दुनिया-जगत - Newsportal | Chhattisgarh Darpan Media Group

दुनिया-जगत

राजनाथ सिंह ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से काहिरा में मुलाकात की

 काहिरा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी से मुलाकात की। रक्षा मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए राष्ट्रपति अल-सीसी ने बताया कि भारत और मिस्र के बीच ऐतिहासिक रूप से द्विपक्षीय संबंध अच्छी तरह से स्थापित हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।

दोनों नेताओं ने सैन्य सहयोग को और मजबूत करने और संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा सह-उत्पादन और उपकरणों के रखरखाव पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने रक्षा उत्पादन की आवश्यकता पर बल दिया और उस संबंध में विशिष्ट प्रस्तावों पर चर्चा की। राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ मिस्र द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। राष्ट्रपति सिसी ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के खतरे का मुकाबला करने के लिए भारत और मिस्र को विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने की आवश्यकता है।

रक्षा मंत्री ने यह स्वीकार किया कि मिस्र अफ्रीका में भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों में से एक है और दोनों देशों में द्विपक्षीय व्यापार में काफी विस्तार हुआ है। उन्होंने भारत और मिस्र के बीच बहुपक्षीय मंचों में घनिष्ठ सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। राजनाथ सिंह ने नवंबर 2022 में कॉप 27 की सफल मेजबानी के लिए शुभकामनाएं दीं।

 

 

और भी

बाइडेन ने कहा, अमेरिका में कोरोना महामारी खत्म हुआ, आंकड़ों में रोजाना मर रहे हैं 400 लोग

 

न्यूयॉर्क (छत्तीसगढ़ दर्पण)।अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइ़़डेन का कहना है कि, कोविड-19 (covid-19) का प्रकोप खत्म हो गया है। सीबीएस के '60 मिनट'कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इतनी बड़ी बात कह दी। कोविड महमारी पर एक सवाल का जवाब देते हुए बाइडेन ने कहा, महामारी खत्म हो गई है। हमें अभी भी कोविड के साथ एक समस्या है। अभी भी हम इस पर बहुत काम कर रहे हैं, लेकिन देश से कोरोना महामारी देश से खत्म हो गई है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर रोज महामारी से 400 लोगों की मौत हो रही है। ऐसे में बाइडेन की इस घोषणा से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।


किसी ने मास्क नहीं पहना है
जो बाइडेन ने डेट्रॉइट में ऑटो शो में एक साक्षात्कार के दौरान कार्यक्रम में भीड़ का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने इंटरव्यू के दौरान कहा कि, अगर आप नोटिस करें तो कोई मास्क नहीं पहन रहा है। सभी की हालत काफी अच्छी नजर आ रही है, इसलिए मुझे लगता है कि यह बदल रहा है, कोरोना अब देश से खत्म हो चुका है।

क्या अमेरिका में महामारी खत्म हो गई?
रविवार की रात जैसे ही शो प्रसारित हुआ, रिपब्लिकन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के नवीनीकरण के संबंध में सवाल उठाए और कहा कि अगर महामारी खत्म हो गई है तो प्रशासन अपने चल रहे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को नवीनीकृत क्यों करेगा?

थिंक टैंक चिंतित
थिंक टैंक चिंतित
अर्बन इंस्टीट्यूट एक थिंक टैंक जो आर्थिक और सामाजिक नीति अनुसंधान करता है, के हवाले से बताया कि, अगर सरकार अपनी आपातकालीन घोषणा को समाप्त कर देती है, तो 15.8 मिलियन अमेरिकी अपना मेडिकेड कवरेज खो देंगे। बता दें कि, बाइडेन के कोरोना खत्म होने वाली बात, ऐसे समय में हुई है जब देश में दैनिक कोरोना संक्रमण के मामले कम हुए हैं।

अमेरिका में रोज कोविड से 400 लोग मर रहे हैं
वहीं, वाशिंगटन पोस्ट के सात दिनों की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में कोविड से एक दिन में लगभग 400 लोगों की मौत हो रही है। 30 हजार से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। बता दें कि,जुलाई की शुरुआत में लक्षण पाए जाने के बाद बाइडेन ने दो हफ्तों के लिए खुद व्हाइट हाउस में क्वारंटाइन कर लिया था। उनकी पत्नी जिल को अगस्त में संक्रमण हो गया था।
और भी

हिजाब के खिलाफ नहीं थम रहा महिलाओं का गुस्सा, क्या ईरान में बड़ा बदलाव होने जा रहा है?

 

तेहरान (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ईरान में महसा अमिनी की मौत के बाद हिजाब के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां सड़कों पर प्रदर्शन के लिए उतर गई हैं। महिलाएं हिजाब उतारकर और कई जगहों पर हिजाब जलाकर अपना विरोध जता रही हैं। इसी बीच ऐसे वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिनमें लड़कियां अपने बालों को कैंची से काटती हुई नजर आ रही हैं। इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए और लोगों को तितर-बितर करने के लिए ईरानी पुलिस द्वारा आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को उत्तर पश्चिमी कुर्दिस्तान प्रांत के सानंदाज में लगभग 500 प्रदर्शनकारियों में से सुरक्षा बलों ने कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। ये प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। एजेंसी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कुछ खड़ी कारों की खिड़कियां तोड़ दीं और डिब्बे में आग लगा दी। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। हालात काबू न होते देख पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

सरकार ने कहा- पिटाई से नहीं हुई मौत
राजधानी के पुलिस प्रमुख, जनरल होसैन रहीमी ने सोमवार को कहा कि 22 वर्षीय महसा अमिनी ने ड्रेस कोड का उल्लंघन किया था इसलिए पुलिस ने उसके रिश्तेदारों से 'सभ्य कपड़े' लाने को कहा था। जुलाई के अंत में, सरकार ने महिलाओं को ऐसे कोट पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था जो घुटनों, तंग पैंट और रिप्ड जींस के साथ-साथ चमकीले रंग के आउटफिट को कवर नहीं करते हैं। समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक महिला की मौत के बाद, पुलिस ने दावा किया कि अधिकारियों और पीड़िता के बीच 'कोई शारीरिक संपर्क नहीं' था। हालांकि, अधिकांश प्रदर्शनकारी पुलिस स्पष्टीकरण से आश्वस्त नहीं थे। उनका मानना है कि महसा की मृत्यु यातना के कारण हुई है।

