्रियों का रेस्क्यू किया जा चुका है। मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार मवांजा ​​से बुकोबा जा रहे प्रेसिजन एयर के विमान में 49 यात्री सवार थे और अब तक 23 को बचा लिया गया है। तंजानिया की पुलिस ने बताया कि एक यात्री विमान खराब मौसम की वजह से रविवार तड़के विक्टोरिया झील में गिर गया। प्लेन को उत्तर पश्चिमी शहर बुकोबा में लैंड करना था, उसी दौरान ये हादसा हुआ है। इसके साथ ही पुलिस ने बताया कि यात्रियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

 

 

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