सही वक्त पर अस्पताल जाती तो बच सकती थी जान
इस पहले राज्य टेलीविजन ने शुक्रवार को एक छोटा वीडियो फुटेज भी जारी किया था जिसमें एक महिला को एक पुलिसकर्मी के साथ बहस के बाद थाने में बहस करते हुए दिखाया गया था। दावा किया जा रहा है कि वह महिला महसा अमिनी है। पीड़िता के पिता अमजद अमिनी ने सोमवार को फार्स को बताया कि पुलिस जो क्लिप दिखा रही है उसे वह स्वीकार नहीं करते। उनका मानना है कि फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई है। इसके साथ ही उन्होंने आपातकालीन सेवाओं के धीमी प्रतिक्रिया को लेकर भी गहरी निराशा जताया। उन्होंने कहा कि अगर सही वक्त पर महसा को अस्पताल ले जाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। आंतरिक मंत्री अहमद वाहिदी ने शनिवार को कहा कि उन्हें रिपोर्ट मिली है कि आपातकालीन सेवा तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई थी।

सरकार ने कहा, पहले से बीमार थी महसा
वाहिदी ने कहा, "महसा को जाहिर तौर पर पिछली शारीरिक समस्याएं थीं और हमने बताया है कि पांच साल की उम्र में उनकी मस्तिष्क की सर्जरी हुई थी।" वहीं महसा ने इससे इंकार करते हुए एजेंसी से कहा कि उनकी बेटी की बीमारी का कोई इतिहास नहीं था और वह पूर्ण स्वास्थ्य में थी। फार्स के अनुसार, पिता ने कहा, "मैंने कोरोनर से अपनी बेटी के पैरों पर चोट के निशान की जांच करने के लिए कहा, लेकिन दुर्भाग्य से उसने मेरे अनुरोध का जवाब नहीं दिया।"

महसा अमिनी के लिए इंसाफ की जंग
आपको बता दें कि, ईरानी महिलाओं का ये गुस्सा उस वक्त फूटा है, जब हिजाब नहीं पहनने की वजह से 22 साल की युवती महसा अमिनी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और फिर पुलिस हिरासत में ही उसकी संदिग्ध मौत हो गई। परिवार का आरोप है, कि पुलिस ने उसे बुरी तरह से प्रताड़ित किया था, जिसकी वजह से वो गंभीर घायल हो गई थी और बाद में उसकी मौत हो गई। मृतका महसा अमिनी की मां ने सीधे तौर पर पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस ने आरोपों को नकार दिया है। महसा अमिनी को 13 सितंबर को राजधानी तेहरान में गिरफ्तार किया गया था और 16 सितंबर को उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही महसा अमिनी की हालत काफी खराब हो गई थी और फिर वो कोमा में चली गईं थीं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वो अपने परिवार के साथ तेहारान घुमने आईं थीं, जहां से उन्हें हिजाब नहीं पहनने की वजह से गिरफ्तार किया गया था।
और भी

नेपाल में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को देउबा सरकार ने किया नजरबंद

 काठमांडू (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर राणा को शेर बहादुर देउबा की सरकार ने नजरबंद कर दिया है। इसके बाद राणा ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया। पुलिस ने मुझे कोर्ट जाने से रोक दिया। चीफ जस्टिस राणा ने कहा कि मुझे नजरबंद कर दिया है और मेरे घर के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा है।

राणा ने एक पत्र में कहा था, संसद का आखिरी सत्र समाप्त हो चुका है और नवंबर में चुनाव हैं। ऐसे में उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की प्रक्रिया भी खत्म हो चुकी है। अब मैं चीफ जस्टिस के तौर पर काम करूंगा। राणा के इस दावे के बाद सरकार ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया है।

बता दें कि इसी साल 13 फरवरी को नेपाली कांग्रेस, नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) और सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के 98 सांसद राणा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आए थे। राणा पर भ्रष्टाचार और सरकार में हिस्सेदारी के लिए सौदेबाजी समेत 21 आरोप लगे और उन्हें फरवरी में निलंबित किया गया था।

महाभियोग प्रस्ताव संसद में पारित नहीं हो पाया और सरकार का शनिवार को आखिरी संसद सत्र भी समाप्त हो गया। वहीं, नेपाल बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि कोर्ट में राणा का विरोध जारी रहेगा।

 

 

और भी

लंदन पहुंचीं भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, महारानी एलिजाबेथ के अंतिम संस्कार में होंगीं शामिल

 लंदन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अंतिम संस्कार सोमवार, 19 सितंबर को लंदन में होगा। इस दौरान विश्व के कई नेता, रॉयल्टी और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महारानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लंदन पहुंच चुकी है।


राष्ट्रपति मुर्मू लंदन के वेस्टमिंस्टर एब्बे में महारानी के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति सोमवार को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 17 से 19 सितंबर तक यूनाइटेड किंगडम के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान वो महारानी के निधन पर भारत सरकार की ओर से शोक व्यक्त करेंगी।

विदेश सचिव विनय क्वात्रा सहित राष्ट्रपति मुर्मू और उनके दल के सदस्यों को लेकर राष्ट्रपति विमान रात 8बजकर 50 मिनट (भारतीय समय अनुसार) पर लंदन के गैटविक हवाई अड्डे पर उतरा। यहां से सभी उस होटल के लिए रवाना हुए, जहां वह इस दौरे के दौरान ठहरेंगे। लंदन के हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति मुर्मू के आगमन पर, ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त द्वारा उनका स्वागत किया गया।



आधिकारिक जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति आज वेस्टमिंस्टर पैलेस में महारानी के लेटिंग-इन-स्टेट को श्रद्धांजलि देंगी। जिसके बाद वो बकिंघम पैलेस के पास लैंकेस्टर हाउस में भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करेंगी। जिसके बाद दिन में राष्ट्रपति स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजे लंदन के बकिंघम पैलेस में विदेशी नेताओं के लिए किंग चार्ल्स III द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह में शामिल होंगी। अगले दिन, राष्ट्रपति मुर्मू वेस्टमिंस्टर एब्बे के वेस्ट गेट पर राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होंगी। सोमवार को दोपहर में, वो ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मामलों के विदेश मंत्री, जेम्स क्लेवर्ली द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में भाग लेंगी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का 96 वर्ष की आयु में  8 सितंबर को निधन हो गया था। उनका 19 सितंबर को वेस्टमिंस्टर एब्बे में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

और भी

महारानी एलिजाबेथ का अंतिम संस्कार 19 को, शमिल होंगे दुनियाभर के दिग्गज नेता व हस्ती...

 लंदन/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अंतिम संस्कार सोमवार 19 सितंबर को लंदन में होगा। इस दौरान विश्व के कई नेता, रॉयल्टी और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे। लंदन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले मेहमानों की एक लंबी लिस्ट है। लंदन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले मेहमानों की एक लंबी लिस्ट है। महारानी के अंतिम संस्कार में तकरीबन 500 लोगों को आमंत्रित किया गया है। भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महारानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लंदन पहुंच चुकी है।

महारानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले अपेक्षित लोग:

रॉयल अटेंडीज
    जापान के सम्राट नारुहितो और की महारानी मसाको
    राजा विलेम-अलेक्जेंडर और नीदरलैंड की रानी मैक्सिमा
    किंग फेलिप VI और स्पेन की रानी लेटिजिया
    स्पेन के पूर्व राजा जुआन कार्लोस
    बेल्जियम के राजा फिलिप और रानी मथिल्डे
    डेनमार्क की रानी मार्गरेट द्वितीय, क्राउन प्रिंस फ्रेडरिक और क्राउन प्रिंसेस मैरी
    किंग कार्ल सोलहवें गुस्ताफ और स्वीडन की रानी सिल्विया
    राजा हेराल्ड वी और नॉर्वे की रानी सोनजा हैराल्डसन
    भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक
    ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोल्कियाह
    जॉर्डन के राजा अब्दुल्लाह
    कुवैत के क्राउन प्रिंस, शेख मेशल अल-अहमद अल-सबाही
    लेसोथो के राजा, लेत्सी III
    लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस
    लक्जमबर्ग हेनरी के ग्रैंड ड्यूक
    पहांगी के मलेशियाई सुल्तान अब्दुल्ला
    मोनाको के राजकुमार, अल्बर्ट II
    मोरक्को के क्राउन प्रिंस मौले हसन
    ओमान के सुल्तान, हैथम बिन तारिक अल-सैद
    कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानीक
    टोंगा के राजा, टुपो VI

विश्व के नेता
    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बाइडन
    कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो
    ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो
    त्रिनिदाद और टोबैगो के राष्ट्रपति पाउला-मे वीक्स
    बारबाडोस के राष्ट्रपति सैंड्रा मेसन
    जमैका के प्रधान मंत्री एंड्रयू होल्नेस
    बेलीज के गवर्नर जनरल फ्लोयला तजालम
    सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के गवर्नर जनरल सुसान डौगन
यूरोप और मिडिल ईस्ट
    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
    जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर
    इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला
    आयरलैंड के राष्ट्रपति माइकल डी. हिगिंस
    आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन
    पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा
    ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वान डेर बेलेन
    हंगरी के राष्ट्रपति कैटलिन नोवाक
    पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेजेज डूडा
    लातविया के राष्ट्रपति एगिल्स लेविट्स
    लिथुआनिया के राष्ट्रपति गीतानस नौसेदा
    फिनलैंड के राष्ट्रपति सौली निनिस्टो
    ग्रीस की राष्ट्रपति कतेरीना सकेलारोपोलू
    माल्टा के राष्ट्रपति जॉर्ज वेला
    साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनास्तासीदेस
    यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल
    यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन
    नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग
    इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग
    फिलीस्तीनी प्रधानमंत्री मोहम्मद शतयेह
अफ्रीका
    दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा
    नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति येमी ओसिनबाजो
    घाना के राष्ट्रपति नाना अकुफो-एडो
    गैबॉन के राष्ट्रपति अली बोंगो
एशिया
    भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
    चीन के उपराष्ट्रपति वांग किशन
    श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे
    बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना
    न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न
    ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथोनी अल्बनीज
    दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यूं सुक-योल
इन देशों को नहीं किया गया आमंत्रित
    रूस
    म्यांमार
    बेलारूस
    सीरिया
    वेनेजुएला
    अफगानिस्तान।

 

और भी

ब्रिटेन की महारानी के ताबूत से शाही ध्वज खींचने की हुई कोशिश, पुलिस ने शख्स को गिरफ्तार किया

 

लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन की महारानी का पार्थिव शरीर जनता के अंतिम दर्शन के लिए लंदन स्थित संसद के वेस्टमिंस्टर हॉल में रखा गया है। यहां लोग श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए थे इसी दौरान एक अजीब वाकया हो गया। बताया जा रहा है कि, यहां एक शख्स महारानी के ताबूत  के उपर रखे शाही ध्वज को खींचने की कोशिश की, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

महारानी के ताबूत से शाही ध्वज निकालने की कोशिश
19 सितंबर को महारानी को पूरी राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार (Queen Elizabeth Funeral) कर दिया जाएगा। ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर हॉल में देश-विदेश से लोग पहुंचकर महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को नम आंखों से अंतिम श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी दौरान वेस्टमिंस्टर हॉल में एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला,जब एक शख्स महारानी के ताबूत की और दौड़ गया। उस शख्स को पुलिस ने ताबूत के करीब जाता देख तेजी से दौड़कर पकड़ लिया। खबर के मुताबिक, वह व्यक्ति शायद महारानी के ताबूत के उपर रखे शाही ध्वज को खीचनें की कोशिश कर रहा था। इस घटना को देखकर पास खड़े लोग हैरान रह गए। पुलिस ने उस शख्स को गिरफ्तार कर लिया है।

शायद वह महारानी को देखना चाहता था
एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि लोगों को लगा कि कोई बेहोश हो गया है, और उन्होंने एक चीख सुनी। उन्होंने कहा कि कोई ताबूत की ओर गया और शाही ध्वज ऊपर की ओर खींच लिया। उनका मानना​​​​है कि उस आदमी ने ध्वज के नीचे ताबूत को देखने के लिए ऐसा किया था। यह महारानी के पार्थिव शरीर का अनादर था, जिसने वहां मौजूद लोगों को काफी परेशान किया। एक अन्य मौजूद महिला ट्रेसी हॉलैंड ने कहा कि उसकी भतीजी उसी रास्ते में थी जब वह आदमी रानी के ताबूत की ओर बढ़ा।

वेस्टमिंस्टर हॉल में लोग हैरान, शख्स गिरफ्तार
जब उस शख्स ने महारानी के ताबूत के पास पहुंचने की कोशिश की तो पास खड़ी पुलिस ने उसे पकड़ लिया। कई पुलिसकर्मियों और शाही गार्ड्स कुछ सेकंड के अंदर ही उसे ताबूत से दूर एक कमरे में उठा कर ले गए। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

विश्व के 500 शीर्ष नेता लंदन पहुंच रहे हैं
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ का 96 वर्ष की आयु में स्कॉटलैंड के बाल्मोरल महल में निधन हो गया था। उनकी जगह प्रिंस चार्ल्स को राजा बनाया गया है। कुछ समय से महारानी एलिजाबेथ कहीं आने-जाने में असमर्थ थीं। इसलिए वे अपनी मुलाकातें लंदन के बकिंघम पैलेस की बजाय स्कॉटलैंड के बाल्मोरल कैसल में कर रही थीं। बता दें कि, महारानी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दुनिया भर से 500 से अधिक शीर्ष नेता लंदन पहुंच रहे हैं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज लंदन के लिए रवाना हो गईं।
और भी

ब्रह्मांड में शनि जैसे नए ग्रह का संकेत! क्या कहते हैं स्पेस साइंटिट्स?

 

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अंतरिक्ष में कई ऐसे रहस्य हैं जिन्हें सुलझाने में वर्षों ने साइंटिस्ट्स प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इन्हीं कोशिशों के बीच कुछ ऐसे नए तथ्य सामने आते हैं, जिससे अब तक समूचा खगोल विज्ञान अछूता रहा है। वैज्ञानिकों को स्पेस की तस्वीरों से जो संकेत मिले हैं वो वाकई में गंभीर हैं। अगर से वास्तव में ये सच साबित होता है तो अब तक ज्ञात ब्रह्मांड के ग्रहों की संख्या का आंकड़ा बढ़ जाएगा।

अब तक ब्रह्मंड में 8 ग्रहों को मान्यता
ब्रह्मांड में अंतरिक्ष की दुनिया रहस्यों से भरी है। खगोल विज्ञान ने अब तक कुल 8 ग्रहों को मान्यता दी है। जिनमें बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, युरेनस और नेप्चून है। इसके अतिरिक्त तीन बौने ग्रह और हैं। जिनके नाम सीरीस, प्लूटो और एरीस हैं। लेकिन ताजा शोध में वैज्ञानिकों को एक नए ग्रह के संकेत मिले हैं।

ब्रह्मांड में नए ग्रह के संकेत
स्पेस साइंटिस्ट्स का कहना है कि ब्रह्मांड में कोई और ग्रह हो सकता है। सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स में खगोलविदों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में इसके प्रमाण मिले हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के हवाले से ये दावा किया है। जिसमें कहा गया है कि स्पेस में धूल और गैस से बनी एक डिस्क कुछ ऐसा ही संकेत देती है।

शनि के आकार जैसा
खगोलविद्दों की एक रिपोर्ट के निष्कर्ष में ये कहा गया है कि एक नया ग्रह नेपच्यून या शनि के आकार से मिलता जुलता अस्तित्व में होने का संकेत मिला है। ये दावा सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स और प्रोजेक्ट लीडर के पोस्टडॉक्टरल विद्वान फेंग लॉन्ग की एक रिसर्च में किया गया है। जिसमें कहा गया है कि नए ग्रहों को सीधे खोजना बेहद कठिन है। वहीं स्मिथसोनियन एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी और हार्वर्ड कॉलेज ऑब्जर्वेटरी के सहयोग से सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के खगोलविदों ने इन हार्ड-टू-स्पॉट ग्रहों को खोजने के लिए एक अपडेटेड तरीका खोजा। जिसमें पाया कि स्पेस में धूल और गैस की डिस्क एक डिस्क मौजूद है, जो नेप्च्यून या शनि जैसे ग्रह के आकार की है।

3 मिलिनय वर्ष पुरानी है डिस्क
ताजा रिसर्च में कहा गया है कि ये डिस्क 518 प्रकाश वर्ष दूर देखी गई है। जो हाई रिजॉल्यूशन ALMA डेटा एनालिसिस में सामने आया। साइंटिट्स का अनुमान है कि धूल और गैस से भरी ये डिस्क करीब 3 मिलियन वर्ष पुरानी है।

NASA ने क्या कहा?
नासा के वैज्ञानिकों का दवा है कि ग्रह एक प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क में बनते हैं, जो मूल रूप से गैस और धूल के होते हैं। ब्रह्मांड में ऐसे सैकड़ों डिस्क हैं, लेकिन वास्तविक ग्रहों के जन्म और विकास का निरीक्षण करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
और भी

ब्रिटेन में चीन की हुई भारी बेइज्जती, प्रतिनिधिमंडल को नहीं देखने देगा क्वीन एलिजाबेथ का ताबूत

 

लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। महारानी एलिजाबेथ के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लंदन जाने वाले चीनी प्रतिनिधिमंडल को संसद के अंदर ताबूत देखने की अनुमति नहीं मिलेगी। बीबीसी की खबर के मुताबिक ब्रिटेन सरकार ने चीन के प्रतिनिधि मंडल को संसद में क्वीन के अंतिम दर्शन की इजाजत नहीं दी है। चीन का प्रतिनिधि मंडल ब्रिटिश संसद में क्वीन एलिजाबेथ के अंतिम दर्शन नहीं कर पाएगा। हालांकि चीन का प्रतिनिधि मंडल क्वीन के अंतिम संस्कार में शामिल होगा।

ब्रिटेनी सांसदों ने चीन की निंदा की थी
ब्रिटेन के कुछ सांसदों ने चीन के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करने पर चिंता जताई थी। बता दें कि चीन के शिनजियांग प्रांत में उईगर मुसलमानों संग अत्याचार और मानवाधिकारों के हनन करने को लेकर ब्रिटेन के कुछ सांसदों ने चीन की कम्यूनिस्ट सरकार की आलोचना की थी। इसके बाद मार्च 2021 में ब्रिटेन ने चीन के शिन्जियांग में ह्यूमन राइट्स के हनन पर चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद चीन ने पलटवार करते हुए ब्रिटेन के नौ सांसद और चार संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया।

क्वीन का ताबूत देखने से किया बैन
बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीनी सरकार के प्रतिनिधिमंडल को ब्रिटिश सरकार की निगरानी में क्वीन का ताबूत देखने से बैन कर दिया है। ब्रिटेन की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे हॉयल ने चीनी सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल को वेस्टमिंस्टर हॉल में दिवंगत महारानी के 'लाइंग-इन-स्टेट' कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी है।

बीबीसी ने रिपोर्ट में किया खुलासा
बीबीसी सूत्रों के मुताबिक सर लिंडसे हॉयल ने उइगुर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का आरोप लगाने के लिए पांच ब्रिटिश सांसदों के खिलाफ चीनी प्रतिबंधों के कारण चीनी प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। इससे पहले सितंबर 2021 में भी चीन के एम्बेसेडर को संसद में आने से रोका गया था। ब्रिटेन की PM लिज ट्रस के प्रवक्ता का कहना है कि मेहमानों की लिस्ट विदेश मंत्रालय की स्वीकृति पर ही तैयार होती है। परम्परा के मुताबिक उन देशों के गेस्ट को बुलाया जाता है, जिनके ब्रिटेन से अच्छे डिप्लोमैटिक रिश्ते होते है।

तनावपूर्ण हो सकते हैं ब्रिटेन-यूके के संबंध
इस बीच हाउस ऑफ कॉमन्स ने कहा कि उसने सुरक्षा मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन को अंतिम संस्कार कार्यक्रम में उपस्थित होने की अनुमति होगी, लेकिन उसे संसद भवन के अंदर के कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी। बता दें कि वेस्टमिंस्टर हॉल संसदीय संपदा का हिस्सा है तथा यह हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स के अध्यक्षों के नियंत्रण में होता है। इस घटनाक्रम से ब्रिटेन-चीन संबंधों के और तनावपूर्ण होने की आशंका है।

चीन ने कहा- मेहमानों के साथ हो उचित व्यवहार
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि उन्होंने अभी तक रिपोर्ट नहीं देखी है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के लिए क्वीन का अंतिम संस्कार एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। ब्रिटेन के आमंत्रण पर हिस्सा लेने वाला हमारा प्रतिनिधि मंडल क्वीन के सम्मान और ब्रिटेन के साथ संबधों के लिए जा रहा है। आयोजक के रूप में ब्रिटेन को राजनयिक प्रोटोकॉल के साथ-साथ मेहमानों के लिए भी उतिक शिष्टाचार बनाए रखना चाहिए। बता दें कि ब्रिटिश विदेश कार्यालय के सूत्र के अनुसार चीनी उपराष्ट्रपति वांग किशान चीन का प्रतिनिधित्व करेंगे।

19 सितंबर को होगा अंतिम संस्कार
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ का अंतिम संस्कार 19 सितंबर सोमवार को होना है। इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत बेल्जियम, स्वीडन, नीदरलैंड्स और स्पेन के राजा-रानी शामिल होंगे। फ्रांस, ब्राजील, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, तुर्की आदि देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी वहां पहुंचेंगे। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन समेत बेलारूस, म्यांमार, ईरान को निमंत्रण नहीं दिया गया है।
और भी

डायमंड मैन! 4 साल में खोजे 80 हीरे, पार्क में 35000वें के साथ रिकॉर्ड

 

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। संयुक्त राज्य अमेरिका में एक शख्स ने अर्कांसस के क्रेटर ऑफ डायमंड्स पार्क में हीरा खोजने का रिकॉर्ड बना डाला। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शख्स पिछले चार साल में अब तक पार्क से 80 से अधिक हीरे खोज चुका है।

शख्स ने 4 साल में ढूंढे 80 डायमंड
स्कॉट क्रेकेस को मिला नया डायमंड इस साल का 50वां और पार्क में पंजीकृत होने वाला 35,000वां हीरा था। पार्क की ओर जारी एक विज्ञप्ति अनुसार, क्रेकेस ने अब तक पार्क में 80 से अधिक हीरे ढूंढे हैं। नया हीरा उन्होंने एक सप्ताह पहले खोजा था। ये पार्क में मिलने वाला 35000वां हीरा है। अर्कांसस के क्रेटर ऑफ डायमंड्स पार्क की ओर बताया गया कि स्कॉट क्रेक्स ने चार साल पहले साइट पर डायमंड की तलाश में खुदाई शुरू की थी।

एक साल में खोज चुका है 50 हीरा
अमेरिका के अर्कांसस के क्रेटर ऑफ डायमंड्स पार्क में हीरा खोजने का रिकॉर्ड बनाने वाले शख्स का नाम स्कॉट क्रेकेस है। इस साल वो अब तक 50 से अधिक हीरे खोज चुका है। पिछले चार साल से स्कॉट क्रेकेस डायमंड्स पार्क जाते थे।

पार्क से 5 गैलन बजरी ले जाने की अनुमति
नियम के मुताबिक अर्कांसस के क्रेटर ऑफ डायमंड्स पार्क में आने वाले प्रत्येक शख्स को प्रतिदिन अपने साथ 5 गैलन बाल्टी बजरी घर ले जाने की अनुमति है। कुछ व्यक्ति बजरी की सूखने की प्रतीक्षा करते हैं और बाद में उसमें चमकदार धातु यानी हीरे की तलाश करते हैं।

'व्हाइट डायमंड' 6 सितंबर को रिकॉर्ड में दर्ज
अमेरिकी मीडिया बोस्टन 25 न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्कॉट क्रेकेस डायमंड सर्च एरिया से जांच करने के लिए बजरी को घर ले गए थे। जिसमें उन्हें एक छोटा हीरा मिला। इसे 6 सितंबर को आधिकारिक तौर पर पंजीकृत कराने के लिए पार्क में लाए। पार्क के अधिकारियों ने इस खोज को सफेद हीरे के रूप में दर्ज किया।

स्कॉट क्रेकेस को पार्क में दो रात का फ्री स्टे
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एक कैरेट से छोटे कीमती रत्नों को अंकों में तौला जाता है, जिसमें 100 अंक एक कैरेट के बराबर होते हैं। पार्क के अधिकारियों ने कहा कि श्री क्रेक्स के मील के पत्थर की खोज ने उन्हें अपने परिसर में दो रात का मुफ्त प्रवास दिया।
 
और भी

एससीओ शिखर सम्मेलन में आज शामिल होंगे पीएम मोदी

रूस, उज्बेकिस्तान और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों के साथ करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

 समरकंद/नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। वो गुरुवार को रात तकरीबन नौ बजे उज्बेकिस्तान के समरकंद पहुंचे थे। पीएम मोदी शिखर सम्मेलन में में पहुंचने वाले आखिरी नेता हैं। शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी रूस, उज्बेकिस्तान और ईरान के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। पीएम मोदी आज एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे जिसके बाद एससीओ नेताओं की एक जरूरी बैठक होगी।
पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे पीएम मोदी

शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक में शामिल होंगे, जिसपर पूरे विश्व की नजरें हैं। कोविड महामारी और यूक्रेन संघर्ष के बाद पीएम मोदी और पुतिन की पहली बैठक है। पीएम मोदी ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।

अगले साल भारत में होगा शिखर सम्मेलन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 15 वैश्विक नेताओं के साथ समरकंद शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। उज्बेकिस्तान एससीओ शिखर सम्मेलन 2022 की अध्यक्षता कर रहा है। जिसके बाद भारत समरकंद शिखर सम्मेलन के अंत में एससीओ की रोटेशनल वार्षिक अध्यक्षता ग्रहण करेगा। एससीओ संगठन में मौजूदा वक्त में आठ सदस्य देश हैं। इनमें चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। साथ ही चार पर्यवेक्षक देश हैं जो कि पूर्ण सदस्य के तौर पर संगठन में शामिल होने की रुचि रखते हैं। इनमें अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया शामिल हैं। संगठन में छह डायलॉग पार्टनर्स देश हैं। ये आर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया, नेपाल, श्रीलंका और तुर्की हैं।

साल 2017 में भारत संगठन में हुआ शामिल
साल 1996 में गठित शंघाई फाइव, उज्बेकिस्तान को शामिल करने के साथ 2001 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) बन गया। वहीं 2017 में भारत और पाकिस्तान के समूह में प्रवेश करने और 2021 में तेहरान को पूर्ण सदस्य के रूप में स्वीकार करने के फैसले के साथ, SCO सबसे बड़े बहुपक्षीय संगठनों में से एक बन गया। शिखर सम्मेलन में भारत ने दृढ़ता से क्षेत्रीय सुरक्षा से संबंधित चिंताओं, रक्षा, आतंकवाद का मुकाबला करने और अवैध नशीली दवाओं के व्यापार आदि पर सहयोग को लेकर आह्वान किया है।

और भी

भारत की यात्रा ने दो मित्र पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में एक नया क्षितिज खोल दिया : शेख हसीना

 ढाका (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि उनकी हालिया भारत यात्रा से बांग्लादेश को फायदा हुआ है और वह खाली हाथ नहीं लौटी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी यात्रा ने दो मित्र पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में एक नया क्षितिज खोल दिया है। हसीना की यात्रा के दौरान, भारत और बांग्लादेश ने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें से एक कुशियारा नदी के पानी के बंटवारे पर था, जिससे दक्षिणी असम और बांग्लादेश के सिलहट के इलाकों को लाभ होने की उम्मीद है।

हसीना ने पांच से आठ सितंबर के बीच भारत के चार दिवसीय दौरे के करीब हफ्ते भर बाद यहां संवाददाताओं को बताया, उन्होंने (भारत) ने गंभीरता दिखाई और मैं खाली हाथ नहीं लौटी हूं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कोविड महामारी के कारण तीन साल के लंबे अंतराल के बाद मेरी यात्रा ने बांग्लादेश-भारत संबंधों में एक नया क्षितिज खोल दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लोगों को उनकी भारत यात्रा के दौरान पहचाने गए सभी क्षेत्रों में सहयोग और मौजूदा द्विपक्षीय समस्याओं को हल करने के लिए लिए गए निर्णयों से लाभ होगा।

उनकी टिप्पणी तब आई जब मुख्य विपक्ष बीएनपी के नेताओं ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश को उनकी (हसीना की) भारत यात्रा से कुछ नहीं मिला, जबकि इसके महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा, हसीना भारत से समझौते में असमर्थ हैं। हसीना ने कुशियारा नदी को लेकर सहमति पत्र को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और हरित अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक व लोगों से लोगों के बीच संपर्क के क्षेत्र में सहयोग पर भी समझौते किए हैं।

 

और भी

तालिबान सरकार ने अफगानिस्तान में अजहर की मौजूदगी से किया इनकार

 इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  तालिबान सरकार ने मीडिया में आईं उन खबरों का बुधवार को खंडन किया, जिसमें अफगानिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) प्रमुख मसूद अजहर की मौजूदगी का दावा किया गया है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कहा कि ऐसे आतंकवादी संगठन पाकिस्तान की जमीन से संचालन कर सकते हैं और यहां तक कि सरकारी संरक्षण में भी वे अपना काम जारी रख सकते हैं।

पाकिस्तानी मीडिया में जैश प्रमुख अजहर के अफगानिस्तान में होने संबंधी दावे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तालिबान की अंतरिम सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इसे कड़े शब्दों में खारिज किया। खबरों में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने उसे (मसूद अजहर) सौंपने की मांग वाला एक पत्र भी अफगानिस्तान को भेजा है।

 
 
 

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के हवाले से मंगलवार को सामने आई खबर में कहा गया, हमने अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय को एक पन्ने का पत्र लिखा है, जिसमें उन्हें मसूद अजहर का पता लगाने और गिरफ्तार करने के लिए कहा गया है, क्योंकि हम मानते हैं कि वह अफगानिस्तान में कहीं (पूर्वी नंगरहार प्रांत) में छिपा हुआ है।

मुजाहिद ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने इस बाबत मीडिया में आई खबर देखी है। मुजाहिद ने कहा, लेकिन, यह सच नहीं है। किसी ने भी हमसे ऐसी मांग नहीं की है। मुजाहिद ने कहा, जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख अफगानिस्तान में नहीं है। ऐसे संगठन पाकिस्तान की जमीन से संचालन कर सकते हैं - और यहां तक कि आधिकारिक संरक्षण में भी। प्रवक्ता ने कहा, हम किसी को भी, किसी दूसरे देश के खिलाफ अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देंगे।

 

 

और भी

पीएम मोदी ने की भूटान नरेश से मुलाकात, जानिए यह देश क्यों है भारत के लिए खास

 

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भूटान के नरेश जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने बुधवार को राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। माना जाता है कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों तथा उन्हें और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
भारत और भूटान ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंध साझा करते हैं जो समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। इस अवसर पर भुटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा से भी मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने आज राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की।

इससे एक दिन पहले मंगलवार को भूटान ने अंतराष्ट्रीय सौर गठबंधन रूपरेखा समझौते की पुष्टि की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, "भारत में भूटान के राजदूत मेजर जनरल वेटसॉप नामग्याल ने डीजी इंटरनेशनल सोलर एलायंस की मौजूदगी में सचिव ईआर दम्मू रवि को समर्थन का दस्तावेज सौंपा।" भारत और भूटान द्विपक्षीय संबंधों का मूल ढांचा दोनों देशों के बीच 1949 में हस्ताक्षरित मैत्री और सहयोग की संधि थी। इसने दोनों देशों के बीच शांति और एक दूसरे के आंतरिक मसलों में हस्तक्षेप न करने का आह्वाहन किया। साल 2007 में इस संधि को संशोधिक किया गया था। इसके मुताबिक भूटान भारत को अपनी विदेश नीति का मार्गदर्शन करने देने को सहमत हो गया और दोनों देश, विदेश और रक्षा मामलों पर एक-दूसरे से परामर्श करेंगे।

चिकन नेक कॉरिडोर के लिए महत्वपूर्ण है भूटान
भूटान चार भारतीय राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ 699 किमी की लंबाई के साथ अपनी सीमा साझा करता है और भारत-चीन के बीच एक बफर स्टेट के रूप में कार्य करता है। भूटान, भारत के लिए एक बफर स्टेट के रूप में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चिकन नेक कॉरिडोर की रक्षा करके चीन संग बड़े खतरे से भारत को बचाता है।
और भी

क्या किंग चार्ल्स यात्रा के दौरान खुद की Toilet सीट और पेपर लेकर साथ में चलते हैं?

 

लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद किंग चार्ल्स के सिर पर इंग्लैंड का ताज सज गया है। इसके बाद से दुनिया भर की मीडिया यह जानने में जुट गई है कि, किंग रहते कैसे है, खाते कैसे है, खाली समय कैसे बिताते हैं, वगैरह, वगैरह...वहीं किंग चार्ल्स से जुड़ूी एक जानकारी यह मिली है कि, वे टॉयलेट सीट और क्लीनेक्स वेलवेट टॉयलेट पेपर साथ लेकर अवश्य जाते हैं।

चार्ल्स ने किंग का ताज पहना, जानें उनके शौक
हाल ही में महारानी के निधन के बाद से उनके बड़े बेटे चार्ल्स को किंग का ताज पहनाया गया। अब वे पहले से ज्यादा काफी व्यस्त और सुर्खियों में आ गए हैं। वहीं, मीडिया उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने को इच्छुक हैं। किंग चार्ल्स की दिवंगत पत्नि डायना और महारानी के बटलर के तौर पर सेवा दे चुके पॉल बुरेल ने एक डॉक्यूमेंट्री में बताया था कि चार्ल्स ने साफ तौर पर अपनी शूलेस प्रेस किए जाने के निर्देश दे रखे हैं।

किंग टॉयलेट सीट लेकर चलते हैं
न्यूयॉर्क पोस्ट ने बुरेल के हवाले से बताया, 'किंग चार्ल्स के पजामे हर सुबह प्रेस होते हैं और उनके शूलेस को चपटा कर प्रेस किया जाता है। उनके बाद प्लग एक खास दिशा में होना चाहिए और उन्हें पानी का तापमान भी थोड़ा गर्म चाहिए। जानकारी के मुताबिक, किंग का बाथ टब केवल आधा भरा होना चाहिए। बुरेल ने यह भी बताया था कि "हर सुबह किंग चार्ल्स के नौकर उनके टूथब्रश पर एक इंच टूथपेस्ट लगा कर रखते हैं।

ब्रेड,ताजा फलों का जूस लेना पसंद करते हैं किंग
वहीं, किंग चार्ल्स के खाने-पीने की आदतों के बारे में कई जानकारियां सामने आई हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट ने रॉयल स्टाफ शेफ ग्राहम नयूबोल्ड के हवालों से कहा कि, किंग को खाने में पोषणयुक्त चीज़ें काफी पसंद हैं। उन्हें घर पर बनी ब्रेड,ताजा फलों का जूस, ताजा फलों की प्लेट, से उठाकर फल खाना पसंद है। किंग जहां भी जाते हैं, उनके नाश्ते का बॉक्स उनके साथ अवश्य जाता है। उसमें छह तरह के शहद होते हैं, कुछ खास मूसली, ड्राय फ्रूट होते हैं। वे इन चीजों को लेकर समझौता नहीं करते।"

किंग के बारे में रोचक जानकारियां
बता दें कि, यह सब अमेजन प्राइम की डॉक्यूमेंट्री में जानकारी दी गई है। यह डॉक्यूमेंट्री तब रिलीज हुई थी जब चार्ल्स प्रिंस ऑफ वेल्स थे। यह है किंग के बारे में रोचक जानकारी, पढ़कर आपको उनके बारे में काफी कुछ जानकारियां मिली होंगी।
और भी

भारत ने पाक को यूएन में फिर लताड़ा, कहा- आतंक की फैक्ट्री चलाने वाले मानवाधिकार पर ज्ञान न दें

 

जिनेवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत ने पाकिस्तान को मानवाधिकारों के प्रचार और उसके संरक्षण को लेकर पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान का भारतीय लोगों के मानवाधिकार की चिंता करना सिर्फ और सिर्फ एक छलावा है। बैठक में भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह सबसे ज्यादा आतंकियों को पनाह दे रहा है।

पाकिस्तान ने भारत पर लगाया आरोप
पाकिस्तान ने UNHRC में आरोप लगाया था कि कश्मीर में मानवाधिकार का हनन हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र जिनेवा कार्यालय में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि खलील हाशमी ने भारत में मानवाधिकार हनन को लेकर निशाना साधा था। संयुक्त राष्ट्र मिशन में भारत के प्रथम सचिव पवन बाधे ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए कहा कि दुनिया के आतंकियों को पनाह देने वाला मुल्क, जिस देश में UN प्रतिबंधित आतंकी रहते हों उस देश का मानवाधिकार पर बोलने से ज्यादा बड़ा छलावा कुछ नहीं हो सकता है।

पवन बाथे ने पाक को लताड़ा
भारत की तरफ से बोलते हुए पवन बाधे ने कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने अतीत में खुले तौर पर आतंकी समूहों को बनाने और उन्हें भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में लड़ने के लिए प्रशिक्षित करने की बात कही है। ऐसे मुल्क का मानवाधिकार पर बात करना छलावा नहीं तो और क्या है? पवन बाधे ने परिषद करते हुए कहा कि पाकिस्तान स्टेट स्पॉन्सर टेररिज्म को खत्म करे। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान का मानवाधिकार में सबसे बड़ा योगदान यही होगा कि वह आतंक की फैक्ट्री चलाना बंद कर दे।

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को लिखी चिट्ठी
बतादें कि पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उसने एक चिट्ठी के जरिए दावा किया है कि आतंकी मसूद अजहर अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। दरअसल पाकिस्तान ने मसूद अजहर की गिरफ्तारी को लेकर अफगानिस्तान को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में पाकिस्तान ने लिखा है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में छिपा हुआ है और तालिबान सरकार उसका पता लगाने के लिए उसकी मदद करे। पाकिस्तान ने दावा किया है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान के नंगहार या कुनार प्रांत में छिपा हो सकता है।

तालिबान ने जताई नाराजगी
पाकिस्तान की इस चिट्टी को लेकर तालिबान ने कड़ी नाराजगी जताई है। तालिबान विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अब्‍दुल कहर बाल्‍खी ने कहा है कि सरकार ऐसी सभी रिपोर्ट्स को खारिज करती है जिसमें कहा गया है कि मसूद अजहर ने अफगानिस्‍तान में शरण लेनी चाहा है। उन्‍होंने यह भी कहा कि तालिबान सभी पक्षों से बिना किसी सुबूत के इस तरह के दावे न करने के लिए करती है। बाल्‍खी की मानें तो इस तरह की बातें द्विपक्षीय संबंधों को खराब करती हैं।
और भी

पिछले साल पांच करोड़ लोग आधुनिक गुलामी में रहे: संयुक्त राष्ट्र

 जिनेवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी का अनुमान है कि पिछले साल के अंत तक दुनिया भर में करीब पांच करोड़ लोग आधुनिक गुलामी के पीड़ित रहे थे, जो या तो बंधुआ मजदूरी में धकेल दिए गए या उनका विवाह कर दिया गया। यह आंकड़ा पांच साल पहले आई संस्था की पिछली रिपोर्ट से 25 प्रतिशत अधिक है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और साझेदार व्यावसायिक यौन शोषण जैसे चिंताजनक रुझानों की ओर इशारा करते हैं, जो चार में से लगभग एक व्यक्ति को प्रभावित करते हैं जो बंधुआ मजदूरी के अधीन हैं। इससे गरीबों, महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय प्रवासी मामलों के संगठन और आधुनिक दासता पर काम करने वाले अधिकार समूह वॉक फ्री फाउंडेशन के साथ आईएलओ ने बताया कि 2021 के अंत में बंधुआ मजदूरों की संख्या 2.8 करोड़ थी।

 
 
 

सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि एक साल पहले के आंकड़ों के आधार पर 2017 में इस तरह की आखिरी रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद से इस तरह के आंकड़ों में आधुनिक गुलामी में रहने वाले लोगों की संख्या एक करोड़ बढ़ी है। इसमें कहा गया है कि दो-तिहाई वृद्धि अकेले जबरन विवाह से संबंधित है। वॉक फ्री के संस्थापक निदेशक ग्रेस फॉरेस्ट ने न्यूयॉर्क में एसोसिएटेड प्रेस (एपी) से साक्षात्कार में कहा कि वृद्धि ग्रीस की आबादी के बराबर है।

 
 
 

रिपोर्ट के अनुसार, सभी जबरन विवाह के मामलों में से दो तिहाई से अधिक मामले एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पाए गए जो दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला क्षेत्र है लेकिन प्रति व्यक्ति सबसे अधिक संख्या अरब देशों में है, जहां लगभग प्रति 1,000 में से पांच लोग जबरन विवाह वाले थे।

श्रमिकों, व्यवसायों और सरकारों को साथ लाने का काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र श्रम एजेंसी के महानिदेशक गाय राइडर ने सबसे मिलकर काम करने का आह्वान किया और कहा, इसमें ट्रेड यूनियन, नियोक्ता समूह, नागरिक समाज और आम लोग, सभी को महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभानी हैं।

और भी

दुबई की अदालत ने निवेशक संजय शाह को डेनमार्क प्रत्यर्पित करने की याचिका खारिज की

 दुबई (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  दुबई की एक अदालत ने कर योजना के तहत 17 लाख डॉलर की धोखाधड़ी करने के मुख्य आरोपी एवं ब्रिटिश नागरिक संजय शाह को डेनमार्क प्रत्यर्पित किये जाने संबंधी याचिका सोमवार को खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले को डेनमार्क के अधिकारियों के लिए झटका माना जा रहा है जो देश के अब तक के सबसे बड़े आर्थिक धोखाधड़ी मामले में संजय शाह का प्रत्यर्पण कराना चाहते थे।

सोमवार को बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने यह फैसला सुनाया। हालांकि, फैसले का अभी विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। अभियोजक अदालत के इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं। संजय के वकील अली-अल जरूनी ने कहा, बेशक, हम तत्काल उन्हें जमानत दिलाने की कोशिश करेंगे।

और भी